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  • बेटियों को सरकार का बड़ा तोहफा! इन लड़कियों को मिलेंगे ₹10,000, अगली किस्त में ₹2 लाख का फायदा

    बेटियों को सरकार का बड़ा तोहफा! इन लड़कियों को मिलेंगे ₹10,000, अगली किस्त में ₹2 लाख का फायदा

    नई दिल्ली

    जब बात बिजनेस शुरू करने की आती है तो ज्यादातर महिलाओं के मन में ये सवाल आता है कि कैसे करें और कितना निवेश करें. कई बार पैसे की कमी की वजह से अच्छा आइडिया होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाता. खासकर छोटे शहरों और गांवों में महिलाओं के लिए शुरुआती पूंजी जुटाना एक बड़ी चुनौती होती है। 

    महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को अपना रोजगार या छोटा कारोबार शुरू करने के लिए शुरुआती तौर पर 10 हजार रुपये की मदद दी जाती है. यह रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. योजना का फोकस महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। 

    10 हजार रुपये देगी सरकार
    मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत बिहार सरकार महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए शुरुआती आर्थिक सहायता दी जाती है. एलिजिबल महिला के बैंक अकाउंट में डीबीटी के जरिए 10 हजार रुपये भेजती है. इस पैसे का इस्तेमाल महिला अपनी पसंद का छोटा कारोबार या आजीविका से जुड़ा काम शुरू करने में कर सकती है। 

    इस योजना के तहत कई तरह के छोटे कारोबार शुरू करने के लिए मदद दी जा सकती है. इसमें महिला अपनी जरूरत और क्षमता के हिसाब से रोजगार का विकल्प चुन सकती है. हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता और आवेदन से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। 

    अगर शुरू किया गया कारोबार ठीक से चलता है और उसमें आगे बढ़ने की संभावना दिखती है, तो महिला को अतिरिक्त आर्थिक मदद भी मिल सकती है. योजना के नियमों के मुताबिक, शुरुआती सहायता मिलने के करीब छह महीने बाद कारोबार की स्थिति का आकलन किया जा सकता है. परफॉर्मेंस के आधार पर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है। 

    किन महिलाओं को मिलेगा योजना का फायदा?
    यह योजना मुख्य रूप से बिहार की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए है. खास तौर पर जीविका से जुड़ी महिलाओं को इसका फायदा दिया जा रहा है. यानी हर महिला को अपने आप 10 हजार रुपये नहीं मिलेंगे. पहले योजना के तहत आवेदन करना होगा और आवेदन का मंजूर होना जरूरी है। 

    सरकार की ओर से सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है. इसलिए आवेदन के समय बैंक खाते की जानकारी सही देना जरूरी है. बैंक खाता चालू होना भी जरूरी है, ताकि डीबीटी के जरिए पैसा मिलने में परेशानी न हो। 

    जिन महिलाओं को योजना के तहत पहले ही सहायता मिल चुकी है, उन्हें उसी सहायता की दोबारा किस्त नहीं दी जाएगी. इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता और पहले मिले फायदे की जानकारी जरूर चेक कर लें। 

    आवेदन के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत?
    योजना के लिए आवेदन प्रोसेस में महिला को अपनी जरूरी जानकारी देनी होती है. इसमें मोबाइल नंबर, आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाते की डिटेल और शुरू किए जाने वाले कारोबार की जानकारी शामिल हो सकती है। 

    इसके अलावा आवेदन के दौरान कुछ डॉक्यूमेंट्स भी मांगे जा सकते हैं. इनमें एजुकेशन सर्टिफिकेट, जैसे मैट्रिक या इंटर की मार्कशीट, जरूरत के अनुसार जाति प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर शामिल हैं। 

    आवेदन करते समय सभी जानकारी सही भरना जरूरी है. डॉक्यूमेंट्स में गलती या जानकारी में अंतर होने पर आवेदन के प्रोसेस पर असर हो सकता है. आवेदन मंजूर होने के बाद सहायता राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. जिन महिलाओं का आवेदन पहले से मंजूर है और जो योजना की शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें निर्धारित प्रोसेस के तहत 10 हजार रुपये की सहायता मिल सकती है. हालांकि, किस्त मिलने से पहले अपनी पात्रता और आवेदन की स्थिति की जांच कर लेना बेहतर है। 

    कैसे अप्लाई करें?

