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  • जयपुर निकाय चुनाव में ‘टी-20’ मुकाबला, निर्दलीयों के पास प्रचार के लिए सिर्फ 7 दिन

    जयपुर निकाय चुनाव में ‘टी-20’ मुकाबला, निर्दलीयों के पास प्रचार के लिए सिर्फ 7 दिन

    जयपुर
    नगर निगम चुनाव की पिच सज चुकी है। निकाय चुनाव फटाफट क्रिकेट यानी टी-20 की तर्ज पर हो रहा है। मैदान में उतरने के बाद प्रत्याशियों के पास लंबी पारी खेलने का मौका नहीं होगा। दलों के प्रत्याशियों की तुलना में निर्दलीयों के सामाने परेशानी ज्यादा होगी। निर्दलीयों को चार सितंबर को चुनाव चिन्ह मिलेंगे और 11 सितंबर को वोट पड़ जाएंगे। यानी चुनाव चिन्ह हाथ में आते ही सिर्फ सात दिन में मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनाने और वोट की अपील करने की चुनौती होगी।

    पार्टी की 'टीम', निर्दलीय का 'वन मैन शो'
    चुनावी मैदान में सबसे दिलचस्प मुकाबला पार्टी प्रत्याशियों और निर्दलीयों के बीच भी होगा। पार्टी के प्रत्याशी के पास संगठन, कार्यकर्ताओं और पार्टी की पहचान का सहारा होगा। बड़े नेताओं के संपर्क और बूथ स्तर का नेटवर्क भी उसकी ताकत बनेगा। इसके उलट निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थकों की टीम बनानी होगी, मतदाताओं को चिन्ह समझाना होगा और बड़े नेटवर्क के सामने पहचान खड़ी करनी होगी।

    4 को 'टॉस', फिर असली पारी
    निर्दलीयों के लिए चुनाव चिन्ह आवंटन का दिन प्रत्याशियों के लिए टॉस जैसा होगा। इसके बाद रणनीति बनाने का समय नहीं, सीधे मैदान में उतरने का वक्त होगा। पोस्टर, पर्चे, सोशल मीडिया, वाहन प्रचार, घर-घर संपर्क और छोटी बैठकों के जरिए सात दिन में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी।

    'डेथ ओवर' में बढ़ेगा प्रचार का रन रेट
    8 से 10 सितंबर प्रत्याशियों के लिए चुनावी डेथ ओवर होंगे। प्रचार का शोर बढ़ेगा और हर प्रत्याशी ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेगा। सुबह घर-घर संपर्क, दिन में छोटी बैठकें और शाम को जनसंपर्क यानी एक ही दिन में कई पिच पर खेलना होगा।
    10 सितंबर की रात तक प्रत्याशियों की कोशिश होगी कि कोई मतदाता ऐसा न रह जाए, जिसे उसका नाम और चुनाव चिन्ह पता न हो।

    250 निवर्तमान पार्षदों में से 91 ने चुकाई निगम की देनदारियां
    इधर, जयपुर नगर निगम चुनाव के बीच 250 निवर्तमान पार्षदों में से 91 ने निगम के हिसाब किसाब साफ कर दिया है। यानी निगम से पार्षदों ने जो भी संसाधन ले रखे थे, उनको लौटाते हुए नो ड्यूज हासिल कर लिया है। इनमें भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़, पूर्व महापौर कुसुम यादव जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। रमेश सैनी, लक्ष्मण लूनीवाल, दुर्गेश नन्दिनी, पारस जैन, नीरज अग्रवाल, उमरदराज, अजय चौहान, नरेंद्र शेखावत ने भी निगम से नो ड्यूज हासिल किया है। निवर्तमान पार्षदों का निगम से सीधे तौर पर जुड़ाव रहता है, ऐसे में विभिन्न शुल्क, लाइसेंस, संपत्ति या अन्य निगम संबंधी देनदारियों की स्थिति स्पष्ट करने के बाद नो ड्यूज लिया जाता है।

    आखिर क्यों लेते हैं नो ड्यूज?
    नगर निगम चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय प्रत्याशी को निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। निगम से संबंधित किसी तरह का बकाया होने की स्थिति में प्रत्याशी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं। ऐसे में पहले से नो ड्यूज प्रमाण-पत्र लेना सुरक्षा कवच की तरह है।

  • Gen-Z उद्यमियों से संवाद करेंगे CM सैनी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को मिलेगा मार्गदर्शन

