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  • हरियाणा में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी तय, राज्यपाल यमुनानगर तो CM सैनी हांसी में फहराएंगे तिरंगा

    हरियाणा में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी तय, राज्यपाल यमुनानगर तो CM सैनी हांसी में फहराएंगे तिरंगा

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में स्वतंत्रता दिवस पर राज्य स्तरीय समारोह यमुनानगर में होगा, जहां राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ध्वजारोहण करेंगे। नए जिले हांसी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि होंगे। जिला मुख्यालयों और उपमंडल स्तर के कार्यक्रमों के लिए सरकार ने मंत्रियों और सांसद-विधायकों की ड्यूटी लगा दी है।

    कांग्रेस के बागी विधायकों शैली चौधरी को नारायणगढ़, मोहम्मद इलियास को पुन्हाना, मोहम्मद इजरायल को हथीन और जरनैल सिंह को रतिया में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी दी गई है। खंड और पंचायत स्तर पर भी ध्वजारोहण कार्यक्रम होंगे। सभी जगह ध्वजारोहण के लिए सुबह नौ बजे का समय निर्धारित किया गया है। शाम को हरियाणा लोकभवन में एट होम कार्यक्रम होगा।

    यह माननीय करेंगे ध्वजारोहण –
    जिला -मुख्य अतिथि

    • अंबाला – अनिल विज, ऊर्जा मंत्री
    • भिवानी – सुभाष बराला, सांसद
    • चरखी दादरी -रेखा शर्मा, सांसद
    • फरीदाबाद -विपुल गोयल, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री
    • फतेहाबाद -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री
    • गुरुग्राम -डा. कृष्ण लाल मिढा, विधानसभा उपाध्यक्ष
    • हिसार – नवीन जिंदल, सांसद
    • झज्जर -आरती सिंह राव, स्वास्थ्य मंत्री
    • जींद -संजय भाटिया, सांसद
    • कैथल -कृष्ण कुमार, सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्री
    • करनाल -रणबीर गंगवा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री
    • कुरुक्षेत्र -हरविंदर कल्याण, विधानसभा अध्यक्ष
    • नारनौल -धर्मबीर सिंह, सांसद
    • नूंह -कार्तिकेय शर्मा, सांसद
    • पलवल -गौरव गौतम, युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता मंत्री
    • पंचकूला – श्रुति चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री
    • पानीपत -कृष्ण लाल पंवार, विकास एवं पंचायत मंत्री
    • रेवाड़ी – राजेश नागर, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री
    • राेहतक -अरविंद कुमार शर्मा, सहकारिता मंत्री
    • सिरसा -श्याम सिंह राणा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
    • सोनीपत -राव नरबीर सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री
  • बिहार में शराबबंदी पर सरकार सख्त, जब्त शराब के ब्रांड की कंपनी पर होगा केस

    बिहार में शराबबंदी पर सरकार सख्त, जब्त शराब के ब्रांड की कंपनी पर होगा केस

    पटना
    बिहार में शराबबंदी पर उठ रहे सवालों के बीच सम्राट चौधरी सरकार और सख्त हो गई है। राज्य में शराब की अवैध बिक्री और तस्करी को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब जिस ब्रांड की शराब जब्त की जाएगी, उसे बनाने वाली कंपनी पर भी केस किया जाएगा। इस संबंध में मद्य निषेध अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून में किसी तरह का संशोधन नहीं होने वाला है।

    मंत्री ने कहा कि बिहार में यदि किसी कंपनी की विदेशी शराब जब्त होती है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। उस कंपनी के मालिक को मुकदमे में घसीटा जाएगा। मदन सहनी ने कहा कि इसकी शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में पटना में शराब की खेप पकड़ी गई थी, उसमें कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई।

    पटना स्थित जदयू कार्यालय में गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान मदन सहनी ने कहा कि शराब की तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। कानून तोड़ने वाला कोई भी व्यक्ति हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
    शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत नहीं

    बिहार में शराबबंदी कानून पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने साफ किया है कि इसमें किसी तरह के बदलाव या समीक्षा की अभी जरूरत नहीं है। मद्य निषेध मंत्री के अनुसार, विभाग द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जा रही है। पिछले महीने ही समीक्षा की गई।

