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  • IDFC बैंक घोटाला: चंडीगढ़-लुधियाना में CBI की बड़ी रेड, 5 ठिकानों से रिकॉर्ड जब्त

    IDFC बैंक घोटाला: चंडीगढ़-लुधियाना में CBI की बड़ी रेड, 5 ठिकानों से रिकॉर्ड जब्त

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ में हुए 116 करोड़ रुपये के घोटाले में सीबीआई ने वीरवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में पांच जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मामले से जुड़े संदिग्ध लाभार्थियों, एक सरकारी अधिकारी और निजी संस्थाओं के परिसरों पर की गई।

    सीबीआई के अनुसार, तलाशी के दौरान डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, डिजिटल सिग्नेचर, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। जब्त रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। सीबीआइ ने बताया कि यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम के खातों में हुए धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। सीबीआई ने यह जांच हरियाणा सरकार के अनुरोध पर राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। सीबीआई के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर 32 स्थित शाखा में लगभग स्मार्ट सिटी के करीब 116 करोड़ एफडी के रूप में जमा थे, लेकिन आरोपितों ने मिलीभगत कर इस रकम को निकलवा कर शेल कम्पनियों में ट्रांसफर कर दिया। इन फर्जी कंपनियों के जरिए आरोपितों ने करोड़ों रुपये कमा लिए।

    ऐसा ही घोटाला पहले हरियाणा सरकार के भी कई विभागों के साथ किया गया था। एजेंसी ने बताया कि हरियाणा मामले में अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। चंडीगढ़ में स्मार्ट सिटी घोटाले में सात और में पांच क्रेस्ट मामले में पांच बैंककर्मियों, दो क्रेस्ट अधिकारियों, चार निजी व्यक्तियों और दो कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

  • बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप हेतु जमीन बेचने वालों को 30 दिनों में मिलेगा भुगतान

    बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप हेतु जमीन बेचने वालों को 30 दिनों में मिलेगा भुगतान

    पटना
    बिहार में विकसित हो रहे 12 सेटेलाइट टाउनशिप में से अगर कोई रैयत अपनी जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो आवेदन के 30 दिनों के भीतर उनको राज्य आवास बोर्ड की ओर से पैसा भुगतान कर दिया जाएगा। इसके लिए एसओपी तैयार है। बुधवार को विधान परिषद में रवीन्द्र प्रसाद सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप योजना की अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। चूंकि बिहार में राष्ट्रीय औसत की तुलना में शहरीकरण कम है, जबकि शहरी क्षेत्रों में न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है, बल्कि जीडीपी में भी योगदान अधिक होता है। एक आकलन के अनुसार 2030 तक शहरी क्षेत्र के लोगों का जीडीपी में 75 फीसदी तक योगदान हो सकता है।

    इसलिए सरकार ने सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार की यह कतई मंशा नहीं है कि वह किसानों से जबरिया जमीन ले। किसानों से स्वेच्छा से जमीन मांगी जा रही है। अब तक 750 किसानों ने स्वेच्छा से जमीन देने की सहमति जता दी है। जिस जिले में आवास बोर्ड का कार्यालय नहीं है वहां एक-एक नोडल पदाधिकारी नामित किए गए हैं। जमीन मालिक संबंधित नोडल पदाधिकारी से मिलकर आवेदन दे सकते हैं।

    इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन की भी व्यवस्था है। लैंड पुलिंग में रैयतों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। रवीन्द्र सिंह ने एक निश्चित अवधि की घोषणा कर किसानों को जमीन की बिक्री करने की अनुमति देने की मांग की, जबकि नीरज कुमार ने कहा कि किसानों में संशय की स्थिति है। सौरभ कुमार के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि सैरातों की बंदोबस्ती में नियमों का ख्याल रखा जाना है। शिकायत मिली है तो मुख्यालय से टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

