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  • झारखंड में आयुष्मान कार्ड अभियान तेज, 70+ बुजुर्गों को मिलेगा वय वंदना कार्ड का लाभ

    झारखंड में आयुष्मान कार्ड अभियान तेज, 70+ बुजुर्गों को मिलेगा वय वंदना कार्ड का लाभ

     रांची
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. सुनील वर्णवाल ने आयुष्मान कार्ड तथा आभा कार्ड बनाने में तेजी लाने के निर्देश सभी जिलों के सिविल सर्जनों को दिए हैं। उन्होंने मंगलवार को नामकुम स्थित आरसीएच सभागार में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना एवं आयुष्मान भारत डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा के क्रम में ये निर्देश दिए।

    उन्होंने खासकर 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को चिन्हित कर वय वंदना कार्ड उपलब्ध कराने तथा सभी सहिया, सेविका एवं सहायिकाओं के आयुष्मान कार्ड निर्माण में तेजी लाने को कहा।

    सुनील वर्णवाल ने सभी पात्र निजी अस्पतालों का एचईएम 1.0 पोर्टल से एचईएम 2.0 में शीघ्र स्थानांतरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी संचालन हो सके।बैठक में आभा निर्माण की जिला-वार स्थिति की समीक्षा करते हुए इसकी गति बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    उन्होंने मोबाइल पर एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड नहीं मिलने की स्थिति में चेहरा पहचान के माध्यम से प्रमाणीकरण का उपयोग करने का निर्देश दिया। आभा निर्माण की शत-प्रतिशत उपलब्धि के लिए सभी 24 जिलों के उपायुक्तों के साथ अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

    बैठक में सरकारी एवं निजी क्षेत्र के सभी स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य संस्थानों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने, सभी दवा दुकानों को भी स्वास्थ्य संस्थान पंजीकरण से जोड़ने के लिए राज्य फार्मेसी परिषद, औषधि निरीक्षक एवं औषधि निदेशालय के समन्वय से कार्रवाई करने को कहा गया।

    स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय के एकीकरण की समीक्षा करते हुए वर्णवाल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और सी-डैक की संयुक्त टीम को 31 अगस्त तक एकीकरण पूरा करने को कहा।

    साथ ही सभी निजी अस्पतालों को डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा आधारित स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली लागू करने तथा 30 सितंबर तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय के माध्यम से दावों की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया।

    बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक डाॅ. पंकज अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, डाॅ. शैलेश यादव, एनएचएम के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा, राज्य मिशन निदेशक डिजिटल स्वास्थ्य मिशन दिनेश यादव सहित सभी 24 जिलों के सिविल सर्जन, जिला नोडल पदाधिकारी, परियोजना समन्वयक एवं राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • पंजाब कांग्रेस में आज थमेगी कलह? राजा वड़िंग और चरणजीत चन्नी की राहुल गांधी से अहम मुलाकात

    पंजाब कांग्रेस में आज थमेगी कलह? राजा वड़िंग और चरणजीत चन्नी की राहुल गांधी से अहम मुलाकात

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच पार्टी हाईकमान ने अब शीर्ष स्तर पर नेताओं को एक मंच पर लाने की कवायद तेज कर दी है। आज दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की अहम बैठक होने जा रही है।

    इसमें विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियों के बारे में रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस बैठक में पंजाब के 5-6 सीनियर कांग्रेस नेता शामिल होंगे। एक जुलाई को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान द्वारा चुनाव समिति की घोषणा के बाद यह पहला मौका होगा, जब पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से एक साथ मुलाकात करेंगे।

    राजा वड़िंग और चन्नी भी होंगे शामिल
    जानकारी अनुसार कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और विजय इंदर सिंगला शामिल होंगे। सूत्रों अनुसार बुधवार दोपहर बाद या वीरवार को राहुल गांधी पंजाब नेताओं से अलग से बैठक करेंगे। बैठक में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के अलावा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कुछ अन्य सीनियर नेता मौजूद होंगे।

  • हरियाणा में किसानों को बड़ी राहत, 10 लाख एकड़ भूमि सुधारने के लिए 25 हजार टन जिप्सम खरीदेगी सरकार

