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  • अंबाला में 9614 घरों में लगेंगे सोलर सिस्टम, 6891 से अधिक घरों की छतों पर पहुंचे सौर पैनल

    अंबाला में 9614 घरों में लगेंगे सोलर सिस्टम, 6891 से अधिक घरों की छतों पर पहुंचे सौर पैनल

    अंबाला.

    बिजली की बढ़ती मांग और परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में अंबाला तेजी से सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जिले में अब तक 6,891 घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं।

    जिले को 9,614 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इस तरह अंबाला अपने लक्ष्य का 71.68 प्रतिशत हासिल कर चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधीन आने वाले जिलों में अंबाला रूफटॉप सोलर स्थापना के मामले में दूसरे स्थान पर है। अंबाला से आगे कुरुक्षेत्र है। वहां 8,495 के लक्ष्य के मुकाबले 7,130 सौर कनेक्शन लगाए जा चुके हैं और लक्ष्य की 83.93 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। वहीं अंबाला में 6,891 कनेक्शन के साथ 71.68 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। उत्तर हरियाणा के 10 जिलों में योजना के तहत एक लाख घरेलू रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक रखा गया है। इनमें से 51,940 सिस्टम लगाए जा चुके हैं, यानी क्षेत्र ने करीब 52 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है।

    सब्सिडी ने बढ़ाया लोगों का रुझान
    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को सौर संयंत्र की क्षमता के अनुसार केंद्रीय सहायता मिलती है। एक किलोवाट संयंत्र पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78 हजार रुपये तक केंद्रीय सब्सिडी उपलब्ध है। इसके अलावा हरियाणा सरकार की ओर से पात्र परिवारों को अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है।

    हरियाणा में 2.20 लाख सोलर सिस्टम का लक्ष्य
    हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 2.20 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है। जून 2026 में प्रदेश में करीब 86 हजार सिस्टम लगाए जाने की जानकारी सरकार ने दी थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक देश में 1,62,152 मेगावाट सौर विद्युत क्षमता स्थापित हो चुकी थी। इसमें करीब 30,110 मेगावाट रूफटॉप सौर क्षमता शामिल है। अक्षय ऊर्जा दिवस पर अंबाला के ये आंकड़े बताते हैं कि घरों की छतें अब केवल मकानों का हिस्सा नहीं रह गई हैं, बल्कि बिजली उत्पादन का माध्यम भी बन रही हैं।

  • 8 साल बाद हुई JET परीक्षा भी रद्द, झारखंड में सहायक प्राध्यापक भर्ती और PhD नामांकन पर संकट

    8 साल बाद हुई JET परीक्षा भी रद्द, झारखंड में सहायक प्राध्यापक भर्ती और PhD नामांकन पर संकट

    रांची
     झारखंड में झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) 18 वर्ष बाद आयोजित हुई थी। लंबे इंतजार के बाद हुई यह परीक्षा भी घोटाले की भेंट चढ़ गई। राज्य सरकार ने इस परीक्षा को भी रद कर दिया। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कालेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक बार फिर अधर में चली गई है।

    जबतक यह पात्रता परीक्षा फिर से आयोजित नहीं हो जाती तबतक सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी। दूसरी तरफ, पहली बार जेट परीक्षा के माध्यम से ही पीएचडी में नामांकन होना था। अब जेट रद होने से पीएचएडी में नामांकन में भी पेंच फंस गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग की झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट)-2024 इस वर्ष 26 अप्रैल को आयोजित हुई थी।

    हालांकि दो विषयों उड़िया और शिक्षा विषय की परीक्षा रद कर दी गई थी, जो बाद में 14 जून को आयोजित हुई। जेट परीक्षा राज्य के छह जिलों के 434 केंद्रों पर हुई थी, जिसमें लगभग 1.75 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे।

    परीक्षा रद होने से इतने अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। इनमें से हजारों अभ्यर्थी ऐसे है, जो लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे थे। इस परीक्षा का परिणाम भी जारी नहीं हो सका।

    अब झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग लेगा परीक्षा
    जेट परीक्षा अब प्रस्तावित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग आयोजित करेगा। दरअसल, राज्य सरकार ने हाल ही में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 लागू किया है। इसमें जेट परीक्षा इस आयोग के माध्यम से होने का प्रविधान किया गया है।

    हालांकि अभी तक झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन नहीं किया है। इसी आयोग के माध्यम से ही सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होनी है।

