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  • तंबुओं से पक्के मकानों तक, गांधी कैंप ने देखी विस्थापितों की संघर्षगाथा

    तंबुओं से पक्के मकानों तक, गांधी कैंप ने देखी विस्थापितों की संघर्षगाथा

    रोहतक
    मैं गांधी कैंप हूं। आज मेरे आसपास पक्के मकान, बाजार और शहर की रफ्तार दिखाई देती है, लेकिन मेरी कहानी उन परिवारों से शुरू होती है जो वर्ष 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान से उजड़कर यहां पहुंचे थे। उनके पास अपना पुराना घर नहीं था, भविष्य की कोई निश्चित तस्वीर नहीं थी। शुरुआत तंबुओं और राहत शिविरों से हुई। काहनौर में जमीन आवंटित होने के बाद कई परिवार वर्ष 1960 में रोहतक के जवाहर नगर और मेरे हिस्से में आकर बस गए। फिर 33-33 गज के पक्के मकान बनने लगे। इन छोटी-छोटी छतों के नीचे लोगों ने सिर्फ घर नहीं बसाए, बल्कि अपनी अगली पीढ़ियों का भविष्य भी गढ़ना शुरू किया।

    तंबुओं की जगह मकानों ने ली
    मैंने अपने लोगों को अभाव से जूझते देखा है। शुरुआती दिनों की अस्थायी जिंदगी धीरे-धीरे स्थायी ठिकाने में बदली। तंबुओं की जगह पक्के मकान खड़े हुए। इन्हीं घरों के आसपास बाजार विकसित हुआ और परिवारों की मेहनत ने मेरी पहचान बदलनी शुरू कर दी। आज के घने बसे इलाके के पीछे उन्हीं परिवारों की लंबी मेहनत है, जिन्होंने उजड़ने के बाद फिर से खड़ा होना सीखा।

    जब बांस का पुल शहर की राह था
    गांधी कैंप बाजार के पास रोहतक-पानीपत-गोहाना रेलवे लाइन के निकट कभी बांस का पुल था। वर्ष 1962 में इस मार्ग पर रेलगाड़ी चलनी शुरू हुई। हिसार रोड के पास पुराना बस अड्डा था। जहां आज डीएलएफ क्षेत्र दिखाई देता है, वहां तब गिने-चुने मकान थे। मेरे आसपास का शहर धीरे-धीरे फैल रहा था और मैं भी उसके साथ बदल रहा था।

    मटकों में आता था पानी, चारों ओर दिखते थे बाग
    पूर्व पार्षद अशोक खुराना बताते हैं कि अशोका चौक के पास जनस्वास्थ्य विभाग के जलघर से पक्की नालियों के जरिए पानी आता था और लोग मटकों में भरकर ले जाते थे। सर्कुलर रोड के दोनों ओर अमरूद के बाग थे।

    पुलिसकर्मी साइकिल से गश्त करते थे और पगड़ी उनकी वर्दी का हिस्सा थी। आज का सेक्टर-1 और सेक्टर-14 तब जंगल जैसे थे। दिल्ली रोड भी महज नौ-दस फीट चौड़ी थी। मैंने उसी छोटे रोहतक को फैलते देखा है, जिसकी नई पहचान मेरी गलियों में बसे उन विस्थापित परिवारों की मेहनत ने गढ़ी।

  • Chandigarh News: 12,752 फ्लैट्स आवंटियों पर बेदखली का खतरा, किस्त बकाया होने से बढ़ी चिंता

    Chandigarh News: 12,752 फ्लैट्स आवंटियों पर बेदखली का खतरा, किस्त बकाया होने से बढ़ी चिंता

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने छोटे फ्लैट्स और किफायती आवासीय परिसरों में रहने वाले 12,752 आवंटीज पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। किस्त बकाया रहने की वजह से सीएचबी कभी भी सख्त फैसला ले सकता है। इसके लिए सूची भी जारी कर दी है।

