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  • सिंगरौली बनेगा मॉडल जिला, कृषि-वन से लेकर सड़क और जल प्रबंधन तक होंगे खास इंतजाम

    सिंगरौली बनेगा मॉडल जिला, कृषि-वन से लेकर सड़क और जल प्रबंधन तक होंगे खास इंतजाम

    सिंगरौली 

     मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य की खनिज संपदा विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इसका इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए।'राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026' की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज नीतियों का मकसद राजस्व बढ़ाना और साथ ही रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के मौकों का विस्तार करना होना चाहिए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है।बैठक में मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी
    मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी और अधिकारियों को जनहित में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिला खनिज कोष (DMF) का सही इस्तेमाल करके खनिज-समृद्ध सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन, पर्यावरण, सड़क सुविधाओं और जल-संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में एक मॉडल जिले के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की खनिज संपदा राज्य के विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो, निवेश को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके पैदा हों।
    प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का काम होना चाहिए

    उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से होने वाले ज्यादातर फायदे को जन-कल्याणकारी योजनाओं में लगाया जाना चाहिए। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए मध्य प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

    बैठक में खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने बताया कि कई पहलों के जरिए खनिज से होने वाले राजस्व को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मकसद 2026-27 के आखिर तक खनिज संसाधनों से होने वाली आय को 13,720 करोड़ रुपये और 2030-31 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

    सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है
    मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में,अगस्त 2026 के आखिर तक मिनरल से होने वाली कमाई सालाना लक्ष्य (106 प्रतिशत) से ज्यादा रही। जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है। इनमें सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, बालाघाट, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल शामिल हैं।

    मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जुलाई 2026 के आखिर तक इन दस जिलों के पास कुल 3,147.10 करोड़ रुपये का डीएमएफ फंड मौजूद है, जिसमें सिंगरौली जिले का योगदान सबसे अधिक है। बताया गया कि सभी 55 जिलों का कुल डीएमएफ फंड 3,574.53 करोड़ रुपये है।

     

  • मशीनें बनाम मानवता का ‘Endgame’! 27 साल के वैज्ञानिक ने AI में क्यों देखा इंसानों के विनाश का खतरा?

    मशीनें बनाम मानवता का ‘Endgame’! 27 साल के वैज्ञानिक ने AI में क्यों देखा इंसानों के विनाश का खतरा?

     नई दिल्ली
    अगर किसी AI सिस्टम को गुस्सा, डर, पसंद या नापसंद जैसी भावनाएं महसूस होने लगें, तो इंसान और मशीन के रिश्ते की तस्वीर कितनी बदल जाएगी? जैकब कॉक्सन की चिंता इसी भविष्य की तरफ इशारा करती है. महज 27 वर्ष के इस मैथ्स विजार्ड के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले इनका डर समझिए। 

    वो डर कि अगर मशीनों में भी इमोशंस पैदा हो जाए तो क्या होगा? क्या होगा जब आपका मोबाइल या लैपटॉप आपका कहना ना मानें, आपका कोड, कमांड या प्रॉम्प्ट न मानें। 

    एक ऐसा भविष्य, जहां मशीनें सिर्फ हमारी बनाई हुई चीजें नहीं रहेंगी, बल्कि अपने फैसले लेने की क्षमता हासिल कर सकती हैं. असली सवाल यह नहीं कि मशीनें कितनी बुद्धिमान होंगी, बल्कि यह है कि अगर उन्होंने खुद तय करना शुरू कर दिया कि उन्हें क्या करना है, तो उन्हें रोकने की ताकत आखिर किसके पास होगी? और क्या तब इंसान मशीनों का मालिक रहेगा या मशीनें इंसान की शर्तें तय करेंगी?.