    Gen-Z उद्यमियों से संवाद करेंगे CM सैनी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को मिलेगा मार्गदर्शन

    चंडीगढ़
     जेन-जी इंटरप्रेन्योर से संवाद कर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उन्हें सफलता का मंत्र देंगे। शुक्रवार को गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के सफल युवा उद्यमी अपना स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं को न केवल मार्गदर्शन देंगे, बल्कि आवश्यक धनराशि और तकनीकी सहायता सहित अन्य पहलुओं की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित बैठक में कार्यक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की शुरूआत से लेकर समापन तक वे बिना किसी औपचारिकता के युवाओं के साथ रहना और उनसे बात करना चाहते हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में छह मास्टर क्लास रूम स्थापित किए जाएंगे। सफल उद्यमी एक्सपर्ट के तौर पर 50-50 बच्चों के गु्रप को स्टार्टअप की स्थापना व अन्य पहलुओं के संबंध में प्रशिक्षण देंगे और उन्हें बताएंगे कि किस प्रकार किसी स्टार्टअप को जीरो से लेकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को सर्टिफिकेट भी प्रदान किए जाएंगे। बाद में इन युवाओं को एमएसएमई से लिंक किया जाएगा, जहां वे स्टार्टअप का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे।

    कार्यक्रम में एक स्टार्टअप रूम भी स्थापित किया जाएगा, जहां 60 सफल उद्यमी युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के गुर बताएंगे। इस दौरान बैकों द्वारा ऋण संबंधी तथा कौशल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा भी युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग, कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री युवा उद्यमी यात्रा के अंतर्गत दो बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

    ये बसें गुरुग्राम से चलकर प्रदेश के प्रत्येक जिला में कालेज, विश्वविद्यालयों, आइटीआइ, कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थियों को स्टार्टअप व एंटरप्रोन्योशिप के संबंध में जागरूक करेंगी। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने वाले छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनकी विशेष रूप से मदद करेंगी। यह यात्रा दिसंबर तक चलेगी। यात्रा के समापन पर दिसंबर में जेन-जी के लिए एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें ‘युवा उद्यमी यात्रा’ से लाभांवित हुए युवा भागीदारी करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘युवा उद्यमी यात्रा’ के शुरू होने से पहले ही बसों का रूट तय करके सभी जिलों के शिक्षण संस्थानों को अग्रिम रूप से सूचित किया जाए। जिस शिक्षण संस्थान में बस जाए, वहां के विद्यार्थियों को भी यह जानकारी दी जाए कि वे अपने स्टार्टअप के आइडिया को मूर्त रूप देने के लिए किस प्रकार इस यात्रा से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यात्रा से लाभांवित युवाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाए। जहां भी युवा उद्यमी यात्रा का कार्यक्रम हो, वहां प्रदर्शनी लगाई जाए और ऋण की जानकारी देने के लिए बैंकों का स्टाल लगवाया जाए।

  • रांची रेल मंडल का बड़ा कदम, हटिया में बनेगी 6 टन क्षमता वाली आधुनिक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री

    रांची रेल मंडल का बड़ा कदम, हटिया में बनेगी 6 टन क्षमता वाली आधुनिक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री

    रांची
     ट्रेन यात्रा के दौरान यात्रियों को स्वच्छ, हाइजीनिक और उच्च गुणवत्तापूर्ण लिनेन (बेडरोल) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रांची रेल मंडल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

    रेलवे प्रशासन हटिया में छह टन प्रतिदिन क्षमता वाली अत्याधुनिक 'मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री' स्थापित करने जा रहा है। इस नई लॉन्ड्री के चालू होने के बाद रांची रेल मंडल की कुल लिनेन धुलाई क्षमता बढ़कर 12 टन प्रतिदिन हो जाएगी, जो वर्तमान क्षमता से सीधे दोगुनी होगी।

    वर्तमान में रांची और हटिया स्थित लॉन्ड्री में प्रतिदिन तीन-तीन टन (कुल छह टन) लिनेन की धुलाई होती है। नए प्रोजेक्ट के पूरा होने से ट्रेन यात्रियों को दाग-धब्बों से मुक्त और पूरी तरह सैनिटाइज्ड बेडशीट, तकिया कवर, कंबल कवर और तौलिये मिलेंगे।

