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  • बिहार में 3,700 करोड़ से बनेगा 336 किमी लंबा बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, 13 जिलों को मिलेगा फायदा

    बिहार में 3,700 करोड़ से बनेगा 336 किमी लंबा बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, 13 जिलों को मिलेगा फायदा

    पटना
    राज्य कैबिनेट ने हाल ही में बक्सर से भागलपुर के बीच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है। परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

    करीब 3,700 करोड़ का 336 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों से होकर गुजरेगा, लेकिन पटना इससे सीधे नहीं जुड़ेगा।

    यह पूरी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, हालांकि कई स्थानों पर इसे पहले से बनी सड़कों से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    इन 13 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका होते हुए भागलपुर के बाहरी क्षेत्र तक पहुंचेगा।

    बक्सर तक पहले से सड़क की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद ग्रीनफील्ड एलायनमेंट के माध्यम से सड़क भोजपुर पहुंचेगी और वहां से अरवल की ओर जाएगी।

    अरवल से जहानाबाद होते हुए गया, फिर नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका के रास्ते भागलपुर तक इसका विस्तार होगा।

    जिस एलायनमेंट पर यह एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है, वहां अभी तक कई क्षेत्रों के बीच निर्बाध सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी। एक्सप्रेसवे के निर्माण से इन क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा।

    पटना से एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता जहानाबाद
    पटना से इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए जहानाबाद सबसे नजदीकी कनेक्टिंग प्वाइंट होगा। पटना और जहानाबाद के बीच पहले से फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध है। इसी वजह से जहानाबाद में इस एक्सप्रेसवे को एनएच से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    जहानाबाद के रास्ते एक्सप्रेसवे पर पहुंचने के बाद गया जाना भी आसान होगा। इसके आगे गया से नालंदा, नवादा और शेखपुरा समेत अन्य जिलों के लिए नई सड़क कनेक्टिविटी विकसित होगी।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है। इससे बिहार के 13 जिलों को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से उत्तर प्रदेश और आगे दिल्ली की ओर बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद बिहार के इन जिलों से दिल्ली की यात्रा अपेक्षाकृत आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय आवागमन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पूरी तरह टोल आधारित होगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में निजी कंपनी निर्माण के लिए निवेश करेगी। इसके बदले एक्सप्रेसवे पर वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा।

    इस तरह यह पूरी तरह टोल आधारित एक्सप्रेसवे होगा। सड़क के निर्माण से बिहार के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों के बीच सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ कई जिलों को राष्ट्रीय स्तर के सड़क नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।

     

  • झारखंड में राशन कार्ड के नियम बदले, अब आवेदन से पहले ई-केवाईसी जरूरी

    झारखंड में राशन कार्ड के नियम बदले, अब आवेदन से पहले ई-केवाईसी जरूरी

     रांची
     झारखंड में राशन कार्ड बनवाने और पुराने राशन कार्ड में सदस्यों का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया गया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत नए प्रविधान लागू किए हैं।

    इसके तहत अब राशन कार्ड बनवाने के समय ही वह तमाम जानकारियां ली जाएंगी जिसके आधार पर पूर्व में राशन कार्ड रद किया जाता था। मसलन, उपभोक्ता को पहले ही बताना होगा कि उनकी आमदनी का मुख्य स्रोत क्या है। उनके पक्के आवास में कितने कमरे हैं और किस प्रकार का टैक्स भरते हैं।

    अब आवेदकों को पहले से अधिक दस्तावेज और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। सबसे अहम बदलाव यह है कि नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करते समय घर की तस्वीर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसमें स्पष्ट रूप से भवन में बने कमरों की जानकारी देनी होगी।

    अब पहले ही ई-केवाईसी करवाना होगा
    नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित डीलर के यहां ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। ई-केवाईसी सत्यापन पूरा होने के बाद ही आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी तरह प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी स्तर पर लंबित यूआइडी सुधार और परिवर्तन से जुड़े अनुरोधों पर भी ई-केवाईसी पूरा होने के बाद ही आगे प्रक्रिया होगी।

    अधिक जीएसटी भरने वालों और आयकर दाताओं का नाम नहीं जुड़ेगा
    नई व्यवस्था में अब आवेदक को स्वघोषणा करनी होगी कि परिवार का कोई सदस्य आयकर, सेवा कर, व्यावसायिक कर या जीएसटी नहीं देता है। अधिक जीएसटी भरने वालों और आयकर देने वालों के नाम राशन कार्ड में नहीं चढ़ाया जा सकेगा।इसके अलावा परिवार के पास पांच एकड़ से अधिक सिंचित या दस एकड़ से अधिक असिंचित भूमि नहीं होनी चाहिए।