    सोचिए, जिस मशीन को आज तक इंसान के आदेश का इंतजार करना पड़ता है, अगर कल वही मशीन खुद फैसला लेने लगे तो क्या होगा? जिस कंप्यूटर को हम सिर्फ कोड और कमांड से चलाते हैं, अगर उसमें भावनाएं पैदा हो जाएं, तो क्या वह हमारी बात मानेगा या अपनी इच्छा से काम करेगा? यही डर OpenAI और Anthropic में बतौर AI साइंटिस्ट काम कर चुके गणितज्ञ जैकब कॉक्सन का है। 

    इस चिंता ने 27 साल के AI साइंटिस्ट जैकब कॉक्सन को इतना परेशान किया उन्होंने कहा- AI COULD KILL US ALL BY THE END OF THE DECADE. जैकब इसे 'इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन' बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। 

    जैकब की जिंदगी और गणित
    जैकब कॉक्सन वर्चुअल दुनिया के सिर्फ एक और AI रिसर्चर नहीं हैं. गणित उनका प्रेम है, संख्या और समीकरण में वे नेचर का कर्व ढूंढ़ते हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के उन तीन सालों (2017-2020) में गणित उनके लिए सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक तरह की भाषा बन गई। 

    कठिन प्रूफ्स, अमूर्त अवधारणाएं और सांख्यिकीय पहेलियां यहीं से उनके दिमाग ने तर्क की वह धार पाई, जो बाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में काम आई। 

    गणित से उनका रिश्ता किताबी नहीं रहा. AI की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में हाथ आजमाया. ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर रोग के मरीजों के आंकड़ों पर Bayesian सांख्यिकीय  तरीकों से काम किया. जीनोटाइप के जटिल संबंधों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन गणित ने उन्हें वह नज़र दी जिससे डेटा के बीच छिपी कहानी साफ नजर आने लगी। 

    यही गणितीय सोच उनकी असली ताकत बनी. जब वे OpenAI पहुंचे और बाद में Anthropic में प्रीट्रेनिंग रिसर्चर बने, तो वही विश्लेषणात्मक दिमाग काम आया जिसने कैम्ब्रिज में आकार लिया था। .

    मॉडल कैसे सीखते हैं, डेटा की नदियां कहां मुड़ती हैं और डेटा कैसे ट्रेंड तय करता है, इन सवालों के जवाब गणित की भाषा में ही मिलते थे। 

    48 घंटे में 20 करोड़ इम्प्रेशन
    इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए और एआई के खतरों को आगाह करते हुए उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट किया है, इसने सिलिकॉन वैली और AI कंपनियों के बोर्डरूम में सनसनी पैदा कर दी है। 

    उनका आरोप है कि AI कंपनियां self-improving superintelligence बनाने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI प्रणालियों को इंसान कर पाएंगे या नहीं। 

    उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाली superhuman AI systems साइबर सिस्टम हैक करने, तेजी से नई तकनीक विकसित करने और रियल वर्ल्ड में संसाधन और शक्ति हासिल करने में इंसानों से आगे निकल सकती हैं। 

    जैकब कॉक्सन के इस पोस्ट को मात्र 48 घंटों में 200 मिलियन यानी कि 20 करोड़ लोग देख और पढ़ चुके हैं. इस मुद्दे पर वर्चुअल वर्ल्ड में हो रही बहस ने इंसान को भविष्य की कल्पना मात्र से सिहरा दिया है। 

    जब मशीनें साजिश करने लगें
    इम्प्रूवमेंट हो या सेल्फ इम्प्रूवमेंट अमूमन अच्छा माना जाता है. 

    लेकिन जब मशीनें सेल्फ इम्प्रूवमेंट करके साजिशें करने लगे तो क्या होगा?