    इससे पहले, जेपीएससी को नियुक्ति की अधियाचना भेज दी गई थी, लेकिन हाल ही में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन तथा पदों के पुनर्गठन की जानकारी देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने का पत्र जेपीएससी को भेजा था।

    सहायक प्राध्यापकों के 1,110 से अधिक पद हैं रिक्त
    झारखंड के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के 1,110 से अधिक पद रिक्त हैं। वहीं, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने हाल ही में पदों के पुनर्गठन के क्रम में 1,351 अतिरिक्त पद सृजित किए हैं। इन पदों के विरुद्ध भी नियुक्ति होनी थी। बताते चलें कि राज्य में वर्ष 2008 के बाद सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति न हीं हुई है।

    विश्वविद्यालयों में रिक्त रह गए गैर शैक्षणिक पदाधिकारियों के पद
    विश्वविद्यालयों में गैर शैक्षणिक पदाधिकारियों के 23 पदों पर होनेवाली नियुक्ति प्रक्रिया भी रद हो गई है। इससे विश्वविद्यालयों में ये सभी पद रिक्त रह गए। रिक्तियों की बात करें तो राज्य के सभी नौ विश्वविद्यालयों में एक-एक वित्त पदाधिकारी की नियुक्ति होनी थी।

    वहीं, कोल्हान विश्वविद्यालय को छोड़कर अन्य सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक (कुल आठ पद) तथा रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार (दो पद) के पद पर नियुक्ति होनी थी।

    इसी तरह, विनोबा भावे विश्वविद्यालय तथा रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार (दो पद) तथा रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार तथा उपनिदेशक-शारीरिक शिक्षा के एक-एक पद पर नियुक्ति होनी थी।

     

  • जींद में पंचायत के दौरान खूनी संघर्ष, दो पक्षों में पथराव; महिला और युवक पर चढ़ाई गाड़ी

    जींद में पंचायत के दौरान खूनी संघर्ष, दो पक्षों में पथराव; महिला और युवक पर चढ़ाई गाड़ी

    सफीदों/जींद.

    गांव बहादुरपुर में बुधवार दोपहर को फिर से दो समुदायों के बीच पत्थरबाजी हुई। मामला तब बढ़ गया, जब दोनों समुदाय के बीच गांव की चौपाल में समझौते को लेकर पंचायत हुई थी। पंचायत में पुलिस नहीं थी। तनाव बढ़ने पर दोनों समुदाय आमने-सामने हो गए और गाली-गलौज करते हुए घरों से लाठी-डंडों से लेकर पत्थरबाजी करने लगे।

    गांव के एक व्यक्ति ने 27 वर्षीय युवक आशीष व 36 वर्षीय महिला कमलेश के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। सूचना मिलने पर सदर थाना प्रभारी राजेश कुमार व शहर थाना प्रभारी सतीश कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और दोनों समुदायों के लोगों को समझाकर घरों में भेजा। मामला करीब दो घंटे बाद शांत हुआ और एसपी कुलदीप सिंह ने गांव में फिर से पुलिस बल की स्थायी ड्यूटी लगा दी। युवाओं के साथ महिलाएं भी झगड़े में लाठी-डंडे उठाकर पथराव में शामिल हो रही हैं।

    17 अगस्त को हुआ था तीन युवकों पर हमला
    17 अगस्त की रात को अनिकेत पर गांव लौटते समय रेलवे स्टेशन के पास गांव के ही तीन युवकों ने हमला कर दिया था। उसके अनुसार आरोपितों ने लाठी-डंडों और तेजधार हथियार से उस पर हमला किया। इसमें वह घायल हो गया। अनिकेत को सफीदों के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात एक परचून की दुकान पर 10-15 युवकों ने पथराव कर दिया था। इसमें दुकान के शीशे टूट गए और दुकान पर आए पूर्व सरपंच संदीप की बाइक क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस मामले में नेत्रपाल नामक युवक को भी चोट आई है। 18 अगस्त की सुबह दोनों समुदायों के बीच पत्थरबाजी हो गई। घटना के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस बल नियुक्त किया था, लेकिन बाद में पुलिस हटने के बाद बुधवार को फिर से पत्थरबाजी हो गई।