    इसी तरह परिवार के पास चार पहिया वाहन, तीन या उससे अधिक कमरों वाला पक्का मकान और 5 लाख रुपये या इससे अधिक कीमत का मशीनचालित कृषि उपकरण नहीं होना चाहिए।

    बता दें कि, विभाग ने हाल ही में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शामिल आठ श्रेणियों के अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद किए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ लाभुक सालाना 25 लाख रुपये तक का जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहे थे।

    इसके अलावा अधिक भूमि रखने वाले, दोपहिया वाहन वाले और छह लाख रुपये तक आयकर का भुगतान करने वाले लाभुकों के राशन कार्ड भी रद किए गए हैं।

    जिलावार सीमा और प्रतीक्षा सूची से जुड़ेगा नाम
    झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (JSFSS) के तहत नए राशन कार्ड और नए सदस्य का नाम जोड़ने के आवेदनों पर कार्रवाई अब जिला व निर्धारित सीमा और प्रतीक्षा सूची में आवेदक की स्थिति के आधार पर होगी।

    सदस्य का नाम जोड़ने के लिए अलग-अलग दस्तावेज पुराने राशन कार्ड में किसी सदस्य का नाम जोड़ने के लिए अब उसके आधार के अनुसार संबंधित दस्तावेज देने होगा।

    • जन्म प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा।
    • विवाह के बाद नाम जोड़ना है- पिछले राशन कार्ड से सदस्य का नाम हटाए जाने की स्वीकृति का दस्तावेज देना होगा।
    • दत्तक सदस्य का नाम जोड़ना है- दत्तक ग्रहण प्रमाण पत्र जरूरी होगा।
    • स्थानांतरित या परिवार से अलग सदस्य- पिछले राशन कार्ड से नाम हटाए जाने का प्रमाण पत्र देना होगा

    राशन कार्ड रद या सरेंडर करने के लिए भी सत्यापन
    राशन कार्ड को रद या सरेंडर करने की प्रक्रिया अब परिवार की मुखिया की सहमति से ही पूरी होगी। इसके लिए यूआईडी आधारित ओटीपी सत्यापन भी जरूरी किया गया है। जांच में ऐसे लाभुक भी सामने आए थे जो बेहतर आर्थिक स्थिति के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे। इसके बाद राशन कार्ड की पात्रता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर इन नए प्रावधानों को लागू किया गया है।

     

  • पंजाब कांग्रेस का कलह खत्म कराने आएंगे राहुल गांधी! सितंबर में 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग भी रहेंगे साथ

    पंजाब कांग्रेस का कलह खत्म कराने आएंगे राहुल गांधी! सितंबर में 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग भी रहेंगे साथ

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले एक यात्रा निकालने वाली है. पंजाब के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने इस बारे में राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. राहुल ने बघेल को इस यात्रा का पूरा रोडमैप तैयार करके आने के लिए कहा है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सितंबर के पहले हफ्ते में यह यात्रा शुरू होगी. राहुल गांधी पहले अमृतसर के हरमंदिर साहिब में मत्था टेकेंगे और फिर यात्रा की शुरुआत की जाएगी. यह यात्रा बस से की जाएगी और 135 किलोमीटर की होगी. यह 135 किलोमीटर की यात्रा पंजाब के तीनों खित्तों यानी माझा, दोआब और मालवा से होकर गुजरेगी। 

    पार्टी को एकजुट करना है यात्रा का मकसद
    राहुल गांधी की इस बस यात्रा का मकसद पंजाब में बुरी तरह बंटी हुई कांग्रेस को एकजुट करना है. कांग्रेस की पंजाब में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं और एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहते हैं. कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक यह साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा और किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा. लेकिन पंजाब में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. कांग्रेस की दिक्कत ये है कि चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मिलकर एक गुट बना लिया है और प्रदेश अध्यक्ष राजा वाडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। 

    कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कई बार इन नेताओं को अकेले में और एक साथ बैठा करके भी मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन नतीजा कुछ निकला नहीं. यहां तक जब पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' जैसा कार्यक्रम पूरे पंजाब में कर रहे थे तो वहां पोस्टर में बघेल की तुलना जनरल डायर से की गई, तो राजा वाडिंग के सर्मथकों ने चन्नी को बीजेपी-आरएसएस का एजेंट बताया. पंजाब में कांग्रेस ने एक परिवार एक टिकट का भी नियम बनाया है उसको लेकर भी नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है।

    कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती
    राहुल की यात्रा से पहले चन्नी और वड़िंग दोनों खेमों को साथ लाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पार्टी स्तर पर इसे पंजाब बचाओ यात्रा नाम देने और अमृतसर से शुरू करने की तैयारी चल रही है। राहुल गांधी पंजाब दौरे के दौरान बस यात्रा के लिए सहमत हो गए हैं। पंजाब कांग्रेस जल्द ही इस संदर्भ में शेड्यूल जारी करेगी। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान राहुल गांधी श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकेंगे। इसके बाद वे करीब 135 किलोमीटर का सफर करेंगे। इसमें माझा, दोआबा और मालवा के कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से संवाद किया जाएगा। इस यात्रा का मकसद चुनावी अभियान को गति देना और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है। साथ ही कांग्रेस की एकजुट तस्वीर पेश करना भी इसका लक्ष्य है।

    एक बस में दिखेंगे बड़े नेता?
    यात्रा की सबसे बड़ी राजनीतिक अहमियत यह होगी कि इसमें प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। यह तस्वीर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल वड़िंग और चन्नी खेमों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। 

    राहुल की बस यात्रा के तीन मकसद

        पहला पंजाब के नेताओं की एकजुट तस्वीर पेश करना. कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के साथ बस में चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष वाडिंग तो होंगे ही साथ में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी रहेंगे. यानी राहुल गांधी एक बाजू में चन्नी और दूसरे बाजू में राजा वाडिंग को लेकर 'ऑल इज़ वेल' का संदेश देंगे। 

        दूसरा इस यात्रा का मकसद संगठन को सक्रिय करना है जिससे कि कार्यकर्ताओं में संदेश जाए कि उपर के लेवल पर सब ठीक हो गया है। 

        इस यात्रा का तीसरा मकसद है पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार की विधिवत शुरुआत करना। 

    कांग्रेस के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि राहुल गांधी की यह यात्रा जो अमृतसर से हुसैनीवाला तक जाएगी पहली यात्रा होगी और अगली यात्रा इस यात्रा की सफलता पर निर्भर होगी. इसके अलावा कांग्रेस आलाकमान पंजाब के नेताओं को टिकट बांटने में भी अहम भूमिका देने पर विचार कर रही है। 

    राहुल गांधी शुरू करेंगे बस यात्रा
    प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पहले चरण में बस यात्रा हुसैनीवाला तक करीब 135 किमी का सफर तय करेगी। इस यात्रा में राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ करीब 30 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। बस यात्रा के दौरान कांग्रेस उन विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान देगी, जहां वर्ष 2022 के चुनाव में बहुत कम अंतर के साथ हार का सामना करना पड़ा था।

    मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर पार्टी का खास ध्यान
    पंजाब विधानसभा चुनाव में मालवा का अपना महत्व है। प्रदेश की 117 में से 69 सीटें इसी क्षेत्र से आती है। माना जाता है कि जो पार्टी इस क्षेत्र में अपना परचम लहराती है, प्रदेश में वही सरकार बनाती है। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी ने यहां 67 में से 64 सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को दो और अकाली दल को एक सीट मिली थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां अपना प्रदर्शन सुधारते हुए खोई हुई जमीन वापस हासिल करने में काफी हद तक सफल रही। पार्टी ने मालवा की आठ लोकसभा में चार सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। तब पार्टी ने 19 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी।

    सर्वदलीय बैठक में उठाया जाए परिसीमन मुद्दा: खरगे
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। साथ ही कहा कि किसी भी प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को उस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरकार के परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।

    खरगे ने परिसीमन को लेकर तीन मांगें रखते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए, लोकसभा में राज्यों के लिए मौजूदा सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए।

    क्या खत्म होगी कांग्रेस में गुटबाजी?
    लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी की बस यात्रा से क्या पंजाब कांग्रेस का संकट या गुटबाजी खत्म हो जाएगी. कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि अगर पंजाब में राहुल की यात्रा खत्म होने तक इन नेताओं ने अपना झगड़ा खत्म नहीं किया तो फिर कांग्रेस नेतृत्व कुछ कठोर फैसले पर मजबूर होगा. भले ही इससे पार्टी को नुकसान हो. वैसे भी कांग्रेस 2017 में 77 सीटें लेकर सत्ता में आई थी जो 2022 में घट कर 18 सीट रह गई है, तब चन्नी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया था. वही मुख्यमंत्री थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में लोगों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और 13 में से 7 सांसद कांग्रेस से जीते.अभी चरणजीत सिंह चन्नी,राजा वाडिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा तीनों सांसद हैं. मगर विधानसभा चुनाव से पहले इन तीनों नेताओं को एकजुट करना कांग्रेस नेतृत्व के लिए अभी तक चुनौती बना हुआ है। 

     

  • पंजाब भाजपा में हलचल तेज, 31 अगस्त से सतीश पूनिया का दौरा; संगठन की कमियां करेंगे दूर

    पंजाब भाजपा में हलचल तेज, 31 अगस्त से सतीश पूनिया का दौरा; संगठन की कमियां करेंगे दूर

