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  • थाना क्षेत्र के निगरानी एवं गुंडा बदमाशो की थाना कोतमा पुलिस द्वारा कराई गई परेड*

    थाना क्षेत्र के निगरानी एवं गुंडा बदमाशो की थाना कोतमा पुलिस द्वारा कराई गई परेड*

     आगामी त्यौहार जैसे गणेश चतुर्थी ,नवरात्रि आदि त्योहारों को मद्देनजर रखते हुए आज थाना कोतमा परिसर में थाना प्रभारी महोदय श्री रत्नांबर शुक्ल एवं थाना कोतमा पुलिस टीम द्वारा थाना थाना के लिस्टेड निगरानी एवं गुंडा बदमाशो को थाना लाकर उनकी परेड करायी गई एवं उनसे उनके जीवन यापन से सम्बन्धित पूछताछ भी की गई।

    थाना प्रभारी  कोतमा द्वारा इन सभी निगरानी एवं गुंडा बदमाशो  को अपराधों से दूर रहने एवं अपना जीवन यापन सही ढंग से करने के बारे में समझाईश दी गई।

  • छात्रों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अलर्ट, शुरू हुई स्कूल बसों की सघन जांच, 8 की फिटनेस निरस्त, 11 वाहन थाने में कराए खड़े

    छात्रों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अलर्ट, शुरू हुई स्कूल बसों की सघन जांच, 8 की फिटनेस निरस्त, 11 वाहन थाने में कराए खड़े

    कटनी

    जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने स्कूल बसों और अन्य स्कूली वाहनों के खिलाफ सघन जांच अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी संतोष पॉल के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्कूल वाहनों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान कुल 38 स्कूल बसों एवं स्कूल वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान कई वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आया। 8 स्कूल बसों में आपातकालीन द्वार पर सीट लगी हुई मिली, वहीं इन वाहनों में VLTD (पेनिक बटन) भी सुचारू रूप से कार्यरत नहीं पाया गया। परिवहन विभाग ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित 8 स्कूल बसों की फिटनेस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी।

    बरही थाने में खड़े कराए 11 वाहन

    कार्रवाई के दौरान कुल 11 स्कूल वाहनों को सुरक्षार्थ बरही थाने में खड़ा कराया गया, ताकि आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना इनका संचालन न किया जा सके।

    जांच के दौरान सुधा स्मृति स्कूल की बस क्रमांक MP21P03029 और MP21P0409, SSS गुरुकुल स्कूल की बसें MP21P0316, MP21P0318, MP21GP0120 और GJ18AX8254 तथा RC स्कूल की बसें MP19P0734, MP19P0735 और MP19P0652 का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा सरस्वती स्कूल के एक टाटा मैजिक सहित एक अन्य स्कूल वाहन MP20BA8286 की भी जांच की गई।

    सुरक्षा मानकों पर विशेष नजर

    परिवहन विभाग की टीम ने स्कूल वाहनों में फिटनेस, आपातकालीन द्वार, VLTD, पेनिक बटन सहित अन्य अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार आपातकालीन द्वार पर सीट लगी होने से दुर्घटना अथवा अन्य आपात स्थिति में बच्चों को वाहन से सुरक्षित बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है। इसी तरह पेनिक बटन और VLTD का सुचारू रूप से काम करना भी विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी संतोष पॉल ने स्पष्ट किया कि स्कूल वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जिले में स्कूल वाहनों की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों से अपने वाहनों की नियमित जांच कराने तथा सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों को पूरा रखने की अपील की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके।

  • यूपी की सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बारिश से खराब मार्गों की तुरंत होगी मरम्मत

    यूपी की सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बारिश से खराब मार्गों की तुरंत होगी मरम्मत

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में खस्ताहाल सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हैं। अपने सरकारी आवास पर शुक्रवार को मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने मौजूदगी में उन्होंने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा की और सख्त निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    समीक्षा बैठक में उनको बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान- राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रामलाल रौतेल

    मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान- राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल

    अनूपपुर 

    मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत अनूपपुर की ग्राम पंचायत बदरा स्थित आईटीआई परिसर में जनसमस्याओं के निराकरण एवं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शिविर का आयोजन किया गया।

    मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रामलाल रौतेल ने कहा कि मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण करना है। शासन की मंशा समाज के अंतिम छोर पर बैठे प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाना है। शासन और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहे हैं। ऐसे शिविरों के माध्यम से नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर मिलता है, जिससे प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

    कलेक्टर  रत्नाकर झा ने कहा कि जिले के विकास में प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है। शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और आमजन विकास की प्रक्रिया में सहभागी बनें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कर उनका समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि धरातल स्तर पर शासकीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन तथा आमजन के बीच योजनाओं की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।

    कलेक्टर ने जिले के समग्र विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने तालाबों के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए खेल मैदान विकसित करने, विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, व्यापक स्तर पर पौधारोपण करने तथा विद्यालयों एवं छात्रावासों में बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।

    मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत आयोजित इन्फ्लुएंसर संवाद के दौरान कलेक्टर  रत्नाकर झा ने स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से संवाद कर उनके द्वारा वर्तमान में किए जा रहे कार्यों, तैयार किए जा रहे कंटेंट एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने इन्फ्लुएंसर्स द्वारा किस प्रकार का कंटेंट तैयार किया जा रहा है, इसकी जानकारी लेते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों एवं प्रशासन की जनहितकारी गतिविधियों को सरल एवं प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाने के संबंध में चर्चा की।

    कार्यक्रम में राजस्व, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, खाद्य, नगरीय प्रशासन, कृषि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, नवाचारों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने उपस्थित नागरिकों को योजनाओं के उद्देश्य, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं मिलने वाले लाभों से अवगत कराया। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए जानकारी एवं सेवा संबंधी स्टॉलों के माध्यम से भी आमजन को योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई। इस दौरान नागरिकों की जिज्ञासाओं एवं योजनाओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान भी किया गया।

    शिविर में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई। योजना के तहत विनय कुमार गुप्ता को 5 लाख रुपए तथा रोहित कुमार पटेल को 1 लाख 50 हजार रुपए की ऋण राशि के प्रतीक स्वरूप चेक प्रदान किए गए। इसी प्रकार मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत मती उर्मिला सिंह एवं रोशनी सिंह को 1-1 लाख रुपए, पूजा सिंह को 1 लाख 50 हजार रुपए तथा भानू पनिका एवं कलावती को 2-2 लाख रुपए की ऋण राशि के प्रतीक स्वरूप चेक वितरित किए गए। इस अवसर पर हितग्राहियों को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। शिविर में कुल 92 आवेदन प्राप्त हुए।

    कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मती अर्चना कुमारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सु प्राशी अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  जगन्नाथ मरकाम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर  रवि ग्वाल, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष  रामदास पुरी सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

  • शिकार के लिए खेत के आसपास लगाए गए फंदे में फंस कर हुई थी तेंदुए की मौत, शिकार के लिए बिछाया था फंदा, 24 घंटे में दो शिकारी गिरफ्तार, इस तरह खुला राज…

    शिकार के लिए खेत के आसपास लगाए गए फंदे में फंस कर हुई थी तेंदुए की मौत, शिकार के लिए बिछाया था फंदा, 24 घंटे में दो शिकारी गिरफ्तार, इस तरह खुला राज…

    कटनी

     जिले के रीठी वन परिक्षेत्र में तार के फंदे में फंसकर तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    दरअसल, देवरी-पटो‍हा तालाब के जंगल में एक किसान के खेत के पास करीब 3 से 4 वर्ष उम्र के नर तेंदुए का शव मिला था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। आशंका जताई गई कि जंगली सूअर और हिरण के शिकार के लिए खेत के आसपास तार का फंदा बिछाया गया था, जिसमें तेंदुआ फंस गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश पटेल ने उच्च अधिकारियों के निर्देशन में टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की। कड़ी मशक्कत और पूछताछ के बाद टीम ने 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है। वहीं, इस शिकार की घटना में और कितने लोग शामिल हैं, इसकी जांच वन विभाग द्वारा अभी जारी है। त्वरित कार्रवाई के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने रीठी वन अधिकारी और पूरी टीम की सराहना की है।

