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  • शाई होप का ऐतिहासिक शतक; वेस्टइंडीज ने न्यू चंडीगढ़ वनडे में 352 रनों का लक्ष्य हासिल कर रचा इतिहास

    शाई होप का ऐतिहासिक शतक; वेस्टइंडीज ने न्यू चंडीगढ़ वनडे में 352 रनों का लक्ष्य हासिल कर रचा इतिहास

    नई दिल्ली
    न्यू चंडीगढ़ के पीसीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शनिवार को खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इतिहास रच दिया। होप की 143 गेंदों में 162 रनों की नाबाद और जुझारू पारी की बदौलत कैरेबियाई टीम ने 352 रनों के विशाल लक्ष्य को 48.2 ओवरों में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस यादगार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप होने से खुद को बचा लिया।

    वेस्टइंडीज क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज
    न्यू चंडीगढ़ में मिली यह जीत कैरेबियाई क्रिकेट के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। वेस्टइंडीज ने अपने 907 वनडे मैचों के लंबे इतिहास में पहली बार 350 से अधिक रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक चेज किया है। इससे पहले वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन चेज 328 रनों का था जो उन्होंने साल 2019 में आयरलैंड के खिलाफ डबलिन में हासिल किया था। यह कुल छठा मौका है जब कैरेबियाई टीम ने 300 या उससे अधिक का स्कोर सफलता के साथ चेज किया है।

    भारतीय टीम के नाम दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड
    वेस्टइंडीज के लिए जहां यह मुकाबला ऐतिहासिक खुशियां लेकर आया, वहीं भारतीय टीम के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। भारतीय वनडे क्रिकेट इतिहास में यह सिर्फ तीसरा मौका है जब टीम इंडिया 350 से ज्यादा रन बनाने के बावजूद अपने स्कोर का बचाव करने में नाकाम रही। भारतीय गेंदबाज बोर्ड पर एक विशाल स्कोर लगे होने के बाद भी विरोधी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए।

    भारतीय गेंदबाजों का लचर प्रदर्शन
    भारतीय आक्रमण की बात करें तो मोहम्मद सिराज, गुरनूर बरार, कुलदीप यादव और नमन धीर ने 1-1 विकेट जरूर चटकाए लेकिन वे पूरी पारी के दौरान कप्तान शाई होप को रोकने का कोई तोड़ नहीं निकाल सके। ओपनिंग करने उतरे शाई होप अंत तक क्रीज पर खूंटा गाड़कर डटे रहे और अकेले दम पर मैच का पासा पलट दिया। उनकी इस मैच जिताऊ पारी ने दोनों टीमों के बीच का अंतर साफ तौर पर तय कर दिया।

     

  • अरबाज खान से सलमान पर पूछा सवाल तो बिगड़ा माहौल, जवाब दिए बिना पैपराजी से चले गए एक्टर

    अरबाज खान से सलमान पर पूछा सवाल तो बिगड़ा माहौल, जवाब दिए बिना पैपराजी से चले गए एक्टर

    हाल ही में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मुंबई में एक इवेंट के दौरान एक्टर अरबाज खान 'द वेस्टिन मुंबई पवई लेक' में फोटोग्राफर्स से मिले. लेकिन माहौल तब अजीब हो गया जब एक पैपराजी ने उनसे उनके भाई, एक्टर सलमान खान के बारे में सवाल पूछा. जिससे अरबाज काफी चिढ़ गए.

    दरअसल पैपराजी ने अरबाज से 'बिग बॉस 20' पर ट्रोलर्स को लेकर सलमान की हालिया टिप्पणियों के बारे में पूछा. अरबाज़ ने सवाल का जवाब देने से बचने की कोशिश की और जल्दी से 'एक्सक्यूज़ मी… थैंक यू, थैंक यू' कहा और फोटोग्राफर्स के पास से चले गए.

    हालांकि, बातचीत यहीं खत्म नहीं हुई. बाद में अरबाज मुड़े और पैपराजी से पूछा, 'क्या यह ज्वेलरी से जुड़ा था? क्या वह सवाल आज के इवेंट से जुड़ा था?' इससे पता चलता है कि शायद उन्हें इवेंट से जुड़े सवालों की उम्मीद थी.

    अभी तक कोई सफाई नहीं
    इस छोटी सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा है. अरबाज के रिएक्शन से यह जानने की एक्साइटमेंट बढ़ गई है कि उन्होंने सलमान से जुड़े सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया. अभी तक अरबाज की तरफ से वहां से चले जाने के फैसले या उनके रिएक्शन के पीछे किसी खास वजह के बारे में कोई सफाई नहीं दी गई है.