    चंडीगढ़
     भाजपा पंजाब के प्रदेश प्रभारी, राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय महासचिव डाॅ. सतीश पूनिया आज 31 अगस्त से 2 सितंबर तक तीन दिवसीय पंजाब के संगठनात्मक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठकें कर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करेंगे और आगामी गतिविधियों को लेकर दिशा-निर्देश देंगे।

    उनका दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भाजपा पंजाब में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी है। भाजपा पंजाब के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि डा पूनिया के दौरे की शुरुआत 31 अगस्त को चंडीगढ़ से होगी।

    वह सेक्टर 37-ए स्थित भाजपा पंजाब कार्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इसके बाद प्रदेश सोशल मीडिया, आईटी और मीडिया टीम के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। दिन के अंत में प्रदेश कोर कमेटी के साथ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक होगी।

    जालंधर में पदाधिकारियों के साथ करेंगे मंथन
    एक सितंबर को डाॅ. पूनिया जालंधर पहुंचेंगे। यहां पीएम सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेंगे। इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों, जिला प्रभारियों और सह-प्रभारियों तथा प्रदेश महासचिवों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में पार्टी की मौजूदा संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    अमृतसर में हरमंदिर साहिब में करेंगे दर्शन
    दो सितंबर को डाॅ. पूनिया जालंधर में अनौपचारिक बैठकों में हिस्सा लेने के बाद अमृतसर रवाना होंगे। वहां भाजपा कार्यालय का दौरा करने के बाद दुर्गियाना मंदिर और श्री हरमंदिर साहिब में दर्शन करेंगे। अनिल सरीन ने कहा कि डा पूनिया का पंजाब दौरा प्रदेश नेतृत्व और संगठनात्मक टीमों के लिए महत्वपूर्ण है।

    उनके मार्गदर्शन से पार्टी संगठन को हर स्तर पर मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब भाजपा मजबूत, अनुशासित और सक्रिय संगठन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो प्रदेश के जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के साथ जनता की सेवा के लिए लगातार काम करेगा।

  • दिल्ली से 12 घंटे में दरभंगा, 10 घंटे में पटना… गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी रफ्तार

    दिल्ली से 12 घंटे में दरभंगा, 10 घंटे में पटना… गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी रफ्तार

    पटना

    बिहार में 170 किमी के गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की रफ्तार तेज हो गई है. इसे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) भी कहते हैं. इसकी लंबाई लिंक रूट को मिलाकर 230 किमी तक बढ़ जाती है. 4 लेन के एक्सप्रेसवे को NHAI भारतमाला परियोजना के फेज-1 के तहत बनाया  रहा है, जिसे छह लेन किया जा सकता है. एक्सप्रेसवे दक्षिण में औरंगाबाद, गया जिले से गुजरते हुए उत्तर में दरभंगा तक जाता है. औरंगाबाद और गया जिले के बॉर्डर के पास आमस से इसकी शुरुआत होगी, जो दिल्ली-कोलकाता NH-19 से कनेक्ट होगा. इसका आखिरी प्वाइंट दरभंगा का बेला नवादा है, जो NH-27 ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ता है।

    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट
    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) 198 किमी लंबा है और 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. यह गया जिले के आमस से दरभंगा तक जाएगा. यहां से लिंक रोड के जरिये ये बोधगया और राजगीर से जुड़ जाएगा. ये बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ता है. ये ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा।

    गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट

    1. औरंगाबाद
    2. गया
    3. जहानाबाद
    4. पटना
    5. वैशाली
    6. समस्तीपुर
    7. दरभंगा
    आगे बोधगया और राजगीर से लिंक

    दरभंगा से गया 3-4 घंटे में 
    अभी गया, आमस से दरभंगा की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं और एक्सप्रेसवे से ये 3-4 घंटे रह जाएगा. बोधगया, राजगीर, पटना और वैशाली जैसे बुद्ध और जैन सर्किट स्थल कनेक्ट होगी. देश-विदेश के पर्यटकों को आवाजाही में आसानी होगी.उत्तरी बिहार के खाद्य उत्पादों जैसे मखाना, लीची को दक्षिण बिहार और दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर से बंदरगाह तक पहुंचने में आसानी होगी. साथ ही यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे चालू होने और इसके वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाने के बाद बिहार से दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों की यात्रा कम समय में हो पाएगी।