    राजद के सुनील सिंह आपस में भिड़े
    सेटेलाइट टाउनशिप योजना के सवाल-जवाब के क्रम में राजद के सुनील सिंह और भाजपा के प्रो नवल किशोर यादव आपस में भिड़ गए। उच्च सदन में अमर्यादित टिप्पणी भी हुई। हालांकि सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उस शब्द को विप की कार्यवाही से बाहर कर दिया। दरअसल नगर विकास मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सुनील सिंह ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप में मेरी पूरी जमीन चली गई। आज मेरे पास एक कठ्ठा भी जमीन नहीं बची। लेकिन मेरा एक प्लॉट 40 लाख रुपए कठ्ठा है तो दूसरा दो लाख है।

    ऐसे में सरकार कुल जमीन का 55 फीसदी ही हिस्सेदारी कैसे दे सकती है। हम जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो सरकार ने उस पर रोक लगा रखी है। सुनील सिंह ने यह भी कहा कि देश के एक नामी-गिरामी उद्योगपति सपत्नीक हाल ही में मस्तीचक गए थे। सब जानते हैं कि वे सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन देखने गए थे। इस पर नवल किशोर यादव ने कहा कि कोई किसान परेशान नहीं हैं।

  • पंजाब कांग्रेस में खुलकर घमासान, चन्नी की इस्तीफे की चेतावनी, वेणुगोपाल के सामने वारिंग से तीखी नोकझोंक

    पंजाब कांग्रेस में खुलकर घमासान, चन्नी की इस्तीफे की चेतावनी, वेणुगोपाल के सामने वारिंग से तीखी नोकझोंक

    चंडीगढ़
    पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल कर रहे थे। इस दौरान पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस मुख्यालय में हुई यह बैठक बिना किसी सहमति या नतीजे के बेनतीजा समाप्त हो गई। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (पंजाब) अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। बैठक के बाद किसी भी नेता ने मीडिया से खुलकर बात करने से परहेज किया।

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अंदरूनी गुटबाजी उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने खुले तौर पर चेतावनी दे डाली। चन्नी ने कहा कि यदि राजा वारिंग प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं तो वह चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह ने शीर्ष नेतृत्व पर जमीनी सर्वे रिपोर्टों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। बैठक में विरोधी गुट के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे वारिंगग के नेतृत्व में चुनाव में जाने के पक्ष में नहीं हैं।

    इस बैठक के दौरन विरोधी धड़े ने राजा वांरिग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई। वेणुगोपाल ने नेताओं को सरेआम बयानबाजी और सार्वजनिक रूप से पार्टी की अंदरूनी कलह उजागर करने पर कड़ी फटकार लगाई। एक वरिष्ठ नेता ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से सीधे कहा कि अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप पार्टी को आगामी चुनावों में जीत की ओर ले जाते हैं या हार की ओर।

    सर्वे रिपोर्ट के बाद भड़का विवाद
    सूत्रों के अनुसार, बैठक में हंगामा तब शुरू हुआ जब पार्टी के चुनावी रणनीतिकार सुनील कानूगोलू ने अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि वारिंग को पीसीसी अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले के बाद मालवा क्षेत्र में कांग्रेस के ग्राफ और समर्थन में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट सामने आते ही नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई। हाईकमान ने चन्नी, वारिंग और रंधावा को एक साथ लाने और मतभेद सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन सभी प्रयास विफल साबित हुए।

    वेणुगोपाल के जाते ही बीच में बैठक छोड़ निकले नेता
    बैठक का माहौल इतना तल्ख था कि जैसे ही केसी वेणुगोपाल बाहर निकले कि चन्नी और रंधावा भी तुरंत बैठक छोड़कर चले गए। हालांकि भूपेश बघेल और राजा वारिंग काफी देर तक वहीं बैठे रहे। बैठक के बाद पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि चूंकि कुछ प्रमुख नेता इस बैठक में शामिल नहीं हो सके थे इसलिए रणनीतिक चर्चा को पूरा करने के लिए कल यानी गुरुवार को दोबारा बैठक बुलाई गई है।

