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  • पंजाब में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, चाइल्ड केयर लीव से हटी 18 साल की सीमा

    पंजाब में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, चाइल्ड केयर लीव से हटी 18 साल की सीमा

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने सरकारी महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 100 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए मिलने वाली चाइल्ड केयर लीव के नियमों में बदलाव किया है। अब ऐसे बच्चों के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी महिला कर्मचारी चाइल्ड केयर लीव ले सकेंगी।

    सरकार ने इस श्रेणी के मामलों में बच्चे की उम्र की अधिकतम सीमा की शर्त हटा दी है। कार्मिक विभाग की ओर से 11 अगस्त को जारी निर्देशों में कहा गया है कि 100 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव देने में 18 वर्ष की उम्र की पाबंदी लागू नहीं होगी। यह सुविधा निर्धारित चार प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए होगी।

    चार श्रेणियों के लिए बदले नियम
    पंजाब सरकार ने चार श्रेणियों के लिए ये नियम बदले हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि यह बदलाव 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले बच्चों के मामलों में लागू होगा। ये चार श्रेणियां:

    • सेरेब्रल पाल्सी
    • आटिज्म
    • इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी
    • मल्टीपल डिसेबिलिटीज

    2011 के निर्देशों में किया संशोधन –
    पंजाब सरकार ने 22 दिसंबर 2011 को जारी चाइल्ड केयर लीव संबंधी निर्देशों में संशोधन किया है। पहले चाइल्ड केयर लीव के लिए बच्चे की उम्र 18 वर्ष तक होने की शर्त लागू थी। अब 100 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों के मामले में यह सीमा हटा दी गई है। सरकार की ओर से यह बदलाव ऐसे बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए किया गया है। गंभीर दिव्यांगता वाले बच्चों को लंबे समय तक अभिभावक की देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद चाइल्ड केयर लीव की सुविधा खत्म होने से महिला कर्मचारियों को परेशानी होती थी।

    सभी विभागों को दिए निर्देश
    कार्मिक विभाग ने पंजाब सरकार के सभी प्रशासनिक सचिवों, पंजाब एवं चंडीगढ़ के संबंधित अधिकारियों और विभागों को संशोधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि नए प्रावधानों के अनुसार पात्र महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव की सुविधा दी जाए।

  • अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्यों को अपनी नीति बनाने का निर्देश

    अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्यों को अपनी नीति बनाने का निर्देश

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में लंबे समय से मौजूद अनधिकृत और अवैध निर्माणों के रेगुलराइजेशन और डिमोलशन के लिए एक समान नीति बनाने की मांग पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने स्तर पर विचार करने को कहा। हालांकि, अदालत ने जनहित याचिका पर कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मुख्य रूप से राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के नीतिगत अधिकार क्षेत्र का विषय है।

    • चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियां और जमीनी वास्तविकताएं काफी अलग हैं।
    • ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान नीति तय करना न तो व्यावहारिक होगा और न ही उचित।
    • पीठ ने उम्मीद जताई कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश नई नीतियां बनाते समय या मौजूदा नीतियों की समीक्षा करते समय याचिका में उठाए मुद्दों पर उचित विचार करेंगे।
    • यह याचिका सेंटर फॉर लॉ एंड गुड गवर्नेंस ने दाखिल की थी।
    • इसमें खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लंबे समय से बने अनधिकृत आवासों को अचानक ध्वस्त किए जाने से बचाने के लिए नीति बनाने की मांग की गई थी।
    • याचिकाकर्ता ने कहा कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में अनधिकृत बस्तियों और निर्माणों के नियमितीकरण की योजनाएं हैं, लेकिन कई जगह बिना पर्याप्त नोटिस के ध्वस्तीकरण कर दिया जाता है।
    • प्रभावित परिवारों के पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी कई मामलों में नहीं होती। ध्वस्तीकरण कठोर कदम है।