    हरियाणा में किसानों को बड़ी राहत, 10 लाख एकड़ भूमि सुधारने के लिए 25 हजार टन जिप्सम खरीदेगी सरकार

     चंडीगढ़
    हरियाणा में 10 लाख एकड़ भूमि को सुधारने के लिए 15.63 करोड़ रुपये में 25 हजार टन जिप्सम की खरीद की जाएगी। किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर जिप्सम दिया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

    शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व मंत्री विपुल गोयल, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा के साथ बैठक ले रहे मुख्यमंत्री ने कैथल के हैफेड कांप्लेक्स में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से 21 हजार 680 टन का गोदाम तथा क्वालिटी कंट्रोल लैब बनाने की भी स्वीकृति दे दी।

    पानीपत जिले के भैंसवाल, कुटानी, राजाखेड़ी, निम्बरी, उग्राखेड़ी, रिसालु, नांगलखेड़ी, काबड़ी, गढी सिकन्दरपुर सहित नौ गांवों में महाग्राम योजना के तहत 75.50 करोड़ रुपये की पेयजल योजनाओं की स्वीकृति दी गई है। गोहाना शहर के शनि मंदिर, एमपीएस गुढा क्षेत्र में सीवरेज लाइन भी 16.30 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाएगी।

    अंबाला की बदलेगी तस्वीर
    मुख्यमंत्री ने पिंजौर के सेक्टर 27 में न्यायिक परिसर का निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान की। इस पर 22.70 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसी प्रकार अंबाला शहर में लघु सचिवालय के प्रशासनिक ब्लाक के तृतीय चरण का कार्य 34 करोड़ रुपये की लागत से करने की मंजूरी दी गई। अंबाला कैंट में बैंक स्कवेयर भवन फेज 1 का निर्माण कार्य 52 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। राजकीय नर्सिंग कालेज सफीदों का निर्माण 37.49 करोड़ रुपये में होगा।

    इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 पंचकूला में सड़कों को अपग्रेड एवं मजबूत बनाने के लिए 16.80 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। पंचकूला के गांव जलोली में जिला जेल का निर्माण लगभग 40 करोड़ की लागत किया जाएगा। इसके अलावा कुंडली मानेसर सड़क सेक्शन मार्ग की 65.66 करोड़ रुपये लागत से लगभग 83 किलोमीटर मार्ग की मरम्मत एवं रखरखाव किया जाएगा।

    50 बेड का आयुष अस्पताल
    फतेहाबाद में जिला जेल बनाई जाएगी, जिस पर 37 करोड़ की लागत आएगी। जुलाना शहर में वाटर सप्लाई कार्य पर 21.17 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। नारनौल के अस्पताल को 100 बेड से अपग्रेड कर 200 बेड का बनाया जाएगा। इस पर 26.30 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यमुनानगर में 16.89 करोड़ की लागत से 50 बेड का आयुष अस्पताल का निर्माण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाईवे के कार्य को मंजूरी प्रदान की। लगभग 10 मीटर चौड़ी सड़क पर 26.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस सड़क मार्ग को फोन लेन बनाने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके बाद कुरुक्षेत्र सहारनपुर सड़क मार्ग को फोरलेन बनाया जाएगा।

  • राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, RGHS में शामिल हुई कैंसर की महंगी CAR-T Cell Therapy

    राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, RGHS में शामिल हुई कैंसर की महंगी CAR-T Cell Therapy

    जयपुर
    राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रित परिवारों के स्वास्थ्य हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक संवेदनशील फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के आधुनिक और सटीक इलाज के लिए जानी जाने वाली CAR-T Cell Therapy को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अनुमत मेडिकल पैकेज में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अत्याधुनिक इम्यूनोथेरेपी के शामिल होने से अब ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राजस्थान के सूचीबद्ध अस्पतालों में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
    राजस्थान सरकार के इस एक फैसले से उन हजारों परिवारों को सीधा संबल मिलेगा जो अब तक इस खर्चीले इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे।

    कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : CM भजनलाल
    मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश में इस योजना के दूरगामी फायदों को बताया। उन्होंने कहा, 'कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक CAR-T Cell Therapy को RGHS के तहत अनुमत पैकेज में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को आधुनिक उपचार की बेहतर सुविधा और मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल प्रदान करेगी।'