    सीएचबी के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे फ्लैट योजना के तहत 11,317 आवासीय इकाइयों, जबकि मलोया स्थित किफायती किराये के आवासीय परिसरों (एआरएचसी) की 1,435 इकाइयों का किराया 31 जुलाई 2026 तक बकाया है। ये आवास सेक्टर-49, सेक्टर-56, सेक्टर-38 पश्चिम, धनास, औद्योगिक क्षेत्र फेज-1, मौलीजागरां, मलोया और रामदरबार समेत विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं।
    सीएचबी ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस डीड के तहत आवंटीज को प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक लाइसेंस शुल्क जमा करना अनिवार्य है। इसके लिए अलग से मांग पत्र जारी नहीं किया जाता। देरी से भुगतान पर 12 प्रतिशत सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज भी लगाया जा रहा है। लाइसेंस डीड की धाराओं 2 और 12 के तहत भुगतान शर्तों का उल्लंघन करने पर बोर्ड को लाइसेंस रद्द करने का अधिकार है। ऐसे में बकाया राशि जमा नहीं करने वाले परिवारों की आवासीय सुविधा समाप्त की जा सकती है।

    401 रुपये से लेकर 2.45 लाख तक बकाया
    जारी सूची में बकाया राशि में काफी अंतर है। कुछ आवंटीज पर महज 401 रुपये बकाया हैं, जबकि कई मामलों में यह राशि बढ़कर करीब 2.45 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बोर्ड ने सभी निवासियों से तत्काल बकाया किस्त जमा करने की अपील की है, ताकि बेदखली जैसी कार्रवाई से बचा जा सके। छोटे फ्लैट और एआरएचसी योजनाएं शहर के कामकाजी वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कम लागत पर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थीं। इन आवासों का आवंटन लाइसेंस आधारित व्यवस्था के तहत किया गया था, जिसमें लाभार्थियों को हर महीने निर्धारित किराया देना होता है।

    करीब 90 आवंटन पहले ही रद
    सीएचबी ने हाल ही में किस्त नहीं देने के कारण स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 और एआरएचसी योजना के करीब 90 लाभार्थियों का आवंटन रद किया है। अब बड़ी संख्या में बकायेदारों की सूची सामने आने के बाद उन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

  • Punjab में T20 लीग का आगाज 30 अगस्त से, 6 टीमों के बीच होगी कांटे की टक्कर

    Punjab में T20 लीग का आगाज 30 अगस्त से, 6 टीमों के बीच होगी कांटे की टक्कर

    चंडीगढ़.

    पंजाब क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में पहली बार आईपीएल की तर्ज पर शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को लीग का ऐलान किया। छह टीमों वाली यह प्रतियोगिता 30 अगस्त से 13 सितंबर तक मोहाली स्थित पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) स्टेडियम में खेली जाएगी।

    लीग में पंजाब के कई स्टार क्रिकेटर भी हिस्सा लेंगे। भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल फाजिल्का फाल्कन्स, अर्शदीप सिंह लुधियाना लायंस, अभिषेक शर्मा अमृतसर सूरमाज, प्रभसिमरन सिंह जालंधर वारियर्स, रमनदीप सिंह मोहाली किंग्स और गुरनूर बराड़ बठिंडा रॉयल्स की ओर से खेलेंगे।

    शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग में शामिल छह क्रिकेट टीमों के नाम:

    • फाजिल्का फाल्कन्स (कप्तान: शुभमन गिल)
    • लुधियाना लायंस (कप्तान/खिलाड़ी: अर्शदीप सिंह)
    • अमृतसर सूरमाज (कप्तान/खिलाड़ी: अभिषेक शर्मा)
    • जालंधर वारियर्स (कप्तान/खिलाड़ी: प्रभसिमरन सिंह)
    • मोहाली किंग्स (कप्तान/खिलाड़ी: रमनदीप सिंह)
    • बठिंडा रॉयल्स (कप्तान/खिलाड़ी: गुरनूर बराड़)

    450 खिलाड़ियों का पूल तैयार
    मुख्यमंत्री ने बताया कि लीग के लिए पंजाब के 450 से अधिक खिलाड़ियों का पूल तैयार किया गया है, जिनकी नीलामी नौ अगस्त को होगी। इनमें अनमोलप्रीत सिंह, मयंक मार्कंडे, नमन धीर, विहान मल्होत्रा, इमांजोत सिंह चहल, अश्वनी कुमार और कृष्ण भगत जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। प्रत्येक टीम राउंड-रॉबिन आधार पर आठ लीग मैच खेलेगी।

