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  • रांची-अनगड़ा सड़क प्रोजेक्ट पर सख्ती, दिसंबर 2026 तक पूरा करने का अल्टीमेटम

    रांची-अनगड़ा सड़क प्रोजेक्ट पर सख्ती, दिसंबर 2026 तक पूरा करने का अल्टीमेटम

     रांची
     राजधानी रांची को अनगड़ा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को लेकर पथ निर्माण विभाग ग्रामीण डिविजन ने सख्त रुख अपनाया है। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रही दुर्गा सोरेन चौक से अनगड़ा चौक तक की सड़क को दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

    विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होने पर निर्माण एजेंसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस सड़क का निर्माण श्रीराम कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से किया जा रहा है।

    पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता जितेंद्र कुमार ने बताया कि निर्माण कंपनी को पहले ही दो बार समय विस्तार दिया जा चुका है। इसके बावजूद कार्य निर्धारित गति से पूरा नहीं हो सका। अब विभाग ने दिसंबर तक कार्य पूरा करने का अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है।

    अप्रैल 2024 में पूरा होना था काम
    परियोजना के तहत लगभग 18 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। मूल योजना के अनुसार यह कार्य अप्रैल 2024 तक पूरा हो जाना था, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी अब तक केवल लगभग 70 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे
    सड़क निर्माण के साथ-साथ कई आवश्यक संरचनात्मक कार्य अभी भी बाकी हैं। परियोजना के तहत स्ट्रीट लाइट, डिवाइडर, साइनेज, रोड मार्किंग, नाली निर्माण और पुल निर्माण का कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है।

    विभाग का कहना है कि इन सभी कार्यों को सड़क निर्माण के साथ ही दिसंबर तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा बिजली के तार व पानी पाइपलाइन की शिफ्टिंग का काम भी निर्माण के दौरान देरी होने की एक बड़ी वजह है।

    भूमि अधिग्रहण और अन्य बाधाओं से बढ़ी देरी
    कार्यपालक अभियंता जितेंद्र कुमार के अनुसार परियोजना में देरी के पीछे कई कारण रहे हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, सड़क किनारे पेड़ों की कटाई, अलकतरा की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होना, नामकुम रेलवे स्टेशन के समीप सड़क पर स्थित मंदिर तथा नामकुम श्मशान घाट के पास पुल निर्माण जैसे मुद्दों ने कार्य की गति को प्रभावित किया।

    सिपाही पुल के पास बन रहे पुलिया बना सबसे बड़ी चुनौती
    नामकुम स्थित सिपाही पुल के पास नए पुल के निर्माण में सबसे अधिक समय लग रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पुल निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि संवेदक की लापरवाही और धीमी कार्यशैली के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है।

    क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि विभाग की सख्ती के बाद अब सड़क और पुल निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सकेगा, जिससे रांची और अनगड़ा के बीच आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा।

    क्या कहते अधिकारी?
        सड़क निर्माण से जुड़ी सभी अड़चने दूर कर ली गई है। जल्द सड़क का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। संवेदक को दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है।

    -जितेंद्र कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण

     

  • राजस्थान पुलिस का सुरक्षा संकल्प, 7834 बुजुर्गों तक पहुंची मदद की पहल

    राजस्थान पुलिस का सुरक्षा संकल्प, 7834 बुजुर्गों तक पहुंची मदद की पहल

    जयपुर
     महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में संचालित ‘महिला सुरक्षा संकल्प’ अभियान के अंतर्गत राजस्थान पुलिस ने प्रदेशभर में विशेष जनसंपर्क एवं सुरक्षा अभियान चलाते हुए 7,834 एकल बुजुर्ग महिलाओं एवं अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपत्तियों से उनके घर पहुंचकर आत्मीय मुलाकात की। पुलिस अधिकारियों एवं थाना स्तर के पुलिसकर्मियों ने बुजुर्गों का कुशलक्षेम जाना, उनकी समस्याएं सुनीं तथा सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी लेकर उन्हें हर परिस्थिति में पुलिस सहायता का भरोसा दिलाया।

    यह विशेष अभियान राजस्थान पुलिस के स्थायी आदेश के अनुरूप संचालित किया गया। इसका उद्देश्य एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे वरिष्ठ नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना, उन्हें पुलिस से जोड़ना तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें त्वरित सहायता उपलब्ध कराना है।

