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  • अविलंब सुधारी जाये सड़के -चेंबर कलेक्टर से मिले चेंबर के पदाधिकारी

    अविलंब सुधारी जाये सड़के -चेंबर कलेक्टर से मिले चेंबर के पदाधिकारी

    सतना

    सतना शहर की अधिकांश मुख्य सड़कों की हालत बहुत ही दयनीय हालत में है नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी के अड़ियल रवैया की वजह से आम जनता एवं व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है व्यापार ठप्प होता जा रहा है खराब सड़कों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं ऑटो रिक्शा पलट जाते हैं लोगों के हाथ पैर टूट रहे हैं टूटी हुई सड़कों से धूल उड़ती है लोग सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं 

    विंध्य चेंबर के अध्यक्ष सतीश सुखेजा कनिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल मंत्री हरिओम गुप्ता ने सतना कलेक्टर से मिलकर शहर की सड़कों की समस्याओं के बारे में अवगत कराया एक दिन पहले चेंबर के पदाधिकारी  सांसद गणेश सिंह से भी मिलकर शहर की समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया था  पन्नीलाल चौक से सिटी कोतवाली तक संचालित सीवर लाइन निर्माण कार्य बहुत ही कछुआ चाल से चल रहा है जिससे आम जनता एवं व्यापारी परेशान हो रहे है गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से कार्य नहीं हो पा रहे है मार्च में ही भगवान झूलेलाल जी की जयंती है और 27 मार्च को भगवान श्री राम की शोभायात्रा इसी मार्ग से निकालनी है 

    विंध्य व्यापार मेला के लिए मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई 8 एकड़ जमीन की भी चेंबर पदाधिकारियों ने मांग की जिस पर कलेक्टर सतीश कुमार एस जी ने हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

  • ‘मोटी चमड़ी रखो’ टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा—क्या अंतरधार्मिक विवाह से बिगड़ रहा देश का ताना-बाना?

    ‘मोटी चमड़ी रखो’ टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा—क्या अंतरधार्मिक विवाह से बिगड़ रहा देश का ताना-बाना?

    नई दिल्ली
    'Yadav Ji ki love story' फिल्म के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका के जरिए विश्व यादव समाज ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कोर्ट का कहना है कि फिल्म के नाम में ऐसा कोई भी शब्द नहीं है, जो यादव समुदाय की खराब छवि पेश कर रहा हो। इस दौरान अदालत ने हाल ही में घूसखोर पंडत के मामले में दिए फैसले का भी जिक्र किया।

    याचिका में फिल्म बैन की मांग
    याचिका में कहा गया था कि फिल्म का नाम यादव समाज की एक आपत्तिजनक तस्वीर बना रहा है। साथ ही दावा किया गया कि फिल्म में दिखाया गया है कि यादव समाज से आने वाली एक हिंदू लड़की मुस्लिम पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील का कहना था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है।

    सुप्रीम कोर्ट नहीं हुआ सहमत
    याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सवाल किया, 'हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना देश के ताने बाने को खराब कर रहा है।'

    बेंच ने कहा, 'हमने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखी है। मुख्य शिकायत यह है कि आने वाली फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय की छवि खराब करता है। इसलिए तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किसी फिल्म का शीर्षक किसी समुदाय को गलत तरीके से कैसे पेश कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो। ये आशंकाएं पूरी तरह से निराधार हैं।'

    दूसरी फिल्म का किया जिक्र
    अदालत ने कहा कि घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब भ्रष्ट होता है। ऐसे में एक समुदाय से गलत बात जोड़ी जा रही थी। कोर्ट ने कहा, 'इस केस में ऐसी कोई भी गलत बात यादव समाज से नहीं जोड़ी गई है।' उन्होंने कहा कि यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत तरह से नहीं दिखा रहा है।

    इस दौरान बेंच ने बेंडिट क्वीन फिल्म का भी जिक्र किया। बेंच ने कहा, 'बेंडिट क्वीन फिल्म में वो कह रहे थे कि गुज्ज समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है। तब इस कोर्ट ने कहा था कि नहीं ऐसा नहीं है।' कोर्ट ने कहा, 'मोटी चमड़ी रखें। यह काल्पनिक है। एक सप्ताह में सब खत्म हो जाएगा। कोई भी आजकल थियेटर नहीं जा रहा है। सभी फोन पर देख रहे हैं।'

