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  • बिहार के सभी सरकारी ITI में लगेंगे सोलर पैनल, बिजली खर्च घटाने की तैयारी

    बिहार के सभी सरकारी ITI में लगेंगे सोलर पैनल, बिजली खर्च घटाने की तैयारी

     पटना
    राज्य के सभी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सोलर पैनल लगेंगे। सोलर पैनल लगाने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी गई है।

    सोलर पैनल लगाने का उद्देश्य सभी आईटीआई में बिजली की निर्भरता और ऊर्जा खर्च को कम करना है। सौर ऊर्जा के उपयोग से संस्थानों के परिसर में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लंबे समय में संस्थानों के संचालन खर्च को भी कम किया जा सकेगा।

    मंगलवार को युवा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री अरुण शंकर प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।

    सभी नोडल आईटीआई में नेशनल एप्रेंटिशिप प्रमोशन स्कीम (एनएपीएएस) को तेजी से लागू कराने पर जोर दिया गया। साथ ही आईटीआई के पूर्व छात्रों को संस्थानों से जोड़ने के लिए एल्युमिनाइ एसोसिएशन गठित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सचिव कौशल किशोर एवं निदेशक रंजीत कुमार मौजूद थे।

    महिला आईटीआई में पीपीपी मोड से बनेंगे छात्रावास
    जिन जिलों के महिला आईटीआई में छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां पीपीपी मोड में छात्रावास निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

    वहीं, जिन सरकारी आईटीआई के पास वर्तमान में अपना भवन नहीं है, उनके लिए आम लोगों से भूमि दान लेने के उद्देश्य से विज्ञापन जारी करने पर सहमति बनी। भूमि दान करने वाले व्यक्ति या उनके पूर्वजों के नाम पर संबंधित आईटीआई का नामकरण किया जाएगा।

     

  • बिहार के हर जिले में बनेगा दंगा निरोधी दस्ता, 20 मिनट में पहुंचेगी पुलिस टीम

    बिहार के हर जिले में बनेगा दंगा निरोधी दस्ता, 20 मिनट में पहुंचेगी पुलिस टीम

    पटना
    बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले और भीड़ नियंत्रण जैसी स्थिति से निपटने के ल‍िए बड़ी व्‍यवस्‍था की गई है।

    अब हर जिले में दंगा निरोधी दस्ता (Riot Control Unit) तैयार किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर कुल 49 दंगा निरोधी कंपनियों के गठन की योजना बनाई है।

    इनके लिए कुल 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। हर दंगा निरोधी कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। एक प्लाटून में कुल 47 पुलिसकर्मी रहेंगे।

    संसाधनों से लैस रहेगी टीम
    इनमें आंसू गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक, वायरलेस ऑपरेटर और अन्य प्रशिक्षित कर्मी शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर महिला पुलिसकर्मी, चिकित्सा और एंबुलेंस सहायता दल तथा वीडियोग्राफी के लिए कर्मी भी टीम का हिस्सा होंगे।

    प्रत्येक प्लाटून को एक बस और एक ट्रक समेत दो वाहन मिलेंगे। जिलों की श्रेणी के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। ए श्रेणी में पटना को तीन कंपनियां और 18 वाहन मिलेंगे।

    गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और अन्य चिन्हित जिलों में दो-दो कंपनियां और 12-12 वाहन होंगे।

    बी श्रेणी के जिलों में एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन, जबकि सी श्रेणी के जिलों में एक-एक प्लाटून और दो-दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

    20 म‍िनट के अंदर होगी रवानगी
    दंगा या हिंसा की सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष से तत्काल सूचना प्रसारित की जाएगी। दंगा निरोधी दस्ते को 20 मिनट के भीतर निर्धारित स्थान के लिए रवाना किया जाएगा।

    मौके पर पहुंचकर टीम वरीय पुलिस अधिकारी के साथ समन्वय करते हुए स्थिति का लगातार आकलन करेगी और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करेगी।

    दस्ते में शामिल पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। हर जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का प्रशिक्षण होगा। इसके बाद प्रत्येक प्लाटून को हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स कराया जाएगा।

     

  • ED की कार्रवाई पर भगवंत मान का BJP पर हमला, बोले- चुनाव से पहले विरोधियों को जेल भेजना लोकतंत्र के खिलाफ

    ED की कार्रवाई पर भगवंत मान का BJP पर हमला, बोले- चुनाव से पहले विरोधियों को जेल भेजना लोकतंत्र के खिलाफ

    चंडीगढ़.

