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  • मार्च 2027 से देशभर में IST अनिवार्य, सरकार ने जारी किए नए टाइमकीपिंग नियम

    मार्च 2027 से देशभर में IST अनिवार्य, सरकार ने जारी किए नए टाइमकीपिंग नियम

     नई दिल्ली
    अगले साल मार्च से, भारत में सभी संस्थाओं को कानूनी, कमर्शियल, डिजिटल और प्रशासनिक कामों के लिए इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का इस्तेमाल करना होगा। सरकार ने इस संबंध में लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 की ऐलान किया। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत घोषित ये नियम गजट में पब्लिश होने के 180 दिन बाद लागू होंगे, जिससे मार्च 2027 के आसपास से IST अनिवार्य हो जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

    मार्च 2027 से IST जरूरी
    सरकार की ओर से जारी इस नोटिफिकेशन के तहत, जब तक खास तौर पर छूट न दी गई हो, सभी कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक डॉक्यूमेंट्स के लिए भारतीय मानक समय (IST) अनिवार्य टाइम रेफरेंस होगा। यह कमर्शियल गतिविधियों, ट्रांसपोर्ट, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कानूनी कॉन्ट्रैक्ट्स और फाइनेंशियल ऑपरेशन्स में भी IST को स्टैंडर्ड टाइम रेफरेंस बनाता है।

    'वन नेशन, वन टाइम' का फैसला क्यों
    संस्थाओं को आधिकारिक कामों के लिए IST के अलावा किसी अन्य टाइम रेफरेंस का इस्तेमाल, डिस्प्ले या रिकॉर्ड करने की इजाजत नहीं होगी, सिवाय उन मामलों के जहां विदेशी टाइम जोन स्पष्ट रूप से बताए गए हों। या फिर जहां वैज्ञानिक रिसर्च, नेविगेशन या खगोल विज्ञान के लिए वैकल्पिक टाइम सोर्स की इजाजत हो। ये नियम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर माइक्रोसेकंड-लेवल की टाइमिंग सटीकता पर निर्भर करता है।

    इस नोटिफिकेशन से क्या बदल जाएगा?

    • पेमेंट सिस्टम, स्टॉक एक्सचेंज, टेलीकॉम नेटवर्क, 5G सर्विस, डिजिटल नेविगेशन, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर को ट्रांजैक्शन प्रमाणित करने में अहम रोल
    • ऐसे ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाने और नेटवर्क की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सिंक्रोनाइज्ड घड़ियों की जरूरत होती है।
    • यह नोटिफिकेशन टाइम सिंक्रोनाइजेशन, ट्रेसेबिलिटी और साइबर सिक्योरिटी के लिए एक देशव्यापी सिस्टम बनाता है और सटीक समय को महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मानता है।
    • नियमों के तहत, CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) भारत के प्राइमरी टाइम स्केल, UTC(NPLI) को बनाए रखना जारी रखेगी
    • इससे IST लिया जाता है, जबकि रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड्स लेबोरेटरीज (RRSLs), ISRO का NavIC और अन्य अधिकृत टाइमिंग सोर्स आधिकारिक समय का प्रसार करेंगे।
    • इन नियमों की एक और बड़ी विशेषता साइबर रेजिलिएंस पर ध्यान देना है।
    • संगठनों को उचित टाइम-सिंक्रोनाइजेशन सिस्टम लगाने होंगे, नेटवर्क को स्पूफिंग, जैमिंग और साइबर हमलों से बचाना होगा, कई अधिकृत टाइमिंग सोर्स को इंटीग्रेट करना होगा
    • बिना रुकावट के काम सुनिश्चित करने के लिए आकस्मिक व्यवस्था (कंटिंजेंसी मैकेनिज्म) बनाए रखनी होगी, जिसमें जरूरत पड़ने पर एटॉमिक घड़ियां भी शामिल हैं।

     

  • बिहार में कैंसर, शुगर और BP की जांच अब घर बैठे, मुजफ्फरपुर में 1 सितंबर से सुविधा

    बिहार में कैंसर, शुगर और BP की जांच अब घर बैठे, मुजफ्फरपुर में 1 सितंबर से सुविधा

    मुजफ्फरपुर.

