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  • बिहार में 1100 करोड़ का कोचिंग कारोबार, 5.55 लाख लोग पढ़ाकर कमा रहे रोजी-रोटी

    बिहार में 1100 करोड़ का कोचिंग कारोबार, 5.55 लाख लोग पढ़ाकर कमा रहे रोजी-रोटी

    पटना 
    बिहार में लगभग 1100 करोड़ रुपये का कोचिंग कारोबार है। ट्यूशन और छोटे स्तर पर कोचिंग चलाकर रोजी-रोजगार करने के मामले में बिहार देश में तीसरे पायदान पर है। घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाना हो या एक जगह कुछ बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाने का मामला हो, बिहार में इस तरह का काम करने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख से अधिक है। दिलचस्प यह है कि असंगठित क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाकर जीविकोपार्जन करने वालों में 49 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए निबंधन की सुविधा दे रखी है। 24 अगस्त 2021 से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सभी सेक्टर के कामगारों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर हो रहा है।

    देश में अब तक 54 लाख तीन हजार से अधिक लोगों ने कोचिंग कारोबार से जुड़े होने के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है। इसमें सबसे अधिक उत्तरप्रदेश में 18 लाख 31 हजार तो दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल है जहां छह लाख 71 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। तीसरे पायदान पर रहे बिहार में पांच लाख 55 हजार ने इस क्षेत्र में पंजीकरण कराया है। वहीं चौथे पायदान पर मध्यप्रदेश में दो लाख 41 हजार तो केरल में एक लाख 97 हजार ने पंजीकरण कराया है। देश में कुल पंजीकृत लोगों में 63 फीसदी महिलाएं तो 37 फीसदी पुरुष हैं।

    हर माह औसतन 1100 करोड़ का है कारोबार
    होम ट्यूटर के रूप में ग्रामीण इलाके में प्रति बच्चे ढाई-तीन हजार तो शहरी इलाके में चार से छह हजार रुपए शिक्षकों को मिल जाते हैं। अगर औसतन पांच हजार प्रति बच्चे के हिसाब से शिक्षक फी ले रहे हैं और एक शिक्षक औसतन चार बच्चे को पढ़ा रहे हैं तो उनको हर महीने 20 हजार की आय हो जाती है। इस तरह पांच लाख 55 हजार शिक्षकों के हिसाब से देखें तो छोटे स्तर पर कोचिंग चलाने वालों या होम ट्यूशन के कारोबार में हर महीने 1100 करोड़ से अधिक की आमदनी हो रही है। वैसे यह आमदनी देश-प्रदेश के नामी-गिरामी संस्थानों को छोड़कर है जो संस्थागत तौर पर चल रहे हैं।

    बिहार में इन असंगठित क्षेत्र के होम ट्यूटर या छोटे स्तर के कोचिंग संस्थानों के अलावा बड़े कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा नेटवर्क अलग से खड़ा है। नीट, जेईई, यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले इन बड़े संस्थानों की आय असीमित है। इन संस्थानों की वार्षिक आमदनी हजारों करोड़ में होती है। इनके शिक्षकों को भी आकर्षक तौर पर लाखों में वेतन मिला करता है।

    18 से 40 वर्ष के 90 फीसदी पढ़ाकर कमा रहे
    बिहार में कोचिंग के इस कारोबार में 18 से 40 वर्ष के बीच 90.77 फीसदी लोग हैं। वहीं 40 से 50 वर्ष के बीच 5.30 फीसदी तो 50 से ऊपर के लोगों की संख्या मात्र 3.68 फीसदी है। निबंधित लोगों में 49 फीसदी महिलाएं तो 51 फीसदी पुरुष हैं। पंजीकृत लोगों में सबसे अधिक पटना में 49 हजार 853 लोग कोचिंग कारोबार से जुड़े हुए हैं। जबकि दरभंगा में 24 हजार 682, मधुबनी में 25 हजार 408, मुजफ्फरपुर में 29 हजार 806, समस्तीपुर में 23 हजार 494, सारण में 21 हजार 750, भागलपुर में 19 हजार 608, गयाजी में 23 हजार 853 लोग पढ़ाने का काम कर रहे हैं।पटना 
    बिहार में लगभग 1100 करोड़ रुपये का कोचिंग कारोबार है। ट्यूशन और छोटे स्तर पर कोचिंग चलाकर रोजी-रोजगार करने के मामले में बिहार देश में तीसरे पायदान पर है। घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाना हो या एक जगह कुछ बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाने का मामला हो, बिहार में इस तरह का काम करने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख से अधिक है। दिलचस्प यह है कि असंगठित क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाकर जीविकोपार्जन करने वालों में 49 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए निबंधन की सुविधा दे रखी है। 24 अगस्त 2021 से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सभी सेक्टर के कामगारों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर हो रहा है।