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय का काम भाजपा के लिए काम करना रह गया है। पंजाब में भाजपा के पैर नहीं लग रहे हैं, इसलिए पंजाब के सहप्रभारी को निशाना बनाया गया है।

    उन्होंने कहा कि जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है, उस समय जैन जेल में थे। उन्हें उम्मीद है कि अदालत से न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में ऐसा तरीका चल पड़ा है कि जहां चुनाव होने वाले हों, वहां विपक्षी दलों के बड़े नेताओं को दो-तीन महीने के लिए जेल भेज दिया जाए और बाद में मामले को देखा जाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। मान ने दिल्ली चुनाव के दौरान संजय सिंह और मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया।

    ईडी के पत्रों पर भी सवाल
    मान ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पत्र भेजे जाते हैं, लेकिन उनमें लगाए गए आरोपों में सच्चाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को कोई अवसर नहीं मिल रहा, इसलिए वे आम आदमी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से ईमानदारी का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। ईडी ने पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को पत्र भेजकर निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आधार बताया है। एजेंसी का दावा है कि धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच में भ्रष्टाचार और अन्य कानूनों के तहत संज्ञेय अपराध से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। पंजाब सरकार अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है।

    क्या है ईडी का आरोप
    ईडी की जांच एक मामले से जुड़ी है, जिसमें अजय सहगल और इंडियन कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटी से जुड़े लोगों की जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, कुछ रियल एस्टेट संस्थाओं को भूमि उपयोग परिवर्तन की सुविधा दिलाने के प्रयासों की जांच के दौरान नितिन गोहल की भूमिका सामने आई। ईडी का आरोप है कि गोहल ने मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजबीर घुम्मण से संपर्क का इस्तेमाल सरकारी कामकाज प्रभावित करने के लिए किया। एजेंसी ने तबादलों, तैनातियों और अन्य सरकारी लाभों में बिचौलिये की भूमिका का आरोप लगाया है। ईडी के अनुसार कथित गतिविधियों से करीब दो करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय जुटाई गई।

    हवारा की पैरोल पर बोले मान
    जगतार सिंह हवारा की पैरोल के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्यपाल से मुलाकात कर चुकी है और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने की बात कही है। अब फैसला भाजपा को करना है। उन्होंने मानवाधिकार के आधार पर हवारा को छोड़ने की बात कही।

  • JPSC-JSSC विवाद: छात्रों और सरकार के बीच बातचीत से समाधान की उम्मीद

    JPSC-JSSC विवाद: छात्रों और सरकार के बीच बातचीत से समाधान की उम्मीद

    रांची
    JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर राजधानी रांची में पिछले 25 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है।

    परीक्षा रद करने से संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी छात्रों और सरकार के बीच संवाद का स्वागत करते हुए इसे समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

        झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच सहमति बनी, और छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की – यह ख़बर सुनकर बहुत खुशी हुई।

        मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना, और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम रखा, और अपनी बात मनवाई।

    जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के बैनर तले जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में रद की गई परीक्षाओं की सीबीआई के अलावा अब हाई कोर्ट के पांच सिटिंग जजों की बेंच से जांच कराने की मांग भी शामिल है। छात्रों का कहना है कि उनकी यह अंतिम मांग पूरी होने के साथ ही वे आंदोलन वापस ले लेंगे।

    कोर कमेटी की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस
    झारखंड सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने को लेकर जारी अधिसूचना पर छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आज उनके आंदोलन का 26वां दिन है। सरकार ने बुधवार को परीक्षा रद्द करने को लेकर अधिसूचना जारी की थी, जिसका छात्रों ने अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि आज सुबह 10 बजे आंदोलन की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार की अधिसूचना में न्यायिक जांच का उल्लेख किया गया है, लेकिन उसके प्रावधान पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। सरकार की ओर से प्रस्तावित न्यायिक जांच सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने की बात कही गई है। रविंद्र पासवान ने कहा कि परीक्षा रद्द करने से जुड़ी छात्रों की सभी मांगें सरकार ने मान ली हैं, लेकिन उनकी मुख्य मांग अब जांच को लेकर है।

