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  • अलवर निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ हावी, वार्ड आरक्षण ने बदले नेताओं के चुनावी समीकरण

    अलवर निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ हावी, वार्ड आरक्षण ने बदले नेताओं के चुनावी समीकरण

    अलवर
    नगर निगम चुनाव में नामांकन के साथ ही सियासी तस्वीर तेजी से साफ होने लगी है। वार्ड आरक्षण के कारण बदले समीकरण के चलते कई पूर्व और निवर्तमान पार्षदों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। किसी ने पत्नी, बहन, पुत्रवधू और किसी ने नजदीकी रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ पार्टी और प्रत्याशियों की ताकत ही नहीं, बल्कि परिवार की राजनीतिक पकड़ और रिश्तों का समीकरण भी खासा नजर आ रहा है। कुछ पूर्व और निवर्तमान पार्षदों ने खुद के साथ-साथ अपनी पत्नी, बहन और अन्य परिजनों को चुनावी मैदान में उतारकर सियासी रणनीति को नया रंग दिया है।

    हालांकि इसका एक कारण यह भी है कि अलवर में मेयर सीट अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। ऐसे में परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारा जा रहा है। किसी ने कांग्रेस, तो किसी ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की है। हालांकि अभी राजनीतिक दलों ने टिकट फाइनल नहीं किए हैं।

    ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर
    इस बार निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर बनने जा रही है। कहीं पति-पत्नी आमने-सामने की बजाय अलग-अलग वार्डों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, तो कहीं वार्ड आरक्षण ने नेताओं को पत्नी या बहन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परिवार के नाम और राजनीतिक अनुभव का यह दांव मतदाताओं के बीच कितना असर छोड़ता है और किन परिवारों की सियासी पकड़ चुनाव परिणाम में कायम रहती है।

    जानें किसने किसको चुनाव में उतारा
    पार्षद अजय पूनिया ने वार्ड 49 से नामांकन दाखिल किया है। अपनी बहन बिमला देवी को वार्ड 17 से चुनावी मैदान में उतारा है। अजय पूनिया तीन बार निर्दलीय व एक बार भाजपा के टिकट से पार्षद बने हैं। इस बार भी बहन-भाई ने भाजपा से टिकट मांगा है।

    कांग्रेस के शहर ब्लॉक अध्यक्ष रमन सैनी ने अपनी पत्नी और निवर्तमान पार्षद पिंकी सैनी का वार्ड 27 से कांग्रेस के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। पिंकी के सामने अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती होगी।

    पूर्व पार्षद धर्मेंद्र मीणा ने पत्नी शकुंतला मीणा को चुनावी मैदान में उतारा है। शकुंतला मीणा वार्ड 25 से चुनाव लड़ रही हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। इस बार उन्होंने कांग्रेस से टिकट की मांग की है।

    पूर्व पार्षद सीताराम चौधरी और निवर्तमान पार्षद सुमन चौधरी भी अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। दोनों पति-पत्नी हैं। सीताराम चौधरी ने वार्ड 28, जबकि सुमन चौधरी ने वार्ड 23 से नामांकन कराया है। दोनों ने ही भाजपा से टिकट मांगा है। निवर्तमान पार्षद एवं भाजपा के श्री शिवाजी मंडल अध्यक्ष सतीश यादव का वार्ड 61 इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गया। उन्होंने पत्नी सुनीता यादव का भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।

    अलवर
    नगर निगम चुनाव में नामांकन के साथ ही सियासी तस्वीर तेजी से साफ होने लगी है। वार्ड आरक्षण के कारण बदले समीकरण के चलते कई पूर्व और निवर्तमान पार्षदों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। किसी ने पत्नी, बहन, पुत्रवधू और किसी ने नजदीकी रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ पार्टी और प्रत्याशियों की ताकत ही नहीं, बल्कि परिवार की राजनीतिक पकड़ और रिश्तों का समीकरण भी खासा नजर आ रहा है। कुछ पूर्व और निवर्तमान पार्षदों ने खुद के साथ-साथ अपनी पत्नी, बहन और अन्य परिजनों को चुनावी मैदान में उतारकर सियासी रणनीति को नया रंग दिया है।

