Author: Admin

  • भोपाल में सिर्फ 140 वकील अधिकृत नोटरी, फिर हजारों दफ्तरों में कैसे चल रहा फर्जीवाड़ा?

    भोपाल में सिर्फ 140 वकील अधिकृत नोटरी, फिर हजारों दफ्तरों में कैसे चल रहा फर्जीवाड़ा?

    भोपाल
     शहर में नोटरी व्यवस्था को लेकर एक शिकायत ने निगरानी और नियमन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता लालचंद भारके का दावा है कि भोपाल में करीब 140 नोटरी अधिवक्ता नियुक्त हैं, जबकि इनके नाम से संचालित होने वाले नोटरी कार्यालयों की संख्या एक हजार से अधिक है।

    उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर नोटरी की अनुपस्थिति में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं और पर्याप्त स्टांप शुल्क के बिना शपथ पत्र प्रमाणित किए जा रहे हैं। शिकायत में नोटरी अधिवक्ता गुलाम निजामुद्दीन अनवर सिद्दीकी के खिलाफ भी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।

    शिकायत में क्या आरोप
    30 सितंबर 2026 को दी गई शिकायत में भारके ने कहा है कि एक शपथ पत्र उनके नाम से तैयार कराया गया और उस पर नोटरी अधिवक्ता की उपस्थिति तथा प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है। शिकायतकर्ता के अनुसार शपथ पत्र पर पर्याप्त स्टांप शुल्क नहीं लगाया गया और नोटरी टिकट भी चस्पा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शपथ पत्र प्रमाणित करने वाले नोटरी अधिवक्ता मौके पर मौजूद नहीं थे और प्रतिनिधि के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की गई।

    नोटरी के लिए क्या हैं नियम?
    नोटरी अधिनियम, 1952 और नोटरी नियम, 1956 के तहत नोटरी को अपने नोटरी कार्य का अभिलेख निर्धारित रजिस्टर में रखना होता है। नियमों में ली गई फीस की रसीद देने का प्रावधान बताया गया है। शपथ पत्रों के संबंध में उपलब्ध नियमों में नोटरी रजिस्टर में प्रविष्टि अनिवार्य नहीं बताई गई है, लेकिन अन्य नोटरी कार्यों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। दस्तावेज के अनुसार नोटरी को दस्तावेज पर पर्याप्त स्टांप शुल्क लगा है या नहीं, यह देखना होता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्टांप शुल्क की जांच किए बिना दस्तावेजों का नोटरीकरण होने से राजस्व को नुकसान हो सकता है।

    निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है
    प्रतिनिधि से नोटरी कार्य पर सवालशिकायतकर्ता ने कहा है कि नोटरी को अपने नियुक्त स्थान पर उपस्थित रहकर नोटरी कार्य करना होता है और किसी दूसरे व्यक्ति को प्रतिनिधि बनाकर नोटरी कार्य नहीं कराया जा सकता। उनका आरोप है कि कुछ कार्यालयों में अन्य व्यक्ति दस्तावेज तैयार कर रहे हैं।

    हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही होगी। शिकायत में नोटरी कार्य के दौरान खाली कागज पर हस्ताक्षर कराने का आरोप भी लगाया गया है। भारके ने जिला नोटरी अधिवक्ता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष को शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

  • असम के जंगलों में लौटी रौनक, मानस-काजीरंगा में सफारी शुरू; 13 अक्टूबर को खुलेगा पोबितोरा

    असम के जंगलों में लौटी रौनक, मानस-काजीरंगा में सफारी शुरू; 13 अक्टूबर को खुलेगा पोबितोरा

    जोरहाट

    जंगल का सफर कुछ महीनों के लिए बंद था. बारिश का मौसम था. रास्ते मुश्किल थे और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए असम के कई नेशनल पार्क और अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद थे. अब इंतजार खत्म हो गया है. असम में वाइल्डलाइफ टूरिज्म का नया सीजन शुरू हो चुका है। 

    2 अक्टूबर को मानस नेशनल पार्क के दरवाजे पर्यटकों के लिए खुल गए. इसके ठीक एक दिन बाद यानी 3 अक्टूबर से काजीरंगा नेशनल पार्क में भी सैलानियों की एंट्री शुरू हो गई. और अगर आपकी लिस्ट में पोबितोरा भी है, तो उसके लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा. पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य 13 अक्टूबर से खुलेगा. यानी अक्टूबर का महीना असम के जंगलों के नाम है। 

    बक्सा और चिरांग जिलों में फैला मानस नेशनल पार्क 2 अक्टूबर से खुल चुका है. मानसून की वजह से हर साल यहां कुछ समय के लिए पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं। 

    अब मौसम बदलने के साथ जंगल सफारी और वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका फिर मिल गया है. और मानस के बाद नंबर आया काजीरंगा का… काजीरंगा नेशनल पार्क 3 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. यह पार्क गोलाघाट और नगांव समेत कई जिलों में फैला है. इसका विस्तार बिश्वनाथ और सोनितपुर के कुछ हिस्सों तक भी है। 

    काजीरंगा का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? एक सींग वाला गैंडा. लेकिन कहानी सिर्फ गैंडे तक सीमित नहीं है. काजीरंगा असम के सबसे बड़े वन्यजीव पर्यटन आकर्षण में शामिल है. हर टूरिज्म सीजन में यहां देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। 