    यदि सरकार मामले की जांच CBI को सौंपने में सक्षम नहीं है, तो छात्रों की मांग है कि जांच किसी सेवारत न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। इसी मुद्दे पर आज की कोर कमेटी बैठक में विशेष रूप से चर्चा होगी। बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी छात्रों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी जाएगी

    सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र
    छात्रों का कहना है कि परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आंदोलनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़े मामलों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई के साथ गलत तरीके से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की भी पहचान होनी चाहिए।

    सीएम ने चुना बातचीत का रास्ता
    राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में छात्रों और सरकार के बीच बातचीत हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की बात सुनी और सरकार की ओर से समाधान का रास्ता निकाला। छात्रों ने भी संयम बनाए रखते हुए अपनी बात रखी। इस पहल को आंदोलन के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    वहीं, आंदोलन के बीच जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़े छात्र मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर अब भी अपनी बात पर कायम हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का ठोस भरोसा चाहिए।

    अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज
    परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ विभिन्न विभागों में कार्यरत अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा और नियुक्तियों को रद करने के विरोध में भी आवाज उठाई गई है। वहीं, कुछ अभ्यर्थी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आंदोलन से जुड़े अलग-अलग मुद्दों के बीच सरकार के साथ बातचीत को समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

  • जयपुर को 871 करोड़ की सौगात, आचार संहिता से पहले CM भजनलाल ने किए विकास कार्यों के शिलान्यास-लोकार्पण

    जयपुर को 871 करोड़ की सौगात, आचार संहिता से पहले CM भजनलाल ने किए विकास कार्यों के शिलान्यास-लोकार्पण

    जयपुर
    राजस्थान में निकाय चुनाव की आहट के बीच राजधानी जयपुर को विकास की बड़ी सौगात मिली है। आचार संहिता लगने से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर शहर में 871 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। 465 करोड़ रुपए से अधिक के सीवरेज कार्य, 81 करोड़ रुपए के ट्रैफिक सुधार कार्य और जेडीए के करीब 325 करोड़ रुपए के विकास कार्य इस पैकेज का हिस्सा हैं। इनके साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में नए उपकरण और भवन, नए अंडरब्रिज, यू-टर्न, सब-वे और 507 किलोमीटर से अधिक सीवर लाइन बिछाने के काम भी शामिल हैं।

    इन कार्यों का हुआ लोकार्पण
    -आरयूएचएस में 128 स्लाइस सीटी स्केन मशीनें और 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन
    -आरयूएचएस में 18 करोड़ रुपए से 180 कमरों का छात्रावास 18 करोड़ से तैयार
    -एसएमएस अस्पताल के आयुष्मान टावर के अंतर्गत कॉर्डियक टॉवर का उद्घाटन
    -चांदपोल के जनाना अस्पताल में 51 करोड़ रुपए की लागत से नवीन आईपीडी टावर शुरू
    -झोटवाड़ा के अभयपुर और दूदू विधानसभा के रेहलाना में उप-स्वास्थ्य केन्द्र जनता को समर्पित
    -राजस्थान पुलिस अकादमी में 12 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से निर्मित 300 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला महिला छात्रावास

    इनका हुआ शिलान्यास
    सीवरेज की दिक्कत होगी दूर: अमृत 2.0 योजना के तहत जयपुर नगर निगम क्षेत्र में 465 करोड़ रुपए से अधिक के सीवरेज संबंधी कार्य, 507 किलोमीटर से अधिक की बिछेगी सीवर लाइन, 52 हजार आवासों को सीवर कनेक्शन से लगभग 13 लाख नागरिकों को फायदा मिलेगा।

    ट्रैफिक सुधार पर फोकस
    -जयपुर में ट्रैफिक सुधार के लिए 81 करोड़ रुपए की लागत के सात कार्य, करतापुरा नाले के पास अंडरब्रिज, अजमेर रोड पर पुरानी चुंगी जंक्शन पर अंडरब्रिज, सीकर रोड, हरे कृष्णा मार्ग (महल रोड) और न्यू सांगानेर रोड पर यू-टर्न एवं सब-वे निर्माण सहित अन्य कार्य किए जाएंगे।
    -टोंक रोड और हरे कृष्णा मार्ग (महल रोड) को जोड़ने के लिए लगभग 60 करोड़ रुपए से यातायात विकास कार्य करवाए जाएंगे।