    सलमान ने क्या कहा था?
    बीते दिनों बिग बॉस 20 में सलमान खान ने पैपराजी के काम करने के तरीके और उनकी मानसिकता पर कड़ा एतराज जताया था. उन्होंने कहा कि गाड़ियों से उतरते-बैठते वक्त एक्ट्रेसेस के गलत एंगल से फोटो-वीडियो लिए जाते हैं, जिन्हें कोई भी महिला पसंद नहीं करती.  उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों को मीडिया कार्ड किसने दिए हैं और इनकी मानसिकता आखिर क्या है?
     
    वर्क फ्रंट
    एक्टर आखिरी बार 'बिहू अटैक' में दिखे थे, जिसे सुजाद इकबाल खान ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में देव मेनारिया, डेज़ी शाह, राहुल देव, रजा मुराद, युक्ति कपूर, हितेन तेजवानी, मीर सरवर, डिम्पू बरुआ और एमी मिसोबाह ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं.

    59 साल के अरबाज ने 24 दिसंबर 2023 को मेकअप आर्टिस्ट शूरा खान (36) से शादी की थी. इस कपल के घर 5 अक्टूबर 2025 को बेटी सिपाारा खान का जन्म हुआ. इससे पहले अरबाज की शादी मलाइका अरोड़ा से हुई थी, जो 1998 से 2017 तक चली. इस पूर्व कपल का एक बेटा है, अरहान खान.
     

  • 6 अक्टूबर को ऑटो सेक्टर में महालॉन्च, एक ही दिन 6 गाड़ियां होंगी लॉन्च

    6 अक्टूबर को ऑटो सेक्टर में महालॉन्च, एक ही दिन 6 गाड़ियां होंगी लॉन्च

     नई दिल्ली
    अक्टूबर का महीना लॉन्चेज के भरा होने वाला है. इस महीने कई बाइक और कारें लॉन्च होने वाली है. हालांकि, उसमें भी 6 अक्टूबर की तारीख ऐसी है, जिस दिन एक साथ कई प्रोडक्ट्स लॉन्च होने वाले हैं. 6 अक्टूबर को दो कारें और चार बाइक लॉन्च होने वाली है. इन सभी प्रोडक्ट्स के टीजर आने शुरू हो गए हैं। 

    सबसे पहले बात करते हैं उस प्रोडक्ट की जो रिवील हो चुका है. हम बात कर रहे हैं स्कोडा स्लाविया फेसलिफ्ट (Skoda Slavia Facelift) की, जो रिवील हो चुकी है. ये मार्केट में उपलब्ध एक पॉपुलर सेडान है. अपडेट के तहत इस कार में काफी कुछ नया मिलेगा। 

    स्लाविया फेसलिफ्ट में क्या होगा खास?
    नई स्कोडा स्लाविया में रिवाइज्ड फ्रंट एंड दिया जाएगा, जिसमें हेडलैम्प्स को अभी बदला गया है. इसमें कनेक्टिंग एलईडी बार, एलईडी डीआरएल्स, नए एलॉय व्हील्स, रिवाइज्ड टेल लैम्प्स, बंपर और कई दूसरे बदलाव देखने को मिलेंगे. कैबिन में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। 

    मुख्य अंतर 10.24 इंच का ड्राइवर डिस्प्ले है, जिस पर टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन मिलेगा. इसके अलावा कार में 10 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा. कार में पहले वाला ही 1.0 लीटर का टीएसआई और 1.5 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन मिलेगा. ये कार 6 अक्टूबर को लॉन्च होगी। 

    होंडा फेसलिफ्ट 
    दूसरा बड़ा लॉन्च होंडा एलिवेट फेसलिफ्ट है. इस एसयूवी का अपडेटेड वर्जन 6 अक्टूबर को लॉन्च होगा. इस कार में कई डिजाइन बदलाव होंगे. इसमें ट्विक्ड हेडलैम्प्स, एलईडी डीआरएल्स, कनेक्टिंग एलईडी बार, एक रिवाइज्ड फ्रंट ग्रिल और बंपर मिलेगा. इसमें नए एलॉय व्हील्स और रिवाइज्ड टेल लैम्प्स मिलेंगे। 

    इंटीरियर की बात करें, तो एसयूवी में 10.25 इंच का इंफोटेनमेंट यूनिट मिलेगा. इसके अलावा 8 स्पीकर ऑडियो सिस्टम, एक वायरलेस चार्जर, 7 इंच का सेमी डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, रियर पार्किंग और कई दूसरे फीचर्स मिलेंगे. कार के इंजन डिपार्टमेंट में कोई बदलाव नहीं होगा। 