    जदयू कार्यालय में प्रेस वार्ता करते मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी
    उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल से बिहार में शराबबंदी कानून लागू है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेहतर ढंग से इसे लागू किया था। इसमें पूरे बिहार के लोगों के हित को ध्यान में रखा गया। उनकी मंशा थी कि परिवार में रहने वाली महिलाओं, दलित, आदिवासी और अति पिछड़ा वर्ग के लोगों का भला हो सके। मंत्री ने दावा किया कि सरकार को इसमें बहुत हद तक सफलता भी मिली है।

    मदन सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दिहाड़ी कमाने वाले लोग पहले अपनी कमाई का आधा से ज्यादा हिस्सा नशे में खर्च कर देते थे। वे घर खाली हाथ लौटते थे। शराबबंदी कानून लागू होने के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

    शराब जब्ती में तेजी आई- मंत्री
    उन्होंने दावा किया कि अवैध शराब की जब्ती के काम में लगातार तेजी आ रही है। पिछली बार के मुकाबले इस साल ज्यादा मात्रा में शराब जब्त की गई। सूखे नशे के खिलाफ भी लगातार छापेमारी की जा रही है।

  • LPG e-KYC नहीं कराई तो लगेगा बड़ा झटका! 969 रुपये वाला सिलेंडर अब 1800 रुपये में मिलेगा

    LPG e-KYC नहीं कराई तो लगेगा बड़ा झटका! 969 रुपये वाला सिलेंडर अब 1800 रुपये में मिलेगा

    लुधियाना.

    केंद्रीय पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के तहत लुधियाना एल.पी.जी. गैस फैडरेशन के समूचे डीलर भाईचारे द्वारा एजेंसियों से संबंधित उपभोक्ताओं को अपनी ई-के.वाई.सी. करवाने संबंधी समय-समय पर जागरूक करने और घर-घर तक प्रचार करने सहित कई बार निशुल्क कैंप तक लगाए गए।

    बावजूद इसके अपनी गैस कनेक्शन की ई-के.वाई.सी. नहीं करवाने वाले उपभोक्ताओं की अब 15 अगस्त के बाद शामत आने वाली है। ताजा जानकारी के मुताबिक ई-के.वाई.सी. नहीं करवाने वाले उपभोक्ताओं को 969 रुपए वाले घरेलू गैस सिलेंडर के 15 अगस्त के बाद 1800 रुपए के करीब चुकाने पड़ेंगे। लुधियाना एल.पी.जी. गैस फैडरेशन के प्रधान मनजीत सिंह, महासचिव अरुण अग्रवाल, उप प्रधान रणजीत सिंह गांधी, कुलदीप कुमार जंडा, गौरव हांडा और अमित कुमार थम्मन ने कहा कि इंडेन गैस कंपनी, हिंदुस्तान गैस कंपनी और भारत गैस कंपनी से संबंधित प्रत्येक एजेंसियों के डीलरों द्वारा ई-के.वाई.सी. करवाने के लिए रविवार को छुट्टी होने के बावजूद भी कार्यालय खोले गए। लेकिन उपभोक्ता अपनी ई-के.वाई.सी. करवाने के लिए आगे नहीं आए हैं।

    ऐसे सभी उपभोक्ताओं को अब 15 अगस्त के बाद 14.2 किलो ग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर खरीदने के लिए अब करीब 1800 रुपए चुकाने पड़ेंगे वहीं बार-बार जागरूक करने के बावजूद लापरवाही अपनाने वाले उपभोक्ताओं के गैस कनेक्शन भी रद्द किए जाएंगे।

  • चीन की चाल नाकाम! केंद्र ने ‘कैंसर के खतरे’ वाले हर्बिसाइड पर लगाया बैन, किसानों के लिए बड़ा फैसला

    चीन की चाल नाकाम! केंद्र ने ‘कैंसर के खतरे’ वाले हर्बिसाइड पर लगाया बैन, किसानों के लिए बड़ा फैसला

     नई दिल्ली

    दुनिया की प्रमुख एग्रो-केमिकल कंपनियों को अक्सर यह गलतफहमी रहती है कि वे विदेशी प्रमाणपत्रों के सहारे भारतीय बाजार में कोई भी खरपतवारनाशक (Herbicide) आसानी से लॉन्च कर सकती हैं. हालांकि, केंद्र सरकार की सख्ती ने इस भ्रम को तोड़ दिया है. वैश्विक एग्रो-केमिकल दिग्गज सिंजेंटा (Syngenta) के नए खरपतवारनाशक 'एस-मेटोलाक्लोर टेक्निकल 96%' (s-Metolachlor) को भारत में रेगुलेटरी मंजूरी पाने के प्रयासों में बड़ा झटका लगा है. यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और चूहों पर हुए परीक्षणों में ट्यूमर के खतरे को देखते हुए सरकार ने सिंजेंटा के आवेदन पर रोक लगा दी है। 

    सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कंपनी यह पूरी तरह से साबित नहीं कर देती कि यह केमिकल भारतीय गांवों के भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा और इंसानों के स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, तब तक इसे भारतीय कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी. उल्लेखनीय है कि सिंजेंटा का स्वामित्व वर्तमान में चीन की सरकारी कंपनी सिनोकेम होल्डिंग्स (Sinochem Holdings) के पास है। 

    यह फैसला केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत काम करने वाली रजिस्ट्रेशन कमेटी (RC) की बैठक में लिया गया है. देश में किसी भी नए कीटनाशक या खरपतवारनाशक के आयात, उत्पादन या बिक्री के लिए लाइसेंस और सर्टिफिकेट जारी करने का जिम्मा इसी कमेटी के पास होता है. केंद्रीय कृषि आयुक्त इस संस्था के प्रमुख होते हैं। 

    जब भी कोई कंपनी नए केमिकल की मंजूरी के लिए आवेदन करती है, तो रजिस्ट्रेशन कमेटी उसके दावों की बारीकी से पड़ताल करती है. इस जांच में मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि संबंधित केमिकल इंसानों, मवेशियों और पर्यावरण के लिए कितना सुरक्षित है. सुरक्षा के सभी कड़े मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही किसी रसायन को भारत में इस्तेमाल की हरी झंडी दी जाती है। 

    सिंजेंटा भारत में 'एस-मेटोलाक्लोर' नाम का रसायन आयात कर बेचना चाहती है, जिसका इस्तेमाल खेतों में खरपतवार खत्म करने के लिए किया जाता है. कंपनी का दावा है कि यह बेहद आधुनिक तकनीक पर आधारित दवा है. पुराने हर्बिसाइड्स की तुलना में इसकी केवल 60% खुराक (40% कम छिड़काव) ही काफी है, जिससे किसानों की लागत घटेगी और खेतों पर रसायनों का बोझ भी कम होगा. अपने आवेदन को मजबूत बनाने के लिए सिंजेंटा ने तर्क दिया कि अमेरिका, जापान और कनाडा जैसे विकसित देश इसे पहले ही मंजूरी दे चुके हैं, तो भारत में इसे क्यों रोका जाए?

    हालांकि, जब भारत सरकार की तकनीकी समिति ने इस केमिकल के दस्तावेजों और रिपोर्टों की गहराई से समीक्षा की, तो दो ऐसे गंभीर खतरे उजागर हुए जिन्होंने कंपनी के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए। 

    चूहों को ट्यूमर 
    इस दवा का चूहों पर परीक्षण किया गया, तो उनके लीवर में ट्यूमर बन गईं. इस पर सिंजेंटा के एक्सपर्ट्स ने दलील दी कि यह ट्यूमर सिर्फ चूहों को होता है, इंसानों को इससे कुछ नहीं होगा. समिति ने इस दावे को सिरे से खारिज कर द‍िया। 

    कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी को ठोस वैज्ञानिक आंकड़े पेश करके यह साबित करना होगा कि इस रसायन का इंसानों की सेहत पर असर नहीं पड़ेगा. इस विषय पर खबर प्रकाशित करने से पहले सिंजेंटा के भारतीय प्रबंधन से उनका आधिकारिक रुख जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. बहरहाल, एक तरह से यह संकेत साफ है कि सरकार रसायनों से होने वाले कैंसर जैसे गंभीर जोखिमों को लेकर बेहद सतर्क है। 

    ऐसे में इस प्रोडक्ट को भारतीय बाजार में उतारने के लिए कंपनी को यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना होगा कि जिस केमिकल के संपर्क से चूहों में ट्यूमर विकसित हुआ, वह भारतीय किसानों और खेत-मजबूरों के लिए घातक साबित नहीं होगा। 

