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  • एग्जाम सेंटर बना ‘नकल सेंटर’! शिक्षकों की मिलीभगत से चार कमरों में धड़ल्ले से नकल

    एग्जाम सेंटर बना ‘नकल सेंटर’! शिक्षकों की मिलीभगत से चार कमरों में धड़ल्ले से नकल

    केसूर

    संकुल केंद्र घाटाबिल्लौद के अंतर्गत आने वाले समीपस्थ गांव कोट भिड़ौता में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। शासकीय माध्यमिक विद्यालय कोट भिड़ौता में चल रही पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षकों द्वारा खुलेआम नकल करवाने का गंभीर वीडियो सामने आया है। यहां परीक्षा चार कमरों में आयोजित की जा रही है और सभी कमरों में बोर्ड पर उत्तर लिखकर छात्रों को नकल करवाई गई।

    परीक्षा केंद्र बना 'सुविधा केंद्र', निष्पक्षता की उड़ीं धज्जियां

    परीक्षा कक्ष में निजी स्कूलों के बच्चे भी मौजूद थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह परीक्षा केंद्र पूरी तरह से ‘सुविधा केंद्र’ में तब्दील हो चुका है? शिक्षक स्वयं ब्लैकबोर्ड पर प्रश्नों के उत्तर लिख रहे थे और विद्यार्थी उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में उतार रहे थे। परीक्षा की निष्पक्षता की धज्जियां उड़ती रहीं और जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहे। यह स्थिति न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि उन छात्रों के साथ भी अन्याय है, जो ईमानदारी से परीक्षा देते हैं।

    प्रशासनिक चुप्पी और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

    यदि यह सच है तो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। परीक्षा केंद्र पर न तो सख्त निगरानी दिखी और न ही किसी प्रकार की अनुशासनात्मक व्यवस्था। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं या फिर सब कुछ जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इनका कहना है कि दोषी शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की शर्मनाक घटनाएं दोबारा न हों।

    गणित के पेपर में 120 विद्यार्थियों ने दी परीक्षा

    स्कूल में कक्षा पांचवीं एवं आठवीं के कुल 120 छात्र-छात्रा परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं। इसमें निजी स्कूल के भी विद्यार्थी शामिल हैं। नकल करवाने का जिस दिन का यह वीडियो है, उस दिन गणित का प्रश्नपत्र था। हालांकि, संकुल केंद्र घाटाबिल्लौद के केंद्र अध्यक्ष भुवानसिंह बघेल ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है, "बोर्ड पर लिखने जैसा कुछ भी मामला नहीं है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।"

     

  • आधी रात संकट में किसे फोन करेंगे पीएम मोदी? पुष्कर सिंह धामी का जवाब चर्चा में

    आधी रात संकट में किसे फोन करेंगे पीएम मोदी? पुष्कर सिंह धामी का जवाब चर्चा में

    देहरादून
    देहरादून के होटल फेयरफील्ड मैरियट में आयोजित 'हिन्दुस्तान उत्तराखंड समागम-2026' के मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने चिर-परिचित 'धाकड़' अंदाज में नजर आए। राजनीतिक सवालों से लेकर व्यक्तिगत पसंद तक, सीएम धामी ने सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। सीएम ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के विकास के लिए कड़े फैसले लेने से वह पीछे नहीं हटेंगे। एंकर ने धामी से मजेदार सवाल पूछा कि अगर रात की दो बजे वो मुसीबत में पड़ जाए तो पीएम मोदी या अमित शाह में से किसे कॉल करेंगे…? सीएम धामी ने कहा कि मुझे जवाब चुनने में कोई परेशानी नहीं होगी।

    रात 2 बजे मुसीबत आई तो किसे करेंगे कॉल?
    सीधी बात में जब एंकर ने एक मजेदार लेकिन पेचीदा सवाल पूछा कि "अगर आप रात के 2 बजे किसी बड़ी मुसीबत में फंस जाएं, तो मदद के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को फोन करेंगे या गृह मंत्री अमित शाह को?" इस पर सीएम धामी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारी पार्टी का वर्क कल्चर बहुत स्पष्ट और शानदार है। मुझे जवाब चुनने में कोई दुविधा नहीं है। जैसी परिस्थिति होगी, वैसा निर्णय लूंगा। मैं दोनों ही नेताओं को कॉल कर सकता हूं और कई बार मार्गदर्शन लिया भी है।”

