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  • JPSC-JSSC प्रदर्शन में हंगामा, पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस, कई जगह तनाव

    JPSC-JSSC प्रदर्शन में हंगामा, पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस, कई जगह तनाव

     रांची
     JPSC-JSSC में गड़बड़ी को लेकर विधानसभा घेराव के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की।

    पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके अलावा वाटर कैनन और आंसू गैस का भी प्रयोग किया गया है। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ लोगों की ओर से पुलिस पर बोतलें फेंके जाने की बात सामने आई है।

    इस प्रदर्शन में शामिल हुए कुछ छात्रों ने खुद आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। छात्रों का दावा है कि आंदोलन में कुछ उपद्रवी तत्व घुस आए है, जो जानबूझकर माहौल बिगड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

    छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन परीक्षा में अनियमितताओं और अपनी मांगों को लेकर है तथा हिंसा या पुलिस से टकराव उनके आंदोलन का हिस्सा नहीं है।

    तनाव बढ़ाने के बाद छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने अन्य छात्रों से आगे नहीं बढ़ने और सयंम बनाए रखने की अपील की। उनका कहना है कि कुछ लोगों की हरकतों का असर पूरे छात्र आंदोलन पर पड़ सकता है।

    छात्रों ने प्रदर्शनकारियों से किसी भी तरह की आपत्तिजनक गतिविधि से दूर रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपने मांगे रखने की अपील की है।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान बोले- उपद्रवी तत्वों की पहचान कर होगी कार्रवाई
    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे अपनी मांगों पर मजबूती से कायम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शन को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की अपील की।

    उन्होंने कहा कि छात्र स्वयंसेवक भी ऐसे तत्वों की पहचान कर रहे हैं और CCTV फुटेज व वीडियो कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी छात्रों से अपील की कि यदि उन्हें कोई असामाजिक तत्व नजर आए तो इसकी जानकारी स्वयंसेवकों को दें।

    साथ ही यह भी कहा कि छात्र आंदोलन को अंत तक शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आज ही कोई निर्णय लेने की अपील की।

    पुलिसकर्मी के घायल होने के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा
    विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी के घायल होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से बोतल फेंके जाने के दौरान पुलिसकर्मी को चोट लगी।

     

  • बिहार में एक करोड़ से अधिक पेंशनधारियों को मिली खुशखबरी, खाते में पहुंचे 1100 रुपये

    बिहार में एक करोड़ से अधिक पेंशनधारियों को मिली खुशखबरी, खाते में पहुंचे 1100 रुपये

    पटना
    बिहार सरकार हर महीने की 10 तारीख को 'बिहार पेंशन दिवस' के तौर पर मनाती है। इस दिन सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों को राशि देने का फैसला किया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज एक करोड़ से अधिक लोगों के खाते में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि हस्तांतरित की। सीएम सम्राट चौधरी ने इस मौके पर वहां मौजूद अफसरों को एक अहम आदेश भी दिया। एक अर्णे मार्ग में आयोजित कार्यक्रम में हर लाभार्थी के खाते में 1100-1100 रुपए डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदाकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना में जो भी योग्य पात्र छूटे हुए हैं, उनका नाम जोड़िए।

    सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलने के बाद इससे विधवाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को आर्थिक मदद मिलती है। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में बड़ा इजाफा किया था। पहले जहां लाभार्थियों को प्रतिमाह 400 रुपए मिलते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर 1100 रुपए कर दिया गया है। 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ये कदम उठाया गया।

    पूर्णिया जिले में 250000 पेंशनधारियों को 32 करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में हस्तांतरित की गई । इस मौके पर लाभुकों ने कहा कि पहले ₹400 पेंशन मिलती थी अब 1100 मिलने से रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है।

  • गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों में बुलडोजर एक्शन, 8 जोन में टूटेंगे अवैध आशियाने

    गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों में बुलडोजर एक्शन, 8 जोन में टूटेंगे अवैध आशियाने

    गुरुग्राम.

