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  • दिल्ली के निर्माण विहार में बनेगा 500 मीटर लंबा स्काईवॉक, 4 लिफ्ट से होगी कनेक्टिविटी

    दिल्ली के निर्माण विहार में बनेगा 500 मीटर लंबा स्काईवॉक, 4 लिफ्ट से होगी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली
    पूर्वी दिल्ली के निर्माण विहार स्थित ट्रैफिक सिग्नल के पास स्काईवॉक बनाने की योजना पीडब्ल्यूडी ने तैयार की है। स्काईवॉक का निर्माण इस तरह से किया जाएगा कि विकास मार्ग और पटपड़गंज रोड पर पैदल चलने वाले या रोड क्रॉस करने वाले लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकें। इस स्काईवॉक के निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ड्रोन सर्वे भी कराएगा। यह आईटीओ पर बने स्काईवॉक की तरह ही होगा।

    स्काईवॉक की योजना पर क्या है PWD का कहना
    पीडब्ल्यूडी अफसरों के अनुसार, विकास मार्ग और पटपड़गंज रोड जंक्शन पर स्थित निर्माण विहार ट्रैफिक सिग्नल के पास ही मेट्रो स्टेशन है। V3S मॉल, कई कोचिंग सेंटर, बाजार और कई ऑफिस भी आसपास है। इससे इस ट्रैफिक जंक्शन पर रोड क्रॉस करने वाले पैदल यात्रियों की संख्या हजारों में है। पैदल यात्रियों के सुरक्षित रोड क्रॉस करने के लिए यहां स्काईवॉक निर्माण की योजना बनाई गई है। स्थानीय लोग भी लंबे समय से एफओबी निर्माण की मांग कर रहे थे।

    सभी विंग होंगे एक दूसरे से जुड़े
    अफसरों के अनुसार, इस स्काईवॉक का डिजाइन ITO वाले स्काईवॉक से थोड़ा अलग होगा। इसके सभी विंग एक दूसरे से कनेक्टेड होंगे ताकि अगर कोई प्रीत विहार या निर्माण विहार की ओर से लक्ष्मी नगर की ओर आना जाना चाहता है तो आसानी से आ-जा सके। इसी तरह से कोई V3S मॉल की ओर से लक्ष्मी नगर या निर्माण विहार की ओर जाना चाहता है तो उसे भी सुविधा हो। स्काईवॉक में 4 लिफ्ट भी होंगी।

    PWD जल्द शुरू करेगा ड्रोन सर्वे

    •     विकास मार्ग-पटपड़गंज रोड जंक्शन पर हजारों पैदल यात्रियों को मिलेगी सुविधा, V3S मॉल भी होगा कनेक्ट
    •     PWD ने निर्माण विहार ट्रैफिक सिग्नल के पास इसे बनाने का प्लान तैयार किया, जल्द शुरू होगा ड्रोन सर्वे
    •     लिफ्ट और सीढ़ियो से जुड़े होंगे सभी हिस्से, सारी सुविधाओं को ध्यान में रखकर होगा निर्माण
    •     500 मीटर लंबा होगा स्काईवॉक
    •     4 लिफ्ट होगी स्काईवॉक में
  • हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 15.44 करोड़ के GST घोटाले में कंपनी निदेशक पर कार्रवाई रद्द

    हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 15.44 करोड़ के GST घोटाले में कंपनी निदेशक पर कार्रवाई रद्द

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जीएसटी से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी पर कर अपराध का आरोप होने की स्थिति में केवल निदेशक को आरोपित बनाकर उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

    संबंधित कंपनी को भी मामले में आरोपित बनाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी के खिलाफ अभियोजन के बिना निदेशक पर केवल ‘प्रतिनिधिक जिम्मेदारी’ के आधार पर आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने यह टिप्पणी कंपनी के निदेशक मनोज बंसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने रोहतक के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित शिकायत और उससे जुड़ी आगे की पूरी कार्यवाही को रद कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने जीएसटी विभाग को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है।