    अब बीमारी की जांच के लिए लोगों को अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक सितंबर से प्रदेश में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान शुरू होने जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर कैंसर, शुगर और बीपी समेत कई गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग करेंगी।

    अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के डीएम, सिविल सर्जन और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य गैर संचारी रोगों की शुरुआती स्तर पर पहचान करना है। कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का समय पर पता चलने से इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि शुरुआती जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं और असमय होने वाली मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।

    पांच तरह की बीमारियों पर फोकस
    अभियान में उच्च रक्तचाप और मधुमेह के साथ मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख के कैंसर की स्क्रीनिंग की जाएगी। हृदय रोग, फैटी लिवर और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की भी जांच की जाएगी। संदिग्ध मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।

    महंगी जांच भी मुफ्त
    चिन्हित मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और उपचार की सुविधा निश्शुल्क मिलेगी। ब्लड शुगर, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, 24 घंटे का यूरिन प्रोटीन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर और बायोप्सी जैसी जांच भी कराई जाएगी। विटामिन-डी3 और बी12 की जांच की सुविधा भी अभियान में शामिल है।

    आशा कार्यकर्ता करेंगी घरों का सर्वे
    अभियान में आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की एएनएम के साथ घर-घर जाएंगी। परिवार के सभी सदस्यों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाकर पारिवारिक फोल्डर तैयार किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान गैर संचारी रोगों से जुड़ी जानकारी मोबाइल आधारित एनसीडी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।

    संदिग्ध मरीजों की होगी निगरानी
    स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए गए मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में स्वास्थ्यकर्मी सहयोग करेंगे। उपचार करा रहे मरीजों की लाइन लिस्ट और फालोअप पंजी तैयार की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं को गृह भ्रमण से जुटाए गए आंकड़े रियल टाइम में एनसीडी पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी दी गई है।

  • हरियाणा में OBC छात्रवृत्ति के आंकड़ों में बड़ा अंतर, 52 हजार आवेदन मंजूर फिर भी छात्रवार भुगतान शून्य

    हरियाणा में OBC छात्रवृत्ति के आंकड़ों में बड़ा अंतर, 52 हजार आवेदन मंजूर फिर भी छात्रवार भुगतान शून्य

    चंडीगढ़
     हरियाणा में ओबीसी विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर सरकार के विधानसभा में दिए आंकड़ों में ऐसा अंतर सामने आया है, जिसका स्पष्ट मिलान जवाब में नहीं मिलता।

    वर्ष 2024-25 में ओबीसी विद्यार्थियों के 63,893 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 52,023 आवेदन स्वीकृत किए गए। इसके बावजूद छात्रवार विवरण में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य दर्ज है।

    वहीं, इसी वर्ष के वित्तीय विवरण में ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 776.04 लाख रुपये का बजट स्वीकृत होने और उसमें से 3.44 करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छात्रवार रिकार्ड में किसी विद्यार्थी को भुगतान नहीं हुआ, तो 3.44 करोड़ रुपये किस अवधि या किन विद्यार्थियों के लिए जारी किए गए।

    आदित्य सुरजेवाला ने पूछे सवाल
    यह मामला कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के विधानसभा सवाल के जवाब में सामने आया। उन्होंने 2019 से अब तक एससी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन, स्वीकृति, वास्तविक भुगतान और बजट वितरण का वर्षवार ब्योरा मांगा था।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 60,696 ओबीसी विद्यार्थियों ने आवेदन किया। इनमें 50,910 आवेदन स्वीकृत हुए, लेकिन केवल 17,937 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। 2022-23 में 39,745 आवेदन स्वीकृत हुए और 38,483 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। हालांकि 3,8 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के मुकाबले केवल 7 करोड़ 87 लाख रुपये ही वितरित किए गए।

    हरियाणा सरकार ने छात्रवृत्ति भुगतान में देरी या कमी के लिए निष्क्रिय आधार, सत्यापन में दिक्कत, अधूरे दस्तावेज और बजट की अनुउपलब्धता जैसे कारण बताए हैं। 2025-26 में 38,333 आवेदन आए, 29,784 मंजूर हुए और 25,847 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया।