  • BRICS Summit में बिहार का जलवा, विदेशी मेहमानों की वेलकम किट में सत्तू-मखाना

    BRICS Summit में बिहार का जलवा, विदेशी मेहमानों की वेलकम किट में सत्तू-मखाना

    पटना
    भारत इस बार अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है जिसमें दुनिया के कई धुरंधर देश शामिल हो रहे हैं। दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितम्बर को दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह सम्मेलन बिहार के लिए इसलिए बेहद खास है क्योंकि इसमें हमारे राज्य का सत्तू और सुपर फूड मखाना को जगह मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 25 अन्य देश शामिल हो रहे हैं।

    सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट डालकर सीएम सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को बिहार की ओर से धन्यवाद दिया है। सीएम ने कहा है कि दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के वेलकम कीट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को साकार किया। यह नए बिहार की नई पहचान है। बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने है।

    वेलकम कीट में क्या-क्या है
    ब्रिक्स सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधियों के अलावे दुनिया भर के पत्रकार और मेहमान आ रहे हैं जिन्हें वेलकम कीट में भारत की खासियत वाला उपहार दिया जा रहा है। इस कीट के बैग में बिहार के सत्तू और मखाना मौजूद है जिसके लिए विदेश मंत्रालय ने बिहार सरकार के साथ समन्वय बनाकर खास तौर पर तैयार करवाया है। इसमें ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टॉल शामिल है। बैक में एक मेटल वाला बोतल कॉफी मग और छोटा सा बैग भी है। बैग में ब्रिक्स सम्मेलन की डायरी, पेन और स्मृति चिन्ह डाला गया है।

    सम्मेलन में इन देशों के मेहमान
    12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा 25 देश हिस्सा ले रहे हैं। इसमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देश, 10 ब्रिक्स सहयोगी देश और पांच देश विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के अध्यक्ष होने के नाते इसमें शामिल हैं। इन प्रमुख नेताओं में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अलसीसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद शामिल हैं। यूएई की तरफ से अबूधाबी के क्राउन प्रिंस बिन जायद अल नाहयान हिस्सा लेंगे। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा की संभावना से इनकार किया है। सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा के जबरदस्त प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने खतरों से निपटने के लिए आसमान से जमीन तक सुरक्षा ग्रिड तैयार की है। आसपास के दफ्तरों को बंद कर दिया गया है तो पूरे शहर के स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई हैं।

  • पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच हलचल, दिल्ली में सचिन पायलट से मिले भारत भूषण आशु

    पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच हलचल, दिल्ली में सचिन पायलट से मिले भारत भूषण आशु

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव सचिन पायलट से नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात की।

    दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक मामलों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं।
    पंजाब कांग्रेस में समन्वय बढ़ाने की कोशिश पायलट से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भूषण ने पायलट के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन से जुड़े विषयों और प्रदेश में कांग्रेस को और मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग का संकेत दिया।

    चुनाव से पहले सभी धड़ों को एक करना चुनौती
    कांग्रेस हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने की है। पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ पायलट की लगातार हो रही मुलाकातों को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल लेने के नियम बदले, अब दूध और खाने के स्टॉल का होगा ई-ऑक्शन

    रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल लेने के नियम बदले, अब दूध और खाने के स्टॉल का होगा ई-ऑक्शन

    अंबाला
     रेलवे बोर्ड ने नौ वर्ष पुरानी कैटरिंग नीति में बदलाव किया है। स्टेशन पर खाने-पीने का सामान या दूध का स्टाल लगाने वालों को ई-आक्शन से स्टाल लेने होंगे।

    इसमें किसी की सिफारिश या पुराने तरीके से आवंटन की गुंजाइश कम होगी। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टाल तथा ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

    सबसे बड़ा असर मिल्क स्टाल पर पड़ेगा। जोनल रेलवे को मिल्क स्टाल के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। बोर्ड की ओर से 28 मई 2018 को जारी मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    चार श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू भी ऑनलाइन ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों की जनरल माइनर यूनिट्स के लिए भी ई-आक्शन जरूरी होगा।