    मामले के अनुसार, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआइ) गुरुग्राम की क्षेत्रीय इकाई को सूचना मिली थी कि संबंधित कंपनी कथित तौर पर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले रही है। सूचना के आधार पर कंपनी के पंजीकृत परिसर में तलाशी ली गई। जांच के दौरान खरीद से संबंधित बिल और परिवहन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। विभाग के अनुसार, जांच में सामने आया कि कंपनी ने ऐसी कई फर्जी या कागजी कंपनियों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने सामान की वास्तविक आपूर्ति किए बिना बिल जारी किए थे। जांच में ऐसी 31 संस्थाओं का उल्लेख किया गया। आरोप था कि कंपनी के निदेशक मनोज बंसल खुले बाजार से बिना बिल के नकद में लेड धातु खरीदते थे और वास्तविक खरीद के बजाय इन कथित फर्जी कंपनियों से बिल हासिल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेते थे।

    विभाग के अनुसार, इस तरीके से कंपनी ने करीब 15.44 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया। जीएसटी खुफिया विभाग ने हाईकोर्ट में मनोज बंसल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह केवल कंपनी के नाममात्र निदेशक नहीं थे, बल्कि कंपनी के कामकाज और जीएसटी से जुड़े मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे। विभाग ने उन्हें कथित लेनदेन का लाभार्थी और मुख्य कर्ताधर्ता भी बताया। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना कि विभाग स्वयं यह स्वीकार कर रहा था कि कथित तौर पर 15.44 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट कंपनी ने लिया था। कंपनी को जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद 16 जनवरी 2025 को पारित आदेश के खिलाफ कंपनी ने धारा 107 के तहत अपील भी दाखिल की थी।

    अदालत ने कहा कि कर संबंधी कार्यवाही कंपनी के खिलाफ चल रही है। ऐसे में जब कथित अपराध कंपनी ने किया है और कंपनी को आपराधिक मामले में आरोपित ही नहीं बनाया गया, तो निदेशक के खिलाफ प्रतिनिधिक जिम्मेदारी के आधार पर अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मनोज बंसल के खिलाफ लंबित शिकायत और उससे जुड़ी पूरी कार्यवाही रद कर दी।

  • पंजाब सरकार का बड़ा दावा, राजस्थान से मांगी 1.44 लाख करोड़ रुपये की जल रॉयल्टी

    पंजाब सरकार का बड़ा दावा, राजस्थान से मांगी 1.44 लाख करोड़ रुपये की जल रॉयल्टी

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने राजस्थान से नदी जल की आपूर्ति के एवज में 1.44 लाख करोड़ रुपये की रायल्टी और मुआवजे की मांग की है। सरकार ने राजस्थान को अंतिम मांग नोटिस जारी करते हुए 30 दिन के भीतर राशि जमा करने को कहा है। भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

    पंजाब का दावा 1961 से 2025 तक राजस्थान की ओर से इस्तेमाल किए गए नदी जल की रायल्टी से जुड़ा है। पंजाब ने राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि पूर्व में किए गए पत्राचार के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। इससे पहले 18 मार्च और चार मई को भी राजस्थान को पत्र भेजे गए थे।

    1920 के समझौते को बनाया आधार
    पंजाब सरकार ने अपनी मांग का आधार चार सितंबर, 1920 को शिमला में बीकानेर, बहावलपुर और पंजाब के तत्कालीन शासकों के बीच हुए जल बंटवारे के समझौते को बनाया है। पंजाब के अनुसार, राजस्थान को उपलब्ध कराए गए पानी के लिए बीकानेर से प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 6.50 रुपये सेस लिया जाता था। बाद में पंजाब ने मौजूदा दर 141.20 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष के हिसाब से बकाया राशि की गणना की है। इसमें औसतन 10 मिलियन एकड़ फीट पानी की रायल्टी और आठ प्रतिशत ब्याज भी शामिल किया गया है। इंडस वाटर ट्रीटी पर हस्ताक्षर होने तक राजस्थान की ओर से रायल्टी का भुगतान किए जाने का भी पंजाब ने उल्लेख किया है।

