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  • बिहार में 129 साल पुराने जेल कानून की जगह नया सुधारात्मक कानून

    बिहार में 129 साल पुराने जेल कानून की जगह नया सुधारात्मक कानून

    पटना
     बिहार में जल्द ही जेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक, 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी है। यह विधेयक 129 साल पुराने जेल कानूनों की जगह आधुनिक व्यवस्था लागू करने के लिए लाया गया है।

    सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 10 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए।

    केंद्र का था निर्देश बनाए जाए नया कानून
    सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने माडल प्रिजन एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023 के अनुरूप राज्यों से नए कानून बनाने को कहा था। इसी के आधार पर बिहार ने अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार नया विधेयक तैयार किया है।

    नए कानून में जेलों को केवल कैदियों को रखने का स्थान नहीं, बल्कि उनके सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही जेल प्रबंधन, सुरक्षा और बंदियों के अधिकारों से जुड़े कई नए प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

    बिहार में वनरक्षी भर्ती नियमों में होगा संशोधन, भूतपूर्व अग्निवीरों को अब 20 प्रतिशत आरक्षण
    बिहार सरकार ने वनरक्षी भर्ती नियमों में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। जिस पर मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी है। प्रस्ताव में बिहार अवर वन सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू करने की बात कही गई है। इसके तहत भूतपूर्व अग्निवीरों को वनरक्षी की सीधी भर्ती में न्यूनतम 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

    सरकार का कहना है कि इससे प्रशिक्षित, अनुशासित और शारीरिक रूप से दक्ष युवाओं की सेवाओं का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

    श्यामा प्रसाद के नाम एआई एवं कंप्यूटर विज्ञान विश्वविद्यालय
    भागलपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कंप्यूटर विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए संबंधित विधेयक को बिहार विधानमंडल में पेश करने की मंजूरी का प्रस्ताव मंत्रिमंडल में स्वीकृत किया है।

    विश्वविद्यालय का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार तथा तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है, ताकि युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा मिल सके।

    6 माह से 3 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण प्रस्ताव को मंजूरी
    सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के तहत टेक होम राशन के लिए 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा अतिकुपोषित बच्चों को बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (कॉम्फेड) के माध्यम से रेडी-टू-ईट,रेडी-टू-कुक प्रीमिक्स पोषाहार उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मंत्रिमंडल ने स्वीकृत किया है।

    542 आदर्श विद्यालयों के छात्रों को मिलेगी विशेष पोशाक किट
    राज्य के 542 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) के कक्षा 7 से 12 तक के विद्यार्थियों को विशेष पोशाक किट उपलब्ध कराने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल ने स्वीकृत किया है

    जीविका के माध्यम से प्रति छात्र प्रति वर्ष 6,000 रुपये की लागत से किट दी जाएगी, जिसमें दो सेट पोशाक, टी-शर्ट, ट्राउजर, बेल्ट, टाई, जूते, मौजे, स्वेटर, कैप, ब्लेजर, बंडी और बैग शामिल होंगे। इस योजना पर हर वर्ष 221 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

     

  • बिहार में पांच साल में एक लाख शिक्षकों की होगी नियुक्ति

    बिहार में पांच साल में एक लाख शिक्षकों की होगी नियुक्ति

    पटना
     बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा।

    सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद, आधारभूत सुविधाओं की कमी और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

    जवाब में मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर मामला बताते हुए शिक्षा विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि शिक्षा मंत्री ने अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का रोडमैप रखा।

    जदयू विधायक ने उठाया शिक्षकों की कमी का मुद्दा
    जदयू विधायक श्याम रजक ने सदन में कहा कि राज्य के डॉ. बीआर आंबेडकर विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं।

    उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकांश पद रिक्त हैं तो इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा तय करने की मांग भी की।

    मंत्री ने बताई वर्तमान स्थिति
    प्रश्न का उत्तर देते हुए संबंधित मंत्री लखेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 91 डॉ. बीआर आंबेडकर विद्यालय संचालित हैं। इनमें कुल 3,456 शिक्षक कार्यरत हैं।

    उन्होंने बताया कि माध्यमिक स्तर पर 1,456 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 950, यानी कुल 2,406 स्वीकृत पद हैं, जिनमें फिलहाल 1,290 शिक्षक कार्यरत हैं।

    शेष रिक्त पदों को भरने के लिए टीआरई-4 (TRE-4) के तहत रिक्तियों का प्रस्ताव बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेजा गया है।

    मुख्यमंत्री बोले- मामला गंभीर, एक महीने में होगी व्यवस्था
    शिक्षकों की कमी पर मुख्यमंत्री ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है और विधायक की चिंता पूरी तरह उचित है।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि जहां तत्काल नियुक्ति संभव नहीं है, वहां प्रतिनियुक्ति के आधार पर एक महीने के भीतर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

    विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
    राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि छठी कक्षा तक पहुंचने वाले बच्चों को एबीसीडी तक नहीं आती।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में केवल दो कमरों में एक-एक हजार बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर विमर्श के लिए सभी विधायकों की सेंट्रल हॉल में विशेष बैठक बुलाई जाए।

    ताकि यह समीक्षा हो सके कि बिहार के गरीब परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से क्यों वंचित हैं। उन्‍होंने नीतीश कुमार के जल जीवन हरियाली म‍िशन की चर्चा इस संदर्भ में की।

    हाईस्कूलों के लिए जमीन की समस्या भी उठी
    सदन में यह मुद्दा भी सामने आया कि सरकार ने सभी पंचायतों में हाईस्कूल खोलने का निर्णय लिया था, लेकिन 600 से 700 विद्यालय ऐसे हैं जहां अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी।

    ऐसी जगहों पर अस्थायी व्यवस्था के तहत स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। जिन विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां छह महीने के भीतर भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी।

    शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान
    चर्चा के अंत में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति करेगी।

    उन्होंने बताया कि टीआरई-4 भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इस महीने के अंतिम सप्ताह में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को रिक्तियों का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।

    सरकार का लक्ष्य रिक्त पदों को जल्द भरकर विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना है। 

  • राजस्थान में SC-ST अत्याचार मामलों में 28% कमी, सीएम ने बताई उपलब्धि

    राजस्थान में SC-ST अत्याचार मामलों में 28% कमी, सीएम ने बताई उपलब्धि

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। राज्य सरकार द्वारा गत ढाई वर्षों में उठाए गए कदमों के कारण अनुसूचित जाति और जनजातियों के विरुद्ध अत्याचार के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023 की तुलना में 2025 में ऐसे प्रकरणों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
    मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में कहा कि एससी-एसटी वर्ग के विरुद्ध अपराध करने वालों पर कठोरता से कार्रवाई की जाए और समाज में समरसता का वातावरण बनाने में सहयोग करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए।

    प्रकरण निस्तारण का औसत समय 128 दिन से घटकर हुआ 53 दिन
    वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार के दर्ज प्रकरणों में 15.88 प्रतिशत तथा वर्ष 2025 के पहले 6 माह की तुलना में वर्ष 2026 में 15.49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में से 35.16 प्रतिशत का निस्तारण 60 दिन में किया जा रहा था, जो 2025 में बढ़कर लगभग 47 प्रतिशत और जुलाई, 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गया है। वहीं, प्रकरणों के निस्तारण का औसत समय 128 दिन से घटकर 53 दिन रह गया है। एफआर लगे प्रकरणों में अब 10 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत का रैंडम सत्यापन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि एक तरफ तो एससी-एसटी वर्ग पर अत्याचार के मामलों में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों के 60 दिवस की निर्धारित अवधि में निस्तारण में भी पहले की तुलना में काफी तेजी आई है। लगभग 68 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण 60 दिन के भीतर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी सेल स्थापित किए जा चुके हैं एवं शेष 6 पुलिस जिलों में भी एससी-एसटी सेल शीघ्र स्थापित होंगे। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विरुद्ध होने वाले अपराधों में दोष सिद्धि की दर में और अधिक सुधार के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामाजिक समरसता और मेलजोल बढ़ाने के लिए जिला और उपखंड स्तरीय निगरानी एवं सतर्कता समिति की बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाएं और वर्ष में दो बार पंचायत स्तर पर भी इन बैठकों का आयोजन किया जाए।

    पीड़ितों को समय पर मुहैया करवाई जाए आर्थिक सहायता
    उन्होंने निर्देश दिए कि दर्ज प्रकरणों की सतत निगरानी की जाए तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही, संवेदनशील मामलों की जांच पूरी गंभीरता और त्वरित गति से हो। एफआईआर दर्ज होने से लेकर न्यायालय में अंतिम निस्तारण तक पीड़ितों को अधिनियम के तहत देय आर्थिक सहायता भी समय पर उपलब्ध करवाई जाए।

    बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को सहायता, लंबित प्रकरणों के निस्तारण तथा कानून की सख्त एवं समयबद्ध अनुपालना पर चर्चा हुई। अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही, दर्ज एफआईआर, अनुसंधान की अवधि, चालान प्रस्तुत करने की समयसीमा तथा पीड़ित परिवारों को प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान एफआईआर एवं चालान स्तर पर पिछले तीन वर्षों में वितरित आर्थिक सहायता, सहायता पोर्टल की प्रगति तथा लंबित मामलों की समीक्षा भी की गई।

