Category: news

  • आज से LPG की ऑनलाइन बुकिंग पर बड़ा बदलाव, ई-केवाईसी नहीं तो नहीं कर पाएंगे बुकिंग

    आज से LPG की ऑनलाइन बुकिंग पर बड़ा बदलाव, ई-केवाईसी नहीं तो नहीं कर पाएंगे बुकिंग

    लुधियाना.

    देश की तीनों प्रमुख गैस कंपनियों द्वारा आगामी 15 अगस्त तक अपने रसोई गैस कनेक्शन की ई-के.वाई.सी. नहीं करवाने उपभोक्ताओं की गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं करने सहित सिलेंडर की सप्लाई बंद की जा सकता है।

    गैस कंपनियों और एजेंसियों के डीलरों ने उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि वह उक्त तिथि से पहले अपनी ई-के.वाई.सी. करवा लें नहीं तो संबंधित उनकी रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग स्वीकार नहीं करने सहित सप्लाई पर रोक और कनेक्शन रद्द करने जैसे कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। चीमा चौक स्थित अरुण गैस सर्विस के अरुण अग्रवाल, बच्चन गैस एजेंसी के मंजीत सिंह, थम्मन गैस सर्विस के अमित थम्मन और इलाका शिमलापुरी के डाबा रोड स्थित इन्द्र गैस सर्विस के प्रमुख संचालक रंजीत सिंह गांधी ने बताया कि सभी गैस कंपनियों से संबंधित एजेंसियों के कार्यालय रविवार को छुट्टी होने के बावजूद सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक ई-के.वाई.सी. के लिए खुले।

    रहेंगे गैस एजेंसियों के कार्यालय में उपभोक्ताओं की ई-के.वाई.सी. नि:शुल्क की जा रही है। इसमें सेंट्रल पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मिनिस्ट्री और गैस कंपनियों के अधिकारियों का एक ही मकसद है, वह है देश भर में नकली गैस कनेक्शन कैंसिल करके कुकिंग गैस सिलेंडर के गलत इस्तेमाल और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाना है।

  • किसानों के लिए बड़ी राहत, मोबाइल से फोटो भेजकर पता चलेगी फसल की बीमारी

    किसानों के लिए बड़ी राहत, मोबाइल से फोटो भेजकर पता चलेगी फसल की बीमारी

    अंबाला.

    आइआइटी रोपड़ में खेती को लेकर एआइ आधारित टूल्स पर काम किया जा रहा है। जिनकी मदद से किसान अपने खेत की फसल की तस्वीर मोबाइल से अपलोड करके संभावित बीमारी या कीट समस्या तथा उसके उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

    इसको लेकर एफपीओ की ओर से नार्दर्न फार्मर फेडरेशन के अध्यक्ष पुनीत सिंह थिंद ने पर्दा उठाया। फिलहाल इस पर काम हो रहा है। वह गांव बलाना में किसानों को जागरूक कर रहे थे। मार्केट कमेटी अंबाला शहर की ओर से बुधवार को गांव बलाना स्थित माता मनसा देवी मंदिर में किसान जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आसपास के गांवों के किसानों ने काफी संख्या में भाग लिया। इसमें किसानों को कृषि एवं कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की योजनाओं, तकनीकों, सुविधाओं और आधुनिक संभावनाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध करवाई गई।

    कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन, वन, बैंकिंग, स्वयं सहायता समूह, राजस्व विभाग, एफपीओ, वीटा तथा मार्केट कमेटी से जुड़े प्रतिनिधि पहुंचे। जिन्हाेंने प्राकृतिक एवं जैविक तरीकों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण संरक्षण और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर करने के रास्ते बताए। एनिमल हास्टल माडल को खेती से जोड़ने चर्चा की। जिसमें अपनी खेती के साथ पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से जोड़कर माडल विकसित कर सकते हैं। पशुओं से गोबर एवं मूत्र का उचित प्रबंधन करके बायोगैस तैयार की जा सकती है। उससे निकलने वाले जैविक अवशेषों से बायो-फर्टिलाइजर तैयार किया जा सकता है। मार्केट कमेटी अंबाला शहर चेयरमैन जसविंदर सिंह उगाड़ा ने कहा कि कृषि को केवल परंपरागत खेती तक सीमित न रखकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसे प्रयासों से भी किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

