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  • झारखंड में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को NIOS से पढ़ाएगी सरकार, 29 अगस्त तक आवेदन

    झारखंड में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को NIOS से पढ़ाएगी सरकार, 29 अगस्त तक आवेदन

     रांची
    समग्र शिक्षा अभियान के तहत छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित करना है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे पारिवारिक एवं सामाजिक कारणों से स्कूल से बाहर हैं।

    उनकी मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा पूरी नहीं हो पा रही है। अब सरकार ने ऐसे बच्चों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (NIOS) से मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई दूरस्थ माध्यम से कराने का निर्णय किया है।

    पारिवारिक एवं सामाजिक कारणों से स्कूल से बाहर रह रहे 14 से 16 वर्ष के बच्चों का नामांकन मैट्रिक में होगा। वहीं, 16 से 18 वर्ष के बच्चों का नामांकन इंटरमीडिएट में लिया जाएगा, बशर्ते वे मैट्रिक उत्तीर्ण हों। परीक्षा उत्तीर्ण होने पर उन्हें एनआइओएस का प्रमाणपत्र मिलेगा।

    झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिए हैं। ऐसे बच्चे नामांकन के लिए आवेदन 29 अगस्त तक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में दे सकेंगे।

    परिषद ने अभिभावकों एवं अन्य नागरिकों से भी ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें नामांकन के लिए प्रेरित करने तथा बच्चों की जानकारी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में संचालित विद्या समीक्षा केंद्र के टाल फ्री नंबर 0651-2710007 पर देने का अनुरोध किया है।

    माध्यमिक स्तर पर 6.6 प्रतिशत बच्चे छोड़ देते हैं स्कूल
    झारखंड में प्राथमिक स्तर पर बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर तो बहुत कम है, लेकिन उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर यह अधिक है। उच्च प्राथमिक स्तर पर यह दर 2.5 तथा माध्यमिक स्तर पर 6.6 प्रतिशत है। इतने बच्चे स्कूल छोड़ने के कारण क्रमश: मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते।

    इसे ध्यान में रखते हुए ऐसे बच्चों की पहचान कर एनआइओएस से उनकी पढ़ाई कराने का निर्णय किया गया है। बताते चलें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2030 तक माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • एम्स पटना में पहली बार जीवित दाता से लिवर ट्रांसप्लांट, 18 घंटे चली जटिल सर्जरी

    एम्स पटना में पहली बार जीवित दाता से लिवर ट्रांसप्लांट, 18 घंटे चली जटिल सर्जरी

    पटना
     एम्स पटना ने लिवर प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार लाइव डोनर (जीवित दाता) से लिवर प्रत्यारोपण किया गया है।

    बीते शुक्रवार को गैस्ट्रो सर्जरी विभाग की टीम ने 18 घंटे की जटिल प्रक्रिया के बाद प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक पूरा किया। दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल की टीम के निर्देशन में यह सफल प्रत्यारोपण हुआ।

    लाइव डोनर से लिवर प्रत्यारोपण को लेकर एम्स पटना में लंबे समय से तैयारी चल रही थी। इस सफलता के साथ संस्थान में लिवर प्रत्यारोपण की सुविधा को एक नई दिशा मिली है।

    हालांकि, मरीज और डोनर की स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में संस्थान की ओर से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। संस्थान की ओर से इस उपलब्धि को लेकर 17 अगस्त को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसमें प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, मरीज और डोनर की वर्तमान स्थिति तथा टीम की भूमिका के संबंध में जानकारी दी जाने की उम्मीद है।

    एक वर्ष पहले कैडेवर डोनर से हुआ था प्रत्यारोपण
    एम्स पटना में इससे पहले सितंबर 25 में कैडेवर डोनर से दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल के प्रसिद्ध लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ प्रो. सुभाष गुप्ता की टीम एवं एम्स, पटना गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. उत्पल आनंद की टीम ने सफल लिवर प्रत्यारोपण किया था।

    उस मरीज की स्थिति बेहतर बताई जा रही है। लाइव डोनर से पहला सफल लिवर प्रत्यारोपण होने के बाद संस्थान में गंभीर लिवर रोग से पीड़ित मरीजों के लिए उपचार के विकल्प और मजबूत होने की उम्मीद है।

    दाता की भी होती है जटिल सर्जरी
    लाइव डोनर लिवर प्रत्यारोपण में मरीज के साथ दाता की भी जटिल सर्जरी होती है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जरी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और अन्य विशेषज्ञ टीमों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होता है।