    लंबित प्रकरणों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण हो सुनिश्चित
    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सहायता संबंधी लंबित प्रकरणों की थाना एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए, जिससे पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके। इस दौरान संस्थागत शिकायत निवारण प्रणाली के अंतर्गत हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क एवं पोर्टलों पर प्राप्त शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग तथा त्वरित समाधान की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा अभियोजन विभाग के सभी अधिकारी आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें, ताकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों के न्याय, सुरक्षा और अधिकारों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

    बैठक में उपमुख्यमंत्री डाॅ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति के सदस्य जोगेश्वर गर्ग, फूल सिंह मीणा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

  • हरियाणा की 770 गोशालाओं को मिलेंगी 820 ई-रिक्शा, सरकार की मंजूरी

    हरियाणा की 770 गोशालाओं को मिलेंगी 820 ई-रिक्शा, सरकार की मंजूरी

    चंडीगढ़
     हरियाणा में गोशालाओं को पशुधन की देखरेख के लिए 820 ई-रिक्शा उपलब्ध कराई जाएंगी। एक हजार तक पशु रखने वाली गोशालाओं को एक तथा इससे अधिक गायों को रखने वाली गोशालाओं को दो ई-रिक्शा दी जाएंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में सवा दस करोड़ रुपये की लागत से ई-रिक्शा खरीदने को अनुमति दी गई।

    प्रदेश में कुल 770 गोशालाएं हैं। इनमें 553 गोशालाओं में एक हजार से कम, 79 गोशालाओं में दो हजार तक, 20 गोशालाओें में तीन हजार, आठ गोशालाओं में चार हजार, एक गोशाला में पांच हजार व एक गोशाला में छह हजार तक पशुधन है। गोशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की कड़ी में गोशालाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

    बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा और महिला एवं बाल विकास तथा सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कैथल शहर की विभिन्न कालोनियों में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज लाइन डालने के कार्य को मंजूरी प्रदान की। इससे शहर की अधिकतर आबादी में सीवरेज व्यवस्था शुरू हो जाएगी जो आगामी 2042 तक की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

    इसके अलावा खेदड़ में वाटर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने एवं आरसीसी टैंक का निर्माण करने की भी मंजूरी दी गई। इस कार्य पर लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। फरीदाबाद मेट्रोपोलियन विकास प्राधिकरण में 10 एमएलडी क्षमता के पांच रैनीवैल ट्यूबवैल लगाने की स्वीकृति दी गई है।

    गांव मंझावली, मोठूका के आसपास यमुना नदी के जलभराव वाले क्षेत्रों में लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से लगाए जाने वाले रेनीवैल ट्यूबवैल से पेयजल हेतु टेस्टिंग की जाएगी। गुरुग्राम के गांव बसई में 1000 एमएलडी क्षमता का दूसरा जल घर बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके निर्माण पर लगभग 149 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    मोलभाव कर बचाए 16.58 करोड़
    बैठक में 380.40 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों के लिए 363.82 करोड़ रुपये में टेंडर छोड़े गए। इस तरह मोल-भाव कर लगभग 16.58 करोड़ रुपये की बचत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की देरी व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण किए जाने चाहिए। विकास कार्यो में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

     

  • झारखंड में बारिश संकट के बीच डीएसआर तकनीक से धान खेती की सलाह

    झारखंड में बारिश संकट के बीच डीएसआर तकनीक से धान खेती की सलाह

     रांची
    राज्य के कुछेक जिलों को छोड़ दें तो अधिकांश स्थानों पर खेती लायक वर्षापात नहीं हुआ है। जिससे किसानी पर बादल के संकट मंडराने लगे हैं। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, उनके बिचड़े खेतों में खराब हो रहे हैं, सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण अब उन्हें समय पर धान रोपनी की चिंता सताने लगी है।

    आमतौर पर जून और जुलाई मध्य तक धान की रोपनी हो जाती है लेकिन कई स्थानों पर अब तक धान रोपनी तो दूर बिचड़ा तैयार करने लायक वर्षापात नहीं हुआ है। जलवायु परिवर्तन एवं मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए धान रोपने के तरीकों में बदलाव समय की मांग हो गई है।

    लिहाजा, कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक खेती का निर्देश दे रहा है। इसी कड़ी में सीधी बुआई यानी डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक कारगर साबित हो सकती है। इस तकनीक से धान की सीधी बिजाई होती है, जिससे 30 प्रतिशत पानी, ईंधन और मजदूरी की बचत होगी। इ