    इन इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित हैं। इन इकाइयों के अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार होंगी। इसके लिए 10 जनवरी 2018 को जारी जीएमयू के मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    यह है जमानत राशि के नियम ई-आक्शन में बोली दाताओं के लिए जमानत राशि के नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। वार्षिक बोली मूल्य का 10 % ईएमडी के रूप में जमा करना होगा।

    सफल बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 % सुरक्षा जमा के तौर पर देना होगा। ईएमडी को सुरक्षा जमा में समायोजित किया जाएगा। बची राशि ई-आक्शन के दो सप्ताह में ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    यात्रियों के लिए क्यों अहम है बदलाव बदलाव का सीधा संबंध यात्रियों से भी है। रेलवे की मंशा है कि ठेके की प्रक्रिया पारदर्शी हो। इससे छोटे कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा।

    क्रिस करेगा व्यवस्था में बदलाव रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-आक्शन माड्यूल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था को ऑनलाइन बोली प्रणाली में भी शामिल किया जाएगा।

     

  • CG Weather: सुकमा-बीजापुर से धमतरी तक दो दिन बारिश के आसार, रायपुर में छाए रहेंगे बादल

    CG Weather: सुकमा-बीजापुर से धमतरी तक दो दिन बारिश के आसार, रायपुर में छाए रहेंगे बादल

    रायपुर.

    प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. गुरुवार को रायपुर में करीब 3 बजे के बाद अचानक तेज हवा के साथ तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली.

    मौसमी सब-डिविजनल वर्षा सामान्य रही और इसमें 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश के वितरण और तीव्रता में वृद्धि होने की संभावना है. इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रहा.

    रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
    रायपुर में 11 सितंबर को आकाश सामान्यतः मेघमय रहने के साथ कुछ बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. शहर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. 

    इन इलाकों में हुई बारिश 
    प्रदेश में गुरुवार को पखांजूर में 5 सेमी, सोनहत और मालखरौदा में 4-4 सेमी, बिहारपुर और सूरजपुर में 3-3 सेमी बारिश हुई. रघुनाथनगर, चांदो, बास्तानार, प्रेमनगर, बलरामपुर, बकावंड और दौरा कोचली में 2-2 सेमी वर्षा दर्ज की गई. रायपुर में भी 1 सेमी बारिश हुई.

    कई जिलों मे अलर्ट जारी
    मौसम विभाग ने आज सुबह कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरीऔर गरियाबंद में आकाशीय बिजली गिरने और वर्षा की संभावना जताई है.

  • UP Politics: हारे हुए 18,900 बूथों पर BJP का ‘रिकवरी प्लान’, 2027 चुनाव के लिए बनाई खास रणनीति

    UP Politics: हारे हुए 18,900 बूथों पर BJP का ‘रिकवरी प्लान’, 2027 चुनाव के लिए बनाई खास रणनीति

    लखनऊ 

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा अब पूरी तरह से एक्टिव हो गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर भले ही सियासी माहौल बनाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा एक रिकवरी प्लान पर भी काम कर रही है. इसके तहत 2024 में जिन विधानसभा सीटों पर हार मिली है, उनके एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 

    भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए 'हाइपर-लोकल' मोड में उतर गई है. मकसद बिल्कुल साफ है, हर बूथ, हर नंबर और हर वोट पर ध्यान देना. पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार को सिर्फ़ एक बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर नहीं देख रही है. उसने डेटा की गहराई से जांच की है और उन खास पोलिंग बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच उसका सपोर्ट बेस कम हुआ। 

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने 2022 में जिन 18,900 बूथों पर जीत हासिल की थी, 2024 के चुनाव में उन्हीं बूथों पर वोट कम मिले हैं. यह संख्या अब पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है. इसीलिए भाजपा ने पहले इन बूथों का हिसाब-किताब करने, कमजोर जगहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए रिकवरी प्लान बनाया है। 