    हालांकि इसका एक कारण यह भी है कि अलवर में मेयर सीट अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। ऐसे में परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारा जा रहा है। किसी ने कांग्रेस, तो किसी ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की है। हालांकि अभी राजनीतिक दलों ने टिकट फाइनल नहीं किए हैं।

    ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर
    इस बार निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर बनने जा रही है। कहीं पति-पत्नी आमने-सामने की बजाय अलग-अलग वार्डों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, तो कहीं वार्ड आरक्षण ने नेताओं को पत्नी या बहन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परिवार के नाम और राजनीतिक अनुभव का यह दांव मतदाताओं के बीच कितना असर छोड़ता है और किन परिवारों की सियासी पकड़ चुनाव परिणाम में कायम रहती है।

    जानें किसने किसको चुनाव में उतारा
    पार्षद अजय पूनिया ने वार्ड 49 से नामांकन दाखिल किया है। अपनी बहन बिमला देवी को वार्ड 17 से चुनावी मैदान में उतारा है। अजय पूनिया तीन बार निर्दलीय व एक बार भाजपा के टिकट से पार्षद बने हैं। इस बार भी बहन-भाई ने भाजपा से टिकट मांगा है।

    कांग्रेस के शहर ब्लॉक अध्यक्ष रमन सैनी ने अपनी पत्नी और निवर्तमान पार्षद पिंकी सैनी का वार्ड 27 से कांग्रेस के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। पिंकी के सामने अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती होगी।

    पूर्व पार्षद धर्मेंद्र मीणा ने पत्नी शकुंतला मीणा को चुनावी मैदान में उतारा है। शकुंतला मीणा वार्ड 25 से चुनाव लड़ रही हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। इस बार उन्होंने कांग्रेस से टिकट की मांग की है।

    पूर्व पार्षद सीताराम चौधरी और निवर्तमान पार्षद सुमन चौधरी भी अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। दोनों पति-पत्नी हैं। सीताराम चौधरी ने वार्ड 28, जबकि सुमन चौधरी ने वार्ड 23 से नामांकन कराया है। दोनों ने ही भाजपा से टिकट मांगा है। निवर्तमान पार्षद एवं भाजपा के श्री शिवाजी मंडल अध्यक्ष सतीश यादव का वार्ड 61 इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गया। उन्होंने पत्नी सुनीता यादव का भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।

  • NEET-PG 2026 परीक्षा में बिजली गुल, जयपुर के सेंटर पर 4 बार सिस्टम बंद; अभ्यर्थियों ने किया हंगामा

    NEET-PG 2026 परीक्षा में बिजली गुल, जयपुर के सेंटर पर 4 बार सिस्टम बंद; अभ्यर्थियों ने किया हंगामा

    जयपुर 
    राजस्थान की राजधानी जयपुर में NEET-PG 2026 की परीक्षा के दौरान सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iDZ) सेंटर पर अचानक बिजली चली गई। परीक्षा चल रही थी, तभी लाइट चली जाने से सेंटर पर अफरा-तफरी मच गई। परीक्षा कंप्यूटर पर हो रही थी, इसलिए बिजली जाते ही परीक्षा का काम भी रुक गया। इससे वहां परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी परेशान हो गए और उनकी नाराजगी बढ़ने लगी। कुछ ही देर में अभ्यर्थियों ने सेंटर पर हंगामा शुरू कर दिया।

    एक घंटे में दो-तीन बार आई दिक्कतों से भड़के अभ्यर्थी
    अभ्यर्थियों का कहना है कि पेपर शुरू होने के एक घंटे के अंदर ही तीन से चार बार उनको दिक्कतों की सामना करना पड़ा। एक अभ्यर्थी ने बताया कि पहली बार लाइट गई तो समझ आता है। कुछ देर बाद सिस्टम दोबारा चालू हुआ। इसके बाद उन्होंने करीब दो सवाल ही किए थे कि फिर से बिजली चली गई। काफी देर इंतजार करने के बाद सिस्टम को दोबारा रीस्टार्ट किया गया, लेकिन वह फिर बंद हो गया। ऐसा उन्होंने कई बार किया। अभ्यर्थी के अनुसार, करीब एक घंटे में चार बार सिस्टम बंद हुआ। चौथी बार भी सिस्टम बंद होने के बाद अभ्यर्थियों को कोई साफ जवाब नहीं मिल रहा था।

    अभ्यर्थी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “क्या हम ये डिजर्व करते हैं? 5 साल MBBS करने के बाद एक साल PG की तैयारी की और ये देखने के लिए?”