    स तकनीक से खेत में जुताई की आवश्यकता नहीं पड़ती है, लेबर कास्ट भी कम आता है और किसानों को जेबें ढ़ीली नहीं करनी पड़ती हैं। यही नहीं एक बार बुआई के बाद दोबारा धान का पौधा खेत में नहीं लगाना पड़ता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि धान की सीधी बुआई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह तक कर लेना फायदेमंद होता है।

    इस तरह से करें धान की बिजाई:
    बीज की मात्रा 10-12 किलो गोंद कतीरा लेपित बीज (प्रासेस्ड सीड) प्रति एकड़ रखें। बिजाई बतर वाले खेतों में गेहूं की तरह मशीन व छींटे प्रणाली से करें। बिजाई के तुरंत बाद एक लीटर पेंडामेथलीन (स्टाम्प) 200 लीटर पानी मे प्रति एकड़ की दर से स्प्रे भी आवश्यक है।

    पहली सिंचाई देर से व बिजाई के लगभग 15-20 दिनों के बाद करें। उसके बाद सीमित सिंचाई गीला सूखा प्रणाली से 15 दिनों के अंतराल पर कितनी वर्षा हुई उसके आधार पर करें। बता दें कि गोंद कतीरा लेप तकनीक अपनाने से आधी सिंचाई से धान पक जाती है।

    नई बीज तकनीक हर्बल हाइड्रोजेल पर आधारित है जिसमें हर्बल हाइड्रोजेल गोंद कतीरा लेपित बीज की बुआई की जाती है। इससे सभी फसलों के पौधों की जड़ें जल्दी सूखती नहीं है। सिंचाई की भी आवश्यकता कम हो जाती है। फसलों में पहली सिंचाई देर से व कम सिंचाई करने के कारण खरपतवार, बीमारियां और कीट प्रकोप भी कम हो जाता है।

    नई बीज लेपित तकनीक पानी बचाने व खरपतवार की रोकथाम करने में सक्षम है। बिजाई के तुरंत बाद एक लीटर प्रति एकड़ की दर से पेंडामेथलीन 200 लीटर पानी में छिड़काव करने और पहली सिंचाई देर से करने पर जो खरीफ फसलों में बिजाई के लगभग 15-20 दिनों व रबी फसलों में लगभग 45-50 दिनों के बाद की जाती है।

    डीएसआर तकनीक में पानी व ईंधन की होती है बचत:
    धान की परंपरागत बिजाई की तुलना में डीएसआर में कम पानी खर्च होता है। साथ ही, ईंधन, समय और खेती की लागत के नजरिए से भी डीएसआर 30 प्रतिशत तक फायदेमंद है। डीएसआर तकनीक पानी के किफायती उपयोग तथा मिट्टी का समुचित ध्यान रखने की प्रेरणा देती है।

    डीएसआर में ऐसे ईंधन का उपयोग परंपरागत बिजाई की तुलना में कम होता है। खेत को दो तीन जुताई लगाकर तैयार करें। ड्रिल से 3-5 सेमी गहराई पर बिजाई करें। खेत की तैयारी एवं बिजाई शाम को करें। ड्रिल से 2-3 सेमी गहराई पर बिजाई करें। बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें। चार पांच दिन बाद फिर सींचे।

    बिजाई के तुरंत बाद व सूखी बिजाई में 0-3 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1.3 लीटर प्रति एकड़ स्प्रे करें। बता दें कि सीधी बिजाई में रोपाई वाली धान की बजाए अधिक खरपतवार आते हैं और वे भिन्न भी होते हैं।

    दोनों अवस्था में 15 से 25 बाद बिस्पायरीबैक 100 एमएल प्रति एकड़ स्प्रे करें। इस तकनीक से कम खर्च में एक एकड़ खेत में 20 क्विंटल तक धान की उपज होती है।
    सीधी बुआई से ये होगा किसानों को लाभ:

        उत्पादन खर्च में कमी
        समय पर बुआई से दो से ढ़ाई हजार रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ
        मजदूरों के अभाव की समस्या से छुटकारा
        30 प्रतिशत तक खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में सहायक
        अगली फसल गेहूं के उत्पादन में बढ़ोतरी
        भूमंडलीय तापमान वृद्धि वाली गैसों के उत्सर्जन में कमी

    किसानों ने ये कहा:
        बेड़ो प्रखंड में अधिकांश किसान आज भी वर्षा पर ही खेती निर्भर हैं। जुलाई माह भी बीतने को है लेकिन खेतों में रोपनी की रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। प्रखंड के किसानों को श्री विधि व सीधी बिजाई से खेती के लिए जागरूक व जानकारी देने की आवश्यकता है। : पंकज कुजूर, किसान

        इस वर्ष अब तक बेहतर वर्षापात नहीं होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। प्रखंड के हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि पर पर्याप्त वर्षा के अभाव में धान की रोपनी नहीं हो सकी है। प्रखंड के किसानों को पारंपरिक खेती श्री विधि व सीधी बिजाई से खेती करने के लिए सरकार द्वारा पहल करके किसानों को जानकारी देनी चाहिए। : विश्वेश्वर मिंज, किसान।