    देश में अब तक 54 लाख तीन हजार से अधिक लोगों ने कोचिंग कारोबार से जुड़े होने के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है। इसमें सबसे अधिक उत्तरप्रदेश में 18 लाख 31 हजार तो दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल है जहां छह लाख 71 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। तीसरे पायदान पर रहे बिहार में पांच लाख 55 हजार ने इस क्षेत्र में पंजीकरण कराया है। वहीं चौथे पायदान पर मध्यप्रदेश में दो लाख 41 हजार तो केरल में एक लाख 97 हजार ने पंजीकरण कराया है। देश में कुल पंजीकृत लोगों में 63 फीसदी महिलाएं तो 37 फीसदी पुरुष हैं।

    हर माह औसतन 1100 करोड़ का है कारोबार
    होम ट्यूटर के रूप में ग्रामीण इलाके में प्रति बच्चे ढाई-तीन हजार तो शहरी इलाके में चार से छह हजार रुपए शिक्षकों को मिल जाते हैं। अगर औसतन पांच हजार प्रति बच्चे के हिसाब से शिक्षक फी ले रहे हैं और एक शिक्षक औसतन चार बच्चे को पढ़ा रहे हैं तो उनको हर महीने 20 हजार की आय हो जाती है। इस तरह पांच लाख 55 हजार शिक्षकों के हिसाब से देखें तो छोटे स्तर पर कोचिंग चलाने वालों या होम ट्यूशन के कारोबार में हर महीने 1100 करोड़ से अधिक की आमदनी हो रही है। वैसे यह आमदनी देश-प्रदेश के नामी-गिरामी संस्थानों को छोड़कर है जो संस्थागत तौर पर चल रहे हैं।

    बिहार में इन असंगठित क्षेत्र के होम ट्यूटर या छोटे स्तर के कोचिंग संस्थानों के अलावा बड़े कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा नेटवर्क अलग से खड़ा है। नीट, जेईई, यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले इन बड़े संस्थानों की आय असीमित है। इन संस्थानों की वार्षिक आमदनी हजारों करोड़ में होती है। इनके शिक्षकों को भी आकर्षक तौर पर लाखों में वेतन मिला करता है।

    18 से 40 वर्ष के 90 फीसदी पढ़ाकर कमा रहे
    बिहार में कोचिंग के इस कारोबार में 18 से 40 वर्ष के बीच 90.77 फीसदी लोग हैं। वहीं 40 से 50 वर्ष के बीच 5.30 फीसदी तो 50 से ऊपर के लोगों की संख्या मात्र 3.68 फीसदी है। निबंधित लोगों में 49 फीसदी महिलाएं तो 51 फीसदी पुरुष हैं। पंजीकृत लोगों में सबसे अधिक पटना में 49 हजार 853 लोग कोचिंग कारोबार से जुड़े हुए हैं। जबकि दरभंगा में 24 हजार 682, मधुबनी में 25 हजार 408, मुजफ्फरपुर में 29 हजार 806, समस्तीपुर में 23 हजार 494, सारण में 21 हजार 750, भागलपुर में 19 हजार 608, गयाजी में 23 हजार 853 लोग पढ़ाने का काम कर रहे हैं।

  • जिंदा जलाई गई मनजीत कौर के मामले में बड़ा खुलासा, प्रेग्नेंसी और लिव-इन एंगल आया सामने

    जिंदा जलाई गई मनजीत कौर के मामले में बड़ा खुलासा, प्रेग्नेंसी और लिव-इन एंगल आया सामने