    ये काम भी होंगे
    -विद्याधर नगर सेक्टर-01 में सूचना व्यवस्था एवं मनोरंजन केंद्र का निर्माण किया जाएगा।
    -द्रव्यवती नदी पर 35 करोड़ रुपए से रूफटॉप सोलर लगाया जाएगा।
    -झोटवाड़ा में सैटेलाइट चिकित्सालय सहित विभिन्न विकास कार्य करवाए जाएंगे।

    सीएम ने 7 शहरों को दी ई-बसों की सौगात
    निकाय चुनाव की आचार संहिता से ठीक पहले राज्य सरकार ने सौगातों की झड़ी लगा दी। राजधानी सहित राज्य के अन्य शहरों में सार्वजनिक यातायात को गति देने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को 71 पीएम ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जयपुर स्थित ओटीएस परिसर में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ई-बसों को रवाना किया।

    इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य के जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, अलवर और सीकर में कुल 1150 बसों का संचालन किया जाएगा। इससे पहले बसों का विधि विधान से पूजन किया गया और मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बसों की सुविधाओं के बारे में भी जाना। कार्यक्रम में श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत एक लाख 32 हजार 421 श्रमिकों और उनके आश्रितों को 154 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई।

  • बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में बड़ा एक्शन, 200 कर्मचारी निलंबित; 2 दर्जन डॉक्टरों की पदोन्नति रद्द

    बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में बड़ा एक्शन, 200 कर्मचारी निलंबित; 2 दर्जन डॉक्टरों की पदोन्नति रद्द

    पटियाला.

    बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर विवाद गहरा गया है। यूनिवर्सिटी ने हाल ही में नियुक्त किए गए 200 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

    वहीं, सामान्य पूल में पदोन्नत किए गए करीब दो दर्जन डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है। ये डॉक्टर गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात थे। यह कार्रवाई 11 अगस्त को हुई यूनिवर्सिटी के प्रबंधन मंडल की बैठक के बाद की गई। बैठक में इन नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई गई। प्रबंधन मंडल का कहना है कि कई नियुक्तियों में यूनिवर्सिटी के निर्धारित नियमों और विनियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद सभी नियुक्तियों को निलंबित कर प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा का फैसला लिया गया। इसके लिए एक समिति भी गठित की गई है।

    पदों की मंजूरी और बजट पर भी सवाल
    आरोप है कि कई नियुक्तियां प्रबंधन मंडल से पदों की मंजूरी और बजट संबंधी स्वीकृति लिए बिना की गईं। इनमें अनुसंधान अधिकारी और सहायक प्रोफेसर समेत कई समूह-ए के पद भी शामिल हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में कुछ ऐसे विभागों के पद सृजित किए गए, जो वहां मौजूद ही नहीं हैं। बताया जा रहा है कि कई नवनियुक्त कर्मचारियों को निलंबन आदेश जारी होने से पहले एक माह का वेतन भी नहीं मिला था। वहीं, पूर्व कुलपति के कार्यकाल में पहले नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारियों का वेतन भी रोक दिया गया है।

    पूर्व कुलपति ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
    पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद ने नियुक्तियों का बचाव करते हुए प्रबंधन की कार्रवाई को हास्यास्पद बताया। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में करीब डेढ़ साल तक प्रबंधन मंडल की बैठक नहीं हुई, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद नियुक्तियों की समीक्षा के लिए बैठक बुला ली गई। डॉ. सूद का कार्यकाल जून में समाप्त हुआ था। उन्होंने दावा किया कि नियुक्तियां प्रबंधन मंडल की मंजूरी के बाद हुई थीं और नियुक्ति पत्रों पर दो सदस्यों के हस्ताक्षर थे। इनमें फरीदकोट के विधायक गुरदित सिंह सेखों भी शामिल थे। प्रबंधन मंडल के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह वांडर ने कहा कि यूनिवर्सिटी नियुक्तियों और पदोन्नतियों की जांच एवं समीक्षा कर रही है। हालांकि, उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया। कुछ नियुक्ति पत्र पूर्व कुलपति का कार्यकाल समाप्त के कई दिन बाद जारी होने की बात भी आई है।