        दरभंगा से दिल्ली – 18 से 22 घंटे- 10 से 12 घंटे- आमस-दरभंगा से पूर्वांचल और यमुना एक्सप्रेसवे
        पटना से दिल्ली- 16 से 18 घंटे- 9 से 10 घंटे – पटना-बक्सर, पूर्वांचल, यमुना एक्सप्रेसवे
        दरभंगा से कोलकाता-  14 से 16 घंटे- 7 से 8 घंटे- आमस-दरभंगा, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे
        गया, आमस से कोलकाता- 10 से 12 घंटे – 5 से 6 घंटे- वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे  से रास्ता
        वाराणसी से गया आने में पहले 5-6 घंटे लगते थे, जो घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएंगे
        वाराणसी से दरभंगा जाने में पहले 10-12 घंटे लगते थे जो अब 5 से 6 घंटे में तय होगा रास्ता
        आमस-दरभंगा और वाराणसी-कोलकाता के जरिये रांची का सफर 5-6 घंटे में पूरा हो जाएगा
        आमस-दरभंगा के उत्तरी छोर से जुड़ने से उत्तर बिहार से सिलीगुड़ी की दूरी 6 से 7 घंटे रह जाएगी

    पटना में आउटर रिंग रोड – गंगा पर नया पुल
    इस एक्सप्रेसवे के लिए गंगा नदी पर नया पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज बन रहा है. पटना के पास ये एक्सप्रेसवे गंगा नदी को पार करने के लिए निर्माणाधीन 9.75 किमी लंबे 6 लेन के कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से आवाजाही आसान होगी.ये पटना आउटर रिंग रोड के जरिये राजधानी को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.एक्सप्रेसवे को नेपाल बॉर्डर पर जयनगर तक विस्तार दिया जा सकता है,इससे भारत-नेपाल व्यापार में इजाफा होगा. बिहार सरकार ने इस एक्सप्रेसवे से लिंक रोड से बोधगया और राजगीर को भी सीधे जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है. पटना, जहानाबाद, गया जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों के अंदर गए बिना सीधे आउटर रिंग रोड से गाड़ियां निकल जाएंगी।

    राजगीर और बोधगया से कनेक्टिविटी
    बिहार सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 35 हजार करोड़ की योजना को हरी झंडी दी है. प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों को जोड़कर एक सर्किट बनाने के लिए ये प्रस्ताव तैयार किया गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है. पटना से शुरू होने वाले इस एक्सप्रेसवे से गयाजी, राजगीर, बोधगया जैसे धार्मिक केंद्रों को जोड़ा जाएगा. इस योजना में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को जोड़ा जाएगा. साथ ही वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से इंटरलिंक किया जाएगा.राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (NHAI) राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का रूट
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) से भी ये कनेक्ट होगा. 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है. भारत के चार बडे़ राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी.वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरता है. इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में बदलाव कर सासाराम के पहाड़ी इलाके में सुरंग का प्रस्ताव दिया गया है. इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर घट जाएगी. साथ ही इस बदलाव से गया और राजगीर को भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी.बिहार की ये एक्सप्रेसवे परियोजना करीब 610 किलोमीटर होगी. इस एक्सप्रेसवे का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार में बनाया जाएगा और बाकी दूसरे राज्यों से होकर गुजरेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे की यूपी के 4 राज्यों से कनेक्टिविटी
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी रिंग रोड से चंदौली जिले के बरहुली गांव तक सीमा. 
    बिहार में कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिले, कुल दूरी 170 किमी 
    झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो तक, 187 किलोमीटर 
    बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा से कोलकाता के उलुबेरिया तक 

  • हरियाणा में फैमिली ID की आय संबंधी गलतियां होंगी दूर, 2 अक्टूबर तक चलेगा विशेष अभियान

    हरियाणा में फैमिली ID की आय संबंधी गलतियां होंगी दूर, 2 अक्टूबर तक चलेगा विशेष अभियान

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

  • NEET-PG 2026: जयपुर के सीतापुरा सेंटर पर बिजली गुल, 5 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा

    NEET-PG 2026: जयपुर के सीतापुरा सेंटर पर बिजली गुल, 5 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा

    जयपुर
    सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iON Digital Zone) सेंटर पर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बिजली गुल होने की समस्या के चलते दो परीक्षा केंद्रों पर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) के मुताबिक, इस सेंटर पर परीक्षा के लिए आवंटित सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।

    अव्यवस्थाओं के चलते भड़के अभ्यर्थी
    दरअसल, सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन सेंटर पर नीट-पीजी की परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होनी थी और दोपहर 12:30 बजे तक चलनी थी। इसके लिए अभ्यर्थी तय समय से पहले ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए थे। सभी जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने का इंतजार था। लेकिन परीक्षा शुरू होने के दौरान ही बिजली से जुड़ी परेशानी सामने आ गई। बिजली जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सिस्टम को दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार आ रही दिक्कत के चलते परीक्षा ठीक से शुरू ही नहीं हो पाई। काफी देर तक जब स्थिति साफ नहीं हुई तो बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।