    डाक कांवड़ लाते समय हुआ था झगड़ा
    गांव बहादुरपुर के दो समुदायों के युवक डाक कांवड़ लेकर आ रहे थे। मुजफ्फरनगर में उनके बीच झगड़ा हो गया था। उसी झगड़े के चलते दोनों समुदाय आमने-सामने हैं। सदर थाना प्रभारी राजेश कुमार ने कहा कि वह पंचायत में मौके पर थे। पंचायत शुरू होते ही एक युवक ने झगड़ा शुरू कर दिया था। इसके बाद पुलिस बुलाकर दोनों पक्षों को समझाया गया। फिलहाल एक पुलिस की बस गांव में स्थायी रूप से लगा दी गई है। इसका इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सत्यवान को बनाया गया है। जो घायल हुए हैं, जल्दी ही उनके बयान दर्ज करके आगामी कार्रवाई की जाएगी।

  • जालंधर में 600 करोड़ का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट मंजूर, घरों के कूड़े से बनेगी खाद

    जालंधर में 600 करोड़ का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट मंजूर, घरों के कूड़े से बनेगी खाद

    जालंधर.

    शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से लेकर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को आखिरकार मंजूरी मिल गई। करीब 600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का टेंडर नगर निगम की वित्त एवं ठेका कमेटी ने पास कर दिया है। अब जल्द की कंपनी शहर में वेस्ट मैनेजमेंट का जिम्मा संभाल लेगी। इसके तहत कंपनी घर-घर से कूड़ा उठाएगी और प्लांट में खाद बनेगी।

    इस प्रोजेक्ट के दो टेंडर लगाए गए थे और दोनों टेंडर एक ही कंपनी बीवीजी इंडिया लिमिटेड को मिले हैं। प्रोजेक्ट में वित्तीय बदलाव को लेकर इसे संशोधित करके हाउस में मंजूर करवाया जाएगा। उम्मीद है कि मंगलवार को हाउस की मीटिंग बुलाई जा सकती है। पिछली वित्त एंव ठेका कमेटी की मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को विरोध की आशंका के चलते लंबित कर दिया गया था। नगर निगम ने पहले इस प्रोजेक्ट का ठेका तीन साल के लिए देना था, लेकिन जब इतने कम समय के लिए किसी कंपनी ने प्लांट लगाने के लिए हामी नहीं भरी तो अब इस प्रोजेक्ट को आठ साल का किया गया है।

    निगम हर साल ठेका कंपनी को 75 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। बुधवार को हुई वित्त कमेटी की मीटिंग में इस प्रोजेक्ट समेत 675 करोड़ के काम मंजूर हुए हैं। करीब 75 करोड़ के काम सड़क, पार्क, ट्यूबवेल, वाटर सप्लाई और सीवरेज से संबंधित हैं। वहीं यूनियनों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध शुरू कर दिया है। मीटिंग में मेयर वनीत धीर, डिप्टी मेयर मलकीत सिंह, मेंबर कविता सेठ और हितेश ग्रेवाल मौजूद रहे, जबकि ज्वाइंट कमिश्नर डा. मनदीप कौर ने प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी की। जीपीएस और मोबाइल एप से मानिटरिंग: कंपनी के सभी वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगेगा। कूड़ा उठाने वाले वाहनों की मानिटरिंग के लिए मोबाइल एप भी तैयार होगी। अधिकारी रियल टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे।एमआरएफ सेंटर में अत्याधुनिक मशीनें: घरों से कूड़ा मटेरियल रिकवरी फैसिलिटेशन (एमआरएफ) सेंटर ले जाएंगे। यहां कूड़े को आधुनक मशीनों से अलग-अलग किया जाएगा। गीला कूड़ा वरियाणा डंप पर खाद बनाने के लिए जाएगा।

    वरियाणा में प्लांट के लिए खरीदी नौ एकड़ जमीन
    इस प्रोजेक्ट में कूड़ा प्रोसेसिंग के लिए वरियाणा डंप साइट पर प्लांट लगाया जाना है। निगम ने डंप साइट के साथ ही नौ एकड़ जमीन खरीदी है। प्लांट में आधुनिक तकनीक से गीले कूड़े को प्रोसेस कर जैविक खाद तैयार की जाएगी।

    सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की खास बातें
    कूड़ा कलेक्शन के लिए कंपनी 450 वाहन लगाएगी इस प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी करीब 450 छोटे वाहन डोर-टू-डोर कलेक्शन में लगाएगी। रोजाना 631 मीट्रिक टन कूड़ा इकट्ठा करने का प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए कंपनी बड़े स्तर पर मैन पावर की तैनाती भी करेगी। हर 700 घरों पर एक वाहन तैनात होगा, जिसमें एक ड्राइवर और दो हेल्पर काम करेंगे। कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए 1,800 से ज्यादा कर्मचारी भर्ती करेगी।