    श्री विधि से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान : सुरेश महतो

    बेड़ो प्रखंड में बड़े भूभाग में धान की खेती की जाती है। अधिकतर किसान रोपा विधि से धान लगाते हैं। इसकी तुलना में धान की पारंपरिक बुआई जिसे आज श्रीविधि कहा जाता है, से धान लगाना अधिक लाभकारी है। इसमें कम मजदूर, कम पानी, कम बीज और बिना खरपतवार के धान का अच्छा उत्पादन होता है।

    परंपरागत विधि से किसान को प्रति हेक्टेयर 20 से 25 क्विंटल धान की उपज मिलती है। इसकी तुलना में श्री विधि से धान लगाने पर प्रति हेक्टेयर 35 से 50 क्विंटल धान का उत्पादन होता है।

    बेड़ो जरिया के डोका टोली गांव निवासी सुरेश महतो ने प्रखंड के किसानों से धान लगाने के लिए श्री विधि अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों के लिए वरदान है। धान उत्पादन की श्रीविधि एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा पानी के बहुत कम प्रयोग से ही धान की बहुत अच्छी उपज ली जा सकती है।

    इसे सघन धान प्रनाली या श्री विधि के नाम से भी जाना जाता है। जहां पारंपरिक तकनीक में धान के पौधों को पानी से लबालब भरे खेतों में उगाया जाता है।

    वहीं, श्री विधि तकनीक में पौधों की जड़ों में नमी बरकरार रखना ही पर्याप्त होता है, लेकिन सिंचाई का उचित प्रबंध होना आवश्यक है ताकि जरूरत पड़ने पर फसल की सिंचाई की जा सके। इस विधि में सामान्य तौर से जमीन पर दरारें पड़ने के बाद ही सिंचाई करनी होती है।

     

    बेड़ो जरिया के डोका टोली गांव निवासी सुरेश महतो ने प्रखंड के किसानों से धान लगाने के लिए श्री विधि अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों के लिए वरदान है। धान उत्पादन की श्रीविधि एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा पानी के बहुत कम प्रयोग से ही धान की बहुत अच्छी उपज ली जा सकती है।

    इसे सघन धान प्रनाल

  • जयपुर में फॉलोअप शिविर शुरू, लंबित नागरिक मामलों का होगा समाधान

    जयपुर में फॉलोअप शिविर शुरू, लंबित नागरिक मामलों का होगा समाधान

     जयपुर
    मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सुशासन, पारदर्शिता एवं जनसेवा की सोच को धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक "शहरी सेवा शिविर–2026" का सफल आयोजन किया गया। इन शिविरों में प्राप्त लंबित एवं नवीन आवेदनों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए राज्य सरकार के निर्देशानुसार जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 21 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक नागरिक सेवा केन्द्र में फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    जयपुर विकास आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि इन फॉलोअप शिविरों का उद्देश्य शहरी सेवा शिविरों के दौरान प्राप्त प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना तथा आमजन को शीघ्र राहत प्रदान करना है। शिविरों में पट्टा, नामांतरण, लीज, भू-प्रबंधन, भवन निर्माण स्वीकृति, राजस्व वसूली, आवंटन, संस्थागत एवं आवासीय प्रकरणों सहित विभिन्न नागरिक सेवाओं से संबंधित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाएगा।

    फॉलोअप शिविर प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक नागरिक सेवा केन्द्र में आयोजित होंगे। प्रत्येक शिविर के लिए जोनवार कार्यक्रम निर्धारित किया गया है तथा अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

    जेडीए द्वारा 21 जुलाई को पीआरएन, जोन-7, 19 एवं 21, 22 जुलाई को जोन-8, 11, 16 एवं 17, 23 जुलाई को जोन-A, B, 9 एवं 22, 24 जुलाई को जोन-C, 12, 23 एवं 24 तथा 25 जुलाई को जोन-13, 14, 19 एवं 21 के कैंप आयोजित किए जाएंगे। इसी प्रकार 27 जुलाई से 31 अगस्त तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी जोनों के लिए चरणबद्ध फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे नागरिकों को अपने लंबित प्रकरणों के निस्तारण का अवसर मिल सके।

    उन्होंने बताया कि प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन का यथासंभव उसी दिन निस्तारण किया जाएगा। यदि किसी आवेदन का कार्य सायं 5 बजे तक पूर्ण नहीं हो पाता है तो कार्य पूर्ण होने तक शिविर जारी रहेगा।

