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  • पंजाब सिंचाई घोटाले में 3 पूर्व IAS अफसरों को क्लीन चिट, विजिलेंस को न रिश्वत मिली न गवाह

    पंजाब सिंचाई घोटाले में 3 पूर्व IAS अफसरों को क्लीन चिट, विजिलेंस को न रिश्वत मिली न गवाह

    चंडीगढ़
     पंजाब के बहुचर्चित सिंचाई घोटाले में पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल समेत तीन सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारियों को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने क्लीन चिट दे दी है। विस्तृत जांच के बाद ब्यूरो ने कहा है कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।

    क्लीन चिट पाने वालों में पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू और पूर्व सिंचाई सचिव काहन सिंह पन्नू भी शामिल हैं। विजिलेंस ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

    हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को विजिलेंस ब्यूरो को उन अधिकारियों के खिलाफ जांच 15 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए थे, जिनके खिलाफ राज्यपाल से अभियोजन की मंजूरी ली गई थी। इसके अनुपालन में ब्यूरो ने जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट के अनुसार तीनों अधिकारियों के खिलाफ जांच में रिश्वत या कथित अनियमितताओं से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया।

    आरोपित के बयान को बनाया गया था आधार
    विजिलेंस के अनुसार तीनों सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ जांच मुख्य रूप से मामले के आरोपित ठेकेदार गुरिंदर सिंह के 21 दिसंबर 2017 के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर शुरू हुई थी।

    यह बयान 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआइआर की जांच के दौरान दिया गया था। एफआइआर में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं।

    ब्यूरो ने जांच में पाया कि डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में जिन रकम का उल्लेख किया गया था, उनकी कोई बरामदगी नहीं हुई। साथ ही यह बयान मूल एफआइआर के चालान का हिस्सा भी नहीं था। विजिलेंस ने रिपोर्ट में कहा कि किसी बरामदगी के अभाव में केवल इस बयान को तीनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

    588 पन्नों की सामग्री की जांच
    जांच के दौरान विजिलेंस ने मामले से संबंधित 588 पन्नों की जांच सामग्री, पुलिस फाइल, चालान और गवाहों के बयान खंगाले। ब्यूरो ने सिंचाई विभाग में टेंडर और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की।

    इसमें परियोजनाओं की प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी, अनुमान तैयार करने, टेंडर दस्तावेज बनाने, ठेकेदार को काम आवंटित करने से लेकर भुगतान जारी करने तक की प्रक्रिया शामिल थी।

    विजिलेंस के मुताबिक जांच में किसी गवाह ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के आरोपों का समर्थन नहीं किया। आरोपों को किसी विशेष तारीख, स्थान, समय या घटना से भी नहीं जोड़ा जा सका। विभागीय रिकार्ड और प्रक्रियाओं की जांच में भी तीनों अधिकारियों और कथित अनियमितताओं के बीच कोई स्पष्ट संबंध सामने नहीं आया।

    32 आरोपितों के खिलाफ दाखिल हो चुके हैं चालान
    यह घोटाला 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिंचाई और ड्रेनेज परियोजनाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप था कि टेंडर की शर्तें एक विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गईं और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।

    विजिलेंस ने मामले में नौ मुख्य और सात पूरक चालान दाखिल किए हैं। इन चालानों में कुल 32 आरोपित शामिल हैं, जिनमें 26 सरकारी कर्मचारी और छह निजी व्यक्ति हैं। मई 2023 में प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले से जुड़े कथित अपराध से अर्जित 70 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की थीं।

    विजिलेंस ने तीनों सेवानिवृत्त अधिकारियों की भूमिका की जांच पूरी कर रिपोर्ट सचिव, विजिलेंस को भेज दी है। अब हाई कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।

    क्या है पूरा मामला, विस्तार से पढ़िए…

        सिंचाई प्रोजेक्ट में घोटाले का आरोप: मामला 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा सरकार के दौरान सिंचाई विभाग की जल परियोजनाओं के आवंटन से जुड़ा है। आरोप था कि करीब 1,000 से 1,200 करोड़ रुपए के प्रोजेक्टों के टेंडर इस तरह तैयार किए गए कि उनका फायदा मुख्य ठेकेदार गुरिंदर सिंह को मिल सके। शिकायत में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक स्तर पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया था। साथ ही, इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी।

        बयान के आधार पर शुरू हुई थी जांच: विजिलेंस ने 29 सितंबर 2022 को दर्ज विजिलेंस इंक्वायरी नंबर 08 के तहत मामले की जांच की। तीनों अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति तत्कालीन पंजाब चीफ सेक्रेटरी BK जंजुआ ने 2022 में दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच मुख्य रूप से आरोपी गुरिंदर सिंह के 21 दिसंबर 2017 के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट पर आधारित थी, जो 17 अगस्त 2017 को दर्ज FIR की जांच के दौरान दिया गया था। इस FIR में IPC की धारा 406, 409, 420, 467, 471, 477-A और 120-B के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं।