    कार्यक्रम में एफपीओ की ओर से नार्दर्न फार्मर फेडरेशन के अध्यक्ष पुनीत सिंह थिंद ने बताया कि उत्तर भारत के एफपीओ के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम में मिट्टी जांच की एक छोटी एवं पोर्टेबल लैब का कॉन्सेप्ट किसानों के सामने रखा। पोर्टेबल लैब के माध्यम से मौके पर ही मिट्टी की जांच की जा सकती है और उसकी रिपोर्ट भी तुरंत प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम में किसानों को एक नाम – एक पौधा वितरित किया। इस अभियान के तहत 5100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। मौके पर वाइस चेयरमैन गुलशन कालरा, कमेटी सदस्य मोहन सिंह धुरकडा, अवतार सिंह, संजीव सारंगपुर, सरपंच सहित अन्य उपस्थित रहे।

  • हरियाणा में अब 1.80 लाख रुपये आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ

    हरियाणा में अब 1.80 लाख रुपये आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ

    चंडीगढ़
     हरियाणा में अगले महीने से 1.80 लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों की बहन-बेटियों को भी दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा। अभी तक एक लाख रुपये तक सालाना पारिवारिक आय वाली महिलाएं ही योजना में शामिल की गई हैं।

    आगामी 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्मदिवस पर इस योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा, जिसके बाद 1.80 लाख रुपये तक सालाना आय वाली महिलाएं हर महीने 2100 रुपये लेने की पात्र होंगी।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने  विभिन्न सरकारी योजनाओं के 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में 1595 करोड़ रुपये स्थानांतरित करते हुए यह घोषणा की। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना की दसवीं किस्त में नौ लाख 98 हजार महिलाओं के खातों में 209 करोड़ 62 लाख रुपये दिए गए हैं।

    योजना के तहत अब तक बहन-बेटियों को 2042 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने 15 सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 34 लाख 94 हजार लाभार्थियों के खातों में 1125 करोड़ रुपये बैंकों में स्थानांतरित किए। इनमें वृद्धावस्था सम्मान भत्ता, दिव्यांग भत्ता तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन शामिल हैं।

    'दयालु’ योजना में 6224 परिवारों को राहत
    मुख्यमंत्री ने ‘दयालु’ योजना के तहत 6224 परिवारों को 235 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। अब तक 83 हजार 536 परिवारों को 3152 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इस योजना में सरकार कुत्ते के काटने तथा गाय, सांड़, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस के हमलों से होने वाली आकस्मिक मृत्यु, दिव्यांगता अथवा चोट लगने की स्थिति में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाती है।

    4.93 लाख महिलाओं को रसोई गैस सब्सिडी
    हर घर-हर गृहिणी योजना के तहत चार लाख 93 हजार महिलाओं के बैंक खातों में जून महीने की 19.17 करोड़ रुपये की सब्सिडी डाली गई है। योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है। अब तक 15 लाख से अधिक महिलाओं को 340 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
    किसानों को हरित खाद अपनाने के लिए मिले सात करोड़

    पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए 13 हजार 237 किसानों के खातों में सात करोड़ रुपये डाले गए हैं। यह राशि खरीफ 2026-27 में 70 हजार एकड़ क्षेत्र में ढैंचा एवं मूंग को हरित खाद के रूप में अपनाने के लिए जारी की गई है।

    इनमें से 5844 किसानों द्वारा 36 हजार 670 एकड़ क्षेत्र में ढैंचा की खेती का सत्यापन हुआ है। इसी प्रकार 7393 किसानों द्वारा 33 हजार 330 एकड़ क्षेत्र में मूंग एवं अन्य हरित खाद फसलों की खेती का सत्यापन किया गया है।

    योजना के तहत पात्र किसानों को हरित खाद की खेती अपनाने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

  • रांची का नामकुम कभी था झारखंड का प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र, विदेशों तक जाती थी चाय

    रांची का नामकुम कभी था झारखंड का प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र, विदेशों तक जाती थी चाय

    रांची
    आज जहां नामकुम में चाय बागान और बड़गांवा क्षेत्र में बस्तियां और खेत नजर आती हैं, वही क्षेत्र एक समय झारखंड के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता था। स्थानीय इतिहास और पुराने भू-अभिलेख बताते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौरान नामकुम, बड़गांवा, रामपुर और प्लांडू तक फैले करीब 1200 एकड़ क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली चाय की खेती होती थी।

    यहां तैयार होने वाली चाय रामपुर स्थित असम फ्रंटियर टी कंपनी लिमिटेड के कारखाने में प्रोसेस और पैक की जाती थी, जिसके बाद इसे देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों तक भेजा जाता था। स्थानीय लोगों के अनुसार उस दौर में चाय के बागानों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों को रोजगार मिलता था।