    अब आंकड़ों पर आते हैं. क्योंकि ये आंकड़े बताते हैं कि असम के जंगलों को देखने के लिए लोगों में कितनी दिलचस्पी है. 2025-26 के टूरिज्म सीजन में काजीरंगा नेशनल पार्क में 4.68 लाख से ज्यादा टूरिस्ट पहुंचे थे. पिछले साल यह संख्या करीब 4.06 लाख थी. यानी एक साल में पर्यटकों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई। 
    इन 4.68 लाख से ज्यादा पर्यटकों में 4.37 लाख से अधिक भारतीय थे. वहीं 30 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक भी काजीरंगा पहुंचे. काजीरंगा सिर्फ देश के पर्यटकों की पसंद नहीं है, दुनिया के दूसरे हिस्सों से आने वाले सैलानी भी असम के इस जंगल का रुख करते हैं। 

    मानस में भी बढ़े पर्यटक
    अब मानस की बात करते हैं. साल 2025-26 के टूरिज्म सीजन में मानस नेशनल पार्क में कुल 63,723 लोग पहुंचे थे. इनमें करीब 59 हजार भारतीय और लगभग 5 हजार विदेशी पर्यटक शामिल थे. यानी यहां भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है. और अब नया सीजन शुरू हो चुका है. जंगल फिर खुले हैं. सफारी फिर शुरू हो गई है. ऐसे में आने वाले महीनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। 

    पोबितोरा के लिए 13 अक्टूबर तक इंतजार
    अगर आप असम के वाइल्डलाइफ सर्किट में पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य को भी शामिल करना चाहते हैं, तो तारीख याद रखिए. 13 अक्टूबर… मोरीगांव जिले में पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य इसी दिन पर्यटकों के लिए खोला जाएगा. पिछले टूरिज्म सीजन में पोबितोरा में 35,371 पर्यटक पहुंचे थे. यानी मानस, काजीरंगा और पोबितोरा तीनों जगहों के खुलने के बाद असम का प्रमुख वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा। 

    असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इन पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने के शेड्यूल की जानकारी दी है. मानसून के दौरान जंगलों में पर्यटकों की आवाजाही रोकना हर साल की प्रक्रिया है. बारिश के दौरान जंगलों की स्थिति, सड़कें और वन्यजीवों की सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. अब मानसून का दौर पीछे छूट रहा है और पर्यटन सीजन सामने है. इसलिए असम के जंगलों में फिर से हलचल शुरू हो गई है। 

    तो अगर असम जाने का प्लान है… तो तारीखें नोट कर लीजिए. 2 अक्टूबर को मानस नेशनल पार्क खुल चुका है. 3 अक्टूबर को काजीरंगा नेशनल पार्क खुल चुका है. 13 अक्टूबर को पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य खुलेगा. पिछले सीजन के आंकड़े बता रहे हैं कि असम के जंगलों को देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है. इस बार भी देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है. तो जंगल तैयार हैं. सफारी तैयार है. और असम का नया वाइल्डलाइफ टूरिज्म सीजन भी शुरू हो चुका है। 

     

     

  • UP International Trade Show 2026 में छाया कालानमक चावल, सिद्धार्थनगर की कुकीज़ ने जीता खरीदारों का ध्यान

    UP International Trade Show 2026 में छाया कालानमक चावल, सिद्धार्थनगर की कुकीज़ ने जीता खरीदारों का ध्यान

    ग्रेटर नॉएडा
    सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पीढ़ियों से महकता कालानमक चावल अब केवल थाली तक सीमित नहीं है। वही पारंपरिक खुशबू अब कुकीज़ के स्वाद में ढलकर देश की सीमाओं से बाहर वैश्विक बाजार तक अपनी पहचान बना रही है। एक परिवार की तीन पीढ़ियों की खेती, एक युवा उद्यमी के नवाचार और उपलब्ध अवसरों के समन्वय से शुरू हुआ यह सफर आज स्थानीय कृषि विरासत को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ने की प्रेरक कहानी बन गया है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 (यूपीआईटीएस-2026) इंडिया एक्सपो मार्ट एवं सेंटर ग्रेटर नोएडा में सिद्धार्थनगर की मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स द्वारा कालानमक चावल से तैयार कुकीज़ जब देश-विदेश के खरीदारों के सामने पहुंचीं, तो स्वाद के साथ कालानमक चावल की विशिष्ट पहचान ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया। 

    ट्रेड शो के दौरान इकाई को 200 बिजनेस इंक्वायरी प्राप्त हुईं, जिनकी कुल अनुमानित कारोबारी संभावनाएं करीब 04 करोड़ रुपये की हैं।यह उपलब्धि केवल एक उद्यम की व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण भी है कि स्थानीय कृषि उत्पादों में नवाचार और मूल्य संवर्धन के माध्यम से गांव और खेत से निकलने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा सकता है।

    फ्रांस तक पहुंची कालानमक चावल की महक, 50 हजार कुकीज़ का मिला ऑर्डर

    यूपीआईटीएस-2026 बुद्धा डिलाइट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम भी बना। इकाई के संस्थापक डॉ. अजय कुमार रावत ने फ्रांस के एक बायर के साथ एमओयू साइन किया है। इसके अंतर्गत 50 हजार कुकीज़ की आपूर्ति का कन्फर्म ऑर्डर प्राप्त हुआ है, जिसकी कुल कीमत 20 लाख रुपये है। सिद्धार्थनगर के खेतों में उगने वाले कालानमक चावल से बने उत्पाद का फ्रांस के बाजार तक पहुंचना स्थानीय कृषि विरासत के वैश्विक संभावनाओं से जुड़ने का उदाहरण है। जिस फसल को परिवार पीढ़ियों से खेत में उगा रहा था, आज उसी फसल से तैयार उत्पाद के लिए विदेश से व्यावसायिक ऑर्डर मिलना इस यात्रा को विशेष बनाता है।
    उपभोक्ताओं ने भी अपनाया स्वाद, UPITS में 04.70 लाख रुपये की बिक्री