     

  • हजारीबाग में 17 अगस्त से जनजातीय गौरव उत्सव, महिला उद्यमियों को मिलेगा मंच

    हजारीबाग में 17 अगस्त से जनजातीय गौरव उत्सव, महिला उद्यमियों को मिलेगा मंच

     रांची
    जनजातीय संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हजारीबाग में 17 से 24 अगस्त 2026 तक जनजातीय गौरव उत्सव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन बड़ा अखाड़ा ठाकुरबाड़ी परिसर, हजारीबाग में होगा।

    कार्यक्रम का आयोजन महादेव स्मारक खादी ग्रामोद्योग मंडल, रांची के सहयोग तथा बिरसा मुंडा जन कल्याण योजना प्रचार अभियान के माध्यम से किया जा रहा है। आयोजन को भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय की प्रोक्योरमेंट मार्केटिंग सपोर्ट स्कीम के तहत सहयोग प्राप्त है।

    यह जानकारी डॉ. अनिल कुमार ने गुरुवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि जनजातीय गौरव उत्सव का उद्घाटन 17 अगस्त को शाम तीन बजे होगा। उद्घाटन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी एवं सांसद मनीष जायसवाल करेंगे। कार्यक्रम का समापन पूर्व सांसद समीर उरांव करेंगे।
    उन्होंने बताया कि उत्सव का उद्देश्य विशेष रूप से जनजातीय एवं महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना, उनकी कला-संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना तथा केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना है। उत्सव में छोटे एवं महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए नि:शुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इनमें हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, पेंटिंग, जनजातीय चित्रकला, पापड़, अचार, हस्तनिर्मित उत्पादों सहित अन्य स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पाद शामिल होंगे। पीएमएस योजना के तहत चयनित पात्र उद्यमियों को स्टॉल शुल्क के साथ-साथ निर्धारित नियमों के अनुसार यात्रा एवं अन्य पात्र खर्च की प्रतिपूर्ति सीधे उनके बैंक खाते में किए जाने का प्रावधान है।

    प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
    उत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में विशेष आकर्षण के रूप में वीआर तकनीक के माध्यम से भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा 18 से 22 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक लक्ष्मी प्रिया माता जी द्वारा श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा।।

    कार्यक्रम परिसर में विशेष गैलरी एवं कला प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें जनजातीय नायकों, जनजातीय संस्कृति और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने वाली प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उत्सव में भाग लेने वाली महिला उद्यमियों को प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया जाएगा।

    इसके अलावा लगभग 100 जनजातीय महिला उद्यमियों को विशेष रूप से मंच पर सम्मानित किए जाने की योजना है। प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय अभियान प्रमुख राजमणि, प्रदेश अध्यक्ष राम किशोर सावंत समेत अन्य लोग मौजूद थे।

  • मेक्सिको में फंसे पंजाबी का दर्द आया सामने, बोले- ‘डंकी रूट से विदेश जाने की भूल मत करना’

    मेक्सिको में फंसे पंजाबी का दर्द आया सामने, बोले- ‘डंकी रूट से विदेश जाने की भूल मत करना’

    अमृतसर.

    विदेश जाने की चाह में जोखिम भरे रास्ते का सहारा लेने वाले पंजाब के एक सिख युवक का दर्द सोशल मीडिया पर सामने आया है। मेक्सिको में फंसे इस युवक का रोते हुए वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। करीब 33 सेकंड के वीडियो में युवक बिस्तर पर लेटा दिखाई दे रहा है और हाथ जोड़कर लोगों से उसकी जैसी गलती नहीं करने की अपील कर रहा है।

    युवक के अनुसार वह डंकी रूट के जरिए मेक्सिको पहुंचा था। वहां से आगे निकलने की कोशिश के दौरान उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। युवक का दावा है कि मारपीट के बाद उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा। वीडियो में वह काफी डरा और परेशान नजर आ रहा है।

    लोगों से की भावुक अपील
    युवक वीडियो में लोगों से अपील करता दिखाई देता है कि वे किसी एजेंट के झांसे में आकर डंकी रूट से विदेश जाने की कोशिश न करें। उसने अपनी स्थिति को लेकर लोगों को सावधान किया और कहा कि विदेश पहुंचने का सपना कभी-कभी बेहद मुश्किल हालात में बदल सकता है। युवक ने भावुक होकर अपनी गलती स्वीकार की। उसने बताया कि जिस व्यक्ति की मदद से वह मेक्सिको तक पहुंचा, वह भी वीडियो में उसके सामने मौजूद है। युवक की बातों से उसकी परेशानी और डर साफ नजर आ रहा है।