    हरियाणा से भी 312.59 करोड़ की मांग
    इसी बीच पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को पत्र लिखकर भाखड़ा नहर प्रणाली की साझा वाहक नहरों के संचालन और रखरखाव के 312.59 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसमें भाखड़ा मेन लाइन डिवीजन, पटियाला के 281.78 करोड़ और मानसा डिवीजन के 30.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। पंजाब के अनुसार हरियाणा ने 2015-16 के बाद से नहर रखरखाव का भुगतान नहीं किया है। भाखड़ा नहर की कुल आवंटन क्षमता 12,455 क्यूसेक है। इसमें हरियाणा का हिस्सा 63 प्रतिशत यानी 7,841 क्यूसेक, पंजाब का 25 प्रतिशत यानी 3,108 क्यूसेक है। राजस्थान को सात, दिल्ली को चार और चंडीगढ़ को एक प्रतिशत हिस्सा निर्धारित है।

    बीबीएमबी बकाये पर 20 अगस्त को सुनवाई
    उधर, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले बकाये के मामले में केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार केंद्र के भुगतान संबंधी प्रस्ताव पर सहमति के काफी करीब है। केंद्र ने नकद भुगतान के बजाय ऊर्जा के माध्यम से बकाये के निपटारे का प्रस्ताव दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

  • हरियाणा में प्राइम खसरों की पहचान अब डिजिटल, सरकार ने शुरू किया नया मॉड्यूल

    हरियाणा में प्राइम खसरों की पहचान अब डिजिटल, सरकार ने शुरू किया नया मॉड्यूल

     चंडीगढ़
     हरियाणा में प्राइम खसरों की पहचान के लिए प्रदेश सरकार ने नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। इससे पूरे राज्य में प्राइम खसरा तय करने की प्रक्रिया एक समान तरीके से लागू की जा सकेगी।

    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल के साथ-साथ इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी मंजूरी दी है।

    राजस्व और भूमि अभिलेखों में प्राइम खसरा वह विशिष्ट भूखंड या जमीन का नंबर होता है जो मुख्य सड़क, बाजार या विकसित शहरी/व्यावसायिक क्षेत्र के पास स्थित होने के कारण उच्च वित्तीय और बाजार मूल्य रखता है।

    रेट अलग दरों से होंगे तय
    इस पर स्टांप शुल्क और कलेक्टर रेट अलग या उच्च दरों से तय होते हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरा माड्यूल की सहायता से अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित रिकार्ड की जांच करने और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद प्राइम खसरे का चयन और निर्धारण कर सकेंगे

    इससे अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने और उसे तय करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया मिलेगी। इससे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके अपनाने की जरूरत नहीं रहेगी।

    विभाग ने SOP को दी मंजूरी
    सभी जिलों में इस माड्यूल का एक समान इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी है। इसमें पूरी प्रक्रिया और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

    मॉड्यूल का परीक्षण भी किया जा चुका है। इससे जुड़े परीक्षण मामलों और सुरक्षा प्रमाण-पत्र को भी दस्तावेजों के साथ शामिल किया गया है। इन दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा, ताकि अधिकारी इन्हें जरूरत के समय देख सकें और इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण एवं क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सके।

     

  • राजस्थान कैबिनेट के बड़े फैसले, UCC से लेकर पेड़ बचाने और प्रमोशन में राहत तक

    राजस्थान कैबिनेट के बड़े फैसले, UCC से लेकर पेड़ बचाने और प्रमोशन में राहत तक

    जयपुर
    आगामी निकाय और पंचायत चुनावों की आचार संहिता लागू होने से पहले, राजस्थान की भजनलाल सरकार ने कैबिनेट बैठक में कई दूरगामी और ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगा दी है। सरकार के ये निर्णय न केवल प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को नया आकार देंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी कर्मचारियों के भविष्य को भी संवारेंगे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब ये विधेयक 20 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पटल पर रखे जाएंगे।

    मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारा मूल मकसद 'एक प्रदेश, एक कानून' की भावना को धरातल पर उतारना और हर वर्ग को समान अधिकार देना है।"

    राजस्थान कैबिनेट ने 'समान नागरिक संहिता' (UCC) के मसौदे को हरी झंडी दे दी है। इस कानून के लागू होने से राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर एक समान व्यवस्था लागू होगी।

    बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध
    प्रदेश में अब एक से अधिक विवाह करने (बहुविवाह) पर पूरी तरह रोक रहेगी। हालांकि, पुनर्विवाह को सर्वमान्य रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत और उसके अंत की सूचना देना तथा तलाक का पंजीकरण कराना भी जरूरी कर दिया गया है। ऐसा न करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना भुगतना होगा।

    संपत्ति में बराबरी का हक
    उत्तराधिकार के नए नियमों के तहत बेटे और बेटी दोनों को पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा। इतना ही नहीं, यदि पिता के जीवनकाल में ही पुत्र का निधन हो जाता है, तो पोते को भी संपत्ति में पूरा हक मिलेगा। हालांकि, आदिवासी व जनजाति क्षेत्रों के समृद्ध रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है।

    राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन एक्ट
    राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी और रोहिड़ा समेत कुल 29 बहुमूल्य और कल्पवृक्ष श्रेणी के पेड़ों को बचाने के लिए 'राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन एक्ट' को मंजूरी दी गई है। संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बनाए गए इस कानून में सख्त प्रावधान हैं।

    इन पेड़ों के काटने पर भारी जुर्माना और जेल
    बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के प्रतिबंधित पेड़ काटने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और 1 साल की जेल की सजा होगी। यह नियम 500 वर्ग मीटर से बड़ी व्यक्तिगत संपत्तियों पर भी लागू होगा।

    शर्त के साथ पेड़ काटने की मिलेगी अनुमति
    यदि किसी विशेष परिस्थिति में पेड़ काटना आवश्यक हो, तो अनुमति मिलने पर 10% अतिरिक्त नए पौधे लगाने होंगे। पौधे न लगा पाने की स्थिति में आवेदक को एक निश्चित राशि जमा करानी होगी, जिससे सरकार उन पेड़ों का रोपण और रखरखाव करेगी।

    कर्मचारियों को प्रमोशन में 2 साल की छूट
    राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि में 2 वर्ष की विशेष छूट दी गई है। पिछले 3 वर्षों से इस लाभ से वंचित रहे सभी कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे।

    शहीद परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति
    स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 31 अक्टूबर 1972 तक के उन 35 शहीद सैनिकों के आश्रित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, जो दशकों से इस अधिकार से वंचित थे।

     

  • लाल किला ब्लास्ट के पीछे AQIS! UN रिपोर्ट में अल-कायदा की साजिश का बड़ा खुलासा

    लाल किला ब्लास्ट के पीछे AQIS! UN रिपोर्ट में अल-कायदा की साजिश का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली
    नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले के पीछे अलकायदा का हाथ था। UN की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हमले को अल-कायदा की ही एक रीजनल ऑफशूट 'अल कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) ने अंजाम दिया था। गौरतलब है कि इस ब्लास्ट से पूरी दिल्ली कांप उठी थी। हमले में 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

    संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शन मॉनिटरिंग टीम ने जारी किया हम रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह आतंकी गुट दक्षिण एशिया में अपना नेटवर्क तेजी से फैला रहा है और बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

    यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक अल-कायदा का यह ऑफशूट अब बिखरे हुए समूहों के बजाय एक क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए यह संगठन बड़ी यूनिट्स के बजाय छोटे-छोटे सेल्स के जरिए काम कर रहा है, जिन्हें ट्रैक करना बेहद कठिन होता है।

    बांग्लादेश में पैर पसारने की साजिश
    रिपोर्ट में कहा गया है कि AQIS दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में सक्रिय रहने के साथ-साथ अब बांग्लादेश में भी पैर पसार रहा है। संगठन अपने नए ऑपरेशनल सेल्स स्थापित करने के लिए बांग्लादेश में घुसने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि भारत पहले ही बांग्लादेश को आतंकी संगठनों के नेटवर्क को लेकर चेतावनी दे चुका है।

