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  • झारखंड में कोल नीर प्लांट शुरू, खदानों के पानी से मिलेगा शुद्ध पेयजल

    झारखंड में कोल नीर प्लांट शुरू, खदानों के पानी से मिलेगा शुद्ध पेयजल

     रांची
     सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के पिपरवार क्षेत्र और धनबाद में बीसीसीएल के पुटकी बलिहारी में स्थापित कोल नीर प्लांट का केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी.किशन रेड्डी ने बुधवार को दिल्ली से वर्चुअल उद्घाटन किया। रेड्डी ने कहा कि 'कोल नीर' नवाचार, वेस्ट टू वेल्थ की तथा एवं प्रधानमंत्री की अवधारणा 'हर घर जल' के संकल्प का सशक्त उदाहरण है।

    खदानों के जल का प्रभावी उपयोग कर उसे जनकल्याण, विकास का माध्यम एवं आजीविका का साधन बनाया जा रहा है। साथ ही, खदान बंदी की प्रक्रिया के लिए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से की जाने वाली माइन क्लोजर गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता को मजबूत करती हैं। इसके तहत पुनर्वासित खनन क्षेत्रों का उपयोग इको पार्क सहित विभिन्न सामुदायिक एवं पर्यावरण हितैषी परियोजनाओं के विकास में किया जा रहा है।

    इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ,कोयला खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, सचिव, कोयला मंत्रालय विक्रम देव दत्त एवं अपर सचिव रूपिंदर बरार मौजूद थे।

    दिल्ली में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी साई राम, सीसीएल सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह समेत कोल इंडिया लिमिटेड के अन्य अनुषंगी कंपनियों के सीएमडी एवं वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

    केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है, तो हमें उनसे एक कदम आगे बढ़कर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि विकास और कार्य संस्कृति में नवाचार के साथ-साथ संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

    कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि “कोल नीर” पहल के माध्यम से आमजनमानस तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम भी बन रही है।

    कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि 'कोल नीर' पहल के माध्यम से कोयला मंत्रालय माइन वाटर के सतत एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। इस दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, भारत सरकार द्वारा 'आरोह' माइन क्लोजर पर वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण किया गया।

    इसके अतिरिक्त सीसीएल द्वारा माइन क्लोजर से संबंधित मॉडल भी प्रदर्शित किया गया जिसका उद्घाटन मंत्री ने किया। वहीं, पिपरवार क्षेत्र के उद्घाटन समारोह में निदेशक(वित्त) पवन कुमार मिश्रा, निदेशक(मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक (तकनीकी/संचालन) चंद्र शेखर तिवारी, निदेशक( योजना एवं परियोजना) अनूप हंजूरा, महाप्रबंधक पिपरवार सुजीत कुमार आदि मौजूद थे।

    जल शोधन क्षमता 25 किलोलीटर प्रतिदिन
    गौरतलब है कि इस अत्याधुनिक प्लांट की जल शोधन क्षमता 25 किलोलीटर प्रतिदिन है। यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से 500 मिलीलीटर और 1 लीटर की बोतलों को प्रति मिनट 40 बोतल तक भरने की क्षमता विकसित की गई है।

    इसके साथ ही 20 लीटर के जार भरने की सुविधा भी उपलब्ध है। प्लांट पूर्णतः महिला द्वारा संचालित होगा, इसके लिए सीसीएल की ओर से स्वयं सहायता ग्रुप की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। यह प्लांट न सिर्फ स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि आस पास के क्षेत्रों में स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल की भी उपलब्धता सुनिश्चित होगी

  • झारखंडी सिनेमा की नई उड़ान, स्थानीय फिल्मकारों ने बनाई राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान

    झारखंडी सिनेमा की नई उड़ान, स्थानीय फिल्मकारों ने बनाई राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान

    रांची
    झारखंड की अपनी सिनेमाई भाषा का महत्वपूर्ण विस्तार उसके आदिवासी और जनजातीय सिनेमा में दिखाई देता है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि झारखंड को कौन फिल्मा रहा है बल्कि यह है कि झारखंड अपनी भाषाओं में खुद को किस तरह पर्दे पर प्रस्तुत कर रहा है. इस कड़ी में कई महत्वपूर्ण नाम सामने आते हैं, जिनमें कुछ प्रमुख फिल्मकारों का उल्लेख यहां किया जा रहा है. रांची के विनोद कुमार उन शुरुआती फिल्मकारों में शामिल हैं, जिन्होंने स्थानीय आदिवासी समाज और संस्कृति को केंद्र में रखकर झारखंड में फीचर फिल्म बनाने का साहस किया. उनकी फिल्म ‘अक्रांत’ (1988) इस दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है. दूरदर्शन पर प्रसारण और मुंबई के पैनोरमा में शामिल होने से फिल्म को व्यापक पहचान मिली.

    बुसान से लेकर कान्स और नेशनल अवॉर्ड्स तक का सफर
    युवा निर्देशक निरंजन कुजूर की फिल्म ‘दुई जागर’ वर्ष 2024 में बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के न्यू करंट्स खंड के लिए चयनित हुई. वर्ष 2025 के मामी मुंबई फिल्म फेस्टिवल में भारतीय प्रीमियर हुआ. संताली फिल्मकार रवि राज मुर्मू ने संताली भाषा में फिल्म निर्माण को नयी पहचान दिलाई और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किया. रांची से निकले नीरज शुक्ला ने शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘रईस’ जैसी फिल्म की पटकथा लिखी.

    यूरेनियम खनन से लेकर लालफीताशाही पर करारा प्रहार
    रांची के ही अभिनेता राजेश जैश भी फिल्म जगत में पहचान बना चुके हैं. सतीश मुंडा का नाम भी महत्वपूर्ण है. इनकी डिप्लोमा फिल्म ‘दंश’ को कई पुरस्कार मिले. डॉक्यूमेंट्री ‘दृष्टि’ के बाद यूरेनियम खनन जैसे अनदेखे विषय पर बनी फिल्म ‘जादूगोड़ा’ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई. वर्ष 2022 में राहुल भट और प्रिया बापट अभिनीत उनकी पहली फीचर फिल्म ‘चक्की’ रिलीज हुई.

    रिलीज से पहले जीते 21 पुरस्कार
    सिमडेगा में जन्मे लेखक-निर्देशक-संपादक एनपीके पुरुषोत्तम का नाम भी जुड़ता है. चर्चित लघु फिल्म ‘बंधा खेत’ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में चयनित हुई. नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ की व्यावसायिक सफलता ने साबित किया कि क्षेत्रीय भाषा का सिनेमा दर्शकों तक पहुंचने की क्षमता रखता है. कुड़ुख सिनेमा और झारखंडी संगीत की दुनिया में सुरेंद्र कुजूर पिछले दो दशकों से सक्रिय महत्वपूर्ण नाम हैं. वर्ष 2025 में दिल्ली के गणतंत्र दिवस समारोह में निकाली झांकी में म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में इस झांकी को देश की सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार मिला. पलामू के युवा फिल्म निर्देशक प्रवीण तिवारी नयी पीढ़ी की उस आकांक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं. रिलीज से पहले 21 पुरस्कार हासिल किये हैं.

    ‘लोहरदगा’ और ‘फुलमनिया’ जैसी फिल्मों का किया निर्देशन
    लोहरदगा के किस्को प्रखंड के हेसापिरी गांव से निकले लाल विजय शाहदेव की यात्रा थिएटर से शुरू होकर कास्टिंग, लेखन, टेलीविजन निर्माण और निर्देशन तक पहुंची. उनकी फिल्म ‘द साइलेंट स्टैच्यू’ वर्ष 2016 के कान्स फिल्म फेस्टिवल के शॉर्ट फिल्म कॉर्नर में शामिल हुई. उन्होंने ‘लोहरदगा’ और ‘फुलमनिया’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. इसी क्रम में रांची के अनुज कुमार ने कथा और वृत्तचित्र, दोनों माध्यमों में उल्लेखनीय काम किया है. आज झारखंड किसी और के कैमरे का विषय भर नहीं है. वह खुद कैमरा उठाकर अपनी कहानी कह रहा है.