    महिलाएं और पुरुष चाय की पत्तियां तोड़ते थे, जिन्हें बैलगाड़ी और बाद में ट्रैक्टर से रामपुर स्थित कारखाने तक पहुंचाया जाता था। कई ग्रामीण अपने उपयोग के लिए भी चाय की पत्तियां सुखाकर स्थानीय हाट-बाजार में बेचते थे, जिससे उनकी अतिरिक्त आमदनी होती थी।

    जमींदार एवं समाजसेवी लाल काली शरण नाथ शाहदेव बताते हैं कि नामकुम से प्लांडू तक फैले चाय बागान पूरे क्षेत्र की पहचान थे। उनके अनुसार बड़गांवा मौजा के खेवट संख्या-2 में 481 एकड़ भूमि दर्ज थी, जिसमें 207.79 एकड़ क्षेत्र केवल चाय की खेती के लिए दर्ज था। वर्ष 1932 से पहले यह भूमि असम फ्रंटियर टी कंपनी लिमिटेड को स्थायी बंदोबस्ती पर दी गई थी।

    स्थानीय बुजुर्गों की यादों में आज भी उस दौर की तस्वीरें ताजा हैं। 90 वर्षीय भगवती देवी बताती हैं कि यहां की चाय अपनी गुणवत्ता के लिए मशहूर थी। आसपास के ग्रामीण चाय की पत्तियां सुखाकर बाजारों में बेचते थे और इसी से परिवार का खर्च चलता था।

    दुर्गा शंकर झा बताते हैं कि चाय के पौधों के साथ बड़ी संख्या में 'कोंगा' के पेड़ भी लगाए गए थे, जिनके रेशों का उपयोग पैराशूट से जुड़े उपकरण बनाने में होता था। वहीं जामुन के पेड़ों की भी भरमार थी। बड़गांवा निवासी किशोर वर्मा और मनोज कुमार सिंह बताते हैं कि उनके बुजुर्ग अक्सर कहते थे कि नामकुम की चाय की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी थी।

  • रांची बना जंतर-मंतर, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन की दिल्ली से 10 बड़ी समानताएं और अंतर

    रांची बना जंतर-मंतर, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन की दिल्ली से 10 बड़ी समानताएं और अंतर

    रांची
     झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम अब ‘रांची का जंतर-मंतर’ कहला रहा है।

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया NEET पेपर लीक आंदोलन के बाद अब रांची का यह प्रदर्शन भी सुर्खियों में है। दोनों आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करते हैं, लेकिन मुद्दा, उम्र, भाषा, नेतृत्व और लक्ष्य में बड़ा अंतर है। जानिए 10 प्रमुख बिंदुओं में जंतर-मंतर और रांची प्रोटेस्ट में क्या फर्क है।

    1. मुख्य मुद्दा  
    जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों का मुद्दा था। वहीं रांची में राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं—JPSC सिविल सेवा और JSSC-CGL—में कथित धांधली, कटऑफ में गड़बड़ी, OMR हेरफेर और सीटें बेचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। एक जगह एडमिशन का सवाल है, दूसरी जगह सरकारी नौकरी का।

    2. मांगों का फोकस
    दिल्ली में मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NTA जैसी संस्थाओं में सुधार की थी। रांची में छात्र 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने, पूरे मामले की CBI या बाहर के जजों से जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में स्थायी पारदर्शिता की मांग पर अड़े हैं। यहां व्यक्तिगत इस्तीफे से ज्यादा व्यवस्थागत बदलाव पर जोर है।

    3. प्रदर्शनकारियों की उम्र
    जंतर-मंतर ज्यादातर Gen-Z (14 से 29 साल) का आंदोलन था, क्योंकि NEET 12वीं के बाद दी जाती है। रांची में बड़ी संख्या में 25 से 35-40 साल तक के अभ्यर्थी हैं, जो कई सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि उम्र सीमा खत्म होने से पहले नौकरी पाने की है।

    4. भाषा और आचरण
    दिल्ली में कुछ जगहों पर गाली-गलौज, अभद्र भाषा और तीखे पोस्टर देखने को मिले। रांची में प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और मर्यादित रहा। छात्र अपनी मांगों वाली तख्तियों और नारों के साथ आगे बढ़े, व्यक्तिगत हमलों या अभद्रता से ज्यादातर दूर रहे।

    5. नेतृत्व और संगठन  
    जंतर-मंतर में CJP और सोनम वांगचुक जैसे चेहरों ने आंदोलन को एकजुट रखा। रांची में आंदोलन दो अलग स्टेज और ग्रुप में बंटा दिखता है—एक देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में और दूसरा JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के तहत। मांगें भी थोड़ी अलग-अलग हैं, जिससे एक आवाज कमजोर पड़ती है।