    चंडीगढ़ 
    अपने लिव-इन पार्टनर और एक अन्य साथी की हैवानियत के बाद 54 दिन अस्पताल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने शनिवार को चंडीगढ़ के अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया है कि मृतका मनजीत कौर 7 सप्ताह की प्रेग्नेंट थीं। इसके अलावा उनका एक सात साल का बेटा है जो कि पूर्व पति के साथ रहता है। मनजीत कौर का अपने पति से तलाक हो गया था और इसके बाद वह एक आरोपी के साथ ही लिव-इन में रहती थीं।

    लिव-इन पार्टनर वाला ऐंगल
    चंडीगढ़ पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है। आरोपियों का नाम शुभी और पिंडा बताया गया है। उनके खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया है। घटना 3 जुलाई की है। दोनों आरोपियों ने मनजीत को एक शराब की दुकान के पास बुलाया था। इसके बाद दोनों ने जबरन मनजीत को कार में बैठाया और मोरिंडा लेकर गए। वहां सुनसान इलाके में उन्होंने मनजीत को शहतूत के पेड़ से बांध दिया और पिटाई की। इसके बाद जिंदा ही आग लगा दी। जब लपटें उठने लगीं तो मनजीत की एक दोस्त ने देखा और उसने ही पास के अस्पताल में भर्ती कराया।

    मोरिंडा के अस्पताल से मनजीत को मैक्स अस्पताल ले जाया गया। कुछ दिनों के बाद उन्हें पीजीआईआ रेफर कर दिया गया। खरड़ स दर थाने के एसएचओ गुरप्रीत सिंह ने बताया कि मनजीत कौर बुरी तरह जल गई थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम अस्पताल पहुंची और मनजीत की मां से बात की थी। मनजीत का परिवार सेक्टर 34 में रहता था। उन्होंने कहा, परिवार के बयान के आधार पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

  • पंजाब के कई जिलों में आज बारिश के आसार, बठिंडा 37.9°C के साथ सबसे गर्म

    पंजाब के कई जिलों में आज बारिश के आसार, बठिंडा 37.9°C के साथ सबसे गर्म

    चंडीगढ़ 

    पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश कम होने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के मुताबिक, 30 अगस्त को पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    वहीं चंडीगढ़ में आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे और एक-दो बार बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। राज्य के अधिकतम तापमान में 0.1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है और यह सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक हो गया है। बठिंडा में सबसे अधिक 37.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मानसून सीजन में अभी तक 32 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है।

    पठानकोट व रोपड़ में बारिश दर्ज
    पिछले तीन दिनों से पंजाब में ज्यादातर जगहों पर बारिश बहुत कम हुई है। इससे तापमान लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को पठानकोट और रोपड़ में 1-1 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि अमृतसर में भी बारिश हुई, लेकिन यह रिकॉर्ड नहीं हो सकी। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान 33.1 से 37.9 डिग्री के बीच दर्ज किया गया।

    मौसम रहेगा उमस भरा
    अमृतसर से मानसून ट्रफ गुजर रही है, जबकि उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इन दोनों मौसमी सिस्टम के असर से वातावरण में नमी बनी हुई है। इससे पंजाब के कुछ हिस्सों में बादल छाने और बारिश के आसार हैं, लेकिन फिलहाल पूरे राज्य में व्यापक बारिश की संभावना नहीं है। पंजाब और चंडीगढ़ में मौसम गर्म, उमस भरा और आंशिक रूप से बादल वाला रहने की संभावना है।

    70 प्रतिशत बिजली खरीद रहा है पंजाब
    पंजाब में गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। दिन में बिजली की मांग 15,071 मेगावाट तक पहुंच रही है। इसमें से पंजाब करीब 4,502 मेगावाट बिजली खुद पैदा कर रहा है, जबकि करीब 10,569 मेगावाट बिजली बाहर से, यानी केंद्र के ग्रिड से ले रहा है। आसान शब्दों में कहे तो राज्य अपनी जरूरत की करीब 30% बिजली खुद बना रहा है, जबकि करीब 70% बिजली बाहर से ले रहा है।

  • अमृतसर एयरपोर्ट पर हंगामा, दुबई जाने वाली फ्लाइट 17 घंटे लेट; यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    अमृतसर 

    श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह स्पाइसजेट की फ्लाइट में करीब 17 घंटे की देरी से यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। दुबई जाने वाले यात्रियों ने एयरलाइन के काउंटर पर हंगामा किया और कर्मचारियों से फ्लाइट की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