    जानकारी के अनुसार एग्जाम सेंटर के दो ब्लॉकों में 2500 से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा देने के लिए आए थे।

    जयपुर में 8 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी
    NEET-PG 2026 के लिए जयपुर में बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित की जा रही है। शहर में इसके लिए कुल 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर कुल 8,370 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। परीक्षा का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तय किया गया था। ऐसे में सीतापुरा सेंटर पर परीक्षा के बीच आई बाधा ने वहां मौजूद परीक्षार्थियों की परेशानी बढ़ा दी।

    पावर कट के बाद अब सीतापुरा सेंटर पर परीक्षा व्यवस्था को फिर से सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौके पर पैदा हुई स्थिति को संभालने की कोशिश जारी है। पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद है।

  • परिवार पहचान पत्र में आय की गड़बड़ी सुधारेगी नायब सैनी सरकार, चलेगा विशेष अभियान

    परिवार पहचान पत्र में आय की गड़बड़ी सुधारेगी नायब सैनी सरकार, चलेगा विशेष अभियान

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

  • चंडीगढ़ मेयर और सत्ता पक्ष BJP के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

    चंडीगढ़ मेयर और सत्ता पक्ष BJP के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

    चंडीगढ़.

    बिना चर्चा 227 करोड़ के एजेंडे पास होने, सीवर पाइप लाइन बिछाने में बगैर काम भुगतान समेत कई आरोपों को लेकर कांग्रेस ने सत्ता पक्ष भाजपा, मेयर और अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोला है। चंडीगढ़ नगर निगम में घोटाले, करप्शन और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर रविवार को सेक्टर-27/C की मार्केट में प्रदर्शन किया। उनके हाथों में पोस्टर थे, जिनके जरिय खरीद-फरोख्त से मेयर बनने के आरोप लगाए गए। वहीं, यह भी लिखा था कि चंदा चोर, घोटाले करने वाले और नगर निगम को लूटने वाले भाजपा के दफ्तर कमलम् में मिलेंगे। उन्हाेंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्ट्रीट वेंडर्स को शिफ्ट करने की कार्यवाही में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अतिक्रमण हटाने में भी मनमानी की जा रही है। रसूखदारों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति या दिखावा किया जा रहा है।

  • खिलाड़ियों को हर उचित अवसर उपलब्ध करा रही बिहार सरकार : मंत्रीश्रवण कुमार

    खिलाड़ियों को हर उचित अवसर उपलब्ध करा रही बिहार सरकार : मंत्रीश्रवण कुमार

    खिलाड़ियों को हर उचित अवसर उपलब्ध करा रही बिहार सरकार : मंत्रीश्रवण कुमार

    – ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने श्रेष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को किया सम्मानित  

    पटना
    बिहार सरकार हर खेल के खिलाड़ियों को हर तरह से उचित अवसर उपलब्ध करा रही है। इसी का नतीजा है कि आज हर खेल विद्याओं में खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वेट लिफ्टिंग जैसे खेलों में भी बिहार के खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। ये बातें ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कही। वे सोमवार को नालंदा जिला के बिहारशरीफ में नाला रोड में मौजूद एक सामुदायिक भवन में आयोजित वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित कर रहे थे।
           इस प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि इस चैंपियनशिप का आयोजन बिहारशरीफ जैसे शहर में होना बड़ी बात है। राजधानी से इतर तरह के आयोजनों से ग्रामीण इलाकों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में काफी मदद मिलती है। इस मौके पर माननीय मंत्री बतौर मुख्य अतिथि पुरस्कार भी वितरण किया। इस मौके पर स्थानीय सांसद कौशलेंद्र कुमार भी मौजूद थे। इस चैंपियनशिप का आयोजन कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट भूपेन्द्र प्रताप सिंह की देख-रेख में विश्वजित सिंह और धनंज्य कुमार ने किया। इसमें 100 पुरुष एवं 10 महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान जदयू के वरिष्ट नेता उपेन्द्र सिंह, अमित कुमार, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय शंकर प्रसाद एवं योग गुरु रामजी यादव समेत अन्य उपस्थित थे।
         इस चैंपियनशिप में पुरुष एवं महिला विजेता इस प्रकार रहे। पुरुष वर्ग के विजेता आदित्य कुमार रहे। ये 59 किलो वजन वर्ग में शामिल हुए और इन्होंने 200 किलो वजन उठाकर जीत हासिल की। ये नालंदा में नूरसराय के निवासी हैं। इसके अलावा 83 किलो वजन श्रेणी में रौशन कुमार ने जीत दर्ज की। इन्होंने 137.5 किलो वजन उठाया। ये बिहारशरीफ के रहने वाले हैं। वहीं, महिला वर्ग श्रेणी की दोनों वर्गों में नूरसराय के गोडीहा ग्राम निवासी दिव्यानी सिंह ने जीत हासिल की। मंत्री महोदय ने सभी विजेताओं को ट्रॉफी, सर्टिफिकेट और 5-5 हजार रुपये कैश देकर सम्मानित किया।