    चार बाइक्स होंगी लॉन्च 
    ट्रायम्फ (Triumph) ने एक टीजर जारी किया, जिसमें कंपनी ने चार नई मोटरसाइकिल को टीज किया है. ये बाइक्स 6 अक्टूबर को लॉन्च होने वाली है. कंपनी बोनविले 400 (Bonneville 400) को लॉन्च कर सकती है, जिसे कई बार टेस्ट करते हुए स्पॉट किया गया है। 

    ये बाइक रेट्रो मॉडर्न लुक के साथ आएगी. बोनविले 400 का सीधा मुकाबला रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 और बुलेट 350 के साथ होंडा सीबी 350 लाइनअप से होगा. इसके अलावा कंपनी स्ट्रीट ट्रिपल और दो टाइगर मॉडल लॉन्च होंगे। 

  • रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की वापसी तेज, 140 की घर वापसी; 55 अभी भी फंसे

    रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की वापसी तेज, 140 की घर वापसी; 55 अभी भी फंसे

    नई दिल्ली
     भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक हुई है। इस बैठक के बाद सामने आई जानकारी से पता चला है कि रूसी सेना में भर्ती किए गए लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। वहीं भारत रूसी सशस्त्र बलों में सेवा कर रहे अन्य 55 लोगों के बारे में जानकारी मांग रहा है।

    एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों से बातचीत की है।

    भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक
    बैठक की जानकारी में कहा गया, 'भारत सरकार ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ, उच्चतम स्तर पर भी, बातचीत की है। अब तक, लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त किया जा चुका है।'

    बैठक में आगे बताया गया, 'भारतीय पक्ष रूसी सेना में कथित तौर पर मौजूद 55 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी के लिए रूसी अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां बेईमान एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही हैं।'

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पिछले महीने ये ताजा आंकड़े साझा किए थे। उस समय, मिसरी ने कहा था कि रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों में से 139 को सेवा से मुक्त कर दिया गया था, जबकि 51 की मौत हो गई थी।

    विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि यह मुद्दा रूस के साथ अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग स्तरों पर उठाया गया था। मिसरी ने कहा था, 'आखिरी गिनती के अनुसार, हमारे पास रूसी सेना में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी। उनमें से, हमारे पास जानकारी है कि हमारे 139 नागरिकों को सेना से मुक्त कर दिया गया है।'

    विदेश सचिव ने आगे बताया था, 'दुर्भाग्य से, हमारे पास उन 51 लोगों के बारे में भी जानकारी है जिनकी अब तक मौत हो चुकी है। भारत अभी भी सेवा कर रहे लोगों की जल्द रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए मॉस्को के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।'

  • 37 साल की हसीना का बोल्ड बीच लुक वायरल, 8 साल बड़े ‘क्रिकेट होस्ट’ संग दिखी रोमांटिक केमिस्ट्री

    37 साल की हसीना का बोल्ड बीच लुक वायरल, 8 साल बड़े ‘क्रिकेट होस्ट’ संग दिखी रोमांटिक केमिस्ट्री

    मुंबई 
    एक्ट्रेस कृतिका कामरा इन दिनों वेकेशन पर हैं. उन्होंने वेकेशन से अपनी कई सिजलिंग तस्वीरें शेयर की हैं। कृतिका बिकिनी पहने बीच पर चिल करती हुई नजर आईं. एक्ट्रेस बिकिनी में अपना फिगर फ्लॉन्ट करती हुई देखी जा सकती हैं। एक फोटो में कृतिका ब्लैक बिकिनी पहने चिल मोड में नजर आईं. ओपन हेयर और सटल मेकअप में कृतिका सुपर गॉर्जियस लगीं। एक दूसरे फोटो में कृतिका बिकिनी पहने पूल में चिल करती हुई नजर आईं. वो अपनी बैक फ्लॉन्ट करती हुई दिखाई दीं।

    एक दूसरी फोटो में कृतिका व्हाइट टी-शर्ट और ग्रे ट्राउजर में दिखाई दीं. वो अपने पति और क्रिकेट होस्ट गौरव कपूर संग ट्विनिंग करती हुई नजर आईं. दोनों मिरर सेल्फी लेते नजर आए। 