        न रकम मिली, न गवाह: विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में जिन रकमों का जिक्र किया गया था, उनमें से कोई रकम बरामद नहीं हुई। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि यह स्टेटमेंट मूल FIR के चालान का हिस्सा नहीं था। जांच के दौरान पुलिस फाइल, चालान और गवाहों के बयानों की भी जांच की गई। इनमें तीनों रिटायर्ड अधिकारियों को रिश्वत या अनियमितताओं से जोड़ने वाला कोई ठोस तथ्य नहीं मिला। आरोपों को किसी निश्चित समय, स्थान, तारीख, महीने या साल से भी नहीं जोड़ा जा सका। किसी गवाह ने भी तीनों रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की पुष्टि नहीं की।

        588 पन्नों की जांच भी खंगाली: विजिलेंस ब्यूरो ने मामले से जुड़ी 588 पन्नों की जांच सामग्री की भी पड़ताल की। मूल FIR के आधार पर अदालत में कुल 16 चालान पेश किए गए थे, जिनमें 9 मुख्य और 7 सप्लीमेंट्री चालान शामिल थे। इन मामलों में 32 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 26 सरकारी कर्मचारी और 6 निजी व्यक्ति शामिल थे।

        भुगतान जारी करने तक के रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल: विजिलेंस ने सिंचाई विभाग में प्रोजेक्ट के टेंडर और भुगतान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की भी जांच की। इसमें प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी, टेंडर दस्तावेज तैयार करने, चीफ इंजीनियर की स्वीकृति, मेडरमेंट बुक व बिलों के सत्यापन, प्री-ऑडिट और ठेकेदारों को भुगतान जारी करने तक के रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रक्रियाओं और दस्तावेजों की जांच में भी तीनों रिटायर्ड IAS अधिकारियों को अनियमितताओं से जोड़ने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

        राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका भी जांची गई: जांच के दौरान सिंचाई विभाग के कामकाज के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक कार्यपालिका की भूमिका की भी पड़ताल की गई। इसके दायरे में विभाग के सचिव-चीफ सेक्रेटरी, संबंधित मंत्री और दो मंत्रियों के निजी सहायक भी शामिल थे। हालांकि, रिकॉर्ड और विभागीय प्रक्रियाओं की जांच में सर्वेश कौशल, KBS सिद्धू और कहान सिंह पन्नू को घोटाले से जोड़ने वाला पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला।

    अब अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर
    विजिलेंस ब्यूरो के जॉइंट डायरेक्टर (क्राइम) ने जांच रिपोर्ट तैयार कर इसे ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर को भेजा। चीफ डायरेक्टर ने 27 मई को रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए पंजाब सरकार के सचिव, विजिलेंस को भेज दी। इसके बाद ब्यूरो की ओर से हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों रिटायर्ड IAS अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले।

  • दिल्ली चिड़ियाघर में 15 साल बाद लौटेंगे जेब्रा, 11 साल बाद दिखेगा जिराफ

    दिल्ली चिड़ियाघर में 15 साल बाद लौटेंगे जेब्रा, 11 साल बाद दिखेगा जिराफ

    नई दिल्ली
    चिड़ियाघर में कभी जेब्रा और जिराफ बच्चों के पसंदीदा जानवर हुआ करते थे, अब फिर से उनकी वापसी की तैयारी है। करीब 15 साल बाद जेब्रा और 11 साल बाद जिराफ का इंतजार खत्म होने वाला है। नई योजना के तहत दिल्ली चिड़ियाघर में नई बिल्डिंग और आधुनिक सुविधाओं के साथ दुर्लभ वन्यजीवों का बड़ा संसार बसाने की तैयारी है। करीब 109 प्रजातियों के वन्यजीव देखने को मिलेंगे। इनमें जेब्रा, जिराफ और चीता के अलावा न्यू वर्ल्ड मंकी और माउस डियर भी शामिल हैं।

    • चिड़ियाघर में आखिरी जेब्रा की मौत 30 अप्रैल 2011 को हुई थी।
    • वहीं, अंकित नाम के आखिरी जिराफ की जून 2015 में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
    • करीब 30 साल पहले चिड़ियाघर में 130 से अधिक प्रजातियों के जीव थे।
    • अब करीब 93 प्रजातियों के 1245 जानवर ही रह गए हैं।
    • देश-विदेश के अलग-अलग चिड़ियाघरों से वन्यजीवों को लाने के लिए 3.78 करोड़ रुपये की रकम तय की गई है।
    • पिछले साल रिलायंस कंपनी के ग्रीन जूलॉजिकल रिसर्च एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC), नेशनल जूलॉजिकल पार्क (दिल्ली चिड़ियाघर) और गुजरात राज्य सरकार के बीच समझौता हुआ था।
    • इसके बाद चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण की योजना परवान चढ़ी। इसके लिए केंद्रीय मंत्रालय ने 400 करोड़ रुपये के खर्च की सहमति दी थी।