    यह होगा प्रोजेक्ट का फायदा
    सालिड वेस्ट मैनेजमेंट से स्वच्छता रैंकिंग में फायदा मिलेगा। इससे केंद्र सरकार से ग्रांट भी अधिक मिलेगी। घरों और बाजारों से निकलने वाले कचरे की कलेक्शन, सेग्रीगेशन, प्रोसेसिंग सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से होगी। सड़कों, खाली प्लाटों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा जमा होने की समस्या कम होगी। l डंप साइट का बोझ कम होगा, आग-बदबू तथा प्रदूषण की समस्या कम होगी।

    यह काम भी हुए मंजूर
    स्पेशल असिस्टेंस आफ स्टेट्स फार कैपिटल इनवेस्टमेंट (सास्की) की ग्रांट से वार्ड नंबर 9, 12, 19, 20, 21, 22, 25 (21.70 किलोमीटर) में 8.96 करोड़ से कंक्रीट की सड़कें बनेंगी। कपूरथला रोड पर नहर से जालंधर कुंज तक आठ किलोमीटर सड़क पर फुटपाथ, ग्रिल और ड्रेनेज सिस्टम के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर 5.58 करोड़ रुपये से काम होगा। डॉ. बीआर आंबेडकर चौक से निगम सीमा तक 8.4 किमी सड़क को चौड़ा किया जाएगा। इस पर 4.79 लाख खर्च होंगे। वहीं बूटा मंडी के पास 120 फीट रोड और ग्रीन पार्क रोड पर 3.1 किमी सीमेंट कंक्रीट रोड पर 4.51 करोड़ खर्च होंगे। नार्थ हलके के वार्ड 1, 2, 3, 4, 83, 85 में 10 किमी कंक्रीट सड़कों का निर्माण होगा। इस पर 8.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वार्ड 4, 82, 83 में 14 किमी लुक-बजरी की सड़कों पर 5.82 करोड़ से काम होगा।

    विरोध: एक यूनियन की आज से हड़ताल, दूसरी ने दी चेतावनी
    सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट मंजूर होने के विरोध में पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन ने वीरवार से हड़ताल की घोषणा कर दी है। यूनियन नेता सन्नी सहोता ने कहा कि प्रशासन ने किसी भी यूनियन से कोई बातचीत नहीं की है। हड़ताल को 15 से ज्यादा यूनियनों को समर्थन प्राप्त है। वहीं बंटू सभ्रवाल के नेतृत्व वाली यूनियनों ने भी इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है। यूनियन नेताओं ने ने चेतावनी दी कि अगली बैठक में इस मुद्दे पर फैसला लेकर सफाई व्यवस्था ठप करेंगे।

  • CWC मीटिंग में शामिल नहीं हुए चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब कांग्रेस में बढ़ी हलचल; गैरहाजिरी के मायने तलाश रहे सियासी गलियारे

    CWC मीटिंग में शामिल नहीं हुए चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब कांग्रेस में बढ़ी हलचल; गैरहाजिरी के मायने तलाश रहे सियासी गलियारे

    चंडीगढ़ 
    कांग्रेस मुख्यालय स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस कार्य समिति (सी.डब्ल्यू.सी.) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पंजाब से पार्टी प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंद्र सिंह रंधावा, मुनीष तिवारी और विजय इंदर सिंगला बैठक में शामिल हुए लेकिन पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने निजी कारणों के चलते मीटिंग में शामिल नहीं हो पाए। चन्नी की मीटिंग में अनुपस्थिति पार्टी में चर्चा का विषय बन गई है।

    जानकारी के अनुसार इंदिरा भवन में CWC की महत्वपूर्ण बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक गतिविधियों, राष्ट्रीय मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे अंतर्कलह और नेताओं के बीच मतभेदों का मुद्दा बैठक में चर्चा का विषय नहीं बन सका।

    वहीं बैठक में पंजाब से पार्टी प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा सहित कई नेता शामिल हुए लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब यूनिवर्सिटी में अपनी एम.ए. की परीक्षा के कारण बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। वहीं इस बात की भी जानकारी मिली है कि इस बैठक में न आने की अनुमति वह एक दिन पहले ही पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से ले चुके थे।