    व्यापारिक खरीदारों के साथ आम उपभोक्ताओं ने भी कालानमक चावल से तैयार उत्पादों में रुचि दिखाई। यूपीआईटीएस-2026 के दौरान बुद्धा डिलाइट्स ने बी2सी श्रेणी में 04.70 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की। कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे अलग-अलग उत्पादों ने यह संभावना सामने रखी कि पारंपरिक अनाज को आधुनिक स्वाद और उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप प्रस्तुत कर उसके लिए नया बाजार तैयार किया जा सकता है।

    दादा-परदादा के खेतों से मिली विरासत को बनाया उद्यम का आधार

    इस सफलता की जड़ें सिद्धार्थनगर के उन खेतों में हैं, जहां डॉ. अजय कुमार रावत का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से कालानमक चावल की खेती करता आ रहा है। शिक्षक पिता और गृहिणी माता के परिवार में पले-बढ़े डॉ. रावत ने राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने नेचुरोपैथी योगा में भी डॉक्टरेट किया। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए भी उनके मन में अपनी मिट्टी और कालानमक से जुड़ी पारिवारिक विरासत को कुछ नया स्वरूप देने का विचार बना रहा।

    यही विचार धीरे-धीरे प्रयोग में बदला।

    कालानमक को केवल चावल के रूप में बेचने के बजाय उससे ऐसे उत्पाद तैयार करने की सोच विकसित हुई, जिन्हें नई पीढ़ी और आधुनिक बाजार भी सहजता से अपना सके। इस विचार को वास्तविक उत्पाद में बदलने के लिए डॉ. रावत ने स्वयं खाद्य उत्पाद निर्माण की बारीकियां सीखीं और पुणे से कुकरी एवं बेकरी में डिप्लोमा कोर्स पूरा किया। इसके बाद कालानमक चावल के अलग-अलग वैरिएंट्स पर प्रयोगों का सिलसिला शुरू हुआ। लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2024 में मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स की स्थापना हुई।

    परंपरा वही रही, बदल गया उसका स्वरूप

    डॉ. रावत ने कालानमक की मूल पहचान को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक खाद्य उत्पादों से जोड़ने का प्रयास किया। इसी प्रयोग से कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे उत्पाद सामने आए।यह बदलाव केवल उत्पाद का नहीं था। इसके साथ कालानमक के लिए बाजार का दायरा भी बदलने लगा।जो कालानमक पहले मुख्यतः चावल के रूप में उपभोक्ता तक पहुंचता था, वही अब मूल्यवर्धित उत्पाद के रूप में नई उपभोक्ता श्रेणियों और नए बाजारों तक पहुंच रहा है।आज बुद्धा डिलाइट्स का वार्षिक टर्नओवर लगभग 3 करोड़ रुपये है। यूपीआईटीएस-2026 में मिली करीब 4 करोड़ रुपये की 200 बिजनेस इंक्वायरी और फ्रांस से प्राप्त 20 लाख रुपये के कन्फर्म ऑर्डर ने उद्यम के विस्तार की संभावनाओं को और मजबूत किया है।

    वित्तीय संबल मिला तो सपनों को विस्तार देने का रास्ता खुला

    किसी नवाचार को सफल उद्यम में बदलने के लिए विचार और परिश्रम के साथ वित्तीय संसाधन भी आवश्यक होते हैं। डॉ. रावत के उद्यम को आगे बढ़ाने में ‘एक जनपद एक व्यंजन पोषण वित्त योजना’ ने महत्वपूर्ण संबल प्रदान किया। योजना के अंतर्गत उन्होंने 50 लाख रुपये का ऋण लिया है, जिस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के माध्यम से 10 लाख रुपये की मार्जिन मनी (सब्सिडी) उपलब्ध कराई जाएगी। इस वित्तीय सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उद्यम को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ने का आधार मिला है।

    “अपनी मिट्टी की पहचान को दुनिया तक पहुंचाना ही सपना”

    डॉ. अजय कुमार रावत के लिए यह उद्यम केवल कारोबार नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और उससे जुड़ी पहचान को आगे ले जाने का माध्यम भी है। उनका उद्देश्य कालानमक की विशिष्ट सुगंध और स्वाद को मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पाद प्रस्तुत करने, देश-विदेश के खरीदारों से सीधे संवाद करने और फ्रांस से व्यावसायिक ऑर्डर प्राप्त करने को वे अपने उद्यम की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं।उन्होंने उपलब्ध कराए गए मंच, संबंधित विभागों के सहयोग और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अवसर छोटे और स्थानीय उद्यमों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने तथा नए बाजारों तक पहुंचने का मार्ग प्रदान करते हैं।

    खेत से कुकीज़ तक… और सिद्धार्थनगर से फ्रांस तक

    सिद्धार्थनगर के एक खेत से शुरू हुई यह कहानी आज अंतरराष्ट्रीय कारोबार के द्वार तक पहुंच चुकी है।तीन पीढ़ियों ने जिस कालानमक को खेतों में सहेजा, अगली पीढ़ी ने उसी विरासत में नवाचार जोड़ा। चावल से कुकीज़ बनीं, स्थानीय उत्पाद को नया बाजार मिला और सिद्धार्थनगर की मिट्टी की खुशबू फ्रांस तक पहुंचने लगी। बुद्धा डिलाइट्स की यह यात्रा बताती है कि जब परंपरा के साथ नवाचार, कौशल, वित्तीय अवसर और बाजार का मंच जुड़ता है, तो स्थानीय उत्पाद केवल अपनी पहचान ही नहीं बनाता, बल्कि गांव और खेत से निकलकर वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता भी विकसित करता है।