    6. स्तर (राष्ट्रीय बनाम राज्य)
    जंतर-मंतर राष्ट्रीय मुद्दा बन गया था और केंद्र सरकार पर सीधा दबाव बना। रांची का प्रोटेस्ट मुख्य रूप से झारखंड सरकार, JPSC और JSSC के खिलाफ राज्य स्तरीय आंदोलन है। राष्ट्रीय मीडिया का फोकस भी दिल्ली जितना तेज नहीं रहा।

    7. सोशल मीडिया और स्टाइल
    दिल्ली में मीम, रील्स, डांस वीडियो और व्यंग्यात्मक पोस्टर काफी वायरल हुए। रांची में पारंपरिक तरीके से तख्तियां, झंडे और सीधा मुद्दा-केंद्रित प्रदर्शन ज्यादा दिखता है। यहां रील्स का ग्लैमर कम और असली दर्द ज्यादा नजर आता है।

    8. कोड ऑफ कंडक्ट
    रांची के छात्रों ने खुद “कोड ऑफ कंडक्ट” लागू किया—सिर्फ मुद्दे पर बात करें, गाली-गलौज न करें, राजनीतिक नारे न लगाएं और आंदोलन को किसी पार्टी का मंच न बनने दें। जंतर-मंतर में ऐसा सख्त स्व-नियंत्रण कम दिखा, जहां कुछ जगहों पर विवादित नारे भी लगे।

    9. राजनीतिक हस्तक्षेप
    दिल्ली में राजनीतिक नेताओं की सीधी भागीदारी, नारे और समर्थन ज्यादा दिखाई दिए। रांची में छात्र बार-बार साफ कर रहे हैं कि वे किसी पार्टी के लिए नहीं लड़ रहे, बल्कि व्यवस्था सुधार के लिए। हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ राजनीतिक समर्थन जरूर मिला है।

    10. उद्देश्य की प्रकृति
    जंतर-मंतर पर मुख्य रूप से एडमिशन और उच्च शिक्षा का सवाल था। रांची में यह सीधे रोजगार, बेरोजगारी और वर्षों की मेहनत-पैसे के बर्बाद होने का मुद्दा है। यहां अभ्यर्थी अपनी और परिवार की आजीविका की लड़ाई लड़ रहे हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, दोनों आंदोलन युवाओं के गुस्से और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, लेकिन रांची का प्रदर्शन रोजगार की असली जद्दोजहद, अनुशासन और राज्य स्तरीय मुद्दों के कारण दिल्ली से अलग पहचान बना रहा है।

  • श्रावणी मेला 2026 पर वीडियो बनाएं और जीतें 3 लाख रुपये, बिहार पर्यटन की अनोखी पहल

    श्रावणी मेला 2026 पर वीडियो बनाएं और जीतें 3 लाख रुपये, बिहार पर्यटन की अनोखी पहल

    पटना
    विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए बिहार पर्यटन विभाग ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए विशेष वीडियो प्रतियोगिता शुरू की है।

    'श्रावणी मेला 2026 : एक इंफ्लुएंसर की नजर' नाम से आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से श्रावणी मेला, कांवरिया पथ और इससे जुड़े धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को सोशल मीडिया के जरिए प्रस्तुत करना होगा।

    प्रतियोगिता में विजेताओं को 3 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। विभाग का उद्देश्य सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव का इस्तेमाल कर श्रावणी मेले की आध्यात्मिकता, लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    28 अगस्त तक चलेगा श्रावणी मेला
    इस वर्ष श्रावणी मेले की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हुई है और यह 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। सावन के दौरान पड़ने वाली सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को सोमवारी पड़ रही है।

    श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं और कांवरियों के लिए विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सुल्तानगंज, बांका के मंदार क्षेत्र, मुंगेर के खैरा सहित कांवरिया पथ से जुड़े अन्य प्रमुख स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    ऐसे में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से इन आयोजनों, धार्मिक स्थलों, कांवरिया पथ और मेले के अनुभव को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    25 हजार फॉलोअर्स होना जरूरी
    वीडियो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। प्रतिभागी का भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है।

    सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि प्रतिभागी के फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (पूर्व ट्विटर) और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कुल मिलाकर कम से कम 25,000 फॉलोअर्स होने चाहिए। फॉलोअर्स की संख्या का प्रमाण आवेदन के साथ उपलब्ध कराना होगा।

    इसके अलावा प्रतिभागी के सोशल मीडिया अकाउंट का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा। किसी प्रतिभागी के सोशल मीडिया हैंडल पर विवादास्पद, आपत्तिजनक, असामाजिक अथवा किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री नहीं होनी चाहिए। वीडियो में दी जाने वाली जानकारी तथ्यात्मक और प्रमाणिक होना जरूरी है।