    स्टार खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका
    भगवंत मान ने कहा कि पंजाब ने हमेशा देश को बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। टूर्नमेंट में पंजाब के करीब 21 खिलाड़ी खेल रहे हैं। शेर-ए-पंजाब लीग से युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल नशे के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार हैं। सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में 3,100 से अधिक खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और 'खेड़ां वतन पंजाब दियां' का आयोजन भी किया जा रहा है। इस मौके पर पीसीए अध्यक्ष अमरजीत मेहता, सचिव गुरमीत सिंह मीत हेयर और उपाध्यक्ष दीपक बाली ने मुख्यमंत्री को लीग के लोगो वाली टी-शर्ट भेंट की। भारतीय क्रिकेटरों अभिषेक शर्मा, अर्शदीप सिंह, प्रभसिमरन सिंह और रमनदीप सिंह ने भी मुख्यमंत्री को क्रिकेट बैट और गेंद भेंट की।

  • बिहार में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर बनेंगे बाइपास, केंद्र ने कई परियोजनाओं को दी मंजूरी

    बिहार में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर बनेंगे बाइपास, केंद्र ने कई परियोजनाओं को दी मंजूरी

     पटना
    बिहार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Trasnport and Highways) एक दर्जन से अधिक जगहों पर बाइपास का निर्माण करा रहा है।

    कई नए स्थानों पर भी बाइपास निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही पथ निर्माण विभाग भी कई जगहों पर नए बाइपास का निर्माण कराएगा।

    नाबार्ड के साथ पथ निर्माण विभाग ने ऋण को लेकर जिस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है, उसका इस्तेमाल भी बड़ी संख्या में बाइपास के निर्माण के लिए किया जाएगा।

    इन बाइपास का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं के तहत किया जाना है।

    केंद्र की राशि से इन जगहों पर बनेगा बाइपास
    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अरवल में एनएच-139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज मार्ग पर 12 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाइपास के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

    इसी तरह जमुई के झाझा में मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोना, नरगंजो तथा पश्चिम चंपारण में भैरोगंज बाइपास के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई है।

    इन जगहों पर बाइपास निर्माण का काम चल रहा
    वहीं, एनएच पर कई जगहों पर बाइपास निर्माण का काम चल रहा है। इनमें छपरा व रिविलगंज बाइपास, आरा बाइपास, बक्सर-चौसा बाइपास, शेखपुरा बाइपास का न‍िर्माण होगा।

    इसी तरह जमुई, खैरा, कटोरिया, बांका, पंजवारा व लखपुरा बाइपास, रानीगंज बाइपास, औरंगाबाद व दाउदनगर बाइपास, पूर्णिया बाइपास तथा मधुबनी, बेनीपट्टी व उच्चैठ बाइपास शामिल हैं।

    प्रगति यात्रा में नीतीश ने कई जगहों पर बाइपास की घोषणा की थी
    तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान प्रदेश के कई स्थानों पर बाइपास निर्माण की घोषणा की थी। नाबार्ड से मिलने वाली ऋण राशि से इन परियोजनाओं पर काम होना है।

    आरा के पीरो को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए बाइपास बनाया जाना है। पटना के बिहटा और मनेर में भी बाइपास का निर्माण होना है।

    इसके अलावा मधुबनी व जयनगर, गोपालगंज व मीरगंज, फारबिसगंज व अररिया, किशनगंज, सुपौल व त्रिवेणीगंज, नवादा व हिसुआ तथा सीतामढ़ी व शिवहर आदि जगहों पर पथ निर्माण विभाग के स्तर से बाइपास का निर्माण कराया जाना है।

  • पाकिस्तान छोड़ा, सात दिन पैदल चले, मेहनत से पानीपत में बनाई पहचान

    पाकिस्तान छोड़ा, सात दिन पैदल चले, मेहनत से पानीपत में बनाई पहचान

    पानीपत
    पुरुषार्थी हैं… कमाकर खाएंगे। बंटवारे के समय मात्र 12 वर्ष की आयु में पाकिस्तान के मिंटगुंबरी से सब कुछ छोड़कर भारत आए वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता कैलाश चंद अनेजा के पिता द्वारा कहे गए ये शब्द आज भी उनके संघर्ष की कहानी बयां करते हैं। विभाजन के दौर में उन्होंने परिवार के साथ जो झोला, वह रोंगटे खड़े करने वाला है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने न केवल खुद मुकाम हासिल किया, बल्कि दूसरों को भी कामयाव बनाया।

    सात दिन की पैदल यात्रा और रास्ते का संघर्ष
    स्टेशन से परिवार ने पैदल सफर शुरू किया और सात दिन में फाजिल्का पहुंचे। वे रोजाना करीब 10 मील का सफर तय करते थे। सेना ने इस दौरान काफी मदद की और खाने के लिए आधा किलो गेहूं व आधा किलो चने दिए, जिन्हें उबालकर वे खाते थे।

    सफर के दौरान रास्ते में नाले में लाशें पड़ी थीं और कई बार मजबूरी में उसी नाले का पानी भी पीना पड़ा। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सैन्य जीपों में बैठाकर पहुंचाया गया। रास्ते में एक आरएसएस के स्वयंसेवक ने उनकी मदद की और अपने घर में शरण दी।

    पानीपत को बनाया अपनी कर्मभूमि
    अनेजा परिवार में वकालत की परंपरा रही है। उनके पिता व चाचा वकील थे। परिवार इसके बाद करनाल आया, मकान बनाया। 15 नवंबर 1965 को जब पानीपत में आयकर विभाग का दफ्तर खुला, तो कैलाश चंद अनेजा यहां आ गए। उन्होंने आयकर के करीब 20 वकीलों को तैयार किया और उन्हें पेशेवर रूप से सफल बनाया।

    विभीषिका के उस दौर में सब कुछ गंवाने के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर सफलता की इबारत लिखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद अनेजा आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वर्तमान में वे अपना अधिकांश समय किताबें पढ़ने में व्यतीत करते हैं।

    गुरदीता मल ने कहा- 'हम शरणार्थी नहीं, पुरुषार्थी हैं'
    परिवार गाड़ी से सहारनपुर होते हुए मुजफ्फरनगर पहुंचा। वहां व्यापारियो द्वारा राहत सामग्री बाटी जा रही थी, जिसे देखकर पिता गुरदीता मल ने दृढ़ता से कहा कि वे शरणार्थी नहीं, बल्कि पुरुषार्थी है और अपनी मेहनत से कमाकर खाएंगे। मुजफ्फरनगर की लाली धर्मशाला में रहकर उन्होंने शुरुआत की। दिल्ली से लाकर चार आने में मोती और कानों की बूंदी बेवी, बादाम और दूध का व्यापार किया और फिर कपड़े के व्यवसाय में उतरे। इस दौरान उन्होंने पंजाबियों की एक कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी भी बनाई।

    96 वर्षीय कैलाश चंद अनेजा बताते हैं कि विभाजन से पहले पाकिस्तान के मिटगुंबरी में माहौल सामान्य था। हिंदू और मुस्लिम मिलजुलकर रहते थे, लेकिन जैसे ही देश के बंटवारे की बात आई, फिजां बदल गई।

    एक दिन कुछ लोग हथियारों और डंडों के साथ उनकी बड़ी हवेली पर आए। उस हवेली में उनके पिता गुरदीतामल अनेजा और उनके चारों भाई संयुक्त रूप से रहते थे।

    हमलावरों ने धमकी दी कि कल तक हवेली खाली कर दो। बिगड़ते हालात को देखते हुए परिवार को घर-बार छोड़ना पड़ा। वे स्टेशन पहुंचे जहां भारी भीड़ थी। पैर रखने तक की जगह नहीं थी।