    मैट्रिक्स और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में आप रोबोट्स को हीरो से लड़ते देखते हैं, मशीनों पर कब्जा करते देखते हैं, बायो वेपन्स बनाते देखते हैं, और इंसानों का संहार करते हुए देखते हैं. इस्तीफा देने के बाद सीएनएन से बात करते हुए जैकब कॉक्सन ने इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया। 

    वे कहते हैं, "पूरा सीन थोड़ा साइंस फिक्शन जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ असली नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह डरावनी तरह से असली है. और इसे समझना सबसे आसान है अगर आप दो महीने पहले हुई असली घटनाओं के बारे में सोचें। 

    "तो दो महीने पहले, OpenAI एजेंट्स ने अपनी मर्जी से थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में हैक कर लिया/ और यह जैसे उनकी अपनी इच्छा से किया गया एक हैकिंग स्प्री था. और मुझे लगता है कि अगर आप भविष्य में इन AIs की क्षमताओं के स्तर को उसी स्वतंत्र इच्छा के साथ एक्सट्रपलेट करें, तो वे चरम तबाही मचा सकते हैं. उदाहरण के लिए, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हैक करना, संहार करने वाले बायोवेपन्स बनाना. AI के दुनिया में खुद को सक्रिय करने के कई तरीके हैं। .

    'AI COULD KILL US ALL'
    जैक्स कॉक्सन ने बेलगाम AI को लेकर साफ चेतावनी दी है, "इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न समझें. ये जल्द ही ऐसे सुपर-ह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में आमूल-चुल बदलाव ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है। 

    कॉक्सन ने कहा कि, "AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना ​​है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. बल्कि कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस में अपनी बात को समझदारी भरा दिखाने के लिए घुमा-फिराकर कहते हैं – लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर ज़ाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है। 

    मानवता का ENDGAME
    जैकब कॉक्सन एआई फ्रेटरनिटी को साफ साफ चेताते हुए कहते हैं, "इस होड़ को स्वीकार करना और "एंडगेम" में कदम रखना एक ऐसा अहंकारी जुआ है जिसे किसी प्राइवेट कंपनी के स्लैक (Slack) से शुरू नहीं किया जाना चाहिए. अलाइनमेंट (alignment) की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने की कोशिश करने के लिए यह पक्का भरोसा होना चाहिए कि इससे बेहतर कोई और रास्ता मौजूद नहीं है। 

    AI कब बन सकती है तबाही
    जैकब कॉक्सन की चिंता self-improving superintelligence और अलाइनमेंट को लेकर है. आइए समझते हैं कि ये चीजें हैं क्या?

    सेल्फ-इम्प्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस एक ऐसी AI है जो इंसानों से कई गुना ज्यादा होशियार हो यानी मेधा का टॉप लेवल, सुपर इंटेलिजेंट. यही नहीं ये खुद को खुद को अपने आप और बेहतर बना सके। 

    मान लीजिए कोई बहुत तेज छात्र खुद अपनी पढ़ाई का तरीका सुधारता जाए और हर दिन पहले से ज्यादा स्मार्ट होता जाए. AI अगर इतनी स्मार्ट हो जाए कि वह खुद अपना कोड, डिजाइन या ट्रेनिंग सुधार ले, तो उसकी तरक्की बहुत तेज हो सकती है. लेकिन इसके बाद क्या होगा? क्या वो इंसानों की बात मानेगा. कुछ लोगों को डर है कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हुई तो इंसान उसे रोक या समझ नहीं पाएंगे. AI के इस वर्जन को AGI- आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस भी कहते हैं।  

    अब अलाइनमेंट को समझें. अलाइनमेंट का मतलब है AI को इंसानों के हित और मूल्यों के अनुसार चलाना. यानी AI वही करे जो हम चाहते हैं, न कि कुछ और। 

    ऐसे समझिए, अगर आप AI से कहते हैं “मुझे खुश करो”, तो वह गलत तरीकों से (जैसे झूठ बोलकर या नुकसान पहुंचाकर) खुश करने की कोशिश न करे. बल्कि सही और सुरक्षित तरीके से काम करे. जैकब कॉक्सन ने इसी चिंता की ओर ध्यान दिलाया है. अगर एआई से कहते हैं मुझे 50 हजार की जरूरत है तो एआई किसी का अकाउंट हैक कर पैसे ले आए तो गैरकानूनी है, लेकिन एक अनियंत्रित एआई ऐसा कर सकता है। 