    स्वागत की तैयारी
        जू में करीब 15 साल से जेब्रा और 11 साल से नहीं है कोई जिराफ
        वन्यजीवों की प्रजातियों की संख्या 93 से 109 करने की तैयारी
        400 करोड़ रुपये से होगा चिड़ियाघर का आधुनिकीकरण

    विजिटर्स के लिए ये रहेंगी सुविधाएं
    मथुरा रोड से लेकर चिड़ियाघर के एंट्री गेट तक करीब 6 एकड़ इलाके में विजिटर्स के लिए कई सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। बस, कार, थ्री व्हीलर और पैदल यात्रियों के लिए अलग-अलग 4 रास्ते बनाए जाएंगे। चिड़ियाघर के कुछ बाड़ों में लैमिनेटेड ग्लास की दीवारें लगाई जाएंगी। इसके साथ ही यह लैमिनेटेड ग्लास का इस्तेमाल करने वाला देश का पहला चिड़ियाघर बनेगा। शुरुआत में मोटे लैमिनेटेड ग्लास टाइगर और बंदरों के बाड़ों में लगाए जाएंगे।

     

  • राजस्थान में ‘रिफॉर्म उत्सव’ की तैयारी तेज, 2 अक्टूबर को हर पंचायत में होगा जन मंथन

    राजस्थान में ‘रिफॉर्म उत्सव’ की तैयारी तेज, 2 अक्टूबर को हर पंचायत में होगा जन मंथन

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज (CoS) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में रिफॉर्म उत्सव, केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं में व्यय, हर घर तिरंगा अभियान-2026, जन-अभियोग निस्तारण एवं राजस्थान सम्पर्क 181 तथा मिशन हरियालो राजस्थान सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।

    ‘रिफॉर्म उत्सव’ से जनभागीदारी के जरिए आएंगे व्यवस्थागत सुधार
    मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में आयोजित होने वाला ‘रिफॉर्म उत्सव’ जनभागीदारी से शासन व्यवस्था में सुधार की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि आमजन के अनुभवों और सुझावों को आधार बनाकर प्रक्रियाओं को सरल तथा सेवा प्रदायगी को अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाया जाए। सभी विभाग ऐसे नीतिगत एवं प्रक्रियागत सुधारों की पहचान करें, जिनसे बड़ी संख्या में नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिले और सरकारी सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान हो।

    मुख्य सचिव ने कहा कि रिफॉर्म उत्सव के तहत ‘जन मंथन, विमर्श और जन समाधान’ की चरणबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से नागरिकों से प्राप्त उपयोगी सुझावों को व्यावहारिक सुधारों में बदला जाएगा। राज्य कार्ययोजना 10 सितंबर तक तैयार कर प्रस्तुत की जाएगी, 11 सितंबर से जन-जागरूकता अभियान शुरू होगा तथा 2 अक्टूबर को प्रदेश की प्रत्येक पंचायत में ‘जन मंथन सभा’ आयोजित कर आमजन को सुधार प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।

    उन्होंने कहा कि योजना विभाग रिफॉर्म उत्सव का नोडल विभाग होगा। जिलों के प्रभारी सचिव तैयारियों की नियमित समीक्षा करते हुए केन्द्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों से समन्वय सुनिश्चित करेंगे। युवा मामले विभाग के माध्यम से युवाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य सचिव ने सरकारी प्रक्रियाओं को और सरल बनाने के लिए एकल आवेदन प्रपत्र (सिंगल फॉर्म) विकसित करने की संभावनाओं पर भी कार्य करने के निर्देश दिए।

    केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं में उपलब्ध राशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करें
    मुख्य सचिव ने केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं की वित्तीय प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित केंद्रीय स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने और महत्वपूर्ण योजनाओं के संबंध में डी.ओ. लेटर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने वित्तीय एवं भौतिक प्रगति नियमित रूप से अपडेट करने, उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर भेजने तथा केन्द्र से स्वीकृति के बाद राज्यांश शीघ्र जारी करने को कहा।

    उन्होंने विभागों को योजनाओं एवं उपलब्धियों का प्रभावी संप्रेषण सुनिश्चित करने तथा गलत अथवा भ्रामक जानकारी सामने आने पर तथ्यों पर आधारित जानकारी समय पर आमजन के समक्ष रखने के निर्देश दिए।