    इसके अतिरिक्त नागरिक सेवा केन्द्र में आयोजित फॉलोअप शिविरों के साथ-साथ प्रत्येक जोन कार्यालय में भी शिविर अवधि के दौरान प्रतिदिन शिविर आयोजित कर नागरिकों के प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा, जिससे अधिकाधिक लोगों को समयबद्ध राहत मिल सके।

    जयपुर विकास प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने संबंधित जोन की निर्धारित तिथि के अनुसार नागरिक सेवा केन्द्र अथवा संबंधित जोन कार्यालय में आयोजित फॉलोअप शिविर में उपस्थित होकर अपने लंबित प्रकरणों का निस्तारण करवाएं तथा राज्य सरकार की इस जनहितकारी पहल का अधिकतम लाभ उठाएं।

  • पंजाब चुनाव 2027 से पहले बड़ा सियासी समीकरण, झुंदां गुट ने ‘वारिस पंजाब दे’ से मिलाया हाथ

    पंजाब चुनाव 2027 से पहले बड़ा सियासी समीकरण, झुंदां गुट ने ‘वारिस पंजाब दे’ से मिलाया हाथ

    चंडीगढ़.

    पंजाब की पंथक राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) में बड़ी टूट हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झुंदां समेत 15 नेताओं ने अलग गुट बनाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने वारिस पंजाब दे के साथ गठजोड़ का एलान किया।

    इस घटनाक्रम को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंथक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इकबाल सिंह झुंदां ने कहा कि पंजाब और खालसा पंथ मौजूदा समय में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में मजबूत, निडर और प्रतिबद्ध नेतृत्व की जरूरत है, जो पंथक हितों और पंजाब के मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठा सके।

    उन्होंने दावा किया कि वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह में विभिन्न पंथक संगठनों और विचारधाराओं को एक मंच पर लाने की क्षमता है। इसी सोच के तहत उनके गुट ने वारिस पंजाब दे के साथ मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। झुंदां ने कहा कि इस गठजोड़ का उद्देश्य पंजाब और सिख समुदाय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना, पंथक ताकतों को एकजुट करना और साझा एजेंडे के तहत काम करना है। उनका कहना था कि बिखरी हुई पंथक राजनीति को एक मंच पर लाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

    शिअद (पुनर सुरजीत) के भीतर पिछले कुछ समय से पार्टी की नीतियों, संगठन की कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद चल रहे थे। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पार्टी के कामकाज से असंतुष्ट बताए जा रहे थे। झुंदां गुट का आरोप है कि पार्टी अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई है और पंथक मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दे पा रही थी। इसी कारण अलग गुट बनाने का निर्णय लिया गया। इस टूट से शिअद (पुनर सुरजीत) को बड़ा झटका लगा है। 15 नेताओं के एक साथ अलग होने से पार्टी की संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है। वहीं, वारिस पंजाब दे के साथ हुए गठजोड़ ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की पंथक राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत दे दिए हैं।

  • SIR फॉर्म भरने में भ्रम, रांची में मतदाताओं को हो रही परेशानी

    SIR फॉर्म भरने में भ्रम, रांची में मतदाताओं को हो रही परेशानी

     रांची
     विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाने का कार्य जारी है, लेकिन कई बीएलओ के डोर-टू-डोर नहीं पहुंचने से बड़ी संख्या में मतदाताओं को फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है।

    कई मतदाताओं का कहना है कि उन्हें या तो फॉर्म मिला ही नहीं या फिर केवल फॉर्म थमा दिया गया, लेकिन उसे भरने की प्रक्रिया नहीं समझाई गई। ऐसे में कई लोगों को बीएलओ से फोन पर संपर्क करना पड़ा, जबकि कई मतदाताओं को विशेष शिविर में जाकर जानकारी लेनी पड़ी।

    जो मतदाता बीएलओ से संपर्क नहीं कर सके, वे जानकारी के अभाव में अनुमान के आधार पर फार्म भर रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में गलतियां सामने आ रही हैं।

    जानकारी के अभाव में मतदाता उन कालमों में भी विवरण भर रहे हैं, जिन्हें उनकी स्थिति में भरने की आवश्यकता नहीं है। कई लोग अपने नाम के स्थान पर माता-पिता का विवरण भर रहे हैं, तो कई ऐसे कॉलम भर रहे हैं जिन्हें खाली छोड़ना था। बाद में फॉर्म में व्हाइटनर लगाकर सुधार करना पड़ रहा है। कई मामलों में बीएलओ को भी ऑनलाइन डाटा प्रविष्टि के समय इन गलतियों को ठीक करना पड़ रहा है।

    सबसे अधिक भ्रम वर्ष 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से जुड़े कालम को लेकर है। अधिकांश मतदाताओं को यह जानकारी नहीं है कि यदि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका स्वयं का नाम दर्ज है तो कौन-सा कॉलम भरना है।