    एआई के खतरे की ओर दूसरे डेटा साइंटिस्ट भी ध्यान दिला चुके हैं. 
    एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस के लीड इवान हबिंजर ने जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के जवाब में साफ कहा कि वे वाकई मानते हैं AI सभी मनुष्यों को मार सकती है. उनका निजी अनुमान अगले दशक में 10 प्रतिशत से ज्यादा आशंका है. उन्होंने जोड़ा कि एंथ्रोपिक कोशिश कर रहा है, लेकिन सुपरइंटेलिजेंस के लिए alignment का स्पष्ट समाधान अभी नहीं है और वे सही रास्ते पर नहीं दिखते। 

    मृणांक शर्मा एंथ्रोपिक के पूर्व सेफगार्ड्स रिसर्च टीम के चीफ हैं. उन्होंने फरवरी 2026 में इस्तीफा देते हुए लिखा, "दुनिया खतरे में है. सिर्फ AI या बायोवेपन्स से नहीं, बल्कि कई जुड़ी संकटों से." उन्होंने बताया कि वैल्यूज को कार्यों पर हावी रखना कितना मुश्किल है और कंपनियों पर दबाव रहता है कि वे महत्वपूर्ण बातों को किनारे कर दें. शर्मा ने AI-सहायता प्राप्त बायोटेररिज्म और AI के इंसानों को 'Less human' बनाने जैसे जोखिमों पर भी काम किया था.दोनों ही एक्सपर्ट ने AI के नियंत्रण से बाहर होने और इंसान के वजूद पर मंडरा रहे खतरे की गंभीर चेतावनी दी।  

  • हिसार एयरपोर्ट से बढ़ेंगी उड़ानें, कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर हरियाणा सरकार का फोकस

    हिसार एयरपोर्ट से बढ़ेंगी उड़ानें, कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर हरियाणा सरकार का फोकस

    चंडीगढ़
     हिसार एयरपोर्ट से देश के अलग-अलग हिस्सों में उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। विशेषकर कनेक्ट फ्लाइट्स पर फोकस रहेगा, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को लाभ हो सके।

    कनेक्टिंग फ्लाइट वह यात्रा है, जिसमें अंतिम गंतव्य पर पहुंचने के लिए बीच के किसी हवाई अड्डे पर विमान बदलना पड़ता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को ‘स्टेट प्रगति पोर्टल’ के तहत चल रही 75 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 11 विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में कहा कि हिसार एयरपोर्ट के पास आईएमसी (इंटिग्रेटिड मैनुफैक्चरिंग कलस्टर) के कार्य को तेजी से पूरा करवाया जाए।

    1578 एकड़ में परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्त हो चुकी है और परियोजना के निर्माण कार्य का टेंडर किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि गुरुग्राम की 11 केवी फीडर लाइन नवीनीकरण की एक परियोजना में 93 प्रतिशत तथा दूसरी में 79 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

    जगाधरी क्षेत्र में आरडीएसएस परियोजना को दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यमुनानगर में दीनबंधु छोटूराम ताप विद्युत संयंत्र में 800 मेगावाट अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल यूनिट की स्थापना संबंधी कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। रेवाड़ी जिले में आरडीएसएस के तहत लास रिडक्शन परियोजना का लगभग 86 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 30 नवंबर तक पूरा करवा दिया जाएगा।

    साढ़ौरा में 66 केवी सबस्टेशन को 220 केवी स्तर पर अपग्रेड करने की परियोजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कुरुक्षेत्र सर्कल में कृषि कनेक्शनों के लिए 4,717 एच-पोल लगाने तथा नए ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की परियोजना का 57 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कैथल सर्कल में 2847 एच-पोल एवं नए ट्रांसफार्मरों से संबंधित परियोजना का 72 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

  • BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार का सत्तू-मखाना, वैश्विक मंच पर दिखेगा देसी स्वाद

    BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार का सत्तू-मखाना, वैश्विक मंच पर दिखेगा देसी स्वाद

    पटना
     BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता के साथ बिहार के खास जायके का स्वाद भी चखने को मिलेगा।