    30 सेकंड से 2 मिनट तक का होगा वीडियो
    प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को 30 सेकंड से कम और 2 मिनट से अधिक अवधि का वीडियो या रील नहीं बनाना होगा।वीडियो का मुख्य विषय श्रावणी मेला और कांवरिया पथ रहेगा।

    विशेष रूप से मुंगेर, बांका और भागलपुर क्षेत्र में आने वाले कांवरिया पथ, धार्मिक स्थल, सांस्कृतिक गतिविधियां, स्थानीय परंपराएं, श्रद्धालुओं का अनुभव और पर्यटन की संभावनाएं वीडियो का हिस्सा बन सकती हैं। असंबंधित वीडियो को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन के साथ देनी होगी पूरी जानकारी
    प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को Google Form के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन का लिंक (https://tourism.bihar.gov.in/) बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
    बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट

    आवेदन के साथ प्रतिभागी को अपना नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक संपर्क विवरण देना होगा। इसके साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी जैसे वैध पहचान पत्र का विवरण/प्रमाण भी देना होगा।

    प्रत्येक वीडियो के साथ उसका शीर्षक और अधिकतम 50 शब्दों में हिंदी या अंग्रेजी में विवरण देना भी अनिवार्य होगा।

    HD क्वालिटी और जियोटैग जरूरी
    प्रतियोगिता के लिए वीडियो के तकनीकी मानक भी निर्धारित किए गए हैं। वीडियो HD क्वालिटी का होना चाहिए और उसकी फाइल का आकार 100 MB से 1 GB के बीच होना जरूरी है।

    इसके अलावा वीडियो का Geotagged होना अनिवार्य है। यानी वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया है, इसकी लोकेशन संबंधी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

    विभाग की ओर से चयनित प्रतिभागियों से आवश्यकता पड़ने पर वीडियो का Raw Footage भी मांगा जा सकता है। ऐसे में प्रतिभागियों को मूल फुटेज सुरक्षित रखना होगा

    AI से बने वीडियो पर पूरी तरह रोक
    प्रतियोगिता के नियमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट रोक लगाई गई है। प्रतिभागी द्वारा प्रस्तुत वीडियो में किसी भी तरह से AI का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

    जांच के दौरान यदि किसी वीडियो में AI के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रविष्टि को प्रतियोगिता से सीधे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

    इसके अलावा वीडियो में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के अधिकारों का उल्लंघन, कॉपीराइट सामग्री का अनधिकृत इस्तेमाल, आपत्तिजनक सामग्री, विवादास्पद दृश्य या किसी प्रकार का लोगो अथवा वॉटरमार्क नहीं होना चाहिए।

    सोशल मीडिया पर प्रदर्शन भी बनेगा जीत का आधार
    प्रतियोगिता में विजेता का चयन केवल वीडियो की रचनात्मकता या तकनीकी गुणवत्ता के आधार पर नहीं होगा, बल्कि सोशल मीडिया पर उसके प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

    चयन के लिए तीन प्रमुख मानदंड तय किए गए हैं
        वीडियो की कुल Reach
        वीडियो पर मिले Likes
        वीडियो को मिले Shares
        X (पूर्व ट्विटर) पर मिलने वाले Retweets को Shares के रूप में गिना जाएगा।

    प्रतियोगिता के दौरान चयनित वीडियो बिहार पर्यटन विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किए जाएंगे। इन वीडियो के प्रदर्शन की 45 दिनों तक समीक्षा की जाएगी।

    तीनों मानदंडों में सबसे अधिक संयुक्त संख्या प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को विजेता घोषित किया जाएगा। यदि दो प्रतिभागियों के बीच बराबरी की स्थिति बनती है तो अधिकतम Reach वाले वीडियो को प्राथमिकता दी जाएगी।

    3 लाख रुपये से लेकर 25 हजार तक के पुरस्कार
        प्रथम पुरस्कार: 3,00,000 रुपये
        द्वितीय पुरस्कार: 2,00,000 रुपये
        तृतीय पुरस्कार: 1,00,000 रुपये
        चतुर्थ पुरस्कार: 2 प्रतिभागियों को 50,000-50,000 रुपये
        प्रशंसा/सांत्वना पुरस्कार: 5 प्रतिभागियों को 25,000-25,000 रुपये

    इस तरह प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को न केवल आर्थिक पुरस्कार मिलेगा, बल्कि बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।