    यात्रियों के अनुसार, फ्लाइट को पहले रात 8:40 बजे रवाना होना था, लेकिन बाद में इसका समय बढ़ाकर सुबह 11 बजे कर दिया गया। इसके बाद यात्रियों को फ्लाइट में करीब 17 घंटे की देरी की जानकारी दी गई। लंबे समय तक एयरपोर्ट पर इंतजार करने के कारण यात्रियों में नाराजगी बढ़ गई।यात्रियों का कहना था कि उन्हें देरी के संबंध में समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। 

    कई यात्री बच्चों के साथ एयरपोर्ट पर पहुंचे थे और घंटों इंतजार करना पड़ा। यात्रियों ने आरोप लगाया कि एयरलाइन की ओर से न तो उचित जानकारी दी गई और न ही उनकी समस्याएं सुनने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा।

    रिफंड और वैकल्पिक टिकट की मांग
    यात्रियों ने एयरलाइन से टिकट का रिफंड देने या वैक
    ल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था करने की मांग की। उनका कहना था कि इतनी लंबी देरी के कारण उनकी आगे की यात्रा की योजना प्रभावित हो गई है। यात्रियों ने एयरलाइन से देरी का स्पष्ट कारण बताने और जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की।

    यात्रियों ने डीजीसीए के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक फ्लाइट में देरी होने की स्थिति में यात्रियों को नियमों के अनुसार आवश्यक सुविधाएं और निर्धारित स्थिति में वैकल्पिक यात्रा या रिफंड की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एयरलाइन को यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देने के साथ उनकी परेशानी का समाधान करना चाहिए। 

  • पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए घर खरीदना होगा आसान! 75 लाख तक मिलेगा होम लोन, जानें ब्याज दर

    पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए घर खरीदना होगा आसान! 75 लाख तक मिलेगा होम लोन, जानें ब्याज दर

    चंडीगढ़
    पंजाब सरकार के नियमित कर्मचारियों के लिए अपना घर बनाने या खरीदने का रास्ता आसान हो सकता है। पंजाब स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, चंडीगढ़ ने पंजाब सरकार के नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ बोर्ड, निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और शीर्ष सहकारी संस्थाओं के नियमित कर्मचारियों के लिए विशेष रियायती आवास ऋण योजना शुरू की है। योजना में अधिकतम 75 लाख रुपये तक का ऋण देने का प्रावधान है। प्रभावी ब्याज दर 7.25 प्रतिशत वार्षिक तक रखी गई है।

    सहकारिता विभाग के प्रशासनिक सचिव अजित बालाजी जोशी ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभाग प्रमुखों को पत्र भेजकर योजना की जानकारी पात्र कर्मचारियों तक पहुंचाने और इसका उचित प्रचार करने को कहा है, ताकि अधिक से अधिक कर्मचारी इसका लाभ ले सकें।

    प्लॉट से लेकर मकान और फ्लैट तक के लिए ऋण
    जना का लाभ कर्मचारी प्लाट खरीदने के साथ उस पर मकान बनाने, मकान खरीदने या बनाने तथा स्वीकृत योजनाओं के तहत फ्लैट खरीदने के लिए ले सकेंगे। इसके अलावा दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान से लिए गए पात्र आवास ऋण को भी इस योजना के तहत स्थानांतरित कराया जा सकेगा।

    बैंक की ओर से परियोजना लागत का 85 प्रतिशत तक वित्त उपलब्ध कराया जाएगा। प्लाट खरीदने की स्थिति में प्लॉट की कीमत कुल ऋण की 75 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। शेष राशि निर्माण के लिए इस्तेमाल करनी होगी। ऋण अकेले कर्मचारी के नाम पर या सह-स्वामी के साथ संयुक्त रूप से मंजूर किया जा सकेगा। आवेदक को बैंक का नाममात्र सदस्य बनना होगा।

    30 साल तक चुकाने की सुविधा
    कर्मचारियों को ऋण चुकाने के लिए अधिकतम 30 वर्ष तक की अवधि मिलेगी। हालांकि यह अवधि उधारकर्ता की उम्र 70 वर्ष होने तक ही रहेगी। दोनों में से जो अवधि पहले पूरी होगी, वही लागू होगी।