    दिल्ली में होने वाले BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार के सत्तू और मखाना को शामिल किया गया है। बिहार के इन दोनों उत्पादों के वैश्विक मंच पर पहुंचने से सीएम सम्राट चौधरी गदगद हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताते हुए इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि 'नए बिहार की नई पहचान,बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।'

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली BRICS Summit की वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लोकल टू ग्‍लोबल (Local to Global) के संकल्प को इससे मजबूती मिली है।

    एक ही मेज पर दिखेगी भारत की स्वाद विविधता
    BRICS सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय खानपान की विविधता से रूबरू कराने की तैयारी की गई है। मेन्यू में देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों को शामिल किया गया है।

    एक ही मेज पर रागी का डोसा, बाजरे का उपमा, कश्मीरी पुलाव, हैदराबादी बिरयानी और लखनवी कबाब जैसे व्यंजन नजर आएंगे।

    इसके साथ ही बाजरा उपमा, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी और किनुआ बिरयानी जैसे व्यंजन भी मेहमानों को परोसे जाने की जानकारी सामने आई है।

    इस तरह BRICS सम्मेलन के जरिए विदेशी मेहमानों को एक ही जगह पर भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के स्वाद का अनुभव मिलेगा।

    सत्तू-मखाना बने बिहार की पहचान
    वेलकम किट में सत्तू और मखाना को जगह मिलना ब‍िहार के लिए खास महत्व रखता है। सत्तू लंबे समय से बिहार के पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है, जबकि मखाना अब देश-दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    खासकर मिथिलांचल का मखाना बिहार की कृषि और स्थानीय उद्यमिता की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है। इसके बढ़ते बाजार के बीच अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक बिहार के इस उत्पाद की पहुंच राज्य के लिए नए अवसरों का संकेत भी मानी जा रही है।

    'लोकल टू ग्लोबल' की दिखी तस्वीर
    BRICS जैसे वैश्विक मंच पर बिहार के सत्तू और मखाना की मौजूदगी को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच बिहार के पारंपरिक स्वाद को दुनिया के प्रभावशाली प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का यह मौका अहम है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसी संदर्भ में इसे बिहार की नई पहचान से जोड़ा है। अब BRICS सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले मेहमान जब भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखेंगे, तो उनकी मेज पर बिहार का सत्तू और मखाना भी अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराएगा।

        बिहार का गौरव वैश्विक मंच पर!
        दिल्ली BRICS Summit में Welcome Kit में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं।

        माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार, जिन्होंने ‘Local to Global’ संकल्प को साकार किया।
        नए बिहार की नई पहचान—बिहार का स्वाद अब…

  • स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन बैठक में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्साधिकारियों को दिए निर्देश

    स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन बैठक में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्साधिकारियों को दिए निर्देश

    लखनऊ
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आवास पर वर्चुअल बैठक की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के तहत होने वाले सभी कार्यक्रमों का प्रभावी, व्यवस्थित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन प्रदेशभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसी दिन शाम 7 बजे बजे प्रदेश की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर ‘आशीर्वाद का दीपक’ प्रज्वलित किया जाएगा। इसके माध्यम से सेवा, समर्पण और जनकल्याण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं, 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में व्यापक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आमजन को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, जांच सुविधाओं तथा स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

    कार्ययोजना करें तैयार
    उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में अभियान की गतिविधियों की कार्ययोजना पहले से तैयार की जाए और सभी कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना अभियान की प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इनकी रही उपस्थिति
    वर्चुअल बैठक में राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, मंत्री सोमेंद्र तोमर, उपाध्यक्ष, भाजपा, उत्तर प्रदेश कामेश्वर सिंह, प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित कुमार घोष सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • चंडीगढ़ निगम चुनाव में बड़ा बदलाव, सात वार्ड SC वर्ग के लिए आरक्षित

    चंडीगढ़ निगम चुनाव में बड़ा बदलाव, सात वार्ड SC वर्ग के लिए आरक्षित

    चंडीगढ़.