    पर्यटन विभाग को मिलेगा वीडियो के उपयोग का अधिकार
    प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को अपने वीडियो के उपयोग को लेकर विभाग के नियमों से सहमत होना होगा। प्रतिभागियों द्वारा जमा किए गए वीडियो का बिना अतिरिक्त अनुमति और अतिरिक्त भुगतान के बिहार पर्यटन विभाग द्वारा उपयोग, पुनरुत्पादन और प्रदर्शन किया जा सकेगा।

    विभाग इन वीडियो का प्रचार-प्रसार के साथ-साथ व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी उपयोग कर सकेगा। इसलिए प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को वीडियो तैयार करते समय कॉपीराइट और अन्य तीसरे पक्ष के अधिकारों का विशेष ध्यान रखना होगा।

    पहली बार टेंट सिटी और ड्रोन शो भी आकर्षण का केंद्र
    श्रावणी मेला-2026 को और आकर्षक बनाने के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पर्यटन मंत्री ने मेले के शुभारंभ के दौरान बताया था कि पहली बार टेंट सिटी, लेजर शो, ड्रोन शो और वॉटर स्क्रीन म्यूजिकल फाउंटेन शो जैसे आकर्षण भी देखने को मिलेंगे।

    कांवरियों की सुविधा के लिए सुल्तानगंज से जुड़े कांवरिया मार्ग और अन्य प्रमुख स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की जा रही हैं।

    सुल्तानगंज, धौरी, असरगंज, तारापुर, गोड्डीहारी, पहरेवा घाट, आरडीएस कॉलेज, बिठौली, तुर्की, गरौल और रजला सहित विभिन्न स्थानों पर कांवरियों के लिए अत्याधुनिक टेंट सिटी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।

    इंफ्लुएंसर्स के जरिए बदलेगा बिहार पर्यटन का डिजिटल चेहरा
    बिहार पर्यटन विभाग की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर्यटन स्थलों के प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

    फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X जैसे प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों तक पहुंच रखने वाले इंफ्लुएंसर्स अपने वीडियो के जरिए किसी स्थान की संस्कृति, धार्मिक महत्व और स्थानीय अनुभव को सीधे दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं।

    श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को डिजिटल माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए यह प्रतियोगिता बिहार की धार्मिक विरासत, लोक संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर भी दे रही है।

  • IRCTC की भारत गौरव ट्रेन से 25 सितंबर से शुरू होगी सप्त ज्योतिर्लिंग महायात्रा

    IRCTC की भारत गौरव ट्रेन से 25 सितंबर से शुरू होगी सप्त ज्योतिर्लिंग महायात्रा

     नई दिल्ली
    भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आइआरसीटीसी) ने भारत गौरव डीलक्स टूरिस्ट ट्रेन 'सप्त ज्योतिर्लिंग महायात्रा' शुरू करन की घोषणा की है।

    ट्रेन से यात्री मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में स्थित ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकेंगे। यह विशेष ट्रेन 25 सितंबर को दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होगी

    इस ट्रेन का पहला गंतव्य उज्जैन होगा जहां जहां श्रद्धालु शिप्रा नदी के किनारे स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। नर्मदा नदी पर द्वीप पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद ट्रेन गुजरात के द्वारका के लिए रवाना होगी।

    तीन स्टार होटल सहित कई सुविधाएं
    यहां द्वारकाधीश मंदिर के साथ ही नागेश्वर ज्योतिर्लिंग और अन्य तीर्थ स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। इशके बाद ट्रेन सोमनाथ पहुंचेगी। यहां से ट्रेन महाराष्ट्र जाएगी वहां भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, एलोरा में कैलाश मंदिर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे।

    इस विशेष पर्यटन ट्रेन में एसी थर्ड, सेकंड और थर्ड एसी के कोच हैं। न्यूनतम किरायप्रति व्यक्ति 88,810 रुपये और अधिकतम 1,34,255 रुपये है। इसमें ट्रेन यात्रा, तीन-स्टार होटलों में ठहरना, शाकाहारी भोजन, ट्रेन के बाद एसी वाहन से पर्यटन स्थलों तक की यात्रा, यात्रा बीमा और टूर मैनेजर की सेवा शामिल हैं।

  • PM सूर्यघर योजना में बड़ा बदलाव, 2 लाख तक लोन के लिए अब नहीं चाहिए सिविल स्कोर

    PM सूर्यघर योजना में बड़ा बदलाव, 2 लाख तक लोन के लिए अब नहीं चाहिए सिविल स्कोर

     पटना
    पीएम सूर्यघर बिजली योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब पीएम सूर्यघर बिजली योजना के लिए बैंकों से दो लाख रुपये तक लोन लेने में सिविल स्कोर की आवश्यकता खत्म होगी। इस संबंध में जल्द ही दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा के दौरान इससे जुड़े कई निर्देश दिए। उन्होंने नवंबर तक लक्ष्य के अनुसार सोलर रूफटॉप लगाने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित एजेंसियों को सौर संयंत्रों की स्थापना में तेजी लाने का निर्देश दिया। अत्यंत गरीब परिवारों में अक्टूबर के अंत तक 2.5 लाख सौर संयंत्रों की स्थापना का लक्ष्य पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। नवंबर 2026 तक पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के यूएलए मॉडल के सभी निर्धारित लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया।