    इसके अतिरिक्त, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बड़ी आबादी पीने के पानी के लिए हैंडपंपों और भूजल पर निर्भर है, वहां 'एस-मेटोलाक्लोर' जलस्रोत को दूषित या विषैला नहीं बनाएगा, इसका एक विस्तृत सुरक्षा प्लान और पुख्ता प्रमाण कंपनी को लिखित रूप में देना होगा, इसके बाद ही भारत के कृषि क्षेत्र में इसके इस्तेमाल पर विचार किया जाएगा। 

    यूरोप के लिए जहर, भारत में क्यों हो इस्तेमाल
    रजिस्ट्रेशन कमेटी ने कंपनी के इस वैश्विक प्रभाव को सिरे से खारिज कर दिया. अधिकारियों ने साफ शब्दों में सवाल उठाया कि यदि यह रसायन इतना ही असरदार और सुरक्षित है, तो यूरोपीय संघ (EU) ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों लगाया है? यूरोप की प्रयोगशालाओं में हुए शोध से यह बात सामने आई है कि यह केमिकल जमीन में रिसकर भूजल को दूषित करता है। 

    इसके संपर्क में आने से कैंसर का जोखिम रहता है और यह मानव व अन्य जीवों के डीएनए (DNA) को भी नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में जब तक सिंजेंटा इन सभी बिंदुओं पर वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती, तब तक इस दवा को भारतीय बाजार और खेतों में उतरने की अनुमति नहीं मिलेगी। 

    सरकार का दृष्टिकोण एकदम स्पष्ट है जो केमिकल यूरोप के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है, उसे भारत में इस्तेमाल की मंजूरी कतई नहीं दी जा सकती। 

    सेहत पहले, मुनाफा बाद में
    रजिस्ट्रेशन कमेटी ने फिलहाल 'एस-मेटोलाक्लोर' के आवेदन को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है. सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कह दिया है कि जब तक कंपनी यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं कर देती कि यह रसायन भारत के जलस्रोतों को सुरक्षित रखेगा और इसमें कैंसर का कोई जोखिम नहीं है, तब तक देश में इसकी एक भी बोतल बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

    यह कड़ा रुख इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए किसी भी रसायन का 'डंपिंग ग्राउंड' नहीं बनेगा. कंपनियों को भारतीय बाजार से मुनाफा कमाने से पहले यहां के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के कड़े मानकों पर खरा उतरना ही होगा. हालांकि, इस फैसले के बाद यह सवाल भी लाजिमी है कि ग्लाइफोसेट जैसे अन्य विवादित केमिकल्स को लेकर सरकार ऐसी ही सख्ती क्यों नहीं दिखाती?

  • JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, 24 अभ्यर्थियों से हुई थी सेटिंग की डील

    JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, 24 अभ्यर्थियों से हुई थी सेटिंग की डील

    रांची
    जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है। उसने बताया है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में सेटिंग कराने के लिए सबसे पहले उससे रांची का धुर्वा निवासी संतोष जुड़ा और फिर एक-एक कर 24 संपर्क में आ गए।

    बुद्धेश्वर भगत से संतोष अक्सर कहता था कि काफी कोशिश के बावजूद उसकी नौकरी नहीं लग रही है। कोई परीक्षा में सेटिंग कराने वाला मिलेगा तो बताएंगे। संतोष के बाद उसके माध्यम से धनबाद का कपिल व रांची के बरियातू का रमेश बुद्धेश्वर के संपर्क में आया।

    तीनों ही अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए कुल 24 अभ्यर्थियों का नाम दिए थे। इन सभी के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र को गारंटी के तौर पर बुद्धेश्वर के नामकुम स्थित कार्यालय में पहुंचाया गया था। इन सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को बुद्धेश्वर ने अभय तिवारी के कहे अनुसार अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय व बिजनेस पार्टनर उमेश कुमार को दिया था।

    परीक्षा के तीन दिन पहले कुल 24 अभ्यर्थियों में से 11 ने कुल 1.10 करोड़ रुपये दिए थे। उसने यह राशि दो बार में सौरभ व उमेश तक पहुंचा दिया था। बाकी 13 अभ्यर्थियों की ओर से पैसा नहीं मिलने पर उनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र वापस कर दिया था।