    स्वस्थ एवं सशक्त राजस्थान की दिशा में फैसला: मंत्री गजेंद्र सिंह
    CAR-T Cell Therapy कैंसर के इलाज की एक सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक रूप से उन्नत इम्यूनोथेरेपी व सेल थेरेपी है। इसमें मरीज के शरीर की अपनी ही प्रतिरोधक क्षमता का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

    सबसे पहले मरीज के खून से उसकी अपनी T-Cells (श्वेत रक्त कोशिकाएं) निकाली जाती हैं।

    इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में जेनेटिकली इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद विशेष प्रोटीन को पहचान सकें।

    जेनेटिक रूप से तैयार की गई इन करोड़ों संशोधित CAR-T Cells को वापस मरीज के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है, जहां ये कैंसर कोशिकाओं को ढूंढकर नष्ट करती हैं।

    आसान शब्दों में कहें तो इस थेरेपी में मरीज की अपनी ही रोग प्रतिरोधक प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए विशेष रूप से "ट्रेन" किया जाता है।

    किन कैंसर मरीजों के लिए कारगर है थेरेपी?
    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, CAR-T Cell Therapy का इस्तेमाल मुख्य रूप से विशिष्ट प्रकार के ब्लड कैंसर के इलाज में किया जाता है।
    यह थेरेपी विशेष रूप से उन मामलों में वरदान साबित होती है जहां पारंपरिक कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के बाद बीमारी दोबारा लौट आई हो या अन्य दवाएं बेअसर साबित हो रही हों। जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में भी CAR-T Cell Therapy की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    RGHS लाभार्थियों को कैसे मिलेगा लाभ?
    राजस्थान सरकार द्वारा 6 जून 2026 को जारी नई ऑनकोलॉजी गाइडलाइंस (Oncology Guidelines) और RGHS नियमों के तहत लाभार्थी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। CAR-T Cell Therapy एक हाई-एंड और अति-विशिष्ट उपचार है, इसलिए एम्पैनल्ड अस्पताल में भर्ती होने से पहले प्री-ऑथराइजेशन की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

    यह थेरेपी हर मरीज और हर प्रकार के कैंसर के लिए उपयुक्त नहीं होती, इसलिए एसएमएस अस्पताल या एम्पैनल्ड कैंसर हॉस्पिटल्स की विशेषज्ञ टीम की सिफारिश के आधार पर ही इसे स्वीकृत किया जाएगा।

    RGHS के तहत एलोपैथी ट्रीटमेंट के पैकेज रेट्स सामान्यतः केंद्र सरकार की CGHS दरों के मानकों पर आधारित होते हैं, जिससे लाभार्थियों को बिना किसी कैशलेस बाधा के उपचार मिल सके।

    राज्य सरकार के इस संवेदनशील कदम से अब राजस्थान के कैंसर पीड़ित परिवारों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों के भारी-भरकम कर्ज के जाल में नहीं फंसना पड़ेगा।

     

  • बरनाला में दुष्कर्म पीड़ित 3 महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ीं, 3 महीने से न्याय का इंतजार

    बरनाला में दुष्कर्म पीड़ित 3 महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ीं, 3 महीने से न्याय का इंतजार

    बरनाला.

    बुधवार सुबह बरनाला जिला प्रशासनिक परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दुष्कर्म की शिकायत करने वाली तीन महिलाएं न्याय की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गईं। घटना सुबह करीब 8 बजे की है।

    महिलाओं ने टंकी पर पहुंचकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष जताया और मीडिया कर्मियों को फोन कर अपनी समस्या बताई। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे पिछले करीब तीन महीने से पुलिस कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। तीनों अलग-अलग गांवों की रहने वाली हैं और उन्होंने अपने साथ दुष्कर्म करने वाले युवकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों से संबंधित फाइलें पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लंबित हैं। इसी से परेशान होकर उन्होंने पानी की टंकी पर चढ़ने का कदम उठाया। उन्होंने कहा कि आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर प्राथमिकी की प्रति उन्हें टंकी पर ही दी जाए, तभी वे नीचे उतरेंगी।