  • पटना प्रदर्शन में SP का वीडियो वायरल, बोले- पीछे हटे तो नौकरी नहीं छोड़ूंगा

    पटना प्रदर्शन में SP का वीडियो वायरल, बोले- पीछे हटे तो नौकरी नहीं छोड़ूंगा

    पटना
    बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच पुलिस अधीक्षक (SP) संकेत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच जब तनाव चरम पर था, तभी वीडियो में वह अपने पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहते सुनाई देते हैं, 'पीछे हटे तो नौकरी करने के लायक नहीं छोड़ूंगा'. इसके कुछ ही सेकंड बाद वह खुद सबसे आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते दिखाई देते हैं.

    यही दृश्य पूरे दिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा. एक ओर इसे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने वाला नेतृत्व बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इस भाषा और तरीके पर भी बहस छिड़ गई है. हालांकि इस वायरल वीडियो पर अभी तक पटना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

    वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में माहौल काफी तनावपूर्ण दिखाई देता है. प्रदर्शनकारी छात्र तेजी से आगे की ओर बढ़ते हैं. पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश कर रही है. इसी दौरान SP संकेत कुमार अपने जवानों के बीच पहुंचते हैं और ऊंची आवाज में कहते हैं, पीछे हटे तो नौकरी करने के लायक नहीं छोड़ूंगा. इसके तुरंत बाद वह स्वयं आगे बढ़ते हैं और पुलिस टीम के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ पड़ते हैं. वीडियो के यही कुछ सेकंड पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गए हैं. इंटरनेट पर लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं.

    आखिर क्यों सड़कों पर उतरे थे छात्र
    पटना के जेपी गोलंबर पर गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ ही देर में हालात बिगड़ गए. प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी. जब भीड़ आगे बढ़ने लगी तो पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई. देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए.

    लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल
    स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की. लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो लाठीचार्ज किया गया. इसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने की भी जानकारी सामने आई. इस झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई. घायल पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए भेजा गया. काफी देर तक जेपी गोलंबर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा.

    मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने की कोशिश
    प्रदर्शन के दौरान छात्रों का बड़ा समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा. पुलिस पहले से अलर्ट थी और उसने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. मुख्यमंत्री आवास से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया. जब भीड़ पीछे नहीं हटी तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया. इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई, लेकिन पूरे दिन राजधानी के कई इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा.

    राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
    पटना में दिनभर चले घटनाक्रम का असर शाम तक बिहार की राजनीति में भी दिखाई दिया. इसी दिन पटना में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प को लेकर दरभंगा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. दरभंगा के लहेरियासराय टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर सड़क पर उतरे और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने पटना की घटना की निंदा करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए.

    भाजपा जिला अध्यक्ष ने लगाए आरोप
    दरभंगा भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने कहा कि पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर की घटना है. उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह की हिंसा का विरोध किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.