    बीसीए के 75,621 विद्यार्थियों को वजीफा
    नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कक्षा 10वीं के 38,364 और कक्षा 12वीं के 37,257 बीसीए विद्यार्थियों, यानी कुल 75,621 विद्यार्थियों को मासिक वजीफा दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से अलग है। जवाब में यह भी कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग में बीसी-बी विद्यार्थियों के लिए कोई छात्रवृत्ति योजना संचालित नहीं है।

    वहीं, ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के मामले में 2019-20 से 2026-27 तक लगातार आठ वित्तीय वर्षों में न बजट स्वीकृत होने और न राशि वितरित होने का रिकॉर्ड सरकार ने दिया है।

     

  • चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ Gen Z बुलंद करेंगे आवाज, 20 सितंबर को होगा बड़ा अभियान

    चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ Gen Z बुलंद करेंगे आवाज, 20 सितंबर को होगा बड़ा अभियान

    चंडीगढ़.

    पंजाब के साथ-साथ अब हरियाणा और चंडीगढ़ में भी नशा एक चुनौती बन चुका है। युवाओं को नशे के खिलाफ एकजुट करने और समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से 20 सितंबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में “Gen Z Against Drugs” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में शहर के विभिन्न कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम के संयोजक संजीव राणा ने कहा कि नशा आज केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की युवा शक्ति और भविष्य के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। नशे की गिरफ्त में आने वाला युवा अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। इसलिए अब समय आ गया है कि Gen Z स्वयं आगे आए और नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक अभियान का नेतृत्व करे। उन्होंने कहा कि Gen Z को अक्सर केवल सोशल मीडिया, ट्रेंड और विरोध-प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन 20 सितंबर का कार्यक्रम यह संदेश देगा कि नई पीढ़ी समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी पूरी गंभीरता से समझती है। हजारों युवा एक मंच से नशे के खिलाफ आवाज उठाकर यह संकल्प लेंगे कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहेंगे और दूसरे युवाओं को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।

    संजीव राणा ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल युवाओं का नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता और परिवार का कार्यक्रम है जो अपने बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त देखना चाहता है। उन्होंने अभिभावकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें, गलत संगत और नशे से दूर रहें, तो उन्हें भी इस अभियान में आगे आना होगा। बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार, पुलिस या शिक्षण संस्थानों की नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

    संजीव राणा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। इस शक्ति को नशे की गिरफ्त में नहीं जाने दिया जा सकता। आओ, हम सब मिलकर अपने बच्चों और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए आगे आएं। जागरूक और संगठित युवा ही नशे के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार बन सकते हैं। 20 सितंबर को सेक्टर-17 प्लाजा से “नशे को ना, जिंदगी को हां” के संदेश के साथ नशामुक्त युवा और मजबूत भारत का संकल्प लिया जाएगा।

  • बिहार में कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र और मुफ्त स्वास्थ्य जांच अब होगी अनिवार्य

    बिहार में कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र और मुफ्त स्वास्थ्य जांच अब होगी अनिवार्य

     पटना
    राज्य के कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में काम करने वाले कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र अब अनिवार्य होगा। हर साल नियोक्ता द्वारा अपने खर्च पर कामगारों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी।

    प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा नियमावली-2026 के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटे, विश्राम, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं से जुड़े कई नए नियम प्रभावी किए हैं।

    इसकी जांच के लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की टीम कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में निरीक्षण करेगी।

    नियुक्ति पत्र का प्रविधान
    राज्य में नई श्रम संहिता की गाइडलाइन में नियुक्ति पत्र का प्रविधान कम से कम 10 कर्मचारियों वाले कारखानों, प्रतिष्ठानों और दुकानों पर ही लागू होगा।

    घरेलू और कृषि क्षेत्र के कामगार इसके दायरे में नहीं होंगे। महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति से सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों में काम करने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा का रखा जाएगा ख्याल
    विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक प्रभावी प्रविधानों के आधार पर कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों का तैयार डाटाबैंक भी तैयार किया जाएगा। महिला कामगारों के लिए रात्रिकालीन सेवा में आवश्यक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य कर दिया गया है।