    22 प्रमुख ट्रेनों में रोजाना 12,750 बेडरोल की आपूर्ति
    रांची रेल मंडल से रोजाना खुलने वाली 22 वातानुकूलित (AC) ट्रेनों में यात्रियों को लगभग 12,750 लिनेन पैकेट (बेडरोल) उपलब्ध कराए जाते हैं।

    यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और भविष्य में ट्रेनों में एसी कोचों की संख्या में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिनेन की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    रांची से खुलने वाली प्रमुख ट्रेनें: रांची-गोड्डा एक्सप्रेस, रांची राजधानी एक्सप्रेस (12877/12878 और 20239/20240), रांची-एलटीटी एक्सप्रेस, वाराणसी, आरा, दुमका, नई दिल्ली संपर्क क्रांति, हावड़ा इंटरसिटी और गोरखपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस।
            हटिया से खुलने वाली प्रमुख ट्रेनें: हटिया-स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस, पुणे एक्सप्रेस, झारखंड स्वर्ण जयंती (वाया गोमो), एसएमवीटी बेंगलुरु, मुंबई एलटीटी, धरती आबा, पाटलिपुत्र, क्रियायोग एक्सप्रेस और हटिया-दुर्ग स्पेशल एक्सप्रेस।

    दो शिफ्टों में आधुनिक मशीनों से होगा काम
    हटिया स्थित प्रस्तावित नई मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री को रोजाना आठ-आठ घंटे की दो शिफ्टों में संचालित किया जाएगा। इसमें बेडशीट, तकिये के कवर, टॉवल आदि की धुलाई, उन्हें सुखाने, स्टीम आयरन (इस्त्री) और पैकेजिंग का पूरा काम पूरी तरह ऑटोमैटिक व आधुनिक मशीनों के माध्यम से होगा।

    इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि लिनेन की गुणवत्ता और सफाई का स्तर भी बेहतर होगा। वर्तमान में रांची मंडल स्तर पर प्रतिदिन करीब 8,500 लिनेन पैकेट ही इन-हाउस तैयार हो पाते हैं।

    जबकि शेष आवश्यकता को पूरा करने के लिए आउटसोर्स एजेंसियों का सहारा लेना पड़ता है। हटिया में 6 टन क्षमता की नई लॉन्ड्री शुरू हो जाने के बाद बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और रेल मंडल अपने स्तर पर ही शत-प्रतिशत मांग को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा।

     

  • बिहार सरकार का सोशल मीडिया ‘तोहफा’, छोटे YouTubers और Influencers को विज्ञापन से बढ़ेगी कमाई

    बिहार सरकार का सोशल मीडिया ‘तोहफा’, छोटे YouTubers और Influencers को विज्ञापन से बढ़ेगी कमाई

    पटना
    बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने कम फॉलोअर और सब्सक्राइबर वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर को तोहफा देते हुए सोशल मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों के नियमों को ढीला कर दिया है। इससे बिहार सरकार से यूट्यूबर और दूसरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की कमाई बढ़ेगी। पहले के नियमों में वीडियो विज्ञापन पर चैनल की फॉलोअर या सब्सक्राइबर संख्या का कम से कम 10 परसेंट व्यूज आने पर ही भुगतान हो सकता था। अब इस नियम को हटा दिया गया है। वीडियो अपलोड होने के 30 दिन बाद के एक्स्ट्रा व्यूज पर अतिरिक्त पेमेंट की शर्तों में भी काफी छूट दी गई है। इस बदलाव का फायदा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स पर प्रचार वीडियो या पोस्ट करने वाले छोटे-छोटे चैनल और हैंडल को मिलेगा। एक और महत्वपूर्ण चीज यह हुई है कि अगर सरकार चाहे तो समय और अवसर की जरूरत से ऐसे इन्फ्लुएंसर, हैंडल और चैनल को इसी रेट पर प्रचार के लिए विज्ञापन दे सकती है, जो सूचना और जनसंपर्क विभाग में सूचीबद्ध नहीं हैं।