    उक्त परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों में कपिल कुमार महतो व संतोष कुमार शामिल थे। ये अभ्यर्थी व एजेंट दोनों भूमिका में थे। वहीं एजेंट कपिल की तरफ वह स्वयं भी था और उसके अलावा दिलीप कुमार राणा, ओम प्रकाश राणा व पवन कुमार मुंडा शामिल थे। रांची के बरियातू निवासी एजेंट रमेश ने राकी सचिन लकड़ा, मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा व उमाकांत उरांव का नाम दिया था।

    पीटी के बाद मुख्य परीक्षा के पहले ली जानी थी 50 प्रतिशत राशि
    बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने सीआइडी को बताया कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में उसने 11 अभ्यर्थियों 1.10 करोड़ रुपये ले लिया था। प्रारंभिक परीक्षा के बाद व मुख्य परीक्षा से ठीक पहले कुल तय राशि की 50 प्रतिशत राशि अभ्यर्थियों से ली जानी थी।

    इससे पहले ही जालसाजी का भंडाफोड़ हो गया। जानकारी मिली कि जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता की जांच की जिम्मेदारी सीआइडी ने ले ली है। इसके बाद ही अभ्यर्थियों ने मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र वापस करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

    इसके बाद ही बुद्धेश्वर ने अभय तिवारी के साले सौरभ कुमार व उमेश कुमार से संपर्क किया। एक अगस्त को उमेश बनारस से बस से रांची आया, जिसे बुद्धेश्वर व सौरभ ने उसे अपने साथ लिया और सभी रामगढ़ चले गए।

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग तेज

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग तेज

     चंडीगढ़
     सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के कार्यकाल की 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों को वैध ठहराए जाने के बाद प्रदेश में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का मुद्दा फिर गरमा गया है।

    कर्मचारी संगठनों ने नायब सिंह सैनी सरकार पर नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाने और लंबे समय से अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का दबाव बढ़ा दिया है।

    भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2014 में तीन नियमितीकरण नीतियां बनाई थीं। 16 जून 2014 की पॉलिसी में 30 जून 2014 तक तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को निर्धारित शर्तों के तहत नियमित करने का प्रविधान था।

    18 जून 2014 की पॉलिसी में 17 जून 1997, पांच नवंबर 1999 तथा एक अक्टूबर 2003/10 फरवरी 2004 से संबंधित बचे मामलों पर विचार का प्रविधान किया गया था।

    इन दोनों नीतियों के अलावा सात जुलाई 2014 की पॉलिसी में 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का प्रविधान किया गया था। इन नीतियों के तहत दो दर्जन से अधिक विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों और विश्वविद्यालयों में करीब पांच हजार कर्मचारी नियमित किए गए थे।

    हाईकोर्ट के फैसले से अटकी थी प्रक्रिया
    योगेश त्यागी ने तीनों नीतियों को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूपी 17206/2014 दायर की थी। हाईकोर्ट ने 31 मई 2018 को तीनों नीतियों को अवैध करार देते हुए रद कर दिया था।

    इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी 31566/2018 दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर को स्टे दिया और बाद में 16 अप्रैल को अपने फैसले में 16 जून और 18 जून 2014 की नीतियों को वैध, जबकि सात जुलाई 2014 की नीति को असंवैधानिक करार दिया।

    इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह है कि जिन कर्मचारियों को वैध ठहराई गई दोनों नीतियों के तहत नियमित किया गया था, उनकी नियमित नियुक्तियों को कानूनी आधार मिल गया है। वहीं सात जुलाई की नीति के तहत नियमित होने वाले कर्मचारियों की संख्या नगण्य बताई गई है, क्योंकि हाईकोर्ट में चुनौती के बाद इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

    सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन के लिए विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों और विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। सात जुलाई की नीति के तहत नियमित हुए कर्मचारियों को भी नौकरी की सुरक्षा देते हुए न्यूनतम वेतन देने के आदेश दिए गए हैं।

    अब नई पॉलिसी पर टिकी निगाहें
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारी संगठन इसे नई नियमितीकरण नीति के लिए महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री और महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने कहा कि कर्मचारियों को केवल जाब सिक्योरिटी नहीं, बल्कि नियमितीकरण चाहिए और इसके लिए निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।

    अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि फैसले के बाद सरकार के सामने रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाने की कोई कानूनी अड़चन नहीं है। उन्होंने हरियाणा कौशल रोजगार निगम को भंग कर उसमें पंजीकृत 1.20 लाख कर्मचारियों, अनुबंध शिक्षकों तथा अन्य पार्ट टाइम और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की अविलंब नीति बनाने की मांग की।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर

    • 16 जून 2014 की नियमितीकरण नीति वैध
    • 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति वैध
    • 7 जुलाई 2014 की नीति असंवैधानिक
    • वैध नीतियों के तहत नियमित हुए कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा

    अब सरकार के सामने प्रमुख मांगें

    • नई नियमितीकरण नीति घोषित हो
    • 1.20 लाख एचकेआरएन कर्मियों पर फैसला हो
    • अनुबंध शिक्षकों और अन्य कच्चे कर्मचारियों को नियमित किया जाए
    • पंजाब सिक्योरिटी के बजाय नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
  • बिहार में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, 14 से 17 अगस्त तक झमाझम बारिश

    बिहार में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, 14 से 17 अगस्त तक झमाझम बारिश

     पटना
     प्रदेश के मौसम में लगातार बदलाव की स्थिति बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवा के कारण वातावरण में नमी बढ़ने से बादलों की आवाजाही बनी हुई है। कई इलाकों में बादल बनने के साथ रूक-रूक कर वर्षा हो रही है। दिन में धूप के कारण उमस का प्रभाव बना हुआ है।

    मौसम विज्ञान केंद्र पटना के Bihar Weather Forecast के अनुसार, शुक्रवार से प्रदेश में वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि के आसार हैं। 14-17 अगस्त के बीच राज्य के कई जिलों में झमाझम वर्षा के साथ मेघ गर्जन की चेतावनी जारी की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र बना हुआ है। गुरुवार को इसके लो प्रेशर एरिया में बदलने के आसार हैं।

    इनके प्रभाव से शुक्रवार से मौसम में बदलाव के आसार हैं। पटना सहित प्रदेश के नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय आदि जिलों में मेघ गर्जन, वज्रपात के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी है।

    गुरुवार को पटना सहित 17 जिलों में मेघ गर्जन, वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की गई है। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी व छिटपुट वर्षा की संभावना है।

    गया और समस्तीपुर को छोड़ कर पटना सहित शेष जिलों के अधिकतम तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। पटना का अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस एवं 37.8 डिग्री सेल्सियस के साथ वाल्मीकि नगर में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया।

    प्रमुख शहरों में वर्षा की स्थिति
    औरंगाबाद के गोह में 35.6 मिमी, गया में 32 मिमी, नवादा के अकबरपुर में 30.2 मिमी, औरंगाबाद के मदनपुर में 25.4 मिमी, रोहतास के बिक्रमगंज में 25 मिमी, औरंगाबाद के रफीगंज में 16.4 मिमी, बक्सर के राजपुर में 16.4 मिमी, गया के बांके बाजार में 15.4 मिमी, लखीसराय के चानन में 14.4 मिमी, गया के आमस में 12.2 मिमी, बक्सर में 10.6 मिमी, रोहतास के दिनारा में 9.6 मिमी, भोजपुर के सहर में 9.2 मिमी, रोहतास के नोखा में 9 मिमी, अरवल के करपी में 8.6 मिमी, पटना के मोकामा में 8.2 मिमी, अरवल के कुर्था में आठ मिमी, बांका के चंदन में आठ मिमी, अरवल के किंजर में 7.6 मिमी, रोहतास के राजपुर में 7.4 मिमी, भोजपुर के कोइलवर में सात मिमी एवं अरवल में 6.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

     

  • NEET UG 2026: छात्र के अंक 520 से घटकर 85 हुए, पंजाब-हरियाणा HC ने NTA से मांगा रिकॉर्ड

    NEET UG 2026: छात्र के अंक 520 से घटकर 85 हुए, पंजाब-हरियाणा HC ने NTA से मांगा रिकॉर्ड

    चंडीगढ़.