  • फार्मेसी परीक्षा नकल विवाद पर AAP मंत्री हरजोत बैंस का बड़ा बयान, बोले- जरूरत पड़ी तो इस्तीफा देने को तैयार

    फार्मेसी परीक्षा नकल विवाद पर AAP मंत्री हरजोत बैंस का बड़ा बयान, बोले- जरूरत पड़ी तो इस्तीफा देने को तैयार

    लुधियाना

    पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हरजोत सिंह बैंस ने राज्य में परीक्षा प्रणाली और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के हमलों पर पलटवार किया है। हरजोत बैंस ने कहा कि अगर पंजाब का एजुकेशन सिस्टम उनके इस्तीफे से इंप्रूव होता है

    शिक्षामंत्री हरजोत बैंस दिल्ली में कॉक्रोच जनता पार्टी के धरने में शामिल होने गए थे। उसके बाद से ही कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने हरजोत बैंस से इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया था।

    विपक्ष का आरोप था कि पंजाब में फार्मेसी एग्जाम के दौरान नकल का बड़ा मामला सामने आया है। इसके लिए सीधे तौर पर पंजाब सरकार जिम्मेदार है। उसके जवाब में हरजोत बैंस ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो 2011 में राजनीति में अकेले आए थे और अब भी जंतर मंतर पर अकेले गए।

    बैंस ने कहा कि फार्मेसी एग्जाम में नकल और गड़बड़ी की बात को उनकी सरकार ने दबाने के बजाय खुद पकड़ा और उजागर किया है। हमारी मंशा सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने की है, न कि गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की।

    'हमने गड़बड़ी पकड़ी, तो हम पर ही हमला'

    कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि

    "फार्मेसी परीक्षा में जो भी अनियमितता हुई, उसे हमारी सरकार और प्रशासन ने स्वयं ट्रेस किया और सख्त कार्रवाई की। हमारी सरकार भ्रष्टाचार और पेपर लीक या नकल के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अगर राज्य की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए मेरे पद छोड़ने से कोई सुधार होता है, तो मैं आज ही अपना इस्तीफा देने को तैयार हूँ।"

    विभाग डॉक्टर बलबीर सिंह के पास, इस्तीफे की पेशकश बैंस ने की
    फार्मेसी एग्जाम सेहत विभाग में फार्मासिस्ट की नियुक्ति के लिए था और परीक्षा लेने की जिम्मेदारी बाबा फरीद मेडिकल साइंसेज यूनिवर्सिटीके पास थी। पंजाब में सेहत विभाग व मेडिकल एजुकेशन विभाग डॉ बलबीर सिंह के पास है। ऐसे में परीक्षा में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी डॉ बलबीर सिंह को लेनी चाहिए थी लेकिन पंजाब के शिक्षामंत्री हरजोत बैंस ने इसके लिए इस्तीफा देने की पेशकश कर दी।

    लाठीचार्ज और पेपर लीक पर साधा था निशाना
    हाल ही में पंजाब में विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और परीक्षाओं में गड़बड़ी के मुद्दों को लेकर राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष ने न केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संबंधित मंत्रियों से इस्तीफे की भी मांग की थी। इसी का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री बैंस ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में पेपर लीक और धांधली के मामले दबा दिए जाते थे, जबकि 'आप' सरकार मामलों की तह तक जाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

     पेपर लीक के मामले में सीएम मान के इस्तीफे की मांग 
    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बुधवार को राज्य में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की।

    उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार हैं और देश उनसे जवाब और जवाबदेही चाहता है, उसी प्रकार मान और बैंस पंजाब में हुए पेपर लीक के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

    राज्य अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अगर पंजाब में पेपर लीक होता है, तो जिम्मेदार नेता को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।'