    डॉ. अजय कुमार रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति किया आभार व्यक्तइस उपलब्धि के लिए डॉ. अजय कुमार रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच ने सिद्धार्थनगर के स्थानीय उत्पाद कालानमक चावल को देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों, विभागीय सहयोग और ऐसे वैश्विक मंचों के माध्यम से छोटे एवं स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। डॉ. रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से उन्हें भी अपने पारंपरिक कालानमक चावल को मूल्यवर्धित उत्पादों के रूप में देश-दुनिया तक पहुंचाने का हौसला मिला है। उन्होंने यूपीआईटीएस-2026 में मंच उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री जी एवं उत्तर प्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। आज कालानमक की यह कहानी केवल एक चावल, एक कुकी या एक उद्यम की कहानी नहीं है—यह परंपरा को संभावनाओं में और स्थानीय पहचान को वैश्विक अवसर में बदलने की सफलता की कहानी है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में सुसाइड ड्रोन ने मचाया तहलका, इस महीने रिटायर होंगे एयर चीफ एपी सिंह

    ऑपरेशन सिंदूर में सुसाइड ड्रोन ने मचाया तहलका, इस महीने रिटायर होंगे एयर चीफ एपी सिंह

     नई दिल्ली
    दुनिया भर में चल रहे संघर्षों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि मजबूत सैन्य बल हर देश की जरूरत है. हाल के वर्षों में वायु शक्ति किसी भी देश की ताकत की सबसे तेज धार बन चुकी है. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंसमें यही बात दोहराई।  

    उन्होंने कहा कि वायुसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बेहतर बना रही है. हर युद्ध घटक का अपना महत्व है लेकिन संयुक्त बल की जरूरत सबसे ज्यादा है. ऑपरेशन सिंदूर में आईएएफ ने यही साबित किया. वायुसेना न सिर्फ ऑपरेशनल पंच देती है बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी आगे रहती है. कई देशों में मदद पहुंचाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवंत किया  है। 

    एयर चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाया गया जो खतरा बन रहे थे. भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन्स ने दुश्मन पक्ष में भारी अफरातफरी मचा दी. उन्होंने साफ कहा कि वायुसेना को अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं है. मौजूदा ढांचे में ही ड्रोन और अन्य सिस्टम को एकीकृत किया जा रहा है। 

    संख्या की कमी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि मिग-21 को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से हटाया गया जबकि इसे दो-तीन साल पहले करना चाहते थे. देरी नुकसान पहुंचाती है लेकिन मौजूदा प्रगति से उम्मीद है कि अंतर भर जाएगा. कम विमान होने के बावजूद ऑपरेशनल क्षमता को लेकर वायुसेना सहज है क्योंकि खरीद प्रक्रिया चल रही है। 

    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है…
    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है. एयर चीफ ने एचएएल और एडीए को पूर्ण समर्थन देने की बात कही. स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, एएमसीए के साथ मिसाइल और रडार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. एमआरएफए सौदा इस वित्तीय वर्ष में हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है बशर्ते दोनों पक्ष काम करें. स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने के लिए एचएएल हर साल 24 से अधिक विमान बनाने की बात कर रहा है। 

    एमआरएफए पूरा होने पर आवश्यक लड़ाकू विमान मिल सकेंगे. चीन के बढ़ते स्टील्थ विमान और पाकिस्तान द्वारा उन्हें हासिल करने की कोशिश चिंता का विषय है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में वे कुछ खास नहीं कर पाए. आधुनिक हथियार प्रणालियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा रहा है। 

    वायुसेना का विजन साफ है. एआई आधारित बल तैयार किया जाएगा जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायता करेगी लेकिन फैसला इंसान के हाथ में रहेगा. अंतरिक्ष क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और मुख्य ऑपरेशनों के समर्थन पर काम चल रहा है. स्पेस हथियारों पर भी शुरुआत हो चुकी है. थिएटर कमांड के बारे में एयर चीफ ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं. बहुपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी जारी है जिसमें तरंग शक्ति सबसे बड़ा है. ये अभ्यास सहयोग और अनुभव साझा करने का माध्यम बनते हैं। 
      
    संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं और व्यक्तिगत संदेश  

    एयर चीफ ने फ्लाईदुबई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन भारतीय पायलट का साहस सराहनीय है और उन पर गर्व है. उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है. पिछले दो साल में जो कुछ हुआ वह पूरी वायुसेना का काम है. जो नहीं हो पाया उसकी जिम्मेदारी वे खुद लेने को तैयार हैं और संतुष्ट हैं। 

    रिश्वत और हनीट्रैप के मामलों पर संवेदनशील बनाया जा रहा है. प्रियंका सक्सेना मामले में अदालत के फैसले का पालन होगा और प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के रूप में शामिल किया जाएगा.  यह एयर चीफ की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस है क्योंकि वे इस माह के अंत में सेवा निवृत्त हो रहे हैं। 

    उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय वायुसेना हमेशा तैयार रहेगी. दिग्गज सैनिकों का भी आभार जताया. कुल मिलाकर यह वार्ता वायुसेना की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को साफ करती है. संख्या की कमी के बावजूद तकनीक, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियानों पर जोर देकर आईएएफ अपनी ताकत बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