  • राजस्थान में प्रसव सखी व्यवस्था शुरू, हाई रिस्क गर्भवतियों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

    राजस्थान में प्रसव सखी व्यवस्था शुरू, हाई रिस्क गर्भवतियों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर सहयोग, मार्गदर्शन और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए ‘प्रसव सखी’ व्यवस्था शुरू की जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह व्यवस्था मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों तथा अधिक प्रसव भार वाले प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पेशेंट सेंट्रिक, रिस्पॉन्सिव, समन्वित और सम्मानजनक बनाना है।

    पिंक एप्रन में तैनात होंगी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी
    नई व्यवस्था के तहत पिंक एप्रिन में तैनात प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मी, एएनएम अथवा अन्य चयनित महिला स्वास्थ्यकर्मी ‘प्रसव सखी’ के रूप में कार्य करेंगी। वे अस्पताल पहुंचने वाली हाई-रिस्क गर्भवती महिला के साथ भर्ती से लेकर प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल और डिस्चार्ज तक हर चरण में सहयोग करेंगी। पंजीयन, जांच, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार, विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल प्रक्रिया में भी समन्वय सुनिश्चित करेंगी।

    24×7 हेल्प डेस्क और एकीकृत परिवहन सेवा
    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रत्येक चिन्हित अस्पताल में 24×7 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे, जो गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों के लिए प्रथम संपर्क केंद्र होंगे। हेल्प डेस्क पर तैनात प्रसव सखी अस्पताल की विभिन्न सेवाओं, जांचों और उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ मरीजों एवं परिजनों का मार्गदर्शन करेंगी।

    साथ ही 104 जननी एक्सप्रेस, हेल्प डेस्क और प्रसव सखी की एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से घर से अस्पताल तक सुरक्षित परिवहन और अस्पताल में निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी। हाई रिस्क गर्भवतियों को परिवहन एवं उपचार में प्राथमिकता दी जाएगी।

    गायत्री राठौड़ ने बताया कि यह पहल हाई रिस्क गर्भवतियों की सतत निगरानी, समय पर उपचार, प्रभावी रेफरल प्रबंधन और सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देगी। साथ ही गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में अधिक सम्मानजनक, सहज और गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • पटना में सावन से पहले बढ़ी कांवड़ की मांग, 500 से 40 हजार तक कीमत

    पटना में सावन से पहले बढ़ी कांवड़ की मांग, 500 से 40 हजार तक कीमत

     पटना
     सावन का महीना शुरू होने से पहले पटना के बाजारों में कांवड़ की खरीदारी और सजावट का काम तेज हो गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कांवड़ को लेकर श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं, वह बनती किस चीज से है, इसकी कीमत कितनी होती है और इसे सजाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है? आइए जानते हैं कांवड़ की पूरी कहानी।

    हावड़ा के खास बांस से तैयार होती है कांवड़
    पटना के न्यू मार्केट में बिकने वाली कई कांवड़ हावड़ा के सेवड़ाफुली के बांस से तैयार की जाती हैं।

    कांवड़ बनाने के लिए बांस को आकार देकर मजबूत ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं की पसंद और बजट के अनुसार इसे सजाया जाता है।

    न्यू मार्केट स्थित तनिष्का ट्रेडर्स के संचालक विनोद कुमार बताते हैं कि उनके यहां वर्ष 1967 से कांवड़ बनाने का काम हो रहा है। पहले पिता और दादा इस काम को संभालते थे, अब नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है।

    500 रुपये से शुरू, 40 हजार तक पहुंचती है कीमत
    कांवड़ की कीमत 500 रुपये से शुरू होकर 40 हजार रुपये तक जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और बजट के अनुसार कांवड़ बनवाते हैं। खास सजावट और पीतल पर चांदी का पानी चढ़ाने के बाद इसकी कीमत और बढ़ जाती है।

    महंगाई के कारण इस वर्ष कांवड़ बनाने वाली सामग्री के दाम बढ़े हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कम कीमत वाली कांवड़ खरीदना पसंद कर रहे हैं।

    देवघर जाने वाले कई श्रद्धालुओं ने एक महीने पहले ही कांवड़ का आर्डर दे दिया है।
    मुरादाबाद से आता है पीतल का सामान, ऐसे सजती है कांवड़