    कृतिका कई अलग-अलग लोकेशन पर चिल करती हुई दिखाई दीं. वो लूज टी-शर्ट और मेसी हेयर में रिलैक्स मोड में दिखाई दीं।  कृतिका कामरा की बात करें तो उन्होंने क्रिकेट होस्ट गौरव कपूर संग मार्च 2026 में बांद्रा स्थित घर में प्राइवेट सेरेमनी में रजिस्ट्रार वेडिंग की थी. शादी के बाद उन्होंने रिसेप्शन पार्टी होस्ट की थी।  बता दें कि कृतिका संग गौरव की ये दूसरी शादी है. गौरव की पहली शादी कीरत भट्टल से हुई थी. हालांकि 7 साल बाद दोनों का रिश्ता टूट गया था। वहीं कृतिका पहले करण कुंद्रा संग रिलेशनशिप में थीं. मगर उनका ब्रेकअप हो गया था. गौरव और कृतिका अब साथ में खुश हैं।  

     

  • बेंगलुरु-मुंबई सफर अब 16 घंटे में! 1137 KM रूट पर जल्द दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर, किराया ₹3000

    बेंगलुरु-मुंबई सफर अब 16 घंटे में! 1137 KM रूट पर जल्द दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर, किराया ₹3000

    बेंगलुरु
    बेंगलुरु से मुंबई जाने में अभी ट्रेन से करीब 22 से 24 घंटे लग जाते हैं. लेकिन जल्द ही इस सफर में 6 से 8 घंटे की बचत हो सकती है. दोनों शहरों के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस महीने शुरू होने की संभावना है. प्रस्तावित टाइमटेबल के मुताबिक, यह ट्रेन बेंगलुरु से मुंबई का सफर 16 घंटे 5 मिनट में पूरा कर सकती है. वापसी में मुंबई से बेंगलुरु पहुंचने में करीब 15 घंटे 45 मिनट लगने का अनुमान है. यह दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी। 

    प्रस्तावित रेल रूट करीब 1,137 किलोमीटर लंबा है और पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड व डबल ट्रैक है. इसके ज्यादातर हिस्सों में 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड से ट्रेन चलाने की क्षमता है. यही वजह है कि इस रूट को फास्ट ट्रेन सर्विस के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है. इस ट्रेन को रात में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. हालांकि, अभी ट्रेन की शुरुआत की तारीख और टाइमटेबल पर रेलवे की अंतिम घोषणा का इंतजार है। 

    बेंगलुरु से मुंबई कितना लगेगा समय?

    प्रस्तावित टाइम टेबल के मुताबिक, ट्रेन बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT Bengaluru) से शाम 7:50 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11:55 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुंचेगी. इस तरह सफर में 16 घंटे 5 मिनट लगेंगे. वापसी में ट्रेन मुंबई के CSMT से रात 8:10 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 11:55 बजे बेंगलुरु पहुंचेगी. इस दिशा में यात्रा का समय करीब 15 घंटे 45 मिनट रहने का अनुमान है. फिलहाल इस रूट पर चलने वाली मौजूदा ट्रेनों को एक तरफ का सफर पूरा करने में करीब 22 से 24 घंटे लगते हैं. ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस रूट पर यात्रियों के करीब 6 से 8 घंटे बच सकती है। 

    किन स्टेशनों पर रुक सकती है ट्रेन?
    सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर के रास्ते में इन स्टेशनों पर ठहराव हो सकता है:

        अनंतपुर
        गुंतकल
        रायचूर
        कलबुर्गी
        सोलापुर
        पुणे
        कल्याण

    ट्रेन के संभावित नंबर 27651 और 27652 बताए जा रहे हैं. हालांकि, स्टॉपेज और ट्रेन नंबर को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है. रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही तय होगा कि ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी और उसका समय क्या होगा। 

    प्रस्तावित योजना के मुताबिक, ट्रेन बेंगलुरु के SMVT स्टेशन से शुरू होगी. लेकिन इसे KSR बेंगलुरु यानी शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से चलाने की मांग भी उठी है. इस ट्रेन को शुरू करने की घोषणा पहली बार सितंबर 2025 में की गई थी. रेलवे से ट्रेन को KSR बेंगलुरु से चलाने की मांग की, क्योंकि यह स्टेशन यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की तारीख के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि रेलवे इसके शुरुआती स्टेशन को लेकर क्या फैसला करता है। 

    ट्रेन के दो रैक हो गए हैं तैयार
    इस सर्विस के लिए 16 कोच वाले दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट चलाने की तैयारी है. इनका निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) के प्रोग्राम के तहत किया है. सूत्रों के मुताबिक, एक ट्रेनसेट बेंगलुरु कैंटोनमेंट में है, जबकि दूसरे ट्रेनसेट को बंगारापेट के पास वरदापुरा में रखा गया है. रेलवे बोर्ड इन दोनों रैक को दक्षिण पश्चिम रेलवे को सौंपने के संबंध में जल्द ही औपचारिक सूचना जारी कर सकता है। 