  • MP में 5 साल में सबसे कम बारिश, आधा प्रदेश सूखे की चपेट में; गेहूं-सोयाबीन उत्पादन पर असर

    MP में 5 साल में सबसे कम बारिश, आधा प्रदेश सूखे की चपेट में; गेहूं-सोयाबीन उत्पादन पर असर

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है। इस अनियमित बारिश का सीधा असर फसलों, पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य बारिश का औसत 37.3 इंच है, जबकि इस बार केवल 35.6 इंच (95.4 फीसदी) बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम है।

    5 साल में सबसे सूखा मानसून
    वर्ष 2022 में सर्वाधिक 46 इंच बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच पानी गिरा था। इस बार 35.6 इंच के साथ यह बीते 5 वर्षों की सबसे कम बारिश है। मात्र 0.6 फीसदी की कमी के कारण मध्य प्रदेश सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में चला गया है।प्रदेश में इस बार 5 साल की तुलना में सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। साल 2022 में सबसे ज्यादा 46 इंच पानी गिरा था। 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच बारिश हुई थी। वहीं इस बार 35.8 इंच पानी ही गिरा है।

    बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले 9 दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया।

    अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो आखिरी तक तक जारी रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर बना रहा। तीसरे सप्ताह पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश हुई। आखिरी सप्ताह प्रदेशभर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई।

    पश्चिम में कम, पूर्व में ज्यादा बारिश
    मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से (इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग) में सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि पूर्वी हिस्से (जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल संभाग) में 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

    जून का घाटा नहीं भर पाए जुलाई-सितंबर
    मानसून ने इस बार 9 दिन की देरी से 24 जून को दस्तक दी थी। जून के महीने में बारिश में 30 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से अधिक बारिश हुई, लेकिन यह शुरुआती घाटे की भरपाई नहीं कर सकी।

    जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा बारिश

    जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा पानी गिरा, लेकिन वह जून की भरपाई नहीं कर सका। लिहाजा, प्रदेश में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। मानसूनी पीरियड 30 सितंबर तक 904 मिमी, यानी 35.6 इंच (95.4 प्रतिशत) रिकॉर्ड की गई, जो 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी से नीचे है।

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 96 से 104 प्रतिशत बारिश ही 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी में शामिल हैं। यदि 0.6% पानी और गिर जाता तो प्रदेश इस कैटेगिरी में पहुंच जाता, यानी इस बार प्रदेश में 'सामान्य से कम' बारिश दर्ज हुई है।

    सोयाबीन और गेहूं का उत्पादन घटेगा
    मालवा सहित इंदौर और नर्मदापुरम में कम बारिश से सोयाबीन उत्पादन प्रभावित होगा। इस साल प्रदेश में 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन और कुल 134.31 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी हिस्से में पानी की कमी से सोयाबीन का उत्पादन 2 से 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक घट सकता है। वहीं पानी की कमी के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं और चने की बोवनी भी प्रभावित होगी।

    19 प्रमुख बांध रीते, पेयजल और बिजली पर खतरा
    प्रदेश के कुल 54 बड़े बांधों में से 35 बांध 90 फीसदी या उससे अधिक भरे हैं। वहीं 19 बांधों में पानी का स्तर 10 से 90 प्रतिशत के बीच अटका हुआ है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने 90 फीसदी से अधिक भरे बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। वहीं गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मणिखेड़ा जैसे 5 बड़े जल विद्युत गृहों में जलस्तर कम रहने से हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    इस बार बारिश का लंबा दौर नहीं रहा
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक कहते हैं- इस बार प्रदेश में बारिश का ट्रेंड बदला हुआ देखने को मिला। कई जिलों में इतनी अतिवृष्टि हुई कि जनजीवन प्रभावित रहा। कई में अनियमित बारिश भी हुई। जैसे कभी तेज बारिश तो कभी लंबा ब्रेक। इस वजह से हालात ठीक नहीं है।

    पहले 8 से 10 दिन लगातार बारिश होती थी, लेकिन इस बार अधिकतम दो दिन तक ही लगातार पानी गिरा। पहले बंगाल की खाड़ी से डिप्रेशन, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) से एक्टिव होते थे और सागर क्षेत्र से होते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में गुजरते थे। इससे अति भारी या भारी बारिश होती थी। इस बार सिस्टम इतने मजबूत नहीं रहे।

    मानसूनी सीजन में भी प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में दिन में गर्म रहे। बारिश के अंतराल की वजह से जमीन सूखने लगी। इस वजह से पानी जमीन के अंदर नहीं उतरा। वर्तमान में तेज धूप है और जमीन सूख रही है। इससे कुछ दिनों के बाद ही भू-जल स्तर नीचे जाने लगेगा।

    माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत
    विशेषज्ञ नायक कहते हैं कि जिन जिलों में 20 प्रतिशत या इससे कम पानी गिरा है, वहां पर सरकार को माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत है। जब किसी इलाके में 26 प्रतिशत या उससे कम बारिश होती है तो वह इलाका सूखा घोषित होता है। इस बार सूखे के दायरे में आने वाले कई जिले हैं। यहां पर सरकार सर्वे कराकर पेयजल की स्थिति का आकलन लगाए।

    शहरों में जल संकट की आशंका
    भोपाल: सामान्य से 9 फीसदी अधिक (41 इंच से ज्यादा) बारिश दर्ज की गई। बड़ा तालाब, भदभदा और कलियासोत डैम फुल हो चुके हैं, हालांकि केरवा और कोलार में पानी की कमी है।

    इंदौर: सामान्य से 27 प्रतिशत कम (लगभग 9.5 इंच कम) बारिश हुई है। शहर की जल आपूर्ति मुख्य रूप से नर्मदा, यशवंत सागर और बिलावली तालाब पर निर्भर है।
    उज्जैन: गंभीर डैम इस मानसूनी सीजन में पूरा नहीं भर सका, जिससे शहर में पेयजल समस्या गहरा सकती है।

  • 18 महीने के DA एरियर पर फिर बढ़ी हलचल, 8वें वेतन आयोग में मिल सकता है बड़ा अपडेट?