    वेतन खाते वालों को अतिरिक्त रियायत
    योजना में मूल परिवर्तनीय ब्याज दर 8 प्रतिशत वार्षिक है। आईएचआरएमएस के माध्यम से ऋण की किस्त की वसूली होने पर सेवानिवृत्ति की उम्र तक 0.50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। इसके अलावा वे कर्मचारी जिनका वेतन खाता बैंक में है, उन्हें 0.25 प्रतिशत की अतिरिक्त रियायत दी जाएगी। इस तरह प्रभावी ब्याज दर 7.25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    किस्त सीधे आईएचआरएमएस से कटेगी
    ऋण की किस्तों की वसूली आईएचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों से वेतन से मासिक किस्त काटकर बैंक को भेजने की अपरिवर्तनीय अनुमति ली जाएगी।

    प्रोसेसिंग और समय से पहले भुगतान का शुल्क नहीं
    योजना में प्रोसेसिंग शुल्क, समय से पहले ऋण चुकाने का शुल्क और ऋण बंद करने का शुल्क शून्य रखा गया है। ऋण के लिए मूल संपत्ति दस्तावेज जमा कर पहली समानता वाली बंधक सुरक्षा देनी होगी। बैंक के मौजूदा नियमों के अनुसार फिलहाल न्यूनतम स्वीकार्य सिबिल स्कोर 650 निर्धारित है।

    ऋण लेने के लिए केवाईसी, आय प्रमाण, संपत्ति दस्तावेज, कानूनी राय, मूल्यांकन रिपोर्ट और बैंक द्वारा निर्धारित अन्य दस्तावेज देने होंगे। दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान से ऋण स्थानांतरित कराने के लिए कम से कम एक वर्ष का संतोषजनक रिकॉर्ड वाला मानक आवास ऋण खाता होना जरूरी है।

    योजना की शर्तों का उल्लंघन होने पर ब्याज में दी गई रियायत वापस ली जा सकती है और सामान्य लागू ब्याज दर बहाल हो जाएगी। इच्छुक उधारकर्ता अपनी लागत पर वैकल्पिक जीवन बीमा की सुविधा भी ले सकेंगे।

  • हरियाणा में जमीन इंतकाल होगा ऑटोमैटिक, 11वें दिन जमाबंदी में दर्ज होगी एंट्री

    हरियाणा में जमीन इंतकाल होगा ऑटोमैटिक, 11वें दिन जमाबंदी में दर्ज होगी एंट्री

    पंचकूला
    हरियाणा में जमीन इंतकाल के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने वाले लोगों को जल्द बड़ी राहत मिलने जा रही है। राज्य सरकार राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू करने जा रही है।

    नई व्यवस्था में पंजीकरण के बाद इंतकाल की प्रक्रिया को अलग-अलग अधिकारियों के स्तर पर तय समय-सीमा में पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर मामला अपने आप अगले अधिकारी के लॉगिन में पहुंचता जाएगा और अंततः 11वें दिन इंतकाल स्वतः जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा।

    उपायुक्त सतपाल शर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है।

    तकनीक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निगरानी योग्य बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण के बाद इंतकाल पहले चार दिन तक पटवारी के लॉगिन में रहेगा। इस अवधि में पटवारी को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

    यदि पांचवें दिन तक पटवारी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है तो इंतकाल स्वतः कानूनगो के लॉगिन में चला जाएगा। कानूनगो को कार्रवाई के लिए दो दिन का समय मिलेगा। सातवें दिन तक मामला आगे बढ़कर सीआरओ के लागिन में पहुंच जाएगा।

    सीआरओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए चार दिन दिए जाएंगे। यदि निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो 11वें दिन इंतकाल स्वतः जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा। इस व्यवस्था से किसी एक अधिकारी के स्तर पर फाइल को लंबे समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी और प्रत्येक स्तर पर कार्रवाई की समय-सीमा तय रहेगी।

    लंबित इंतकाल की ऑनलाइन शिकायत, 10 दिन में कार्रवाई
    सरकार लंबित इंतकाल से संबंधित शिकायतों के लिए विशेष ऑनलाइन पेज/पोर्टल भी शुरू करेगी। नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कराने के साथ संबंधित दस्तावेज भी आनलाइन अपलोड कर सकेंगे।