    महिलाओं को समझाने पहुंची पुलिस
    मौके पर पुलिस दल के साथ पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक तजिंदर पाल सिंह ने महिलाओं को समझाने और नीचे उतरने की अपील की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़ी रहीं। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें जबरन नीचे उतारने का प्रयास किया गया तो वे टंकी से छलांग लगा देंगी। महिलाओं ने एक महिला पुलिस अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि आरोपित पक्ष से रिश्वत लेकर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

    पुलिस कर रही जांच
    हालांकि, संबंधित महिला अधिकारी ने आरोपों से इतर बताया कि मामले की जांच पूरी कर फाइल डीए लीगल को भेजी जा चुकी है। वहां से निर्देश मिलते ही कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। एसपी-डी संजीव गोयल ने बताया कि उन्होंने बुधवार से ही पदभार संभाला है। उन्होंने महिलाओं को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा देते हुए टंकी से नीचे उतरने की अपील की।

  • बंबीहा गैंग के 3 गुर्गे पंजाब लाए गए, हत्या-रंगदारी और विस्फोटक मामलों में थे वांटेड

    बंबीहा गैंग के 3 गुर्गे पंजाब लाए गए, हत्या-रंगदारी और विस्फोटक मामलों में थे वांटेड

    चंडीगढ़.

    पंजाब पुलिस ने विदेश में छिपकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे गैंग्स्टरो के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दविंदर बंबीहा गैंग से जुड़े तीन वांछित आरोपितों को मलेशिया से भारत लाने में सफलता हासिल की है।

    पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रैक्शन सेल (ओएफटीईसी) ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से तीनों का प्रत्यर्पण कराया। तीनों आरोपितों को दिल्ली के आइजीआइ एयरपोर्ट पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्हें पंजाब लाकर आगे की पूछताछ की जा रही है।पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपितों की पहचान जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल, अजय सिंह और पवंदीप सिंह के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ हत्या, रंगदारी, विस्फोटक से जुड़े मामलों के साथ-साथ लुधियाना में हैंड ग्रेनेड से धमाका करने की साजिश में भी तलाश थी।

    ISI से जुड़े तीनों के तार
    ग्रेनेड मामलों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ से जुड़े तार भी सामने आए हैं। दो दर्जन से ज्यादा मामलों में वांछित होने की जानकारी पुलिस जांच में सामने आया है कि विदेश भागने के बाद आरोपित मलेशिया में छिपकर रह रहे थे। पंजाब में उनके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार इन आरोपितों के खिलाफ दो दर्जन से अधिक मामलों में कार्रवाई और रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी है। अब भारत वापस लाए जाने के बाद पुलिस इनसे पूछताछ कर इनके पूरे नेटवर्क, विदेश में मदद करने वाले लोगों और पंजाब में सक्रिय साथियों के बारे में जानकारी जुटाएगी। पंजाब पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ओएफटीईसी की टीम लगातार विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों की निगरानी कर रही है। केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से मलेशिया में मौजूद इन तीनों आरोपितों का पता लगाया गया और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।

    पंजाब में नेटवर्क खंगालेगी पुलिस
    तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी को पंजाब पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। पुलिस अब आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि विदेश में बैठकर पंजाब में आपराधिक वारदातों को किस तरह अंजाम दिया जाता था। साथ ही पाकिस्तान स्थित तत्वों से संपर्क, हथियार और विस्फोटक की व्यवस्था तथा रंगदारी व हत्या के मामलों में उनकी भूमिका की भी जांच होगी। पुलिस का कहना है कि विदेश में छिपे अपराधियों को किसी भी स्थिति में कानून की गिरफ्त से बचने नहीं दिया जाएगा। फरार आरोपितों को ट्रैक कर भारत लाने की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • राजस्थान निकाय चुनाव का आज ऐलान संभव, शाम तक लागू हो सकती है आचार संहिता

    राजस्थान निकाय चुनाव का आज ऐलान संभव, शाम तक लागू हो सकती है आचार संहिता

    जयपुर
    राजस्थान के शहरी इलाकों में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निकाय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और प्रदेश के विभिन्न शहरों में किसी भी समय आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, स्वायत्त शासन विभाग की ओर से निकायों में आरक्षण और परिसीमन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी जा चुकी है। आयोग के अधिकारी इस समय रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी त्रुटि पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त कराकर चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