    हर घर तिरंगा- 21 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी
    मुख्य सचिव ने हर घर तिरंगा अभियान-2026 के तहत 9 से 17 अगस्त तक आयोजित गतिविधियों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 9 अगस्त को 12 हजार 609 प्रभात फेरियों में 11.20 लाख से अधिक तथा 10 अगस्त को 12 हजार 917 तिरंगा रैलियों में 9.84 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस प्रकार दो दिनों में ही 21 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता रही। पोर्टल पर 40 हजार से अधिक सेल्फी भी अपलोड की जा चुकी हैं।

    मुख्य सचिव ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गतिविधियों को जनभागीदारी से जोड़ने तथा 13 एवं 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस से संबंधित कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने के निर्देश दिए।

    हरियालो राजस्थान- पौधरोपण के साथ संरक्षण और सत्यापन पर फोकस
    मुख्य सचिव ने मिशन ‘हरियालो राजस्थान’ के तहत पौधरोपण लक्ष्यों एवं उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए पौधों के संरक्षण और सत्यापन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में 10.81 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य के विरुद्ध 10 अगस्त तक करीब 4.85 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

    उन्होंने कम प्रगति वाले विभागों एवं जिलों को पौधरोपण में तेजी लाने, जिला कलक्टरों को प्रभावी समन्वय करने तथा पूर्व वर्षों में लगाए गए पौधों के सत्यापन में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    जन-अभियोगों में वास्तविक समाधान और नागरिक संतुष्टि हो प्राथमिकता
    मुख्य सचिव ने राजस्थान सम्पर्क 181 के माध्यम से प्राप्त जन-अभियोगों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिकायत निस्तारण का उद्देश्य आमजन को वास्तविक राहत देना होना चाहिए। समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के साथ नागरिक संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए तथा विभागीय सचिव एवं जिला कलक्टर लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    बैठक में बताया गया कि 1 फरवरी से 31 जुलाई 2026 के दौरान 24.64 लाख से अधिक जन-अभियोग दर्ज हुए, जबकि बैकलॉग सहित 25.04 लाख से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया गया। नागरिक संतुष्टि 63.16 प्रतिशत से बढ़कर 67.29 प्रतिशत हुई है और औसत निस्तारण अवधि 15 दिन से घटकर 13 दिन रह गई है। नागरिक सुविधाओं से संबंधित शिकायतों में संतुष्टि 74.75 प्रतिशत रही।

    मुख्य सचिव ने बिजली, पानी, सड़क और स्वच्छता से संबंधित शिकायतों की प्रभावी मॉनिटरिंग तथा समय, गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि के आधार पर विभागों एवं जिलों के प्रदर्शन में निरंतर सुधार के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को बैठक में लिए गए निर्णयों एवं निर्देशों की समयबद्ध क्रियान्विति और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करते हुए योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ आमजन तक सुगमता से पहुंचाने के निर्देश दिए।

     

  • पंजाब में पैरासिटामोल इंफ्यूजन और मैट्रोनिडाजोल इंजेक्शन पर स्वास्थ्य विभाग ने लगाई रोक

    पंजाब में पैरासिटामोल इंफ्यूजन और मैट्रोनिडाजोल इंजेक्शन पर स्वास्थ्य विभाग ने लगाई रोक

    अमृतसर.

    कपूरथला के सरकारी अस्पताल में महिला मरीजों की अचानक हालत बिगड़ने की घटना के बाद पंजाब का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। विभाग द्वारा तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे राज्य में पैरासिटामोल इंफ्यूजन और मैट्रोनिडाजोल इंजैक्शन आई.वी. 5 एम.जी./एम.एल. के कुछ बैचों के इस्तेमाल पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी गई है।

    इस संबंध में राज्य के सभी सिविल सर्जनों को व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से तुरंत आदेश जारी किए गए हैं कि उक्त दवाओं के संदिग्ध बैचों का किसी भी स्थिति में उपयोग न किया जाए। सूत्रों के अनुसार कपूरथला के सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद इलाज के अधीन कुछ महिला मरीजों की हालत अचानक बिगड़ गई जिससे अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मरीजों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया लेकिन इलाज के दौरान एक महिला मरीज की आई.सी.यू. में मौत हो गई।

    मैडीकल कॉलेज के सीनियर अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कपूरथला से कुल 7 महिला मरीज गुरु नानक देव अस्पताल लाई गई थीं। इनमें से चार महिलाओं की हालत में सुधार आने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है जबकि 2 मरीज अभी भी अस्पताल में इलाज के अधीन हैं। एक मरीज की मौत से परिवारों में गम का माहौल है। इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत राज्य स्तर पर कार्रवाई की है। विभाग द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं कि जिन बैचों पर संदेह है, उन्हें अस्पतालों से अलग करके सुरक्षित तरीके से रखा जाए और अगले आदेशों तक उनका उपयोग न किया जाए।