    ट्रेन के 16 में से 11 कोच 3AC
    प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे. इनमें 11 कोच 3AC, 4 कोच 2AC और 1 कोच 1AC का होगा. 3AC का एक तरफ का किराया करीब ₹3,000 रहने का अनुमान है. इसमें नाश्ता और खाना भी शामिल होगा ऐसी उम्मीद है, क्योंकि लंबी दूरी की वंदे भारत ट्रेनों में फूड का​ विकल्प होता है. रेलवे को उम्मीद है कि फ्लाइट के मुकाबले कम किराया और कम यात्रा समय इस सेवा को यात्रियों के बीच लोकप्रिय बना सकता है। 

  • WhatsApp Business यूजर्स को बड़ा झटका, अब कुछ मैसेज भेजने के लिए देने होंगे पैसे

    WhatsApp Business यूजर्स को बड़ा झटका, अब कुछ मैसेज भेजने के लिए देने होंगे पैसे

     नई दिल्ली

    वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है. Meta ने सर्विस मैसेज के लिए अब चार्ज लेना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही जिन बिजनेस अकाउंट में पेमेंट मेथड जुड़ा नहीं है, उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है। 

    मेटा ने वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस को पहले ही पेमेंट मेथड जोड़ने के लिए कहा था. कंपनी के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक पेमेंट मेथड ऐड नहीं करने वाले अकाउंट्स के सर्विस मैसेज 1 अक्टूबर से डिलीवर नहीं किए जाएंगे। 

    वॉट्सऐप बिजनेस में क्या बदला?

    पहले वॉट्सऐप बिजनेस पर कुछ सर्विस मैसेज के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता था. अब 1 अक्टूबर से इन मैसेज पर प्रति मैसेज के हिसाब से शुल्क लगेगा। 

    यह बदलाव खास तौर पर उन गैर-टेम्पलेट मैसेज पर लागू होता है, जो किसी ग्राहक के मैसेज करने के बाद खुले 24 घंटे के कस्टमर सर्विस विंडो में भेजे जाते हैं. सर्विस मैसेज में कस्टमर सर्विस एजेंट या किसी थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की तरफ से भेजे गए मैसेज शामिल हो सकते हैं। 

    किन वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट पर असर होगा?
    यह बदलाव वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस पर लागू होगा. अगर ऐसे बिजनेस अपने मैसेजिंग अकाउंट में पेमेंट मेथड नहीं जोड़ते हैं, तो नए चार्ज शुरू होने के बाद उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है. इसलिए कंपनियों को अपने वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट की पेमेंट सेटिंग चेक करने की जरूरत है। 

    हर मैसेज पर लगेगा चार्ज
    मेटा अब सर्विस मैसेज भेजने के बजाय डिलीवर होने वाले मैसेज के आधार पर चार्ज करेगा. इसकी कीमत अलग-अलग मार्केट के हिसाब से बदल सकती है. मेटा के मुताबिक, सर्विस मैसेज की कीमत उस मार्केट में यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन मैसेज की दरों के बराबर होगी। 

    इसके लिए कोई वॉल्यूम टियर भी नहीं होगा. बिजनेस इन गैर-टेम्पलेट मैसेज को तभी भेज सकते हैं जब 24 घंटे का कस्टमर सर्विस विंडो खुला हो. यह विंडो ग्राहक के मैसेज करने पर शुरू या रीसेट होती है। 

    वॉट्सऐप बिजनेस एजेंट का चार्ज अलग
    सर्विस मैसेज का यह चार्ज Meta Business Agent की कीमत से अलग है. मेटा बिजनेस एजेंटके मैसेज के लिए कंपनी पहले से अलग टोकन-बेस्ड प्राइसिंग लागू कर चुकी है. मेटा के मुताबिक, एक ही मैसेज पर सर्विस और बिजनेस एजेंट दोनों तरह का चार्ज नहीं लगेगा। 

    विज्ञापन से वॉट्सऐप आने पर राहत
    वॉट्सऐप का फ्री एंट्री पॉइंट विंडो अभी भी जारी है. अगर कोई ग्राहक ऐसे विज्ञापन के जरिए वॉट्सऐप पर आता है जिसमें क्लिक करके वॉट्सऐप चैट खुलती है, तो उस विंडो में मैसेज डिलीवरी पर चार्ज नहीं लगेगा। 

    मेटा बिजनेस एजेंट के इस्तेमाल पर टोकन चार्ज लग सकता है. इस बदलाव के बाद वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए अपने पेमेंट मेथड और मैसेजिंग सेटिंग को चेक करना जरूरी हो गया है। 

     