    18 महीने के DA एरियर पर फिर बढ़ी हलचल, 8वें वेतन आयोग में मिल सकता है बड़ा अपडेट?

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग संगठन अपनी डिमांड रख रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे डिमांड हैं जो लंबे समय से चर्चा के केंद्र में रहे हैं। ऐसी ही एक डिमांड कोरोना काल के 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) एरियर की है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

    क्या है मामला?
    दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 की दोनों छमाही यानी जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर तक के डीए बढ़ोतरी को सरकार ने होल्ड कर दिया था। इसके अलावा साल 2021 की पहली छमाही में भी केंद्रीय कर्मचारियों को डीए नहीं बढ़ाया गया था। इस तरह, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्ते में 18 महीने तक किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई। कोरोना के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

    हालांकि, केंद्र सरकार ने अलग-अलग समय पर संसद में दिए गए जवाबों में स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़े दबाव को देखते हुए जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की DA/DR की तीन किस्तों को फ्रीज किया गया था। सरकार ने यह भी कहा है कि महामारी के दौरान पैदा हुई असाधारण वित्तीय परिस्थितियों और सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस अवधि के DA/DR एरियर का भुगतान करना व्यावहारिक नहीं माना गया।

    आठवें वेतन आयोग से मांग
    हाल ही में उत्तर प्रदेश में रिटायर हो चुके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने विरोध प्रदर्शन किया और 12 सूत्रीय मांगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया है। प्रमुख मांग थी कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए। संगठन ने मांग की कि रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर कोई भेदभाव न किया जाए और पुराने रिटायर लोगों की पेंशन में भी संशोधन किया जाए। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने और पेंशन से होने वाली आय को टैक्स से छूट देने की भी मांग की।

    अन्य प्रमुख मांगों में 65 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में पेंशन में 5% की बढ़ोतरी और 10 साल बाद पेंशन कम्यूटेशन से जुड़ी कटौती को खत्म करना शामिल था। पेंशनभोगियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की भी मांग की है।

    यह भी मांग की गई कि 50% से अधिक महंगाई भत्ते को मूल पेंशन में मिला दिया जाए। संगठन ने वेतन आयोग की प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए अंतरिम राहत की भी मांग की।

    क्या 8वें वेतन आयोग का पैनल इन मांगों पर विचार करेगा?
    यह तब पता चलेगा जब 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। बता दें कि यह 3 सदस्यों वाला आयोग है। यह एक अस्थायी निकाय है। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और उम्मीद है कि यह गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। ऐसे में 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 में पेश किए जाने की उम्मीद है।

  • MP Rail Project: आजादी के बाद पहली बार धार पहुंचेगी यात्री ट्रेन, 28-29 अक्टूबर को CRS निरीक्षण

    MP Rail Project: आजादी के बाद पहली बार धार पहुंचेगी यात्री ट्रेन, 28-29 अक्टूबर को CRS निरीक्षण

     धार 
    प्रदेश के धार वासियों को स्वतंत्रता के बाद पहली बार रेल सेवा मिलने जा रही है। पश्चिम रेलवे की इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। रेलवे सूत्रों के अनुसार कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) 28 और 29 अक्तूबर  को इस नए 46 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग का अंतिम निरीक्षण करेंगे। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के तुरंत बाद रूट पर नियमित रूप से यात्री ट्रेनों के संचालन को हरी झंडी मिल जाएगी। रेलवे प्रशासन ने आने वाले 25 दिनों में धार तक ट्रेन संचालन से जुड़े सभी शेष कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    चार नए स्टेशनों की तैयारी
    इस नई रेल लाइन के माध्यम से मध्य प्रदेश के चार नए रेलवे स्टेशन भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इनमें पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार रेलवे स्टेशन शामिल हैं। ये चारों स्टेशन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और यहां फिनिशिंग तथा सिग्नलिंग से संबंधित काम लगभग 97 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। टीही से धार के बीच रेल लाइन बिछने के बाद यह सभी स्टेशन आपस में जुड़ जाएंगे। आजादी के बाद पहली बार धार में ट्रेन पहुंचने को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त के निरीक्षण के उपरांत रेलवे बोर्ड नई ट्रेनों की समय-सारणी घोषित करेगा। 