    कांवड़ को आकर्षक बनाने के लिए मुरादाबाद से पीतल की सामग्री मंगाई जाती है। इसमें घंटी, घुंघरू, नंदी, शिवलिंग, जलपात्र और त्रिशूल जैसी चीजें शामिल हैं। श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार इनसे कांवड़ को सजवाते हैं।

    कांवड़ पर लगने वाली पीतल की सामग्री में घंटी करीब 30 रुपये, घुंघरू 10 रुपये, धूपदान 100 रुपये, पीतल शिवलिंग 250 रुपये, शिव प्रतिमा 150 रुपये और त्रिशूल 150 रुपये प्रति पीस मिलता है।

    कांवड़ पर सजे नंदी से त्रिशूल तक का भी है खास महत्व
    ज्योतिषाचार्य पंडित राघव नाथ झा के अनुसार कांवड़ यात्रा केवल गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा नहीं है।

    कांवड़ पर सजने वाले नंदी, त्रिशूल, डमरू, शिवलिंग और नाग का भी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

    नंदी धर्म, सत्य और सेवा का प्रतीक हैं। त्रिशूल आत्मसंयम और तीन प्रकार के तापों से मुक्ति का संदेश देता है।

    डमरू सृष्टि के आदि नाद और सृजन का प्रतीक माना जाता है, जबकि शिवलिंग अनादि-अनंत परमशिव का प्रतीक है।

    पटना में घट रही कांवड़ की दुकानें, फिर भी परंपरा जारी
    कारोबारियों के अनुसार पहले न्यू पटना मार्केट में कांवड़ की आठ से दस दुकानें होती थीं, लेकिन अब नई पीढ़ी इस पारंपरिक कारोबार से दूर हो रही है।

    इसके बावजूद जो लोग कांवड़ बनाना जानते हैं, वे सेवा भाव से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

    पटना के अलावा बाढ़, बख्तियारपुर, मोकामा और आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु यहां कांवड़ बनवाने आते हैं।

    सावन के साथ ही बाजार में एक बार फिर कांवड़ की मांग बढ़ गई है और कारीगर श्रद्धालुओं की पसंद के अनुसार कांवड़ तैयार करने में जुटे हैं।

     

  • CM सैनी का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोले- छात्रों के आंदोलन को दिया जा रहा राजनीतिक रंग

    CM सैनी का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोले- छात्रों के आंदोलन को दिया जा रहा राजनीतिक रंग

    सिरसा. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिरसा दौरे के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को विपक्षी दल राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं और युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी प्रकार की भ्रामक राजनीति को सफल नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पिछले वर्षों में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में आयोजित नीट और कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) सहित अन्य सभी परीक्षाएं शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, पारदर्शिता और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने व्यापक इंतजाम किए, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी जमीन खो चुके हैं और अब छात्रों के बीच भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के नेताओं को युवाओं की चिंता नहीं है, बल्कि वे हर मुद्दे को राजनीति से जोड़कर माहौल खराब करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और योग्य युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस दौरान पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और वहां की सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने एक्साइज इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम में सामने आए कुछ मामलों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि युवाओं का विश्वास बना रहे। उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल आज युवाओं की चिंता करने का दावा कर रहे हैं, उनके शासनकाल के रिकॉर्ड सभी के सामने हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास जनता के हित में कोई ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए वे केवल भ्रम और विवाद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ईमानदार, पारदर्शी और जवाबदेह शासन देने के लिए लगातार काम कर रही है।

    जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मुख्यमंत्री के दिखे तीखे तेवर 
    सिरसा में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के तेवर भी काफी सख्त नजर आए। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी समयबद्ध तरीके से शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करें और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) से जुड़े एक मामले पर मुख्यमंत्री ने गंभीर रुख अपनाया। उन्होंने निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच के आदेश दिए।

    उन्होंने कहा कि नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों के कब्जे से जुड़े मामले पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नियमानुसार फ्लैटों का कब्जा मिलना चाहिए, उन्हें बिना किसी अनावश्यक देरी के उनका अधिकार दिया जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई देरी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने एक अन्य मामले में विजिलेंस जांच के आदेश देते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

  • अंगदान संकल्प अभियान में राजस्थान दूसरे स्थान पर, पहले नंबर से सिर्फ 8136 संकल्प दूर

    अंगदान संकल्प अभियान में राजस्थान दूसरे स्थान पर, पहले नंबर से सिर्फ 8136 संकल्प दूर

     जयपुर
    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव  श्रीमती गायत्री राठौड़ ने गुरुवार को बताया कि प्रदेश में संचालित अंगदान जन-जागरूकता अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। आमजन की बढ़ती भागीदारी के परिणामस्वरूप राजस्थान ने अंगदान संकल्प अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। 22 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 1 लाख8 हजार 904 नागरिकों ने अंगदान का संकल्प लिया है। यह अभियान 3 अगस्त,2026 तक चलेगा ।

    उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत राजस्थान अब देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रथम स्थान पर महाराष्ट्र है, जबकि दोनों राज्यों के बीच मात्र 8,136 संकल्पों का अंतर रह गया है।

    श्रीमती राठौड़ ने बताया कि जिला स्तर पर झुंझुनूं सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 13,619 अंगदान संकल्पों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद हनुमानगढ़ (12,828), चूरू (10,780), जयपुर (8,152), अजमेर (6,722) तथा सीकर (5,956) प्रमुख जिलों में शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि जुलाई माह के विशेष अभियान में भी कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। झुंझुनूं ने 2,426 नए संकल्पों के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसके बाद जयपुर (1,773), टोंक (997), भीलवाड़ा (995) तथा जोधपुर (754) ने उल्लेखनीय कार्य किया है।

    प्रमुख शासन सचिव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में अंगदान ​करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई गंभीर रोगियों को नया जीवन दे सकता है। अभियान का उद्देश्य अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भ्रांतियों को दूर करना तथा अधिकाधिक नागरिकों को इस महादान से जोड़ना है।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों, चिकित्सा संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, शिक्षण संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया है, ताकि राजस्थान शीघ्र ही देश में अंगदान संकल्प अभियान में प्रथम स्थान प्राप्त कर सके।

     

  • पंजाब के मंत्री हरजोत का विपक्ष को चुनौती, बोले- शिक्षा सुधरेगी तो आज ही दे दूंगा इस्तीफा

    पंजाब के मंत्री हरजोत का विपक्ष को चुनौती, बोले- शिक्षा सुधरेगी तो आज ही दे दूंगा इस्तीफा

    चंडीगढ़.

    फार्मेसी परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की ओर से लगातार उठ रही इस्तीफे की मांग के बीच शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पलटवार किया है।

    उन्होंने कहा कि अगर उनके पद छोड़ने से पंजाब की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार आता है तो वह आज ही इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को सरकार ने खुद उजागर किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसके बाद खबर में लिखें कि बैंस ने कहा कि सरकार पेपर लीक, नकल और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टालरेंस की नीति पर काम कर रही है। फार्मेसी परीक्षा में जो भी अनियमितताएं सामने आईं, उन्हें दबाया नहीं गया बल्कि प्रशासन ने खुद उनका पता लगाकर कार्रवाई की। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाना है, इसलिए कमियों को छिपाने के बजाय सामने लाया गया।

    विपक्ष पर रानीतिक लाभा का आरोप
    बैंस ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को उछालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के समय पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामलों में कार्रवाई की बजाय उन्हें दबा दिया जाता था, जबकि मौजूदा सरकार दोषियों तक पहुंचकर कार्रवाई कर रही है। दरअसल, फार्मेसी परीक्षा में कथित नकल और गड़बड़ी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।

    विपक्ष बना रहा था निशाना
    कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, भाजपा के केवल सिंह ढिल्लों और सुनील जाखड़ तथा शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सरकार को घेरते हुए संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष ने हाल में कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे को भी सरकार की कार्यशैली से जोड़कर निशाना बनाया है। बैंस ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी तथा भरोसेमंद बनाना है। अगर कहीं कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसे छिपाने के बजाय कार्रवाई करना ही सरकार की नीति है।

  • पाली हाईवे हादसे में तीन युवकों की मौत, दो गंभीर घायल

    पाली हाईवे हादसे में तीन युवकों की मौत, दो गंभीर घायल

     पाली/रोहट
    जोधपुर-पाली नेशनल हाईवे पर स्थित रोहट थाना क्षेत्र के बांडाई गांव के निकट गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर आगे चल रही राजस्थान रोडवेज की बस से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीन युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक युवकों की पहचान जोधपुर निवासी हेमू, कुशाल व प्रवीण के रूप में हुई है। दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से एक को जोधपुर रेफर किया गया है।

    हादसा कैसे हुआ?
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार में सवार युवक किसी काम से जोधपुर से पाली की ओर जा रहे थे। बांडाई के पास अचानक कार चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और गाड़ी सीधे आगे चल रही रोडवेज बस के पिछले हिस्से में घुस गई। टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को घटना की सूचना दी। कुछ प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रोडवेज बस के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए थे।

    घायलों का अस्पताल में इलाज जारी
    हादसे में कार सवार तीन युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और रोहट थाना पुलिस की मदद से घायलों को तुरंत रोहट के राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एक युवक को जोधपुर रेफर किया गया है।

    पुलिस की कार्रवाई
    घटना की सूचना मिलते ही रोहट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से क्षतिग्रस्त कार को सड़क से हटवाया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवाया है और मृतकों की शिनाख्त के बाद परिजनों को सूचना दी है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया गया है।

  • दिल्ली में 5.50 करोड़ GST रिफंड घोटाले का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार

    दिल्ली में 5.50 करोड़ GST रिफंड घोटाले का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली
     दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली में सामने आए 5.50 करोड़ के GST रिफंड घोटाले का पर्दाफाश करते हुए ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग के 3 अधिकारियों समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रिफंड मंजूर किए गए। मामले में पहली बार अपराध से अर्जित संपत्ति को अदालत के आदेश से अटैच किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजीत सिंह, अटल भारद्वाज, हिमांशु मलिक, अजय कुमार और आशीष मिश्रा के रूप में हुई है।

        ACB के मुताबिक, यह मामला ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
        जांच शुरू हुई तो पता चला कि अनिवार्य सत्यापन और वित्तीय जांच को दरकिनार कर करोड़ों रुपये के रिफंड जारी कर दिए गए।
        फर्जी दस्तावेजों और नकली तस्वीरों का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को करीब 5.50 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया।
        जांच में आरोप है कि तत्कालीन GST अधिकारी अजीत सिंह ने बिना अनिवार्य जांच किए रिफंड मंजूर कर दिए, जबकि GST इंस्पेक्टर अटल भारद्वाज ने कारोबारी प्रतिष्ठानों का मौके पर निरीक्षण किए बिना झूठी रिपोर्ट तैयार की।
        इस पूरे खेल में लोअर डिवीजन क्लर्क हिमांशु मलिक की भी भूमिका सामने आई। वहीं अजय कुमार और आशीष मिश्रा पर घोटाले की रकम को छिपाने का आरोप है।

    बढ़ रहे हैं GST धोखाधड़ी के मामले
    एक्सपर्ट्स के अनुसार, देश में GST लागू होने के बाद फर्जी बिल, फर्जी कंपनियां बनाकर टैक्स क्रेडिट लेने और गलत तरीके से GST रिफंड हासिल करने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए GST विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच एजेंसियां और राज्यों की एंटी करप्शन शाखाएं समय-समय पर कार्रवाई करती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और बैंक लेनदेन की जांच से अब ऐसे फर्जी नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।