  • तंबाकू चबाने वालों के लिए बड़ा खतरा! 2.51 लाख मौतें, 24.1 करोड़ लोग प्रभावित

    तंबाकू चबाने वालों के लिए बड़ा खतरा! 2.51 लाख मौतें, 24.1 करोड़ लोग प्रभावित

     नई दिल्ली
    तंबाकू खाना सेहत के लिए हानिकारक है. पैकेट पर साफ शब्दों में लिखी यह वॉर्निंग बताती है कि इसके नियमित उपयोग से जान भी जा सकती  है. इसके बावजूद तंबाकू चबाते की आदत दुनियाभर में गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. Institute for Health Metrics and Evaluation (IHME) की नई स्टडी के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल से करीब 2.51 लाख मौतें जुड़ी थीं। 

    इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण एशिया में देखने को मिला, जहां करीब 2.10 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो दुनियाभर में तंबाकू से हुई कुल मौतों का लगभग 84 फीसदी है. यह रिसर्च Global Burden of Disease Study 2023 का हिस्सा है और The Lancet Global Health में प्रकाशित हुई है। 

    इसमें 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में चबाने वाले तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान का आकलन किया गया. खास बात यह है कि स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू को दूसरे तरह के बिना धुएं वाले तंबाकू से अलग करके देखा है।

    स्टडी के मुताबिक, 2023 में 15 साल  और उससे ज्यादा उम्र के करीब 24.1 करोड़ लोग चबाने वाला तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. पुरुषों में इसका इस्तेमाल महिलाओं के मुकाबले दोगुना ज्यादा है. 1990 से 2023 के बीच किसी भी देश में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज नहीं की गई। 

    वहीं 24 देशों में इस्तेमाल करने वालों की संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई. इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण एशिया रहा. यहां 15 साल से ज्यादा उम्र के 14.6 फीसदी लोग चबाने वाले तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. देशवार देखें तो पलाऊ में यह दर 24.4, बांग्लादेश में 23.4 और नेपाल में 17.5 फीसदी रही। 

    भारत समेत 10 देशों में पुरुषों पर सबसे ज्यादा असर
    दुनियाभर में तंबाकू चबाने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है. 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण एशिया में हर 5 में से एक पुरुष तंबाकू का सेवन कर रहा है. वहीं महिलाओं की बात करें तो हर 10 में से 1 महिला तंबाकू का इस्तेमाल करती है. इसके साथ ही रिसर्च में यह भी पाया गया कि देशों और महिलाओं-पुरुषों के बीच पैटर्न काफी अलग है. बांग्लादेश में 30 साल से ज्यादा उम्र के हर आयु वर्ग में महिलाओं में इसका इस्तेमाल पुरुषों से ज्यादा था। 

    स्ट्रोक और मुंह का कैंसर बड़ा खतरा
    स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू से जुड़े छह प्रमुख स्वास्थ्य परिणामों का आकलन किया. स्ट्रोक, होंठ और मुंह का कैंसर, खाने की नली का कैंसर, दूसरे तरह के गले के कैंसर, गले के निचले हिस्से का कैंसर और नाक-गले के बीच होने वाला कैंसर। 

    इनमें स्ट्रोक से सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. इसके बाद होंठ और मुंह के कैंसर दूसरे नंबर पर है. वहीं दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू से होंठ और मुंह के कैंसर से जुड़ा स्वास्थ्य नुकसान 17.3 फीसदी था. दक्षिण एशिया में यह आंकड़ा बढ़कर 30.5 फीसदी हो गया। 

    1990 के मुकाबले स्वास्थ्य नुकसान 116% बढ़ा
    स्टडी के मुताबिक, 1990 से 2023 के बीच चबाने वाले तंबाकू से जुड़ी बीमारी, विकलांगता और समय से पहले मौत के आंकड़ों में 116 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 2023 में यह आंकड़ा 64.8 लाख तक पहुंच गया. इनमें से 61.7 लाख लोगों ने समय से पहले अपनी जान गंवाई। 

    रिसर्चर्स का कहना है कि स्मोकिंग की तुलना में चबाने वाले तंबाकू पर अब तक कम ध्यान दिया गया है. सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं, इससे होने वाले नुकसान को लेकर गलत धारणाएं, सीमित निगरानी और कुछ ग्रामीण तथा कम आय वाले समुदायों में ज्यादा इस्तेमाल इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। 

    रिसर्च के मुताबिक, इस नुकसान को कम करने के लिए तंबाकू रोकथाम और इसे छोड़ने की योजनाओं में चबाने वाले और बिना धुएं वाले तंबाकू को भी ज्यादा गंभीरता से शामिल करना जरूरी है. इसके लिए उम्र, लिंग, देश, स्थानीय आदतों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के हिसाब से अलग रणनीति बनानी होगी। 