    बिहार सरकार ने इससे पहले 2024 में इस नियमावली को संशोधित किया था, लेकिन उसमें एक्स्ट्रा व्यूज की शर्तें सभी कैटेगरी के हैंडल के लिए एक जैसी रख दी गई थी। नए नियमों में एक्स्ट्रा व्यूज की संख्या में कैटेगरी के हिसाब से कमी की गई है। बिहार सरकार ने सोशल मीडिया हैंडल और चैनल को फॉलोअर या सब्सक्राइबर संख्या के आधार पर 4 कैटेगरी में बांट रखा है। 10 लाख से ऊपर के हैंडल या चैनल A कैटेगरी में हैं, जबकि 5 से 10 लाख के बीच वाले B में हैं। 2 से 5 लाख वाले C और 1 से 2 लाख वाले D कैटेगरी में हैं। सूचीबद्ध होने के लिए अलग-अलग कैटेगरी में चैनल और हैंडल पर पिछले 6 महीने के दौरान हर महीने मूल वीडियो या पोस्ट की एक न्यूनतम संख्या तय है। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बिहार सरकार का सोशल मीडिया विज्ञापन रेट कितना है?
    बिहार सरकार अलग-अलग कैटेगरी के हैंडल और चैनल को 90 सेकंड और 90 सेकंड से ऊपर के विज्ञापन के आधार पर एक निश्चित भुगतान करती है। 90 सेकंड तक के विज्ञापन को सिर्फ पोस्ट करने के लिए चार कैटेगरी के बीच 20 से 50 हजार रुपये तक दिए जाते हैं, लेकिन अगर उनको ही वीडियो बनाना हो तो कमाई 50 से 80 हजार तक जा सकती है। 90 सेकंड से बड़े विज्ञापनों में इसी तरह से सिर्फ पोस्ट करने के लिए 50 से 80 हजार और वीडियो बनाने के साथ 60 हजार से 1 लाख तक मिल सकता है। यह विज्ञापन वीडियो या ऑडियो हो सकता है। रील और पॉडकास्ट को इसके दायरे में रखा गया है।

    सोशल मीडिया पर सरकारी विज्ञापन के नियमों में क्या बदला?
    सरकार ने बदलाव का फोकस वीडियो विज्ञापन पर रखा है, जिसमें 30 दिन के बाद जो एक्स्ट्रा व्यूज आएंगे, उसके आधार पर अतिरिक्त भुगतान की शर्तों में छूट दी गई है। नियमों में पहले 90 सेकंड तक के वीडियो, रील, पॉडकास्ट के लिए 30 दिन बाद के प्रति 1 लाख व्यूज पर अलग से 10 हजार रुपये और अधिकतम 70 हजार से 1 लाख तक देने का प्रावधान था। एक्स्ट्रा कमाई के लिए 1 लाख व्यूज की शर्त सारी 4 कैटेगरी पर लागू होती थी। 90 सेकंड से ऊपर के वीडियो में भुगतान की सीमा 90 हजार से 1.20 लाख रुपये तक थी। स्वाभाविक रूप से 10 लाख और 1 लाख सब्सक्राइबर वाले चैनल या हैंडल के व्यूज एक जैसे नहीं आते हैं। सरकार ने अधिकतम भुगतान की सीमा में छेड़छाड़ के बिना एक्स्ट्रा पेमेंट के लिए जरूरी व्यूज को फॉलोअर और सब्सक्राइबर की संख्या के अनुपात में संतुलित कर दिया है।

    कम फॉलोअर-सब्सक्राइबर वालों को व्यूज की शर्तों में छूट
    90 सेकंड से छोटे वीडियो पर अब ए कैटेगरी के चैनल या हैंडल को 30 दिन बाद के 1 लाख एक्स्ट्रा व्यूज, बी को 40 हजार, सी को 20 हजार और डी को 10 हजार अतिरिक्त व्यूज पर 10 हजार रुपये एक्स्ट्रा मिलेंगे। 90 सेकंड से ऊपर के वीडियो में भी इसी तरह ए, बी, सी और डी कैटेगरी के हैंडल व चैनल की 30 दिन बाद के 1 लाख से 10 हजार तक एक्स्ट्रा व्यूज पर 10 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकेगी। सरकार हर छह महीने पर सूचीबद्ध सोशल हैंडल और चैनल के फॉलोअर संख्या की समीक्षा करेगी और अगर उसके फॉलोअर घट गए तो आगे उसके विज्ञापन का रेट नई संख्या के आधार पर तय होगा।

  • जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा में स्कूल को लेकर हंगामा, CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट का आरोप

    जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा में स्कूल को लेकर हंगामा, CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट का आरोप

    जयपुर
    राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके में रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल को लेकर जबरदस्त हंगामा हो गया. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने अभियान 'स्कूल ठीक करो' के तहत पार्टी के कार्यकर्ता गांव के सरकारी स्कूल की हालत देखने भेजे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें खदेड़ दिया. वहीं CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनकी टीम के साथियों के साथ भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मारपीट की और गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए.