    इन दो केंद्रों पर होगी दोबारा परीक्षा
    जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजी सीतापुर के टीसी नंबर 41682 एवं 41683 पर केंद्र में केंद्र में आंतरिक बिजली आपूर्ति में समस्या के कारण परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। एनबीईएमएस ने इस असुविधा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रति खेद व्यक्त किया है।

    बोर्ड ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। पुनः परीक्षा के केंद्र सहित अन्य विस्तृत जानकारी अलग से जारी की जाएगी। संबंधित अभ्यर्थियों को संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किए जाएंगे।

    कांग्रेस ने किया बीजेपी पर वार
    जयपुर में NEET-PG परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, “जयपुर में सुबह 9 बजे से होने वाली NEET-PG की परीक्षा 12 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाई। छात्र और उनके परिजन मोदी के घटिया सिस्टम के कारण परेशान होते रहे और पूरी सरकार चादर ताने सोती रही। एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। धिक्कार है।”

    देशभर में 2.73 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
    एनबीईएमएस के अनुसार 30 अगस्त को देशभर में 2,73,096 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए 1111 केंद्रों पर नीट -पीजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई। इनमें से 2,65,980 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए और लगभग 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हुई।

    जयपुर
    सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iON Digital Zone) सेंटर पर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बिजली गुल होने की समस्या के चलते दो परीक्षा केंद्रों पर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) के मुताबिक, इस सेंटर पर परीक्षा के लिए आवंटित सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।

    अव्यवस्थाओं के चलते भड़के अभ्यर्थी
    दरअसल, सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन सेंटर पर नीट-पीजी की परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होनी थी और दोपहर 12:30 बजे तक चलनी थी। इसके लिए अभ्यर्थी तय समय से पहले ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए थे। सभी जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने का इंतजार था। लेकिन परीक्षा शुरू होने के दौरान ही बिजली से जुड़ी परेशानी सामने आ गई। बिजली जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए और परीक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सिस्टम को दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार आ रही दिक्कत के चलते परीक्षा ठीक से शुरू ही नहीं हो पाई। काफी देर तक जब स्थिति साफ नहीं हुई तो बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।

    इन दो केंद्रों पर होगी दोबारा परीक्षा
    जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजी सीतापुर के टीसी नंबर 41682 एवं 41683 पर केंद्र में केंद्र में आंतरिक बिजली आपूर्ति में समस्या के कारण परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। एनबीईएमएस ने इस असुविधा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रति खेद व्यक्त किया है।

    बोर्ड ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। पुनः परीक्षा के केंद्र सहित अन्य विस्तृत जानकारी अलग से जारी की जाएगी। संबंधित अभ्यर्थियों को संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किए जाएंगे।

    कांग्रेस ने किया बीजेपी पर वार
    जयपुर में NEET-PG परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, “जयपुर में सुबह 9 बजे से होने वाली NEET-PG की परीक्षा 12 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाई। छात्र और उनके परिजन मोदी के घटिया सिस्टम के कारण परेशान होते रहे और पूरी सरकार चादर ताने सोती रही। एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। धिक्कार है।”

    देशभर में 2.73 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
    एनबीईएमएस के अनुसार 30 अगस्त को देशभर में 2,73,096 पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए 1111 केंद्रों पर नीट -पीजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई। इनमें से 2,65,980 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए और लगभग 2,63,535 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी हुई।

  • झारखंड-बिहार-बंगाल के रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, 8 ट्रेनें रद्द और 10 के रूट में बदलाव

    झारखंड-बिहार-बंगाल के रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, 8 ट्रेनें रद्द और 10 के रूट में बदलाव

     चक्रधरपुर
     दक्षिण पूर्व रेलवे ने 31 अगस्त से 09 सितंबर तक आद्रा रेल मंडल में रोलिंग ब्लॉक कार्यक्रम के कारण 08 ट्रेनों का परिचालन विभिन्न तिथियों में रद करने की घोषणा कर दी है। इसके अलावे रेलवे ने 10 ट्रेनों को उनके गंतव्य से पहले ही शॉर्ट टर्मिनेशन और शॉर्टओरिजिनेशन कर चलाएगी।

    रेलवे के इस फैसले का असर झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के हजारों यात्रियों पर पड़ेगा। रेल प्रशासन ने यात्रियों अनुरोध किया है कि अपनी यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति की जानकारी वेबसाइट ऐप या 139 हेल्पलाइन से अवश्य प्राप्त कर लें।