    हेट स्पीच की रिपोर्ट पर करारा जवाब
    हाल ही में एक अमेरिकी रिपोर्ट में हेट स्पीच के मामले में उन्हें शीर्ष पर रखने के सवाल पर सीएम ने कड़ा पलटवार किया। धामी ने कहा, "मेरे प्रदेश की जनता जानती है कि मैं किसी से नफरत नहीं करता। लेकिन अगर UCC लागू करना, 'लैंड जिहाद' के खिलाफ एक्शन लेना, मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न रोकना और बहन-बेटियों का जीवन बचाने के लिए कड़े कानून बनाना हेट स्पीच है, तो मैं ऐसा करता रहूंगा।"

    रैपिड फायर राउंड
    उनसे रैपिड राउंड में भी सवाल दागे गए। मदरसा- आधुनिक शिक्षा में बदलना चाहते हैं। जोशीमठ- वहां सामरिक महत्व है। पुनर्वास ठीक करना चाहते हैं। यूसीसी- एक समान कानून। केदारनाथ- भोलेनाथ का स्थान। हरीश रावत- हरीश रावत जी अनुभवी नेता हैं। उनका ज्यादातर जीवन देश की सेवा में लगा हैं। 5 जुलाई 2025 को अपने खेत में गया था। रात को खटीमा में अपने गांव में गया था। मैंने पूछा कि सारी रुपाई हो गई। मैंने सुबह रुपाई लगाई। हरीश रावत जी ने कहा कि राहुल गांधी ने कहीं खेत में कुछ किया था, मैं भी गया था तो उन्होंने कहा कि मैंने उनकी नकल की। मैंने कहा कि राहुल गांधी ऐसा काम नहीं करते कि उनके जैसा किया जाए। मैं अपने खेत में गया था। रुपाई लगाई है। मैं हरीश रावत जी को चावल खाने बुलाऊंगा। संयोग से ऐसा मौका नहीं आया। तब नवंबर के महीने में मैं फिर गांव गया। मैंने 10-10 किलो के 20 कट्टे देहरादून ला गया। फिर मैंने हरीश रावत को एक कट्टा घर दे गया।

    राहुल गांधी के लिए एक शब्द- उनको कोई गंभीरता से नहीं लेता। वर्तमान में कई प्रकरण आ गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, गलवान घाटी की घटना, ऑपरेशन सिंदूर और अब एआई समिट में… दुनिया की इतनी बड़ी समिट हो रही है और वो देश को शर्मसार कर रहे हैं। वो इस स्तर पर उतारू हो गए हैं कि उन्हें सिर्फ विरोध करना है। ठीक है कि नेता प्रतिपक्ष को विरोध करना होता है। लेकिन एक काम तो ऐसा होना चाहिए कि किसी में तारीफ करें।

    मोदी का सबका साथ-सबका विकास या योगी का बुलडोजर
    सिर्फ एक मॉडल चुनना हो तो किसी को चुनेंगे। मोदी का सबका साथ सबका विकास या योगी जी का बुलडोजर मॉडल। जवाब में धामी ने कहा कि हर राज्य की अपनी समस्या और चुनौती होती हैं। सभी के मॉडल अपने राज्य के अनुरुप होते हैं। देश में और राज्य में इस वक्त एक ही मॉडल सबका साथ सबका विकास ही सबसे सर्वोत्तम है।

    विपक्ष में कौन सा नेता पसंद
    विपक्ष का एक नेता भाजपा में लाना हो और भाजपा का एक नेता विपक्ष में भेजना हो… जवाब में धामी ने कहा कि व्यक्ति हमेशा नहीं रहता है, संगठन रहेगा। जो भी हमारी विचारधारा को समर्थन करेगा, उसे शामिल करेंगे।

  • RJD की राह में ओवैसी की चुनौती, जानिए बिहार में तेजस्वी को 5 साल तक कैसे परेशान करेंगे

    RJD की राह में ओवैसी की चुनौती, जानिए बिहार में तेजस्वी को 5 साल तक कैसे परेशान करेंगे

    पटना 

    बिहार के विधानसभा चुनाव नतीजों ने राज्य के सारे सियासी गेम को ही बदलकर रख दिया, जिसका प्रभाव सिर्फ सत्ता बनाने तक नहीं बल्कि 2030 तक बिहार के राजनीतिक भविष्य की दशा और दिशा को तय कर दिया है. AIMIM प्रमख असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पांच सीटें जीतकर भले ही सरकार बनाने और बिगाड़ने वाले खेल के किंगमेकर न बन सके हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव के लिए तुरुप का इक्का हैं. 

    बिहार की पांच राज्यसभा चुनाव के लिए 16 मार्च को वोटिंग है, जिसे लेकर सियासी तानाबाना बुना जाने लगा है. विधायकों की संख्या के आधार पर एनडीए आसानी से चार राज्यसभा सीट जीत लेगा और पांचवी सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है, लेकिन उसके लिए सभी विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा. आरजेडी के राज्यसभा की राह में सबसे बड़ी बाधा ओवैसी की पार्टी बन गई है. 