    सुबह-सुबह रामपुरा-कंवरपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल में उस समय हंगामा हुआ जब CJP के कार्यकर्ता स्कूल की हालत देखने वहां पहुंचे. गांव वालों ने इसका विरोध किया और उन्हें भगा दिया. इसके थोड़ी देर बाद आशुतोष रांका खुद स्कूल पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.

    माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हुई. ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं की पिटाई कर दी और उन्हें गांव से दौड़ाया, साथ ही गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए गए.

    माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई. आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों ने आशुतोष समेत CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की और उन्हें गांव से खदेड़ दिया.

    इस दौरान कार्यकर्ताओं की गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई और शीशे तोड़ दिए गए. ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं पर रेत भी उछाला और पत्थरबाजी भी की.

    अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूरा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने लिखा, 'आशुतोष पर बीजेपी के गुडों ने राजस्थान में हमला किया है. राजस्थान पुलिस ने ऐसा करने दिया है.'

    कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी पर क्या बोले थे आशुतोष?
    जब कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी हुई थी तो सोशल मीडिया पर आशुतोष ने आरोप लगाया कि गांव पहुंचे लोग असल में ग्रामीण नहीं बल्कि भाजपा के बुलाए हुए लोग थे, जिनका सरगना कमल प्रधान गरीबों की जमीन पर कब्जा करने का काम करता है. रांका ने यह भी कहा कि उनकी टीम के जो साथी पहले से मौजूद थे, उनके साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने मारपीट की.

    रांका ने पोस्ट में यह भी कहा थी कि उनकी टीम के जो साथी पहले से वहां मौजूद थे, उनके साथ भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मारपीट की. उन्होंने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा को यह मंजूर है कि बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहें, लेकिन अगर इन स्कूलों को ठीक कराने की कोशिश की जाए तो यह उन्हें मंजूर नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है.

    गांव में स्कूल की हालत को लेकर पहले से ही नाराजगी थी. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में है और बच्चे भैंसों के तबेले जैसी जगह में पढ़ने को मजबूर हैं. इसी मुद्दे पर CJP कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उनका विरोध कर दिया.

    फिलहाल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण CJP के खिलाफ धरने पर डटे हुए हैं. मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सियासी हलचल तेज हो गई है.

    ग्रामीणों ने क्या कहा?
    रामीण विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि उनके गांव में पहले प्राथमिक विद्यालय 5वीं कक्षा तक संचालित होता था. स्कूल के लिए जमीन उनके दादाजी ने दी थी. उन्होंने बताया कि 1999 में स्कूल भवन का निर्माण हुआ था, लेकिन उसके बाद से भवन की मरम्मत नहीं हुई.

    विष्णु कुमार शर्मा के मुताबिक, अब स्कूल भवन इतना जर्जर हो चुका है कि वहां बच्चों के बैठकर पढ़ने की स्थिति नहीं है. फिलहाल गांव के एक बड़े भवन में ग्रामीणों ने दो कमरे उपलब्ध कराए हैं, जहां दो शिक्षक करीब 20-30 बच्चों को पढ़ा रहे हैं.

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र बगरू विधानसभा में आता है. उनके अनुसार, विधायक डॉ. कैलाश वर्मा ने स्कूल के लिए 9 लाख रुपये का बजट पास होने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक यह काम जमीन पर शुरू नहीं हुआ है.

    विष्णु कुमार शर्मा ने कहा कि स्कूल के लिए दी गई जमीन भी ग्रामीणों की ही है और ग्रामीणों ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरकार को जमीन दी थी. उन्होंने कहा कि स्कूल की स्थिति को लेकर सरकार से कार्रवाई की उम्मीद है.

    ग्रामीण राजेश कुमार शर्मा ने CJP कार्यकर्ताओं के गांव में पहुंचने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ग्रामीण ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध करेंगे और आरोप लगाया कि वे स्कूल के मुद्दे को लेकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

    राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि भारत में विरोध करना जायज है, लेकिन प्रदर्शन का तरीका सही होना चाहिए. उन्होंने CJP पर राजनीतिक रोटियां सेंकने और फंड जुटाने का आरोप लगाया. हालांकि, उनके विदेशी फंड से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती.

    स्कूल की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं. उनके मुताबिक, सरकार की ओर से 12 लाख रुपये का बजट पास किया गया है, लेकिन अभी तक स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हुआ है.