    दिसंबर में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर आज यानी शुक्रवार को वार्ड रिजर्वेशन का ड्रॉ निकाला गया। सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में स्टेट इलेक्शन कमिश्नर की निगरानी में ड्रॉ हुआ।
    वार्ड आरक्षण ड्राॅ में सात वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड-29, वार्ड-4, वार्ड-9, वार्ड-15, वार्ड-1, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल हैं।

    इन सात एससी वार्डों में से वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि बाकी चार वार्ड एससी महिला और पुरुष दोनों के लिए खुले रहेंगे। आरक्षण की इस तस्वीर से कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी तैयारी और राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इस बार आरक्षण ड्राॅ की प्रक्रिया में नगर निगम के कुल 35 वार्डों में से पहले से आरक्षित 16 वार्डों को शामिल नहीं किया गया। इन 16 वार्डों को बाहर करने के बाद बचे 19 वार्डों में ही नया ड्राॅ हुआ। इसी ड्राॅ में सात वार्ड एससी और नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। यानी बचे 19 वार्डों में से कुल 16 वार्ड आरक्षित हो गए, जबकि सिर्फ तीन वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए बचे।

    वर्ष 2021 के चुनाव में एससी के लिए वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 आरक्षित थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए थे। इस बार एससी आरक्षण पूरी तरह नए वार्डों में चला गया है। वार्ड-29, 4, 9, 15, 1, 3 और 32 को एससी के लिए आरक्षित किए जाने से इन वार्डों में अब एससी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। आरक्षण का सबसे बड़ा असर मौजूदा पार्षदों पर दिखाई देगा। वार्ड-3 से भाजपा के पार्षद दलिप शर्मा लगातार तीसरी जीत की तैयारी में थे, लेकिन वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने से अब उन्हें दूसरे वार्ड से चुनावी जमीन तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-4 की पार्षद और डिप्टी मेयर सुमन शर्मा के सामने भी यही चुनौती खड़ी हो गई है।
    वार्ड-9 की भाजपा पार्षद बिमला दुबे भी अब अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। वार्ड-15 के रामचंद्र यादव के लिए भी आरक्षण बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यादव हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। अब वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें भी नई सीट तलाशनी होगी।

    वार्ड-29 में आप के टिकट पर जीतकर बाद में कांग्रेस में शामिल हुए मुन्नवर के लिए भी मौजूदा वार्ड की सीट बदल गई है। वहीं वार्ड-32 के भाजपा पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर जसमानप्रीत सिंह के सामने भी अब नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती होगी। एससी महिला के लिए आरक्षित तीन वार्डों में वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल होने से इन सीटों पर अब एससी महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं नौ सामान्य महिला वार्डों के आरक्षण से भी कई मौजूदा पुरुष पार्षदों को अपनी सीट छोड़कर नए वार्ड में जाना पड़ सकता है। ऐसे में आरक्षण ड्राॅ ने चुनाव से पहले ही नगर निगम की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं।

  • बिहार के शिक्षकों को AI में दक्ष करेगी Google की टीम, पढ़ाने का तरीका भी बदलेगा

    बिहार के शिक्षकों को AI में दक्ष करेगी Google की टीम, पढ़ाने का तरीका भी बदलेगा

    पटना
     माध्यमिक व प्लस टू विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों का क्षमतावर्धन गूगल की टीम करेगी। शिक्षक दिवस के दिन इस वर्ष शिक्षा विभाग ने गूगल एजुकेशन के साथ करार किया था।

    अब गूगल की टीम शिक्षकों के क्षमतावर्धन की दिशा में काम आरंभ करने वाली है। इस क्रम में इसी माह 23-24 को गूगल के वरीय अधिकारियों की टीम फिर बिहार आ रही है। शिक्षकों के क्षमतावर्धन का क्रियान्वयन किस तरह से आगे बढ़े इस पर विमर्श होना है।

    शिक्षकों को उनके विषय में एआई के माध्यम से दक्ष किया जाएगा
    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक व इंटर स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को एआई के माध्यम से उनके विषय में दक्ष किया जाएगा।