    बैठक में आगामी महीनों में होने वाले 5 महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी की तैयारियों और संगठनात्मक एकजुटता पर मंथन किया गया। पंजाब कांग्रेस के लिहाज से बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद तथा अलग-अलग शक्ति केंद्रों के उभरने की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की गैर-मौजूदगी के कारण इस मुद्दे पर बैठक में कोई निर्णायक चर्चा नहीं हो पाई।

     सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब कांग्रेस में अनुशासनहीनता और आपसी मतभेद दूर करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व आने वाले दिनों में प्रदेश के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर सकता है। राहुल गांधी और हाईकमान की ओर से पंजाब संगठन को एकजुट करने तथा नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना है।

     

  • राजस्थान निकाय चुनाव: 309 शहरों में साख की जंग, जानिए BJP और कांग्रेस के लिए क्यों अहम है मुकाबला

    राजस्थान निकाय चुनाव: 309 शहरों में साख की जंग, जानिए BJP और कांग्रेस के लिए क्यों अहम है मुकाबला

    जयपुर 

    राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों की सरगर्मी बढ़ गई है. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के लिए चुनावी प्रक्रिया की घोषणा हो चुकी है. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने के साथ ही संबंधित नगरीय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 

    नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव के लिए दो चरणों में चुनाव होनें है. पहले चरण के लिए 9 सितंबर को चुनाव होगा और दूसरे चरण के लिए 11 सितंबर को मतदान होगा. निकाय चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को आएंगे, उसके बाद 21 सितंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। 

    प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर है जब सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं. राज्य सरकार की 'एक प्रदेश-एक चुनाव' की पहल की दिशा में इसे एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. शहरी क्षेत्रों में जनादेश हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की साख दांव पर लगी हुई है। 

    309 शहरी निकायों में 10,245 वार्डों पर चुनाव
    राज्य निर्वाचन आयोग के राजस्थान निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के मुताबिक  प्रदेश के 309 शहरी निकायों के कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी. इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। 

    राजस्थान में मतदाता सीधे निकाय अध्यक्ष का चुनाव नहीं करते हैय। प्रक्रिया के तहत सबसे पहले मतदाता अपने-अपने वार्डों से पार्षदों का चुनाव करते हैं. इसके बाद चुने हुए पार्षद साधारण सभा की बैठक में निकाय प्रमुख (मेयर, सभापति व नगर पालिका अध्यक्ष) और उप-प्रमुख (डिप्टी मेयर, उपसभापति व उपाध्यक्ष) का चुनाव करते हैं। 

    बीजेपी के लिए साख का सवाल
    राज्य की सत्ता में होने के कारण भारतीय जनता पार्टी पर अपना प्रशासनिक प्रदर्शन साबित करने और शहरी क्षेत्रों पर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखने का दबाव रहेगा. पारंपरिक रूप से राजस्थान के शहरी क्षेत्रों और नगर निगमों में भाजपा का मजबूत आधार माना जाता रहा है।

    शहरी निकाय के सीटों के आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया के बाद नए राजनीतिक समीकरण बने हैं. टिकट वितरण के बाद असंतोष को नियंत्रित करना और संगठन को एकजुट रखना पार्टी नेतृत्व के लिए एक प्रमुख चुनौती होगी।

    कांग्रेस के लिए वापसी का अवसर
    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है. कांग्रेस ने टिकट वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और क्षेत्रीय प्रभारियों के माध्यम से जमीनी फीडबैक प्राप्त करने की रणनीति अपनाई है।

    पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में कांग्रेस स्थानीय नागरिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, सफाई व्यवस्था और स्थानीय शासन के मुद्दों को उठाकर चुनावी मैदान में अपनी बढ़त बनाने का प्रयास कर रही है.  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सचिन पायलन के नेतृत्व में कांग्रेस ने अपनी पूरी फौज उतार रखी है। 

  • हरियाणा में सड़कों पर सड़ांध, हवा में धुआं; 14 दिन से थमी सफाई व्यवस्था

    हरियाणा में सड़कों पर सड़ांध, हवा में धुआं; 14 दिन से थमी सफाई व्यवस्था

    हिसार/पानीपत.

    हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचने के साथ अब इसका असर सिर्फ नगर निकायों के दफ्तरों या धरना स्थलों तक सीमित नहीं रहा है। राज्य के प्रमुख शहरों की सड़कें, बाजार, फुटपाथ और रिहायशी इलाके कूड़े के ढेरों में तब्दील हो चुके हैं।

    कर्मचारियों द्वारा ठेकेदारों और टिपरों को रोकने के सख्त पहरे के चलते शहरों से कचरा उठान पूरी तरह ठप हो गया है। आलम यह है कि कई शहरों में हर 50 से 100 मीटर पर कचरे का पहाड़ खड़ा है। कई स्थानों पर कचरे में आग लगाए जाने से उठते जहरीले धुएं और वर्षा के बाद नालियों-सीवरेज के चोक होने से महामारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है। नेताओं के दफ्तरों पर कूड़ा पलटा, बैरिकेडिंग तक की नौबत आक्रोशित कर्मचारी अब जनप्रतिनिधियों के दरवाजों तक अपना विरोध ले जा रहे हैं।

    प्रशासन को सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेड्स लगाने पड़े
    फतेहाबाद में गुस्साए कर्मचारियों ने भाजपा और कांग्रेस नेताओं के दफ्तरों के बाहर कूड़े की ट्राली पलट दी। पानीपत में शहरी विधायक, शिक्षा मंत्री और राज्यसभा सांसद के पुतले फूंकने व विधायक कार्यालय के बाहर कूड़ा फेंकने के बाद बुधवार को प्रशासन को सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेड्स लगाने पड़े। उधर, हिसार में कर्मचारियों ने थाली बजाकर प्रदर्शन किया, तो यमुनानगर में विधायक आवास तक हैंडबिल बांटते हुए जुलूस निकालने की तैयारी है। जलभराव, प्रदूषण और सीवरेज ठप होने की दोहरी मार फतेहाबाद में हाल ही में करीब 10 लाख की लागत से साफ कराई गई सीवरेज व्यवस्था वर्षा के कारण सड़कों का कचरा बहकर आने से फिर जाम हो गई है।

    वायु प्रदूषण दोनों गंभीर रूप ले रहे
    कुरुक्षेत्र और भिवानी जैसे शहरों में हटाए जा चुके पुराने डंपिंग प्वाइंट तो सक्रिय हुए ही हैं, 150 से ज्यादा नए अस्थायी डंपिंग प्वाइंट भी बन गए हैं। हांसी और जींद में लोग कचरे के ढेरों में आग लगा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और वायु प्रदूषण दोनों गंभीर रूप ले रहे हैं। रोहतक में सालिड वेस्ट प्लांट की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि ठेकेदार कचरा न डाल सकें। हालांकि, झज्जर और सिरसा में डोर-टू-डोर टिपरों व स्थानीय स्तर पर पार्षदों की पहल से रिहायशी इलाकों में आंशिक राहत देखी है।

    जिलावार स्थिति
    रोहतक : 14वें दिन भी हड़ताल जारी। सालिड वेस्ट प्लांट पर केवल 96 मीट्रिक टन कचरा पहुंचा। कर्मचारियों की सख्त निगरानी से बुधवार को आवक घट कर 50-60 टन रहने का अनुमान।
    हिसार : 667 कर्मचारी हड़ताल पर। 13 दिनों में करीब 2,900 मीट्रिक टन कचरा जमा। थाली बजाकर प्रदर्शन किया गया।
    भिवानी : करीब 2,000 टन कचरा सड़कों पर। पिछले साल खत्म किए गए 30 डंप प्वाइंट्स के अलावा 50 नए डंप प्वाइंट बन चुके हैं।
    फतेहाबाद : जिले के 5 शहरों में 1,540 टन कचरा जमा। 10 लाख रुपये से साफ हुई सीवरेज व्यवस्था बारिश के कचरे से फिर ठप। नेताओं के दफ्तरों के बाहर कूड़ा पलटा।
    यमुनानगर : 22 वार्डों में 150 से ज्यादा नए डंपिंग प्वाइंट बने। विधायक आवास पर प्रदर्शन टला, हैंडबिल बांटने की रणनीति।
    कुरुक्षेत्र : 150 से अधिक कचरा प्वाइंट बने; सड़कों पर 400 टन से अधिक कचरा। टिपर बंद होने से नालियां ओवरफ्लो और बीमारियां फैलने का डर।
    जींद : हड़ताल 21 अगस्त तक बढ़ी। रोजाना 120 टन कचरे के मुकाबले सिर्फ 40 टन उठान। 400 टन से अधिक कचरा जमा, लोग लगा रहे आग।
    करनाल : हर 100 मीटर पर कूड़े के ढेर। पॉश इलाकों से लेकर मुख्य बाजारों और पार्किंग स्थलों तक कचरा फैला।
    चरखी दादरी : 235 कर्मचारी हड़ताल पर। 14 दिनों से 490 टन कचरा निस्तारण के इंतजार में अटका। हांसी : 146 कर्मचारी हड़ताल पर; शहर में 300 टन कचरा जमा। तिकोना पार्क के पास कचरे में आग से धुआं फैला।
    पानीपत : विधायक कार्यालय पर बैरिकेड्स लगाए गए। हालांकि, 10 अस्थायी सेकेंडरी प्वाइंट्स में से अधिकांश से कूड़ा उठान शुरू होने से आंशिक राहत।
    झज्जर : मुख्य डंपिंग प्वाइंट्स पर स्थिति खराब, लेकिन डोर-टू-डोर टिपर चलने से रिहायशी इलाकों में आंशिक राहत।
    सिरसा : सफाई व्यवस्था प्रभावित। वार्ड नंबर 10 में पार्षद ने जेसीबी लगवाकर कंगनपुर रोड से कचरा उठवाया। धरने को जजपा का समर्थन।