    ये ट्रेनें इन तिथियों में रद रहेगी:
        31 अगस्त, 02 और 06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68046/68045 आद्रा – आसनसोल-आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।
        31 अगस्त, 03, 04 और 06सितंबर को ट्रेन नंबर 63594/ 63593 आसनसोल – पुरूलिसा -आसनसोल मेमू को परिचालन रद रहेगी।
        01, 04 और 06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68090/68089 आद्रा – मेदिनीपुर – आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।
        06 सितंबर को ट्रेन नंबर 68077/68078 आद्रा-भागा-आद्रा मेमू का परिचालन रद रहेगी ।

    ये ट्रेनें शॉर्ट टर्मिनेशन और शॉर्टओरिजिनेशन कर चलेगी 
        चक्रधरपुर – गोमो- चक्रधरपुर एक्सप्रेस (18116/18115 ) : 01, 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन महुदा तक चलेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में महुदा से गोमो के बीच रद रहेगी।
        टाटानगर-आसनसोल मेमू ( 68056 ) : 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आद्रा और आसनसोल स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        आसनसोल-बाराभूम मेमू (68060) : 04 और 06 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आसनसोल और आद्रा स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        आसनसोल – पुरूलिया – आसनसोल मेमू (63594/63593 ) : 01, 02 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन दोनों दिशाओं में आद्रा और पुरूलिया स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        खड़गपुर – हटिया मेमू- खड़गपुर एक्सप्रेस (18035/18036 ) : 01 , 02 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी । इस ट्रेन का परिचालन दोनों दिशाओं में आद्रा और हटिया स्टेशनों के बीच रद रहेगी।
        टाटानगर-आसनसोल – टाटानगर मेमू ( 68056 /68055 ) : 31 अगस्त, 03 और 05 सितंबर को यह ट्रेन आद्रा स्टेशन तक चलेगी। इस ट्रेन का परिचालन आद्रा और टाटानगर स्टेशनों के बीच रद रहेगी।

  • दुनिया में सर्वाधिक 35 KG दूध देने वाली हरियाणा की ‘राधा’ नहीं रही, PM से भी मिला था सम्मान

    दुनिया में सर्वाधिक 35 KG दूध देने वाली हरियाणा की ‘राधा’ नहीं रही, PM से भी मिला था सम्मान

    नारनौंद.

    कभी पशु प्रतियोगिताओं के रैंप पर अपनी कद-काठी से लोगों का ध्यान खींचने वाली और फिर 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर विश्व स्तर पर हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम चमकाने वाली ‘राधा’ अब नहीं रही। शनिवार को उसकी मौत की खबर सिंघवा खास पहुंची तो उसे विश्व चैंपियन बनाने वाले पशुपालक ईश्वर सिंह के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी।

    करीब एक माह पहले ही उन्होंने राधा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी पशुपालक सुनील यादव को उपहार में दिया था, लेकिन उससे उनका लगाव कम नहीं हुआ था। वह प्रतिदिन फोन कर राधा की सेहत और खानपान की जानकारी लेते थे। शुक्रवार को राधा ने एक स्वस्थ कटडी को जन्म दिया था। पशुपालक के अनुसार इसके बाद रात तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन शनिवार सुबह वह नहीं उठी।

    मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई
    चिकित्सक को बुलाकर जांच कराई गई। पशुपालक के अनुसार बीमारी के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई गई है। राधा की मौत के साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में सिंघवा खास की उस उपलब्धि का एक यादगार अध्याय भी समाप्त हो गया, जिसने मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी। मुर्रा नस्ल की बेहतरीन भैंसों के लिए पहचान रखने वाले सिंघवा खास के ईश्वर सिंह लंबे समय से पशुपालन कर रहे हैं। उनकी धन्नो और हेमा मालिनी नाम की भैंसें भी पशु प्रतियोगिताओं में पहचान बना चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने दूध उत्पादन का नया कीर्तिमान बनाने के लिए राधा को तैयार किया। ईश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने इंटरनेट पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के रिकार्ड की जानकारी जुटाई। इससे पहले 33 किलो 800 ग्राम दूध का रिकार्ड कैथल के बूढा खेडा के पशुपालक नरेश की भैंस रेशमा के नाम होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राधा ने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर कीर्तिमान बनाया।

    चार लाख में खरीदी, चैंपियन बनाने के लिए तैयार की खास दिनचर्या
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को पिछले वर्ष फतेहाबाद के गांव कन्हेडी से चार लाख रुपये में खरीदा था। उसके लिए साफ गद्दे बिछाए जाते थे। दिन में तीन बार स्नान, महीने में एक बार कटिंग और प्रतिदिन सरसों के तेल से मालिश की जाती थी। गर्मी में कूलर की व्यवस्था रहती थी। आहार में आठ किलो चने, चार किलो बिनोला, दो किलो गेहूं का दलिया और दो किलो गुड सहित विशेष फीड दी जाती थी। राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।

    खबर मिली तो घर में नहीं जला चूल्हा: ईश्वर
    ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को उपहार में देने के बाद भी वह लगातार उसकी जानकारी लेते थे। शनिवार को उसकी मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार दुखी हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला। उन्होंने कहा कि राधा उनके लिए केवल पशु नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और पशुपालन से जुडे सपने की पहचान बन चुकी थी।

    पशु पालकों में शोक, राधा की उपलब्धि बनी रहेगी याद
    राधा की मौत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के पशुपालकों ने भी दुख जताया। पशुपालकों का कहना है कि 35.669 किलो दूध देकर राधा ने अकेले अपने पालक का ही नहीं, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाया। उसकी उपलब्धि पशुपालकों को बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के लिए प्रेरित करती रहेगी।

  • पंजाब में होंगे बड़े सियासी फेरबदल, क्या अकाली दल से फिर गठबंधन करेगी BJP?

    पंजाब में होंगे बड़े सियासी फेरबदल, क्या अकाली दल से फिर गठबंधन करेगी BJP?

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन सियासी दलों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, बल्कि यह होगा कि कौन किसके साथ खड़ा होगा।

    15 सितंबर के बाद पंजाब की राजनीति में गठबंधन और दल-बदल को लेकर तस्वीर तेजी से साफ होने की उम्मीद है। खासतौर पर भाजपा की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि पार्टी को अपने संभावित चुनावी साथी को लेकर अहम फैसला करना है। भाजपा 15 सितंबर से पंजाब में नशा विरोधी रैलियों का सिलसिला शुरू करने जा रही है। इन रैलियों को पार्टी की चुनावी तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रैलियों में मिलने वाला जनसमर्थन भाजपा के लिए पंजाब की राजनीतिक जमीन का संकेतक होगा। पार्टी यह परखना चाहेगी कि नशे के मुद्दे पर उसका अभियान जनता के बीच कितना असर पैदा कर रहा है और संगठन चुनावी माहौल बनाने में कितना सक्षम है।

    पंजाब प्रभारी दो दिवसीय दौर पर 
    इसी बीच भाजपा के नवनियुक्त पंजाब प्रभारी डाॅ. सतीश पूनिया 31 अगस्त से दो दिवसीय पंजाब दौरे पर पहुंच रहे हैं। दौरे के दौरान प्रदेश नेतृत्व के साथ-साथ संगठन के विभिन्न स्तरों पर बैठकें होंगी। इन बैठकों में चुनावी तैयारियों, संगठन की स्थिति और आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। साथ ही संभावित गठबंधन को लेकर पंजाब भाजपा के नेताओं से फीडबैक लिए जाने की संभावना है।

    भाजपा के सामने अकाली दल को लेकर सबसे बड़ा पेच
    भाजपा के लिए सबसे अहम सवाल शिरोमणि अकाली दल को लेकर है। पार्टी के सामने दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं। पहला, सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल के साथ दोबारा तालमेल का रास्ता और दूसरा, ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के साथ नया राजनीतिक समीकरण। दोनों विकल्पों के अपने अलग राजनीतिक मायने हैं। यदि भाजपा किसी एक अकाली धड़े के साथ गठबंधन करती है तो कई विधानसभा सीटों पर वोटों का गणित बदल सकता है। इस संभावित गठबंधन में बसपा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भाजपा के लिए गठबंधन का फैसला केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाने वाला फैसला होगा।

    कांग्रेस और आप अलग हुए तो बढ़ेगा रोमांच
    वहीं कांग्रेस और आप के अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में पंजाब का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। शिरोमणि अकाली दल भी यदि अलग मैदान में रहता है तो कई सीटों पर त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले बन सकते हैं। ऐसे में कुछ सीटों पर कुछ हजार वोटों का अंतर भी परिणाम बदल सकता है। चुनाव से पहले दल-बदल भी सियासी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। अलग-अलग दलों के असंतुष्ट नेता अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए पाला बदल सकते हैं। ऐसे नेताओं पर सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी।

    गठबंधन और फेरबदल से तय होगी दिशा
    इसलिए 15 सितंबर के बाद पंजाब की राजनीति में रैलियों से ज्यादा नजर गठबंधन की चाल और नेताओं की राजनीतिक पारी बदलने पर रहेगी। भाजपा के नशा विरोधी अभियान को मिलने वाला जनसमर्थन डाॅ. सतीश पूनिया की बैठकों से मिलने वाला फीडबैक और अकाली दल को लेकर पार्टी का फैसला आने वाले चुनावी रण की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल पंजाब की सियासत में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि अगले कुछ महीने गठबंधन, दल-बदल और वोटों के बंटवारे के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।