    नीट-यूजी 2026 की परीक्षा में ओएमआर शीट और अंक को लेकर एक और विवाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया है कि पहले उसकी ओएमआर शीट के आधार पर 720 में से 520 अंक बने थे, लेकिन बाद में उसका परिणाम बदलकर केवल 85 अंक कर दिया गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अभ्यर्थी की मूल ओएमआर शीट और दोनों स्कोर कार्ड सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ के समक्ष नीट-यूजी अभ्यर्थी दीक्षा देवी की याचिका पर सुनवाई हुई। गुरदासपुर की 19 वर्षीय छात्रा के वकील ने बताया कि एनटीए की वेबसाइट पर दो अलग-अलग स्कोर कार्ड अपलोड किए गए।

    720 में से 85 अंक दर्शाए गए
    इनमें से एक में अभ्यर्थी के 720 में से 85 अंक दर्शाए गए, जबकि पहले अपलोड किए गए स्कोर कार्ड में उसके 520 अंक थे। वकील ने आरोप लगाया कि एनटीए ने उसकी ओएमआर शीट भी बदल दी।दूसरी ओर, एनटीए की ओर से अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से दी गई शिकायत पर पहले ही निर्णय लिया जा चुका है। उन्होंने 27 जुलाई को इस संबंध में भेजे गए ईमेल की प्रति भी अदालत के समक्ष रखी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मूल ओएमआर शीट और दोनों स्कोर कार्ड सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया। याचिका में दीक्षा देवी ने बताया कि एनटीए ने 13 जुलाई को वेबसाइट पर उसकी ओएमआर शीट अपलोड की थी और इसी के साथ उत्तरों में सुधार के लिए करेक्शन विंडो भी उपलब्ध कराई गई थी।

    17 जुलाई को प्राप्त हुई ओएमआर शीट
    ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों का आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान करने पर उसने अपना स्कोर 720 में से 520 अंक निकाला था। हालांकि, 16 जुलाई को नीट का परिणाम घोषित होने पर उसके अंक केवल 85 दिखाए गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, 17 जुलाई को उसे एनटीए से एक और ओएमआर शीट प्राप्त हुई। दोनों ओएमआर शीट में अभ्यर्थी के अन्य विवरण समान थे, लेकिन उनमें अंकित उत्तर अलग-अलग थे। उसके मुताबिक दूसरी ओएमआर शीट में ऐसे उत्तर दर्ज थे, जिनके आधार पर उसके केवल 85 अंक बनते थे।इसके बाद उसने एनटीए के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। 19 जुलाई को एनटीए की ओर से मिले ईमेल में उसके 520 अंक बताए गए।

    ईमेल के साथ दी गई मार्कशीट में भी 720 में से 520 अंक ही दर्ज थे। इसके बाद वह अपने परिवार के साथ 20 जुलाई को एनटीए कार्यालय पहुंची और ओएमआर शीट तथा परिणाम में अंतर को लेकर लिखित शिकायत दी। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसके बाद उसका परिणाम फिर 520 अंक कर दिया गया, लेकिन 27 जुलाई को उसे दोबारा बदलकर 85 अंक कर दिया गया। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। अब अदालत के समक्ष मूल ओएमआर शीट और दोनों स्कोर कार्ड पेश किए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोनों दस्तावेजों में अंकों का इतना बड़ा अंतर कैसे सामने आया।

  • पटना में जाम से मिलेगी राहत, डाक बंगला से रुकनपुरा तक चौड़ी होगी नेहरू पथ

    पटना में जाम से मिलेगी राहत, डाक बंगला से रुकनपुरा तक चौड़ी होगी नेहरू पथ

    पटना
    राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने की दिशा में पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) ने एक बड़ा कदम उठाया है।

    डाक बंगला चौराहा से रुकनपुरा तक नेहरू पथ (बेली रोड) का चौड़ीकरण कराया जाएगा। इस कार्य पर 39.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    विभाग के नूतन राजधानी रोड डिवीजन की ओर से इस कार्य को मानसून अवधि सहित नौ माह में पूरा कराया जाएगा। इस योजना के पूरा होने से पटना के सबसे व्यस्ततम और मुख्य मार्गों में से एक नेहरू पथ पर आवागमन काफी सुचारू हो जाएगा और रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी।

    नेहरू रोड पर मेट्रो का निर्माण कार्य बड़े स्तर पर हो रहा है। इससे सड़क का बड़ा हिस्सा इसकी जद में आ गया है। इसका ध्यान रखते हुए सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है, ताकि ट्रैफिक का परिचालन सुचारू ढंग से हो सके। चौड़ीकरण कार्य के लिए निविदा जारी कर दी गई है।

    चारदीवारी को पीछे कर बनाई जाएगी जगह
    नूतन राजधानी रोड डिवीजन के कार्यपालक अभियंता ईं. अभिषेक कुमार ने बताया कि वर्तमान में नेहरू पथ की चौड़ाई अलग-अलग हिस्सों में लगभग 20 मीटर से 40-45 मीटर तक है।