    आतंक फैलाने के लिए AI का इस्तेमाल
    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह खुलासा भी हुआ है आतंकवादी संगठन अब हाईटेक हो चुके हैं। रिपोर्ट में आतंकी संगठनों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, "आतंकी गुट बम बनाने की जानकारी और लक्ष्यों के चयन के लिए ChatGPT जैसे AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा ISIL-K जैसे संगठन तेजी से अपने संदेश को कई भाषाओं में अनुवाद करने के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।" यही नहीं ISIL जैसे संगठन 'बोटुलिनम टॉक्सिन' और 'साइनाइड' जैसे बायो विपन की तरफ भी आगे बढ़ रहे हैं जो बेहद खतरनाक हो सकते है।

    NIA ने 3 और आरोपियों पर कसा शिकंजा
    इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने लाल किले के पास हुए धमाके के मामले में तीन और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है। NIA ने जम्मू-कश्मीर के रहने वाले जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और मुजफर अहमद को आरोपी बनाया है। बता दें कि अब तक इस मामले में अब तक 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। इनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी शामिल हैं, जिसकी मौत हो चुकी है। फरार आरोपी मुजफर अहमद, एक डॉक्टर है और उसकी पहचान एक अन्य आरोपी डॉ अदील अहमद राथर के बड़े भाई और अल-कायदा से जुड़ी संस्था के संस्थापक के तौर पर हुई है।

  • झारखंड में गोशाला निर्माण पर CAG की आपत्ति, 15.96 करोड़ से बनीं 2540 अतिरिक्त गोशालाएं

    झारखंड में गोशाला निर्माण पर CAG की आपत्ति, 15.96 करोड़ से बनीं 2540 अतिरिक्त गोशालाएं

     रांची
     मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत राज्य में बनने वाले गोशाला निर्माण में नियमों का उल्लंघन करने पर सीएजी ने आपत्ति जताई है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित संख्या से अधिक गोशाला का निर्माण कराया गया है।

    नौ गोशाला में गायों की जगह पर लाभुक अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और एक गोशाला सामान रखने के उपयोग में लाया जा रहा है। कुछ गोशाला निर्माण में निर्धारित सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया है और भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया है।

    आडिट टीम की ओर से इसकी जानकारी विभाग को दी गई है, लेकिन विभाग की ओर से 2,540 अतिरिक्त गोशालाओं के निर्माण और निर्माण में निम्न स्तरीय सामग्री के उपयोग पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

    सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना (एमपीवीवाई) और मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच गोशालाओं का निर्माण किया जाना था, जिसमें जरूरतमंद लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जानी थी।

    जनवरी 2022 में सरकार की ओर से जारी योजना के मॉडल अनुमान के अनुसार, पांच गायों के लिए गौशाला निर्माण की अनुमानित लागत 1.51 लाख थी। ऑडिट टीम ने पांच जिलों की चुनिंदा ग्राम पंचायतों में परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पंचायतों की संख्या 51 होने के आधार पर केवल 255 गोशालाओं की आवश्यकता थी, लेकिन कुल 2,795 गोशालाओं का निर्माण किया गया।

    इसके परिणामस्वरूप 15.96 करोड़ की लागत से 2,540 अतिरिक्त गोशालाओं का निर्माण हुआ, जो विभागीय निर्देशों का उल्लंघन है। पांच जिलों की 19 ग्राम पंचायतों में 24 गोशालाओं का दिसंबर 2024 एवं फरवरी 2025 के दौरान भौतिक सत्यापन किया गया।

    पाकुड़ जिले में आठ और गुमला जिले में दो गोशाला में गाय रखने की बजाय अन्य कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। नौ गोशालाओं का उपयोग लाभार्थियों द्वारा आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

    वहीं, एक का उपयोग भंडारण के लिए किया जा रहा था। गुमला जिले में 2021-22 के दौरान निर्मित दो गोशालाओं में प्रविधानों के उल्लंघन करते हुए, छत के निर्माण के लिए जीसीआइ शीट के बजाय बांस या एस्बेस्टस शीट का उपयोग किया गया था, जबकि इसके निर्माण के लिए बांस या एस्बेस्टस की जगह जीआइ पाइप/जीसीआइ शीट के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया गया है।

     

  • GST केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कंपनी को आरोपी बनाए बिना निदेशक पर नहीं चलेगा मुकदमा