    भोपाल और मुंबई तक कनेक्टिविटी
    इंदौर-दाहोद रेल लाइन शुरू होने से मालवा का यह पूरा क्षेत्र सीधे राजधानी भोपाल से कनेक्ट हो जाएगा। धार और पीथमपुर के लोग सीधे इंदौर से जुड़ेंगे, साथ ही आने वाले समय में दाहोद लिंक के माध्यम से वे रतलाम, झाबुआ और उज्जैन जैसे धार्मिक एवं व्यावसायिक केंद्रों से आसानी से जुड़ सकेंगे। झाबुआ के रास्ते गुजरात के दाहोद से जुड़ने के कारण मध्य प्रदेश से अहमदाबाद, वडोदरा और मुंबई जाने वाले यात्रियों को एक नया और बहुत छोटा मार्ग मिल जाएगा। इससे यात्रा के समय में करीब दो से तीन घंटे तक की बचत होगी। इसके अलावा मालगाड़ियों को भी आसानी से क्लीयरेंस मिलेगा, जिससे यात्री ट्रेनों की रफ्तार भी सुपरफास्ट हो जाएगी।

    आधुनिक सुरंग और बिना गिट्टी का ट्रैक
    इंदौर से गुजरात के दाहोद को जोड़ने वाली इस संपूर्ण रेल परियोजना की कुल लंबाई लगभग 204.76 किलोमीटर है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत पीथमपुर के निकट तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। टीही टनल की मुख्य विशेषता यह है कि इसका ट्रैक पूरी तरह से बैलास्टलेस बनाया गया है, यानी इसमें गिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सुरक्षा एवं निगरानी के दृष्टिकोण से इस सुरंग के भीतर 140 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

  • 4 अक्टूबर राशिफल: रविवार को चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें कैसा रहेगा आज का दिन

    4 अक्टूबर राशिफल: रविवार को चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें कैसा रहेगा आज का दिन

    मेष
    आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। दोपहर के बाद तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। बिजनेसमैन को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है।

    वृषभ
    आज के दिन हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। धन और वित्त के मामले में समय अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा।

    मिथुन
    आज का दिन संतोषजनक रहेगा। सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। कारोबार फलेगा- फूलेगा। इसलिए अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं।

    कर्क
    आज आपके काम की सराहना होगी और तारीफ भी मिलेगी। व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और ऑयली फूड्स से दूरी बनाएं। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है।

    सिंह
    यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें।

    कन्या
    आज कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं। आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी।

    तुला
    आज के दिन फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। अहंकारी न होने का प्रयास करें।

    वृश्चिक
    आज पार्टनरशिप में व्यवसाय करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। दोपहर के समय में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है। आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा।

    धनु
    आज के दिन कुछ नुकसान होने की आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। वहीं, खुद और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए।

    मकर
    कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं और तनाव का कारण बन सकते हैं। इसलिए तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है।

    कुंभ
    करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। बिजनेस में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है।

    मीन
    आज करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

  • योजना से बदला जीवन: नौनिहाल छात्रवृत्ति बनी बिलाईगढ़ की बेटी की उम्मीद

    योजना से बदला जीवन: नौनिहाल छात्रवृत्ति बनी बिलाईगढ़ की बेटी की उम्मीद

    रायपुर

    जब सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सही समय पर ज़रूरतमंदों तक पहुँचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं बनतीं, बल्कि किसी के टूटते सपनों को जोड़ने का आधार बन जाती हैं। ऐसी ही एक उम्मीद भरी कहानी छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम झुमका विकासखंड बिलाईगढ़ से सामने आई है, जहाँ 'नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना' ने एक श्रमिक परिवार की बेटी की शिक्षा को नया संबल दिया है।

    ​सीमित साधन, असीमित सपने

    ग्राम झुमका की निवासी फुलेश्वरी साहू अपने परिवार के सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर जीवन में आगे बढ़ते देखना चाहती हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अक्सर बच्चों की पढ़ाई लिखाई से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतें भी चिंता का कारण बन जाती थीं।

    ​छात्रवृत्ति से मिला सम्बल

      ​मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में संचालित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना इस परिवार के लिए तारणहार बनकर आई।
             ​योजना के तहत पंजीकृत श्रमिक परिवार की पात्रता के आधार पर फुलेश्वरी साहू की बेटी को 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति राशि सीधे प्रदान की गई। यह सहायता राशि बेटी की कॉपियों, किताबों और पढ़ाई की अन्य आवश्यक सामग्रियों को जुटाने में बेहद उपयोगी साबित हुई। 

    ​फुलेश्वरी साहू कहती हैं कि सरकार से मिली 3 हजार रुपये की यह मदद केवल एक राशि नहीं, बल्कि मेरी बेटी के उज्ज्वल भविष्य का सहारा है। इससे हमारा यह हौसला बढ़ा है कि आर्थिक तंगी चाहे जैसी भी हो, हमारी बेटी पढ़ाई जारी रखेगी और अपने सपनों को पूरा करेगी। इस सहयोग के लिए हम राज्य सरकार के हृदय से आभारी हैं।

    ​धरातल पर दिख रहा योजनाओं का असर     

    ​कलेक्टर  के निर्देशन में जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा और त्वरित लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। संबंधित विभागों के माध्यम से पात्र श्रमिक परिवारों को चिन्हांकित कर उन्हें लगातार इन योजनाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि शिक्षा और विकास की दौड़ में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।        ​

    नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना आज प्रदेश के अनगिनत श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को पंख दे रही है और यह साबित कर रही है कि संवेदनशील सरकार का साथ हो, तो हर चुनौती आसान हो जाती है।

  • ‘सेवा मेरा योगदान’: वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने 350 दिव्यांगजनों को वितरित किए सहायक उपकरण

    ‘सेवा मेरा योगदान’: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 350 दिव्यांगजनों को वितरित किए सहायक उपकरण

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शनिवार को सिन्दूर पार्क में ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नशामुक्त भारत अभियान एवं दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने 350 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप करीब 60 लाख रुपए की लागत के विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों के जीवन को आसान बनाना ही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है। इस दौरान उन्होंने युवाओं को नशे और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