    अमृतसर की सिविल सर्जन डा. रश्मि ने बताया कि जैसे ही विभाग से आदेश प्राप्त हुए तुरंत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ तालमेल बनाकर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि संबंधित दवाओं के स्टॉक को तुरंत एकत्रित कर अलग बक्सों में रखा गया है और उन्हें लाल टेप से सील कर दिया गया है ताकि कोई भी अनजाने में भी इसका उपयोग न कर सके। सूत्रों के अनुसार यह संभावना भी जताई जा रही है कि मरीजों की हालत बिगड़ने का कारण उक्त दवाओं के कुछ खास बैच हो सकते हैं, जिसे लेकर विभाग द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। लैब टैस्ट और तकनीकी जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। इस घटना ने स्वास्थ्य प्रणाली में दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जोधपुर में 677 आवेदनों में से 80 परिवारों की लॉटरी, मुफ्त मिलेंगे 50 वर्गगज तक भूखंड

    जोधपुर में 677 आवेदनों में से 80 परिवारों की लॉटरी, मुफ्त मिलेंगे 50 वर्गगज तक भूखंड

    जोधपुर
    जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की ओर से सोमवार को घुमन्तु, अद्र्धघुमन्तु और विमुक्त जातियों के परिवारों के लिए लोककला नगर आवासीय योजना की ऑनलाइन लॉटरी निकाली गई। इस लॉटरी में 80 परिवारों को नि:शुल्क आवासीय भूखंड आवंटित किए गए। लॉटरी का परिणाम सामने आते ही चयनित परिवारों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए सूचना भेजी गई। कई परिवारों के लिए ये संदेश खुशियों की सौगात लेकर आया।

    चौखा गांव में स्थित लोककला नगर आवासीय योजना के तहत भूखंड आवंटन के लिए कुल 677 पात्र आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से कंप्यूटराइज्ड ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 80 लाभार्थियों का चयन किया गया। चयनित परिवारों को 50 वर्गगज तक के आवासीय भूखंड नि:शुल्क आवंटित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराना है।

    मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में हुआ लॉटरी कार्यक्रम
    लॉटरी कार्यक्रम का आयोजन मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। जोधपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त उत्साह चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद गठित कमेटी की मौजूदगी में पात्र आवेदनों में से ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड लॉटरी निकाली गई। पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई।

    जोधपुर में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में ऑनलाइन लॉटरी के दौरान मौजूद जेडीए आयुक्त व अन्य अ​धिकारी (फोटो: पत्रिका)

    कार्यक्रम के दौरान जेडीए के अधिकारी, कर्मचारी, विशिष्टजन और आमजन भी मौजूद रहे। लॉटरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और कंप्यूटराइज्ड तरीके से पूरा किया गया, जिससे पात्र आवेदनों में से लाभार्थियों का चयन किया जा सके।

    इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
    लॉटरी कार्यक्रम में एडीएम दौलतराम, उपसचिव सुमन राठौड़, निदेशक वित्त मंजीत चारण, निदेशक विधि अरविन्द राजपुरोहित, उपायुक्त जोन-4 अदिति पुरोहित और उपायुक्त जोन-2 मुकेश बारेठ सहित जेडीए के कई अधिकारी मौजूद रहे।

    जेडीए की ओर से सफल आवंटियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी सूचना दी गई है। इससे चयनित परिवारों को बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के अपने भूखंड आवंटन की जानकारी मिल गई।

    लोककला नगर आवासीय योजना में 677 पात्र आवेदनों के बीच से 80 परिवारों का चयन होने के बाद अब इन परिवारों को आवंटित भूखंडों से जुड़ी आगामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नि:शुल्क भूखंड मिलने से चयनित परिवारों को अपना घर बनाने के लिए जमीन की सुविधा मिलेगी।

     

  • बूंदी में नए बस स्टैंड का रास्ता साफ, 20,982 वर्गमीटर जमीन रोडवेज के नाम दर्ज

    बूंदी में नए बस स्टैंड का रास्ता साफ, 20,982 वर्गमीटर जमीन रोडवेज के नाम दर्ज

    बूंदी
    बूंदी शहर के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित नए रोडवेज बस स्टैंड के निर्माण का मार्ग अब पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार के निर्देशन और जिला प्रशासन के प्रयासों से लंका गेट स्थित पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में आवंटित 20,982 वर्गमीटर भूमि का नि:शुल्क नामांतरण राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) के नाम जमाबंदी में दर्ज हो चुका है। इस कदम से वर्षों से लंबित बस स्टैंड के स्थानांतरण और निर्माण प्रक्रिया को निर्णायक गति मिली है।