    सुरक्षा व्यवस्था के बीच महिला कामगार रात्रिकालीन पाली में भी काम कर सकेंगी। अब नियोक्ताओं को अलग-अलग पंजीकरण कराने की जगह एकल पंजीकरण की सुविधा मिलेगी। श्रमिकों के काम के घंटे और विश्राम की अवधि भी निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।

    भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी अलग से विशेष व्यवस्था किए गए हैं। नियोक्ता को कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा। इसकी भी विभागीय स्तर पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है।

  • बिहार में दुकानों-फैक्ट्रियों के कर्मचारियों के लिए अपॉइंटमेंट लेटर और फ्री हेल्थ चेकअप जरूरी

    बिहार में दुकानों-फैक्ट्रियों के कर्मचारियों के लिए अपॉइंटमेंट लेटर और फ्री हेल्थ चेकअप जरूरी

    पटना.

    राज्य के कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में काम करने वाले कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र अब अनिवार्य होगा। हर साल नियोक्ता द्वारा अपने खर्च पर कामगारों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा नियमावली-2026 के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटे, विश्राम, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं से जुड़े नए नियम प्रभावी किए हैं। इसकी जांच के लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की टीम कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में निरीक्षण करेगी।

    नियुक्ति पत्र का प्रविधान
    राज्य में नई श्रम संहिता की गाइडलाइन में नियुक्ति पत्र का प्रविधान कम से कम 10 कर्मचारियों वाले कारखानों, प्रतिष्ठानों और दुकानों पर ही लागू होगा। घरेलू और कृषि क्षेत्र के कामगार इसके दायरे में नहीं होंगे। महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति से सभी प्रतिष्ठानों में काम करने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा का रखा जाएगा ख्याल
    विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक प्रभावी प्रविधानों के आधार पर कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों का तैयार डाटाबैंक भी तैयार किया जाएगा। महिला कामगारों के लिए रात्रिकालीन सेवा में आवश्यक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य कर दिया गया है। महिला कामगार रात्रिकालीन पाली में भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच काम कर सकेंगी। अब नियोक्ताओं को अलग-अलग पंजीकरण कराने की जगह एकल पंजीकरण की सुविधा मिलेगी। श्रमिकों के काम के घंटे और विश्राम की अवधि भी निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी अलग से विशेष व्यवस्था किए गए हैं। नियोक्ता को कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा। इसकी भी विभागीय स्तर पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है।

  • जेपीएससी गड़बड़ी और जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामलों में 2 सितंबर को होगी सुनवाई

    जेपीएससी गड़बड़ी और जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामलों में 2 सितंबर को होगी सुनवाई

    रांची
    झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीआईडी और एनआईए की विशेष अदालतों में शनिवार को कई हाई-प्रोफाइल मामलों में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। 

    जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी, जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड से जुड़ी याचिकाओं पर अदालती आदेश सामने आए हैं।

    रोशन केरकेट्टा व अन्य की जमानत पर सुनवाई 2 सितंबर को
    सीआईडी कोर्ट में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा गड़बड़ी मामले में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास करने के आरोपी रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और एजेंट उमाकांत उरांव ने एक साथ जमानत याचिका दाखिल की है। 

    एपीपी के अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 2 सितंबर निर्धारित की है। तीनों को 5 अगस्त को सीआईडी और लखनऊ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था।

    वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी लालू कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई होगी।

    टीडीपीएल कर्मी अभय तिवारी की याचिका पर होगी सुनवाई
    जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा-2024 पेपर लीक मामले में टीडीपीएल के पूर्व अधिकारी अभय कुमार तिवारी की जमानत याचिका पर सीआईडी कोर्ट में 2 सितंबर को सुनवाई होगी। 

    अभय तिवारी 20 अगस्त से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि उनकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी भी जेल में हैं। 18 दिसंबर 2024 को रातू थाना में दर्ज इस केस की जांच 1 जनवरी 2025 से सीआईडी कर रही है।

    पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड: एनआईए कोर्ट ने खारिज की जमानत
    एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपित प्रफुल्ल कुमार महतो और बलराम साहू उर्फ डेविड की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। 

    एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने बहस पूरी होने के बाद फैसला सुनाया। उल्लेखनीय है कि 9 जुलाई 2008 को बुंडू स्थित एसएस हाईस्कूल में कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

    एनआईए के अनुसार, प्रफुल्ल पर साजिश में शामिल होने, हथियार उपलब्ध कराने और नक्सलियों को पनाह देने का आरोप है।

     

  • PU Election में नेता, खिलाड़ी और गायकों ने मांगे वोट, अब इंटरनेट मीडिया पर तेज हुई कैंपेनिंग

    PU Election में नेता, खिलाड़ी और गायकों ने मांगे वोट, अब इंटरनेट मीडिया पर तेज हुई कैंपेनिंग

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) छात्रसंघ चुनाव के लिए शनिवार को प्रचार का आखिरी दिन रहा। कैंपस में कई दिनों से चल रहा चुनावी शोर थम गया, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर कैंपेनिंग जारी है। अब सोमवार को मतदान होगा।

    मतदान के बाद आने वाले परिणाम ही तय करेंगे कि इस बार पीयू छात्रसंघ की कमान किस संगठन और किस उम्मीदवार के हाथ में जाएगी। क्योंकि यह चुनाव पंजाब विधानसभा चुनाव की जमीन तय करने में अहम माना जाता है। इसलिए पंजाब-हरियाणा के नेताओं समेत इंटरनेशनल खिलाड़ियों और मशहूर गायकों ने भी अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा। हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा और पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर पीयू में पहुंचे। मशहूर हरियाणवी गायक मासूम शर्मा, गजेंद्र फोगाट और 2012 लंदन ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले इंटरनेशनल खिलाड़ी योगेश्वर दत्त इंटरनेट मीडिया के जरिये कैंपेनिंग में जुटे हैं।

    मतदान प्रतिशत बढ़ाना संगठनों के लिए बड़ी चुनौती
    इस बार 16,448 छात्र मतदान के लिए पात्र हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 16,124 थी। पिछले चुनाव में करीब 59 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाना सभी छात्र संगठनों के लिए बड़ी चुनौती है। रक्षाबंधन के कारण घर गए छात्रों की वापसी और रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को होने वाले मतदान के बीच यह देखना अहम होगा कि कितने छात्र समय पर कैंपस पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। इस बार मतदान के अगले दिन छुट्टी भी नहीं है।

    140 सुरक्षाकर्मी और 450 पुलिस जवान संभालेंगे मोर्चा
    चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कैंपस में 140 विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों के साथ 450 चंडीगढ़ पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। संवेदनशील स्थानों पर कैमरों से निगरानी की जाएगी और अतिरिक्त सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। कैंपस में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच की जा रही है।

  • पर्यावरण की रक्षा करना हमारा सर्वोच्च कर्तव्य : मंत्री श्रवण कुमार

    पर्यावरण की रक्षा करना हमारा सर्वोच्च कर्तव्य : मंत्री श्रवण कुमार

    पर्यावरण की रक्षा करना हमारा सर्वोच्च कर्तव्य : मंत्री श्रवण कुमार
     
    ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री  श्रवण कुमार ने पौधा संरक्षण का लिया संकल्प

    बिहारशरीफ में महोगनी के पौधे को बांधी राखी

    पटना
    ग्रामीण विकास विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री एवं जदयू विधायक दल के नेता माननीय मंत्री श्री श्रवण कुमार ने कहा कि जिस तरह से बहन-भाई की रक्षा की कामना करती है। वैसे ही हमें पेड़-पौधों की रक्षा का संकल्प लेना होगा। यही असली रक्षाबंधन है। 
          नालंदा जिला के बिहारशरीफ के कारगिल पार्क में शुक्रवार को महोगनी के पौधे को रक्षा सूत्र बांधकर माननीय मंत्री ने इसके संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण ही जीवन है, एक पेड़ एक जिंदगी है। यह हमें ऑक्सीजन, छाया, फल देता है। इसकी रक्षा करना हमारा धर्म है। हरित बिहार की सोच हम सभी को रखनी चाहिए। पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्होंने प्रण लिया कि जब तक वह पौधा एक विशाल पेड़ नहीं बन जाता,तब तक उसकी पूरी देखभाल करेंगे। 