    ध्वस्तीकरण से पहले 15 दिन का नोटिस
    चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, सुप्रीम कोर्ट पहले ही अवैध और अनधिकृत ध्वस्तीकरण के खिलाफ सुरक्षा उपाय तय कर चुका है। अनधिकृत कब्जाधारी को भी ध्वस्तीकरण से पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, याचिका में उठाए मुद्दों का समाधान हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना होगा। कोई समिति राज्य सरकारों और नगर निकायों को कानून लागू करने के अधिकारों का स्थान नहीं ले सकती।

    प्रभावित परिवारों की चिंता भी समझनी होगी
    कोर्ट ने कहा, नीति बनाने का अधिकार राज्यों के पास है। हालांकि, किसी राज्य की नीति मनमानी हो या प्रक्रिया का पालन न किया गया हो तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है। प्रभावित परिवारों के आवास के अधिकार की चिंता को भी समझना होगा, लेकिन परिस्थितियां राज्य-दर-राज्य अलग हो सकती हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के समक्ष याचिका रखकर नई नीति बनाने या मौजूदा नीतियों की समीक्षा का आग्रह करने की स्वतंत्रता दी।

     

  • JPSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा! फ्लैट में लिखवाए जाते थे अभ्यर्थियों के उत्तर, करोड़ों के लेनदेन का दावा

    JPSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा! फ्लैट में लिखवाए जाते थे अभ्यर्थियों के उत्तर, करोड़ों के लेनदेन का दावा

     रांची
    टीडीपीएल के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआइडी को बताया है कि रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाने की व्यवस्था की गई थी। बयान में आरोप है कि कुछ एजेंट दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाते थे।

    जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने का भी दावा किया गया है। अभय के कथित बयान के अनुसार, एसीएफ और एफआरओ परीक्षा में अपने अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा के उत्तर लिखवाने और अंक बढ़वाने के लिए उसने करीब 40 लाख रुपये दिए थे।

    सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल के माध्यम से अभ्यर्थी उपलब्ध कराने और प्रति अभ्यर्थी करीब 10 लाख रुपये का रेट होने का दावा किया गया है। अभय तिवारी के कथित बयान में टीडीपीएल के रामवीर सिंह और सतपाल सिंह का एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के आवास पर आने-जाने का भी उल्लेख है।

    बयान के अनुसार, इन्हीं लोगों से उसने कथित तौर पर सुना था कि 14वीं जेपीएससी में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने तीन अभ्यर्थियों की मदद कराई गई थी। हालांकि, उसने उन अभ्यर्थियों के नाम जानने से इनकार किया। सीआइडी इस बयान का भी सत्यापन कर रही है।

    टीडीपीएल के निदेशक रामवीर ने बताया, खाली गोलों को सही उत्तर में बदला
    टीडीपीएल के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी को बताया कि खाली छोड़े गए गोलों को सही उत्तर में बदला गया था। उसने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में ओएमआर स्कैनिंग, ओएमआर में हेरफेर, मेरिट अंकों से जुड़े डेटा में बदलाव, ओएसएम, मेंस परीक्षा के अंकों और इंटरव्यू के लिए कोड जेनरेशन जैसी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी की जानकारी होने का दावा किया गया है।

    बयान के अनुसार, श्वेता गुप्ता को एसीएफ और एफआरओ के साक्षात्कार तथा 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। रामवीर के कथित बयान में यह भी दावा है कि कुछ परीक्षाओं की आंसर-की मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही संबंधित कर्मचारियों के साथ साझा की गई थी, ताकि ओएमआर और ओएसएम में कथित मैनिपुलेशन की जा सके।

    रामवीर ने जांच में कथित तौर पर बताया कि अभय कुमार तिवारी के माध्यम से दिए गए अभ्यर्थियों के रोल नंबर के आधार पर ओएमआर शीट में खाली छोड़े गए प्रश्नों के उत्तर बाद में सही तरीके से अंकित किए जाते थे। इसके बाद उनके अंक बढ़ाकर चयन कराने का दावा किया गया है।