    अब शीघ्र ही कृषि विभाग द्वारा यह भूमि विधिवत रूप से रोडवेज विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इसके बाद पीपीपी मॉडल पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए बस स्टैंड के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। वर्तमान बूंदी बस स्टैंड वर्ष 1975 से शहर के मध्य संचालित हो रहा है,जो पिछले पांच दशकों से प्रतिदिन लगभग 7000 से 8000 यात्रियों को सेवाएं प्रदान कर रहा है।

    कम होगा यातायात का दबाव
    शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा था। मुख्य बस स्टैंड शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित होने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती थी, जिससे यात्रियों और आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। राज्य सरकार ने निर्णय लेते हुए शहर से दो किलोमीटर दूर लंका गेट स्थित पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में स्थानांतरित करने का निर्णय किया। इससे अब आमजन को जाम से मुक्ति मिलेगी और यात्रा करना अधिक सुगम होगा।

    वडोदरा बस टर्मिनल की तर्ज पर बनेगा नया बस स्टैंड
    गुजरात के वडोदरा (बड़ौदा) बस टर्मिनल की तर्ज पर प्रस्तावित नया बस स्टैंड विकसित किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसमें यात्रियों के लिए अत्याधुनिक प्रतीक्षालय की व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड परिसर में पर्याप्त पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे निजी वाहनों से आने वाले यात्रियों को कोई परेशानी न हो। आधुनिक स्वच्छता सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

    बेहतर यात्रा का मिलेगा अनुभव
    वर्तमान में बूंदी डिपो से कोटा, अजमेर, जयपुर, इंदौर, शिवपुरी, नैनवां, इंद्रगढ़, केशवरायपाटन, भीलवाड़ा, उदयपुर सहित अनेक प्रमुख मार्गों पर नियमित रोडवेज सेवाएं संचालित होती हैं। नए बस स्टैंड के निर्माण के बाद इन सेवाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।

    लंका गेट क्षेत्र का मिलेगी मजबूती
    पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में बस स्टैण्ड स्थानांतरित होने पर लंका गेट क्षेत्र सहित आसपास की कॉलोनियों का भी विकास होगा। बस स्टैण्ड संचालित होने के साथ ही कॉलोनियों वासियों व दुकानदारों की भी सुविधाओं का इजाफा होगा। वहीं बूंदी के विकास को भी गति मिलेगी। वहीं शहर में यातायात का दबाव कम होगा। ऑटो टेम्पों वालों के भी रोजगार में बढ्ोतरी होगी. लोगों की आय भी बढ़ेगी।

    निगम के नाम जमाबंदी
    नए बस स्टैंड के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने से बूंदी वासियों में खुशी का माहौल है। यह परियोजना न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि बूंदी के समग्र शहरी विकास एवं आधुनिक परिवहन संरचना की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगी।
    डॉ. घनश्याम गौड़,मुख्य प्रबंधक, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम, बूंदी आगार

  • पटना से भोपाल के लिए सीधी उड़ान शुरू, यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट से मिली राहत

    पटना से भोपाल के लिए सीधी उड़ान शुरू, यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट से मिली राहत

    पटना
    बिहार के हवाई यात्रियों के लिए राहत की खबर है। पटना से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बीच सीधी विमान सेवा सोमवार से शुरू हो गई।

    इस सेवा के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच हवाई संपर्क बहाल हो गई है। अब पटना के यात्रियों को भोपाल पहुंचने के लिए दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य शहर में विमान बदलने की परेशानी से राहत मिलेगी। इस रूट पर सीधी उड़ान से यात्रा का समय भी काफी कम होगा।

    पटना एयरपोर्ट के निदेशक सीपी द्विवेदी ने बताया कि नई सेवा का संचालन एलायंस एयर द्वारा की जा रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उड़ान सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और रविवार को संचालित की जानी है।

    भोपाल से भी सीधी उड़ान
    पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमान दोपहर करीब 1:40 बजे उड़ान भरकर भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचेगा। वापसी में भोपाल से भी पटना के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध है।

    पटना से भोपाल के बीच उड़ान का समय करीब ढाई घंटे बताया गया है। वापसी में यह विमान पटना शाम 7:35 बजे पटना पहुंचेगी। यह विमान 70 सीटों वाला है।

    पटना से भोपाल का शुरुआती किराया करीब 4,600 रुपये से निर्धारित किया गया है। हालांकि हवाई किराया बुकिंग की तारीख, सीटों की उपलब्धता और मांग के अनुसार बदल सकता है।

    पटना-भोपाल के बीच सीधी हवाई सेवा का सबसे अधिक फायदा नौकरी, शिक्षा, कारोबार और चिकित्सा कार्यों से मध्य प्रदेश जाने वाले यात्रियों को मिलेगा।

    अभी कनेक्टिंग उड़ानों से यात्रा करने पर समय अधिक लगता है। सीधी उड़ान उपलब्ध होने से यात्रियों को कम समय में भोपाल पहुंचने का विकल्प मिलेगा। वहीं भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों से बिहार आने वाले यात्रियों के लिए भी पटना पहुंचना आसान होगा।

     

  • मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा था झोलाछाप डॉक्टर, CM फ्लाइंग की रेड में दवाएं बरामद

    मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा था झोलाछाप डॉक्टर, CM फ्लाइंग की रेड में दवाएं बरामद

    गुड़गांव.