    GST केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कंपनी को आरोपी बनाए बिना निदेशक पर नहीं चलेगा मुकदमा

    चंडीगढ़
    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जीएसटी से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी पर कर अपराध का आरोप होने की स्थिति में केवल निदेशक को आरोपित बनाकर उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

    संबंधित कंपनी को भी मामले में आरोपित बनाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी के खिलाफ अभियोजन के बिना निदेशक पर केवल ‘प्रतिनिधिक जिम्मेदारी’ के आधार पर आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

    जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने यह टिप्पणी कंपनी के निदेशक मनोज बंसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने रोहतक के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित शिकायत और उससे जुड़ी आगे की पूरी कार्यवाही को रद कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने जीएसटी विभाग को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है।

    मामले के अनुसार, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआइ) गुरुग्राम की क्षेत्रीय इकाई को सूचना मिली थी कि संबंधित कंपनी कथित तौर पर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले रही है। सूचना के आधार पर कंपनी के पंजीकृत परिसर में तलाशी ली गई। जांच के दौरान खरीद से संबंधित बिल और परिवहन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।

    विभाग के अनुसार, जांच में सामने आया कि कंपनी ने ऐसी कई फर्जी या कागजी कंपनियों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने सामान की वास्तविक आपूर्ति किए बिना बिल जारी किए थे। जांच में ऐसी 31 संस्थाओं का उल्लेख किया गया। आरोप था कि कंपनी के निदेशक मनोज बंसल खुले बाजार से बिना बिल के नकद में लेड धातु खरीदते थे और वास्तविक खरीद के बजाय इन कथित फर्जी कंपनियों से बिल हासिल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेते थे।

    विभाग के अनुसार, इस तरीके से कंपनी ने करीब 15.44 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया। जीएसटी खुफिया विभाग ने हाईकोर्ट में मनोज बंसल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह केवल कंपनी के नाममात्र निदेशक नहीं थे, बल्कि कंपनी के कामकाज और जीएसटी से जुड़े मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे। विभाग ने उन्हें कथित लेनदेन का लाभार्थी और मुख्य कर्ताधर्ता भी बताया।

    हाईकोर्ट ने इस तथ्य को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना कि विभाग स्वयं यह स्वीकार कर रहा था कि कथित तौर पर 15.44 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट कंपनी ने लिया था। कंपनी को जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद 16 जनवरी 2025 को पारित आदेश के खिलाफ कंपनी ने धारा 107 के तहत अपील भी दाखिल की थी।

    अदालत ने कहा कि कर संबंधी कार्यवाही कंपनी के खिलाफ चल रही है। ऐसे में जब कथित अपराध कंपनी ने किया है और कंपनी को आपराधिक मामले में आरोपित ही नहीं बनाया गया, तो उसके निदेशक के खिलाफ प्रतिनिधिक जिम्मेदारी के आधार पर अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मनोज बंसल के खिलाफ लंबित शिकायत और उससे जुड़ी पूरी कार्यवाही रद कर दी।

  • पंजाब में AAP विधायक के बेटे की ‘कुरमाई’ में जुटे दिग्गज नेता, समारोह में दिखी सियासी जमघट

    पंजाब में AAP विधायक के बेटे की ‘कुरमाई’ में जुटे दिग्गज नेता, समारोह में दिखी सियासी जमघट

    जीरकपुर/मोहाली.

    सनौर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के बेटे हरजशन ढिल्लों की तरनजीत सिंह विर्क की बेटी शुभनूर विर्क के साथ कुरमाई (सगाई) हुई। रिंग सेरेमनी में पंजाब के कई बड़े नेता शामिल हुए।

    जीरकपुर में हुए इस कार्यक्रम में हरजशन और शुभनूर ने परिवार के सदस्यों और मेहमानों की मौजूदगी में एक-दूसरे को अंगूठी पहनाई।मेहमानों ने नव-मंगेतर जोड़े को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद भविष्य की कामना की। समारोह में पटियाला के पूर्व मेयर एवं कांग्रेस नेता संजीव बिट्टू ने भी शिरकत की।