    कथित बयान के अनुसार, एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा के बाद अभय तिवारी, धर्मेंद्र (मुख्य सचिव के आवास का कंप्यूटर आपरेटर) और आनंद ने करीब 15 अभ्यर्थियों की सूची दी थी। इन अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में सही उत्तर अंकित कर उन्हें सफल कराने की बात कही गई थी।

    बदले में चयन होने पर प्रति अभ्यर्थी आठ से दस लाख रुपये तक देने की बात सामने आने का दावा किया गया है। एसीएफ और एफआरओ की मुख्य परीक्षा में भी कथित सेटिंग का आरोप लगाया गया है। बयान में कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थियों से रांची और हजारीबाग के अलग-अलग स्थानों पर लिखित परीक्षा की तैयारी या उत्तर लिखवाने की व्यवस्था कराई गई।

    अभय तिवारी की ओर से 40 से 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर चयन के लिए दिए जाने और इसके एवज में करीब 1.10 करोड़ रुपये अलग-अलग किस्तों में नकद देने का भी दावा किया गया है।

  • रांची में छात्र आंदोलन पर पुलिस का एक्शन, 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR; बढ़ा तनाव

    रांची में छात्र आंदोलन पर पुलिस का एक्शन, 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR; बढ़ा तनाव

    रांची
    रांची में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई उग्र झड़प को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है. पुलिस ने कुल 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, जिनमें 100 नामजद और 500 अज्ञात छात्र व अन्य प्रदर्शनकारी शामिल हैं। 

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दर्ज एफआईआर में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 100 प्रमुख प्रदर्शनकारियों को नामजद किया गया है. इसके अलावा 500 अज्ञात छात्रों व अन्य उपद्रवियों को आरोपी बनाया गया है। 

    उल्लेखनीय है कि JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने 'विधानसभा घेराव' का आह्वान किया था. इस दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ भारी तीखी झड़प हुई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा था। 

    25 जुलाई से चल रहा है आंदोलन
    छात्र और अभ्यर्थी 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं. उनकी मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की है. वे JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं. इसके अलावा वे पूरे मामले की स्वतंत्र जांच चाहते हैं. इसके लिए CBI या झारखंड के बाहर के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों की कमेटी बनाने की मांग की जा रही है. ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले अभ्यर्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 

    सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बेनतीजा
    आंदोलन को खत्म कराने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई. अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है. हालांकि, इससे कोई समाधान नहीं निकल पाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि 14वीं JPSC परीक्षा रद्द की जाएगी. मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया है। 

    बीजेपी ने किया राज्यव्यापी बंद
    प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद बीजेपी ने सरकार को घेरा. पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद का आयोजन किया. बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार पर छात्रों के आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया है. वहीं, सरकार में सहयोगी कांग्रेस ने बीजेपी पर आंदोलन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर से कार्यकर्ताओं को बुलाया था। 

    अनशन कर रहे नेता की तबीयत बिगड़ी
    इस बीच, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. महतो अनशन पर बैठे थे. उन्होंने रांची के सिविल सर्जन से दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौटने की अनुमति मांगी है. उन्होंने कहा कि उनकी ‘आत्मा’ छात्रों के आंदोलन के साथ है. अनशन कर रहे चार अन्य छात्रों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

  • पंजाब में भर्ती प्रक्रिया पर फिर HC की रोक, मान सरकार को 2 दिन में दूसरा बड़ा झटका

    पंजाब में भर्ती प्रक्रिया पर फिर HC की रोक, मान सरकार को 2 दिन में दूसरा बड़ा झटका

     चंडीगढ़
    पंजाब में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भगवंत मान सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पेपर लीक और भर्ती में अनियमितताओं के आरोपों के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दो दिनों के भीतर दूसरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. अदालत ने पंजाब स्टेट रूरल लाइवलीहुड्स मिशन (PSRLM) के तहत होने वाली 85 पदों की भर्ती प्रक्रिया को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। 