    गांव बिनौला में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टर को सीएम फ्लाइंग की टीम ने सूचना के आधार पर काबू कर लिया है। आरोपी एक डॉक्टर के नाम पर मरीजों का इलाज कर रहा था और उन्हें अपने क्लीनिक में भर्ती कर दवाएं भी दे रहा था।

    सीएम फ्लाइंग की टीम ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ रेड करते हुए आरोपी को काबू कर पुलिस के हवाले कर दिया है। टीम ने मौके से इलाज के लिए उपयोग होने वाले उपकरण व दवाएं बरामद करने के साथ ही डॉक्टर की स्टाम्प भी बरामद की है। बिलासपुर थाना पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज कराते हुए आरोपी को थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस के मुताबिक, पीएचसी कासन के मेडिकल ऑफिसर डॉ संदीप ने शिकायत में बताया कि उन्हें सीएम फ्लाइंग की टीम ने झोलाछाप डॉक्टर द्वारा मरीजों के इलाज के नाम पर जीवन से खिलवाड़ करने की सूचना दी थी।

    सूचना के आधार पर वह गांव बिनौला पहुंचे जहां एक दुकान(सैनी क्लीनिक) में एक व्यक्ति मरीजों का इलाज कर रहा था। पूछताछ पर इलाज करने वाले ने अपनी पहचान बिलासपुर के रहने वाले मुकेश कुमार के रूप में बताई। मुकेश ने बताया कि वह सैनी क्लीनिक पर डॉक्टर का कार्य करता है। जांच के दौरान उसके पास कोई डिग्री अथवा लाइसेंस नहीं मिला। क्लिनिक को चैक किया तो क्लीनिक मे 3 बेड डले हुए पाए गए। जो डॉ. कि मेज से एक स्टेथोस्कोप ,एक BP मापने कि मशीन,एक थर्मामीटर प्राप्त हुए तथा एक प्रिस्क्रिप्शन स्लिप जिस पर सैनी क्लिनिक लिखा हुआ मिला। यहां टीम को जांच के दौरान एक स्टॉम्प भी मिली जो डॉक्टर अनिल के नाम की थी। टीम ने यह सारा सामान जब्त कर लिया। इसके साथ ही टीम को यहां से कई दवाएं मिली। 

    महिला से रेप, दी मारने की धमकी
    टीम ने मौके पर डॉ अनिल कुमार को भी बुलाया जिसने बताया कि वह BAMS डॉक्टर हैं और इस क्लीनिक में कभी-कभी ही दवाएं देने के लिए आता है। बाकी दिन डॉ मुकेश कुमार ही चिकित्सक का कार्य करता है। इस पर टीम ने दवाएं भी कब्जे में लेकर मुकेश कुमार को काबू कर लिया। आरोपी के खिलाफ बिलासपुर थाने में शिकायत देकर केस दर्ज कराया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर NMC एक्ट 2019 की धारा 34 व 125, 318(4) भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज कराया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।

  • हरियाणा में गोशालाएं बढ़कर 650 हुईं, बजट 600 करोड़ रुपये तक पहुंचा

    हरियाणा में गोशालाएं बढ़कर 650 हुईं, बजट 600 करोड़ रुपये तक पहुंचा

    चंडीगढ़
    हरियाणा में वर्ष 2014 से पहले केवल 200 गोशालाएं थीं और उनका वार्षिक बजट मात्र दो करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं के फलस्वरूप आज प्रदेश में गोशालाओं की संख्या बढ़कर 650 हो चुकी है, जबकि इनका बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इन गोशालाओं में वर्तमान में चार लाख से अधिक बेसहारा गोवंश की देखभाल की जा रही है।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब के जिला पटियाला स्थित समाना में आयोजित गोकथा में यह जानकारी दी। हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेश की 350 गोशालाओं में विशाल शेड और सौर ऊर्जा (सोलर) प्लांट स्थापित किए गए हैं। नई गोशालाओं की स्थापना हेतु जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाली एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने युवाओं को नशे की सामाजिक बुराई से बचाने के लिए बड़ा अभियान चला रखा है। नशे के सौदागरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

    पंजाब सरकार की अनदेखी के कारण यहां का युवा नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है, जबकि हरियाणा में युवाओं को मैदानों से जोड़ने के लिए 2000 खेल नर्सरियां स्थापित की गई हैं।