     

  • दूषित पेयजल से मचा हाहाकार, 13 वर्षीय बालक सहित दो की मौत, TS सिंहदेव ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

    दूषित पेयजल से मचा हाहाकार, 13 वर्षीय बालक सहित दो की मौत, TS सिंहदेव ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

    सरगुजा

    गर्मी की आहट के साथ ही अंबिकापुर शहर में पीलिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। नमनाकला खटिकपारा में 13 वर्षीय बालक दिव्यांश राय की पीलिया से मौत के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इससे पहले 22 फरवरी को झंझटपारा नवापारा निवासी 40 वर्षीय सोना लाल की भी पीलिया से मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया है।

    दूषित पेयजल से फैली बीमारी, 40 से अधिक लोग पीलिया से ग्रसित
    शहर में फैल रहे पीलिया के पीछे दूषित पेयजल आपूर्ति को मुख्य कारण माना जा रहा है। नवागढ़, घुटरापारा, नमनाकला सहित कई वार्डों में पीलिया के मरीज सामने आ चुके हैं। अब तक 40 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद नगर निगम द्वारा समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है और मरीजों की स्क्रीनिंग भी की जा रही है। विभाग का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नए मरीज लगातार सामने आ रहे हैं।

    कांग्रेस ने निगम कार्यालय का किया घेराव
    इधर दूषित पेयजल सप्लाई और पीलिया से हो रही मौतों को लेकर शहर की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज नगर निगम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की शहर सरकार लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। निगम की लापरवाही से लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंचा, जिससे बड़ी संख्या में लोग पीलिया से ग्रसित हुए। इस दौरान कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफे की भी मांग की गई है।
    पीलिया से अब तक जिन दो लोगों की मौत हुई है, उनमें-

        जनजातपरा निवासी सोना लाल (40 वर्ष), मृत्यु दिनांक 22 फरवरी 2026
        खटिकपारा निवासी दिव्यांश राय (13 वर्ष), मृत्यु दिनांक 23 फरवरी 2026

    टीएस सिंहदेव ने साधा निशाना
    इस पूरे मामले पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नमनाकला खटिकपारा, अंबिकापुर में पीलिया से 13 वर्षीय छात्र की मृत्यु का समाचार बेहद पीड़ादायक और अत्यंत चिंताजनक है। शोकाकुल परिवार के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि हम पिछले कई हफ्तों से इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर ध्यान दिला रहे थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आज एक मासूम ज़िंदगी चली गई। 2–3 दिन पहले भी पीलिया से एक युवक की दर्दनाक मृत्यु हुई थी। यह साफ़ संकेत है कि हालात को हल्के में लिया गया।

    नमनाकला खटिकपारा, अंबिकापुर में पीलिया से 13 वर्षीय छात्र की मृत्यु का समाचार बेहद पीड़ादायक और अत्यंत चिंताजनक है। शोकाकुल परिवार के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।

    टीएस सिंहदेव ने कहा, क्षेत्र की ट्रिपल इंजन सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे। दुर्भाग्य से लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है- न रोकथाम की ठोस व्यवस्था है, न समय पर इलाज की समुचित पहुंच। जवाबदेही तय हो और गैर-ज़िम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई हो। अंबिकापुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के प्रभावित इलाकों में तुरंत व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाए जाएं। स्वच्छ पानी, जांच और उपचार की सुविधाएं हर ज़रूरतमंद तक शीघ्र पहुंचाई जाएं। लोगों की जान ऐसी बीमारी से नहीं जानी चाहिए जो रोकी भी जा सकती है और समय पर इलाज से ठीक भी हो सकती है।

  • 1000 साल पुरानी भोजशाला का इतिहास: कब बनी कमाल मौला मस्जिद, धार विवाद की पूरी कहानी

    1000 साल पुरानी भोजशाला का इतिहास: कब बनी कमाल मौला मस्जिद, धार विवाद की पूरी कहानी