    हाईकोर्ट ने 41 ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर और 44 क्लस्टर कोऑर्डिनेटर पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया पर 2 सितंबर तक रोक लगाने का आदेश दिया. इससे पहले अदालत फार्मासिस्ट ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया पर भी रोक लगा चुकी है. ऐसे में लगातार दूसरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगने से सरकार की चयन प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। 

    यह भर्ती प्रक्रिया जनवरी 2026 में शुरू हुई थी और फरवरी में इसके परिणाम घोषित कर दिए गए थे. चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के लिए 70 अंक निर्धारित किए गए थे, जबकि 10-10 अंक इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए तय किए गए थे। 

    याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि परिणाम जारी करते समय केवल कुल अंक बताए गए, लेकिन लिखित परीक्षा के अलावा इंटरव्यू, योग्यता और अनुभव के लिए दिए गए 30 अंकों का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया. इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। 

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब किए और जांच के लिए वकीलों तथा ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों की एक समिति का गठन किया. समिति ने रिकॉर्ड की जांच के दौरान अंक आवंटन में अनियमितताएं पाईं। 

    समिति की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगाने का फैसला सुनाया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी. लगातार दो भर्ती प्रक्रियाओं पर अदालत की रोक के बाद पंजाब सरकार की भर्ती प्रणाली को लेकर विपक्ष भी हमलावर हो सकता है। 

  • तिरंगा यात्रा से दूरी और राष्ट्रगान का अपमान, नवादा के 13 शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी

    तिरंगा यात्रा से दूरी और राष्ट्रगान का अपमान, नवादा के 13 शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी

    पटना
    तिरंगा यात्रा में नहीं जाना और राष्ट्रगान का अपमान करना बिहार के 13 टीचरों को महंगा पड़ा है। नवादा जिले के इन सभी शिक्षकों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। नवादा के हिसुआ स्थित इंटर विद्यालय के प्राचार्य ने 13 शिक्षकों पर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने बीडीओ को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। प्राचार्य कुमार आशुतोष ने बताया कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक) के आदेशानुसार जिले के प्रत्येक प्रखंड में हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम निर्धारित था। इसमें भाग लेने के लिए उनके बार-बार आग्रह के बावजूद माध्यमिक शिक्षक सुनील कुमार, अमरेश अमर, राजेश कुमार, मुकेश कुमार, सावन राज, रविंद्र राय, एहसान अहमद, नूतन कुमारी, रानी कुमारी और उच्च माध्यमिक शिक्षक सौरभ कुमार, रितेश कुमार, अलका सिन्हा, राहुल कुमार सुमन जानबूझकर इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए

    साथ ही विद्यालय में राष्ट्र गान के दौरान अपने कार्यालय कक्ष में बैठकर राष्ट्र गान का भी अपमान किया। इस मामले को लेकर खुद विद्यालय के प्राचार्य कुमार आशुतोष कार्यक्रम की समाप्ति के उपरांत प्रखंड कार्यालय पहुंचे और बीडीओ से शिकायत करते हुए लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। बीडीओ ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस दौरान प्राचार्य संग लिपिक अरविन्द कुमार भी साथ थे।

    तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
    बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर नवादा जिला पूरी तरह से राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया है। राष्ट्रीय एकता, अखंडता और आमजन में तिरंगे के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को जिले में हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया गया। तिरंगा यात्रा की शुरुआत जिला अतिथि गृह से हुई। बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री सह नवादा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ.संतोष कुमार सुमन और नवादा के जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने संयुक्त रूप से इस यात्रा का नेतृत्व किया।

    हाथों में तिरंगा लिए देशभक्ति के नारों के साथ निकला जनसैलाब जिला अतिथि गृह से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेट गेट स्थित आम्बेडकर पार्क तक पहुंचा। पूरा मार्ग देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता के उद्घोष से गूंज उठा। तिरंगा यात्रा में समाज के हर वर्ग की उत्साहजनक भागीदारी रही। यात्रा में जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न कार्यपालक विभागों के कर्मी, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, युवा, एनसीसी कैडेट्स, स्काउट एवं गाइड, जीविका दीदियां तथा विभिन्न सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।