    इनमें प्रतिदिन लगभग 40 लाख युवा अभ्यास करते हैं। खेल नीति का परिणाम है कि हाल ही में कामनवेल्थ गेम्स में भारत द्वारा जीते गए कुल 39 मेडल (13 गोल्ड) में से अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने सात गोल्ड मेडल हासिल किए। गर्व की बात यह है कि पांच स्वर्ण पदक हरियाणा की बेटियों ने अपने नाम कर देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। सड़क और रेल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं तथा रिकॉर्ड संख्या में नए मेडिकल कॉलेज , यूनिवर्सिटी, आइआइटी और आइआइएम खोले गए हैं। राज्य के 22 में से 17 जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं।

    वर्ष 2014 से पूर्व हरियाणा को प्रतिवर्ष केवल 500 डाक्टर मिलते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 3000 प्रतिवर्ष हो गई है। इसके साथ ही हरियाणा में युवाओं को बिना किसी खर्ची-पर्ची के पूर्ण पारदर्शिता से सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में युवाओं के साथ नौकरियों के वितरण में लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

  • पटना में सीएनजी नेटवर्क का बड़ा विस्तार, सात साल में 19 गुना बढ़ी आपूर्ति

    पटना में सीएनजी नेटवर्क का बड़ा विस्तार, सात साल में 19 गुना बढ़ी आपूर्ति

     पटना
    राजधानी में सीएनजी के नेटवर्क में लगातार विस्तार हो रहा है। खपत भी कई गुना बढ़ी है। गेल इंडिया ने पटना में सात वर्ष पहले तीन सीएनजी स्टेशनों से आपूर्ति आरंभ की थी। फरवरी 2025 तक पटना और आसपास के इलाकों में 30 स्टेशन संचालित हो रहे थे। इसके बाद भी स्टेशनों का विस्तार जारी रहा और वर्तमान में संख्या 41 हो गई है।

    गेल के महाप्रबंधक एके सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2019-20 में 19 लाख किलो सीएनजी की आपूर्ति हो रही थी। वहीं, 2020-21 में 47 लाख, 2021-22 में 1.27 करोड़, 2022-23 में 2.52 करोड़ और 2023-24 में बढ़कर 3.14 करोड़ किलो हो गई।

    2024-25 में यह 3.60 करोड़ किलो तक पहुंचने का अनुमान था। यानी छह साल में सीएनजी की वार्षिक आपूर्ति करीब 19 गुना बढ़ गई। वर्तमान में पटना में प्रतिदिन 1.40 लाख किलो सीएनजी की खपत हो रही है।

    वर्ष 2025 में 90 हजार किलो प्रतिदिन, जबकि वर्ष 2024 में 70 हजार के आसपास खपत थी। मांग के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में नए स्टेशन खोलने के साथ आपूर्ति ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है।

    ग्रामीण इलाकों में अब भी परेशानी
    सीएनजी आपूर्ति में शहरी इलाकों में पंपों पर जहां लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं, ग्रामीण इलाके जैसे बिहटा आदि में आपूर्ति की समस्या है। उपभोक्ताओं के अनुसार, कई दिन घंटों सीएनजी नहीं है के बोर्ड पंपों पर टंगे मिलते हैं। इस कारण वाहन चालक एक-दूसरे पंप का चक्कर लगाते रहते हैं।

    हालांकि, पटना और आसपास के इलाके में सीएनजी-पीएनजी की आपूर्ति के लिए नौबतपुर मदर स्टेशन लंबे समय से प्रमुख आधार रहा है। इसके अलावा गर्दनीबाग में मदर सीएनजी स्टेशन विकसित की गई है। इससे गर्दनीबाग, चितकोहरा, अनिसाबाद, बेउर और आसपास के क्षेत्रों में आपूर्ति को आसान बनाया जाने की कवायद हो रही है।

    राजधानी में चल रहे 60 हजार से अधिक सीएनजी वाहन
    राजधानी में 60 हजार से अधिक सीएनजी वाहन का परिचालन प्रतिदिन हो रहा है। इनमें 40 हजार से अधिक ऑटो चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त निजी कार करीब 20 हजार है। इसके अलावे बस व अन्य वाहन चल रहे हैं। सीएनजी के विस्तार के साथ शहर में गैस आधारित परिवहन का दायरा भी बढ़ा है।

    पेट्रोल-डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत और प्रदूषण कम करने की जरूरत के कारण आटो, टैक्सी और निजी वाहनों में सीएनजी की मांग बढ़ी है। इसका असर स्टेशनों पर भी दिखता है। मई 2025 में आपूर्ति बाधित होने पर पटना के कई सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी, जिससे बढ़ती निर्भरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।