    धार
    मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर से जुड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर यह विवाद चर्चा में आ गया है। सैकड़ों सालों से हिंदू और मुसलमान इस पर अपना-अपना दावा पेश करते रहे हैं। इस बीच हाई कोर्ट में एएसआई ने जो रिपोर्ट पेश की है उसमें कहा गया है कि कमाल मौला मस्जिद को मंदिर के पुराने अवशेषों से बनाया गया है। आइए नजर डालते हैं भाजशाला परिसर के एक साल के पुराने इतिहास पर।

    1034 ईस्वी में भोजशाला की स्थापना
    1010 से 1055 तक मालवा क्षेत्र में राजा भोज का शासन था। इस दौरान उन्होंने 1034 में सरस्वती सदन की स्थापना की, जिसे भोजशाला भी कहा जाता है। यहां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

    मुस्लिम शासकों का आगमन और कमाल मौला
    1305-1531- इस कालखंड में अलाउद्दीन खिलजी और दिलावर खान गोरी ने महालकदेव और गोलादेव को हराकर धार पर कब्जा कर लिया। उन्होंने राजा भोज के समय बने कई मंदिरों और स्मारकों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद यहां स्वतंत्र मालवा सत्नत की स्थापना की गई और भोजशाला के अधिकांश हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया गया। यहीं 1459 में मौलना कमालुद्दीन का मकबरा भी बनाया गया जिन्हें कमाल मौला के नाम से भी जाना जाता है।

    कमाल मौला का वास्तविक नाम शेख कमल अल-दीन था। वह मालवा में 14वीं शताब्दी के प्रमुख सूफी संत थे। निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य रहे कमाल मौला का देहांत 1331 में हुआ था। कहा जाता है कि औलिया ने उन्हें मालवा क्षेत्र में धार और आसपास के इलाकों में इस्लाम के प्रचार के लिए भेजा गया था। कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन अब्दुल समद कहते हैं कि कमाल मौला मकबरा मस्जिद और विवादित भोजशाला के करीब है।

    कैसे वाग्देवी की प्रतिमा पहुंच गई लंदन
    1732- में धार पर मराठा शासकों का कब्जा हो गया। 1875 में भोजशाला के पास खुदाई के दौरान वाग्देवी की प्रतिमा मिली, जिसे 1880 में एक अंग्रेज अधिकारी लेकर लंदन चला गया। तब से वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में है।

    फिर कैसे आई मौजूदा व्यवस्था
    1909 में धार शासकों ने प्राचीन स्मारक कानून 1904 लागू किया और धार दरबार गैजेट जारी करते हुए इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया। 1934 में धार के शासकों ने यहां से अवैध अतिक्रमण हटाते हुए भोजशाला का साईनबोर्ड लगाया। 1934 में तब के धार के दीवान के नादकर ने भोजशाला को कमाल मौलाना मस्जिद घोषित किया और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी।

    हिंदू मुस्लिम टकराव और ASI के हवाले भोजशाला
    1944 में मौलाना कमलुद्दीन का पहला उर्स हुआ और हिंदू-मुसलमानों के बीच इस स्थल को लेकर टकराव बढ़ गया। 1952 में हिंदुओं ने बसंत पंचमी पर भोज उत्सव का आयोजन किया। 1952 में एएसआई ने भोजशाला को संरक्षित घोषित किया। 1988 में भी मरम्मत के दौरान यहां एक मूर्ति मिली थी। 1997 में धार के कलेक्टर ने शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज और बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी। अप्रैल 2003 में एएसआई ने हिंदुओं को फूल और अक्षत से हर मंगलवार को पूजा की अनुमति दी, जबकि मुसलमान शुक्रवार को नमाज अदा कर सकते हैं।

    जब शुक्रवार के दिन आई बसंत पंचमी
    2006 में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी होने की वजह से कर्फ्यू लागू करना पड़ा। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों समुदायों ने अपने आयोजन किए। इसके बाद 2013 में भी जब ऐसा मौका आया तो कड़ी सुरक्षा और तनाव के बीच पूजा और नमाज हुई। हालांकि,तब लोगों ने आरोप लगाया कि आम लोगों को वहां नहीं जाने दिया गया और पुलिसकर्मियों ने ही परंपरा निभाई। 2016 में भी जब ऐसा मौका आया तो वहां दोनों समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए थे।