  • सत्ता बदली, समीकरण बदले… नहीं बदला श्रवण कुमार का कद!

    सत्ता बदली, समीकरण बदले… नहीं बदला श्रवण कुमार का कद!

    सत्ता बदली, समीकरण बदले… नहीं बदला श्रवण कुमार का कद!

    नीतीश के भरोसेमंद सिपहसालार से सम्राट कैबिनेट तक… बिहार के ग्रामीण विकास और सूचना प्रसारण मंत्री श्रवण कुमार 

    तीन दशक से नालंदा की सियासत पर पकड़, 1995 से लगातार विधानसभा में मौजूदगी; शांत स्वभाव, संगठन में मजबूत पकड़ और नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शुमार

    पटना
     बिहार की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जो सत्ता के बदलते समीकरणों के बीच भी अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखते हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार उन्हीं नेताओं में शामिल हैं। पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में श्रवण कुमार ने एक बार फिर मंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि बिहार की सियासत में उनका कद और संगठन में उनकी उपयोगिता आज भी बरकरार है।

    68 वर्षीय श्रवण कुमार की पहचान सिर्फ एक मंत्री या विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि जेडीयू के उन वरिष्ठ नेताओं में होती है, जिन्होंने पार्टी के शुरुआती दौर से लेकर मौजूदा राजनीतिक दौर तक नेतृत्व के साथ कदम से कदम मिलाकर सफर तय किया है। खास बात यह है कि वह 1995 से लगातार नालंदा विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। तीन दशक से अधिक लंबे इस राजनीतिक सफर ने उन्हें बिहार की राजनीति के अनुभवी चेहरों की कतार में खड़ा कर दिया है।

    नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेताओं में शामिल

    श्रवण कुमार को पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। नालंदा से आने वाले श्रवण कुमार का राजनीतिक रिश्ता सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पार्टी संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

    हाल ही में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू विधायक दल का नेता भी बनाया। यह जिम्मेदारी इस बात का संकेत मानी गई कि पार्टी के भीतर उनके अनुभव, संतुलित कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा कायम है।

    श्रवण कुमार की खासियत यह भी मानी जाती है कि वे तेज-तर्रार बयानबाजी के बजाय शांत और संयमित राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। लंबे राजनीतिक जीवन के बावजूद उनका नाम बड़े विवादों से दूर रहा है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने में सक्षम हैं।

    जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    श्रवण कुमार का राजनीति से जुड़ाव छात्र जीवन से ही हो गया था। वह जेपी आंदोलन से प्रभावित होकर सक्रिय राजनीति में आए। इसके बाद 1994 में जब नीतीश कुमार और उनके साथियों ने समता पार्टी का गठन किया, तब से श्रवण कुमार उनके साथ खड़े रहे।

    1995 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक पड़ाव बना। उन्होंने समता पार्टी के टिकट पर नालंदा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस चुनाव में समता पार्टी के केवल सात उम्मीदवार विधानसभा पहुंच सके थे और श्रवण कुमार उनमें से एक थे।

    इसके बाद नालंदा उनकी राजनीतिक कर्मभूमि बन गया।

    1995 से लगातार जीत का सिलसिला

    1995 के बाद 2000 में भी श्रवण कुमार ने समता पार्टी के टिकट पर नालंदा से जीत दर्ज की। बाद में समता पार्टी का जनता दल यूनाइटेड में विलय हुआ और श्रवण कुमार जेडीयू के साथ लगातार आगे बढ़ते रहे।

    इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने नालंदा सीट पर अपनी पकड़ कायम रखी। 1995 से लगातार विधानसभा पहुंचना उनके राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ का बड़ा प्रमाण माना जाता है।

    बिहार की राजनीति में जहां कई बड़े नेताओं के राजनीतिक गढ़ समय के साथ कमजोर हुए, वहीं श्रवण कुमार ने नालंदा में अपनी पकड़ बरकरार रखी।

    सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां

    श्रवण कुमार के राजनीतिक अनुभव का एक बड़ा हिस्सा सरकार में अलग-अलग महत्वपूर्ण विभागों को संभालने से भी जुड़ा रहा है।

    नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में वह ग्रामीण विकास मंत्री, परिवहन मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह बिहार विधानसभा में जेडीयू के मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभा चुके हैं।

    विभिन्न विभागों में काम करने का यह लंबा अनुभव उन्हें सिर्फ राजनीतिक तौर पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी अनुभवी बनाता है।

    अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में उनकी वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें कौन सा विभाग सौंपा जाएगा? उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।

    नालंदा से निकलकर बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा

    श्रवण कुमार की राजनीति को समझने के लिए नालंदा को समझना भी जरूरी है। यह वही क्षेत्र है जिसे लंबे समय से नीतीश कुमार की राजनीतिक जमीन माना जाता रहा है। ऐसे में नालंदा से लगातार चुनाव जीतते हुए श्रवण कुमार का पार्टी में मजबूत होना उनके राजनीतिक कौशल और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाता है।

    उन्होंने स्थानीय राजनीति से लेकर सरकार और विधानसभा तक कई स्तरों पर काम किया है। यही वजह है कि जेडीयू के भीतर उनकी भूमिका सिर्फ एक विधायक तक सीमित नहीं रही।

    वह पार्टी के उन नेताओं में हैं, जिनके पास जमीनी राजनीति, संगठन और सरकार—तीनों का लंबा अनुभव है।

    शांत चेहरा, लेकिन संगठन में मजबूत पकड़

    बिहार की राजनीति अक्सर तीखे बयानों, राजनीतिक हमलों और बदलते गठबंधनों के लिए जानी जाती है। इसके बीच श्रवण कुमार की पहचान अपेक्षाकृत शांत और संयमित नेता की रही है।

    वह सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात रखते समय शब्दों का चयन सावधानी से करने के लिए जाने जाते हैं। यही उनकी राजनीतिक शैली की सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है।

    तीन दशक से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में बने रहना और लगातार विधानसभा चुनाव जीतना बताता है कि उनकी राजनीतिक ताकत केवल किसी एक सत्ता समीकरण पर निर्भर नहीं रही। संगठन में उनकी स्वीकार्यता और क्षेत्र में उनकी पकड़ ने उन्हें लगातार प्रासंगिक बनाए रखा।

    सम्राट चौधरी कैबिनेट में नई भूमिका

    अब एक बार फिर मंत्री पद की शपथ लेने के साथ श्रवण कुमार के राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

    सम्राट चौधरी सरकार में उनकी मौजूदगी को जेडीयू और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी के पुराने दौर से लेकर मौजूदा सत्ता समीकरण तक का अनुभव रखने वाले श्रवण कुमार के पास सरकार और संगठन दोनों की कार्यप्रणाली की गहरी समझ है।

    उनके समर्थकों में मंत्री बनने को लेकर खासा उत्साह है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि लंबे अनुभव और साफ-सुथरी छवि वाले श्रवण कुमार को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से पार्टी और सरकार दोनों को लाभ होगा।

    तीन दशक की सियासत, लगातार जीत और नेतृत्व का भरोसा

    श्रवण कुमार की कहानी बिहार की उस राजनीति की कहानी भी है, जहां लंबे समय तक संगठन के साथ बने रहना, क्षेत्र में पकड़ कायम रखना और बदलते राजनीतिक दौर में अपनी उपयोगिता साबित करना आसान नहीं होता।

    1995 में समता पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले श्रवण कुमार आज तीन दशक से अधिक समय बाद भी सत्ता और संगठन के केंद्र में हैं।