        आधिकारिक वेबसाइट खोलें और रजिस्ट्रेशन या लॉगिन के ऑप्शन पर क्लिक करें.
        फिर मुख्यमंत्री उद्यमी योजना को सेलेक्ट करें.
        अपना आधार नंबर डालें और नया पासवर्ड बना लें.
        फिर यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें. पर्सनल डिटेल्स और बिजनेस से जुड़ी जानकारी सही-सही भरें. जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें.
        सारी जानकारी एक बार अच्छी तरह चेक करें और फॉर्म जमा कर दें और स्लिप डाउनलोड करके सेव कर लें.

    2 लाख रुपये का कब फायदा मिलेगा?

    इस योजना का मकसद सिर्फ महिलाओं को एक बार पैसा देना नहीं है. सरकार महिलाओं को छोटा कारोबार शुरू करने और धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है. शुरुआती 10 हजार रुपये से कोई महिला अपना छोटा काम शुरू कर सकती है. अगर महिला अपना व्यवसाय छह महीने तक लगातार चलाती रहती है, तो उसे दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है. कारोबार अच्छा चलने पर आगे अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलने का मौका भी है. इससे महिलाओं के लिए कमाई का अपना साधन बनाने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 

  • बिहार के 73 हजार सरकारी स्कूलों को मिलेगा पूर्व छात्रों और CSR का सहारा

    बिहार के 73 हजार सरकारी स्कूलों को मिलेगा पूर्व छात्रों और CSR का सहारा

    पटना
     बिहार के सरकारी विद्यालयों को पूर्ववर्ती छात्रों, आम नागरिकों, एनआरआइ, एनजीओ और कारपोरेट से जोड़ने की दिशा में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) ने महत्वपूर्ण पहल की है। परीक्षा समिति की ओर से मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान नाम से डिजिटल पोर्टल विकसित किया जा रहा है।

    इसके माध्यम से राज्य के 73 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों के पूर्ववर्ती छात्र अपने विद्यालय अथवा राज्य के किसी भी सरकारी विद्यालय से जुड़कर उसके विकास में योगदान कर सकेंगे।

    रविवार को अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सह चिंतन शिविर में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने समिति की विभिन्न योजनाओं पर प्रस्तुतिकरण दिया।

    इस अवसर पर शिक्षा विभाग के मंत्री मिथिलेश तिवारी, विभाग के वरीय अधिकारी, सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित रहे।
    तीन, पांच वर्ष या आजीवन विद्यालय गोद लेने का विकल्प

    परीक्षा समिति के अध्यक्ष डा. त्यागराजन ने बताया कि मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान पोर्टल के माध्यम से पूर्व छात्र समूह, संगठन, कारपोरेट या एनआरआइ किसी एक सरकारी विद्यालय को तीन वर्ष, पांच वर्ष या आजीवन अवधि के लिए गोद ले सकेंगे। आम नागरिक विद्यालयों को अपने ज्ञान, कौशल, समय और संसाधन के माध्यम से सहयोग कर सकेंगे।

    वहीं, एनआरआइ डिजिटल शिक्षा, आधारभूत संरचना और वैश्विक अवसरों से विद्यालयों को जोड़ने में मदद कर सकेंगे। कंपनियां सीएसआर के माध्यम से वित्त, संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध कराकर विद्यालयों के विकास में योगदान दे सकेंगी।

    विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय की आवश्यकताओं को चिह्नित कर उन्हें पोर्टल पर प्रदर्शित करेंगे। विद्यालय को सहयोग उसकी सहमति से ही प्राप्त होगा। केवल सीएसआर के माध्यम से मिलने वाले सहयोग के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी का अनुमोदन आवश्यक होगा।