    उन्होंने बाद में अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए जोड़े को बधाई दी। आप की ओर से पूर्व मंत्री एवं समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा भी समारोह में पहुंचे। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न जिला पदाधिकारी और संगठन से जुड़े नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

  • बिहारशरीफ में बनेगा 495 करोड़ का नया कोचिंग कॉम्प्लेक्स, गया रूट की ट्रेनों को मिलेगा फायदा

    बिहारशरीफ में बनेगा 495 करोड़ का नया कोचिंग कॉम्प्लेक्स, गया रूट की ट्रेनों को मिलेगा फायदा

     पटना
     पूर्व मध्य रेल के गया रूट से चलने वाली ट्रेनों के रखरखाव की व्यवस्था अब और बेहतर होने वाली है। पूर्व मध्य रेल के प्रस्ताव पर रेलवे बोर्ड ने बिहारशरीफ में नया कोचिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की मंजूरी दे दी है।

    राजेंद्र नगर कोचिंग कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर विकसित किए जाने वाले इस परिसर में ट्रेनों की सफाई, धुलाई, जांच और आवश्यक मरम्मत की सुविधा उपलब्ध होगी।

    इससे गया रूट की ट्रेनों को रखरखाव के लिए पटना लाने की जरूरत कम होगी। रेलवे ने नए कोचिंग कॉम्प्लेक्स के लिए बिहारशरीफ और पावापुरी के बीच स्थान का चयन किया है।

    इससे पहले शेखपुरा और बिहारशरीफ में परिसर बनाने के विकल्प पर विचार किया गया था। सर्वे और परिचालन संबंधी जरूरतों को देखते हुए बिहारशरीफ को उपयुक्त पाया गया।

    परियोजना पर करीब 495 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। बजट उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और रेलवे का लक्ष्य इसे करीब दो वर्ष में तैयार करने का है।

    गया रूट की ट्रेनों को मिलेगा स्थानीय रखरखाव केंद्र
    अभी गया रूट की कई ट्रेनों की सफाई और अनुरक्षण के लिए उन्हें राजेंद्र नगर कोचिंग कॉम्प्लेक्स लाया जाता है। ट्रेन को निर्धारित स्थान तक लाने और वापस भेजने में समय के साथ-साथ परिचालन संसाधनों की भी खपत होती है।

    बिहारशरीफ में नया परिसर तैयार होने के बाद ट्रेनों का रखरखाव उसी क्षेत्र के नजदीक किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के खाली परिचालन में कमी आएगी और उपलब्ध समय का बेहतर इस्तेमाल होगा।

    बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या, परिचालन होगा आसान
    गया रूट पर पिछले कुछ समय में ट्रेनों की संख्या और परिचालन का दबाव बढ़ा है। पटना से नवादा तक सीधी रेल कनेक्टिविटी विकसित होने से इस पूरे क्षेत्र का पटना से संपर्क भी मजबूत हुआ है।

    रेल अधिकारियों के अनुसार नवादा से बिहारशरीफ की दूरी करीब 31 किलोमीटर और बिहारशरीफ से पटना की दूरी लगभग 79 किलोमीटर है।

    दोनों को मिलाकर करीब 110 किलोमीटर की दूरी रेल से तय की जा सकेगी। ऐसे में बिहारशरीफ में कोचिंग कॉम्प्लेक्स बनने से इस पूरे रेल नेटवर्क को परिचालन स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद है।

    यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ
    नया कोचिंग काम्प्लेक्स बनने से ट्रेनों की समय पर सफाई और अनुरक्षण की क्षमता बढ़ेगी। कोचों की नियमित जांच और मरम्मत स्थानीय स्तर पर होने से रेक को जल्दी सेवा में वापस लाने में मदद मिलेगी।

    इसका सीधा असर ट्रेन संचालन की विश्वसनीयता पर पड़ेगा और भविष्य में गया, नवादा, बिहारशरीफ और पटना क्षेत्र के बीच अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन के लिए भी आधारभूत ढांचा तैयार होगा।

    रेलवे की योजना के अनुसार, आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह परिसर पूर्व मध्य रेल के इस महत्वपूर्ण रेलखंड के लिए एक प्रमुख अनुरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।