    भाजपा के सामने ग्रामीण बूथों की चुनौती
    भाजपा की बूथ स्तरीय कवायद से मिली सबसे अहम जानकारी भौगोलिक है. भाजपा ने जिन 18,900 बूथों को चिह्नित किया है, उनमें से लगभग 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों के हैं. खासकर छोटे गांवों और बिखरी हुई बस्तियों वाले बूथ हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी केंद्र अपेक्षाकृत ज़्यादा मज़बूत रहे. इससे साफ है कि भाजपा का आधार ग्रामीण इलाकों में घट रहा है, जिसे दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। 

    भाजपा के सामने अब सिर्फ़ पूरे राज्य में राजनीतिक संदेश पहुंचाने की चुनौती नहीं है; चुनौती यह पहचानना है कि कौन-से ग्रामीण समुदाय दूर हो गए, वे क्यों दूर हुए और उन्हें वापस कैसे लाया जाए। 

    वॉर रूम से जमीनी लड़ाई तक का प्लान
    यूपी में भाजपा की रणनीति डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की ओर बढ़ रही है.  भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच फिर से यूपी का दौरा करेंगे. उनकी समीक्षा में जिन मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी, उनमें वे बूथ शामिल हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें वापस जीतने की रणनीति बनाना शामिल है। 

    भाजपा की यह प्रक्रिया असल में एक पॉलिटिकल फीडबैक लूप है: बूथ की पहचान करना, सामाजिक बदलाव को समझना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना, और उसके बाद संगठन को फिर से खड़ा करके दोबारा से बूथ को वापस जीतना. भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव का नतीजा पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से तय नहीं होता; यह हज़ारों अलग-अलग बूथों पर जीत-हार से तय होता है, जहां वोटों के अंतर को मापा जा सकता है, वोटरों की पहचान की जा सकती है और संगठन की कमियों को सुधारा जा सकता है। 

    भाजपा का यूपी में रिकवरी प्लान
    भाजपा के यूपी में नए गणित का आधार बूथ प्रबंधन है. यूपी में 18,900 का आंकड़ा सिर्फ़ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह 2024 में मिली हार को माइक्रो-लेवल पर चुनावी रिकवरी प्लान में बदलने की भाजपा की रणनीति है. अवध और पूर्वांचल सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाके हैं. ग्रामीण बूथ मुख्य चुनावी मैदान हैं, तथा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को एकजुट करना एक अहम चिंता है। 

    बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट ट्रांसफर का पैटर्न बदल गया है. इसके अलावा बुंदेलखंड जैसे इलाकों में स्थानीय मुद्दे अभी भी अहम हैं. भाजपा अब इसी गणित को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि 2027 में दोबारा वापसी कर सके। 

    अवध और पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती
    डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में हर जगह नुकसान एक जैसा नहीं था. अवध क्षेत्र में भाजपा ने 2022 में इलाके की 154 विधानसभा सीटों में से 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इनमें से सिर्फ़ 51 सीटों पर आगे थी। 

    यह कुल मिलाकर 50 सीटों का नुकसान है, 2022 के नतीजों के मुकाबले 49.5 फीसदी की गिरावट. अमेठी, फैज़ाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जिलों में यह नुकसान साफ़ तौर पर देखा गया, जिससे अवध भाजपा के चुनावी नक्शे में सबसे ज़्यादा दबाव वाले इलाकों में से एक बन गया है।

    अवध की तरह ही पूर्वांचल इलाके में भी भाजपा को झटका लगा था. 2022 में भाजपा ने पूर्वांचल इलाके की 102 विधानसभा सीटों में से 53 सीटें जीती थीं. इसके दो साल बाद, लोकसभा चुनाव के दौरान वह सिर्फ़ 36 सीटों पर आगे थी। यह कुल मिलाकर 17 सीटों या 32.1 फीसदी की गिरावट रही। 

    बूथ-लेवल पर यह गिरावट खास तौर पर जौनपुर, गाज़ीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में देखी गई। भाजपा जिन राजनीतिक वजहों पर गौर कर रही है, उनमें गैर-यादव ओबीसी वोटरों के एक हिस्से का समाजवादी पार्टी की तरफ़ जाना शामिल है, जहां अखिलेश यादव का 'पीडीए' फार्मूला प्रभावी रहा। 

    पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में नफा-नुकसान
    पश्चिमी इलाके में भी गिरावट देखी गई, हालांकि अवध और पूर्वांचल के मुकाबले नुकसान कम था. पश्चिमी यूपी में भाजपा ने 2022 में 76 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीती थीं; 2024 में वह 43 सीटों पर आगे रही. इस तरह कुल 14 सीटों या 24.6 फीसदी का नुकसान हुआ। 

     रुहेलखंड में 2022 के चुनाव में भाजपा ने 52 सीटों में से 30 सीटें जीती थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त घटकर 22 सीटों पर आ गई, यानी कुल आठ सीटों या 26.7 फीसदी की गिरावट हुई। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड को मिलाकर कुल 128 विधानसभा सीटें हैं; भाजपा ने 2022 के चुनाव में इनमें से 87 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65 सीटों पर बढ़त बनाए रखीच। 

    वहीं, बुंदेलखंड की तस्वीर कुछ अलग हैय 2022 में भाजपा ने 19 में से 14 विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में वह सिर्फ़ नौ सीटों पर आगे रही. यानी कुल मिलाकर पांच सीटों या 35.7 फीसदी की कमी हुई. यहां पार्टी का आकलन राज्य-स्तर की किसी एक राजनीतिक लहर के बजाय स्थानीय मुद्दों और मौजूदा सरकार के प्रति नाराज़गी (एंटी-इनकंबेंसी) की ओर ज़्यादा इशारा करता है. लगता है कि इन वजहों से इस इलाके के कुछ हिस्सों में भाजपा की बढ़त कमज़ोर हुई है। 

    सपा के 'पीडीए' फ़ैक्टर पर भाजपा की नज़र
    भाजपा के अंदरूनी आकलन में भी सामाजिक समीकरण को समस्या की जड़ माना गया हैय ऐसा प्रतीत होता है कि सपा की 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' (PDA) रणनीति ने भाजपा के गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोट बैंक में सेंध लगाई है. यह ज़रूरी नहीं कि पूरे समुदाय ने ही पाला बदल लिया हो, बल्कि अहम जातियों के समूहों में होने वाले छोटे-मोटे बदलाव भी बूथ स्तर पर नतीजों को पूरी तरह बदल सकते हैं। 

    माना जाता है कि कई इलाकों में कुर्मी, कुशवाहा और दूसरे ओबीसी वोटरों का एक हिस्सा सपा में शिफ्ट हो गया. साथ ही बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट का गणित भी बदला है. 2022 में बसपा का वोट शेयर लगभग 13 फीसदी था, जो 2024 में घटकर 9 फीसदी हो गया. ऐसे में उसके ग्रामीण वोट बैंक का एक हिस्सा अलग-अलग पार्टियों में बंटने के बजाय 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की तरफ़ जाता दिखा। 

    2022 का गेम कैसे 2024 में बदल गया
    2024 का चौंकाने वाला नतीजा आज भी परेशान कर रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि भाजपा क्यों 2024 के लोकसभा नतीजों को एक चेतावनी मान रही है, जिस पर बारीकी से ध्यान देने की ज़रूरत है. पार्टी ने 2024 में उत्तर प्रदेश में 33 लोकसभा सीटें जीतीं, जो 2019 में जीती गई 62 सीटों के मुकाबले काफी कम थीं। 

    वहीं, सपा ने 37 सीटें हासिल कीं, जबकि 2019 में उसे सिर्फ़ पांच सीटें मिली थीं, लेकिन संसदीय सीटों के ये आंकड़े भाजपा के लिए नतीजों के विश्लेषण की सिर्फ़ शुरुआत भर हैं. जब 2024 के लोकसभा नतीजों को राज्य की 403 विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाता है, तो पार्टी की पकड़ कमज़ोर होने का दायरा और भी साफ़ हो जाता है। 

    2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की 255 सीटों की संख्या असल में घटकर लगभग 161 विधानसभा क्षेत्रों की बढ़त तक सिमट जाती है, जब 2024 के लोकसभा वोटिंग पैटर्न को उन पर लागू करके देखा जाता है. और इस मुख्य आंकड़े के पीछे एक और बारीक आंकड़ा छिपा है: 18,900 बूथ, जहां नतीजे पलट गए।