     

  • भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ेगी खुफिया निगरानी, सिद्धार्थनगर में IB के लिए 4 जगह जमीन प्रस्तावित

    भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ेगी खुफिया निगरानी, सिद्धार्थनगर में IB के लिए 4 जगह जमीन प्रस्तावित

    शोहरतगढ़
     भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो की इकाइयों के लिए भूमि चिह्नित की गई है। ककरहवा, खुनुआ, बढ़नी और डुमरियागंज में कार्यालय व आवास के लिए भूमि प्रस्तावित है। ककरहवा के भाटिनपार और खुनुआ 0.3000-0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। डुमरियागंज के रूदौलिया बुजुर्ग में भी 0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है।

    बढ़नी क्षेत्र के मधवापुर में 0.1052 हेक्टेयर भूमि आवास निर्माण तथा ढेबरुआ में 0.0910 हेक्टेयर भूमि कार्यालय निर्माण के लिए प्रस्तावित है। ककरहवा और डुमरियागंज की भूमि का निरीक्षण हो चुका है। खुनुआ में चिह्नित स्थल का शीघ्र निरीक्षण कराकर उपयुक्त पाए जाने पर पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। इससे सीमापार गतिविधियों पर स्थानीय निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

    सीमा सुरक्षा के लिहाज से अहम पड़ाव
    जनपद में भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर की सीमा पूरी तरह से खुली होने के कारण सिद्धार्थनगर का सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खुनुआ और बढ़नी, ककरहवा जैसे प्रमुख सीमा बिंदुओं के आसपास आइबी इकाइयों की स्थापना से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।

    दो वर्षों के बीच खुनुवा एवं ककरहावा के रास्ते कई विदेशी भारत में प्रवेश करते हुए पकड़े गए हैं। इसको लेकर सीमा की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। बब्बर खालसा ग्रुप, इंडियन मुजाहिदीन ग्रुप से जुड़े आतंकी भारत-नेपाल के बढ़नी बार्डर से पकड़े भी जा चुके हैं।

    खुली सीमा के चलते दुश्मन देश भारत-विरोधी गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। आतंकी संगठन बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे इलाकों में उनकी नापाक गतिविधियों को बढ़ाने नए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े किए जाने की आशंका है, जिसके जरिए भारत में अशांति फैलाई जा सके। नेपाल से सटे इलाकों में कट्टरपंथी गतिविधियों में काफी इजाफा नजर आ रहा है।

    बढ़नी बार्डर पर मिल चुका है पाकिस्तान कनेक्शन

    1993 में बढ़नी में भारत-नेपाल सीमा पर अजमेर सिंह व भाग सिंह नामक उग्रवादी पकडे़ गए। वर्ष 2010 में बढ़नी बार्डर से इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी सलमान उर्फ छोटू को एटीएस ने पकड़ा था। वर्ष 2013 में बिहार के रक्सौल से इसी आतंकी संगठन का मास्टर माइंड अब्दुल करीम टुंडा पकड़ा गया था।

    पूछताछ में बढ़नी के आसपास रहकर देश विरोधी गतिविधि चलाने की बात सामने आई थी। इसी बीच इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े आतंकी यासिन भटकल को पकड़ा गया था। इसके अलावा पड़ोसी जनपद महराजगंज से हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी नासिर को पकड़ा गया था। बब्बर खालसा का खतरनाक उग्रवादी मक्कन सिंह भी बढ़नी में पकड़ा गया था

     

     

  • सऊदी में 40 हजार पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती की रिपोर्ट, हूतियों के खिलाफ बढ़ी सैन्य हलचल

    सऊदी में 40 हजार पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती की रिपोर्ट, हूतियों के खिलाफ बढ़ी सैन्य हलचल

    दुबई 

    दुनिया के तेल और व्यापार की सप्लाई पर दोहरी चोट लगी है. एक तरफ ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, तो दूसरी तरफ यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर कब्जा कर लिया है. दुनिया के समुद्री व्यापार के इन दोनों अहम रास्तों पर संकट के बीच सऊदी अरब ने हूतियों पर हमले की तैयारी शुरू कर दी है. सऊदी अपने लोगों को इस जंग में नहीं भेजेगा. इस ऑपरेशन में यमन की एक लाख से ज्यादा सैनिकों वाली सेना को मैदान में उतारा जा सकता है, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों से उनका साथ देगा. इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी बढ़ गई है. उसने सऊदी अरब में 30 से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं और सैन्य उपकरणों के साथ सलाहकार भी भेजे हैं. हालांकि कहा जा रहा है कि ये सैनिक सऊदी की रक्षा के लिए हैं. सऊदी के इस अटैक प्लान से पहले खबर आई थी कि अमेरिका ने अपनी कई पैट्रियट मिसाइलों को सऊदी और कतर के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में तैनात किया है। 