    वहीं, यदि स्वयं का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी में से किसी का नाम उस सूची में है, तो किस कॉलम में उनका विवरण भरना है। इसी भ्रम के कारण बड़ी संख्या में फार्म गलत भरे जा रहे हैं।

    शिकायतों के बाद रांची जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में 150 से अधिक बीएलओ को शोकॉज किया जा चुका है। आरोप है कि कई बीएलओ ने डोर-टू-डोर जाकर मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराने और उसे भरने की प्रक्रिया समझाने का कार्य संतोषजनक ढंग से नहीं किया।

    इसका सीधा असर एसआईआर अभियान पर पड़ रहा है। मतदाताओं का कहना है कि यदि बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म की जानकारी देते, तो इतनी संख्या में गलतियां नहीं होती।

    प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि फॉर्म भरने से पहले उसकी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लें। यदि किसी कॉलम को लेकर भ्रम हो तो संबंधित बीएलओ या विशेष शिविर में जाकर जानकारी प्राप्त करें, ताकि बाद में फॉर्म में सुधार की आवश्यकता न पड़े।

    फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
    1. ऊपरी और बायां भाग
    फॉर्म के ऊपरी तथा बाएं हिस्से में वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार नाम, पिता/पति/माता का नाम, आयु, पता एवं फोटो पहले से मुद्रित है। यहां दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर बीएलओ एप में पूरा विवरण देखा जा सकता है।

    2. यदि वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची में स्वयं का नाम दर्ज है
    यदि मतदाता का नाम वर्ष 2003 (अन्य राज्यों में 2002, 2003, 2004 अथवा 2025) की विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची में दर्ज है, तो फॉर्म के बाएं भाग में उसी सूची के अनुसार अपना पूरा विवरण अंकित करें। यदि नाम दर्ज नहीं है, तो इस हिस्से को तिरछा काट दें या खाली छोड़ दें।

    3. यदि स्वयं का नाम नहीं, लेकिन रिश्तेदार का नाम दर्ज है
    यदि मतदाता का नाम वर्ष 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी में से किसी का नाम दर्ज है, तो फॉर्म के दाएं भाग में उनमें से किसी एक का विवरण उसी प्रकार भरें, जैसा बीएलओ एप में मैप किया गया है।

    4. निचले हिस्से में यह जानकारी भरें
    जन्म तिथि, मोबाइल नंबर, आधार नंबर (वैकल्पिक), तथा माता-पिता एवं पति/पत्नी (जहां लागू हो) का सही विवरण अंकित करें। माता-पिता का नाम देना अनिवार्य है।

    जन्मतिथि के आधार पर ऐसे भरें फॉर्म

    • जन्म तिथि 01 जुलाई 1987 से पहले तथा वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं का नाम दर्ज है, तो बाएं भाग में अपना पूरा विवरण भरें।
    • जन्म तिथि 01 जुलाई 1987 के बाद और 02 दिसंबर 2004 से पहले है तथा माता या पिता का नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज है, तो दाएं भाग में माता या पिता का विवरण भरें।
    • जन्म तिथि 02 दिसंबर 2004 के बाद है तथा माता-पिता का नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज है, तो दाएं भाग में माता या पिता में से किसी एक का पूरा विवरण अंकित करें
  • हरियाणा में कारोबारी सुधार तेज, 21 कंप्लायंस रिफॉर्म को मिली मंजूरी

    हरियाणा में कारोबारी सुधार तेज, 21 कंप्लायंस रिफॉर्म को मिली मंजूरी

     चंडीगढ़
     हरियाणा सरकार ने उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। केंद्र सरकार के अनुपालन में कमी (कंप्लायंस रिडक्शन) और डी-रेग्यूलेशन अभियान के तहत राज्य ने 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 को मंजूरी दे दी है। इस उपलब्धि के साथ हरियाणा इस अभियान में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी विभागों को निर्देश दिए कि शेष सुधारों को निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए और उनकी प्रगति से जुड़े दस्तावेज समय पर एमआइएस पोर्टल पर अपलोड किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की उपलब्धियां सही ढंग से दर्ज हो सकें।

    मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा नियामक ढांचा विकसित करना है, जो पारदर्शी, तकनीक आधारित और उद्योगों के लिए अनुकूल हो। इससे निवेश आकर्षित होगा, उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में कारोबार करने की सुगमता (ईज आफ डूइंग बिजनेस) और बेहतर होगी।