    हर घर और प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराने की अपील
    इस अवसर पर जिलावासियों को संबोधित करते हुए माननीय प्रभारी मंत्री डॉ.संतोष कुमार सुमन ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश की शान, आन और बान का प्रतीक है। उन्होंने जिले के प्रत्येक नागरिक से हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। मंत्री ने अपील की कि सभी लोग 15 अगस्त के अवसर पर अपने-अपने घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों पर तिरंगा फहराकर राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची निष्ठा और गौरव का परिचय दें।

  • CBSE शुरू करेगा स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग, स्कूलों को मिलेगी 1 से 5 स्टार तक रेटिंग

    CBSE शुरू करेगा स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग, स्कूलों को मिलेगी 1 से 5 स्टार तक रेटिंग

    अंबाला
     सेंट्रल बोर्ड आफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) अब देशभर के विद्यालयों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की कसौटी पर मूल्यांकन करने जा रहा है। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2026-27 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत 30 सितंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं। छह बिंदुओं पर आधारित मूल्यांकन के बाद विद्यालयों को वन से फाइव स्टार तक की रेटिंग दी जाएगी।

    इसमें जल, शौचालय, साबुन से हाथ धोना, संचालन एवं रखरखाव, व्यवहार परिवर्तन एवं क्षमता निर्माण तथा मिशन लाइफ गतिविधियां शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, सीबीएसई, ईएमआरएस, आइसीएसई, रेलवे स्कूल, सैनिक स्कूल, आटोमिक एनर्जी स्कूल, नेवी एजुकेशन सोसायटी और आइएएफ ईसी सोसायटी के स्कूल भी इस प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं।

    आंकड़ों के अनुसार, देशभर से एक लाख 58 हजार 595 स्कूलों ने प्रक्रिया शुरू की है, जबकि एक लाख 38 हजार 412 स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन किया है और 82 हजार 519 स्कूलों ने प्रक्रिया को पूरा कर लिया है।

    सिरसा के 12 स्कूलों ने प्रक्रिया शुरू की है, जबकि आठ स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन किया और छह ने इसे पूरा किया है। फतेहाबाद के 11 स्कूलों ने प्रक्रिया शुरू की है, जबकि 10 ने रजिस्ट्रेशन किया और तीन ने इसे पूरा किया है। पानीपत, भिवानी, फरीदाबाद और पंचकूला के कुछ स्कूलों ने भी प्रक्रिया में भाग लिया है।

     

  • राजस्थान UCC बिल का ड्राफ्ट तैयार, विधि मंत्री की मंजूरी के बाद कैबिनेट में होगा पेश

    राजस्थान UCC बिल का ड्राफ्ट तैयार, विधि मंत्री की मंजूरी के बाद कैबिनेट में होगा पेश

     जयपुर
     समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया बुधवार को अंतिम चरण के करीब पहुंच गई। विधिक परीक्षण के बाद विधि विभाग ने इसे मंजूरी के लिए विधि मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेज दिया। विधि मंत्री की मंजूरी के बाद विधेयक को कैबिनेट में भेजा जाएगा।

    बताते चलें कि बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने विधेयक का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया था, जिसे गृह विभाग ने विधिक परीक्षण के लिए सोमवार को विधि विभाग को भेज दिया था। विधि विभाग में सोमवार को देर रात तक विधिक परीक्षण का कार्य चलता रहा और मंगलवार को परीक्षण का कार्य जारी रहा।

    करीब 200 पेज का होगा विधेयक
    विधेयक का ड्राफ्ट करीब दो सौ पेज का बताया जा रहा है, जिसे अब तक यूसीसी को अंतिम रूप दे चुके राज्यों के कानून व विधेयकों के अध्ययन व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश और आम जनता से मिले सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया।

    कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक होगा महत्वपूर्ण एजेंडा
    राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के मंत्रिमंडल कक्ष में होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकता है।

