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  • बठिंडा में हर हफ्ते होगी 100 KM इलाके की मैकेनिकल स्वीपिंग, सफाई व्यवस्था होगी बेहतर

    बठिंडा में हर हफ्ते होगी 100 KM इलाके की मैकेनिकल स्वीपिंग, सफाई व्यवस्था होगी बेहतर

    बठिंडा.

    शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम की ओर से शुरू किए गए मैकेनिकल स्वीपिंग (डीप क्लीनिंग) प्रोजेक्ट का स्थानीय निकाय विभाग के सचिव घनश्याम थोरी ने जायजा लिया।

    उन्होंने शहर में चल रही मैकेनिकल स्वीपिंग की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और अधिकारियों को सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर लवजीत कलसी सहित निगम और विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। नगर निगम की ओर से वर्तमान में प्रति सप्ताह करीब 100 किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग की जा रही है। निरीक्षण के दौरान सचिव घनश्याम थोरी ने प्रोजेक्ट के तहत की जा रही सफाई व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से शहर की सड़कों की सफाई व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। इससे शहर के सौंदर्यीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    अंदरूनी सड़कों की सफाई पर जोर
    सचिव ने अधिकारियों को शहर की अंदरूनी सड़कों पर भी मैकेनिकल स्वीपिंग और डीप क्लीनिंग का काम तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अंदरूनी सड़कों की करीब 630 किलोमीटर साप्ताहिक मैकेनिकल स्वीपिंग का काम जल्द शुरू किया जाए। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सफाई व्यवस्था केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शहर की अंदरूनी सड़कों और अन्य प्रमुख स्थानों पर भी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।

    164 किमी मुख्य सड़कों के टेंडर जल्द निपटाने के निर्देश
    मुख्य सड़कों की सफाई से संबंधित करीब 164 किलोमीटर के लंबित टेंडर कार्यों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर काम को जमीन पर शुरू करवाया जाए। घनश्याम थोरी ने अधिकारियों को सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी करने और मैकेनिकल स्वीपिंग के काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई दे।

    लोगों की भागीदारी भी जरूरी
    सचिव ने शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए लोगों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और अपने आसपास गंदगी न फैलाएं तथा शहर को साफ रखने में नगर निगम का सहयोग करें।

  • बिहार में शराबबंदी से ₹20 हजार करोड़ का नुकसान, CM सम्राट चौधरी बोले- महिलाओं के सम्मान के लिए लिया था फैसला

    बिहार में शराबबंदी से ₹20 हजार करोड़ का नुकसान, CM सम्राट चौधरी बोले- महिलाओं के सम्मान के लिए लिया था फैसला

     पटना

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी लागू रहेगी। इससे कोई समझौता नहीं होगा। भले ही इससे बिहार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में राज्य में शराबबंदी, बाढ़, रोजगार, पलायन से लेकर कई राजनीतिक मु्द्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के आग्रह पर राज्य में शराबबंदी लागू की थी। इसका सकारात्मक असर हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक आदि के जरिए बाढ़ आती है। हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बनी है। अभी जो बाढ़ की स्थिति बनी है, उसके लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया। सामुदायिक रसोई चलाकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2030 के पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। 2030 तक पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की बेहतर व्यवस्था हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ 30 सालों से काम कर रहा हूं। वह मेरे पितातुल्य हैं। एक सवाल पर उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का नेता कौन होगा, यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करता है। यह पार्टी का आंतरिक मामला है।

    नीतीश कुमार को बताया पिता तुल्य
    मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह पिछले 30 सालों से नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया। 

    भाजपा के अगले नेता को लेकर पूछे गए सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि यह फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है. उन्होंने इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया। 

    2030 तक पलायन रोकने का दावा
    मुख्यमंत्री ने बिहार से पलायन को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2030 से पहले राज्य से पलायन रोक दिया जाएगा. उनके मुताबिक, तब तक पढ़ाई से लेकर रोजगार तक बेहतर व्यवस्था तैयार हो जाएगी. सरकार का जोर राज्य में ही युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। 

    बाढ़ को लेकर हाईलेवल डैम की तैयारी
    बाढ़ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण बिहार में बाढ़ की समस्या आती है. हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बन चुकी है। 

    फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. उनके लिए सामुदायिक रसोई भी चलाई जा रही है। 

    फरक्का बराज को लेकर भी उठाया सवाल
    सम्राट चौधरी ने फरक्का बराज को भी बिहार के लिए नुकसानदायक बताया. उन्होंने कहा कि इसके कारण गंगा नदी में गाद जमा हो रही है. इससे नदी की चौड़ाई अलग-अलग जगहों पर बढ़ गई है। 

    मुख्यमंत्री के अनुसार, बक्सर में गंगा की चौड़ाई करीब 4 किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी तक हो जाती है। 

    उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर बिहार की मांग स्पष्ट है. राज्य को पीने, खेती और उद्योग के लिए जरूरत के अनुसार किसी भी समय पानी लेने का अधिकार मिलना चाहिए. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत की गई है। 

    फरक्का बराज से बिहार को नुकसान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का बराज से बिहार को नुकसान है। इससे गंगा नदी में गाद जमा हो गयी है। इस कारण बक्सर के पास गंगा की चौड़ाई चार किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि फरक्का जल संधि पर बिहार की ओर से यह आग्रह है कि हमें पीने, खेती करने और उद्योग के लिए किसी भी समय पानी लेने का अधिकार हो। इसके लिए हमने केंद्र सरकार से बात की है।

  • BJP नेता के खिलाफ ट्वीट हटाने पर राजी सौरव-रांका, अदालत ने दी एक और मौका

    BJP नेता के खिलाफ ट्वीट हटाने पर राजी सौरव-रांका, अदालत ने दी एक और मौका

    नई दिल्ली

    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह संयोजक सौरव दास को अदालत ने गौरव भाटिया पर किए गए सभी पोस्ट को हटाने को कहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाटिया के मानहानि मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सीजेपी नेताओं को नसीहत के साथ एक मौका दिया और कहा कि वे खुद उन पोस्ट्स को हटा दें। अदालत ने कहा कि बिना किसी तथ्य को परखे इस तरह साझा करना ठीक नहीं है। अदालत के निर्देश के बाद सौरव दास ने भाटिया के खिलाफ एक और विवादित पोस्ट को डिलीट कर दिया है।

    सौरव दास ने एक फर्जी न्यूज कार्ड को शेयर किया था जिसमें गौरव भाटिया को गिरप्तार किए गए विवादित यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को दिमागी नक्सल कहते हुए दिखाया गया था। भाटिया ने इसे फर्जी करार देते हुए सौरव दास को पोस्ट डिलीट करने और माफी मांगने मांगने को कहा था। सौरव दास ने उस पोस्ट को डिलीट कर दिया, लेकिन माफी मांगने से इनकार करते हुए भाटिया की एक आपत्तिजनक तस्वीर शेयर कर दी थी।

    भाजपा नेता की ओर से किए गए 2 करोड़ के मानहानि मुकदमे पर जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कहा कि सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से गौरव भाटिया पर बिना जांच परखे किए गए पोस्ट गलत हैं। अदालत ने उन्हें खुद ही उन्हें हटाने का मौका दिया। वहीं, अभिजीत दीपके की ओर से कहा गया कि उन्होंने इस पर कुछ नहीं लिखा था, इसलिए उन्हें प्रतिवादियों में से हटा दिया जाए।

    'पोस्ट हटाने पर विचार करें'
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने के अलग-अलग तरीके होते हैं. कोर्ट ने कहा कि दोनों युवा हैं और उनकी अपनी चिंताएं हो सकती हैं, लेकिन बिना सत्यापन किसी पर इस तरह हमला करना उचित नहीं है. कोर्ट ने कहा कि अगर वे अपनी ओर से पोस्ट हटाने को तैयार हैं तो अपना जवाब दाखिल करें। 

    सौरव दास के वकील ने बताया कि संबंधित पोस्ट पहले ही हटा दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा भी कुछ सामग्री पोस्ट की गई है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन कई बार बात को स्पष्ट और संयमित तरीके से रखना जरूरी होता है। 

    CJP के अभिजीत दीपके को लेकर सवाल
    सुनवाई की शुरुआत में कोर्ट ने कहा कि CJP के अभिजीत दीपके के खिलाफ कोई आरोप नहीं है. उनके वकील निखिल गांधी ने कहा कि दीपके की ओर से ऐसा कोई पोस्ट नहीं किया गया और उन्हें मामले से हटाया जाना चाहिए। 

    भाटिया की ओर से कहा गया कि मामला सिर्फ एक-दो पोस्ट तक सीमित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक पूरा तंत्र काम कर रहा है और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 

    कोर्ट ने भाटिया से भी कहा कि विवाद को अदालत में लाने के बजाय दूसरे तरीके से सुलझाने की कोशिश की जा सकती थी. इस पर भाटिया ने कहा कि यह गंभीर मानहानि का मामला है और पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचने के कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा है। 

    कोर्ट ने दास और रांका के वकील से अपने मुवक्किलों से निर्देश लेकर आने को कहा. कोर्ट ने कहा, "आप युवा हैं, आपके सामने लंबा रास्ता है. अदालतों में समय क्यों बिताना चाहते हैं?

    अदालत ने और क्या समझाया
    अदालत ने मौखिक रूप से कहा, 'विरोध जताने के कई तरीके हैं। आप सभी युवा हैं। आपको बेचैनी हो सकती है। लेकिन इस तरह बिना पुष्टि के हमला करना ठीक नहीं है। यदि आप खुद इन्हें हटाना चाहते हैं तो अपना जवाब दीजिए। हम इसे हटाने का आदेश नहीं जारी करना चाहते हैं।' इस बीच सौरव दास के वकील ने कहा कि उन्होंने ट्वीट को पहले ही डिलीट कर दिया है। इस पर अदालत ने कहा, 'लेकिन आपने कुछ कुछ और भी डाला है। आपको अभिव्यक्ति का अधिकार है, लेकिन यह सही तरीके से हो। ताकि आपकी मंशा सही दिशा में रहे। हम समझते हैं, क्योंकि हम भी इस उम्र से गुजरे हैं।'

    अदालत ने भाटिया से क्या कहा
    अदालत ने भाटिया से कहा कि इस तरह के मुद्दों से निपटने के और भी तरीके हैं। उन्होंने कहा कि वह अदालत आने की बजाय प्रतिवादियों से बात कर सकते थे। हालांकि भाटिया ने कहा, 'यह गंभीर मानहानि का मामला है। ऐसे पोस्ट इंटरनेट पर नहीं हो सकते हैं, क्योंकि उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं। यह मेरी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। हमने उन्हें एक मौका दिया था।' अदालत ने सीजेपी नेताओं के वकीलों से कहा कि वह निर्देश प्राप्त करें और बताएं कि वे खुद हटाने को तैयार हैं या नहीं।

  • स्कूलों में सांपों के खतरे पर हरियाणा शिक्षा विभाग अलर्ट, जारी हुई नई गाइडलाइन

    स्कूलों में सांपों के खतरे पर हरियाणा शिक्षा विभाग अलर्ट, जारी हुई नई गाइडलाइन

    चंडीगढ़
    अक्सर बरसात के दौरान सांप निकलने की समस्या देखी जाती है। जब सांप स्कूलों में दिखें तो बच्चों से लेकर शिक्षकों तक में एक अलग ही तरह का डर का माहौल होता है।

    ऐसे में हरियाणा के विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए सर्पदंश और परिसरों में सांपों के प्रवेश की रोकथाम को लेकर एक विस्तृत परामर्श जारी किया है।

    मानसून और वर्षा ऋतु के बाद स्कूलों में बढ़ने वाले इस खतरे को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    स्वच्छता, रखरखाव और चेकिंग पर विशेष जोर
    निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी विद्यालयों को अपने परिसरों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

        झाड़ियों की कटाई: कक्षाओं, शौचालयों, रसोई, स्टोर और खेल के मैदानों के आसपास उगी घास और झाड़ियों को तुरंत काटने के निर्देश दिए गए हैं।
        कूड़ा और निर्माण सामग्री हटाना: ईंट, पत्थर, पुरानी लकड़ी, अनुपयोगी फर्नीचर और टायरों के ढेर हटाने को कहा गया है, जिससे साँपों के छिपने की जगह न बचे।
        दरारों और रास्तों की मरम्मत: दरवाजों के नीचे के गैप, फर्श व दीवारों की दरारों और नालियों को जाली या ग्रिल से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
        कमरों की जांच और रोशनी: लंबे समय से बंद कमरों, स्टोर रूम और शौचालयों को खोलने से पहले उनकी अच्छे से जांच करने और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त रोशनी रखने की बात कही गई है।

    जहरीले रसायनों और झाड़-फूंक पर पूर्ण प्रतिबंध
    शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सांपों को भगाने के नाम पर किसी भी प्रकार के जहरीले रसायन, कीटनाशक, मिट्टी के तेल, तेजाब या नैफ्थलीन (फिनाइल) की गोलियों का प्रयोग न किया जाए, जिससे बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है।

    साथ ही, सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या अप्रमाणित देसी उपचार में समय बर्बाद करने के बजाय पीड़ित को तुरंत निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। घाव पर चीरा लगाने, रस्सी कसकर बाँधने या विष चूसने जैसे खतरनाक कदमों से बचने की सलाह दी गई है।

    स्कूल में सांप दिखने पर क्या करें?
        घबराएँ नहीं और बच्चों को दूर रखें: साँप दिखने पर विद्यार्थियों को शांतिपूर्वक उस स्थान से दूर ले जाएँ और भीड़ या फोटो/वीडियो बनाने से रोकें।
        छेड़ने या मारने की कोशिश न करें: साँप को खुद पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें।
         विशेषज्ञों की मदद लें: आवश्यकता पड़ने पर केवल वन विभाग या अधिकृत सर्प-राहतकर्ता से ही संपर्क किया जाए।

    स्कूल स्तर पर तैयार रखनी होगी चेकलिस्ट और रिपोर्ट प्रपत्र
    निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे अपने पास निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, एम्बुलेंस और वन विभाग के आपातकालीन नंबर प्रदर्शित करके रखें। इसके अलावा, परिसरों के नियमित निरीक्षण के लिए 20 बिंदुओं की एक सर्प-सुरक्षा निरीक्षण सूची और किसी भी घटना के रिकॉर्ड के लिए घटना प्रतिवेदन प्रपत्र भी संलग्न किया गया है

    सभी जिला एवं खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस परामर्श का पालन अपने-अपने जिलों के सभी स्कूलों में सुनिश्चित कराएं।

  • झारखंड में नई बार पॉलिसी का इंतजार, 5-स्टार होटल में सुबह 4 बजे तक शराब परोसने का प्रस्ताव

    झारखंड में नई बार पॉलिसी का इंतजार, 5-स्टार होटल में सुबह 4 बजे तक शराब परोसने का प्रस्ताव

     रांची
     राज्य में बार में मारपीट, हथियार लहराने, गोली चलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए, कार्रवाई करने के लिए जो नियमावली बनी, उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका।

    करीब सात महीने पहले सात फरवरी को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने बार संचालन के लिए ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' का ड्राफ्ट स्टेक होल्डर्स व आम लोगों के लिए जारी किया था।

    उक्त नियमावली पर सुझाव व आपत्तियां मंगाई गई थी, ताकि उसमें सुधार करते हुए संशोधित नियमावली को धरातल पर उतारा जा सके। सात महीने पूरे हो गए, लेकिन नियमावली धरातल पर नहीं उतारी जा सकी। अब भी राज्य में पुरानी नियमावली के तहत ही बार का संचालन हो रहा है। जो नियमावली बनी थी, वह फाइलों में ही रह गई।

    प्रस्तावित नियमावली में यह उल्लेख है कि होटल, रेस्टोरेंट, बार परिसर में अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रवेश करने पर हथियार धारण करने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। स्टाक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं करने पर दस हजार, उसे अद्यतन नहीं भरने पर दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रविधान है।

    बार में जाने वाले ग्राहकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखकर नियमावली का प्रारूप बनाया गया था। नियम तोड़ने वाले बार संचालकों के लिए जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। माप से कम शराब परोसने पर, गंदा परिसर रखने पर, निर्धारित आवाज से अधिक आवाज में म्यूजिक बजाने पर, नो स्मोकिंग जोन में स्मोकिंग करने पर भी जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है।

    बार व रेस्तरा में शराब परोसने के लिए नियम व शर्तों को प्रभावी बनाया जाना था। इसी उद्देश्य से यह नियमावली प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक उस नियमावली पर विचार नहीं किया जा सका।

    तो पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसी जाती
    राज्य में ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' लागू होती तो विभिन्न क्षेत्रों व होटलों में नियम के अनुसार शराब परोसने के समय निर्धारित होते। जैसे प्रस्तावित नियमावली में पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसे जाने का प्रविधान प्रस्तावित है।

    वर्तमान में होटल हो या रेस्टोरेंट, हर तरह के बार में रात में 12 बजे तक ही शराब परोसने का प्रविधान किया गया है। नई नियमावली में सुरक्षा के जो प्रविधान प्रस्तावित हैं, वह पुरानी नियमावली में नहीं है।

    सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही नई नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, स्टेक होल्डर्स टैक्स के बिंदु पर आपत्ति जता चुके हैं, जिसपर विभाग को समीक्षा करना था। समीक्षा के बाद ही नियमावली पर आगे कोई निर्णय लिया जाना था। अब तक सभी बिंदुओं पर मामला लंबित है।

     

  • झारखंड पंचायत चुनाव 2027 की तैयारी तेज, धनबाद में 10.61 लाख मतदाता करेंगे मतदान

    झारखंड पंचायत चुनाव 2027 की तैयारी तेज, धनबाद में 10.61 लाख मतदाता करेंगे मतदान

    धनबाद
    झारखंड में अप्रैल-मई 2027 में त्रिस्तरीय पंचायत संभावित है।
    इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। चुनाव और पंचायतों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट समय-समय पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है।

    इस कड़ी में धनबाद जिला की पंचायतों, मतदाताओं और मतदान केंद्रों से संबंधित रिपोर्ट व सूची प्रकाशित की गई है। जिसके अनुसार जिले के नौ प्रखंडों के 242 पंचायतों में 10,61,604 मतदाता मतदान करेंगे।

    जबकि 2939 मतदान केंद्रों में से 27 मतदान केंद्र जर्जर हैं या फिर इन्हें स्थानांतरित करने अथवा इनके मरम्मति की आवश्यकता है।

    जर्जर मतदान केंद्रों की स्थानांतरित करने की जरूरत
    जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित इन मतदान केंद्रों में से 27 की हालत खराब है। ये अत्यंत जर्जर हो चुके हैं या फिर इनकी मरम्मति की जरूरत है। ऐसे मतदान केंद्रों में बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा पंचायत का बीसीसीएल बिजली घर गोल्डेन पहाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

    जिसे करमाटांड शिफ्ट किया गया है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्र ब्राम्हण टोला का मतदान केंद्र के निजी भवन में संचालित हैं। इसे करमाटांड शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।

    पूर्वी टुंडी के चार केंद्रों जर्जर
    पूर्वी टुंडी प्रखंड के महोलीडीह पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र का मतदान भवन ध्वस्त हो चुका है। जबकि सामुदायिक भवन पंडुआ पूरी तरह से जर्जर है। रूपन में पुराना पंचायत भवन फुलपहाड़ी की हालत खस्ता है। वहीं लटानी और पांड्राबेजरा पंचायत के मतदान केंद्र प्राथमिक विद्यालय शंकरडीह में था।

    इस स्कूल को उत्क्रमित विद्यालय रघुनाथपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसी प्रकार से प्राथमिक विद्यालय डुमरजोर को मध्य विद्यालय पोलकेरा में मिला दिया गया है। इनके जगह पर नए भवन को चिन्हित करना होगा।

    पूर्वी टुंडी की तरह ही कलियासोल प्रखंड का जमाकुदर, ऐलाकेंद्र, सालुकचपड़ा और कलियासोल पंचायत में सामुदायिक भवन फतेहपुर, मध्य विद्यालय कुशियारा, चासपाड़ा पुराना पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय कालुबथान पूर्व और पश्चिम अत्यंत जर्जर हैं।

    एग्यारकुंड में 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब
    एग्यारकुंड प्रखंड में सबसे अधिक 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब है। चांच में एनपीएस डुमरीजोड भूधंसान की चपेट में आ चुका है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्कूल बंद हो गया है। इन दोनों को पीएस बुटबाड़ी और सामुदायिक भवन पंचायत उपसचिवालय में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है।

    वहीं जोगरात पंचायत में पीएस जूनकूदर का कमरा नंबर एक व दो की स्थिति खराब है। गोपीनाथपुर में सामुदायिक भवन आदिवासी टोला, एग्यारकुंड उत्तर में जामबानी लोहिया भवन, शिवलीबाड़ी दक्षिण में सामुदायिक भवन गड़ियाखान और गोपालपुर में पुराना पंचायत भवन व सामुदायिक भवन राजापुर के मरम्मत की जरूरत बताई गई है।

    वहीं कालीपहाड़ी दक्षिण पंचायत में प्राथमिक विद्यालय डीवीसी रांची कालोनी का मतदान केंद्र संख्या 46 से 51 तक जर्जर है।

    भौगोलिक रूप से नहीं बदलेंगी पंचायतें, दावा आपत्ति की मांग
    अब यह भी साफ हो गया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में इनके भौगोलिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं होगा। निर्वाचन आयोग से मांगी गई जानकारी पर धनबाद उपायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजी है।

    उसमें बताया गया है कि पंचायत की सीमाओं को ही आधार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों को लेकर सूची भी जारी कर दिया गया है। जिस पर दावा आपत्ति की मांग किया गया है।

    बाघमारा में अधिक पंचायतें
    जिले के बाघमारा प्रखंड में सबसे अधिक 62 पंचायतें हैं और यहां मतदाताओं की भी संख्या सर्वाधिक 2,45,812 है। यहां सबसे अधिक 668 मतदान केंद्र भी हैं। जबकि सबसे कम केवल नौ पंचायतों वाला प्रखंड पूर्वी टुंडी है। यहां कुल मतदाता 39,229 हैं और मतदान केंद्र 112 हैं।

    प्रखंड – पंचायतें – मतदान केंद्र – कुल मतदाता
    बाघमारा – 62 – 668 – 2,45,812
    बलियापुर – 23 – 283 – 99,844
    धनबाद – 12 – 118 – 44,523
    एग्यारकुंड – 23 – 231 – 90,735
    गोविंदपुर – 39 – 479 – 1,77,966
    कलियासोल – 20 – 226 – 79,115
    निरसा – 27 – 293 – 1,08,611
    पूर्वी टुंडी – 09 – 112 – 39,229
    तोपचांची – 27 – 326 – 1,06,564
    टुंडी – 17 – 203 – 69,205

     

  • पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने का नया फॉर्मूला! CM चेहरे पर फिलहाल सस्पेंस

    पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने का नया फॉर्मूला! CM चेहरे पर फिलहाल सस्पेंस

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस पंजाब में चुनाव से पहले किसी नेता को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर घोषित नहीं करेगी।

    पायलट के मुताबिक पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और चुनाव अभियान की अगुवाई राहुल गांधी करेंगे। चुनाव में बहुमत मिलने के बाद ही मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला किया जाएगा। पंजाब के प्रभारी बनने के बाद पायलट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक दूरी लगातार चर्चा में है।

    पायलट के बयान से बहस पर रोक
    चन्नी खेमे की ओर से वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और चुनाव में चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाने की मांग भी सामने आती रही है। ऐसे में पायलट का मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर दिया गया बयान पार्टी के भीतर चल रही इस बहस को फिलहाल विराम देता दिखाई दे रहा है। पायलट ने संकेत दिया कि कांग्रेस के लिए किसी एक व्यक्ति का चेहरा महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि पूरी पार्टी का एकजुट होकर चुनाव लड़ना अहम है। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस एक टीम के रूप में चुनाव मैदान में उतरेगी और राहुल गांधी अभियान का प्रमुख चेहरा होंगे। उनका जोर संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को साथ लेकर चलने पर है। पायलट ने इससे पहले भी पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपेक्षा जताई है।

    सामूहिक मेहनत से सत्ता वापसी
    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने सामूहिक मेहनत और मजबूत संगठन के दम पर पंजाब में कांग्रेस की सत्ता में वापसी का भरोसा जताया था। कांग्रेस के लिए यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और सत्ता हासिल की थी।

    गुटबाजी थामना पायलट की बड़ी चुनौती
    वहीं 2022 में आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुनाव मैदान में उतरकर सरकार बनाई थी। अब कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव में उतरने की रणनीति अपना रही है। पायलट जल्द पंजाब दौरे पर आने वाले हैं। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने की होगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके दौरे और आगे राहुल गांधी के संभावित पंजाब अभियान के दौरान चन्नी, रंधावा और वड़िंग किस तरह साथ दिखाई देते हैं।

  • 8200 करोड़ से बनेगा राम जानकी पथ का शेष हिस्सा, 150 किमी फोरलेन के लिए डीपीआर तैयार

    8200 करोड़ से बनेगा राम जानकी पथ का शेष हिस्सा, 150 किमी फोरलेन के लिए डीपीआर तैयार

    पटना
    राम जानकी पथ के शेष हिस्सा का निर्माण 8200 करोड़ रुपये से किया जाएगा। तीसरे और चौथे पैकेज में बनने वाली इस सड़क की डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही यह डीपीआर केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की स्वीकृति के बाद इस सड़क के निर्माण की निविदा जारी की जाएगी। राम जानकी पथ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मेहरौना घाट से बिहार-नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 240 किलोमीटर सड़क बननी है।

    इनमें तीसरे और चौथे पैकेज में सारण जिले के मशरख से नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 150 किलोमीटर फोरलेन सड़क बनेगी। तीसरे और चौथे पैकेज में 150 किमी सड़क किन-किन गावों से होकर गुजरेगी, इसका निर्धारण पहले ही कर लिया गया है। कुल 107 गावों की जमीन का इसमें अधिग्रहण किया जाएगा। इनमें सारण के दस, गोपालगंज के 13, पूर्वी चंपारण के 48, शिवहर के पांच और सीतामढ़ी के 31 गांव शामिल हैं।

    जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा
    डीपीआर पर केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद इस पथ के लिए जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा। वहीं, पहले और दूसरे पैकेज में करीब 90 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पहले से जारी है। तीसरे पैकेज में 76 किलोमीटर सड़क बनेगी, जो मशरख से शिवहर तक जाएगी।

  • हरियाणा में खिलाड़ियों के लिए बनेगा नया पोर्टल, खेल सुविधाओं की होगी डिजिटल मैपिंग

    हरियाणा में खिलाड़ियों के लिए बनेगा नया पोर्टल, खेल सुविधाओं की होगी डिजिटल मैपिंग

    चंडीगढ़.

    पूरे खेल तंत्र को एकीकृत डिजिटल मंच से जोड़ने के लिए राज्य खेल पोर्टल स्थापित किया जाएगा। प्रदेशभर की खेल अवसंरचना की व्यापक मैपिंग, साझा राज्य खेल कैलेंडर और जमीनी स्तर से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभाओं को तैयार करने टैलेंट-पाथवे फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य खेल प्रशासनिक समिति की पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मान्यता प्राप्त खिलाड़ी और खेल क्लब अब स्कूल-कॉलेजों, पंचायतों और शहरी निकायों में उपलब्ध खेल सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। खेल विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार ने बताया कि राज्य खेल पोर्टल पर खेल सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों, प्रतियोगिताओं एवं प्रशिक्षण शिविरों, प्रशिक्षकों, खेल उपकरणों, खिलाड़ियों तथा उनकी उपलब्धियों से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी।

    खेल सुविधाओं का तैयार किया जाएगा डेटाबेस
    खेल अवसंरचना से जुड़े सभी विभाग, बोर्ड और निगम नोडल अधिकारी नामित करेंगे, जो पोर्टल पर सूचना को नियमित रूप से अपडेट रखेंगे। प्रदेशभर में खेल विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, विश्वविद्यालयों और अन्य एजेंसियों के अधीन उपलब्ध खेल सुविधाओं की व्यापक मैपिंग कर एक आधारभूत डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
    इससे खेल सुविधाओं में मौजूद कमियों की पहचान करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और भविष्य की खेल अवसंरचना के विकास के लिए अधिक वैज्ञानिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। विभिन्न विभागों एवं संस्थानों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं, टूर्नामेंटों, प्रशिक्षण शिविरों और अन्य खेल गतिविधियों को शामिल करते हुए समेकित राज्य खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इससे प्रतियोगिताओं की तिथियों में अनावश्यक टकराव से बचने, खेल सुविधाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनके व्यवस्थित विकास के लिए टैलेंट-पाथवे फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। स्कूल और पंचायत स्तर पर प्रतियोगिताओं एवं प्रतिभा पहचान से इसकी शुरुआत होगी।