    उन्होंने कहा कि अगर सरकार स्कूल का निर्माण नहीं कराती है तो ग्रामीण खुद मिलकर स्कूल बनाएंगे, क्योंकि जमीन उनके बुजुर्गों ने दी थी और स्कूल भी उनके प्रयासों से बना था.

    राजेश कुमार शर्मा ने सरकार से जल्द से जल्द स्कूल का निर्माण कराने की अपील की. साथ ही उन्होंने बताया कि गांव में पहले पोलिंग बूथ था, लेकिन इस बार उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया है. उन्होंने इस पर भी सरकार से ध्यान देने की मांग की.

  • 1 लाख व्यूज पर ₹10,000! रील्स बनाने वालों के लिए बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, एक वीडियो से कमाएं ₹1 लाख तक

    1 लाख व्यूज पर ₹10,000! रील्स बनाने वालों के लिए बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, एक वीडियो से कमाएं ₹1 लाख तक

    पटना
     बिहार सरकार ने सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी दी है. राज्य मंत्रिमंडल ने बिहार सोशल मीडिया नीति में नया संशोधन पारित किया है. इसके तहत अब क्रिएटर्स एक वीडियो से 1 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले को मंजूरी मिली। 

    एक वीडियो पर अधिकतम कितने रुपये मिलेंगे?
    अगर आप बिहार सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों
    पर वीडियो बनाते हैं, तो आपको बड़ा फायदा मिलेगा. आपके वीडियो पर 30 दिनों में मिलने वाले व्यूज के हिसाब से पैसे दिए जाएंगे. हर 1 लाख व्यूज पर सरकार 10,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करेगी. हालांकि, एक वीडियो पर भुगतान की अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है. यानी 10 लाख व्यूज मिलने पर आपको अधिकतम 1 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। 

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग इस संबंध में जल्द ही विस्तृत अधिसूचना जारी करेगा. सरकार इस व्यवस्था के तहत क्रिएटर्स के पेजों, हैंडल्स और चैनलों के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच भी करेगी. इसके लिए एम्पैनलमेंट प्रक्रिया का पालन करना होगा. यह व्यवस्था केवल सरकार से सूचीबद्ध और पात्र क्रिएटर्स के लिए ही लागू होगी। 

    क्या है सरकार का उद्देश्य?
    सरकार का मुख्य उद्देश्य अपनी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाना है. डिजिटल माध्यम से आम जनता को जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे राज्य के युवाओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए रोजगार और कमाई के नए मौके बनेंगे। 

    हालांकि, हर वायरल वीडियो पर अपने आप पैसे नहीं मिलेंगे. इसके लिए सरकार की ओर से तय शर्तें पूरी करनी होंगी. कंटेंट की गुणवत्ता, प्लेटफॉर्म, व्यूज की सही जांच और पंजीकरण के नियम लागू होंगे। 

    किस तरह के कंटेंट मान्य होंगे और आवेदन कैसे करना होगा. इसकी पूरी जानकारी अधिसूचना आने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल यह फैसला बिहार के क्रिएटर्स के लिए एक बेहतरीन मौका माना जा रहा है। 

  • IAS Gargi Jain: माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ी, UPSC में हासिल की 45वीं रैंक, जानें कौन हैं ‘कलेक्टर दीदी’

    IAS Gargi Jain: माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ी, UPSC में हासिल की 45वीं रैंक, जानें कौन हैं ‘कलेक्टर दीदी’

     अलवर 
    सफलता पाने के लिए बड़े पैकेज और आरामदायक लाइफ स्टाइल को छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन राजस्थान के अलवर की रहने वाली गार्गी जैन ने यह साबित कर दिखाया कि जब मन में देश सेवा का जज्बा हो, तो बड़े से बड़ा कॉर्पोरेट करियर भी छोटा नजर आने लगता है। गार्गी जैन ने विश्व प्रसिद्ध टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी की और देश में 45वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बनीं।

    वर्तमान में गुजरात के आदिवासी बहुल जिले छोटा उदेपुर में जिला कलेक्टर के रूप में तैनात गार्गी जैन को वहां के लोग और खासतौर पर स्कूली लड़कियां प्यार से 'कलेक्टर दीदी' कहकर बुलाती हैं।