    कई राज्यों के कानूनी प्रावधानों का किया अध्ययन
    उत्तराखंड में यूसीसी लागू है, जबकि गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है। लेकिन अभी कानून का रूप नहीं ले सका है। राजस्थान के विधेयक के लिए समिति ने उत्तराखंड व गुजरात राज्यों के कानूनी प्रावधानों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया है। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक कारणों से आदिवासियों को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।

    UCC यानी Uniform Civil Code ऐसा कानून/कानूनी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान नियम लागू करना है। इसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम, सभी समुदायों के लिए एक जैसी कानूनी प्रक्रिया, महिला और पुरुष के अधिकारों में समानता का प्रावधान, विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है, UCC में इसे प्रतिबंधित करने का प्रावधान हो सकता है और संबंधित कानून में पंजीकरण और अन्य नियम बनाए जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि UCC का मतलब यह नहीं है कि सभी धर्मों के धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत नागरिक कानूनों के उन हिस्सों में समान कानूनी नियम बनाना है, जो नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों से जुड़े हैं।

  • बिहार के 2.57 लाख युवाओं को मिलेगा विशेष कौशल प्रशिक्षण

    बिहार के 2.57 लाख युवाओं को मिलेगा विशेष कौशल प्रशिक्षण

    पटना
    बिहार के 2.57 लाख युवाओं को कौशल एवं रोजगार के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने युवाओं को बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप रोजगारपरक बनाने के लिए कुशल युवा कार्यक्रम को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। कैबिनेट में 11 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली।

    कैबिनेट विभाग के सचिव मो. सोहैल ने बताया कि सात निश्चय 3 में दोगुना रोजगार-दोगुनी आय के तहत कौशल विकास मिशन के कुशल युवा कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक विस्तार दिया गया है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 430 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

    6436 प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन होगा
    युवाओं को सोलर, ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड लैब तकनीशियन, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन, ब्यूटी एवं वेलनेस, वेब इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, टैली, भाषा और उद्यमिता जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार के अनुसार कार्यक्रम के तहत 6436 प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन से प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इन केंद्रों में हर वर्ष करीब 2.57 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    एलएन मिश्रा संस्थान में 14 सौ सीटें बढ़ेंगी
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि पटना स्थित ललित नारायण मिश्रा आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान में सीटें बढ़ाकर तीन हजार की जाएगी। वर्तमान में इस संस्थान में 1600 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इस हिसाब से 1400 सीटें बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को एलएन मिश्रा संस्थान में आयोजित छात्रों के इंडक्शन एंड ओरियंटेशन कार्यक्रम ‘आगाज 2026’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘गंगा टू ग्लोबल’ की अवधारणा के तहत प्रत्येक सत्र में लगभग 100 विद्यार्थियों को एक महीने के लिए विदेश भेजा जाएगा। ताकि, विदेश के अच्छे संस्थानों से विद्यार्थियों को सीखने का मौका मिले। पटना में बनने वाले नए पाटलिपुत्र टाउनशिप में एलएन मिश्रा संस्थान को 10 एकड़ भूमि सेटेलाइट कैंपस की स्थापना के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

    संस्थान में विद्यार्थियों के लिए एआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेजों की स्थापना कर दी गयी है। 15 जुलाई को जिन 211 डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की गयीं, वहां 10 अगस्त से शिक्षकों के योगदान के साथ ही पढ़ाई प्रारंभ हो चुकी है। 551 मॉडल स्कूलों की शुरुआत की गयी है। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि 15 अगस्त से रात्रि 11 के बाद भी बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर शिक्षकों से प्रश्न पूछ सकते हैं।

  • ‘पूरी बॉडी में टांके, पत्नी ICU में…’ पिटबुल के हमले से घायल अंकित ने सुनाई खौफनाक आपबीती

    ‘पूरी बॉडी में टांके, पत्नी ICU में…’ पिटबुल के हमले से घायल अंकित ने सुनाई खौफनाक आपबीती

    पटियाला 

     पटियाला के घुम्मण नगर इलाके में बुधवार को पिटबुल कुत्ते का आंतक देखने को मिला। मकान देखने गए एक दंपती पर पिटबुल कुत्ते ने अचानक अटैक कर दिया, अटैक इतना खतरनाक था कि दोनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