    खेल पोर्टल के जरिए रखी जाएगी निगरानी
    इसके बाद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को जिला और राज्य स्तर के केंद्रों के माध्यम से आगे बढ़ाते हुए आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा। खेल निदेशक पार्थ गुप्ता ने बताया कि खिलाड़ियों को उपलब्ध करवाए जा रहे प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति, पुरस्कार, खेल उपकरण, आहार तथा परिवहन एवं अन्य सहायता की अधिक समन्वित निगरानी राज्य खेल पोर्टल के माध्यम से की जा सकेगी। खेल मैदानों, स्टेडियमों, स्विमिंग पूल, जिम्नेजियम, फ्लड-लाइटिंग व्यवस्था, दर्शक दीर्घाओं और खेल उपकरणों की सुरक्षा जांच छह माह में सुनिश्चित की जाएगी तथा इसकी निगरानी पोर्टल से जोड़ी जाएगी।

    महिला खिलाड़ियों को मिलेगी बेहतर आवासीय एवं परिवहन सुविधा
    महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित खेल सुविधाओं, महिला प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा बेहतर आवासीय एवं परिवहन सहायता को मजबूत किया जाएगा। पंचायत स्तर के खेल मैदानों और ग्रामीण खेल गतिविधियों के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला स्तर पर खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और खिलाड़ियों की भागीदारी का आकलन कर अपेक्षाकृत कम सुविधाओं वाले जिलों और खंडों की पहचान की जाएगी।

  • महावीर जी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

    महावीर जी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

    जयपुर
     सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध 'श्री महावीर जी जैन मंदिर' के प्रबंधन और संचालन को लेकर जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच चल रहे विवाद पर बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली। फैसला बाद में सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा, जिस भगवान के नाम पर दोनों पक्ष लड़ रहे हैं, क्या वह इस तरह कानूनी लड़ाई से खुश होंगे?

    न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले पर बुधवार को सुनवाई की। दोनों पक्षों को आठ दिन के भीतर लिखित बहस पेश करने के निर्देश दिए हैं। लोक न्यास अधिनियम, 1959 के तहत कार्यवाही से विवाद शुरू हुआ था। मंदिर प्रबंधन से दिगंबर समिति अध्यक्ष और सचिव को हटाने तथा श्वेतांबर संप्रदाय की नई प्रबंध समिति बनाने की मांग की गई।

    विवाद करें समाप्त
    सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पारदीवाला ने दोनों पक्षों से कहा, यह बहुत ही संवेदनशील मामला है और किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना विवाद को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने दोनों पक्षों से पूछा कि क्या ऐसा संभव है कि सुबह श्वेतांबर संप्रदाय अपनी परंपरा के अनुसार भगवान की पूजा करे और शाम को दिगंबर संप्रदाय भगवान के वस्त्र बदलकर अपनी पद्धति से पूजा करे। आप अनावश्यक मुकदमेबाजी कर भगवान को क्यों परेशान कर रहे हैं? क्या आपको लगता है भगवान इस सबसे खुश होंगे?

    बताते चलें कि साल 1970 में एसडीएम ने दिगंबर समिति के खिलाफ प्रार्थना पत्र मंजूर किया। दिगंबर समिति की ओर से पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत पेश प्रार्थना पत्र के आधार पर अक्टूबर 1994 में ट्रायल कोर्ट ने रोक लगा दी। हाईकोर्ट में अपील दायर की गई, जिसका दिगंबर समिति ने विरोध किया कि 1991 के अधिनियम के तहत कार्यवाही समाप्त हो चुकी थी।

    क्या है दोनों पक्षों की दलीलें?
    वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान का तर्कः इस मामले में पूजास्थल परिवर्तन की कोई मांग नहीं की गई है, इसलिए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 इस मामले में लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संपूर्ण जैन समुदाय के हित में मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है।

    दिगंबर समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम का तर्क
    हाईकोर्ट को अपील पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि 1991 के कानून के तहत कार्यवाही समाप्त कर दी गई और उसमें अपील का प्रावधान नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका दायर होनी चाहिए थी। तथ्य यह है कि मूर्ति (देवता), मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों का नियंत्रण, कब्जा और प्रबंधन दिगंबर जैन संप्रदाय के पास ही रहा है।