    माइक्रोसॉफ्ट का लाखों का पैकेज छोड़ चुना UPSC का रास्ता
    गार्गी जैन एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रवींद्र जैन एनसीडीसी में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे और मां संगीता जैन हिंदी की लेक्चरर थीं। अपनी BTech इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गार्गी का चयन दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी 'माइक्रोसॉफ्ट' में हो गया। वहां उन्हें शानदार सैलरी पैकेज और बेहतरीन करियर मिल रहा था, लेकिन उनके मन में हमेशा से समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। साल 2012 में उन्होंने अपनी यह ड्रीम जॉब छोड़ दी और यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में पूरी तरह जुट गईं।

    पहले प्रयास में मिली निराशा, दूसरे में गाड़े सफलता के झंडे
    सिविल सर्विसेज का रास्ता आसान नहीं था। अपने पहले प्रयास में गार्गी जैन महज 12 अंकों के अंतर से कटऑफ पार करने से चूक गईं। इस असफलता से हताश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दोगुने उत्साह के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 45वीं रैंक (AIR 45) हासिल कर ली।

    छोटा उदेपुर में बनीं 'कलेक्टर दीदी'
    2015 बैच की इस IAS अधिकारी को गुजरात कैडर मिला। छोटा उदेपुर जिले का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने वहां के सुदूर आदिवासी ग्रामीण इलाकों का दौरा करना शुरू किया। वे लगातार सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करती हैं, बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर बातें करती हैं और उनकी पढ़ाई का हाल चाल लेती हैं।

    विशेष रूप से आदिवासी समाज की बेटियों को आगे बढ़ाने, उनके स्वास्थ्य, कुपोषण से बचाव और शिक्षा के लिए उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों ने क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। अधिकारियों और बच्चों के बीच की दूरी को मिटाने के उनके इस अनोखे अंदाज के कारण ही स्कूली बच्चे उन्हें अधिकारी के रूप में देखने के बजाय अपनी बड़ी बहन 'कलेक्टर दीदी' मानते हैं।

    आईएएस गार्गी जैन का जीवन सफर देश के उन तमाम छात्रों और युवाओं के लिए एक जिंदादिली की मिसाल है जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी सुविधा का त्याग करने का साहस रखते हैं।

  • मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा NH होगा फोरलेन, 3591 करोड़ की परियोजना को केंद्र की मंजूरी

    मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा NH होगा फोरलेन, 3591 करोड़ की परियोजना को केंद्र की मंजूरी

    सीतामढ़ी.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा तक टू-लेन सड़क को फोरलेन में बदलने की महत्वपूर्ण परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है।

    केंद्र सरकार ने इस वृहद बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए कुल 3,591 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी स्वीकृत कर दी है। स्थानीय सांसद देवेश चंद्र ठाकुर की लगातार पहल और प्रयासों के चलते सीमावर्ती उत्तर बिहार को यह बड़ी सौगात मिली है।

    सांसद की पहल रंग लाई
    सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर सड़क को फोरलेन करने का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री ने त्वरित संज्ञान लेते हुए महज कुछ ही महीनों में इसका प्रस्ताव तैयार करवाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेजा था। कैबिनेट की अंतिम मुहर लगने के बाद नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी और पूरे उत्तर बिहार के लोगों में भारी उत्साह का माहौल है।

    हाइब्रिड मोड पर निर्माण
    इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत कुल 3590.73 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाएगा। कुल 82.578 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुसार तैयार किया जाएगा। तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सड़क के मध्य विभाजक (Medians) में कोई समतल खुला कट नहीं छोड़ा जाएगा।

    पुल और बड़े फ्लाईओवर
    यातायात की निर्बाध आवाजाही के लिए सड़क पर सात प्रमुख पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है। इसके अलावा तीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) तथा 1170 मीटर और 270 मीटर लंबे दो बड़े फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इन निर्माणों से वाहनों के यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और ईंधन दक्षता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    नेपाल सीमा से कनेक्टिविटी
    यह राजमार्ग एक प्रमुख फीडर कॉरिडोर के रूप में सोनबरसा स्थित भारत-नेपाल सीमा को एनएच-27 यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर मुजफ्फरपुर से सीधे जोड़ेगा। इससे मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भूतही और सोनबरसा के घनी आबादी वाले बाजारों को भीषण जाम से स्थायी राहत मिलेगी। फोरलेन बनने से मालवाहक वाहनों और कृषि आपूर्ति शृंखलाओं की आवाजाही पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगी।