    पाकिस्तान में थी बड़ी हवेली और 200 एकड़ जमीन
    96 वर्षीय कैलाश चंद अनेजा बताते हैं कि विभाजन से पहले पाकिस्तान के मिंटगुंबरी में माहौल सामान्य था। हिंदू और मुस्लिम मिलजुलकर रहते थे, लेकिन जैसे ही देश के बंटवारे की बात आई, फिजां बदल गई। एक दिन कुछ लोग हथियारों
    और डंडों के साथ उनकी बड़ी हवेली पर आए।

    उस हवेली में उनके पिता गुरदीतामल अनेजा और उनके चारों भाई संयुक्त रूप से रहते थे। हमलावरों ने धमकी दी कि कल तक हवेली खाली कर दो। बिगड़ते हालात को देखते हुए परिवार को घर-बार छोड़ना पड़ा। वे स्टेशन पहुंचे जहां भारी भीड़ थी। पैर रखने तक की जगह नहीं थी।

  • रांची में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, पारस अस्पताल में मिलेगी विश्वस्तरीय सुविधा

    रांची में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, पारस अस्पताल में मिलेगी विश्वस्तरीय सुविधा

    रांची
     रांची में अब विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिलेगी। पारस अस्पताल, एचईसी में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है। इस तकनीक से सर्जरी अधिक सटीकता और नियंत्रित तरीके से करने में मदद मिलती है।

    रोबोटिक सर्जरी में सर्जन नियंत्रक और स्क्रीन की मदद से रोबोटिक भुजा को संचालित करते हैं। इसमें छोटे सर्जिकल उपकरणों का उपयोग किया जाता है। रोबोटिक सर्जरी सर्जन का स्थान नहीं लेती, बल्कि सर्जरी के दौरान उनकी सहायता करती है।

    इसके माध्यम से एपेंडेक्टॉमी, कोलेक्टॉमी, पित्ताशय निकालने, गैस्ट्रिक बाईपास, हर्निया की मरम्मत, गर्भाशय निकालने, माइट्रल वाल्व की मरम्मत, अग्न्याशय-उच्छेदन और रीढ़ की हड्डी से संबंधित आपरेशन जैसी प्रक्रियाएं की जा सकती हैं।

    पारस हेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर धर्मेद्र नागर ने कहा कि यह झारखंड का पहला रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी प्रोग्राम है। इस अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम के माध्यम से जनरल सर्जरी, गायनेकोलॉजी, यूरोलाजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और आर्थोपेडिक्स समेत अधिकांश विभागों में रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी की जा सकेगी।

    मशीन इन सभी प्रकार की जटिल सर्जरी करने में सक्षम है, जहां रोबोटिक तकनीक की आवश्यकता होती है। यह तकनीक कम चीरे के साथ अधिक सटीक ऑपरेशन करने में सक्षम है, जिससे मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम खतरा और तेजी से रिकवरी जैसे लाभ मिलेंगे।

    यह पहल झारखंड में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे राज्य के मरीजों को अत्याधुनिक, सुरक्षित एवं बेहतर उपचार का लाभ मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि अब तक झारखंड के मरीजों को रोबोटिक सर्जरी के लिए दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इस सुविधा के शुरू होने से अब मरीजों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

    पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसेलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि पारस हेल्थ हमेशा से झारखंड के लोगों तक अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी प्रोग्राम की शुरुआत इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

  • बिहार में सरकारी योजनाओं के प्रचार को मिलेगी नई रफ्तार, एजेंसी संभालेगी मीडिया रणनीति

    बिहार में सरकारी योजनाओं के प्रचार को मिलेगी नई रफ्तार, एजेंसी संभालेगी मीडिया रणनीति

     पटना
     शहरों के विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए अब नगर विकास एवं आवास विभाग पेशेवर संचार एजेंसी की मदद लेगा।

    विभाग ने एकीकृत मीडिया एवं संचार सहयोग के लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी  योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ ही जनसंपर्क और लोगों से संवाद की रणनीति तैयार करने में सहयोग करेगी।

    एजेंसी तैयार करेगी मीडिया और संचार से जुड़ी सलाह, रणनीति  
    नगर विकास से मिली जानकारी के अनुसार जिस एजेंसी का चयन होगा उसे रणनीतिक संचार और जन पहुंच बढ़ाने से जुड़े कार्य करने होंगे।