    मार्च 2024 में सर्वेक्षण का आदेश
    मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच ने मार्च 2024 में भोजशाला परिसर में सर्वे का आदेश दिया। इसे छह महीने सप्ताह में पूरा करना था। मार्च 2024 में एएसआई ने सर्वे की शुरुआत की जो 98 दिनों तक चला। 15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2189 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पेश की। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को एएसआई रिपोर्ट को खोलने और सभी पक्षों को देने को कहा। इके बाद हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की समीक्षा शुरू की और सभी पक्षों को दो सप्ताह में अपनी आपत्तियां, विचार, सलाह, सिफारिश आदि दोनों को कहा है।

  • मध्य प्रदेश की गौशालाओं को ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाओं का समर्थन, 3 माह बाद सड़कों पर नहीं दिखेंगे गौवंश

    मध्य प्रदेश की गौशालाओं को ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाओं का समर्थन, 3 माह बाद सड़कों पर नहीं दिखेंगे गौवंश

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के लिए दुबई और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएं भी आगे आई हैं.

    कामधेनु निवास के लिए 7 स्थानों पर जमीन चिन्हित

    पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं कामधेनु निवास के लिए प्रदेश में 29 स्थान चयनित कर लिए गए हैं. उधर 7 स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा पशुपालन विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. इसके तहत जबलपुर में 461 एकड़, रायसेन में 320 एकड़, सागर में 411 एकड़, अशोकनगर में 293 एकड, खरगौन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि आवंटन सहित 7 स्थान पर काम चल रहा है."

    उन्होंने कहा कि "अगले 10 दिनों में गौशाला बनाने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी. जल्द ही इनका भूमि पूजन किया जाएगा. मंत्री ने दावा किया कि देश में यह पहली योजना है, जिसमें निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि इनमें कई गौशालाएं ऐसी होंगी, जिसमें 20 हजार गौवंश को एक स्थान पर रखा जाएगा."

    दुबई, ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने भी डाला टेंडर

    मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "स्वावलंबी गौशालाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. टेंडर प्रकिया में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की भी 2 संस्थाओं द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है. टेंडर प्रक्रिया अगले एक माह में पूरी कर ली जाएगी. गौशालाओं को पूरी तरह से तैयार होने में 2 साल का वक्त लेगा. इसके बाद एक भी गौवंश सड़क पर दिखाई नहीं देगा."

    मंत्री ने सफाई दी कि "गौशालाओं को पूरी तरह से बनने के पहले ही गौवंशों को इनमें पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा. बरसात के पहले सभी गौवंशों को इनमें पहुंचा दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द की जाएंगी."

        मंत्री को नेता प्रतिपक्ष का सुझाव आया पसंद

    ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद किसान ही गौवंश को छोड़ देता है. जब सरकार गौशालाओं को प्रति गाय के हिसाब से 40 रुपए प्रतिदिन की राशि दे रही है, तो सीधी किसानों को यह राशि क्यों नहीं दी जाती. एआई के दौर में ऐसे पशुपालकों की निगरानी भी की जा सकती है." जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव की तारीफ करते हुए कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी.

  • मध्य प्रदेश में अब तक बालाघाट का ‘चिन्नौर’ धान और रीवा का ‘सुंदरजा’ आम ही जीआइ टैग प्राप्त कर पाए

    मध्य प्रदेश में अब तक बालाघाट का ‘चिन्नौर’ धान और रीवा का ‘सुंदरजा’ आम ही जीआइ टैग प्राप्त कर पाए

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के दो पारंपरिक कृषि उत्पादों बालाघाट के चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है. इससे इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से इन दोनों उत्पादों का पंजीयन कराया गया. चिन्नौर धान के लिए 60 किसानों और सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीयन किया गया है।

    ‘किसी भी GI टैग को निरस्त नहीं किया गया’