    वित्त मंत्री  चौधरी ने सिन्दूर पार्क में स्थायी एवं भव्य मंच निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि पार्क में उपयुक्त स्थान का चयन कर ऐसा मंच विकसित किया जाए, जिसका उपयोग विभिन्न आयोजनों में किया जा सके। इससे बार-बार अस्थायी मंच और टेंट लगाने की आवश्यकता नहीं होगी तथा नागरिकों को कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी।

    सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की आत्मनिर्भरता का माध्यम : वित्त मंत्री  चौधरी

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सामग्री वितरण नहीं है, बल्कि उनके दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग है। ट्राय सायकल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और ब्रेल किट जैसे उपकरण आवागमन, शिक्षा और रोजमर्रा के कार्यों में उनकी सहायता करेंगे। उन्होंने उपकरण प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को शुभकामनाएं देते हुए सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सेवा भाव और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सेवा का वास्तविक अर्थ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी आवश्यकता को समझना और उसे आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।

    नशे से दूर रहें युवा, अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल और कौशल में लगाएं

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि नशे के विरुद्ध जागरूकता को निरंतर समाज के बीच ले जाने की आवश्यकता है। युवाओं को अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी है कि नशे की ओर बढ़ रहे युवाओं को समय रहते सही दिशा प्रदान करें।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हस्ताक्षर अभियान में सहभागिता करते हुए ‘नशा सब कुछ नाश कर देता है। स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन हेतु नशामुक्ति अपनाएं’ का संदेश दिया। वित्त मंत्री  चौधरी सहित उपस्थित लोगों ने नशामुक्त भारत की शपथ भी ली। इस अवसर पर नशे से दूर होकर सामान्य जीवन की दिशा में आगे बढ़ रहे प्रदीप पुरी गोस्वामी एवं गुरु चरण मिश्रा को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    मोबाइल और सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग करें युवा

    वित्त मंत्री  चौधरी ने युवाओं को मोबाइल एवं सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि मोबाइल ज्ञान, जरूरी काम और संवाद का उपयोगी माध्यम है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग आदत में बदल सकता है। युवाओं को सोशल मीडिया और रील्स पर आवश्यकता से अधिक समय बिताने के बजाय पढ़ाई, खेल, कौशल विकास और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल देखने से एकाग्रता, नींद, आंखों और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    स्वस्थ जीवनशैली के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता पर भी दें ध्यान

    वित्त मंत्री  चौधरी ने युवाओं से फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से बचने, पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने तथा नियमित योग-व्यायाम और व्यवस्थित दिनचर्या अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें। कौशल और नई तकनीक की जानकारी के माध्यम से युवा स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकते हैं।

    उन्होंने रायगढ़ में युवाओं के लिए उपलब्ध शैक्षणिक एवं कौशल विकास सुविधाओं का उल्लेख करते हुए प्रयास विद्यालय, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, फिजियोथेरेपी कॉलेज, नेचुरोपैथी कॉलेज, नव गुरुकुल और नालंदा परिसर की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रिपल आईटी के सहयोग से रायगढ़ के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    नशे के खिलाफ जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत :  देवेंद्र प्रताप सिंह

    राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराना और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूक करना जनसेवा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य हैं। नशे के विरुद्ध प्रयासों को कार्यक्रमों तक सीमित न रखते हुए घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। परिवार, समाज और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।

    नगर निगम रायगढ़ के महापौर  जीवर्धन चौहान ने कहा कि नशे का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ उसकी आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और परिवारों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    350 दिव्यांगजनों को मिले करीब 60 लाख रुपए के सहायक उपकरण

    कार्यक्रम में 350 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप मोटराइज्ड ट्रायसायकल, सामान्य ट्रायसायकल, व्हीलचेयर, डिजिटल श्रवण यंत्र, वॉकिंग स्टिक, एडजस्टेबल स्टिक, स्लेट केन, सुगम्य केन, ब्रेल किट, स्मार्टफोन, स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर, सीपी व्हीलचेयर तथा विभिन्न प्रकार के क्रच सहित अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए गए। हितग्राहियों का चिन्हांकन पूर्व में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में किया गया था। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के सहयोग से ये उपकरण उपलब्ध कराए गए। कार्यक्रम में अमृता मालाकार, पुष्पा नायक, ईश्वर चौहान और विशाल नागवंशी को यूडीआईडी प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।

    सहायक उपकरण मिलने से बढ़ी सुविधा, हितग्राहियों के चेहरों पर खुशी

    ग्राम सेमरा निवासी टेकचंद मालाकार ने बताया कि ट्रायसायकल नहीं होने के कारण उन्हें आने-जाने और पढ़ाई के लिए अपने पिता पर निर्भर रहना पड़ता था। अब ट्रायसायकल मिलने से वे स्वयं आसानी से आवागमन कर सकेंगे। उन्होंने शासन-प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

    पुसौर विकासखंड के छिछोर उमरिया की आंगनबाड़ी सहायिका सुनीता शंकर ने बताया कि उन्हें पहली बार ट्रायसायकल मिली है। इससे अब काम के सिलसिले में आने-जाने में काफी सुविधा होगी। उन्होंने ट्रायसायकल मिलने पर खुशी जताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में नगर निगम सभापति  डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, गणमान्य नागरिक, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, एलिम्को एवं एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक और दिव्यांग हितग्राही उपस्थित रहे।