    पेड़ युक्त बिहार निर्माण का आग्रह
    मंत्री ने रक्षाबंधन के विशेष अवसर पर भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ प्रकृति से भी अपना रिश्ता जोड़ने का आग्रह किया। कहा कि एक पौधा लगाएं और उसे भाई की तरह पालें। आज समाज को प्लास्टिक मुक्त और नशा मुक्त समाज के साथ-साथ पेड़ मुक्त नहीं, पेड़ युक्त बिहार बनाना है। कहा कि इस पहल का उद्देश्य समाज और आम जनता को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है ताकि लोग पेड़ों की कटाई रोककर हरियाली को बढ़ावा। जलवायु परिवर्तन को रोकना बहुत जरूरी है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हमें मां, पिता, बच्चों के जन्मदिन पर एक-एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसका संरक्षण भी करना चाहिए।
    राज्य का हरित आवरण बढ़कर 19 प्रतिशत हुआ
    मंत्री श्री कुमार ने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने जब बिहार की बागडोर संभाली थी तब यहां हरियाली मात्र 7 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है। हमें अपने हरियाली परत को देश की औसत परत 33 प्रतिशत के बराबर पहुंचाना है। इसमें सभी बिहारवासियों का सहयोग बहुत जरूरी है। इस अवसर पर प्रदेश सचिव गुलरेज अंसारी, प्रखंड अध्यक्ष धनंजय प्र कुशवाहा, जिला प्रवक्ता डॉ धनंजय कुमार, देव मुन्ना मांझी, ध्रुव प्रसाद, प्रो आनंद वर्मा, संजय प्रसाद कुशवाहा, पुरुषोत्तम कुमार समेत कई वन विभाग के अधिकारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

  • अलवर निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ हावी, वार्ड आरक्षण ने बदले नेताओं के चुनावी समीकरण

    अलवर निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ हावी, वार्ड आरक्षण ने बदले नेताओं के चुनावी समीकरण

    अलवर
    नगर निगम चुनाव में नामांकन के साथ ही सियासी तस्वीर तेजी से साफ होने लगी है। वार्ड आरक्षण के कारण बदले समीकरण के चलते कई पूर्व और निवर्तमान पार्षदों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। किसी ने पत्नी, बहन, पुत्रवधू और किसी ने नजदीकी रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ पार्टी और प्रत्याशियों की ताकत ही नहीं, बल्कि परिवार की राजनीतिक पकड़ और रिश्तों का समीकरण भी खासा नजर आ रहा है। कुछ पूर्व और निवर्तमान पार्षदों ने खुद के साथ-साथ अपनी पत्नी, बहन और अन्य परिजनों को चुनावी मैदान में उतारकर सियासी रणनीति को नया रंग दिया है।

    हालांकि इसका एक कारण यह भी है कि अलवर में मेयर सीट अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। ऐसे में परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारा जा रहा है। किसी ने कांग्रेस, तो किसी ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की है। हालांकि अभी राजनीतिक दलों ने टिकट फाइनल नहीं किए हैं।

    ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर
    इस बार निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर बनने जा रही है। कहीं पति-पत्नी आमने-सामने की बजाय अलग-अलग वार्डों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, तो कहीं वार्ड आरक्षण ने नेताओं को पत्नी या बहन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परिवार के नाम और राजनीतिक अनुभव का यह दांव मतदाताओं के बीच कितना असर छोड़ता है और किन परिवारों की सियासी पकड़ चुनाव परिणाम में कायम रहती है।

    जानें किसने किसको चुनाव में उतारा
    पार्षद अजय पूनिया ने वार्ड 49 से नामांकन दाखिल किया है। अपनी बहन बिमला देवी को वार्ड 17 से चुनावी मैदान में उतारा है। अजय पूनिया तीन बार निर्दलीय व एक बार भाजपा के टिकट से पार्षद बने हैं। इस बार भी बहन-भाई ने भाजपा से टिकट मांगा है।

    कांग्रेस के शहर ब्लॉक अध्यक्ष रमन सैनी ने अपनी पत्नी और निवर्तमान पार्षद पिंकी सैनी का वार्ड 27 से कांग्रेस के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। पिंकी के सामने अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती होगी।