    उपायुक्त ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 10 दिनों के भीतर कार्रवाई करनी होगी। यदि नियमों के अनुसार इंतकाल किया जा सकता है तो नागरिक को उसकी प्रति उपलब्ध करवाई जाएगी।

    वहीं, यदि इंतकाल किसी कारण से नहीं किया जा सकता तो संबंधित सीआरओ को स्पीकिंग आर्डर जारी करना होगा। इस आदेश में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि इंतकाल क्यों नहीं किया जा सकता, किस नियम या कारण के आधार पर मामला स्वीकार नहीं हुआ और जरूरत पड़ने पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

    जमाबंदी और रजिस्ट्री भी डिजिटल करने पर जोर
    सरकार अधिक से अधिक राजस्व सेवाएं घर बैठे अथवा नजदीकी सीएससी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है। जमाबंदी, इंतकाल, डिजिटल हस्ताक्षरित रजिस्ट्री और अन्य राजस्व रिकार्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जा रहा है।

    इसके अलावा जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने, छोटी-मोटी त्रुटियों के सुधार की प्रक्रिया आसान बनाने और तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

  • बिहार में फेल छात्रों को सरकार देगी मुफ्त कोचिंग, इसी साल से दोबारा परीक्षा की तैयारी

    बिहार में फेल छात्रों को सरकार देगी मुफ्त कोचिंग, इसी साल से दोबारा परीक्षा की तैयारी

    पटना
     मैट्रिक व इंटर परीक्षा में फेल विद्यार्थियों को इसी वर्ष से बिहार सरकार मुफ्त कोचिंग कराएगी। उन्हें फिर से परीक्षा में बैठने को तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम ऐसे विद्यार्थियों को मुफ्त में मार्गदर्शन करेगी। 

    अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए प्रमंडलवार आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। जिस विषय में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो गए उस विषय में उन्हें विशेष रूप से कोचिंग मिलेगी।

    शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे एक-एक विद्यार्थियों पर उन्हें पिछली परीक्षा में आए नंबर के हिसाब से नजर रहेगी। अभिभावकों को कहा जाएगा कि वे बच्चों को इस व्यवस्था से जोड़कर परीक्षा के लि्ए फिर से तैयार करें।

    फेल हुए विद्यार्थियों के लिए एक ही स्थान पर कोचिंग
    शिक्षा विभाग से अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए उनके विद्यालय के करीब ही कोचिंग की व्यवस्था करा रहा है। मैट्रिक व इंटर की परीक्षा में फेल हुए विद्यार्थियों के लिए एक ही केंद्र पर इस तरह की व्यवस्था होगी। इसके अलावा ऑनलाइन व्यवस्था के तहत भी उन्हें आने वाली परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा।

    सभी विषयों के अंक पर विद्यार्थियों के लिए बनेगी व्यवस्था
    शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित विद्यार्थी को कौन विषय में कितने अंक आए और जिस विषय में वह फेल हुआ उसके अंक का आकलन कर उसके कोचिंग की व्यवस्था तय होगी। उस विषय में संबंधित विद्यार्थी पर अधिक मेहनत की जाएगी जिसमे वह अपेक्षाकृत कमजोर है।

    शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराया जाएगा
    कोचिंग में विशेषज्ञों द्वारा संबंधित विद्यार्थियों को शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराया जाए इस व्यवस्था को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। कोचिंग के क्रम में छोटे-छोटे टेस्ट भी होंगे।

    इसके माध्यम से यह आकलन होगा कि विद्यार्थी परीक्षा के लिए किस स्तर तक तैयार है। विभाग के स्थानीय अधिकारियों द्वारा यह फीड बैक भी लिया जाएगा कि कोचिंग का संचालन नियमित रूप से हो रहा या नहीं

     

  • दिल्ली के बुजुर्गों के लिए ‘वयो आनंद’ योजना, 60+ को मिलेंगी योग, मनोरंजन और स्वास्थ्य सुविधाएं

    दिल्ली के बुजुर्गों के लिए ‘वयो आनंद’ योजना, 60+ को मिलेंगी योग, मनोरंजन और स्वास्थ्य सुविधाएं