    नगर निगम गुरुग्राम ने सोमवार को शहर के सभी आठ जोन में बड़े स्तर पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू किया। संबंधित जोन के संयुक्त आयुक्तों के नेतृत्व में निगम की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई की।

    सदर बाजार, कृष्णा कॉलोनी, आयुध डिपो प्रतिबंधित क्षेत्र, डीपीजी कॉलोनी सेक्टर-34, रेयान एन्क्लेव भोंडसी सहित अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है।

    रेयान एन्क्लेव में चला ध्वस्तीकरण अभियान
    रेयान एन्क्लेव, भोंडसी में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का ध्वस्तीकरण अभियान लगातार जारी है। संयुक्त आयुक्त रविंद्र मलिक के नेतृत्व में एई आशीष हुड्डा और निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की। टीम द्वारा क्षेत्र में लगातार निगरानी रखते हुए नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

    आठों जोन में टीमों ने संभाला मोर्चा
    निगम अधिकारियों के अनुसार, शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को रोकने के लिए सभी आठ जोन में टीमों को सक्रिय किया गया है। संबंधित संयुक्त आयुक्त अपने-अपने जोन में अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। निगम की टीमें चिह्नित स्थानों पर पहुंचकर निर्माण की जांच करने के साथ नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई कर रही हैं।

    कार्रवाई आगे भी रहेगी जारी
    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभियान के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

  • बिहार में 1.01 करोड़ पेंशनधारियों को 1,157 करोड़ रुपये की सौगात

    बिहार में 1.01 करोड़ पेंशनधारियों को 1,157 करोड़ रुपये की सौगात

    पटना
    बिहार पेंशन दिवस के मौके पर राज्य के 1 करोड़ 1 लाख 33 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए बड़ी राशि जारी की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित 'संकल्प' सभागार से डीबीटी के माध्यम से सभी लाभार्थियों के खाते में प्रति व्यक्ति 1100 रुपये की दर से कुल 1157 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि हस्तांतरित की।

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित कार्यक्रम में सभी जिलों के जिलाधिकारी और सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारी जुड़े।

    हर महीने 10 तारीख को खाते में पहुंचेगी पेंशन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये किया है।

    अब यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक महीने की 10 तारीख को पेंशन की राशि लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित कर दी जाए। उन्होंने इसे पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित जनकल्याणकारी व्यवस्था का प्रमाण बताया।

    पात्र लाभार्थियों को जोड़ने का डीएम को निर्देश
    मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी पात्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थी योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में छूटे हुए पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें पेंशन योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। पेंशन वितरण की प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से जारी रखने पर भी जोर दिया गया।

    गरीब और वंचित वर्गों की सामाजिक सुरक्षा पर जोर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और समाज के वंचित वर्गों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को सम्मान के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले। पेंशन योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    1.70 करोड़ परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली
    मुख्यमंत्री ने राज्य में मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार के 1 करोड़ 70 लाख परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है

    इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 23 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी खर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों की सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है।
    कार्यक्रम में दिखाई गई पेंशन योजना पर लघु फिल्म

    कार्यक्रम की शुरुआत में सामाजिक सुरक्षा की निदेशक डा. प्रीति ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े जिलाधिकारियों और पेंशनधारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

    कई मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद
    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता समेत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    बिहार पेंशन दिवस पर एक साथ 1 करोड़ से अधिक पेंशनधारियों के खातों में राशि भेजे जाने को सामाजिक सुरक्षा योजना के बड़े भुगतान के रूप में देखा जा रहा है।

    सरकार ने दोहराया कि पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने और समय पर पेंशन पहुंचाने की व्यवस्था जारी रहेगी।

     

  • मोहाली के मेयर की खेल जगत में एंट्री, टी-20 टीम के मालिकों में हुए शामिल

    मोहाली के मेयर की खेल जगत में एंट्री, टी-20 टीम के मालिकों में हुए शामिल

    मोहाली.

    मोहाली के मेयर सरबजीत सिंह समाना की भूमिका अब सिर्फ शहर की सियासत और नगर निगम तक सीमित नहीं रही। शेर-एपंजाब टी-20 लीग के आगामी संस्करण के साथ उन्होंने खेल जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

    सरबजीत सिंह समाना मोहाली किंग्स टीम के मालिकों में शामिल हैं। ऐसे में मोहाली की स्थानीय राजनीति में सक्रिय एक प्रमुख चेहरा अब शहर के नाम से जुड़ी क्रिकेट टीम के साथ भी सीधे जुड़ गया है। सरबजीत सिंह समाना के इस नए रोल की खास बात यह है कि जिस शहर का वह बतौर मेयर प्रतिनिधित्व करते हैं, उसी शहर के नाम पर बनी टी-20 टीम के मालिकों में भी उनकी भूमिका है। अब मोहाली में उनकी चर्चा नगर निगम और राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ क्रिकेट और खेल के संदर्भ में भी होगी।

    मेयर से टीम मालिक तक का सफर
    स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने के बाद मेयर की जिम्मेदारी संभाल रहे सरबजीत सिंह समाना के लिए क्रिकेट टीम के मालिकों में शामिल होना एक अलग तरह की भूमिका है। राजनीति में जहां उन्हें शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों के बीच काम करना होता है, वहीं खेल से जुड़ाव उन्हें युवाओं और क्रिकेट प्रतिभाओं के एक बड़े वर्ग के साथ जोड़ता है। मोहाली की पहचान पहले से ही क्रिकेट के साथ गहराई से जुड़ी रही है। शहर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले हो चुके हैं और यहां क्रिकेट को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

    खेल के मैदान में नया अध्याय
    सरबजीत सिंह समाना के लिए यह भूमिका किसी राजनीतिक पद का विस्तार नहीं, बल्कि एक अलग क्षेत्र में नई जिम्मेदारी है। एक तरफ वह मोहाली के मेयर के तौर पर शहर की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का हिस्सा हैं तो दूसरी तरफ अब क्रिकेट टीम के मालिकों में शामिल होकर खेल जगत से भी जुड़ गए हैं।

  • जोधपुर में ई-बाइक तिरंगा रैली, जोगाराम पटेल ने दिखाई हरी झंडी

    जोधपुर में ई-बाइक तिरंगा रैली, जोगाराम पटेल ने दिखाई हरी झंडी

    जयपुर
     संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री  जोगाराम पटेल ने जोधपुर में कलेक्ट्रेट परिसर से हर घर तिरंगा अभियान के तहत जिला स्तरीय ई – बाइक तिरंगा रैली को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। रैली कलेक्ट्रेट परिसर से प्रारंभ होकर नई सड़क, भाटी चौराहा रातानाडा, सर्किट हाऊस होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में समाप्त हुई। यात्रा के दौरान शहरवासियों ने कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

     पटेल ने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश आन, बान, शान और करोड़ों देशवासियों की भावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अमृत महोत्सव के तहत प्रारंभ की गई तिरंगा यात्रा जन-जन के अभियान के रूप में नई पीढ़ी में राष्ट्र भावना को सशक्त करने का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि तिरंगा प्रत्येक भारतीय के दिल में बसता है, इसके सम्मान एवं गौरव की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।

    संसदीय कार्य मंत्री ने कहा मां भारती के प्रति कर्तव्य निभाना किसी पूजा से कम नहीं है और उसी भाव से हम सब मातृभूमि के कल्याण के लिए निरंतर परिश्रम करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना योगदान अवश्य दें। उन्होंने कहा हमें राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखते हुए भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना है। उन्होंने कहा इस तिरंगे की आन-बान को कायम रखने के लिए प्रत्येक भारतवासी कृत- संकल्पित है। उन्होंने कहा हमारी आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के बलिदान को युगों-युगों तक याद रखने के लिए यह तिरंगा हर घर में फहराया जाना चाहिए।

    पूर्व सांसद राजेन्द्र गहलोत ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान ने पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया है। हर घर लहराता हुआ तिरंगा राष्ट्र के प्रति हमारे प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है। लेकिन यह सम्मान हमारे घरों के साथ ही हमारे दिलों में भी होना चाहिए।

    ई- बाइक रैली में दिलाई राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की शपथ
    जिला स्तरीय ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित ई- बाइक तिरंगा रैली के अवसर पर विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कार्मिकों एवं प्रतिभागियों को राष्ट्रध्वज के सम्मान एवं देश की एकता-अखंडता की शपथ दिलाई। इसके पश्चात उन्होंने हरी झंडी दिखाकर ई- बाइक रैली को जिला कलक्टर कार्यालय से रवाना किया।

    तिरंगामयी हुई सूर्यनगरी, गूंजे भारत माता के जयघोष
    ई – बाइक रैली में सीमा सुरक्षा बल के जवानों, राजस्थान पुलिस की कालिका बटालियन, सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, स्काउट के विद्यार्थियों, पुलिस कार्मिकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं, नगर निगम, जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं कार्मिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। प्रतिभागी बाइक पर तिरंगा लेकर देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत बाइक रैली में शामिल हुए। रैली में भारत माता के जयघोष और तिरंगामयी बाइक के माध्यम से आमजन को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़ने तथा राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

  • सरकार से अब बातचीत नहीं…’, देवेंद्र महतो ने दिया अल्टीमेटम, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    सरकार से अब बातचीत नहीं…’, देवेंद्र महतो ने दिया अल्टीमेटम, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    रांची 

    झारखंड के रांची में छात्रों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में बदलता दिख रहा है. विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार टकराव हुआ. हालात बिगड़े तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया. इसी बीच  प्रदर्शनकारी देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 'अब सरकार से कोई और बातचीत नहीं होगी. अब सरकार को छात्रों की मांगों पर फैसला लेना होगा। 

    आंदोलन के 17वें दिन हजारों छात्र पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर मार्च लेकर निकले. कई जगह बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश हुई, लेकिन छात्र आगे बढ़ते रहे. धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया. इस दौरान कई प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गए. 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस से पहुंचे और स्ट्रेचर पर लेटकर मार्च में शामिल हुए। 

    न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि तीन दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं निकला. अब सरकार से कोई बातचीत नहीं होगी. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब जनआंदोलन बन चुका है. सरकार को छात्रों की मांगें माननी होंगी. उनका आरोप था कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। 

    छात्रों ने क्या कहा?
     छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का साफ संदेश दिया. एक छात्र ने कहा, "हम भगवान बिरसा मुंडा के वंशज हैं. जब वे झारखंड के हक के लिए लड़ सकते हैं, तो हम भी अपनी लड़ाई पीछे नहीं खींचेंगे." वहीं एक अन्य अभ्यर्थी का कहना था कि वे इसी मिट्टी में पले-बढ़े हैं और झारखंड आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री आज विद्यार्थियों के हक की बात तक नहीं कर रहे। 

    अपनी पीड़ा साझा करते हुए एक और अभ्यर्थी ने बताया, "सहायक शिक्षक भर्ती की चारों परीक्षाएं पास कर लीं. जेएसएससी (JSSC) दफ्तर में कागजातों की जांच भी पूरी हो गई और सब सही मिलने पर दूसरे जिले में भेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक जॉइनिंग नहीं दी गई। 

    रविवार की बातचीत क्यों नहीं बनी?
     सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे से ज्यादा बातचीत चली थी. सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और कई दूसरी मांगों पर सहमति जताई थी. सरकार का दावा था कि करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं. लेकिन छात्र JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच और भर्ती में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े रहे. यही वजह रही कि बातचीत बिना नतीजे के खत्म हो गई। 

    JPSC मामले में भी बड़ा घटनाक्रम
    आंदोलन के बीच JPSC से जुड़े घटनाक्रम ने भी मामला और गरमा दिया. रविवार को आयोग के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था. वहीं सोमवार को झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को CID ने गिरफ्तार कर लिया. उन पर 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को पैनल में शामिल कराने समेत कई आरोप हैं. इस कार्रवाई के बाद छात्रों का कहना है कि उनकी आशंकाएं सही साबित हो रही हैं। 

    फिलहाल, छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा. उनका कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर लिखित फैसला नहीं आता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. दूसरी तरफ पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और विधानसभा के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया गया है. ऐसे में अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और आंदोलन की अगली रणनीति पर टिकी है। 

  • Punjab School Bill: 3 साल तक नहीं बदलेंगे स्कूल ड्रेस, फीस भी 15% से ज्यादा नहीं बढ़ेगी

    Punjab School Bill: 3 साल तक नहीं बदलेंगे स्कूल ड्रेस, फीस भी 15% से ज्यादा नहीं बढ़ेगी

     चंडीगढ़

    पंजाब विधानसभा में आज शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक और बड़े बदलावों पर मुहर लग गई है. मान सरकार ने सूबे के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, बेतहाशा फीस वृद्धि और हर साल यूनिफॉर्म बदलने के खेल पर लगाम कसने के लिए बड़ा बिल पास कर दिया है. सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि अब पंजाब में शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा।

     सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी देते हुए कई बड़े ऐलान किए. उन्होंने कहा कि जिन प्राइवेट स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, सरकार उनकी फॉरेंसिक ऑडिट करवाएगी. इसके अलावा अब कोई भी प्राइवेट स्कूल तीन साल तक ड्रेस (यूनिफॉर्म) नहीं बदल पाएगा. हर साल नए डिजाइन और दुकान तय करके अभिभावकों की जेब काटने वाले खेल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। 

    साथ ही अगर किसी स्कूल ने इन्फ्रास्ट्रक्चर (भवन या सुविधाओं) के विकास पर खर्च किया है, तो वे सीधे फीस नहीं बढ़ा सकते. उन्हें फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास जाकर वन-टाइम अधिकतम 8% तक ही फीस बढ़ाने की इजाजत मिलेगी। 

    ट्रम्प की पत्नी ने भी देखा था दिल्ली मॉडल 
    सदन में बिल पर बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब ट्रम्प भारत आए थे, तो उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा किया था और शिक्षा मॉडल की सराहना की थी. सीएम मान ने सभी विधायकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि यह विद्या से संबंधित पवित्र बिल है. इसे राजनीति से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से पास किया जाना चाहिए ताकि समाज में कोई नेगेटिविटी न फैले। 

    सदन में पास हुए ये अहम बिल
    मुख्यमंत्री की अपील और लंबी चर्चा के बाद पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से शिक्षा सुधार से जुड़े अहम विधेयकों पर वोटिंग हुई और वे पास हो गए। 

    Punjab Regulation of Fee of Un-aided Educational Institutions (Amendment) Bill: प्राइवेट स्कूलों की फीस और यूनिफॉर्म रेगुलेट करने वाला संशोधन बिल पास। 

    Cloud University, Hoshiarpur Bill 2026: राज्य में पहली 'प्राइवेट डिजिटल यूनिवर्सिटी' की स्थापना के लिए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 'क्लाउड यूनिवर्सिटी, होशियारपुर बिल 2026' पटल पर रखा, जिसे हरी झंडी मिल गई। 

  • बिहार को CSR फंड में मिले 456 करोड़, सरकार का लक्ष्य हर साल 2000 करोड़ जुटाने का

    बिहार को CSR फंड में मिले 456 करोड़, सरकार का लक्ष्य हर साल 2000 करोड़ जुटाने का

     पटना
    कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कोष (सीएसआर फंड) में बिहार को अब तक चुटकी भर हिस्सेदारी मिलती रही, तो मूल कारण यह कि इरादे कभी मजबूत नहीं रहे।

    अब सरकार की अपेक्षा प्रतिवर्ष कम-से-कम 2000 करोड़ रुपये की है, जिसके लिए यथोचित पहल भी हो रही। ऐसे में संभव है कि आने वाले वर्षों में बिहार में सीएसआर फंड का प्रवाह बढ़े, जो अभी एक से डेढ़ प्रतिशत के दायरे में घूम रहा है।

    हालांकि, अब स्थिति एक दशक पहले जैसी कमतर भी नहीं। यह गवाही बही-खातों की है, जो बता रहे कि 2014-15 में 39.69 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में बिहार के हिस्से में 456.12 करोड़ रुपये आए। इससे आगे का हिसाब-किताब अभी सरकार ने नहीं जुटाया है

    व्यवस्थागत कमी और प्रणालीगत दोष के साथ शीघ्र प्रभाव की ललक के कारण सीएसआर फंड में बड़ी हिस्सेदारी से बिहार अब तक वंचित रहा।

    ऐसा तब जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सीएसआर फंड पूर्णतया खर्च नहीं हो पा रहा। ऐसे में अगर पहल सकारात्मक हो तो नि:संदेह बिहार में आवक बढ़ेगी।

    औद्योगिकीकरण-शहरीकरण के लिए बन रहा इको-सिस्टम भी इसमें सहायक होगा। दरअसल, कारपोरेट घराने अपनी निर्माण इकाई या मैन्युफैक्चरिंग हब के इर्द-गिर्द वाले परिक्षेत्र में सीएसआर फंड को खर्च करना पसंद करते हैं।

    इससे इतर दूसरी जगहों पर खर्च के लिए एक विश्वसनीय परिवेश चाहिए होता है। भरोसेमंद और योग्य क्रियान्वयन एजेंसियों की कमी के कारण सही परियोजनाएं तैयार नहीं हो पातीं।

    कंपनियों को डर होता है कि उनके फंड का सही प्रभाव धरातल पर दिखेगा या नहीं। इसका संज्ञान लेते हुए बिहार ने उपयुक्त पहल की।

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 21 सदस्यीय ''बिहार सीएसआर सोसायटी'' का गठन हुआ, जो सभी परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही।

    कंपनियों को भटकाव से बचाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, स्वच्छता, पर्यावरण और महिला सशक्तीकरण सहित 13 प्रमुख क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।

    सीएसआर फंड पाने के इच्छुक एनजीओ के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है, जिससे फर्जीवाड़ा रुका है। अब तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं हस्तक्षेप कर रहे, जो कारपोरेट घरानों के लिए अब तक की सबसे बड़ी गारंटी मानी जा रही।

    सीएसआर निधि के दाता
    कंपनी अधिनियम के अनुसार, 500 करोड़ या उससे अधिक की वार्षिक निवल संपत्ति या 1000 करोड़ या उससे अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाली या पांच करोड़ या उससे अधिक की शुद्ध वार्षिक लाभ वाली कंपनी का योगदान सीएसआर मद में अनिवार्य है। जन-कल्याण और राष्ट्र-निर्माण के मद यह खर्च पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम-से-कम दो प्रतिशत होना चाहिए।

    सीएसआर फंड (करोड़ रुपये)
    क्षेत्र        2022-23     2023-24     2024-25
    बिहार      247.93     261.62     456.12
    भारत     31,183.28     35,917.98     40,794.00
    महाराष्ट्र     5,723.29     6,283.97     8,630.80
    गुजरात     2,066.67     2,780.14     4,549.10
    कर्नाटक     2,061.40     2,328.53     3,395.43

    नोट: महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक लगातार तीन वर्ष से सर्वाधिक राशि पाने वाले तीन राज्य हैं।

    कारण और निवारण
    कंपनियों की हिचकिचाहट
    1. औद्योगिक आधार की कमी
    2. भरोसेमंद माध्यमों का अभाव
    3. निगरानी व विजिबिलिटी की चिंता
    4. नीतिगत स्पष्टता का नहीं होना

    सरकार की पहल
    1. बिहार राज्य सीएसआर नीति
    2. समर्पित पोर्टल की शुरुआत
    3. सीएसआर सोसायटी का गठन
    4. प्राथमिकता क्षेत्र का निर्धारण

    आशा और निराशा
    प्रादेशिक : 2020-21 के बाद से बिहार को मिलने वाले सीएसआर फंड में उछाल आई है। 2014-15 में यह मात्र 39.69 करोड़ थी, जो बढ़कर 2024-25 में 456.12 करोड़ रुपये हो गई है।

    राष्ट्रीय : 2024-25 में देश में सीएसआर फंड से 40794 करोड़ रुपये खर्च हुए। उसमें बिहार की हिस्सेदारी मात्र 1.12 प्रतिशत की रही। 2022-23 में यह हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम रहा।

    बिहार में खर्च की प्रकृति
    वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वास्थ्य और शिक्षा में सर्वाधिक क्रमश: 116.68 करोड़ और 114.22 करोड़ रुपये खर्च हुए। गरीबी, भुखमरी और कुपोषण के विरुद्ध 61.34 करोड़। कुल 45.14 करोड़ के साथ आजीविका संवर्द्धन परियोजनाएं चौथे स्थान पर रहीं।

    पांचवें क्रमांक पर ग्रामीण विकास मद में 41.19 करोड़ रुपये खर्च हुए। कुल 21 मद में राशि व्यय हुई। उसमें सर्वाधिक कम 10 लाख रुपये अनाथालय की स्थापना में गए।

  • बिहार की सभी पंचायतों में होगा पंच सम्मेलन, 15 अगस्त तक चलेगा जागरूकता अभियान

    बिहार की सभी पंचायतों में होगा पंच सम्मेलन, 15 अगस्त तक चलेगा जागरूकता अभियान

    पटना
     सरकार ने गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई और महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) के कुशल कार्यान्वयन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलेवार पंच सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

    त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों विशेषकर मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच और प्रशासनिक अधिकारियों की सहभागिता होगी। यह प्रदेशव्यापी जागरुकता अभियान आगामी 15 अगस्त तक बिहार की सभी ग्राम पंचायतों में निरंतर आयोजित किया जाएगा।

    ग्रामीण विकास विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इस पंच सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों को पुरानी मनरेगा और पहली जुलाई-2026 से लागू हुई वीबी-जीरामजी योजना के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझाना है।

    सम्मेलन के सहारे पंचायतों को यह सिखाया जाएगा कि वे कैसे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित विकास योजनाएं तैयार करें, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और सही रूप में ग्रामीणों को मिल सके।

    मंत्री ने दी योजना की जानकारी
    मंत्री ने बताया कि वीबी-जीरामजी कार्यक्रम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर प्राप्त करने का मुख्य आधार है। योजना के तहत समय पर पारदर्शी डिजिटल भुगतान और अनिवार्य बेरोजगारी भत्ते का कानूनी प्रविधान किया गया है।

    पुराने ढर्रे से इतर, नई योजना में विकास कार्यों को चार स्पष्ट और परिणामोन्मुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, गांवों में टिकाऊ और मजबूत अवसंरचना निर्माण, आजीविका के क्षेत्र में उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला और हरित विकास करना शामिल है।

    तकनीक आधारित पारदर्शिता
    मंत्री बताया कि बीवी जीरामजी योजना को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का समावेश किया गया है, जो निम्न हैं।
        कार्यस्थलों पर बायोमीट्रिक एवं चेहरा सत्यापन
        रियल-टाइम डिजिटल उपस्थिति और मानीटरिंग
        पारदर्शी डिजिटल मजदूरी भुगतान प्रक्रिया
        त्वरित समाधान के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र
        सशक्त पंचायत से विकसित बिहार का संकल्प आदि