  • FBI की रडार पर भगवंतपुरिया गैंग का गुर्गा, मेजर सिंह अमेरिका में वांटेड घोषित

    FBI की रडार पर भगवंतपुरिया गैंग का गुर्गा, मेजर सिंह अमेरिका में वांटेड घोषित

    चंडीगढ़.

    अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने भारतीय नागरिक मेजर सिंह के खिलाफ वांटेड नोटिस जारी किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मेजर सिंह पंजाब से जुड़े जग्गू भगवंतपुरिया संगठित अपराध गिरोह का कथित सहयोगी है।

    इस गिरोह पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों के कारोबार समेत कई गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। एफबीआई के मुताबिक मेजर सिंह के खिलाफ अमेरिका में कई संघीय अपराधों में कार्रवाई की जा रही है। इनमें रैकेटियर प्रभावित और भ्रष्ट संगठन अधिनियम के तहत साजिश, बिना लाइसेंस हथियारों का कारोबार करने की साजिश, मादक पदार्थों की तस्करी की साजिश और उन्हें वितरित करने के आरोप शामिल हैं। लॉस एंजिलिस स्थित अमेरिकी जिला अदालत में उनके खिलाफ 25 जून को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।

    पंजाब से शुरू हुआ गिरोह, अमेरिका तक फैला नेटवर्क
    एफबीआई ने जग्गू भगवंतपुरिया संगठित अपराध गिरोह को पंजाब से उत्पन्न हुआ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन बताया है। अमेरिकी एजेंसी के अनुसार यह संगठन कैलिफोर्निया के केंद्रीय जिले सहित अमेरिका के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय रहा है। संगठन पर हत्या, अपहरण, नशा तस्करी, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, धनशोधन और मानव तस्करी जैसे अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। एफबीआई ने लोगों से मेजर सिंह के संबंध में जानकारी मिलने पर स्थानीय एफबीआई कार्यालय, निकटतम अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करने की अपील की है। इसके अलावा एजेंसी की आधिकारिक ऑनलाइन सूचना प्रणाली के माध्यम से भी जानकारी देने को कहा गया है।

    जुलाई में नितिश कौशल पर भी जारी हुआ था नोटिस
    अमेरिकी एजेंसी ने इससे पहले जुलाई में भारतीय नागरिक नितिश कौशल के खिलाफ भी वांटेड नोटिस जारी किया था। उसे भी भगवंतपुरिया गिरोह से कथित तौर पर जुड़ा बताया गया था। अमेरिका में भारत से जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हुई है। अमेरिकी अधिकारी ऐसे नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं, जिन पर भारत और अमेरिका के बीच सीमा पार आपराधिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप हैं। अमेरिकी एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

  • हरियाणा के अंबाला में अगस्त में 50% कम बारिश, बादल छाने से गर्मी से राहत

    हरियाणा के अंबाला में अगस्त में 50% कम बारिश, बादल छाने से गर्मी से राहत

    अंबाला.