    उन्होंने बताया कि पंजाब ग्रुप-बी पेपर लीक की घटना को छह महीने हो चुके हैं। इससे पहले, कक्षा 12 की अंग्रेजी, पीएसटीईटी और फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा के पेपर भी लीक हुए थे। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में चार बड़े पेपर लीक घोटाले हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई है, न ही कोई जवाबदेही तय की गई है, कार्रवाई तो दूर की बात है। हमें बताइए, भगवंत मान कब इस्तीफा देंगे? उन्होंने पूछा और कहा कि पंजाब के युवाओं को जवाबदेही चाहिए, बहाने नहीं।

    उन्होंने कहा कि जिस तरह छात्र दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उसी तरह पंजाब में भी फार्मेसी का पेपर लीक हुआ और वहां भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने उन्हें पीटा, मारपीट की और खदेड़ दिया।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को जवाब देना होगा कि फार्मेसी का पेपर कैसे लीक हुआ और इस पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पेपर लीक की समस्या को सुलझाने और प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने में विफल रही हैं।

    इस बीच, चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को सेक्टर 17 प्लाजा में दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए क्रूर लाठीचार्ज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ये छात्र जंतर-मंतर पर पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में 'भ्रष्टाचार' के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

    पंजाब में किन नेताओं ने 'आप' सरकार पर उठाए थे सवाल…

    प्रताप सिंह बाजवा (कांग्रेस – नेता प्रतिपक्ष):

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि राज्य में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने फार्मेसी परीक्षा में नकल और राज्य में आए दिन अपनी जायज मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर हो रहे पुलिस लाठीचार्ज को लेकर मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की थी।

    अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष):
    पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजा वडिंग ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार में परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं हो पा रही हैं और हक मांगने पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।

    सुखबीर सिंह बादल (शिरोमणि अकाली दल प्रमुख):
    अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने कहा था कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और शिक्षकों पर पुलिस बल प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया था कि पारदर्शी व्यवस्था के दावों की हवा क्यों निकल रही है।

    सुनील जाखड़ (भाजपा पंजाब पूर्व अध्यक्ष):
    पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी भगवंत मान सरकार को घेरते हुए कहा था कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए लाठी का सहारा ले रही है। उन्होंने परीक्षाओं में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठाई थी।

    केवल सिंह ढिल्लों (पंजाब भाजपा अध्यक्ष)
    केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पंजाब में फार्मेसी की परीक्षा में बड़े लेवल पर नकल करवाई जा रही थी। शिक्षकों व कर्मचारियों को रोज डंडे मारे जा रहे हैं। सफाई सेवकों को पुलिस ने बर्बरता से पीटा है और आप सरकार दिल्ली में हुए लाठी चार्ज पर सवाल उठा रही है और खुद कर्मचारियों पर लाठी चार्ज कर रही है।

  • झारखंड में शुरू होंगे एएमई और एयर होस्टेस कोर्स, युवाओं को मिलेगा नया अवसर

    झारखंड में शुरू होंगे एएमई और एयर होस्टेस कोर्स, युवाओं को मिलेगा नया अवसर

    झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट ने विमानन अभियंता सह एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमइ) कोर्स के संचालन के लिए दिल्ली की संस्था मेसर्स वेन्योर के साथ एमओयू किया है. वहीं एयर होस्टेस के प्रशिक्षण के लिए भोपाल के एआइएसइसीटी लिमिटेड के साथ करार हुआ है. दोनों पाठ्यक्रमों की शुरुआत नवंबर में मुख्यमंत्री स्थापना दिवस पर करेंगे. झारखंड पूर्वी भारत का ऐसा पहला राज्य होगा जहां सरकारी स्तर पर दोनों पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होगी. पड़ोसी राज्यों में सरकारी स्तर पर ऐसे कोर्स उपलब्ध नहीं हैं. धनबाद में खनन इंजीनियरिंग संस्थान उपलब्ध है. इसलिए यहां इस संस्थान को शुरू करने का निर्णय सरकार ने लिया है. मेसर्स वेन्योर यह पाठ्यक्रम पीपीपी मोड पर चलायेगा. इससे राज्य सरकार व फ्लाइंग इंस्टीट्यूट पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा. एएमइ कोर्स में कुल 60 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि एयर होस्टेस के छह महीने और 12 महीने के कोर्स में 60-60 सीटें उपलब्ध रहेंगी. डीजीसीए की अनुमति के बाद पाठ्यक्रमों का संचालन आरंभ कर दिया जायेगा.