    नालंदा से लगातार चुनावी जीत, नीतीश कुमार का भरोसा, सरकार में अहम विभागों का अनुभव और जेडीयू संगठन में मजबूत पकड़—इन तमाम वजहों से श्रवण कुमार आज बिहार की राजनीति के उन अनुभवी चेहरों में शामिल हैं, जिनकी भूमिका सिर्फ एक मंत्री तक सीमित नहीं मानी जाती।

    अब सम्राट चौधरी सरकार में उनकी नई जिम्मेदारी क्या होगी और आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता की राजनीति में उनका प्रभाव किस रूप में दिखाई देगा—इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • सरकार के 100 दिनों के कार्यों का हो अधिक प्रचार-प्रसार : मंत्री श्रवण कुमार

    सरकार के 100 दिनों के कार्यों का हो अधिक प्रचार-प्रसार : मंत्री श्रवण कुमार

    सरकार के 100 दिनों के कार्यों का हो अधिक प्रचार-प्रसार : मंत्री श्रवण कुमार

    आईपीआरडी के माननीय मंत्री श्रवण कुमार ने विभाग के कामकाज की समीक्षा की

    पटना
    ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) के मंत्री एवं जदयू विधायक दल के नेता माननीय मंत्री श्री श्रवण कुमार ने विभाग के कामकाज की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के 100 दिनों में किए गए कार्यों और शुभारंभ हुई जनहित योजनाओं का अधिकतम प्रचार किया जाए, ताकि कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचे। समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि समाचार पत्रों, टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार, विभागों तथा जिला स्तर पर हुए सकारात्मक कार्यों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने नकारात्मक खबरों के त्वरित आधिकारिक खंडन पर भी जोर दिया, ताकि गलत जानकारी या अफवाहें न फैले।
          श्री कुमार ने विभाग को मीडिया संबंधी कार्यों को और सुचारू व मजबूत बनाने का निर्देश दिया। सोशल मीडिया में बढ़ती रुचि को देखते हुए उन्होंने सरकार और आमजन के बीच विश्वास व सकारात्मक रवैया अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यों का फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम आदि प्लेटफॉर्म्स पर उत्तम गुणवत्ता के साथ नियमित प्रचार हो और इसकी नियमित समीक्षा भी की जाए। कार्यालय में कार्य समन्वय और पारदर्शिता के साथ किया जाए। बैठक में विभाग के सचिव श्री नवीन कुमार, निदेशक अनिल कुमार, संयुक्त सचिव राजीव कुमार सिंह सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • नालंदा में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने 119 लाभुकों को दिया योजनाओं का लाभ

    नालंदा में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने 119 लाभुकों को दिया योजनाओं का लाभ

    नालंदा में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने 119 लाभुकों को दिया योजनाओं का लाभ
    – 5 लाख रुपये से अधिक का सौंपा चेक
    पटना

    ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री एवं जदयू विधायक दल के नेता माननीय श्री श्रवण कुमार ने शुक्रवार को नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड में 119 लाभुकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया। इस मौके पर उन्होंने पांच लाख रुपये से अधिक राशि के चेक लाभुकों को सौंपे।

    माननीय मंत्री ने शौचालय निर्माण के लिए जीविका दीदियों को आर्थिक सहयोग दिया। कुल 29 जीविका दीदियों को 10-10 हजार रुपये की सहयोग राशि का चेक प्रदान किया है। मुख्यमंत्री परिवार लाभ योजना के अंतर्गत दो लाभुकों को 20-20 हजार रुपये का चेक सौंपा। इसके अलावा 54 लाभुकों को बंदोबस्ती पर्चा का वितरण किया, जिससे उन्हें भूमि संबंधी अधिकार मिल सकेंगे।
    अग्निकांड से फसल क्षति झेलने वाले किसानों को भी माननीय मंत्री ने सहायता राशि देकर राहत पहुंचाई है। कुल 34 लाभुकों को फसल क्षति के मुआवजे के रूप में 1,90,524 रुपये का चेक माननीय मंत्री ने वितरित किया।

  • बिहार में गंगा समेत 70 वाटर टूरिज्म हब बनेंगे, 10 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

    बिहार में गंगा समेत 70 वाटर टूरिज्म हब बनेंगे, 10 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

    पटना.