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी भी उत्पाद का जीआई टैग निरस्त नहीं किया गया है. लुवाई धान, टर्री भरी धान और सातिया धान को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है. वहीं चार अन्य उत्पादों बैंगनी अरहर, नागफनी कुटकी, सिताही कुटकी और महाकौशल क्षेत्रीय धान को जीआई रजिस्ट्री की वेबसाइट पर विज्ञापित किया जा चुका है।

    बासमती को लेकर कानूनी विवाद

    मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के प्रयास 2008 से जारी हैं. जीआई रजिस्ट्री चेन्नई ने पहले मध्यप्रदेश को बासमती के दायरे में शामिल नहीं किया था. बाद में प्रदेश सरकार की आपत्ति पर संशोधित आवेदन की प्रक्रिया चली. यह मामला मद्रास हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां 27 फरवरी 2020 को याचिका निरस्त कर दी गई थी. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ किया है. प्रदेश सरकार का कहना है कि बासमती को जीआई टैग दिलाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।

    क्या होता है जीआइ टैग
    किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है जिसे जीआइ टैग यानी जीओ ग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं। जिसे हिंदी में भौगोलिक संकेतक नाम से जाना जाता है।

    बालाघाट के 60, रीवा के 20 किसान पंजीकृत
    प्रदेश में उत्पादित बासमती धान के लिए चिन्नौर के लिए वर्ष 2008 से प्रयास किए जा रहे थे। जीआइ टैग प्राप्त बालाघाट चिन्नौर धान उत्पाद के लिए 60 किसानों का समिति में पंजीकरण किया गया है। रीवा सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीकरण कराया गया। 

  • योगी आदित्यनाथ का जापान दौरा: मित्सुई एंड कंपनी संग निवेश पर बड़ी बातचीत, यूपी में निवेश का न्योता

    योगी आदित्यनाथ का जापान दौरा: मित्सुई एंड कंपनी संग निवेश पर बड़ी बातचीत, यूपी में निवेश का न्योता

    टोक्यो/लखनऊ
    उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान दौरे के पहले दिन वैश्विक निवेश संवाद की मजबूत शुरुआत की। जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने जापान की अग्रणी वैश्विक ट्रेडिंग और निवेश कंपनी मित्सुई एंड कंपनी लिमिटेड के प्रबंधन से मुलाकात कर उत्तर प्रदेश में परिवर्तनकारी निवेश अवसरों को तलाशने का औपचारिक आमंत्रण दिया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के तहत सोलर, बायो-एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं शामिल हैं।

    वहीं दूसरी आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) के तहत आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सर्विसेज और स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश पर चर्चा हुई। तीसरा सेक्टर सेमीकंडक्टर का रहा, जिसमें चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन का विस्तार प्रमुख रहे। वहीं चौथा सेक्टर डेटा सेंटर रहा, जिसमें हाइपर-स्केल डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी हब जैसे क्षेत्रों में निवेश को लेकर गहन विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने मित्सुई प्रबंधन को दीर्घकालिक साझेदारी के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत-जापान आर्थिक सहयोग को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के साथ-साथ उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के कारण निवेशकों के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। सीएम योगी ने राज्य सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम और समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख वातावरण उपलब्ध कराता है।

    इससे पहले सीएम योगी का बुधवार को जापान पहुंचने पर टोक्यो में भव्य स्वागत किया गया। दो देशों की यात्रा के अंतर्गत यह यात्रा मुख्यमंत्री की जापान की पहली यात्रा है, जो भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीएम योगी का दो दिन का ये आधिकारिक दौरा है।

  • एक एकड़ में सवा लाख रुपए का मुनाफा देने वाला पाम ऑयल की खेती

    एक एकड़ में सवा लाख रुपए का मुनाफा देने वाला पाम ऑयल की खेती

    रायपुर

    किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय

    पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

    इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान श्री मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में श्री चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

    इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। श्री चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।

    सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है।

    गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।

  • राजधानी में धरना-प्रदर्शन और जुलूस पर रोक, पुलिस आयुक्त का आदेश जारी

    राजधानी में धरना-प्रदर्शन और जुलूस पर रोक, पुलिस आयुक्त का आदेश जारी

    रायपुर

    राजधानी रायपुर की हेवी ट्रैफिक वाली सड़कों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर रायपुर कमिश्नरेट ने नया आदेश जारी किया है. 4 प्रमुख मार्गों पर अब रैली, जुलूस और प्रदर्शन जैसे सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी गई है. अगले दो महीने तक के लिए आदेश लागू किया गया है.  