    146 प्लस टू माडल स्कूलों में शुरू होगी फ्री जेईई-नीट कोचिंग
    बिहार विद्यालय परीक्षा समिति राज्य के 146 अन्य प्लस टू माडल स्कूलों में जेईई और नीट की तैयारी के लिए ऑनलाइन संध्याकालीन निशुल्क कोचिंग शुरू करने जा रही है। वर्तमान में समिति पटना में दो स्थानों पर प्रतिवर्ष 200 विद्यार्थियों, जिनमें 100 जेईई और 100 नीट के लिए निशुल्क आवासीय अनुशिक्षण कार्यक्रम चला रही है।

    इसके अतिरिक्त राज्य के नौ प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिलों में प्रतिवर्ष 50 विद्यार्थियों को जेईई-नीट प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए गैर-आवासीय अनुशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम की सफलता और विद्यार्थियों की रुचि को देखते हुए पटना जिले के 10 माडल स्कूलों में संध्याकालीन निशुल्क अनुशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

    इसी क्रम में अब 146 अन्य प्लस टू माडल स्कूलों को ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। इसके लिए समिति मुख्यालय स्तर पर एक स्टूडियो का निर्माण कर रही है। स्टूडियो तैयार होने तक विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा विभिन्न विषयों और टापिक पर तैयार वीडियो लिंक के माध्यम से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

    688 माडल स्कूलों में 15 अगस्त से ऑनलाइन पढ़ाई
    परीक्षा समिति के अध्यक्ष ने बताया कि 15 अगस्त से राज्य के 688 माडल स्कूलों में इंटरएक्टिव ऑनलाइन लर्निंग की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी किसी भी समय ऑनलाइन उपलब्ध शिक्षक से अपने विषय और टापिक की पढ़ाई कर सकेंगे। पढ़ाई के दौरान किसी तरह का संदेह होने पर विद्यार्थी शिक्षक से लाइव बातचीत कर अपना डाउट भी दूर कर सकेंगे।

    सबसे खास बात यह है कि यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क होगी और शिक्षक विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहेंगे। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को पोर्टल अथवा मोबाइल एप पर पंजीकरण करना होगा।

    इसके बाद वे अपनी कक्षा, विषय और संबंधित टापिक का चयन कर लाइव क्लास के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। किसी विषय में परेशानी होने पर विद्यार्थी अपना सवाल शिक्षक को भेज सकेंगे, जिसका शिक्षक विस्तार से समाधान करेंगे।

  • 15 अगस्त से पहले हरियाणा पुलिस अलर्ट, होटल-ढाबों पर ताबड़तोड़ छापामारी

    15 अगस्त से पहले हरियाणा पुलिस अलर्ट, होटल-ढाबों पर ताबड़तोड़ छापामारी

    कलानौर/पठानकोट.

    स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर कलानौर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। रविवार को पुलिस टीमों ने कस्बे और आसपास के क्षेत्र में होटल, ढाबों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

    पुलिस की अचानक पहुंच से होटल और ढाबा संचालकों में भी हलचल रही। अभियान के दौरान पुलिस ने होटल और ढाबों में ठहरे तथा काम करने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई। बाहर से आने वाले श्रमिकों और अन्य व्यक्तियों की पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई। पुलिस ने संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध नजर आने पर उसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जाए। पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    अधिकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों तथा संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस की ओर से क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और स्वतंत्रता दिवस समारोह को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न करवाना पुलिस की प्राथमिकता है।

  • झज्जर में तीन पीढ़ियों ने साथ उठाई कांवड़, बच्चों में दिखा शिवभक्ति का जुनून

    झज्जर में तीन पीढ़ियों ने साथ उठाई कांवड़, बच्चों में दिखा शिवभक्ति का जुनून

    झज्जर
     सावन के पवित्र माह में जहां चारों ओर बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं दिल्ली गेट झज्जर का एक परिवार सनातन परंपरा, संस्कारों और राष्ट्रभक्ति की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है।

    रामपुरा जौंधी स्थित कांवड़ सेवा शिविर में उस समय वातावरण और अधिक भावुक व भक्तिमय हो उठा, जब एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां—दादी, बेटे और नन्हें पोते एक साथ कांवड़ लेकर पहुंचे।

    यह शिवभक्त परिवार गत 1 अगस्त को पवित्र नगरी हरिद्वार से 'गोद कांवड़' उठाकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुआ था। कड़े नियमों और भक्तिभाव के साथ यात्रा करते हुए यह दल सोमवार को रामपुरा जौंधी कांवड़ शिविर में पहुंचा। शिविर में श्रद्धालुओं और सेवादारों ने इस अनूठे कांवड़िए दल का जोरदार स्वागत किया।

    चार मासूमों के सिर पर शिव भक्ति और संस्कारों का रंग
    कांवड़ यात्रा में परिवार के चार बच्चे मुख्य आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं। इनमें 12 वर्षीय पीयूष सनसानवाल, धर्मेंद्र के बेटे वासु, तथा उनके दो भतीजे कुंज और प्रियांशु शामिल हैं। इतनी कम उम्र में लंबी पैदल यात्रा के बावजूद इन बच्चों के चेहरे पर थकान की जगह केवल महादेव की भक्ति और असीम उत्साह दिखाई दे रहा है।

    दादी और बड़ी ताई का मार्गदर्शन, संस्कारों की अमिट छाप
    परिवार की बुजुर्ग दादी राजबाला और बड़ी ताई संतोष का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। दादी, बेटे और पोते का एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संस्कार केवल बातों से नहीं, बल्कि आचरण से दिए जाते हैं।

    शिविर में बच्चों से बात करने पर उनका जज्बा देखते ही बनता है। इन नन्हें कांवड़ियों की इच्छा है कि वे बड़े होकर उच्च पदों पर आसीन अधिकारी बनें और निष्ठापूर्वक देश की सेवा करें। भोलेनाथ के चरणों में जल अर्पित करने से पहले बच्चों ने अपने लिए उज्ज्वल भविष्य और देश सेवा का आशीर्वाद मांगा।

    शिविर संयोजक केशव सिंघल और सुरेंद्र ठेकेदार ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन पीढ़ियों का यह अनूठा समन्वय और बच्चों में देश सेवा का संकल्प समाज के लिए प्रेरणादायी है। यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें और भक्ति भावना आज भी भावी पीढ़ी में पूरी मजबूती के साथ जीवित हैं।

  • पठानकोट में रेलवे ओवरब्रिज को मंजूरी, केंद्र के प्रोजेक्ट से लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

    पठानकोट में रेलवे ओवरब्रिज को मंजूरी, केंद्र के प्रोजेक्ट से लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

    पठानकोट.

    पठानकोट और सुजानपुर के बीच ट्रैफिक की बड़ी समस्या को हल करने के लिए रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट पर करीब 52.36 करोड़ रुपये खर्च करेगी। ओवरब्रिज बनने से इस रूट पर रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    पठानकोट-सुजानपुर रोड पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक बंद होने से अक्सर लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। जानकारी के मुताबिक यह फाटक रोजाना करीब 70 से 80 बार बंद होता है, जिससे दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। खासकर ऑफिस टाइम और स्कूल की छुट्टी के समय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को भी कई बार जाम में फंसना पड़ता है।

    ओवरब्रिज बनने से रेलवे क्रॉसिंग पर निर्भरता खत्म हो जाएगी और ट्रैफिक बिना रुकावट के चलेगा। स्थानीय लोगों ने इस प्रोजेक्ट का स्वागत किया और कहा कि इससे लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक समस्या का पक्का समाधान हो जाएगा। निवासियों ने सरकार से मांग की है कि ओवरब्रिज का काम जल्द शुरू किया जाए और तय समय में पूरा किया जाए। 

  • गुरुग्राम के आठों जोन में चला अवैध निर्माण पर बुलडोजर, निगम ने तेज किया अभियान

    गुरुग्राम के आठों जोन में चला अवैध निर्माण पर बुलडोजर, निगम ने तेज किया अभियान

    गुरुग्राम
     नगर निगम गुरुग्राम ने सोमवार को शहर के सभी आठ जोन में बड़े स्तर पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू किया। संबंधित जोन के संयुक्त आयुक्तों के नेतृत्व में निगम की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई की।