    राज्य की झील, तालाब, डैम और नदियां पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बनेंगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य में वाटर टूरिज्म को बड़े स्तर पर विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार किया है।

    इसके तहत बिहार के 276 जल स्रोतों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 70 से अधिक जल स्रोतों पर पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इनमें पटना की गंगा नदी के साथ बेगूसराय की कांवर झील, गया की फल्गु नदी, नालंदा के घोड़ाकटोरा, नवादा के ककोलत समेत कई जल स्रोतों को विकसित किया जाएगा।

    नद‍ियों में भी होग बोट‍िंग और वाटर स्‍पोर्ट्स की सुविधाएं –
    गंडक, कोसी, सोन और पुनपुन जैसी नदियों में भी बोटिंग और वाटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए जल स्रोतों पर फ्लोटिंग जेटी बनाई जाएगी। पर्यटक स्पीड बोट और क्रूज की सवारी कर सकेंगे। वहीं, प्रकृति प्रेमियों के लिए बर्ड वाचिंग और रिवर सफारी जैसे अनुभव भी उपलब्ध होंगे। विभाग की योजना के अनुसार हर महीने करीब 12 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य है। पीपीपी मोड पर तालाबों और डैम को विकसित किया जाएगा।

    शिकारा से जेट स्की तक, पसंद के हिसाब से चुन सकेंगे बोट
    वाटर टूरिज्म को हर वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक बनाने की तैयारी है। यहां स्पीड बोट, जेट स्की, शिकारा, हाउस बोट, पैडल बोट, मोटर बोट, कयाक, कैनो, राफ्ट और रोइंग बोट जैसी करीब 10 तरह की बोट उपलब्ध कराने की योजना है। विभाग के अनुसार, इससे दस हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी मिलेगा। बोट चलाने वालों, लाइफगार्ड, टूर गाइड, सुरक्षा कर्मियों से लेकर होटल, रिसार्ट, रेस्तरां और स्थानीय परिवहन से जुड़े लोगों को काम के अवसर मिलेंगे। छोटे दुकानदारों, स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प कारोबार को भी नया बाजार मिलेगा।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा में एक दिन की देरी बनी जीवनरक्षक, CA और 20 दोस्तों की जान बची

    कैलाश मानसरोवर यात्रा में एक दिन की देरी बनी जीवनरक्षक, CA और 20 दोस्तों की जान बची

    चंडीगढ़.

    नेपाल में आई बाढ़ से अब तक 724 लोगों की मौत हो चुकी है और 275 से अधिक भारतीय लापता हैं। 108 भारतीयों को बचाया जा चुका है और चीन में मौजूद करीब 900 भारतीय सुरक्षित हैं। इसी बीच चंडीगढ़ के लिए भी राहत की खबर आई है।

    भगवान शिव के धाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए चंडीगढ़ के सेक्टर-19 निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीएम) रचित गोयल और उनके 20 दोस्त सुरक्षित हैं। उनके लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गई, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। यात्रा के दौरान उनके एक साथी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। ऊंचाई पर सांस लेने में तकलीफ होने के कारण वह आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था। साथी की हालत को देखते हुए दल ने कैलाश पर्वत की चढ़ाई एक दिन के लिए टाल दी। बाद में उन्हें पता चला कि जिस दिन उन्होंने चढ़ाई स्थगित की थी, उसी दिन नेपाल में बड़ा हादसा हुआ था।

    रचित गोयल के मुताबिक, अगर उस दिन उनका दल तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गया होता तो परिस्थितियां बेहद गंभीर हो सकती थीं। रचित बताते हैं कि उन्हें आज भी वह पल याद है। जिस दिन नेपाल में घटना हुई, उसी दौरान उनके दल के 12 सदस्य कैलाश पर्वत की ओर चढ़ाई कर रहे थे, जबकि वे साथी की तबीयत खराब होने के कारण एक दिन पीछे रह गए थे। सांस लेने में परेशानी के कारण उनका साथी चलने में भी असमर्थ था। रचित गोयल कहते हैं कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा थी कि उनके साथी की तबीयत उस समय खराब हुई और उन्हें एक दिन रुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस एक दिन की देरी ने उन्हें मौत के बेहद करीब जाने से बचा लिया। आज भी जब वे उस यात्रा को याद करते हैं तो उनके मन में यही भाव आता है कि भोलेनाथ ने ही उन्हें उस संकट से बचाया।