    दिन भर आसमान में बादल छाए रहे, जबकि बरसात का लगातार इंतजार रहा। बुधवार को एक-दो बार ऐसा लगा कि शायद अब बरसात हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली।

    फिलहाल मौसम विभाग 25 अगस्त तक बरसात की उम्मीद जता रहा है, लेकिन यह भी छोटे स्पैल में एक से दो बार होने के आसार हैं। बीते चौबीस घंटों में तापमान में भी कोई खास अंतर रिकार्ड नहीं किया गया है। बुधवार को लोगों को राहत तो रही, जबकि उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में बरसात होगी, जिससे गर्मी से तो कम से कम कुछ दिन राहत रहेगी।

    अंबाला में बुधवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहा, जो बीते चौबीस घंटों में 0.3 डिग्री कम हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान भी चौबीस घंटों में 0.5 डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। मौसम विभाग की मानें, तो आने वाले छह दिनों में आंशिक रूप से बादल छाएंगे, जबकि बीच-बीच में धूप भी निकल सकती है। यही नहीं दिन में एक से दो बार बरसात के आसार भी जताए जा रहे हैं।

    सामान्य से कम रही है बरसात
    मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर मारें तो मानसून सीजन के अगस्त माह में अभी भी अंबाला में 29 प्रतिशत कम बरसात हुई है, जबकि बीते दिनों ये आंकड़ा 54 प्रतिशत के आसपास था। मानसून सीजन की बात करें तो यह अभी भी सामान्य से पचास प्रतिशत कम रिकार्ड हुई है। यानी अभी भी मानसून सीजन और अगस्त माह में अभी भी बरसात सामान्य से कहीं कम है।

  • पंजाब में फेस्टिवल सीजन से पहले चीनी महंगी, दो महीने में 20 रुपये प्रति किलो बढ़े दाम

    पंजाब में फेस्टिवल सीजन से पहले चीनी महंगी, दो महीने में 20 रुपये प्रति किलो बढ़े दाम

    जालंधर.

    चीनी के दामों में रिटेल में दो माह में करीब 20 रुपये प्रति किलो वृद्धि दर्ज की गई है। थोक व्यापारियों के मुताबिक मिलों के स्तर पर ही चीनी के दामों में इजाफा किया गया है। दो माह पूर्व रिटेल में 44 से 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही चीनी के दाम बढ़कर इन दिनों 64 रुपये तक पहुंच चुके हैं। इसका असर आने वाले फेस्टिवल सीजन में भी देखने को मिलेगा।

    थोक व्यापारियों के मुताबिक अप्रैल के अंत तक मिलें बंद हो जाती हैं और अक्टूबर के अंत या नवंबर में फिर से चीनी तैयार करने के काम शुरू होता है। डिस्ट्रिब्यूटर से लेकर थोक विक्रेता तथा रिटेल में बेची जा रही चीनी के दामों में इजाफे का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर सीधे पड़ चुका है। उधर, सरकार द्वारा थोक डीलरों को लेकर चार हजार क्विंटल तक की स्टाक लिमिट निर्धारित की गई है।

    रक्षा बंधन के बाद फेस्टिवल सीजन शुरू
    इस तरह की स्थिति में चीनी की कालाबाजारी होने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। रक्षाबंधन के साथ ही फेस्टिवल सीजन भी शुरू हो जाएगा। इसमें मिठाइयों से लेकर बेकरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। वहीं चीनी के दामों में भारी इजाफे का असर इनके दामों पर भी पड़ना तय है। रेलवे रोड स्थित बेकर संचालक एसएस विज बताते हैं कि चीनी के दामों में इजाफे के चलते उत्पादों के दाम पांच से दस प्रतिशत बढ़ चुके हैं। इसी तरह शक्ति नगर के हलवाई अश्वनी साहनी ने कहा कि मिठाइयों में चीनी की खपत सबसे अधिक होती है। ऐसे में चीनी के दामों में इजाफे का असर दामों में करीब दस प्रतिशत तक पड़ चुका है।

    जिले में 25 थोक डीलर, रोजाना औसतन तीन हजार क्विंटल बिक्री
    जिले में इस समय करीब 25 थोक डीलर है, जो रोजाना करीब तीन हजार क्विंटल चीनी की बिक्री करते है। चीनी हलवाइयों, होटलों, रेस्टोरेंट के अलावा घरेलू इस्तेमाल के लिए खरीदी जाती है। मंडी फैंटनगंज के चीनी के थोक कारोबारी अनिल सोनी बताते हैं कि मिलों में नवंबर में गन्ना पिड़ाई का काम शुरू होगा। इसके बाद दामों में गिरावट की संभावना है।