    एएमई तीन वर्ष, एयर होस्टेस के छह व 12 माह के कोर्स
    झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट वेन्योर संस्थान को दोनों पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आधारभूत संरचना उपलब्ध करायेगा. इससे इंस्टीट्यूट को कुछ वित्तीय लाभ भी मिलेगा. इस संस्थान के आरंभ होने से राज्य और पड़ोसी राज्यों के युवक-युवतियों को सरकारी स्तर पर कोर्स करने के लिए दूरवर्ती राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा और न ही अत्यधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमइ) के लिए तीन वर्ष का कोर्स होगा, जिसके लिए छह लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे तीन बराबर किस्तों में बांटा गया है. उन्हें हर साल दो-दो लाख रुपये देना होगा. इसी प्रकार एयर होस्टेस के छह महीने के प्रशिक्षण कोर्स के लिए एक लाख पांच हजार रुपये निर्धारित किये गये हैं. वहीं 12 महीने के डिप्लोमा कोर्स के लिए एक लाख 55 हजार पांच सौ रुपये निर्धारित हैं. इसमें ड्रेस, ग्रूमिंग किट व स्विमिंग प्रशिक्षण शामिल है. एयर होस्टेस के लिए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 30 जुलाई है. फॉर्म भरने के लिए झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर जाकर इसे भरें.

    झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के एमडी ने क्या कहा?
    झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के एमडी कैप्टन एसपी सिन्हा ने कहा कि एविएशन इंजीनियरों की कमी और झारखंड के युवक-युवतियों को इसका अवसर प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिशा-निर्देश पर दोनों पाठ्यक्रमों को शुरू किया जा रहा है. इसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. एविएशन इंजीनियरिंग व एयर होस्टेस के कोर्स राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होंगे.

  • हरियाणा के SP अनिल कुमार को बड़ी जिम्मेदारी, बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के स्टेट कमिश्नर

    हरियाणा के SP अनिल कुमार को बड़ी जिम्मेदारी, बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के स्टेट कमिश्नर

    चंडीगढ़.

    अनिल कुमार को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, स्टेट कमिश्नर हरियाणा के हेडक्वार्टर की जिम्मेदारी दी गई। हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। वारंट ऑफ़ अपॉइंटमेंट देकर राज्यपाल असीम कुमार घोष ने लोकभवन में सम्मानित किया।

    अनिल कुमार फिलहाल ऑफ़िस ऑफ़ डीजीपी जेल हरियाणा में तैनात है। अपनी विभागीय ज़िम्मेदारी के साथ भारत स्काउट्स एवं गाइड के हरियाणा मुख्यालय में स्टेट कमिश्नर की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे। अपनी नई जिम्मेदारी के तहत युवा चरित्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में विकास का काम करेंगे। 

  • पंजाब के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब 12वीं तक AI की पढ़ाई होगी अनिवार्य

    पंजाब के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब 12वीं तक AI की पढ़ाई होगी अनिवार्य

    चंडीगढ़.

    पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई अब बदलती तकनीक के अनुरूप होगी। राज्य सरकार ने पहली से 12वीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को कोर विषय के रूप में लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था गुरुवार से शुरू होगी।

    इसके साथ ही पंजाब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां स्कूल स्तर पर एआई की पढ़ाई को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बुधवार को एआई आधारित पाठ्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर विद्यार्थियों तक नई पाठ्यपुस्तकें पहुंचा दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि एआई तेजी से बदलने वाली तकनीक है, इसलिए पाठ्यक्रम को हर छह महीने में अपडेट किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को नवीनतम जानकारी मिलती रहे।

    कक्षा अनुसार पढ़ाई, शिक्षकों को लाइव ट्रेनिंग
    पाठ्यक्रम को अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार तैयार किया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को एआई का परिचय और उसके जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी जाएगी। वहीं छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को फाउंडेशन एआई, एआई स्किल, इनोवेशन स्किल और विभिन्न क्षेत्रों में इसके व्यावहारिक उपयोग की पढ़ाई कराई जाएगी। पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा और भविष्य में रोजगार के अवसरों में मदद मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग ने एआई शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण और लाइव आनलाइन कक्षाओं की भी व्यवस्था की है। उद्देश्य यह है कि शिक्षक भी तकनीक में होने वाले बदलावों के साथ लगातार अपडेट रहें और विद्यार्थियों को आधुनिक तरीके से पढ़ा सकें।

    ग्लोबल एजुकेशन, रोजगार की बदलती जरूरतें
    कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आने वाले समय में केवल रटकर पढ़ाई करने से काम नहीं चलेगा। विद्यार्थियों में सवाल पूछने, तर्क करने और समस्या का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में एआई का उपयोग परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी चुनौतियों से निपटने में भी किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री का कहना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में स्कूल स्तर पर एआई शिक्षा को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में पंजाब के विद्यार्थियों को भी वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी स्कूलों के छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और रोजगार की बदलती जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।

  • पंजाब सरकार का सख्त फैसला! नाबालिग के वाहन चलाने पर माता-पिता के खिलाफ होगी कार्रवाई

    पंजाब सरकार का सख्त फैसला! नाबालिग के वाहन चलाने पर माता-पिता के खिलाफ होगी कार्रवाई

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों पर सख्ती बरतने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो केवल उसी के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके माता-पिता, अभिभावक या वाहन मालिक के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।  मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर कोई नाबालिग गाड़ी चलाते हुए पकड़ा गया तो जिम्मेदारी सीधे उसके माता-पिता, अभिभावक या वाहन मालिक पर तय होगी। नए नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई होगी, जिनमें: –

    • 1. भारी जुर्माना मौके पर लगाया जाएगा
    • 2. वाहन का रजिस्ट्रेशन तुरंत रद्द किया जा सकता है  
    • 3. नाबालिग 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अयोग्य घोषित होगा

    हरपाल सिंह चीमा ने कहा- सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं। नाबालिग ड्राइविंग सिर्फ नियम तोड़ना नहीं, बल्कि दूसरों की जान से खिलवाड़ है। इसलिए सरकार ने इसके खिलाफ सबसे सख्त कदम उठाया है।

    लोगों में जागरूकता जरूरी
    सरकार की नई व्यवस्था के तहत यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो सबसे पहले मौके पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित वाहन का पंजीकरण तत्काल रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इतना ही नहीं, वाहन चला रहे नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जिनमें बिना लाइसेंस या कम उम्र के चालक शामिल होते हैं। ऐसे हादसों में कई बार निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। इसलिए सरकार का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों में जिम्मेदारी और जागरूकता पैदा करना है।

    गलत फैसला बड़े हादसे का बन सकता है कारण
    उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिद या शौक के कारण उन्हें वाहन सौंपना भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यदि अभिभावक स्वयं सतर्क रहेंगे तो सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। परिवहन विभाग का मानना है कि इस सख्त नीति के लागू होने के बाद नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही अभिभावक और वाहन मालिक भी अधिक जिम्मेदारी दिखाएंगे। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों की जांच की जाएगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी।

  • बिहार के सरकारी स्कूलों में नया ड्रेस कोड लागू, अब जींस-टीशर्ट पहनकर नहीं आ सकेंगे शिक्षक

    बिहार के सरकारी स्कूलों में नया ड्रेस कोड लागू, अब जींस-टीशर्ट पहनकर नहीं आ सकेंगे शिक्षक

    पूर्णिया.