    उन्होंने वेंडरों को भी कार्य में तेजी लाने की हिदायत देते हुए कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं होने उन्हें काली सूची में डाल दिया जाएगा। मुख्य सचिव ने बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना से जुड़े सभी लंबित ऋण आवेदनों का 10 दिनों के अंदर स्वीकृत करें। उन्होंने पात्र लाभार्थियों के ऋण आवेदन को अनावश्यक रूप से खारिज नहीं करने व खारिज करने के कारणों की बैंक स्तर पर समीक्षा करने को कहा। जिन आवेदनों में आवश्यक कमियां हैं, उन्हें दूर कर पात्र लाभार्थियों को जल्द ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

    बैठक में ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव ने यूएलए मॉडल के तहत विभिन्न जिलों में चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए कार्य की जानकारी मुख्य सचिव को दी।

    पटना में नवंबर तक 5,585 घरों में सोलर पैनल लगेंगे
    पटना। पटना में नवंबर तक 5585 घरों में सूर्य की रोशनी से बिजली मिलेगी। उस समय तक इतने घरों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। यह पैनल पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत के तहत लगेंगे। सोमवार को डीएम कुंदन कुमार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा बैठक की। बैठक में संबंधित अधिकारियों, बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ कई पदाधिकारी मौजूद थे। उन्होंने सोलर पैनल स्थापना और ऋण आवेदनों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निष्पादन का निर्देश दिया।

     

  • बक्सर में शुरू होगा पहला गुरुकुलम, वेद-विज्ञान के साथ एआई की पढ़ाई भी होगी

    बक्सर में शुरू होगा पहला गुरुकुलम, वेद-विज्ञान के साथ एआई की पढ़ाई भी होगी

    पटना
     पहली से इंटर तक एक साथ वेद, विज्ञान और एआई की पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग गुरुकुल परंपरा को केंद्र मे रख गुरुकुलम शुरू करने जा रहा। पहला गुरुकुलम बक्सर मे आरंभ होगा। जल्द ही इस आशय का प्रस्ताव शिक्षा विभाग द्वारा कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    जीयर स्वामी ने पांच एकड़ जमीन बक्सर में उपलब्ध कराई
    इस महत्वाकांक्षी प्राेजेक्ट के लिए ख्यातिलब्ध संत जीयर स्वामी ने बक्सर सदर क्षेत्र में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। यह भी कहा है कि गुुरुकुलम के लिए अगर कुछ और जरूरत होगी तो वह सहयोग करेंगे। शिक्षा विभाग जल्द ही इस बारे में बक्सर जिला प्रशासन को प्रस्ताव तैयार कराने को लिखा है। निर्माण भी गुरुकुल की शक्ल में होगा।

    कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और बंगलोर के सत्य साईं संस्थान से आएंगे शिक्षक
    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि गुरुकुलम में बच्चों को शिक्षा देने के लिए दक्षिण भारत से शिक्षक आएंगे। कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य ने शिक्षक देने को आश्वस्त किया है।

    इसी तरह बंगलोर स्थित सत्य साईं संस्थान भी बिहार में आरंभ होने वाले इस गुरुकुलम के लिए अपने शिक्षकों को भेजने की बात कही है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत कुछ विद्यार्थियों ने भी गुरुकुलम में अपनी सेवा उपलब्ध कराने में रुचि दिखाई है।

    पूरी तरह आवासीय हाेगा गुरुकुलम
    गुरुकुलम की व्यवस्था पूरी तरह से आवासीय हाेगी। जो विद्यार्थी वहां रहेंगे उनके भोजन और बेहतर आवासन की व्यवस्था की जाएगी। उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों के आवास भी वहीं रहेंगे।

    पहली से इंटर तक की पढ़ाई, सभी में 30-30 बच्चों के दो सेक्शन
    गुरुकुलम में पहली से इंटर तक की पढ़ाई होगी। एक कक्षा के लिए 30-30 बच्चों का दो सेक्शन होगा। इनके पाठ्यक्रम अलग होंगे। इन्हें वेद, कर्मकांड, विज्ञान व एआई की शिक्षा दी जाएगी। अंग्रेजी व हिंदी साहि्त्य भी पढ़ाया जाएगा।