    जारी आदेश के मुताबिक, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक बीएनएसएस 2023 की धारा 163 तक सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध रहेगा. आदेश का आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. पुलिस कमिश्नर ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे शहर में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करें.

    इन सड़कों पर नहीं निकाल सकेंगे रैली

    1. जी.ई. रोड: शारदा चौक से जयस्तंभ चौक होते हुए फूल चौक तक.
    2. एम.जी. रोड: जयस्तंभ चौक से कोतवाली चौक तक.
    3. सदर बाजार रोड: कोतवाली से सत्ती बाजार चौक तक.
    4. एम.जी. रोड: मौलाना चौक से शारदा चौक तक.

  • ‘लव एंड वॉर’ पर संजय लीला भंसाली का बड़ा संकेत, फिल्म में दिखेगा उनका खास विज़न

    ‘लव एंड वॉर’ पर संजय लीला भंसाली का बड़ा संकेत, फिल्म में दिखेगा उनका खास विज़न

    मुंबई,

    बॉलीवुड फिल्मकार संजय लीला भंसाली का कहना है कि वह अपनी आने वाली फिल्म ‘लव एंड वॉर’ के जरिये कुछ खास करने की कोशिश कर रहे हैं संजय लीला भंसाली को भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन और विजनरी डायरेक्टर्स में से एक माना जाता है। वह अपनी फिल्मों की भव्यता और कहानी कहने के अंदाज़ से इंडियन फिल्मों को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए जाने जाते हैं। कई सुपरहिट क्लासिक फिल्में देने के बाद, अब वह अपने करियर के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक, 'लव एंड वॉर' की तैयारी कर रहे हैं। इस ग्रैंड हिस्टोरिकल ड्रामा में पहली बार बॉलीवुड के बड़े सितारे आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल एक साथ लीड रोल में नजर आएंगे।

    दर्शक इस फिल्म की थिएटर रिलीज का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अपने जन्मदिन पर भी भंसाली ने सेट पर ही रहना पसंद किया और पूरी तरह 'लव एंड वॉर' के काम में डूबे रहे। अपने जन्मदिन पर काम करने को लेकर उन्होंने कहा, "काम ही वो चीज है जिससे मेरी पहचान बनती है। जब मेरे पास काम नहीं होता, तो मुझे खुद की कोई वैल्यू महसूस नहीं होती। एक आर्टिस्ट के तौर पर अब मैं पहले से ज्यादा निडर हो गया हूँ और रिस्क लेने के लिए तैयार हूँ। आज मैं 5 या 10 साल पहले के मुकाबले ज्यादा मेहनत कर रहा हूँ। मैं हर दिन करीब 20 घंटे काम करता हूँ और मुझे इसमें मजा आ रहा है।"

    प्रोजेक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी न देते हुए उन्होंने कहा, "मैं यहाँ कुछ खास करने की कोशिश कर रहा हूँ।"
    हाल ही में, संजय लीला भंसाली ने 'लव एंड वॉर' के लिए दो बहुत बड़े म्यूजिकल सीक्वेंस शूट किए हैं, जिससे इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों की एक्साइटमेंट और बढ़ गई है। अपनी ग्रैंड विजुअल स्टोरीटेलिंग के लिए मशहूर भंसाली ने यह पक्का किया है कि इन गानों की कोरियोग्राफी शानदार हो, मूवमेंट्स दमदार हों और स्टेजिंग बिल्कुल नई हो, जो फिल्म की वॉर-एरा लव ट्रायंगल वाली इमोशनल कहानी से गहराई से जुड़ी हो।
    रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल जैसी पावरहाउस तिकड़ी के साथ भंसाली के हाथ मिलाने की खबर ने जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में इस बड़े कोलैबोरेशन को अभी से सिनेमा की एक ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जा रहा है।