    पूर्व पार्षद धर्मेंद्र मीणा ने पत्नी शकुंतला मीणा को चुनावी मैदान में उतारा है। शकुंतला मीणा वार्ड 25 से चुनाव लड़ रही हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। इस बार उन्होंने कांग्रेस से टिकट की मांग की है।

    पूर्व पार्षद सीताराम चौधरी और निवर्तमान पार्षद सुमन चौधरी भी अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। दोनों पति-पत्नी हैं। सीताराम चौधरी ने वार्ड 28, जबकि सुमन चौधरी ने वार्ड 23 से नामांकन कराया है। दोनों ने ही भाजपा से टिकट मांगा है। निवर्तमान पार्षद एवं भाजपा के श्री शिवाजी मंडल अध्यक्ष सतीश यादव का वार्ड 61 इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गया। उन्होंने पत्नी सुनीता यादव का भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।

    अलवर
    नगर निगम चुनाव में नामांकन के साथ ही सियासी तस्वीर तेजी से साफ होने लगी है। वार्ड आरक्षण के कारण बदले समीकरण के चलते कई पूर्व और निवर्तमान पार्षदों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। किसी ने पत्नी, बहन, पुत्रवधू और किसी ने नजदीकी रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ पार्टी और प्रत्याशियों की ताकत ही नहीं, बल्कि परिवार की राजनीतिक पकड़ और रिश्तों का समीकरण भी खासा नजर आ रहा है। कुछ पूर्व और निवर्तमान पार्षदों ने खुद के साथ-साथ अपनी पत्नी, बहन और अन्य परिजनों को चुनावी मैदान में उतारकर सियासी रणनीति को नया रंग दिया है।

    हालांकि इसका एक कारण यह भी है कि अलवर में मेयर सीट अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। ऐसे में परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारा जा रहा है। किसी ने कांग्रेस, तो किसी ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की है। हालांकि अभी राजनीतिक दलों ने टिकट फाइनल नहीं किए हैं।

    ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर
    इस बार निकाय चुनाव में ‘परिवार की सियासत’ भी बड़ा चुनावी फैक्टर बनने जा रही है। कहीं पति-पत्नी आमने-सामने की बजाय अलग-अलग वार्डों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, तो कहीं वार्ड आरक्षण ने नेताओं को पत्नी या बहन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परिवार के नाम और राजनीतिक अनुभव का यह दांव मतदाताओं के बीच कितना असर छोड़ता है और किन परिवारों की सियासी पकड़ चुनाव परिणाम में कायम रहती है।

    जानें किसने किसको चुनाव में उतारा
    पार्षद अजय पूनिया ने वार्ड 49 से नामांकन दाखिल किया है। अपनी बहन बिमला देवी को वार्ड 17 से चुनावी मैदान में उतारा है। अजय पूनिया तीन बार निर्दलीय व एक बार भाजपा के टिकट से पार्षद बने हैं। इस बार भी बहन-भाई ने भाजपा से टिकट मांगा है।

    कांग्रेस के शहर ब्लॉक अध्यक्ष रमन सैनी ने अपनी पत्नी और निवर्तमान पार्षद पिंकी सैनी का वार्ड 27 से कांग्रेस के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। पिंकी के सामने अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती होगी।

    पूर्व पार्षद धर्मेंद्र मीणा ने पत्नी शकुंतला मीणा को चुनावी मैदान में उतारा है। शकुंतला मीणा वार्ड 25 से चुनाव लड़ रही हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। इस बार उन्होंने कांग्रेस से टिकट की मांग की है।

    पूर्व पार्षद सीताराम चौधरी और निवर्तमान पार्षद सुमन चौधरी भी अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। दोनों पति-पत्नी हैं। सीताराम चौधरी ने वार्ड 28, जबकि सुमन चौधरी ने वार्ड 23 से नामांकन कराया है। दोनों ने ही भाजपा से टिकट मांगा है। निवर्तमान पार्षद एवं भाजपा के श्री शिवाजी मंडल अध्यक्ष सतीश यादव का वार्ड 61 इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गया। उन्होंने पत्नी सुनीता यादव का भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।