    वीडियो पर किए जा रहे कई दावे
    बताया जा रहा है कि यह वीडियो 13 अगस्त को एक टिकटॉक खाते से प्रसारित किया गया था। इसके बाद कई लोगों ने इसे अन्य इंटरनेट मीडिया मंचों पर साझा किया। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि गुरुद्वारे की मदद से चलने वाले डंकी रूट के जरिए मेक्सिको पहुंचे कुछ युवक वहां फंस गए हैं और उनके लिए प्रार्थना की जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखने वाला युवक पंजाब में कहां से है और उनकी पहचान क्या है, की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। दैनिक जागरण इंटरनेट मीडिया पर किए जा रहे इन दावों की पुष्टि नहीं करता है। फिलहाल वीडियो में युवक की अपील जोखिम भरे और अवैध रास्तों से विदेश जाने के खतरों को जरूर सामने लाती है।

  • बांदीकुई को मिलेगी जाम से राहत, 25 करोड़ की नंदेरा-पीचूपाड़ा लिंक रोड जल्द शुरू

    बांदीकुई को मिलेगी जाम से राहत, 25 करोड़ की नंदेरा-पीचूपाड़ा लिंक रोड जल्द शुरू

     दौसा
    दौसा जिले के बांदीकुई में बढ़ते यातायात दबाव और जाम से राहत दिलाने की दिशा में नंदेरा-पीचूपाड़ा लिंक रोड महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। करीब साढ़े 8 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। विधायक भागचंद सैनी टांकड़ा के विजन के तहत प्रस्तावित सड़क का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और कंस्ट्रक्शन कंपनी को टेंडर जारी किया गया है। अब वर्क ऑर्डर जारी करने की तैयारी है।

    बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में कार्य आदेश जारी हो सकते हैं। यह सड़क केवल दो स्थानों को जोड़ने वाली लिंक रोड नहीं होगी, बल्कि दौसा जिले के बांदीकुई शहर के लिए संभावित बाइपास के रूप में भी काम करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ शहर के यातायात प्रबंधन में भी बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

    9 माह में पूरा करने का लक्ष्य, 70 मीटर का पुल भी बनेगा
    लिंक रोड का निर्माण करीब 9 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क पर 7 मीटर चौड़ाई में डामरीकरण होगा और यह डबल लाइन की होगी। मार्ग में करीब 70 मीटर लंबा पुल भी बनाया जाएगा। सड़क बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के आवागमन को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ बांदीकुई शहर को बायपास का विकल्प मिलेगा।

    मुआवजा प्रक्रिया के साथ चलता रहेगा निर्माण
    सड़क के करीब साढ़े 5 किलोमीटर हिस्से के लिए मुआवजा प्रक्रिया अभी बाकी है। विभाग संबंधित भूमि मालिकों को धारा 19 के तहत मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया पूरी करेगा। मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस हिस्से में निर्माण आगे बढ़ेगा। वहीं करीब 3 किलोमीटर हिस्सा सरकारी जमीन में है, जहां जल्द काम शुरू किया जा सकता है

    पहले सरकारी जमीन वाले हिस्से में काम की तैयारी
    पीडब्ल्यूडी की योजना है कि पहले करीब 3 किलोमीटर सरकारी जमीन वाले हिस्से में निर्माण शुरू कर दिया जाए। इसी दौरान शेष साढ़े 5 किलोमीटर हिस्से के लिए मुआवजा प्रक्रिया समानांतर रूप से चलती रहेगी। इससे भूमि संबंधी प्रक्रिया के कारण पूरे प्रोजेक्ट के काम में देरी होने की संभावना कम होगी।

    दर्जनभर से ज्यादा गांवों को मिलेगा सीधा फायदा
    नंदेरा से शुरू होने वाली लिंक रोड अनन्तवाडा, हरिपुरा, भांडेड़ा, कांच की ढाणी, पामाड़ी, सुनगाड़ी, झंझा की ढाणी और आमली होते हुए पीचूपाड़ा तक पहुंचेगी। इससे आसपास के दर्जनभर से अधिक गांवों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।

    शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत कम होगी
    नई सड़क बनने के बाद इन क्षेत्रों के लोगों को बडियाल कलां, बैजूपाड़ा, मंडावर और कठूमर मेगा हाईवे तक पहुंचने के लिए सीधा वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। वाहनों को बांदीकुई शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरने के बजाय बाइपास के जरिए अलवर-सिकंदरा मेगा हाईवे तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। इससे शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव और जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

    आचार संहिता से पहले शिलान्यास की तैयारी
    टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब वर्क ऑर्डर जारी होने का इंतजार है। यदि प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ी तो चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग नंदेरा-पीचूपाड़ा लिंक रोड का शिलान्यास कर सकता है।

    शीघ्र हो सकेगा निर्माण कार्य शुरू
    नंदेरा-पिचूपाड़ा लिंक रोड का शीघ्र शिलान्यास हो सकेगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। भूमि अधिग्रहण की तैयारियां भी जोरो पर है। इस लिंक रोड के निर्माण पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह सड़क मार्ग न केवल कई गांवों को जोड़ेगी, बल्कि बांदीकुई शहर के यातायात को भी नया विकल्प देगी। ऐसे में आने वाले समय में यह लिंक रोड क्षेत्र की कनेक्टिविटी और यातायात व्यवस्था के लिहाज से अहम साबित होगी।
    -राजू बैरवा, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी बांदीकुई

     

  • बिहार के 18 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति पदक, इंस्पेक्टर अफसर हुसैन को वीरता सम्मान

    बिहार के 18 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति पदक, इंस्पेक्टर अफसर हुसैन को वीरता सम्मान

    पटना
     केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर वीरता, सराहनीय सेवा और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक विजेताओं की घोषणा कर दी है। इस साल बिहार के 18 पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों को यह पदक मिलेंगे। इनमें एक को वीरता पदक, दो को विशिष्ट और 15 को सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिलेंगे। चयनित अधिकारियों और जवानों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। पटना पुलिस के बेऊर थाने में तैनात बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर अफसर हुसैन को वीरता पुरस्कार (मेडल फॉर गैलेंट्री) से नवाजा गया है। पिछले साल इस अवसर पर 15 पुलिस कर्मियों को राष्ट्रपति पुरस्कार दिया गया था।

    लिस्ट देखें-
    विशेष शाखा में तैनात आईजी संजय कुमार- विशिष्ट सेवा पदक

    मुजफ्फरपुर की रेल एसपी बीना कुमारी- विशिष्ट सेवा पदक
    सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक इन्हें मिलेगा-

    निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में तैनात डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा

    एसपी इम्तियाज अहमद

    इंस्पेक्टर इरशाद आलम

    एसआई राजेश कुमार सिंह

    एएसआई मुकेश कुमार सिंह

    एसआई संतोष क्षेत्री

    हवलदार शंभूनाथ सिंह

    हवलदार संतोष अल्ले मगर

    हवलदार रूपेश थापा

    एएसआई लवकुश कुमार

    एएसआई अमिताभ गिरी

    एएसआई आनंद प्रकाश

    सिपाही तपन गुरूंग

    सिपाही छत्र बहादुर थापा

    संतोष कुमार ठाकुर

    क्यों दिया जाता है राष्ट्रपति पदक
    हमारे देश में हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस पुरस्कार की घोषणा की जाती है। इसके तहत पुलिस, अग्निशमन सेवा, होम गार्ड, नागरिक सुरक्षा और सुधार सेवाओं के विशिष्ट और सराहनीय कार्यों के लिए चयनित अफसरों और कर्मियों को यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है। इसमें असाधारण वीरता और बहादुरी का प्रदर्शन करने के लिए वीरता पदक का पुरस्कार दिया जाता है। इन पदकों की शुरुआत 1 मार्च 1951 को हुई थी। राष्ट्रपति पुरस्कार किसी अफसर या कर्मी के लिए नहीं बल्कि, पूरे बिहार पुलिस महकमे के लिए गौरव और सम्मान का विषय होता है। पिछले स्वतंत्रता दिवस की तुलना में इस बात तीन मेडल अधिक मिले हैं। इससे बिहार पुलिस का जोश हाई है।

    राष्ट्रपति पदक वाने वाले निगरानी ब्यूरो डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा ने बतौर डीएसपी अपनी सेवा की शुरुआत की थी। झारखंड की उपराजधानी दुमका में उन्हें पहली पोस्टिंग मिली थी। पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में ढाई दशक के सराहनीय सेवा के बाद उन्हें अवार्ड मिला है। इंस्पेक्टर मोहम्मद अफसर हुसैन को अपराधियों के खिलाफ साहसिक ऑपरेशन चलाने और खतरनाक अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए यह पदक दिया जा रहा है। फिलहाल वह बेऊर थाने में तैनात हैं।

  • पंजाब पुलिस की हिरासत से आरोपी फरार, लापरवाही पर ASI निलंबित

    पंजाब पुलिस की हिरासत से आरोपी फरार, लापरवाही पर ASI निलंबित

    फतेहगढ़ साहिब.