    वहीं, अगर रिपोर्ट पूरी तरह सही पाई जाती है, तो आज 19 अगस्त को दोपहर बाद या शाम तक चुनाव की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होते ही संबंधित शहरी निकायों की सीमा में तुरंत प्रभाव से आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी, जिसका सीधा असर प्रशासनिक निर्णयों और स्थानीय विकास योजनाओं पर पड़ेगा।

    दो चरणों में मतदान संभाव
    राज्य निर्वाचन आयोग से मिल रही जानकारी के मुताबिक, निकाय चुनावों के संचालन के लिए सभी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोग इस बार निकाय चुनाव प्रक्रिया को 2 चरणों में संपन्न कराने की योजना बना रहा है।

    संभावित कार्यक्रम के अनुसार-
    प्रथम चरण: सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में वोटिंग कराई जा सकती है।

    द्वितीय चरण: सितंबर के दूसरे सप्ताह में शेष निकायों के लिए मतदान संपन्न कराया जाएगा।

    अंतिम समीक्षा: आयोग की टीम अंतिम वोटर लिस्ट और बूथों की सुरक्षा व्यवस्था का मिलान कर रही है ताकि घोषणा के बाद किसी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन न आए।

    आदर्श आचार संहिता : क्या बंद होगा और क्या चालू रहेगा?
    चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकायों में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाएगा। इससे आम जनता और जनप्रतिनिधियों के लिए कई नियम बदल जाएंगे।

    नए कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध
    संबंधित जिलों और निकायों में नए विकास कार्यों के शिलान्यास, उद्घाटन या लोकार्पण कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक रहेगी।

    कोई भी नई विकास योजना, नए टेंडर या नए कार्य आदेश (Work Orders) जारी नहीं किए जा सकेंगे।

    मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों द्वारा किसी नई योजना की घोषणा करने पर प्रतिबंध रहेगा।

    जारी काम रहेंगे चालू
    जिन विकास परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर आचार संहिता प्रभावी होने से पहले ही जारी किए जा चुके हैं, वे बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।

    जो निर्माण कार्य पहले से ही जमीन पर चल रहे हैं, उन पर आचार संहिता का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक नागरिक सेवाएं नियमित रूप से चलती रहेंगी।

    विधानसभा में पेश होने वाले बिल
    निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए जाने वाले नए विधेयकों का चुनाव की तारीखों पर क्या असर पड़ेगा।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नियमों के तहत आचार संहिता के दौरान भी विधानसभा में बिल पेश किए जा सकते हैं और विधायी कार्य निपटाए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार ऐसे किसी भी निर्णय या प्रचार माध्यम का उपयोग नहीं कर सकती, जिससे आम मतदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हों। प्रचार संबंधी गतिविधियों और सरकारी विज्ञापनों पर आचार संहिता के कड़े नियम लागू रहेंगे।

    राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अंतिम अधिसूचना के बाद ही चुनाव की सटीक तारीखों और संबंधित निकायों की अंतिम सूची स्पष्ट हो सकेगी।

  • बिहार में 27% महिलाएं क्यों छोड़ रहीं पढ़ाई-नौकरी? रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली वजह

    बिहार में 27% महिलाएं क्यों छोड़ रहीं पढ़ाई-नौकरी? रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली वजह

    पटना
    बिहार में महिलाओं के पढ़ाई और नौकरी छोड़ने की वजहों को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवहन सुविधा का अभाव, महंगे किराए और असुरक्षा के कारण बिहार की 27 फीसदी महिलाएं पढ़ाई छोड़ रही हैं। यही नहीं, महंगे किराए के कारण कई महिलाएं छोटी-मोटी नौकरियां भी छोड़ने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें मिलने वाले वेतन का एक बड़ा हिस्सा आने-जाने पर ही खर्च हो जाता है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और एक निजी एजेंसी एमएससी (माइक्रोसेव कंसल्टिंग) के साझा अध्ययन में ये बातें सामने आई हैं।

    अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षा की भावना और समय की पाबंदियों के कारण महिलाएं पुरुषों की तुलना में किराए पर सालाना 18,800 रुपये अधिक खर्च करती हैं। सार्वजनिक परिवहन की बजाय निजी वाहनों, टैक्सी या रिजर्व ऑटो आदि से यात्रा की वजह से उनका खर्च अपेक्षाकृत बढ़ जाता है।

    इस वर्ष फरवरी से जून तक यह अध्ययन राज्य के सभी जिलों की शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की करीब पांच लाख महिलाओं के बीच रैंडम आधार पर किया गया। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, जिन छह शहरों (पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा) में पिंक बस सेवा शुरू की गई है, वहां महिलाएं खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। पिंक बस का किराया कम रहने से महिलाओं के बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। इन छह शहरों में पांच फीसदी महिलाओं का भय दूर हुआ है।

    पुरुषों की तुलना में 37% कम यात्रा करती हैं महिलाएं
    पुरुष जितनी बार यात्रा करते हैं, उसके मुकाबले महिलाओं की कुल आवाजाही 37 फीसदी कम होती है। इनमें से 82 फीसदी यात्राएं काम के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए होती हैं। इनमें घरेलू कामकाज, खरीदारी, बच्चों को स्कूल पहुंचाना और पारिवारिक मेल-मिलाप जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

    महिलाओं के ऑटो-टैक्सी चलाने में परंपरा बाधक
    महिलाओं के लिए ऑटो या टैक्सी का परिचालन सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं है। इसी वजह से पिंक बस सेवा के लिए महिला चालक नहीं मिल रही। जून में प्रियंका पांडेय नाम की चालक मिली। पांच महिलाओं को बस चलाने की ट्रेनिंग दी गई है।

    आवागमन के दौरान हर चौथा व्यक्ति करता है महिलाओं का उत्पीड़न
    यात्रा के दौरान महिलाओं में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सार्वजनिक परिवहन में चार में एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में महिलाओं का उत्पीड़न करता है। मुजफ्फरपुर की महिलाएं अधिक असहज और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं।

    परिवहन सुविधा की कमी, महंगे किराए और असुरक्षा बड़ी समस्या है। जहां पिंक बस सेवा शुरू है, वहां स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन अब भी 27 % महिलाएं असुरक्षा और महंगे किराए से पढ़ाई और नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। -सोनल जेटली, अध्ययनकर्ता, एमएससी

  • गया-डाल्टेनगंज नई रेल लाइन की बढ़ी रफ्तार, मिट्टी जांच के बाद बनेगा डीपीआर

    गया-डाल्टेनगंज नई रेल लाइन की बढ़ी रफ्तार, मिट्टी जांच के बाद बनेगा डीपीआर

     गयाजी
    गया-डाल्टेनगंज और गया-चतरा नई रेल लाइन परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में रेलवे स्तर पर कवायद तेज हो गई है। प्रस्तावित रेल मार्ग को लेकर प्रारंभिक तकनीकी प्रक्रिया के तहत विभिन्न क्षेत्रों में मिट्टी जांच का काम कराया गया है।

    शेरघाटी, डुमरिया, बांकेबाजार, नौडीहा समेत मार्ग में आने वाले अन्य क्षेत्रों से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी जांच की गई है। अब जांच के बाद क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है।

    रिपोर्ट रेलवे के उच्च अधिकारियों को भेजे जाने के बाद परियोजना के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    रेलवे सूत्रों के अनुसार, नई रेल लाइन के निर्माण से पहले प्रस्तावित मार्ग की भौगोलिक स्थिति, जमीन की मजबूती और मिट्टी की गुणवत्ता का तकनीकी आकलन जरूरी है।

    इसी क्रम में अलग-अलग स्थानों पर मिट्टी की जांच कराई गई है। इसमें मिट्टी की गुणवत्ता, जमीन की मजबूती, निर्माण के लिए उसकी उपयोगिता सहित अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया गया है।

    रिपोर्ट के आधार पर तय होगी परियोजना की तकनीकी रूपरेखा
    मिट्टी जांच के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट परियोजना की आगे की तकनीकी योजना के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी। अधिकारियों की ओर से तैयार रिपोर्ट मिलने के बाद रेलवे की तकनीकी टीम उसका अध्ययन करेगी।