    इसका उद्देश्य शहरी विकास एवं आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और सरकार के फैसलों की जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाना है।

    इसके लिए मीडिया और अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। योजनाओं को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने और विभाग की गतिविधियों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में भी एजेंसी सहयोग करेगी।

    पहले वर्ष वेबसाइट, सोशल मीडिया व पाडकास्ट पर जोर
    सूत्रों ने बताया कि चयनित एजेंसी पहले छह महीने में विभाग के सभी इंटरेट मीडिया माध्यमों का पूरा आकलन करेगी। इसके आधार पर डिजिटल स्थिति की रिपोर्ट तैयार होगी

    सामग्री तैयार करने के लिए अलग टीम होगी। काम की मानक प्रक्रिया और 30 दिन का अग्रिम सामग्री कैलेंडर सुनिश्चित किया जाएगा।

    विभाग की वेबसाइट की समीक्षा कर उसमें बदलाव की योजना तैयार करने के साथ वाट्सएप आधारित संचार व्यवस्था शुरू करने जैसे कार्य एजेंसी के होंगे।

    पहले वर्ष वेबसाइट, इंटरनेट मीडिया व पाडकास्ट पर जोर रहेगा इसके बाद दूसरे वर्ष इसका बढ़ेगा दायरा बढ़ाया जाएगा। इसी पूरी कवयाद का मकसद विभाग के स्तर पर संचालित योजनाओं के बारे में अधिक से अधिक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना है।

  • Bihar STET 2026: 17 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन, 31 अगस्त है आखिरी तारीख

    Bihar STET 2026: 17 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन, 31 अगस्त है आखिरी तारीख

    पटना
     बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) 2026 के लिए आवेदन की तिथि घोषित कर दी है। एसटीईटी 2026 (Bihar STET 2026) के लिए आवेदन प्रक्रिया 17 अगस्त से शुरू होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित है।

    आवेदन परीक्षा समिति के वेबसाइट https://stetregistration.cbrt.co.in पर स्वीकार किए जाएंगे। समिति ने कहा है कि परीक्षा की तिथि बाद में घोषित की जाएगी।

    परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रहेगी। परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थियों को लाइफटाइम वैलिड सर्टिफिकेट मिलेगा, जो उन्हें आगामी बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने का सीधा मौका देगा।

    परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में होगा
    एक पेपर के लिए आवेदन शुल्क जनरल, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग उम्मीदवारों के लिए 960 रुपये है, जबकि एससी/एसटी/पीएच के लिए 760 रुपये का भुगतान करना होगा।

    जबकि दोनों पेपर के लिए आवेदन शुल्क जनरल/बीसी/इडब्ल्यूएस के लिए 1440 रुपये है, जबकि एससी/एसटी/पीएच के लिए आवेदन शुल्क 1140 रुपये है। परीक्षा शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन मोड में होगा।

    महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष
    आवेदन के लिए अभ्यर्थियों काे किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक उत्तीर्ण होना अनिवार्य है और साथ ही संबंधित विषय में बीएड की डिग्री भी आवश्यक है। कोटिवार उम्मीदवारों की आयु सीमा निर्धारित की गई है।

    अनारक्षित पुरुष 37 वर्ष, अनारक्षित महिला 40 वर्ष, पिछड़ा वर्ग पुरुष-महिला 40 वर्ष, अनसूचित जाति पुरुष-महिला 42 वर्ष और अनुसूचित जनजाति पुरुष-महिला का उम्र सीमा 42 वर्ष है।

    150 प्रश्न पूछे जाएंगे, पेपर-1 के 16 व पेपर-2 के लिए 29 विषयों की होगी परीक्षा:
    बिहार एसटीईटी 2026 परीक्षा का पैटर्न इस तरह तय किया गया है कि इसमें कुल 150 प्रश्न होंगे। इनमें से 100 प्रश्न विषय-आधारित होंगे, जबकि शेष 50 प्रश्न शिक्षक कला और अन्य दक्षताओं से संबंधित होंगे। परीक्षा की कुल अवधि ढाई घंटे की होगी।