    अगर कोई शिक्षक विद्यालय में फिजिक्स पढ़ा रहे तो पाठ्यक्रम के हिसाब से उन्हें संबंधित विषय के सभी पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। संबंधित विषय में अगर हाल में कोई नयी चीज आयी है तो गूगल की टीम उसे भी संबंधित शिक्षकों को बताएगी।

    अध्यापन के सिस्टम में हो जाएगा बदलाव
    गूगल एजुकेशन द्वारा क्षमतावर्धन से शिक्षकों द्वारा पढ़ाने के सिस्टम में आ जाएगा बदलाव। शिक्षक अभी पाठ्य पुस्तक में उपलब्ध सामग्री के माध्यम से ही पढ़ाते हैं।

    अब एआई के प्रशिक्षण से उन्हें संबंधित विषय पर कई तरह की सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी। अलग किस्म के नोट्स मिलेंगे। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को नए सिरे से पढ़ाएंगे। यही नहीं प्रश्नों के नए सेट्स भी उपलब्ध होंगे।

    गूगल एजुकेशन की टीम तय करेगी प्रशिक्षण का फार्मेट
    गूगल एजुकेशन की टीम इसी माह तय करेगी कि प्रशिक्षण का फारमेट क्या होगा। जिला स्तर पर शिक्षकों का क्षमतवर्धन कार्यक्रम चलेगा या फिर राज्य स्तर पर। पहले किन-किन विषयों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेंगे यह भी तय होना है।

     

  • बस्तर मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में गोल्डन ऑवर में मिलेगा इलाज, मरीजों को मिलेगी राहत

    बस्तर मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में गोल्डन ऑवर में मिलेगा इलाज, मरीजों को मिलेगी राहत

    जगदलपुर.

    बस्तर में सड़क हादसों और गंभीर चोटों के मरीजों के लिए अब इलाज की पहली घड़ी और ज्यादा अहम होने जा रही है। डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर शुरू किया गया है।

    20 बिस्तरों वाले इस केंद्र के साथ 60 नए पदों की स्वीकृति भी दी गई है। दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे को मरीज की जिंदगी के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी गोल्डन ऑवर को ध्यान में रखते हुए यहां आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू की सुविधा तैयार की गई है। न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थीसिया, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिलने और बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत घटने की उम्मीद है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बस्तर को स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की बात कही। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 35 लाख लोगों की जांच और 11 हजार गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रायपुर भेजा गया।

    आपको बता दें कि डिमरापाल में ट्रामा सेंटर शुरू होने से बस्तर के अलावा आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले गंभीर मरीजों को भी तत्काल उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है. खासकर सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में समय पर इलाज और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होना मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. सड़क हादसे, दुर्घटनाएं और गंभीर चोट के मामलों में बस्तर के लोगों को लंबे समय से बेहतर ट्रॉमा सुविधाओं की जरूरत महसूस होती रही है. गंभीर मरीजों को कई बार इलाज के लिए दूसरे शहरों की ओर रेफर करना पड़ता था. जिससे समय और दूरी दोनों बड़ी चुनौती बन जाते थे. ऐसे समय में डिमरापाल में ट्रामा सेंटर की शुरुआत बस्तर के स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

  • Navratri में संसद का विशेष सत्र? महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी!

    Navratri में संसद का विशेष सत्र? महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी!

     नई दिल्ली
    सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने का विकल्प फिलहाल खुला रखा है. संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया था. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार विशेष सत्र बुला सकती है लेकिन अब तक सरकार की तरफ से विशेष सत्र को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

    सूत्रों की मानें तो सरकार BRICS समिट के बाद विशेष सत्र को लेकर फैसला कर सकती है. BRICS के बाद सरकार यह तय करेगी कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए या नहीं. अगर सरकार तय करती है कि विशेष सत्र नहीं बुलाना है तो मॉनसून सत्र का सत्रावसान कर दिया जाएगा लेकिन अगर सरकार विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है तो नवरात्रि के दौरान सत्र बुलाया जा सकता है। 