    इसके आधार पर प्रस्तावित रेल लाइन की व्यवहार्यता, निर्माण से जुड़ी तकनीकी जरूरतों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद डीपीआर तैयार होगा।

    डीपीआर में परियोजना की अनुमानित लागत, भूमि की आवश्यकता, निर्माण कार्य और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत ब्योरा शामिल किया जा सकेगा।

    लंबे समय से हो रही रेल संपर्क की मांग
    गया को डाल्टेनगंज और चतरा से रेल मार्ग से जोड़ने की मांग लंबे समय से क्षेत्र के लोगों द्वारा की जाती रही है। नई रेल लाइन बनने से शेरघाटी, डुमरिया और बांकेबाजार सहित गया जिले के दक्षिणी क्षेत्रों को झारखंड के चतरा और डाल्टेनगंज क्षेत्र से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

    इससे यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ व्यापार और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया आगे बढ़ने से स्थानीय लोगों में भी उम्मीद जगी है। पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने परियोजना से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी दी है।

     

  • सम के बाद खुहड़ी बना पर्यटकों की नई पसंद, डेजर्ट टूरिज्म को मिलेगी बड़ी रफ्तार

    सम के बाद खुहड़ी बना पर्यटकों की नई पसंद, डेजर्ट टूरिज्म को मिलेगी बड़ी रफ्तार

    जैसलमेर
     डेजर्ट टूरिज्म की पहचान रहे सम सैंड ड्यून्स के साथ अब खुहड़ी भी पर्यटकों की पसंद में तेजी से जगह बना रहा है। सम में बढ़ती भीड़, वाहनों की आवाजाही और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच पर्यटकों का एक वर्ग शांत वातावरण और प्राकृतिक रेगिस्तान का अनुभव चाहता है। यही बदलाव खुहड़ी के लहरदार धोरों को नया पर्यटन अवसर दे रहा है।

    खुहड़ी की सबसे बड़ी ताकत फिलहाल उसका प्राकृतिक स्वरूप है। दूर तक फैली सुनहरी रेत, लहरदार धोरे और सूर्योदय-सूर्यास्त के दृश्य पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। ऊंट सफारी, धोरों पर घूमना और फोटोग्राफी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

    रेगिस्तान का नया बाजार
    सम सैंड ड्यून्स डेजर्ट टूरिज्म का केंद्र बन चुका है। कैंपिंग, सफारी और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के साथ पर्यटकों का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में खुहड़ी अपेक्षाकृत शांत अनुभव दे रहा है। इससे पर्यटकों की बदलती पसंद का संकेत मिलता है।

    कारोबार को बूस्ट
    सरकार ने पिछले बजट में खुहड़ी में अल्ट्रा लग्जरी टूरिज्म जोन विकसित करने की घोषणा की थी। इसके धरातल पर आने से लक्जरी हॉस्पिटैलिटी, कैंपिंग, परिवहन में निवेश बढ़ सकता है। इसी बजट में कुलधरा में पर्यटक सुविधा केंद्र की घोषणा भी हुई थी। दोनों स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने पर जैसलमेर का पर्यटन सर्किट विस्तृत हो सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से ऊंट सफारी, परिवहन, खान-पान और लोक कलाकारों से जुड़े कारोबार को लाभ मिल सकता है।

    रेगिस्तान में नया पर्यटन केंद्र
        जैसलमेर से खुहड़ी की दूरी 45 किमी
        वर्तमान में संचालित रिसोर्ट्स 3 दर्जनों से ज्यादा
        पिछले वर्ष जैसलमेर पहुंचे सैलानी 15 लाख से ज्यादा
        पर्यटन क्षेत्र में सालाना कारोबार 1800 करोड़ रुपए

    सम क्षेत्र में व्यवसाय 300 करोड़ रुपए
    खुहड़ी में प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए बेहतर और अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र दुबई और मध्य-पूर्व के रेगिस्तानी पर्यटन स्थलों की तर्ज पर विकसित हो सकता है।
    -कमलेश्वर सिंह, सहायक निदेशक, पर्यटक स्वागत केंद्र, जैसलमेर