  • पटना के जीरो माइल जाम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा ठोस समाधान का प्लान

    पटना के जीरो माइल जाम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा ठोस समाधान का प्लान

     पटना
    राजधानी पटना के प्रवेश द्वार माने जाने वाले जीरो माइल चौराहे पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

    अदालत ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि आखिर इस स्थायी ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

    कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह एवं न्यायाधीश राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

    ट्रैफ‍िक जाम से हर दिन होती परेशानी
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बीरेन्द्र कुमार ने कोर्ट को बताया कि जीरो माइल के पूर्वी छोर पर लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।

    इससे इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरने वाले लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। जाम के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ लोगों का समय भी बर्बाद हो रहा है।

    अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
    खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महाधिवक्ता एसडी संजय को निर्देश दिया कि वह इस विषय को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखें और सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कराया जाए।

    अदालत ने विशेष रूप से हलफनामे में जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित कदमों और कार्ययोजना की जानकारी देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    जाम को लेकर हाईकोर्ट के सख्‍त रुख को देखते हुए आने वाले समय में जीरो माइल के जाम की व‍िभ‍ीष‍िका से राहत म‍िलने की उम्‍मीद बढ़ गई है।  

     

  • बिहार में भारी बारिश का अलर्ट, 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; पटना में भी झमाझम के आसार

    बिहार में भारी बारिश का अलर्ट, 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; पटना में भी झमाझम के आसार

    पटना
     बिहार में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। राज्य के कई जिलों में बारिश का दौर है। बुधवार को बिहार के करीब 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया है कि बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर यानी कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसी वजह से पूर्वी भारत के कई राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है। बिहार में भी इसका असर दिखाई देगा।

    इन जिलों में अलर्ट
    मौसम विभाग ने बताया है कि बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवान, सारण और गोपालगंज में तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा बक्सर, भोजपुर, कैमूर, अरवल, रोहतास और औरंगाबाद में भी तेज बारिश हो सकती है। राजधानी पटना समेत राज्य के अन्य जिलों में आज दिनभर काले बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग ने रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया है। पटना में आज हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. कुछ जगहों पर तेज बौछारें भी गिर सकती हैं।

    मौसम : 24 घंटे में 15 एमएम हुई बारिश, देर शाम झमाझम से राहत
    मुजफ्फरपुर जिले में अभी लगातार बारिश की संभावना नहीं है। मंगलवार को जारी पांच दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले चार दिनों के अंदर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश के आसार हैं। कुछ स्थानों पर गरज के साथ बिजली चमकने तथा तेज हवा चलने की संभावना है। इधर, मंगलवार को पिछले 24 घंटे में करीब 15.2 एमएम बारिश दर्ज की गई।

    वहीं, अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 12.9 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से पुरवा हवा चली। शाम में कुछ देर की बारिश से गर्मी से राहत मिली।

    भागलपुर में 23 तक बारिश के आसार
    बिहार कृषि विवि (बीएयू) सबौर ने कृषि एडवाइजरी जारी की है। 23 अगस्त तक जिले के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने एवं हल्की बारिश का अनुमान है। अधिकतम तापमान 33-34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26-27 डिग्री रहने की संभावना है। यह जानकारी बीएयू के नोडल अधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार ने दी।

    मौसम वैज्ञानिक डॉ. नेहा पारिक ने किसानों के लिए कहा कि वे धान की सुगन्धित किस्मों की रोपाई प्राथमिकता से करें। धान रोपित खेतों में 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से एल्गी कल्चर का प्रयोग करें। खेत में जलजमाव बनाये रखें। जुलाई माह में रोपे गये धान में नत्रजन (यूरिया) का उपरिवेशन करें। धान की रोपाई के 45-50 दिनों बाद यूरिया का दूसरा उपरिवेशन करें। अरहर में आवश्यकतानुसार गैप फिलिंग, छंटाई तथा निकाई-गुड़ाई करते रहना चाहिए।

  • पटियाला के घनौर में फिर घग्गर का खौफ, सड़क पर साढ़े 3 फीट पानी से मचा हड़कंप

    पटियाला के घनौर में फिर घग्गर का खौफ, सड़क पर साढ़े 3 फीट पानी से मचा हड़कंप

    पटियाला.

    पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते घग्गर दरिया का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। इससे पटियाला के घनौर क्षेत्र के लोगों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। बुधवार तड़के करीब तीन बजे से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    शमशपुर गांव के पास घग्गर के ओवरफ्लो होने से उंटसर-लोहसिंबली मार्ग पर करीब साढ़े तीन फीट पानी बह रहा है। सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के कारण राहगीरों और स्कूली बच्चों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। क्षेत्र के कई लोग रोजमर्रा के काम और मजदूरी के लिए अंबाला शहर जाते हैं। ऐसे में रास्ते में पानी भरने और बहाव तेज होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

    बारिश में सामने आती है समस्या
    ग्रामीणों जसवंत सिंह, तरलोचन सिंह, रणजीत सिंह और दलविंदर सिंह ने कहा कि यह समस्या हर साल बारिश के मौसम में सामने आती है। उनका आरोप है कि प्रशासन और सरकार की ओर से स्थायी समाधान का आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों के अनुसार, हर वर्ष इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में फसल पानी की चपेट में आ जाती है। उन्होंने प्रशासन से कई बार इस स्थान पर पुलिया बनाने की मांग की है, ताकि पानी के कारण सड़क संपर्क बाधित न हो और लोगों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सके।

    फंसी गाड़ी को ग्रामीणों ने निकाला बाहर
    बुधवार सुबह पानी के तेज बहाव के बीच एक गाड़ी भी फंस गई। ग्रामीणों ने मिलकर प्रयास कर गाड़ी को बाहर निकाला। ग्रामीणों ने बताया कि फिलहाल करीब 200 एकड़ फसल पर पानी का खतरा मंडरा रहा है। यदि घग्गर का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आसपास के क्षेत्र में हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जलस्तर की लगातार निगरानी करने, प्रभावित मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था करने और स्थायी समाधान के लिए जल्द कदम उठाने की मांग की है।

  • JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने पर मचा घमासान, नौकरी बचाने हाई कोर्ट जाएंगे अभ्यर्थी

    JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने पर मचा घमासान, नौकरी बचाने हाई कोर्ट जाएंगे अभ्यर्थी

    रांची
     जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद करने की घोषणा के बाद कानूनी पहलू पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर नौकरी से हटाए जाने वाले कर्मियों का क्या होगा। इस पर हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि सरकार का निर्णय पूरी तरह से एकपक्षीय है।

    सरकार ने बिना किसी निष्पक्ष जांच और नौकरी करने वाले अभ्यर्थियों को सुनवाई मौका दिए बिना ही ऐसा निर्णय लिया है, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। सरकार ने कोर्ट के आदेश पर इनकी नियुक्ति की था और सरकार ही उन्हें हटाने का निर्णय लिया है।

    ऐसा करना उनके साथ अन्याय है। क्योंकि इनकी नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई है। कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकालना जाना उचित नहीं है, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

    सरकार के निर्णय के खिलाफ दाखिल करेंगे याचिका
    सरकार की घोषणा के बाद जिनकी नौकरी चली गई है, वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रहे हैं। इस केस से संबंधित अधिवक्ता का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से इससे संबंधित कोई आदेश या संकल्प जारी नहीं किया जाता है, तब तक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है।

    क्योंकि सरकार की ओर से जारी आदेश या संकल्प में सीजीएल परीक्षा रद करने का आधार बताया जाएगा। जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार के निर्णय से प्रभावित अभ्यर्थियों ने अधिवक्ताओं से संपर्क स्थापित करना प्रारंभ कर दिया है।

    उनका कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सीजीएल परीक्षा का परिणाम जारी करते हुए उनकी नियुक्ति सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर हुई थी। ऐसे में यह एक तरह से कोर्ट के अवमानना का भी मामला बनता है।

    सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक: अजीत कुमार
    जेएसएससी सीजीएल में पेपर लीक होने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पैरवी करने वाले वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक है। इस मामले में हो रही जांच में सारे साक्ष्य उपलब्ध थे।