    नई दिल्ली
    रेखा गुप्ता सरकार राजधानी के वरिष्ठ नागरिकों के लिए वयो आनंद योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत ऐसे मनोरंजन केंद्र विकसित किए जाएंगे जहां 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गो को मेलजोल, मनोरंजन, योग और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की सुविधा मिलेगी। इन केंद्रों में कैरम, लुडो जैसे इनडोर गेम के अलावा समाचार पत्र, पत्रिकाएं, किताबें, टीवी और कंप्यूटर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर है। उनके सम्मान, स्वास्थ्य, सक्रिय जीवन और सामाजिक जुड़ाव को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    'वयो आनंद' योजना का उद्देश्य क्या है?
    उन्होंने कहा कि 'वयो आनंद' योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उनके आसपास ही ऐसा सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे अपने हमउम्र लोगों के साथ समय बिता सकें और अकेलेपन से दूर सक्रिय सामाजिक जीवन जी सकें। इसे चलाने वाले केंद्रों के लिए पात्र संगठनों को हर साल 2.40 लाख की सुविधा भी दी जाएगी।

    मनोरंजन केंद्र सप्ताह में 5 दिन और रोजाना सुबह 7 बजे से रात 8 बजे के बीच खोला जाएगा। केंद्र में लिणार बैठने के अलावा शौचालय सुविधा के लिए ग्राउंड फ्लोर वाले केंद्र को प्राथमिकता मिलेगी। बहुमंजिला इमारत होने पर लिफ्ट की सुविधा जरूरी होगी। चिकित्सा शिविर और उपचार किट रखने का भी प्रावधान है।

    200 लोग जरूरी
    योजना के तहत मनोरंजन केंद्र में कम से कम 200 ऐसे सदस्य होना जरूरी होगा, जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है। मनोरंजन केंद्र चलाने वाले संगठनों को साल में दो बार पैसा मिलेगा। महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा। नजदीकी पुलिस थाने और अस्पतालों से संपर्क रखा जाएगा।

     

  • प्याज-लहसुन-अदरक के बढ़े दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, होटल-ढाबों पर भी असर

    प्याज-लहसुन-अदरक के बढ़े दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, होटल-ढाबों पर भी असर

     करनाल
    रसोई में सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाले प्याज, लहसुन और अदरक के दाम बढ़ने से घर के बजट के साथ ही होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड का जायका भी महंगा पड़ने लगा है।

    प्याज का थोक भाव इस समय करीब 45 से 50 रुपये किलो है, जबकि खुदरा में यह करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है। करीब 10-15 दिन पहले खुदरा प्याज 40 रुपये किलो के आसपास था।

    अदरक थोक में करीब 100 रुपये और खुदरा में 120 से 140 रुपये किलो तक पहुंच गया है। लहसुन का थोक भाव 160 से 200 रुपये और खुदरा भाव 200 से 240 रुपये किलो तक है। करनाल सब्जी मंडी के थोक विक्रेता विवेक के अनुसार लहसुन में पिछले दिनों के मुकाबले स्पष्ट तेजी आई है।

    तड़के का खर्च बढ़ा, रसोई में कटौती
    प्याज-लहसुन के बिना अधिकांश सब्जियों, दाल और ग्रेवी का स्वाद अधूरा माना जाता है। ऐसे में इनके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू रसोई पर पड़ रहा है। गृहणियां अब खरीदारी में मात्रा का हिसाब लगाने लगी हैं। पहले जहां एक साथ अधिक मात्रा में प्याज और लहसुन खरीदा जाता था, वहीं अब जरूरत के हिसाब से खरीदारी की जा रही है।

    गृहणी संतोष ने बताया कि रोजमर्रा की सब्जियों के साथ मसालों और अन्य सामान के दाम पहले ही बजट बिगाड़ रहे हैं। अब प्याज और लहसुन भी महंगे होने से महीने का हिसाब लगाना मुश्किल हो रहा है। गृहणी कनिका चोपड़ा ने कहा कि स्वाद से समझौता करना आसान नहीं है, इसलिए मात्रा कम करके काम चलाना पड़ रहा है।