    सऊदी अरब का क्या है प्लान?
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ हमले के दो विकल्पों पर विचार कर रहा है. पहला विकल्प बाब-अल-मंदेब के आसपास के तटीय इलाकों को हूतियों से वापस लेने का है. दूसरा विकल्प यमन के कई मोर्चों पर एक साथ हमला करने का है. इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं. इस हमले की टाइमिंग फिक्स नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ हफ्तों में शुरू किया जा सकता है. हालांकि, इसकी तारीख को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं. कुछ सूत्रों का कहना है कि हमला एक हफ्ते के भीतर शुरू हो सकता है, जबकि कुछ का मानना है कि अमेरिका के नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ही सैन्य कार्रवाई हो सकती है। 

    1 लाख सैनिक कर सकते हैं हमला
    रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब इस बार सीधे बड़े जमीनी अभियान के बजाय यमनी सैनिकों को आगे रखकर ऑपरेशन चलाने की तैयारी कर रहा है. इस अभियान में 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है. हालांकि, सैनिकों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि हमले का दायरा कितना बड़ा रखा जाता है. जमीन पर यमनी सेना हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों के जरिए समर्थन देगा. इस तरह ऑपरेशन की कमान सऊदी के समर्थन वाले यमनी बलों के हाथ में होगी और रियाद उन्हें सैन्य मदद देगा। 

    अमेरिका भी इस अभियान में सऊदी अरब की मदद कर रहा है. वह खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध करा रहा है. इससे पहले उसने उसकी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस तैनात किए हैं. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सीधे सैन्य मदद और हवाई हमलों की मांग को पहले ठुकरा दिया था। 

    समंदर के दो बड़े दरवाजे बंद
    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा पहलू समुद्री व्यापार के दो अहम रास्तों का संकट में आना है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान युद्ध के कारण लगभग बंद है. ऐसे में दुनिया की नजर बाब-अल-मंदेब पर टिक गई है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश मार्ग है. बाब-अल-मंदेब भूमध्य सागर और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का बेहद अहम रास्ता है. होर्मुज में आवाजाही बाधित होने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है. अब हूतियों के इस इलाके पर नियंत्रण से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ने का खतरा है. सऊदी अरब का मानना है कि जब तक हूतियों के हाथ में बाब-अल-मंदेब का नियंत्रण रहेगा, तब तक उनके साथ शांति वार्ता की नई प्रक्रिया शुरू करना मुश्किल होगा. इसकी वजह यह है कि इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण हूतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा दबाव बनाने की ताकत देता है। 

    पाकिस्तान के 30-40 हजार सैनिक सऊदी अरब में तैनात
    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने हाल ही में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य उपकरणों और सलाहकारों के जरिए मदद दी है. रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने पिछले महीने चार कार्गो विमान अदन भेजे थे. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, छोटी तोपें, ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम शामिल थे. अदन यमन की सऊदी समर्थित सरकार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा, पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर यमनी बलों की मदद कर रहे हैं. रिपोर्ट में एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 30 हजार से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं. ये सैनिक सऊदी अरब की जमीनी सीमाओं की सुरक्षा और ड्रोन-मिसाइल हमलों को रोकने में मदद कर रहे हैं. इनकी तैनाती पिछले साल से अलग-अलग चरणों में हुई है और हालिया तनाव के बाद भी सैनिक पहुंचे हैं। 

    सऊदी के सामने क्या है दिक्कत?
    सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले सभी गुट एकजुट नहीं हैं. पहले गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अलग-अलग यमनी लड़ाकू गुटों को हथियार और ट्रेनिंग दी थी. पिछली सर्दियों में यमन के दक्षिणी हिस्से में UAE समर्थित लड़ाकों ने पूर्वी इलाकों पर कब्जा करने और अलग देश बनाने की योजना का ऐलान किया था. इसके बाद सऊदी समर्थित लड़ाकों के साथ उनकी झड़पें हुईं और अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. यमन मामलों के जानकार मोहम्मद अलबाशा के मुताबिक, हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले कई गुट अभी भी बड़े और लंबे सैन्य अभियान के लिए तैयार नहीं हैं. दूसरी तरफ हूती कई मोर्चों पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं।