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  • रेवाड़ी में 40 गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर अब तक कार्रवाई नहीं, फिर जारी हुए बंद करने के निर्देश

    रेवाड़ी में 40 गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर अब तक कार्रवाई नहीं, फिर जारी हुए बंद करने के निर्देश

     रेवाड़ी
     गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कार्रवाई को लेकर बेशक शिक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर सूची तैयार कराई जाती रही है, लेकिन आज तक इन विद्यालयों पर कार्रवाई होना तो दूर अधिकारियों ने पुन: इन विद्यालयों में झांका तक नहीं है।

    इन विद्यालयों के पास न तो बोर्ड से मान्यता प्राप्त है और सुविधाओं के नाम पर भी विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। भोले-भाले अभिभावकों को बरगलाकर यह विद्यालय अपने यहां पर बच्चों का दाखिला करा लेते हैं, लेकिन स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट लेने, फीस या अन्य किसी विवाद के दौरान इन विद्यालयों की सच्चाई अभिभावकों को पता चलती है।

    इसको लेकर कई बार स्थानीय अधिकारियों के पास समय-समय पर शिकायतें भी पहुंचती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बस खानापूर्ति की जाती है। इस बार फिर से शिक्षा विभाग की तरफ से गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बंद करने की कार्रवाई करके सूची मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना यह है कि गत वर्षों की तरह सरकार की तरफ से सूची ही तैयार कराई जाती है या फिर से कार्रवाई के नाम खानापूर्ति की जाएगी।

    दो वर्ष पहले तैयार की गई थी जिले के 40 स्कूलों की सूची
    दो वर्ष पहले भी शिक्षा विभाग के आदेश पर स्थानीय अधिकारियों की तरफ से जिले के 40 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची तैयार की गई थी। उस सूची शामिल विद्यालयों पर अधिकारियों की तरफ से आज तक कार्रवाई नहीं की गई है।

    हद तो यह है कि उन विद्यालयों की सूची को सार्वजनिक भी नहीं किया। अगर सूची सार्वजनिक हो जाती तो अभिभावकों काे उनकी जानकारी मिल जाती और वह इन विद्यालयों में अपने बच्चों का दाखिला कराने से बच जाते। लेकिन दो साल बाद भी अभिभावकों के सामने वही स्थिति है। उन्हें विद्यालयाें की मान्यता के बारे में सही जानकारी ही नहीं है।

    हमारी एसोसिएशन की तरफ से गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद कराने को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों व जिला प्रशासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन आज तक उन्हें बंद कराने की कार्रवाई नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे स्कूल फल फूल रहे हैं। अधिकारियों की उदासीनता से एसोसिएशन में गहरी नाराजगी है। इसके अलावा जिले में नियमों को ताख पर रखकर धड़ल्ले से प्ले स्कूल भी गलियों में चल रहे हैं। इनमें कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
    – रामपाल यादव, प्रदेश अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

        जिले में बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की सूची तैयार कराई जा रही है। सूची तैयार होते ही विभागीय निर्देशानुसार उन पर कार्रवाई की जाएगी। विभागीय नियमों व आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।
    – राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी

  • बाड़मेर में दहेज हत्या पर सख्त फैसला, पति-सास-ससुर को उम्रकैद की सजा

    बाड़मेर में दहेज हत्या पर सख्त फैसला, पति-सास-ससुर को उम्रकैद की सजा

    बाड़मेर
    बाड़मेर के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय संख्या-2 ने दहेज हत्या के एक मामले में सोमवार को सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी पति, ससुर और सास को दोषी ठहराया है। न्यायालय की न्यायाधीश मीनाक्षी मीणा ने तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने तीनों आरोपियों पर कुल 90 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में दोषियों को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

    दोषी करार दिए गए आरोपी
        नजीर (पति): पुत्र कमाल उर्फ कमरूद्दीन
        कमाल उर्फ कमरूद्दीन (ससुर): पुत्र लखमीर
        सरियत (सास): पत्नी कमाल
        सभी निवासी: माठी नाणी, पांधी का पार, रामसर (बाड़मेर)

    अपर लोक अभियोजक सुरेशचंद्र मोदी के अनुसार, मृतका रवीना के पिता परिवादी खमीशा खां ने 12 जुलाई 2023 को रामसर थाने में मामला दर्ज कराया था। रवीना का निकाह 13 फरवरी 2017 को नजीर के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष उसे 5 लाख रुपए दहेज की मांग और संतान न होने का ताना देकर प्रताड़ित करता था।

    दोबारा विश्वास दिलाकर घर लाया था
    प्रताड़ना के कारण रवीना कुछ महीनों से अपने पीहर में रह रही थी। 7 जुलाई 2023 को नजीर उसे दोबारा परेशान न करने का विश्वास दिलाकर अपने साथ ले गया। उसी रात नजीर, कमाल खान और सरियत ने मिलकर रवीना के साथ बुरी तरह मारपीट की और उसकी हत्या कर दी।

    वारदात के बाद आरोपियों ने शव को छिपाने के लिए पानी के टांके में डाल दिया और मायके वालों के पहुंचने से पहले ही शव को दफना दिया। बाद में प्रशासन की मौजूदगी में दफनाए गए शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया।

    26 गवाहों के लिए बयान
    अभियोजन पक्ष ने 26 गवाहों के बयान करवाए और 45 दस्तावेज प्रदर्शित किए। राज्य पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुरेशचंद्र मोदी ने पैरवी की। अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता स्वरूप सिंह राठौड़ और परिवादी की ओर से अधिवक्ता करनाराम चौधरी ने पैरवी की। अदालत ने सभी पेश सबूतों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों को दहेज हत्या और प्रताड़ना की विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए जेल भेज दिया।

  • हरियाणा में नशे की तस्करी पर शिकंजा, रेल और सड़क मार्ग से आने वाली खेपों पर पैनी नजर

    हरियाणा में नशे की तस्करी पर शिकंजा, रेल और सड़क मार्ग से आने वाली खेपों पर पैनी नजर

    अंबाला.

    पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव के बाद अब हरियाणा भी नशा तस्करों के निशाने पर है। प्रदेश में नशे की आपूर्ति का नेटवर्क कई दिशाओं से फैल रहा है। मध्य प्रदेश से अफीम की आपूर्ति, रेलवे के जरिये होने वाली तस्करी और दिल्ली से सक्रिय विदेशी नेटवर्क ने हरियाणा के लिए चुनौती बढ़ा दी है।

    हालांकि, समय रहते इस पूरे गठजोड़ को तोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य कार्ययोजना तैयार कर काम आरंभ कर दिया है। लक्ष्य सिर्फ तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि नशे की आपूर्ति से लेकर उसके वितरण और अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति तक पूरे तंत्र को ध्वस्त करना है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा दिए जाने के बीच सीमा से सटे इलाकों में नशे की खेप पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले से चुनौती है। यही नेटवर्क पंजाब से हरियाणा की ओर भी अपना रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में अफीम की खेती और वहां से होने वाली आपूर्ति भी हरियाणा में नशे के कारोबार की एक कड़ी बन रही है।

    रेलवे बना तस्करों के लिए आसान रास्ता
    नशे की तस्करी में सड़क के साथ रेलवे का इस्तेमाल भी लगातार चुनौती बना हुआ है। दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनों के माध्यम से नशीले पदार्थ हरियाणा तक पहुंचाए जाने की कोशिश होती है। अंबाला जैसे बड़े रेलवे जंक्शन की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, चंडीगढ़ और दिल्ली समेत कई दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। तस्कर यात्रियों, सामान या कैरियर के माध्यम से नशे की खेप पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस और जिला पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध यात्रियों और सामान पर नजर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।

    दिल्ली से नाइजीरियन नेटवर्क की चुनौती
    नशे की तस्करी का एक और रास्ता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ रहा है। दिल्ली में सक्रिय नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े तस्करी नेटवर्क के तार हरियाणा तक पहुंचने की जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी नेटवर्क किस तरह स्थानीय तस्करों और कैरियर से संपर्क बनाकर नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहे हैं। इसलिए कार्रवाई अब केवल छोटे तस्करों या कैरियर तक सीमित रखने के बजाय आपूर्तिकर्ता, वितरक, वित्तीय मददगार और पूरे नेटवर्क तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

    तस्कर पकड़े ही नहीं जा रहे, उनकी कमाई भी छीनी जा रही
    हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को आर्थिक मोर्चे तक पहुंचा दिया है। नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे कानून के तहत फ्रीज और कुर्क करने की कार्रवाई की जा रही है। जमीन, मकान, दुकान, वाहन और बैंक खातों की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था। जहां नशे की कमाई से संपत्ति बनाने या सरकारी जमीन पर कब्जा करने के मामले सामने आ रहे हैं, वहां संबंधित विभागों के साथ मिलकर बुलडोजर कार्रवाई भी की जा रही है। इससे तस्करों को यह संदेश देने की कोशिश है कि नशे के कारोबार से बनाई गई संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।

    14 से अधिक जिलों में नशा तस्करी के सभी मामले वर्कआउट
    हरियाणा पुलिस ने नशा तस्करी के मामलों में जिला स्तर पर हुई कार्रवाई का विस्तृत रिकार्ड तैयार कर अधिकारियों के साथ साझा किया है। इसके अनुसार प्रदेश के 14 से अधिक जिलों में दर्ज नशा तस्करी के मामलों का शत-प्रतिशत वर्कआउट किया गया है। इनमें मुख्य रूप से अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, हांसी, झज्जर, कैथल, करनाल, महेंद्रगढ़, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, रेवाड़ी और यमुनानगर शामिल हैं। यह आंकड़ा पुलिस के लिए उपलब्धि के साथ-साथ उन जिलों के लिए भी चुनौती है जहां नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए और बेहतर कार्रवाई की जरूरत है।

    स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निशाने पर तस्कर
    हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ जिला पुलिस को भी इस अभियान में सक्रिय किया गया है। जांच एजेंसियों की नजर उन नेटवर्क पर है, जो दूसरे राज्यों से हरियाणा में नशीले पदार्थ पहुंचा रहे हैं। रेल और सड़क दोनों रास्ते तस्करों के निशाने पर हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, राजमार्गों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। नशे की तस्करी से जुड़े कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आने से जांच एजेंसियों के लिए यह नेटवर्क और गंभीर चुनौती बन गया है।

    तस्कर जेल में, पैसा और संपत्ति भी नहीं बचेगी
    अब कार्रवाई का सबसे बड़ा हथियार तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ना है। व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में आरोपितों और उनसे जुड़े लोगों की आय तथा संपत्ति का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों की जमीन, मकान, दुकान और वाहन खरीदने के लिए पैसा कहां से आया। यदि संपत्ति के वैध स्रोत का संतोषजनक प्रमाण नहीं मिलता और जांच में उसका संबंध नशे के कारोबार से सामने आता है तो उसे कानून के तहत कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। संपत्ति को फ्रीज और कुर्क करने की प्रक्रिया के जरिए तस्करों की अवैध कमाई को उनके हाथ से निकालने की कोशिश है।

    कुरुक्षेत्र में 14 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई
    कुरुक्षेत्र में नशा तस्करों की कृषि भूमि, मकान और बैंक खातों समेत 14 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई की गई है। सिरसा में भी तस्करों की करीब 12 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाई गई है। इसी तरह फतेहाबाद और डबवाली क्षेत्र में तस्करों की दुकान, मकान और महंगी गाड़ियों पर कार्रवाई हुई है। अंबाला और यमुनानगर में जमीन, व्यावसायिक परिसरों और बैंक जमा राशि की जांच करते हुए चार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। कैथल में भी पांच से अधिक सक्रिय तस्करों की 84 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति और बैंक राशि फ्रीज कराई गई है। हिसार और जींद में करीब 3.5 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई की गई है।

    सरकारी जमीन पर कब्जा तो बुलडोजर तैयार
    तस्करों की अवैध कमाई से बने मकान और दुकान ही नहीं, सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे भी निशाने पर हैं। हिसार में सिविल अस्पताल के पीछे स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को ढहाया गया। रनाल के तरावड़ी में नशा तस्करी के मामलों में आरोपित व्यक्ति से जुड़े अवैध होटल और दुकानों पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। गुरुग्राम और फरीदाबाद में सरकारी जमीन पर बनाए गए अवैध निर्माण और कब्जे हटाकर करोड़ों रुपये की जमीन को मुक्त कराया गया। रोहतक और नूंह में भी सरकारी और पंचायती जमीन पर बने तस्करों के कब्जों की जांच और कार्रवाई जारी है।

    विदेशी कड़ियां सामने आने से बढ़ी चुनौती
    नशे की तस्करी के कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आने के बाद जांच एजेंसियां स्थानीय तस्करों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। एजेंसियों का फोकस अब केवल छोटे कैरियर पकड़ने के बजाय आपूर्ति करने वाले, पैसा लगाने वाले और नशे की कमाई को संपत्ति में बदलने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।

  • मोहाली के सरकारी मेडिकल कॉलेज में बनेगी क्रिटिकल केयर यूनिट, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

    मोहाली के सरकारी मेडिकल कॉलेज में बनेगी क्रिटिकल केयर यूनिट, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

    मोहाली.

    मोहाली में गंभीर रूप से घायल और क्रिटिकल कंडीशन वाले मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई या जीएमसीएच-32 रेफर करने की जरूरत कम होगी। फेज-6 स्थित डाॅ. बीआर अंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित की जाएगी।

    पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन (पीएचएससी) की ओर से यूनिट के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसका निर्माण पूरा किया जाना है। यूनिट के लिए मेडिकल काॅलेज के पास बने क्वार्टर वाली जगह को चिन्हित किया गया है। मेडिकल काॅलेज प्रबंधन को इस संबंध में पत्र भी भेजा जा चुका है। यूनिट में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति में मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर क्रिटिकल केयर मिल सकेगी।

    आईसीयू और एचडीयू समेत कई सुविधाएं
    प्रस्तावित क्रिटिकल केयर यूनिट में आइसीयू, एचडीयू, आइसोलेशन वार्ड और आइसोलेशन रूम के साथ डायलिसिस की सुविधा भी होगी। इसके अलावा इमरजेंसी, आपरेशन थिएटर और पाइंट ऑफ केयर लैब जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। बच्चों के लिए भी अलग बेड की व्यवस्था प्रस्तावित है। वर्तमान में मोहाली के सरकारी अस्पतालों में समर्पित क्रिटिकल केयर यूनिट की सुविधा सीमित है। गंभीर मरीजों को कई बार पीजीआई चंडीगढ़ और जीएमसीएच-32 रेफर करना पड़ता है। नई यूनिट शुरू होने के बाद ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    23 जिलों में तैयार होंगी यूनिट
    क्रिटिकल केयर यूनिट का विस्तार केवल मोहाली तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजाब के सभी 23 जिलों में एक-एक सिविल अस्पताल में ऐसी यूनिट स्थापित करने की योजना है। कई जिलों में इसका काम शुरू भी हो चुका है।

    सुविधा     क्षमता     विवरण
    क्षमता        50 बेड     –
    आईसीयू     10 बेड     इनमें 2 पीडियाट्रिक बेड
    एचडीयू        6 बेड     इनमें 2 पीडियाट्रिक बेड
    आइसोलेशन  24 बेड     –
    वार्ड
    इमरजेंसी      5 बेड     ट्राइएज सहित
    डायलिसिस    2 बेड     –
    ऑपरेशन     2     –
    थिएटर

  • पटना मेट्रो को 628 करोड़ की सब्सिडी, निर्माण कार्य में आएगी तेजी

    पटना मेट्रो को 628 करोड़ की सब्सिडी, निर्माण कार्य में आएगी तेजी

    पटना
    पटना मेट्रो के काम में अब और भी तेजी आएगी। दरअसल बिहार सरकार ने पटना मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण और संचालन के लिए 628.32 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि स्वीकृत की है। यह राशि 2026-27 में पूंजीगत निवेश के लिए केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत उपलब्ध कराई गई है। इससे मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 628.32 करोड़ रुपये व्यय की स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को बिहार के लिए विशेष सहायता योजना के तहत 2925 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इसमें से स्वीकृत राशि की पहली किस्त के रूप में 2628.32 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसका एक हिस्सा सब्सिडी के रूप में मेट्रो रेल कारपोरेशन को दिया जा रहा है।

    परियोजना के लिए गठित पटना मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से काम हो रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की 20-20 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि 60 प्रतिशत राशि बाहरी एजेंसियों से ऋण के रूप में जुटाई जानी है। प्राथमिकता गलियारे के दो वर्ष आठ महीने के रखरखाव की जिम्मेदारी डीएमआरसी को दी गई है। इसके लिए 2179.37 करोड़ का अनुमानित खर्च निर्धारित है।

    नेहरू पथ: दो वैकल्पिक मार्गों पर परिचालन शुरू
    नेहरू पथ पर चिड़ियाखाना गेट नंबर-1 के पास ऑटो और ई-रिक्शा का दो अलग-अलग रूट पर परिचालन शुरू कर दिया गया है। राजवंशीनगर हनुमान मंदिर के पास लगातार लग रहे जाम की समस्या को कम करने के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। नई व्यवस्था के अनुसार सगुना मोड़ से पटना जंक्शन की ओर जाने वाले ऑटो डुमरा चौकी से एयरपोर्ट रोड, पीर अली पथ और हार्डिंग रोड होते हुए पटना जंक्शन जाएंगे। वहीं, गांधी मैदान की ओर जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा एलएनजेपी अस्पताल रोड से न्यू पुनाईचक होते हुए नेहरू पथ से गांधी मैदान की ओर जाएंगे। यह व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी गई है।

    ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो निर्माण के कारण नेहरू पथ पर चिड़ियाखाना गेट नंबर-1 के पास वाहनों का दबाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए सगुना मोड़ से राजवंशीनगर आने वाले ऑटो और ई-रिक्शा के रूट में बदलाव किया गया है। पटना जंक्शन की ओर जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा डुमरा पुलिस चौकी से एयरपोर्ट रोड, पीर अली पथ और हार्डिंग रोड होते हुए पटना जंक्शन जाएंगे। इसी तरह गांधी मैदान की ओर जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा चिड़ियाखाना गेट नंबर-1 से एलएनजेपी अस्पताल रोड, बोर्ड कॉलोनी और न्यू पुनाईचक होते हुए नेहरू पथ से गांधी मैदान की ओर जाएंगे। सोमवार को कुछ ऑटो और ई-रिक्शा को दोनों रूट पर चलाया गया। इससे मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव कम रहा।

  • चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से आए हथियारों के साथ 3 बदमाश गिरफ्तार

    चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से आए हथियारों के साथ 3 बदमाश गिरफ्तार

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशन सेल ने पाकिस्तान से आई एक जिगाना पिस्टल, दो पीएफ-3 पिस्टल, दो मैगजीन और 19 कारतूस के साथ हरियाणा के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों गैंगस्टर दीपक नंदल गैंग के साथ जुड़े हैं और इन हथियारों का इस्तेमाल गुरुग्राम में रंगदारी वसूलने के लिए फायरिंग की वारदात में किया जाना था।

    पुलिस ने 15 अगस्त से पहले बड़ी वारदात के मंसूबों को नाकाम कर दिया है। गिरफ्तार आरोपितों में अजय की उम्र करीब 19 वर्ष, जबकि रोहित और देव की उम्र करीब 18 वर्ष बताई गई है। अजय हरियाणा के जींद में मारुति कंपनी में हेल्पर का काम करता था। आरोप है कि उसने रोहित और देव को गैंग के संपर्क में लाया। रोहित जींद में इलेक्ट्रिक की दुकान पर काम करता था, जबकि देव भी दुकान पर हेल्पर बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, गैंग ने इन युवकों को बड़ी रकम का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल किया था। आरोप है कि उन्हें गुरुग्राम भेजकर एक टारगेट की रेकी भी कराई गई थी। पुलिस अब इस टारगेट और फायरिंग की साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

    चेकिंग के दौरान पकड़े गए
    15 अगस्त के मद्देनजर चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। ऑपरेशन सेल की टीम ने चेकिंग के दौरान अजय, रोहित और देव को पकड़ा। तलाशी में उनके पास से अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए। पूछताछ में पुलिस को उनके दीपक नंदल गैंग से जुड़े होने की जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, गैंग ने इन युवकों को बड़ी रकम का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल किया था। आरोप है कि उन्हें गुरुग्राम भेजकर एक टारगेट की रेकी भी कराई गई थी। पुलिस अब इस टारगेट और फायरिंग की साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

    पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये हथियार आने का दावा
    जांच में पुलिस के सामने हथियार सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ी भी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, अमृतसर के गांव कक्कड़ का रहने वाला 32 वर्षीय निशान सिंह पाकिस्तान में बैठे हथियार सप्लायर के संपर्क में था। वह डेयरी चलाता है। पुलिस का कहना है कि डेयरी की आड़ में वह सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियारों को रिसीव कर आगे गैंग के सदस्यों तक पहुंचाता था। पुलिस अब पाकिस्तान में बैठे हथियार सप्लायरों की पहचान और अब तक भारत पहुंचाई गई हथियारों की खेप का पता लगाने में जुटी है।

    अब गैंग के बड़े नेटवर्क पर नजर
    ऑपरेशन सेल की इस कार्रवाई को स्वतंत्रता दिवस से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि समय रहते आरोपितों की गिरफ्तारी से गुरुग्राम में संभावित फिरौती और फायरिंग की वारदात टल गई। अब जांच का फोकस गैंग के अन्य सदस्यों, पाकिस्तान में बैठे कथित हथियार सप्लायर, हथियारों की पिछली खेप और संभावित आपराधिक वारदातों पर है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल पहले किसी वारदात में हुआ है या नहीं।

  • हरियाणा में बड़ी राहत! ₹1.80 लाख तक आय वाली महिलाओं को भी मिलेंगे ‘लाडो लक्ष्मी’ के ₹2,100

    हरियाणा में बड़ी राहत! ₹1.80 लाख तक आय वाली महिलाओं को भी मिलेंगे ‘लाडो लक्ष्मी’ के ₹2,100

    रेवाड़ी.

    हरियाणा सरकार की लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा अब और बढ़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार सितंबर माह से 1.80 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाली महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। जिले में योजना के लाभार्थियों की संख्या एक लाख के करीब पहुंच जाएगी।

    अब तक लाडो लक्ष्मी योजना के तहत सिर्फ एक लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को ही लाभ दिया जा रहा था, लेकिन अब पात्रता सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये कर दिए जाने से मध्यम वर्ग की बड़ी संख्या में महिलाएं भी योजना से जुड़ सकेंगी। योजना के विस्तार के बाद जिले में लाभार्थियों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। अधिकारियों का अनुमान है कि नए मानदंड लागू होने से जिले में लाभार्थी महिलाओं की संख्या लगभग एक लाख तक पहुंच जाएगी। इससे पहले तक पात्रता कम होने के कारण कई जरूरतमंद महिलाएं योजना से वंचित रह रही थीं।

    हर माह दी जाती है आर्थिक सहायता
    लाडो लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इस राशि का उपयोग महिलाएं घर-गृहस्थी, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए कर सकती हैं। योजना का विस्तार होने से न केवल गरीब, बल्कि कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी सीधा लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना (DDLLY) हरियाणा सरकार की एक आर्थिक सहायता योजना है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह ₹2,100 की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। 

    बेहतरीन योजना है –
    लाडो लक्ष्मी योजना सरकार की बेहतरीन योजनाओं में से एक है। अब मुझे भी इसका लाभ मिलने लगेगा तो और अधिक खुशी होगी। सरकार की आभारी हैं।
    – सीमा देवी

    आर्थिक सुरक्षा होगी –
    योजना का विस्तार होने से अब मुझे भी लाभ मिलने लगेगा। इससे परिवार की आर्थिक सुरक्षा होगी। इसके लिए वह सरकार की आभारी हैं।
    – कमलेश देवी

  • Air India फ्लाइट में 300 फीट नीचे गिरा विमान, हाइड्रोलिक फेलियर इंडिकेशन की जांच

    Air India फ्लाइट में 300 फीट नीचे गिरा विमान, हाइड्रोलिक फेलियर इंडिकेशन की जांच

    नई दिल्ली
     एयर इंडिया की फ्लाइट (AI 2379) की जांच के बीच कुछ नई जानकारियां सामने आ रही हैं। एविएशन सेक्टर की सेफ्टी के लिए काम करने वाले सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के संस्थापक एक्सपर्ट कैप्टन अमित सिंह का कहना है कि यह प्लेन टर्बुलेंस में नहीं, बल्कि हाइड्रोलिक फेलियर इंडिकेशन का शिकार हुआ था।

    उनका मानना है कि प्लेन के सिस्टम ने पायलटों को मल्टीपल हाइड्रोलिक फेल्योर के जो संकेत दिए थे, बहुत अधिक आशंका है कि वे सभी सही नहीं थे। इससे पायलट ने जल्दबाजी में प्लेन की नोज को एकदम नीचे की तरफ कर दिया। इससे प्लेन पहले करीब 300 फुट नीचे गया और फिर उसे संभालने के लिए अचानक ऊपर किया गया। इस दौरान चार एयर होस्टेस समेत 17 यात्री घायल हो गए। चूंकि इस मामले की जांच एएआईबी कर रही है, इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    फ्रेंच अथॉरिटी भी होगी शामिल
    कैप्टन अमित का मानना है कि किसी भी प्लेन के एक साथ सभी सिस्टम फेल होना बेहद रेयर होता है। ऐसी स्थिति में प्लेन को संभालना लगभग असंभव हो जाता है। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि पायलटों को कॉकपिट सिस्टम के सेंसर ने जो हाइड्रोलिक फेलियर के संकेत दिए, वे गलत थे। इससे पायलट घबरा गए और जल्दबाजी में प्लेन की नोज ज्यादा नीचे कर दी। इतना जरूर है कि उस दिन न तो इस फ्लाइट के आगे और न ही इसके पीछे वाली कोई फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी थी। ऐसे में सवाल है कि फिर ऐसा क्या हुआ कि यही फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी। मामले की जांच में जल्द ही डीजीसीए के साथ फ्रांस की प्रमुख एविएशन रेगुलेटर फ्रेंच सिविल एविएशन अथॉरिटी भी शामिल होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले में एयरबस का प्लेन शामिल है।