    योजना के तहत सड़क के दोनों तरफ जहां भी सरकारी जमीन उपलब्ध होगी, वहां कम से कम तीन से 3.5 मीटर चौड़ी एक अतिरिक्त लेन निकालने का लक्ष्य रखा गया है।

    सड़क चौड़ीकरण की राह में किसी भी सरकारी या निजी भवन को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। केवल परिसर की बाउंड्री वाल (चारदीवारी) को पीछे हटाकर जगह निकाली जाएगी।

    इसके तहत कोतवाली थाना और मौर्य लोक कॉम्प्लेक्स सहित अन्य सरकारी संस्थानों की बाउंड्री को पीछे करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, जहां रैयती (निजी) जमीन आएगी, वहां यह विस्तार नहीं किया जाएगा।

    मेट्रो कार्य वाले क्षेत्रों को छोड़कर होगा काम
    नियोजन भवन के पास भी सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव था, लेकिन वहां फिलहाल मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। इसलिए मेट्रो प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी उपलब्ध स्थानों पर ही चौड़ीकरण का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। विभाग से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

     

  • राजस्थान पंचायत चुनाव: 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख, जयपुर-जोधपुर में पद अनारक्षित

    राजस्थान पंचायत चुनाव: 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख, जयपुर-जोधपुर में पद अनारक्षित

    जयपुर
    राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है। जयपुर में गुरुवार को 41 जिला परिषदों के जिला प्रमुख पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। प्रक्रिया के दौरान महिला आरक्षण के नियम को लेकर विवाद भी हुआ। करीब 25 मिनट तक लॉटरी रोकनी पड़ी। अधिकारियों ने संबंधित नियमों और एक्ट का परीक्षण करने के बाद स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद दोबारा लॉटरी शुरू की गई।

    लॉटरी में सीकर समेत 20 जिला परिषदों के जिला प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं जयपुर और जोधपुर में जिला प्रमुख का पद अनारक्षित (ओपन) रखा गया है। इसका मतलब है कि इन दोनों जिलों में किसी भी वर्ग का उम्मीदवार जिला प्रमुख बन सकता है।

    लॉटरी की प्रक्रिया जेएलएन मार्ग स्थित पंचायती राज संस्थान में हुई। पंचायती राज सचिव जोगाराम की अध्यक्षता में आरक्षण तय किया गया। लॉटरी के लिए एक बच्ची को बुलाया गया, जिसने बारी-बारी से पर्चियां निकालीं।

    जिला प्रमुख आरक्षण की पूरी सूची
    आरक्षण की प्रक्रिया के दौरान हर संभाग से एक महिला जिला प्रमुख बनाए जाने के फॉर्मूले को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद कुछ देर के लिए लॉटरी रोक दी गई। अधिकारियों ने नियमों और संबंधित एक्ट की जांच की तथा आपत्ति कर रहे लोगों को प्रावधानों की जानकारी दी। स्थिति स्पष्ट होने के बाद वे संतुष्ट हुए और आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    इन जिलों में महिला जिला प्रमुख
    आरक्षण के अनुसार भरतपुर, धौलपुर, अलवर, कोटा, श्रीगंगानगर, अजमेर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, चूरू, हनुमानगढ़, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक, सलूंबर, फलौदी, डीग और ब्यावर में जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित है।

    लॉटरी के बाद कई जिला परिषदों में आरक्षण की स्थिति पिछली बार से बदल गई है। जयपुर और जोधपुर पहले महिला के लिए आरक्षित थे, लेकिन इस बार दोनों को अनारक्षित रखा गया है। अजमेर और बीकानेर में भी इस बार महिला आरक्षण आया है। वहीं सीकर में ओबीसी महिला, अलवर में एसटी महिला और प्रतापगढ़ तथा सलूंबर में एसटी महिला के लिए पद आरक्षित किया गया है।

    18 अगस्त को सरपंच-वार्ड पंचों की लॉटरी
    पंचायती राज चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। 18 अगस्त को एसडीएम स्तर पर ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण तय होगा। पंचायत समिति प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी जिला कलक्टर स्तर पर अलग से होगी।

    पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण एससी, एसटी और ओबीसी सहित संबंधित श्रेणियों में भी लागू होगा।