    निरीक्षण व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना शामिल
    बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार के डी-रेग्यूलेशन सेल ने पहले ही छह प्रमुख सुधारों को मंजूरी दे दी है। इनमें बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाना, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के नियमों में उदारीकरण, सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध सेवाएं, हरियाणा सेवा का अधिकार व्यवस्था में आटो-अपील प्रणाली, पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में सुधार तथा एमएसएमइ के लिए निरीक्षण व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना शामिल है।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि 15 अन्य सुधारों पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें भूमि उपयोग नियमों का उदारीकरण, भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया का सरलीकरण, औद्योगिक प्लाट प्रबंधन में लचीलापन, वैश्विक मानकों के अनुरूप अग्नि सुरक्षा नियम, स्वास्थ्य क्षेत्र में लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाना और राज्य के कानूनों व नियमों का डिजिटलीकरण प्रमुख हैं।

    तीन साल तक छूट देने का प्रावधान
    बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक-2026 का मसौदा तैयार कर लिया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमइ इकाइयों को स्व-घोषणा के आधार पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र मिलेगा और उन्हें सरकारी निरीक्षण से तीन वर्ष तक की छूट देने का प्रविधान किया जाएगा। साथ ही हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (एचइपीसी) को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाकर सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित किया जाएगा।

    बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रित क्षेत्रों से बाहर प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने के लिए सीएलयू की आवश्यकता नहीं है। वहीं नियंत्रित क्षेत्रों में भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के सिस्टम जनरेटेड सीएलयू स्वीकृति की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

    इसके अलावा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम-2022 में संशोधन कर जोखिम आधारित अग्नि सुरक्षा मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप लागू करने की प्रक्रिया भी जारी है।

  • गुरुग्राम बसई जलघर विस्तार को मंजूरी, 370 एमएलडी होगी जलशोधन क्षमता

    गुरुग्राम बसई जलघर विस्तार को मंजूरी, 370 एमएलडी होगी जलशोधन क्षमता

     गुरुग्राम
     साइबर सिटी की बढ़ती आबादी और भविष्य की पेयजल जरूरतों को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) बसई जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) का बड़ा विस्तार करेगा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी (एचपीडब्ल्यूपीसी) की बैठक में 149 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत सौ एमएलडी क्षमता की नई फिल्ट्रेशन यूनिट और 300-300 मिलियन लीटर क्षमता के दो अवसादन-सह-भंडारण टैंक बनाए जाएंगे।

    परियोजना पूरी होने पर बसई जलघर की शोधन क्षमता 270 एमएलडी से बढ़कर 370 एमएलडी हो जाएगी, जबकि जल भंडारण क्षमता में 600 मिलियन लीटर की बढ़ोतरी होगी। नई यूनिट के लिए जीएमडीए के पास बसई में 77 एकड़ जमीन उपलब्ध है।

    600 मिलियन लीटर बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता
    परियोजना के तहत दो नए भंडारण टैंक बनाए जाएंगे, जिनकी क्षमता 300-300 मिलियन लीटर होगी। इसके अलावा कच्चे पानी की नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी और आधुनिक ऑटोमेशन व मानीटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इन कार्यों से जल शोधन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

    अंतिम छोर के क्षेत्रों को मिलेगा बेहतर जलापूर्ति लाभ
    जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि नई फिल्ट्रेशन यूनिट शुरू होने के बाद शहर के मौजूदा और विकसित हो रहे सेक्टरों की बढ़ती पेयजल मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता के कारण पीक डिमांड और रखरखाव के दौरान भी जलापूर्ति प्रभावित नहीं होगी। साथ ही सप्लाई नेटवर्क के अंतिम छोर (टेल एंड) तक भी बेहतर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    670 एमएलडी पेयजल की हो रही है आपूर्ति
    वर्तमान में जीएमडीए बसई और चंदू बुढ़ेड़ा जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 670 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। बसई जलघर में फिलहाल तीन फिल्ट्रेशन यूनिट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 270 एमएलडी और जल भंडारण क्षमता लगभग 1,385 मिलियन लीटर है।

    वहीं चंदू बुढ़ेड़ा जलघर में चार फिल्ट्रेशन यूनिट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 400 एमएलडी तथा भंडारण क्षमता करीब 1,615 मिलियन लीटर है।

    दो हजार मिलियन लीटर के करीब होगी भंडारण क्षमता
    नई परियोजना पूरी होने के बाद बसई जलघर की जल शोधन क्षमता 370 एमएलडी तक पहुंच जाएगी, जबकि जल भंडारण क्षमता बढ़कर लगभग दो हजार मिलियन लीटर हो जाएगी। इससे गुरुग्राम के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र की दीर्घकालिक पेयजल जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी

    पेयजल ढांचे को लगातार किया जा रहा मजबूत
    जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने कहा कि गुरुग्राम के तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए पेयजल शोधन और भंडारण क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किए जा रहे हैं।