    पायलट एक डोप टेस्ट में हो चुके हैं फेल
    फ्लाइट के सीनियर पायलट के नशे में होने की भी जांच की जा रही है। वह पहले डोप टेस्ट में फेल हो गए हैं। दूसरे और अंतिम टेस्ट के लिए सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट इसी सप्ताह आने की उम्मीद है। एएआईबी ने घटना को सीरियस इंसिडेंट की कैटेगरी में रखा है।

    इन सवालों के जवाबों का हो रहा इंतजार
    सूत्रों का कहना है कि एएआईबी की अंतिम रिपोर्ट से ही खुलासा होगा कि वास्तव में हुआ क्या था। क्या प्लेन में सच में हाइड्रोलिक फेलियर हुआ था, जिसमें पायलटों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए 145 लोगों की जान बचाई या जल्दबाजी में पायलटों की गलती से यह सब हुआ? या फिर इसमें टर्बुलेंस का भी कोई मामला था या पायलट-इन-कमांड ने नशे में कोई गलत फैसला तो नहीं लिया?

  • JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के लिए 15 लाख की वसूली का आरोप

    JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के लिए 15 लाख की वसूली का आरोप

     रांची
     जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की छानबीन कर रही सीआईडी ने परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से रिमांड के दौरान लंबी पूछताछ की है।

    रिमांड पर पूछताछ के दौरान अभय कुमार तिवारी ने जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता, वसूली आदि के बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है।

    उसने अपने बयान में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सह झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त एल. खियांग्ते के अलावा सिंडिकेट में जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा व डॉ. जमाल अहमद के अलावा पतंजली कोचिंग के रवि कुमार, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के साठगांठ से पर्दा उठाया है।

    उसने बताया है कि इस सिंडिकेट ने 11वीं व 13वीं जेपीएसससी के साक्षात्कार में भी लाभ पहुंचाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये की वसूली की थी।

    अभय तिवारी ने आगे यह भी बताया है कि उसने एक आदित्य पांडेय (कोचिंग संचालक) नामक व्यक्ति संपर्क कर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया।

    आदित्य पांडेय ने जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने सिंडिकेट के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों के माध्यम से सात प्रतिभागियों के साक्षात्कार में नंबर बढ़ाए, जिसके लिए प्रति अभ्यर्थी 15-15 लाख रुपये की वसूली की गई थी।

    जिन्हें पास कराया, उनमें तीन डीएसपी, एक उप कारापाल भी हैं शामिल
    अभय तिवारी ने पूछताछ में बताया है कि सिंडिकेट के माध्यम से जिन्हें साक्षात्कार में नंबर बढ़ाकर पास कराया, उनमें तीन डीएसपी एक उप कारापाल के अलावा अन्य अभ्यर्थी भी हैं शामिल।

    इनमें डीएसपी रोबिन कुमार, डीएसपी रोबिन सिन्हा, उप कारापाल राजेश कुमार रजक, डीएसपी मनीष कुमार, गौतम कुमार आदि सफल हुए। डीएसपी रोबिन कुमार, डीएसपी रोबिन सिन्हा व उप कारापाल राजेश कुमार रजक को पास कराने के लिए कोडरमा के एजेंट लालू यादव ने अभय तिवारी से संपर्क किया था।

    इसके बाद अभय तिवारी ने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के माध्यम से बोर्ड में मदद की। एक अभ्यर्थी डीएसपी मनीष कुमार का संपर्क डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने व दूसरे अभ्यर्थी गौतम कुमार का संपर्क पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार ने सिंडिकेट से कराया। अभय तिवारी के अनुसार इस सिंडिकेट में दूसरे एजेंट भी सक्रिय थे।

    ऐसे तय किया गया था प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम परीक्षा तक पास कराने का दर
    अभय तिवारी के अनुसार, परीक्षा पास कराने का दर अलग-अलग तय था। 11वीं व 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम परीक्षा तक के लिए अलग-अलग दर तय था।

    प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के लिए पांच लाख, एससी-एसटी के लिए दो से तीन लाख रुपये तय था। वहीं, अंतिम रूप से पास कराने के लिए यह दर प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक था।

    साक्षात्कार की राशि डॉ. अजिता भट्टाचार्य का पीए मोरहाबादी का रहने वाला ब्रजराम वसूलता था। जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे वसूलते थे।

    जेपीएससी सदस्य डॉ. जमाल अहमद के लिए हजारीबाग के बिचौलिए अभ्यर्थियों से वसूली करते थे। इसकी जानकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को रहती थी। जेपीएससी के सभी पदाधिकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को ही साक्षात्कार में अभ्यर्थियों के कोड को डी-कोड करने के लिए कहते थे।