    पिटबुल कुत्त दंपती को करीब तीन मिनट तक काटता रहा, दंपती द्वारा शोर मचाने के बाद आसपास रहने वाले पड़ोसी लाठी डंडे लेकर बाहर आए और पिटबुल पर वार कर दंपती को छुडवाने की कोशिश की, पर लोगों द्वारा कई बार डंडो से वार करने के बाद पिटबुल ने दंपती को छोड़ा।

    इस दौरान पिटबुल ने महिला की दायनी बाजू पर कंधे के पास से काफी बुरे तरीके से काटा। हमले की घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घायल दंपती को उपचार के लिए शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि महिला को कुत्ते ने करीब 14 बार, जबकि उसके पति को करीब 12 बार काटा। पीडित महिला की दायनी बाजू पर सर्जरी की गई।

    जमीन पर गिरी महिला
    जानकारी के अनुसार, दंपती मकान खरीदने के उद्देश्य से एक प्रापर्टी डीलर के साथ घुम्मण नगर स्थित एक कोठी देखने पहुंचा थे। जैसे ही प्रापर्टी डीलर ने कोठी का गेट खोला, अंदर मौजूद पिटबुल अचानक बाहर निकल आया और उसने दंपती पर अटैक कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्ते ने सबसे पहले महिला पर हमला किया, जिससे वह जमीन पर गिर गई। पत्नी को बचाने के लिए पति आगे आया तो पिटबुल ने उस पर भी हमला कर दिया।

    अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के घरों से कुछ लोग बाहर आए और उन्होंने कुत्ते को हटाने का प्रयास किया। लोगों ने लाठी-डंडों से पिटबुल पर वार किया, काफी मशक्कत के बाद कुत्ते को दंपती से अलग किया। इसके बाद दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

    CCTV फुटेज में कैद हुआ दिल दहला देने वाला मंजर
    अंकित ने आगे बताया, "मैं अपनी पत्नी को बचाने के लिए कुत्ते से भिड़ गया, जिससे मेरे पैर, बैक और पूरे शरीर पर गहरे जख्म हुए हैं और जगह-जगह टांके आए हैं. वह कुत्ता इतना खूंखार था कि अपने मालिक के चिल्लाने और रोकने पर भी नहीं रुका. अगर आसपास के लोग लाठियां लेकर न दौड़ते, तो वह हमारी गर्दन फाड़ देता और हमें जिंदा न छोड़ता. हमें सिर्फ और सिर्फ सख्त कानूनी कार्रवाई और इंसाफ चाहिए। 

    घटना के वायरल सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि कैसे पिटबुल अचानक दोनों पर टूट पड़ता है. चीख-पुकार सुनकर घर से एक महिला हाथ में डंडा लेकर बाहर आती है और कुत्ते को मारने की कोशिश करती है, लेकिन हिंसक हो चुका पिटबुल पीछे हटने के बजाय नोचता रहता है. इसके बाद आसपास के दो-तीन स्थानीय नागरिक डंडे लेकर पहुंचते हैं और भारी मशक्कत के बाद घायल दंपति को कुत्ते के जबड़े से छुड़ाते हैं। 

    पटियाला में आक्रामक नस्ल के कुत्तों पर लगेगा बैन
    इस गंभीर घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष है. मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पटियाला के मेयर कुंदन गोगिया ने कहा कि शहर में पिटबुल जैसी खतरनाक और आक्रामक नस्ल के कुत्तों को पालने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की आगामी हाउस मीटिंग में इस संबंध में विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा। 

    फिलहाल पुलिस ने पीड़ित अंकित सभरवाल के बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया है और लापरवाही बरतने वाले कुत्ता मालिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। 

    बुरी तरह से काटा
    पीड़ित अंकित सभरवाल ने कहा कि पिटबुल ने उनकी पत्नी और उन्हें बुरी तरह से काटा है, शरीर पर कई जगहों पर घाव है। उन्होंने कहा कि पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की गई है। अगर लोग न मदद करते तो इससे भी ज्यादा बुरा हाल हो सकता था। अगर पिटबुल पर रोक है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।