    शिक्षा विभाग के नए निर्देश के बाद पूर्णिया जिले के सरकारी विद्यालयों में अब शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों को अनिवार्य रूप से फॉर्मल ड्रेस में ही विद्यालय आना होगा। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को आदेश जारी कर कहा है कि निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाए।

    अब पूर्णिया जिला शिक्षा कार्यालय भी जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में इस आदेश के अनुपालन की निगरानी करेगा। शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 9 अक्टूबर 2024 को जारी निर्देशों का कई विद्यालयों में प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा था। इसे देखते हुए विभाग ने दोबारा सख्त आदेश जारी किया है। नए निर्देश के अनुसार विद्यालय अवधि के दौरान सभी शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी केवल औपचारिक (फॉर्मल) पोशाक में ही उपस्थित होंगे। साथ ही विद्यालय परिसर में शालीन व्यवहार बनाए रखना होगा और किसी भी प्रकार की अमर्यादित गतिविधि से बचना होगा, जिससे शैक्षणिक वातावरण और संस्थान की गरिमा प्रभावित न हो।

    शिक्षा विभाग ने पूर्णिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित सभी जिलों के डीईओ को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें। यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अनुपालन की रिपोर्ट भी विभाग को भेजनी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से पूर्णिया जिले के सरकारी विद्यालयों में अनुशासन, पेशेवर कार्यसंस्कृति और बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित होगा। अब देखना होगा कि जिले के सैकड़ों सरकारी विद्यालयों में इस आदेश का पालन कितनी प्रभावी ढंग से कराया जाता है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब में किसानों का बड़ा एक्शन, संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी टोल किए फ्री

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब में किसानों का बड़ा एक्शन, संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी टोल किए फ्री

    पटियाला.

    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को पूरे पंजाब में दोपहर तक विभिन्न टोल प्लाजाओं को आम लोगों के लिए निशुल्क कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान संगठनों के सदस्य अलग-अलग टोल प्लाजाओं पर पहुंचे और वाहनों को बिना टोल टैक्स के गुजरने दिया।
    पटियाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित धरेड़ी जट्टां टोल प्लाजा पर भी किसानों ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर टोल प्लाजा को निर्धारित समय तक फ्री कराया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड समझौते का विरोध जताया। किसान नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील लागू होने से देश के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका आरोप है कि विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से किसानों की फसलें उचित मूल्य पर नहीं बिक पाएंगी, वहीं छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारोबार पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा।

    इससे पहले मंगलवार को भी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान संगठन शंभू बार्डर और खनौरी बार्डर पर एकत्र हुए थे, जहां उन्होंने केंद्र सरकार से प्रस्तावित ट्रेड समझौते को रद्द करने की मांग उठाई थी। क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह लाली ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के सभी घटक संगठनों ने एकजुट होकर पूरे पंजाब में टोल प्लाजाओं को निशुल्क कराया है। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते को तत्काल रद्द करना है, क्योंकि इससे किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

    उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की आवाज नहीं सुनेगी तो संयुक्त किसान मोर्चा अपना आंदोलन और तेज करेगा। आने वाले दिनों में भाजपा नेताओं के कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे ताकि सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाई जा सके। सुखविंदर सिंह लाली ने कहा कि वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन की तरह इस संघर्ष में भी किसान, मजदूर, ट्रेड यूनियन और समाज के विभिन्न वर्ग किसानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब के लोग इस आंदोलन को लगातार समर्थन देते रहेंगे और केंद्र सरकार को किसानों की मांगें मानने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।