    रामवीर सिंह इसका जिक्र अभय तिवारी से करता था। अधिकतर अभ्यर्थी जेपीएससी के सदस्यों के माध्यम से ही दर तय करते थे और फिर साक्षात्कार में पूरा खेल होता था।

    दस लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी तय था सीडीपीओ परीक्षा का रेट
    अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया है कि सीडीपीओ की परीक्षा पास कराने का दर दस लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी तय था। इसमें भी टीडीपीएल ने अभ्यर्थी उपलब्ध कराया है। इसमें सामान्य वर्ग में झारखंड के बाहर के राज्यों के अभ्यर्थी भी चयनित हुए थे।

    एक अभ्यर्थी रजक से एल. खियांग्ते के सहयोगी धर्मेंद्र ने 15 लाख लिए, जबकि एक अन्य अभ्यर्थी काजल भारती से डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने 10 लाख रुपये की वसूली की थी। ब्रजराम भी पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार के संपर्क में था।

    एक अन्य अभ्यर्थी प्रमोद कुमार पाठक का बिचौलिया आइटीआई का प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा था। उसने कुमारी सोनी जायसवाल, विभूति कुमार, स्वाति कुमारी अंकित कुमार आदि को परीक्षा पास कराने का सौदा कराया था।

    टीडीपीएल के निदेशक रामवीर ने स्वीकारा, क्रमांक के आधार पर टीडीपीएल बनाताथा कोड
    टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी की पूछताछ में स्वीकारा है कि 11वीं व 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा व सीडीपीओ के साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के क्रमांक के आधार पर टीडीपीएल एक कोड बनाता था।

    उसी कोड पर साक्षात्कार में खेल होता था। कोड के आधार पर ही जेपीएससी बोर्ड के सदस्यों से वैसे अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल होता था।

  • हरियाणा में किसानों के लिए बड़ा बदलाव, खाद लेने से पहले अब करनी होगी डिजिटल बुकिंग

    हरियाणा में किसानों के लिए बड़ा बदलाव, खाद लेने से पहले अब करनी होगी डिजिटल बुकिंग

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसान उर्वरक खरीदने से पहले उसकी डिजिटल बुकिंग कर सकेंगे। सरकार ने इस नई व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट के लिए महेंद्रगढ़ और कैथल जिलों का चयन किया है।

    दोनों जिलों में सफल परीक्षण के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में लागू करने पर विचार किया जाएगा। यह निर्णय मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को खाद की उपलब्धता की पहले से जानकारी देना, अनावश्यक भागदौड़ कम करना और उर्वरकों की मांग के आधार पर आपूर्ति की वैज्ञानिक योजना तैयार करना है।
    नई व्यवस्था में किसान मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी उर्वरक आवश्यकता की अग्रिम जानकारी देंगे। किसान अपनी पसंद का अधिकृत बिक्री केंद्र भी चुन सकेंगे। बुकिंग स्वीकृत होने के बाद क्यूआर कोड या टोकन के माध्यम से निर्धारित केंद्र से उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा।

    कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार के अनुसार, किसान द्वारा घोषित फसल और खेती के क्षेत्र के आधार पर उर्वरक की अनुशंसित मात्रा का आकलन किया जाएगा। किसान निर्धारित मानकों के अनुसार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे कम मात्रा के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रमाणीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाइसी या ओटीपी की सुविधा होगी। डिजिटल साधनों तक पहुंच नहीं रखने वाले किसानों के लिए कामन सर्विस सेंटर, सहकारी समितियां, अधिकृत विक्रेता, विभागीय उप-डिपो और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ से जुड़ेगा किसान रजिस्ट्री का डेटा
    बैठक में ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर उपलब्ध सत्यापित किसानों की खेती संबंधी जानकारी को किसान रजिस्ट्री से जोड़ने के प्रस्तावित तंत्र की भी समीक्षा की गई। इसके तहत फसल सीजन के दौरान किसान अपनी खेती की भूमि का विवरण दर्ज करेंगे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े पोर्टल पर संबंधित भूमि का चयन करेंगे। सत्यापन के बाद किसान, भूमि, फसल सीजन और स्वामित्व संबंधी जानकारी सुरक्षित डिजिटल माध्यम से किसान रजिस्ट्री को उपलब्ध कराई जाएगी। पंजीकरण पूरा होने पर पात्र किसान को विशिष्ट किसान पहचान नंबर जारी किया जाएगा, जिसे उसके खेती संबंधी रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। फसल या खेती की स्थिति बदलने पर रिकॉर्ड को प्रत्येक सीजन में अपडेट किया जा सकेगा।