    फतेहगढ़ साहिब के मंडी गोबिंदगढ़ में चोरी के आरोप में पकड़े गए एक व्यक्ति के पुलिस हिरासत से फरार होने के मामले में विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने फरार आरोपित को दोबारा 24 घंटे में गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में ASI जगरूप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

    मामला मंडी गोबिंदगढ़ के मोहल्ला शाम नगर का है। पुलिस के अनुसार विकास नगर निवासी पवन कुमार को मोहल्ला शाम नगर स्थित एक घर में चोरी करते हुए स्थानीय लोगों ने रंगे हाथों पकड़ लिया था। इसके बाद लोगों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस आरोपित को थाने लेकर पहुंची, लेकिन इसी दौरान वह पुलिस को चकमा देकर हिरासत से फरार हो गया।

    लापरवाही पर हुई कार्रवाई
    आरोपित के फरार होने की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल उसकी तलाश शुरू कर दी। इसके साथ ही हिरासत से भागने के संबंध में आरोपित के खिलाफ अलग से मामला दर्ज किया गया। पुलिस टीमों ने कार्रवाई करते हुए पवन कुमार को दोबारा गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी अमलोह बिक्रमजीत सिंह ने बताया कि आरोपित के पुलिस हिरासत से फरार होने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में एएसआई जगरूप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

  • Punjab के बॉर्डर इलाकों में पुलिस का सख्त पहरा, चप्पे-चप्पे पर हो रही चेकिंग

    Punjab के बॉर्डर इलाकों में पुलिस का सख्त पहरा, चप्पे-चप्पे पर हो रही चेकिंग

    जालंधर.

    स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए बॉर्डर रेंज पुलिस ने रेड अलर्ट नाकाबंदी मुहिम चलाई। बॉर्डर रेंज के DIG हरमनबीर सिंह गिल, IPS के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान सभी सीमावर्ती जिलों में एक साथ नाकाबंदी कर संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की गई।

    यह विशेष अभियान शाम तक सभी जिलों में एक साथ चलाया गया। DIG हरमनबीर सिंह गिल खुद मैदान में उतरे और विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। उन्होंने नाकों पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए। अभियान के दौरान सभी गजटेड अधिकारी, थाना प्रभारी और यूनिट प्रभारी खुद नाकों पर मौजूद रहे। पुलिस टीमों ने जिलों के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट, प्रमुख चौकों, पुलों, बाईपास और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष चेकिंग प्वाइंट बनाए। यहां आने-जाने वाले वाहनों की तलाशी लेने के साथ-साथ संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ भी की गई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य नशा तस्करी, संगठित अपराध और अन्य आपराधिक नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना है। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क है।

  • हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक का किया विरोध, राष्ट्रपति-पीएम को लिखा पत्र

    हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक का किया विरोध, राष्ट्रपति-पीएम को लिखा पत्र

     रांची
     मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक,2026 के विरोध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। साथ ही उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर इसपर हस्तक्षेप करने तथा विरोध में सहयोग का अनुरोध किया है।

    राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में हेमंत ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के अंतर्गत एमएमडी आर अधिनियम में धारा 9-डी जोड़े जाने का प्रविधान किया गया है, जिसके अनुसार राज्य सरकारें खनिज अधिकारों अथवा खनिज वहन भूमि पर किसी प्रकार का कर, उपकर (सेस) अथवा अन्य लेवी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन ही लगा सकेंगी। साथ ही कुछ परिस्थितियों में पूर्व में लगाए गए ऐसे उपकरों के बकाया दावों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यह विषय विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मिनरल एरिया डवलपमेंट अथारिटी बनाम स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड मामले में यह स्पष्ट किया था कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के अंतर्गत राज्यों को खनिज वहन भूमि पर कर अथवा उपकर लगाने का अधिकार प्राप्त है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी माना कि खनिज का मूल्य अथवा उत्पादन ऐसे कर निर्धारण का आधार हो सकता है। हेमंत के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के इसी निर्णय के आधार पर झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनर लबेयरिंग लैंड सेस अधिनियम, 2024 पारित किया तथा उसके अंतर्गत नियम अधिसूचित किए।