    सदर बाजार, कृष्णा कॉलोनी, आयुध डिपो प्रतिबंधित क्षेत्र, डीपीजी कॉलोनी सेक्टर-34, रेयान एन्क्लेव भोंडसी सहित अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है।

    रेयान एन्क्लेव में चला ध्वस्तीकरण अभियान
    रेयान एन्क्लेव, भोंडसी में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का ध्वस्तीकरण अभियान लगातार जारी है। संयुक्त आयुक्त रविंद्र मलिक के नेतृत्व में एई आशीष हुड्डा और निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की। टीम द्वारा क्षेत्र में लगातार निगरानी रखते हुए नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

    आठों जोन में टीमों ने संभाला मोर्चा
    निगम अधिकारियों के अनुसार, शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को रोकने के लिए सभी आठ जोन में टीमों को सक्रिय किया गया है। संबंधित संयुक्त आयुक्त अपने-अपने जोन में अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। निगम की टीमें चिह्नित स्थानों पर पहुंचकर निर्माण की जांच करने के साथ नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई कर रही हैं।

    कार्रवाई आगे भी रहेगी जारी
    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभियान के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

     

  • राजस्थान में OBC सर्वे रिपोर्ट जारी, 7 जातियों की आबादी 55% से ज्यादा

    राजस्थान में OBC सर्वे रिपोर्ट जारी, 7 जातियों की आबादी 55% से ज्यादा

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी स्थानीय निकायों और पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक) प्रतिनिधित्व आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट सामने आ गई है। रिटायर्ड जस्टिस मदनलाल भाटी की अध्यक्षता वाले आयोग ने प्रदेश की अति पिछड़ा वर्ग-MBC की 5 जातियों सहित 92 ओबीसी जातियों (जिन्में अति पिछड़ा वर्ग-MBC की 5 जातियां भी शामिल हैं) के 74.85 लाख से अधिक परिवारों का गहन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सर्वे किया है।

    इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पिछडे़ वर्ग की कुल आबादी 3.63 करोड़ से अधिक है। रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ओबीसी की 92 जातियों में से केवल 7 जातियों की कुल आबादी मिलाकर 55% से अधिक हो जाती है, जबकि शेष 85 जातियां 45% हिस्सेदारी में सिमटी हुई हैं।

    आबादी के गणित में कौन आगे?
    आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक आबादी के मामले में जाट और जट सिख समाज ओबीसी वर्ग में सबसे बड़े समूह के रूप में उभरा है। दूसरे स्थान पर गुर्जर, तीसरे पर कुम्हार-कुमावत, चौथे पर माली-सैनी, पांचवें पर जांगिड़, छठे पर यादव और सातवें स्थान पर मेव समाज आता है।

    ओबीसी जातियों की आबादी का प्रतिशत ब्रेकअप
    क्रमांक    जाति/समुदाय            आबादी (प्रतिशत में)
    1            जाट और जट सिख           20.14%
    2            गुर्जर                                9.11%
    3            कुम्हार एवं कुमावत            8.36%
    4            माली, सैनी एवं बागवान       7.80%
    5           जांगिड़ / सुथार                      3.49%
    6            यादव / अहीर                      3.22%
    7              मेव                                    3 .02%
    कुल      शीर्ष 7 जातियां                      55.14%

    सरकारी नौकरियों में 4 जातियों का वर्चस्व
    रिपोर्ट के आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि राज्य में कुल 3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि, इन सरकारी नौकरियों में भारी असमानता देखने को मिली है।

    78% सरकारी नौकरियां मात्र 4 जातियों में: कुल ओबीसी सरकारी कर्मचारियों में से 78 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समाज से आता है।

    18 जातियों का खाता तक नहीं खुला: रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि ओबीसी की 18 ऐसी जातियां हैं, जिनके 100 लोग भी सरकारी सेवा में नहीं हैं।

    श्रम और स्वरोजगार की स्थिति
    राज्य में ओबीसी वर्ग के 12.50 लाख लोग अपना खुद का व्यवसाय (स्वरोजगार) चला रहे हैं। वहीं दैनिक मजदूरी व श्रम क्षेत्र में कुम्हार-कुमावत और सैनी समाज की संख्या सर्वाधिक है।

    प्रमुख जातियों में स्वरोजगार का आंकड़ा
    कुम्हार-कुमावत: 1.24 लाख लोग

    50 हजार से अधिक श्रमिकों वाली प्रमुख जातियां

    जाति / समुदाय               श्रमिकों की संख्या (लाख में)
    कुम्हार और कुमावत      3.32 लाख
    सैनी और बागवान          2.72 लाख
    जाट                              2.16 लाख
    गुर्जर                            1.80 लाख
    रावत                            1.25 लाख
    जांगिड़                           1.15 लाख

    जेंडर रेशियो: 1000 पुरुषों पर 914 महिलाएं

    आयोग के सर्वे में ओबीसी वर्ग के जेंडर डेटा को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है:

    पुरुष आबादी: 1,87,50,094 (कुल ओबीसी आबादी का 52.23%)

    महिला आबादी: 1,71,05,082 (कुल ओबीसी आबादी का 47.76%)

    लिंगानुपात : प्रति 1,000 पुरुषों पर 914 महिलाएं हैं।

    राजनीतिक और चुनावी मायने
    सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट का सीधा असर आगामी राजस्थान निकाय और पंचायत चुनाव में वार्डों के आरक्षण पर पड़ेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन जातियों की राजनीतिक व आर्थिक हिस्सेदारी नगण्य रही है, उन्हें प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए विशेष प्रावधान व नीतिगत प्रयास किए जाने जरूरी हैं।

  • झज्जर के परिवार की तीन पीढ़ियों ने उठाई ‘गोद कांवड़’, भक्ति और संस्कार की पेश की मिसाल

    झज्जर के परिवार की तीन पीढ़ियों ने उठाई ‘गोद कांवड़’, भक्ति और संस्कार की पेश की मिसाल

    झज्जर.

    सावन के पवित्र माह में जहां चारों ओर बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं दिल्ली गेट झज्जर का एक परिवार सनातन परंपरा, संस्कारों और राष्ट्रभक्ति की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है।

    रामपुरा जौंधी स्थित कांवड़ सेवा शिविर में उस समय वातावरण और अधिक भावुक व भक्तिमय हो उठा, जब एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां- दादी, बेटे और नन्हें पोते एक साथ कांवड़ लेकर पहुंचे। यह शिवभक्त परिवार गत 1 अगस्त को पवित्र नगरी हरिद्वार से 'गोद कांवड़' उठाकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुआ था। कड़े नियमों और भक्तिभाव के साथ यह दल सोमवार को रामपुरा जौंधी कांवड़ शिविर में पहुंचा। शिविर में श्रद्धालुओं और सेवादारों ने इस अनूठे कांवड़िए दल का जोरदार स्वागत किया।

    चार मासूमों के सिर पर शिव भक्ति और संस्कारों का रंग 
    कांवड़ यात्रा में परिवार के चार बच्चे मुख्य आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं। इनमें 12 वर्षीय पीयूष सनसानवाल, धर्मेंद्र के बेटे वासु, तथा उनके दो भतीजे कुंज और प्रियांशु शामिल हैं। इतनी कम उम्र में लंबी पैदल यात्रा के बावजूद इन बच्चों के चेहरे पर थकान की जगह केवल महादेव की भक्ति और असीम उत्साह दिखाई दे रहा है।

    दादी और बड़ी ताई का मार्गदर्शन, संस्कारों की अमिट छाप
    परिवार की बुजुर्ग दादी राजबाला और बड़ी ताई संतोष का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। दादी, बेटे और पोते का एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संस्कार केवल बातों से नहीं, बल्कि आचरण से दिए जाते हैं। शिविर में बच्चों से बात करने पर उनका जज्बा देखते ही बनता है। इन नन्हें कांवड़ियों की इच्छा है कि वे बड़े होकर उच्च पदों पर आसीन अधिकारी बनें और निष्ठापूर्वक देश की सेवा करें। भोलेनाथ के चरणों में जल अर्पित करने से पहले बच्चों ने अपने लिए उज्ज्वल भविष्य और देश सेवा का आशीर्वाद मांगा। शिविर संयोजक केशव सिंघल और सुरेंद्र ठेकेदार ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन पीढ़ियों का यह अनूठा समन्वय और बच्चों में देश सेवा का संकल्प समाज के लिए प्रेरणादायी है। यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें और भक्ति भावना भावी पीढ़ी में पूरी मजबूती के साथ जीवित हैं।

  • हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्ती, डिलीवरी से पहले होगी जांच

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्ती, डिलीवरी से पहले होगी जांच

    चंडीगढ़
     सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील पकाने के लिए अब मुख्याध्यापक हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन से सामान की डिलीवरी लेने से पहले उसकी जांच करेंगे। सामान की गुणवत्ता ठीक होने पर ही इसे स्वीकार किया जाएगा।

    हिसार में हाल ही में एक स्कूल का मामला सामने आया था, जिसमें कई घंटे भिगोने के बाद जब राजमा उबाले गए तो वह गले नहीं। इसी प्रकार मसाले बासी होने तथा गुड़ की क्वालिटी खराब होने की भी खबरें आई हैं।

    पिछले साल नवंबर से हरियाणा शिक्षा विभाग ने चना, सोया, राजमा, बेसन, रागी का आटा, गुड़, दाल, तेल, मूंगफली और मसाले सप्लाई करने के लिए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन के साथ एक साल का अनुबंध किया हुआ है।

    खाने के सामान की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं
    खाने के सामान की खराब क्वालिटी के बारे में स्कूल हेड और प्रिंसिपल समेत कई लोगों की शिकायतों के बाद मौलिक शिक्षा निदेशक की तरफ से निर्देश जारी किया गया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह खाने के सामान की क्वालिटी से कोई समझौता न करें।

    स्कूलों के मुख्य अध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वह डिलीवरी लेने से पहले हरियाणा एग्रो से मिले खाने के सामान की जांच करें। स्कूलों को खराब क्वालिटी वाले सामान को बदलवाना होगा। शिक्षा अधिकारियों को समय-समय पर अचानक जांच करने का निर्देश दिया गया है।

  • पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग का बड़ा फैसला, हर रविवार कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग का बड़ा फैसला, हर रविवार कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अब हर रविवार पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयं सेवकों से सीधा संवाद करेंगे। इस पहल को ‘रविवार वड़िंग और योद्धाओं के साथ’ नाम दिया गया है।

    राजा वड़िंग ने कहा कि इस संवाद के दौरान कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी जाएंगी और गांवों, शहरों तथा बूथ स्तर पर पार्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाएगी। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं से मिलने वाले सुझावों के आधार पर पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को और मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत महज नौ दिनों में 18 जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की गई हैं। इन बैठकों में कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी को देखते हुए उन्होंने उनका आभार जताया। वड़िंग ने कहा कि कार्यकर्ताओं का उत्साह और जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता कांग्रेस संगठन की सबसे बड़ी ताकत है।

    बंद कमरों में तय नहीं होगा भविष्य
    राजा वड़िंग ने कहा कि पंजाब का भविष्य बंद कमरों में बैठकर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं, जरूरतों और उम्मीदों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर बूथ, गांव और परिवार तक कांग्रेस की पहुंच बनाना पार्टी का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि रविवार को होने वाले नियमित संवाद से पार्टी को जमीनी हालात की सीधी जानकारी मिलेगी। इससे कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच संवाद भी मजबूत होगा।

    बूथ स्तर पर बढ़ेगी सक्रियता
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले महीनों में कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ने, संगठन को मजबूत करने और लगातार जमीनी जानकारी जुटाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पार्टी की कोशिश रहेगी कि चुनावी तैयारियां केवल बड़े नेताओं और बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन सक्रिय दिखाई दे।