    ढाबे-रेस्तरां में लागत बढ़ी, स्ट्रीट फूड पर भी असर
    प्याज, लहसुन और अदरक की खपत घरों के अलावा होटल, रेस्तरां और ढाबों में भी बड़े पैमाने पर होती है। ग्रेवी, छोले, चाप, मंचूरियन, चाइनीज व्यंजन और विभिन्न स्ट्रीट फूड में इनकी रोजाना खपत होती है।

    कीमत बढ़ने से संचालकों की लागत बढ़ गई है। रेस्तरां संचालक बिल्लु ने बताया कि उनके सामने दो विकल्प हैं। या तो बढ़ी लागत खुद वहन करें या फिर खाने की कीमत बढ़ाएं। ग्राहक पहले ही कीमत को लेकर संवेदनशील हैं, इसलिए सीधे दाम बढ़ाना आसान नहीं है। ऐसे में बढ़ी लागत का असर मुनाफे पर पड़ रहा है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

    बर्गर, चाट, मोमोज, छोले-कुलचे, नूडल्स और अन्य खाद्य पदार्थों में प्याज का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। कुछ दुकानदार मात्रा में कटौती कर रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहकों को पहले की तुलना में कम प्याज दे रहे हैं।

    नतीजा यह कि प्याज-लहसुन-अदरक की तेजी ने सिर्फ रसोई का बजट नहीं बढ़ाया, बल्कि शहर के खानपान कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है। अगर तेजी आगे बनी रही तो इसका असर खाने की प्लेट की कीमत और ग्राहकों की जेब दोनों पर दिखाई दे सकता है।

     

  • वेटिकन सिटी में पोप लियो XIV से मिले राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास

    वेटिकन सिटी में पोप लियो XIV से मिले राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास

    जयपुर,
    मुख्य सचिव एवं इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव साइंसेज (आईआईएएस) के अध्यक्ष वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को वेटिकन सिटी में पोप लियो XIV से मुलाकात की। इस अवसर पर आईआईएएस के 520 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पोप लियो XIV के ‘स्पेशल ब्लेसिंग’ में भाग लिया। पोप ने राजस्थान और भारत के विकास एवं प्रगति के लिए आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं। श्रीनिवास ने इस मुलाकात को अत्यंत गौरवपूर्ण अनुभव बताते हुए मानवता की सेवा के पोप के वैश्विक प्रयास ‘मैग्निफिका ह्यूमैनिटास’ में आईआईएएस की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।

    पोप लियो XIV ने आईआईएएस के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक को आमजन की सेवा का माध्यम बनाने के लिए इसका मानवीकरण आवश्यक है। उन्होंने मानव कल्याण को शासन और तकनीकी विकास के केंद्र में रखने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव परिवार की भलाई को निजी हितों के लिए बलिदान नहीं किया जाना चाहिए।

    पोप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित होती डिजिटल तकनीकों के दौर में मानव हितों की रक्षा तथा तकनीक के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई जिस गति से विकसित हो रही है, उसमें यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तकनीक मानवता की सेवा करे और मनुष्य अपने ही आविष्कारों का शिकार न बने। उन्होंने मानव जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मशीनों को सौंपे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए मानव बुद्धिमत्ता की अपरिहार्यता को रेखांकित किया।

    उन्होंने डिजिटल तकनीकों के मानवीय उपयोग के लिए प्रभावी नैतिक ढांचा विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, आईआईएएस को इस दिशा में शोध जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सार्वजनिक प्रशासन में डिजिटल तकनीकों का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि वे जीवन और शांति की सेवा करें। उन्होंने आईआईएएस के प्रयासों की सराहना करते हुए सदस्यों को इस महत्वपूर्ण दायित्व को दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाने के लिए शुभकामनाएं दीं।

    उल्लेखनीय है कि श्रीनिवास जून 2025 में आईआईएएस के पहले भारतीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उन्होंने रोम की सैपिएंजा यूनिवर्सिटी में आयोजित 51वें यूरोपियन ग्रुप फॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (ईजीपीए) वार्षिक सम्मेलन में आईआईएएस अध्यक्षीय संबोधन दिया। सम्मेलन के अंतिम दिन वेटिकन सिटी में पोप से मुलाकात के साथ उनकी रोम यात्रा का एक विशेष और यादगार अध्याय जुड़ा।