    पिटबुल रखने पर पाबंदी
    पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा.बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि पिटबुल रखने पर पाबंदी है, जिसके चलते कोई भी व्यक्ति इस डाग को नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्होंने घटना से संबंधित वीडियो नहीं देखी, क्योंकि चंडीगढ़ में उच्चाधिकारियों के साथ मीटिंग में थे। उन्होंने कहा कि घटना की जांच कराकर नियम अनुसार बनती कार्रवाई की जाएगी।

    निगम कमिश्नर बोलीं- पिटबुल रखने पर रोक
    मामला सामने आने के बाद शहर में पिटबुल जैसे शक्तिशाली कुत्तों को घरों में रखने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम कमिश्नर पूजा सियाल ग्रेवाल ने कहा कि पिटबुल रखने को लेकर रोक लगाई गई है, पर इनकी रजिस्ट्रेशन या फिर कार्रवाई करने का जिम्मा पशु पालन विभाग के पास है।

    कमिश्नर ने कहा कि घटना की वीडियो उनके पास पहुंच चुकी है, कार्रवाई कराने के लिए पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को वीडियो भेज दी गई है। इसके अलावा नगर निगम भी अपने स्तर पर मामले को गंभीरता से ले रहा है।

    प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है महिला
    जानकारी के अनुसार, घटना के बाद अंकित और उसकी पत्नी सीधे एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां इन दोनों का इलाज चल रहा है। अंकित की पीठ और जांघ पर टांके लगे हैं। उसकी मरहम पट्टी कर अस्पताल से छुट्‌टी मिल गई।

    वहीं, अंकित की पत्नी को गंभीर चोट है। उसके हाथ की सर्जरी के बाद डॉक्टर ने अस्पताल में अपने ऑब्जर्वेशन में रखा है। उसकी भी पीठ, जांघ और कूल्हे पर चोटें आई हैं। अंकित ने इस मामले में अनाज मंडी थाने में शिकायत दी है।

    पुलिस को दी शिकायत, पत्नी बयान देने की हालत में नहीं
    अंकित ने कहा कि अगर लोग बचाने नहीं आते तो वह कुत्ता उनकी जान भी ले सकता था। पुलिस को शिकायत दी गई है। हालांकि, पत्नी अभी बयान देने की हालत में नहीं है, इसलिए अभी पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची। उसकी हालत थोड़ी ठीक होने पर पुलिस बयान लेकर कार्रवाई करेगी।

    पटियाला के आर्य समाज चौक के रहने वाला अंकित पेशे बैंकर है। वह यस बैंक में नौकरी करता है। वहीं, उसकी पत्नी एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पढ़ाती है। अंकित ने पुलिस और सिविल प्रशासन से इस मामले में इंसाफ की मांग की है।

        पालतू पिटबुल डाग का रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है।
        टीकाकरण कार्ड दिखाकर हर साल या निर्धारित समय सीमा पर इस लाइसेंस का रिन्यू कराना होता है।
        कुत्ते को समय पर एंटी-रेबीज और अन्य आवश्यक टीके लगवाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
        पशु चिकित्सक द्वारा जारी किया वेक्सिनेशन कार्ड हमेशा संभालकर रखना।
        घर से बाहर या सोसाइटी के कामन एरिया में कुत्ते को हमेशा पट्टे से बांधकर रखना। सार्वजनिक स्थानों या पार्क में गंदगी फैलने पर उसे साफ करने की जिम्मेदारी मालिक की होती है।
        कुत्तों को मुंह पर जाली पहनाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन यदि कुत्ता आक्रामक स्वभाव का है तो सुरक्षा के लिए इसका उपयोग करना उचित है।
        कुत्ते की देखभाल में लापरवाही बरतना अपराध माना जाता है
        कुत्ते को सड़क पर लावारिस छोड़ देना कानूनन अपराध है।