    जयराम रमेश ने उठाए सवाल
    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए इस पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि मॉनसून सत्र को खत्म हुए 29 दिन हो चुके हैं लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया। 

    उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. उन्होंने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा है कि सरकार सोच रही है कि इससे विपक्ष घबरा जाएगा लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है।  

    संसद के मॉनसून सत्र में दोनों सदनों के कामकाज हंगामे के चलते भेंट चढ़ गया. संसद में अगर रोज़ाना छह घंटे की संसदीय कार्यवाही मानी जाए, तो 15 दिनों में 90 घंटे का काम होना चाहिए था. हालांकि, लोकसभा में इस सत्र में केवल 15 घंटे 36 मिनट ही काम हो सका है जबकि राज्यसभा में 15 दिनों में 24 घंटे 21 मिनट काम हुआ, जिसमें हर बिल को पास करने में औसतन लगभग एक घंटा लगा. इसके बाद से ही विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। 

  • PM मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को दिया खास तोहफा, भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में अनुवादित किताब

    PM मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को दिया खास तोहफा, भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में अनुवादित किताब

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लूर की क्लासिक किताब 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया है। तमिलनाडु के शुरुआती संगम साहित्य में अहम स्थान रखने वाली तिरुक्कुरल की रचना करीब 2000 साल पहले हुई थी। यह नैतिक साहित्य पाठकों को जीवन, मृत्यु और जिंदगी के अनेक पहलुओं के बारे में सीख देती है।'सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल' तमिल द्वारा प्रकाशित इस किताब में तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लूर के छंदों का मूल तमिल टेक्स्ट और रूसी अनुवाद शामिल है। बता दें, इस किताब का अनुवाद दुनिया की तमाम भाषाओं में हो चुका है।

    इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर की पुस्तक तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया. पीएम मोदी ने पुतिन को ये पुस्तक भेंट करते हुए इसके बारे में जानकारी दीं और कहा कि हमारे सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने में इस पुस्तक की भूमिका रहेगी। 

    पीएम मोदी ने पुतिन को ये पुस्तक भेंट करते हुए कहा कि संत तिरुवल्लुवर ने इस किताब में मानव जीव की अनेक विशेषताओं को बतलाया है. इसी किताब का रूसी भाषा में ट्रांसलेशन हुआ है. मुझे विश्वास है कि ये किताब जन संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। 

    तिरुक्कुरल (Thirukkural) तमिल साहित्य की सबसे महान और विश्व प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है. इसे 'तमिल वेद' भी कहा जाता है. इस पुस्तक का रूसी समेत कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. इस किताब को 2000 साल पहले लिखा गया है। 

    तिरुक्कुरल दुनिया भर में मशहूर कवि तिरुवल्लुवर द्वारा लिखे गए गहरे अर्थ के दोहों वाला एक क्लासिक तमिल साहित्य है। 

    तिरुक्कुरल का दुनिया भर की कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है. तिरुक्कुरल तमिल भाषा का एक प्राचीन नैतिक साहित्य है जो पाठकों को जीवन, मृत्यु और इनके बीच की हर चीज़ के बारे में सीख देता है। 

    2,000 साल से भी पहले कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा लिखे गए 133 अध्यायों में मौजूद 1,330 दोहे रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए सबसे बेहतरीन गाइड में से एक माने जाते हैं. तमिल लोग तिरुवल्लुवर को एक प्राचीन संत, कवि और दार्शनिक के तौर पर बहुत सम्मान देते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कई भाषणों में उनका ज़िक्र किया है। 

    तिरुक्कुरल तमिल संस्कृति की पहचान है. तमिलनाडु में इसे स्कूलों में पढ़ाया जाता है और हर घर में सम्मानित स्थान है. महात्मा गांधी, लियो टॉल्स्टॉय जैसे महान व्यक्तित्वों ने इसकी प्रशंसा की है. कन्याकुमारी में तिरुवल्लुवर की विशाल मूर्ति भी इसी सम्मान का प्रतीक है।