    प्रदेशभर में पहुंचा पुलिस का सुरक्षा और विश्वास का संदेश
    अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने वरिष्ठ नागरिकों से आत्मीय संवाद स्थापित कर उनकी व्यक्तिगत एवं पारिवारिक समस्याओं की जानकारी ली। उन्हें महिला सुरक्षा संकल्प अभियान, साइबर अपराधों से बचाव, महिला सुरक्षा संबंधी उपायों तथा आपातकालीन हेल्पलाइन 112, 1930 एवं 1090 के बारे में भी जानकारी दी गई। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, अभियान के तहत करौली में सर्वाधिक 960, जोधपुर शहर पश्चिम में 580, सवाई माधोपुर में 493, अजमेर में 458, बाड़मेर में 320, बालोतरा में 283, भीवाड़ी में 244, खैरथल-तिजारा में 217 तथा कोटा ग्रामीण में 211 बुजुर्ग महिलाओं एवं बुजुर्ग दंपत्तियों से पुलिस ने संपर्क किया। वहीं जयपुर ग्रामीण में 186, सीकर में 167, डीग में 163, राजसमंद में 159, सिरोही में 157, कोटा शहर में 150, टोंक एवं बूंदी में 143-143 सहित प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस ने घर-घर पहुंचकर वरिष्ठ नागरिकों से संवाद किया।

    प्रदेशभर में एक साथ संचालित इस अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों तक राजस्थान पुलिस का ‘सुरक्षा, सम्मान और विश्वास’ का संदेश पहुंचा। वरिष्ठ नागरिकों एवं उनके परिजनों ने पुलिस की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए इसे पुलिस और समाज के बीच विश्वास मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उदयपुर : ‘बेटा नहीं है’ का डर हुआ दूर, पुलिस ने दिया कानून का भरोसा
    उदयपुर में अकेली रहने वाली एक बुजुर्ग महिला को आशंका थी कि बेटे के नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद रिश्तेदार उनके मकान पर कब्जा कर सकते हैं। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं उनके घर पहुंचकर आत्मीय मुलाकात की और उन्हें संपत्ति एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। महिला ने भावुक होकर कहा—“आज मुझे तसल्ली मिली है कि कोई मेरे मकान पर कब्जा नहीं कर सकेगा।”

    उदयपुर : बिना शिकायत पुलिस पहुंची तो बुजुर्ग दंपती का बढ़ा भरोसा
    अभियान के दौरान पुलिस टीम सेवानिवृत्त कर्नल एवं उनकी पत्नी, जो अकेले रह रहे हैं, के घर कुशलक्षेम पूछने पहुंची। बिना किसी शिकायत के पुलिस को अपने घर आया देखकर दंपती ने आश्चर्य और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति राजस्थान पुलिस की मानवीय सोच और संवेदनशीलता का परिचायक है। इस पहल से उनका पुलिस पर भरोसा और मजबूत हुआ।

    धौलपुर : पुलिस ने बिछड़े पिता को फिर परिवार से मिलाया
    धौलपुर के सरमथुरा थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के कारण अलग रह रहे बुजुर्ग नथुआ राम मीना की पुलिस ने काउंसलिंग कराकर सम्मानपूर्वक घर वापसी कराई। पुलिस के प्रयास से उनके पुत्र एवं परिजनों ने बुजुर्ग की देखभाल, सम्मान और भविष्य में उपेक्षा नहीं करने का भरोसा दिलाया। लंबे समय बाद परिवार का साथ मिलने पर बुजुर्ग के चेहरे पर खुशी लौट आई।

    झालावाड़ : वरिष्ठ नागरिक शिकायत रजिस्टर बना बुजुर्गों का सुरक्षा कवच
    झालावाड़ जिले के प्रत्येक थाने में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष शिकायत रजिस्टर संधारित किया गया है। शिकायत मिलने पर संबंधित बीट अधिकारी प्रत्येक 15 दिन में बुजुर्ग से व्यक्तिगत अथवा दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर उनकी कुशलक्षेम और शिकायत की स्थिति की जानकारी लेते हैं। आवश्यकता होने पर पुलिस तत्काल संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करती है। इस पहल से बुजुर्गों में सुरक्षा, सम्मान और पुलिस पर विश्वास की भावना मजबूत हुई है।

    महिला सुरक्षा के लिए संकल्पबद्ध है राजस्थान पुलिस – डीजीपी शर्मा
    महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और विश्वास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। महिला सुरक्षा संकल्प अभियान इसी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है, जिसके माध्यम से पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर, अकेले और जरूरतमंद नागरिकों तक स्वयं पहुंचकर उनकी सुरक्षा का भरोसा कायम करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। राजस्थान पुलिस भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी अभियानों के माध्यम से महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

  • राजस्थान के 7 कृषि उत्पादों को मिलेगा GI टैग, किन्नू से सांगरी तक बनेगी नई पहचान

    राजस्थान के 7 कृषि उत्पादों को मिलेगा GI टैग, किन्नू से सांगरी तक बनेगी नई पहचान

    श्रीगंगानग
    .खेतों में उगने वाली फसलें केवल उपज नहीं होतीं,बल्कि किसी क्षेत्र की पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत भी होती हैं। इन्हीं उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राजस्थान ने अहम कदम बढ़ाया है। पत्रिका के जीआई टैग अभियान के बीच श्रीगंगानगर के किन्नू, गाजर और माल्टा, बीकानेर के सांगरी, मोठ और इसबगोल तथा उदयपुर के सीताफल को भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है तथा अब आवेदन परीक्षण के चरण में हैं। राजस्थान स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं जीआइ टैग सलाहकार डॉ.सुजीत यादव ने बताया कि उनकी देखरेख में सात कृषि उत्पादों के आवेदन तैयार किए गए हैं। गाजर और माल्टा के आवेदन जीआई पोर्टल पर अपलोड हो चुके हैं,जबकि किन्नू के आवेदन के लिए उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलना शेष है। एनओसी मिलने के बाद बेबसाइट पर रिपोर्ट अपलोड की जाएगी। इसके बाद जीआई रजिस्ट्री में परीक्षण,आपत्तियों और सत्यापन सहित पूरी प्रक्रिया में करीब दो वर्ष का समय लग सकता है।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलेगी नई पहचान
        जीआइ टैग मिलने के बाद इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, निर्यात की संभावनाएं मजबूत होंगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

    राजस्थान में बढ़ रही हैं संभावनाएं
        राजस्थान में कृषि उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। वर्तमान में पाली की सोजत मेहंदी को कृषि उत्पाद के रूप में जीआई टैग प्राप्त है। यदि श्रीगंगानगर,बीकानेर और उदयपुर के ये सात उत्पाद भी जीआई सूची में शामिल हो जाते हैं तो प्रदेश की कृषि पहचान को नई मजबूती मिलेगी। इस प्रक्रिया में कृषि वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों का सहयोग लिया जा रहा है तथा उत्पादों की विशिष्टता, इतिहास और गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।

    देश में 229 कृषि उत्पादकों को मिला जीआइ टैग
        देश में अब तक 229 कृषि एवं बागवानी उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। कृषि उत्पादों के मामले में उत्तर प्रदेश 21 और उत्तराखंड बहुत ही छोटा राज्य है जबकि 18कृषि उत्पादकों को जीआ टैग मिल चुका है और जीआइ टैग में अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की भौगोलिक विविधता और विशिष्ट कृषि उत्पादों को देखते हुए भविष्य में कई अन्य उत्पाद भी जीआइ टैग की सूची में शामिल हो सकते हैं।

    राजस्थान का जीआई सफर
        जीआइ टैग प्राप्त कृषि उत्पाद: सोजत मेहंदी (पाली)
        जीआइ टैग के लिए नए आवेदन: 7
        श्रीगंगानगर: किन्नू, गाजर, माल्टा
        बीकानेर: सांगरी, मोठ, इसबगोल
        उदयपुर: सीताफल
        संभावित लाभ: ब्रांड पहचान, बेहतर मूल्य, निर्यात में बढ़ोतरी और नकली उत्पादों पर रोक

    वर्जन
        "श्रीगंगानगर के किन्नू, गाजर और माल्टा सहित बीकानेर के तीन तथा उदयपुर के एक कृषि उत्पाद के लिए मेरी देखरेख में जीआइ टैग के आवेदन किए गए हैं। गाजर और माल्टा के आवेदन पोर्टल पर अपलोड हो चुके हैं, जबकि किन्नू का आवेदन उद्योग विभाग से एनओसी मिलने के बाद अपलोड किया जाएगा। इसके बाद परीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया चलेगी, जिसमें लगभग दो वर्ष का समय लग सकता है।"
        -डॉ.सुजीत यादव, प्रोफेसर एवं जीआई टैग सलाहकार, राजस्थान स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय,बीकानेर।

  • हरियाणा युवाओं को पीएम इंटर्नशिप योजना में मिलेगा 9 हजार रुपये मासिक लाभ

    हरियाणा युवाओं को पीएम इंटर्नशिप योजना में मिलेगा 9 हजार रुपये मासिक लाभ

    चंडीगढ़
     हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआइएस) का अधिक से अधिक लाभ युवाओं तक पहुंचाने के लिए बुधवार को पंचकूला में राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।

    सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के पात्र युवाओं को देश की दो हजार अग्रणी कंपनियों में छह से नौ माह की इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। चयनित इंटर्न को प्रतिमाह नौ हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।

    युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने कहा कि केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित यह योजना युवाओं को उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव देकर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, कालेजों, आइटीआइ, पालिटेक्निक और अन्य शिक्षण संस्थानों से पात्र विद्यार्थियों और पासआउट युवाओं को योजना के लिए पंजीकरण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

    10वीं पास युवा भी कर सकते हैं अप्लाई
    उन्होंने बताया कि 10वीं, 12वीं, आइटीआइ, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर उत्तीर्ण, लेकिन पूर्णकालिक नौकरी में नहीं लगे युवा योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं।

    चयनित इंटर्न को मासिक सहायता के अलावा 6,000 रुपये का एकमुश्त अनुदान दो किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से मिलेगा।

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के समान जीवन एवं दुर्घटना बीमा का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा।

    कार्यशाला में इन लोगों ने लिया भाग
    कार्यशाला में योजना के उद्देश्य, पात्रता, पंजीकरण प्रक्रिया और प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति व रजिस्ट्रार, केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, उद्योग, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग, सरकारी कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आटीआइ, फिक्की, सीआइआइ तथा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। हरियाणा में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग को राज्य नोडल विभाग बनाया गया है।

     

  • श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं को राहत, रेलवे चलाएगा तीन विशेष ट्रेनें

    श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं को राहत, रेलवे चलाएगा तीन विशेष ट्रेनें

    देवघर
     श्रावणी मेला के दौरान रेलवे द्वारा तीन विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की गयी है। ये टेन आसनसोल-जयनगर, देवघर-रक्सौल और मधुपुर इतवारी के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है। इस ट्रेनों का संचालन पूरे श्रावणी मेला के दौरान किया जाएगा।
    ये निर्णय मेला के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    05597 जयनगर–आसनसोल श्रावणी मेला
    रेलवे द्वारा जारी सूचना के तहत 05597 जयनगर–आसनसोल श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक शुक्रवार, रविवार एवं मंगलवार को 31 जुलाई से 30 अगस्त तक कुल 14 फेरा लगाएगी। ये ट्रेन जयनगर से 21:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 11:30 बजे आसनसोल पहुंचेगी।

    वापसी में 05598 आसनसोल–जयनगर श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक शनिवार, सोमवार एवं बुधवार को एक अगस्त से 31 अगस्त तक कुल 14 फेरा लगाएगी। ये ट्रेन आसनसोल से 13:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 06:00 बजे जयनगर पहुंचेगी।

    पूर्व रेलवे क्षेत्राधिकार में यह विशेष ट्रेन दोनों दिशाओं में चितरंजन, मधुपुर, जसीडीह एवं सिमुलतल्ला स्टेशनों पर ठहरेगी। इस ट्रेन में सामान्य द्वितीय श्रेणी एवं शयनयान (स्लीपर) श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे।

    05545 रक्सौल–देवघर श्रावणी मेला
    05545 रक्सौल–देवघर श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक शुक्रवार, रविवार एवं मंगलवार को 31 जुलाई से 30 अगस्त तक कुल 14 फेरा लगाएगी। ये ट्रेन रक्सौल से 00:30 बजे प्रस्थान कर उसी दिन 17:05 बजे देवघर पहुंचेगी।

    वापसी में 05546 देवघर–रक्सौल श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक शुक्रवार, रविवार एवं मंगलवार को 31 जुलाई से 30 अगस्त तक कुल 14 फेरा लगाएगी। देवघर से 18:05 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 11:40 बजे रक्सौल पहुंचेगी।

    पूर्व रेलवे क्षेत्राधिकार में यह विशेष ट्रेन दोनों दिशाओं में बांका, बराहाट, भागलपुर, सुल्तानगंज, जमालपुर एवं अभयपुर स्टेशनों पर ठहरेगी। इस ट्रेन में सामान्य द्वितीय श्रेणी एवं शयनयान (स्लीपर) श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे।

    08895 इतवारी–मधुपुर श्रावणी मेला
    वहीं 08895 इतवारी–मधुपुर श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक शनिवार को एक अगस्त से 29 अगस्त के दौरान इतवारी से 04:30 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 06:00 बजे मधुपुर पहुंचेगी। वापसी में 08896 मधुपुर–इतवारी श्रावणी मेला विशेष प्रत्येक रविवार को दो अगस्त से 30 अगस्त तक कुल पांच फेरा लगाएगी।

    मधुपुर से 09:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 11:50 बजे इतवारी पहुंचेगी। पूर्व रेलवे क्षेत्राधिकार में यह विशेष ट्रेन दोनों दिशाओं में चित्तरंजन स्टेशन पर ठहरेगी। इस ट्रेन में सामान्य द्वितीय श्रेणी, शयनयान (स्लीपर) श्रेणी तथा वातानुकूलित चेयर कार की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

  • कमजोर मानसून से भाखड़ा-पौंग बांध खाली, राजस्थान के जिलों पर संकट

    कमजोर मानसून से भाखड़ा-पौंग बांध खाली, राजस्थान के जिलों पर संकट

     जयपुर
    इस बार कमजोर मानसून की वजह से हनुमानगढ़ के भाखड़ा व पौग डैम की हालत पतली हो रही है। मानसून सीजन शुरू हुए करीब एक महीने हो रहे हैं। लेकिन अभी भी दोनों बांध खाली ही पड़े हैं। बांधों के भराव में अब एक महीने से भी कम का समय रह गया है। ऐसे में बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो राजस्थान के बारह जिलों पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

    इन दोनों बांधों से राजस्थान की इंदिरागांधी, भाखड़ा, गंगकैनाल, सिद्धमुख-नोहर परियोजना की नहरों को पानी मिलता है। ऐसे में इन दोनों बांधों का भरना राजस्थान के लिए जरूरी है। करीब 20 लाख हैक्टेयर खेती इन नहर परियोजनाओं पर निर्भर है। किसानों की निगाहें अब बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में संभावित बारिश पर टिकी हुई है। आंकड़ों की बात करें तो पौंग बांध की कुल भराव क्षमता 1390 फीट मानी जाती है। 22 जुलाई 2026 को इस बांध का लेवल 1324 फीट के करीब था। इस तरह यह बांध अभी भराव क्षमता की तुलना में 66 फीट खाली है।

    इसी तरह भाखड़ा बांध की कुल भराव क्षमता 1680 फीट के करीब है। 22 जुलाई 2026 को इस बांध का लेवल 1587 फीट के करीब था। इस तरह यह बांध भी अब तक 93 फीट के करीब खाली है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में बरसात की सूचना जरूर है, लेकिन अब तक जिस हिसाब से बारिश होनी चाहिए, उतनी नहीं हुई है।

    अभी जल भराव अवधि में करीब एक महीने का समय बचा है। 20 सितम्बर तक भंडारित पानी के हिसाब से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा सहित अन्य राज्यों का शेयर निर्धारित किया जाता है। हिस्से का निर्धारण बीबीएमबी स्तर पर होता है।

    इतने जिलों को मिलता है पानी, डेढ़ करोड़ को होती है पेयजल आपूर्ति
    पौग व भाखड़ा बांध में भंडारित पानी से राजस्थान की चार नहर परियोजनाओं को पानी मिलता है। इसमें हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, फलौदी, झुंझुंनू आदि जिले शामिल हैं। करीब डेढ़ करोड़ लोगों को इन नहरों से पेयजल आपूर्ति होती है।

    अब 27 को होगी बीबीएमबी की बैठक
    भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक अब 27 जुलाई को रखी गई है। पहले इसकी तारीख 23 जुलाई निर्धारित की गई थी। लेकिन किसी कारण से अचानक बैठक स्थगित कर दी गई है। अब 27 जुलाई को होने वाली बैठक में राजस्थान सहित अन्य राज्यों को अगस्त में मिलने वाले सिंचाई पानी का निर्धारण किया जाएगा।

  • सोनीपत का नया बस अड्डा अब जाट जोशी साइट पर ही बनेगा, आदेश जारी

    सोनीपत का नया बस अड्डा अब जाट जोशी साइट पर ही बनेगा, आदेश जारी

    सोनीपत
    नए बस अड्डे के निर्माण के मामले में एक बार फिर नए आदेश आए हैं। विधायक निखिल मदान ने चंडीगढ़ में एसीएस राजशेखर वुंडरू व निदेश वीरेंद्र दहिया से मुलाकात कर नए बस अड्डे को गांव जाट जोशी वाली साइट पर ही बनाने के लिए कहा।

    पुरानी साइट पर निर्माण के दिए गए आदेश
    पहले परिवहन निदेशक ने नया बस अड्डा केएमपी एक्सप्रेसवे के पास बनाने के आदेश जारी किए थे। विधायक के कहने पर एसीएस गांव जाट जोशी वाली साइट पर नए बस अड्डा निर्माण के लिए डीआएमटीएस कंपनी को डीपीआर तैयार करने के आदेश दिए गए हैं

    कई साल से गांव जाट जोशी में नया बस अड्डा बनाने की प्रक्रिया चल रही थी। वहां पर रोडवेज ने नगर निगम से साढ़े नौ एकड़ जमीन 17 करोड़ रुपये खरीद जा चुकी थी। एक जुलाई को राज्य परिवहन निदेशक ने सोनीपत की डीसी को पत्र लिखकर नया बस अड्डा केएमपी एक्सप्रेसवे के पास बनाने के आदेश जारी किए।

    इस पर डीसी ने नई साइट पर जमीन खोजने के लिए सोनीपत के एसडीएम सुभाषचंद्र, रोडवेज के जीएम संजय कुमार व एचआइआइडीसी के एक्सईएन वाली एक कमेटी गठित कर प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए।

    कमेटी ने 14 जुलाई को बैठक कर प्रस्तावित साइटों पर मंथन किया। इसके बाद कमेटी के अधिकारियों ने केएमपी के पास एक साइट का दौरा किया और उसका रिकार्ड मांगा। अब रिकार्ड आने के बाद कमेटी एक-दो दिन में जमीन फाइनल कर अपनी रिपोर्ट सबमिट करने वाली है।

    केएमपी साइट पर नहीं मिली उपयुक्त जमीन
    वहीं बुधवार को चंडीगढ़ में निखिल मदान ने एसीएस राजशेखर वुंडरू व निदेशक वीरेंद्र दहिया से मुलाकात की। इसके बाद अधिकारियों ने पुरानी साइट पर बस अड्डा बनाए जाने के संबंध में आदेश जारी कर दिए।

    एसीएस ने बताया कि केएमपी के पास बस स्टैंड बनाने का सुझाव विभाग को भेजा गया था, लेकिन वहां विभाग के पास जमीन भी उपलब्ध नहीं थी और दूसरे मापदंडों पर भी वो स्थान खरा नहीं उतर रहा था।

    अतः अब जाट जोशी की परिवहन विभाग की अपनी 9.33 एकड़ जगह पर बस अड्डे का निर्माण किया जाएगा। बाकी बची जमीन पर इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन और नई सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाएगा।

    पीपीपी मोड पर बनेगा आधुनिक बस स्टैंड
    विधायक निखिल मदान ने कहा कि जाट जोशी में बनने वाला नया बस स्टैंड सभी सुविधाओं से युक्त होगा और इसे पीपीपी मोड पर बनाया जाएगा। इसमें कमर्शियल स्थान भी उपलब्ध होगा।

    डीआइएमटीएस कंपनी के अधिकारियों द्वारा नए बस स्टैंड की पूरी डिजाइनिंग और निर्माण कार्य का पूरा खाका तैयार किया जाएगा। उसके पश्चात टेंडर प्रक्रिया शुरू करके निर्माण एजेंसी को कार्य आवंटित किया जाएगा।

    यात्रियों के लिए होंगी आधुनिक सुविधाएं
    6.33 एकड़ भूमि पर बनने वाले नए बस स्टैंड में 250 बसों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही यात्रियों के बैठने के लिए विश्राम कक्ष बनाए जाएंगे। इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।

    दोपहिया और और चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए क्षेत्र को डिजाइन किया जाएगा। इसके साथ नए बस स्टैंड में व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए भी जगह आवंटित की जाएगी।

    इसके लिए भी संबंधित एजेंसी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही विभाग द्वारा नए बस स्टैंड का डिजाइन साझा किया जाएगा, जिसके बाद कार्य को तीव्र गति से पूरा किया जाएगा। वहीं नगर निगम के मेयर राजीव जैन ने भी पुरानी साइट पर ही बस अड्डे का निर्माण करने के लिए रोडवेज के अधिकारियों को पत्र लिखा था।

        केएमपी के पास नई साइट पर बस अड्डा बनाने के लिए कमेटी की बैठक के बाद यहां का दौरा किया गया था। नई साइट के लिए जमीन का रिकार्ड मांगा है, रिकार्ड आते ही कमेटी अपनी रिपोर्ट सबमिट कर देगी। दोबारा पुरानी साइट पर ही बस अड्डा बनाने के संबंध में हमारे पास अभी कोई सूचना नहीं है।
        – संजय कुमार, जीएम रोडवेज व कमेटी के सदस्य

     

  • CG में जल संरक्षण की बड़ी पहल, बारिश का पानी बचाने बनाए गए 54 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढे

    CG में जल संरक्षण की बड़ी पहल, बारिश का पानी बचाने बनाए गए 54 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढे

    बलरामपुर.

    जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए बलरामपुर जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल की है। जिले में वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए गए विशेष अभियान के तहत महज एक माह के भीतर 54 हजार से अधिक सोख्ता (सोक पिट) गड्ढों का निर्माण कराया गया है।

    जिला प्रशासन का मानना है कि यह अभियान भविष्य में जल संकट से निपटने और भूजल स्तर में सुधार लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। जिले के सभी विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में एक साथ चलाए गए इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रोजगार सहायकों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान कर इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया।  यह पूरा अभियान जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की विशेष पहल, सतत निगरानी और मार्गदर्शन में संचालित किया गया। कलेक्टर द्वारा जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी विकासखंडों और ग्राम पंचायतों को समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अल्प समय में बड़ी संख्या में सोख्ता गड्ढों का निर्माण संभव हो सका।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि अभियान का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करना, भूजल स्तर में सुधार लाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य में उत्पन्न होने वाली जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सोख्ता गड्ढे वर्षा के पानी को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। इससे पानी का प्राकृतिक पुनर्भरण (रिचार्ज) होगा, जल स्तर बढ़ेगा और हैंडपंप, कुएं एवं अन्य जलस्रोत लंबे समय तक जलयुक्त बने रहेंगे।
    उन्होंने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर सभी ग्राम पंचायतों में एक साथ अभियान चलाया गया। इस दौरान हजारों ग्रामीणों ने स्वेच्छा से श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया। पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों पर भी जल संरक्षण के लिए आवश्यक संरचनाओं का निर्माण करें तथा वर्षा की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लें।

    जिला प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी इस प्रकार के अभियान लगातार चलाए जाएंगे, ताकि जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्थायी स्वरूप दिया जा सके। प्रशासन का लक्ष्य केवल सोख्ता गड्ढों का निर्माण करना नहीं, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह सामुदायिक सहभागिता के साथ वर्षा जल संरक्षण के प्रयास निरंतर जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में बलरामपुर जिले में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। यह अभियान जल संरक्षण की दिशा में जिले के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

  • अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चंबल में माफियाओं को हिरासत में लेने के निर्देश

    अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चंबल में माफियाओं को हिरासत में लेने के निर्देश

    जयपुर 
    राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।  उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में शामिल चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र और इसके आसपास हो रहे अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने हुई सुनवाई में कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर हुई सुनवाई में टिप्पणी की कि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि अवैध रेत खनन में शामिल और उसे बढ़ावा देने वाले लोगों को एहतियातन हिरासत में लेकर सख्त कदम उठाएं ताकि प्रभावी रोक लग सके।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन और इससे संकटग्रस्त जलीय वन्यजीवों पर पड़ रहे प्रभाव से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की जा चुकी है।
     
    चंबल नदी में अवैध रेत खनन से इसके संकटग्रस्त जलीय जीवों का जीवन खतरे में हैं। इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी की रिपोर्ट नंबर 15 में की गई सिफारिशों पर सुनवाई की। बेंच ने चंबल सेंक्चुअरी में माफियाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में पूछा। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की गई है।
     
    इस पर पीठ ने पूछा कि जब इनकी पहचान हो चुकी है तो इनके खिलाफ एहतियातन हिरासत की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने कहा कि कुछ लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में रखा जाना चाहिए, ताकि दूसरों के लिए भी यह एक उदाहरण बने। पीठ ने कहा, ये लोग प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहे हैं और जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे लोगों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि एहतियातन हिरासत जैसे उपाय अवैध खनन पर रोक लगाने में प्रभावी साबित हो सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। 

    प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों पर नरमी नहीं
    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह तथा वन्यजीवन का संतुलन सुरक्षित रहना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रकृति अपने आप संतुलन बना सकती है, बशर्ते मानव हस्तक्षेप कम हो। जो लोग प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनके प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखाई जानी चाहिए।

    तीनों राज्यों से मांगी कार्रवाई की जानकारी
    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अदालत को अवैध खनन रोकने के लिए दर्ज एफआईआर, जब्ती और अन्य कार्रवाई का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने होंगे।

    वन रक्षकों के लिए स्थायी कल्याण योजना बनाएं
    अदालत ने चंबल सेंक्चुअरी में जलीय जीवों की जान बचा रहे वन विभाग के अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों, विशेषकर वन रक्षकों के लिए स्थायी कल्याण योजना बनाने की जरूरत बताई। वनकर्मी के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की बात पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में वनरक्षक आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत हैं। इस पर अदालत को बताया गया कि ड्यूटी के दौरान कई वन रक्षकों पर हमले हुए हैं और कुछ की जान भी गई है। सरकारी वकील ने बताया कि अब ऐसे मामलों में मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा, पारिवारिक पेंशन और अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाती है। अदालत ने कहा कि इन सुविधाओं को स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। 

    प्रकृति खुद करेगी संतुलन, हस्तक्षेप से बचें
    चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों में पर्यावरणीय जल प्रवाह के मुद्दे पर भी अदालत ने टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि प्रकृति अपना संतुलन स्वयं बना लेती है। अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें और नदी को स्वाभाविक रूप से बहने दें। इससे पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण बेहतर ढंग से हो सकेगा। अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अवैध रेत खनन रोकने के लिए कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और लगातार कार्रवाई की जा रही है। 

  • बिहार में बिना राशन कार्ड वालों के लिए राहत, 2400 नए कार्ड बनाने का लक्ष्य

    बिहार में बिना राशन कार्ड वालों के लिए राहत, 2400 नए कार्ड बनाने का लक्ष्य

     पूर्णिया
    बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य के उन परिवारों के लिए राहत भरी खबर दी है, जिनके पास अब तक राशन कार्ड नहीं है। सरकार द्वारा संचालित स्मार्ट पीडीएस पोर्टल के माध्यम से से नए राशन कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

    विभाग का मुख्य उद्देश्य हर पात्र परिवार को खाद्य सुरक्षा का अधिकार देना है, ताकि जानकारी के अभाव में कोई भी जरूरतमंद परिवार इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कसबा प्रखंड सभागार हॉल में बीडीओ मधु कुमारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

    इस बैठक में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रंजिता कुमारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी दीपक कुमार, सभी पंचायतों के पंचायत सचिव और विकास मित्र मौजूद रहे। बैठक के दौरान बीडीओ ने अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिए कि प्रखंड में शिविर लगाकर आवेदन प्राप्त किए जाएंगे और 2400 से अधिक नए राशन कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

    यदि किसी कारणवश पत्नी का जाति, निवास या आय प्रमाण पत्र नहीं बन पाता है, तो पति के जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदन स्वीकार कर राशन कार्ड बनाया जाएगा।

    बीडीओ ने स्पष्ट किया कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि इस कार्य में किसी भी स्तर पर कोताही बरती गई, तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यदि किसी भी आवेदक से राशन कार्ड बनवाने के नाम पर अवैध राशि (रिश्वत) मांगने की शिकायत मिलती है, तो दोषी कर्मी पर त्वरित कार्रवाई होगी और उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

    प्रशासन एवं विभाग ने आम जनता से अपील की है कि इस सूचना को अपने रिश्तेदारों और आसपास के सभी पात्र परिवारों तक पहुंचाएं, ताकि हर जरूरतमंद समय पर आवेदन कर खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा सके।