    पूरी तरह से नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था
    गुरुकुलम की पढ़ाई पूरी तरह से नि:शुल्क होगी। कम आय वाले परिवार से आने वाले बच्चों को नामांकन में प्राथमिकता मिलेगी। नामांकन की व्यवस्था के संचालन के लिए दक्षिण भारत से आने वाले शिक्षकों द्वारा सिस्टम तैयार किया जाएगा।

    इंटर के बाद स्नातक तक की पढ़ाई का भी इंतजाम
    इंटर के बाद स्नातक तक की पढ़ाई का भी इंतजाम गुरुकुलम में कराए जाने की भी योजना है। इस बारे में दिल्ली स्थित लाल बहादुर शस्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय से बात की गयी है।

     

  • बिहार के 8053 पंचायतों में खुलेंगे आधार सेवा केंद्र, गांव में ही मिलेंगी 64 सुविधाएं

    बिहार के 8053 पंचायतों में खुलेंगे आधार सेवा केंद्र, गांव में ही मिलेंगी 64 सुविधाएं

    पटना
    बिहार के गांवों के लोगों को अपना और परिवार का आधार बनवाने के लिए भटकना नहीं होगा। उन्हें यह सेवा उनके पंचायत सरकार भवन में ही मिल जायेगी। इसके लिए जल्द सभी 8053 पंचायतों में आधार सेवा केंद्र शुरू होंगे। पंचायती राज विभाग ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। आधार केंद्र संचालन के लिए पंचायती राज विभाग और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के बीच जल्द करार होगा। इसका मसौदा तैयार किया जा रहा है। आधार कार्ड के अलावे जाति, निवासी प्रमाण पत्र, पैन, पासबुक अपडेट, पेंशन, राशन कार्ड, दाखिल-खारिज जैसी सेवाएं भी इन केंद्रों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मसौदे के आधार पर विभाग कंप्यूटर सहित आवश्यक उपकरण उपलब्ध करायेगा। कॉमन सर्विस सेंटर के कर्मी इसका संचालन करेंगे। यूआईडीएआई (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) द्वारा सीएससी को आधार सेवा केंद्र संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस मिल जायेगा। इसकी अनुमति केंद्र से ले ली गई है।

    यह होगा फार्मूला
    केंद्र संचालन के लिए कर्मी का मानदेय आदि का भुगतान सीएससी करेगा। इन कर्मियों का दावा पंचायती राज विभाग के कर्मी के तौर पर नहीं किया जा सकेगा। आधार सेवा केंद्र से प्राप्त राशि में 80 प्रतिशत सीएससी, जबकि 20 फीसदी लाभ की राशि पंचायती राज विभाग को दी जायेगी।

    इन सेवाओं के लिए लगेगा शुल्क
    आधार कार्ड पंजीकरण और अपडेट, पैन कार्ड और पासपोर्ट, बिजली, पानी और अन्य यूटिलिटी बिलों के भुगतान पर निर्धारित शुल्क ली जायेगी। बैंकिंग और बीमा सेवा (लोन, माइक्रो क्रेडिट), रेल, बस या हवाई टिकट बुकिंग के लिए शुल्क लिया जायेगा।

    केंद्रों पर ये सेवाएं मिलेंगी
    जाति, आय, आवास प्रमाण पत्र, कृषि, खाद्य उपभोक्ता संरक्षण, परिवहन, योजना विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार, शिक्षा तथा समाज कल्याण विभाग से जुड़ी सेवाएं। छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, पेंशन, डुप्लीकेट आरसी, फिटनेस नवीनीकरण, दाखिल-खारिज, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन, जमाबंदी, माप तौल उपकरणों की बिक्री के लिए लाइसेंस, राशन कार्ड, राशन कार्ड से नाम हटवाना, राशन कार्ड अपडेट, एलपीसी, दाखिल खारिज के लिए आवेदन, ऑनलाइन जमाबंदी देखना और प्रिंट लेना, ऑनलाइन लगान भुगतान आदि।

    नया आधार बनाने के लिए 75 रुपये शुल्क लगेगा
    नया आधार बनाने के लिए संबंधित व्यक्ति को 75 रुपये शुल्क देना होगा। अन्य सेवाओं के लिए भी निर्धारित शुल्क ही देना होगा। अधिक राशि मांगने वाले कर्मी पर कार्रवाई होगी। जाति प्रमाण पत्र, आवास प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित 21 तरह की सेवाओं के लिए राशि नहीं ली जायेगी। कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित होने पर 64 प्रकार की नागरिक सुविधा मिलने में आसानी हो जायेगी।