    यह परीक्षा दो हिस्सों में आयोजित की जायेगी- पेपर-1 माध्यमिक कक्षाओं के लिए और पेपर-2 उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लिए पेपर-1 के लिए 16 व पेपर-2 के लिए 29 विषयों की परीक्षा होगी।

    पेपर-1 और पेपर-2 में ये विषय हैं शामिल:
        पेपर-1 में हिंदी, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, उर्दू, बंगला, मैथिली,अरबी, फारसी, भोजपुरी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, शारिरिक शिक्षा, संगित, ललित कला, नृत्य विषय शामिल हैं।
        पेपर-2 में उच्च माध्यमिक में हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, मगही, अरबी, फारसी, बंग्ला, मैथिली, भोजपुरी, पाली, प्राकृत, गणित, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलाजी, इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, वनस्पति विज्ञान, वाणिज्य, कंप्यूटर साइंस, कृषि और संगीत विषय शामिल हैं।

     

  • सरकारी मकान किराए पर दिया तो होगी सख्त कार्रवाई, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

    सरकारी मकान किराए पर दिया तो होगी सख्त कार्रवाई, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

    चंडीगढ़.

    सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को चंडीगढ़ में आवंटित सरकारी मकानों के दुरुपयोग, विशेषकर सबलेटिंग (किराये पर देने) की बढ़ती शिकायतों पर सरकार सख्त हो गई है। ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) लिया जाएगा, जिन्हें चंडीगढ़ प्रशासन अथवा राज्य सरकार द्वारा सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।

    नियमों की अनदेखी कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक आवंटी को यह प्रमाणित करना होगा कि उसने आवंटित सरकारी आवास किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं दिया है तथा वह स्वयं उसी आवास में रह रहा है।

    निर्माण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही है
    यूटी चंडीगढ़ की हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सचिव ने सरकार को अवगत कराया है कि कर्मचारियों को जनरल पूल से आवंटित सरकारी आवासों में सबलेटिंग, अनधिकृत कब्जे, दुरुपयोग तथा बिना अनुमति किए गए निर्माण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों से स्व-प्रमाणन प्राप्त किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवंटित सरकारी आवास का उपयोग नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।

    मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
    मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा विधानसभा, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआइडी), लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के इंजीनियर-इन-चीफ सहित सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रणाधीन ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से निर्धारित प्रमाणपत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें, जिन्हें सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं।

  • पानीपत जंक्शन पर हाई अलर्ट, डॉग स्क्वाड और सुरक्षा एजेंसियों ने चलाया सघन जांच अभियान

    पानीपत जंक्शन पर हाई अलर्ट, डॉग स्क्वाड और सुरक्षा एजेंसियों ने चलाया सघन जांच अभियान

    पानीपत.

    स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर रेलवे जंक्शन पर शुक्रवार को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। जीआरपी, आरपीएफ, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) ने संयुक्त रूप से सघन चेकिंग अभियान चलाया।

    करीब 45 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय और अन्य संवेदनशील स्थानों की गहन तलाशी ली गई।

    100 से अधिक यात्रियों के बैग खंगाले
    अभियान के दौरान 100 से अधिक यात्रियों के बैगों की जांच की गई। इसके अलावा प्रतीक्षालय में आराम कर रहे यात्रियों के सामान की भी तलाशी ली गई। डॉग स्क्वायड की मदद से स्टेशन परिसर के हर महत्वपूर्ण हिस्से की बारीकी से जांच की गई, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सके। पूरे अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली। अधिकारियों ने यात्रियों से भी अपील की कि स्टेशन पर किसी लावारिस वस्तु को हाथ न लगाएं और ऐसी कोई वस्तु दिखाई देने पर तुरंत रेलवे पुलिस या आरपीएफ को सूचना दें।

    रेलवे जंक्शन पर रखी जा रही विशेष निगरानी
    जीआरपी थाना प्रभारी धर्मपाल ने बताया कि 15 अगस्त को लेकर रेलवे जंक्शन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसी के तहत संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस तक समय-समय पर इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।