    धार्मिक और औद्योगिक विकास
    उन्नत कॉरिडोर बनने से पीएम गति-शक्ति के तहत आने वाले चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क को सीधा सड़क संपर्क मिलेगा। इसके साथ ही बाबा गरीबनाथ मंदिर और माता जानकी की पावन जन्मस्थली पुनौरा धाम मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान होगी। मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों के लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जुड़ाव होने के कारण पूरे क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और पर्यटन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।

  • चंडीगढ़ निगम बैठक में जलभराव पर हंगामा, राफ्टिंग बोट लेकर पहुंची AAP; मेयर ने अफसरों को लगाई फटकार

    चंडीगढ़ निगम बैठक में जलभराव पर हंगामा, राफ्टिंग बोट लेकर पहुंची AAP; मेयर ने अफसरों को लगाई फटकार

    चंडीगढ़.

    बारिश के दौरान शहर की सड़कों पर दो से तीन फीट पानी जमा हो गया था। लोगों की गाड़ियां खराब हो गई थी। इसी मुद्दे पर वीरवार को आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन किया। आप कार्यकर्ताओं नगर निगम कार्यालय के बाहर राफ्टिंग बोट लेकर पहुंचे।

    कहा कि अब राफ्टिंग के लिए ऋषिकेश जाने की जरूरत नहीं।इसके बाद बैठक में आप ने जलभराव और टेबल एजेंडे चर्चा के लिए पेश न होने पर हंगामा किया। निगम अफसर, कर्मचारी और मशीनरी को जिम्मेदार ठहराते हुए जवाब मांगा। वहीं, भाजपा के मेयर सौरभ जोशी ने मुद्दा गर्माने पर अफसरों को फटकार लगाई। मेयर ने कहा कि नगर निगम के अफसर बड़ी-बड़ी मशीनें होने का दावा करते हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों की मशीनें हैं तो क्या धूप-बत्ती करने के लिए रखी हैं। उन्होंने अफसरों को जिम्मेदारी से काम करने की नसीहत दी और कहा कि लोगों की परेशानी का समाधान करने के लिए कुर्सी पर बैठाया है, न कि परेशानी बढ़ाने के लिए।

  • रेखा सरकार का बड़ा फैसला! 9वीं में तीसरी भाषा का R3 नियम वापस, 10वीं बोर्ड में लागू होंगे CBSE नियम

    रेखा सरकार का बड़ा फैसला! 9वीं में तीसरी भाषा का R3 नियम वापस, 10वीं बोर्ड में लागू होंगे CBSE नियम

    नई दिल्ली

     दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने अपने उस नियम को वापस ले लिया है, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई छात्र कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा (R3) के विषय में पास नहीं होता है, तो उसे 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक नया नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि अब इस मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा जारी किए गए नियम और गाइडलाइंस को ही फॉलो किया जाएगा।

    क्या था पूरा मामला और क्यों परेशान हुए छात्र?
    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE 2023) के तहत सीबीएसई ने तीन-भाषा नीति लागू की है। इसके तहत 9वीं कक्षा से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य हैं, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।

    17 अगस्त को दिल्ली शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं की परीक्षा और प्रमोशन नीति का एक सर्कुलर जारी किया था। जिसमें लिखा था कि जो छात्र 9वीं में तीसरी भाषा (R3) में फेल होंगे, उन्हें 10वीं कक्षा में प्रमोट तो कर दिया जाएगा, लेकिन जब तक वे R3 विषय को पास नहीं कर लेते, तब तक उन्हें 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

    दूसरी ओर, सीबीएसई के 10 जुलाई वाले सर्कुलर में यह कहा गया था कि R3 का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल के इंटरनल असेस्मेंट के जरिए होगा। छात्र को पासिंग सर्टिफिकेट पाने के लिए R3 पास करना होगा, लेकिन R3 में अंक कम होने या पास न होने पर छात्र को 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा। दोनों सर्कुलर के बीच इस विरोधाभास के कारण छात्रों और उनके माता-पिता के बीच काफी परेशान थे।

    सीबीएसई के नियम ही होंगे लागू
    अब दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तीसरी भाषा (R-3) को लेकर पूरी तरह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नियम ही लागू होंगे। कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। तीसरी भाषा (R-3) का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर इंटरनल असेसमेंट के माध्यम से होगा। कक्षा 10 में तीसरी भाषा के लिए अलग से बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। R-3 में मिले अंक छात्र के फाइनल सीबीएसई सर्टिफिकेट पर जरूर दिखेंगे, लेकिन ये अंक 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी नहीं हैं।