    यह कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं था बल्कि राज्य विधानमंडल द्वारा संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप बनाया गया कानून था। इस कानून का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह नहीं, बल्कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण आधारभूत संरचना तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए संसाधन उपलब्ध कराना था।

    हेमंत के अनुसार, यदि यह संशोधन प्रभावी होता है और राज्य की उपकर लगाने की शक्ति सीमित अथवा समाप्त होती है तो झारखंड को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है।

    इससे राज्य की विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विशेषकर आदिवासी समुदायों को विस्थापन, भूमि से वंचित होने, पर्यावरणीय क्षति, प्रदूषण, पारंपरिक आजीविकाओं के नुकसान तथा सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इस विधेयक के संवैधानिक, संघीय, वित्तीय एवं सामाजिक प्रभावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। बता दें कि इस बिल के विरोध में झामुमो महाआंदोलन की तैयारी भी कर रहा है

  • गुरुग्राम में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, 25 किलोमीटर सड़क क्षेत्र से हटाए 100 शेड और 150 ढांचे

    गुरुग्राम में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, 25 किलोमीटर सड़क क्षेत्र से हटाए 100 शेड और 150 ढांचे

    गुुरुग्राम
     गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए ) ने बृहस्पतिवार को न्यू गुरुग्राम क्षेत्र में लगभग 25 किलोमीटर तक अतिक्रमित सड़क क्षेत्र को मुक्त कराया। इस कार्रवाई के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर 10 से 20 फुट तक के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू ) को खाली कराया गया। अभियान के चौथे दिन जीएमडीए की इन्फोर्समेंट टीमों ने लगभग 100 शेड और 150 अस्थायी ढांचों को हटाया।

    इनमें अवैध खोखे, रैंप, सड़क किनारे दुकानें, सर्विस स्टेशन, नर्सरी, झुग्गियां, बाउंड्रीवाल और अन्य अवैध निर्माण शामिल थे,जो सार्वजनिक आवागमन में बाधा बन रहे थे। इस कार्रवाई को कई स्थानों पर स्थानीय निवासियों और यात्रियों का समर्थन भी मिला, क्योंकि वे लोग लंबे समय से अतिक्रमण के कारण यातायात जाम से परेशान थे और पैदल व वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी।

    इन्फोर्समेंट टीमों ने न्यू गुरुग्राम, विशेषकर सेक्टर 58 से 80 तक के क्षेत्रों फोकस किया । इससे पहले तीन दिनों तक यह अभियान मुख्य रूप से ओल्ड गुरुग्राम और सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर ) पर केंद्रित रहा था।

    जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ ) पीसी मीणा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि मुक्त कराई गई सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित और उपयोगी बनाए रखना भी है। उन्होंने कहा कि राइट आफ वे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, आवागमन और पैदल चलने के लिए होता है, इसे निजी या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं होने दिया जा सकता।

    सेक्टर 61, 62, 63 और 63ए में चार किमी क्षेत्र मुक्त
    सेक्टर 61, 62, 63 और 63ए की विभाजक सड़कों पर जीएमडीए टीमों ने लगभग चार किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 20 फुट तक के आरओडब्ल्यू को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस कार्रवाई में लगभग 60 शेड, सार्वजनिक भूमि पर चल रही अवैध सब्जी मंडी, झुग्गियां, 15 अवैध खोखे और एक सर्विस स्टेशन हटाए गए। अधिकारियों ने यह भी पाया कि पिछले छह महीनों में अतिक्रमण हटाकर विकसित किए गए ग्रीन बेल्ट में फिर से अतिक्रमण हो गया था। यहां लगाए गए लगभग 15 अवैध साइनबोर्ड भी हटाए गए।

    सेक्टर 58–61 में चार किमी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया
    एक अन्य कार्रवाई में सेक्टर 58, 59, 60 और 61 में लगभग चार किलोमीटर सड़क क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
    इस दौरान 25 खोखे, 40 रैंप और 2 शेड हटाए गए। अधिकारियों के अनुसार कई रैंप दस फुट तक आरओडब्ल्यू में घुस आए थे, जिससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई थी।