    राज्यसभा की पांचवीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए आरजेडी मुस्लिम दांव खेलने की रणनीति बना रही थी ताकि ओवैसी का समर्थन हासिल किया जा सके. लेकिन ओवैसी की पार्टी ने अलग ही शर्त लगा दी है. AIMIM ने आरजेडी को चेतावनी दी है कि 2030 तक गठबंधन नहीं तो कोई राज्यसभा सांसद नहीं. ओवैसी के समर्थन लिए बिना राजद का राज्यसभा चुनाव जीतना नामुमकिन है? 

    ओवैसी की AIMIM कैसे बनी किंगमेकर 
    बिहार विधानसभा में 243 विधायक है, जिसमें से मौजूदा समय मे एनडीए के पास 202 विधायकों का आंकड़ा है जबकि महागठबंधन के पास मात्र 35 विधायक हैं. बिहार की राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों के वोट का समर्थन चाहिए, इस लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी. दो सीटें बीजेपी और दो सीटें जेडीयू के खाते में जाती दिख रही हैं. 

    एनडीए को 41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीत के लिए 164 विधायक ही लगेंगे. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और उसे पांचवी राज्यसभा को सीट जीतने के लिए उसे तीन विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत है.

    आरजेडी की राह में ओवैसी बने बाधा
    बिहार विधानसभा में एक सीट बसपा के पास, पांच सीटें AIMIM और एक सीट आईआईपी के पास है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी किंगमेकर के रोल में है, जिसको समर्थन करेगी, उसकी जीत तय है. एनडीए अगर ओवैसी की पार्टी का समर्थन हासिल कर लेती है तो पांचवीं राज्यसभा सीट भी जीत लेगी और अगर विपक्ष गठबंधन इंडिया ब्लॉक समर्थन हासिल करने में सफल रहती है तो जीत आसान हो सकती है. 

    महागठबंधन के 35 विधायक, ओवैसी के पांच विधायक और एक बसपा विधायक का समर्थन हासिल कर पांचवीं सीट पर जीत दर्ज कर सकती है. ऐसे में AIMIM ने राजद को चेतावनी दी कि अगर तेजस्वी यादव AIMIM के साथ समझौता नहीं करती है, तो पार्टी 2030 तक राज्यसभा में एक भी सांसद नहीं भेज पाएगी. AIMIM ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है. इस तरह से ओवैसी पांच साल तक आरजेडी को सियासी तौर पर राज्यसभा के लिए रुलाते रहेंगे? 

    AIMIM की शर्त को आरजेडी मानेगी? 
    बिहार की राजनीतिक गरमाहट तब और बढ़ गई जब AIMIM ने आरजेडी  सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि बिना ओवैसी के गठबंधन ने महागठबंधन एक भी राज्यसभा सीट नहीं जीत सकता है. AIMIM नेताओं का तर्क है कि सीमांचल में आरजेडी का कमजोर होता आधार और अल्पसंख्यक वोटों का खिसकना आने वाले सालों में विधानसभा में उसकी ताकत पर भारी असर डाल सकता है, जिससे राज्यसभा चुनाव का गणित प्रभावित होगा. 

    आरजेडी ने अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस टिप्पणी को AIMIM के दबाव की रणनीति के तौर पर देख रही है. इस बयान ने बिहार की अल्पसंख्यक राजनीति और आने वाले चुनावों से पहले गठबंधनों के भविष्य पर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि, AIMIM ने राज्यसभा   चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने ऐलान किया है कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और उन्होंने RJD समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों से सपोर्ट देने को कहा है. 

    अख्तरुल ईमान ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी बिना शर्त किसी को समर्थन देने के मूड में नहीं है. विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में अख्तरुल ईमान ने कहा कि उनकी पार्टी को केवल समर्थन देने वाली पार्टी के रूप में देखना गलत है. सवाल यह होना चाहिए कि AIMIM को कौन समर्थन देगा, क्योंकि अब तक राज्यसभा में उनकी पार्टी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उन दलों के साथ खड़ी होगी जो दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं. 

    आरजेडी क्या फॉर्मूला तलाशेगी? 
    बिहार की राज्यसभा चुनाव में AIMIM के सियासी दांव से आरजेडी कशमकश में फंस गई है. ओवैसी की पार्टी खुलकर बार्गेनिंग कर रही है. आरजेडी भले ही विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी हो, लेकिन अपने दम पर राज्यसभा सीट जीतना उसके लिए आसान नहीं है. आरजेडी के राज्यसभा में फिलहाल पांच साल है, जिसमें से दो सांसदों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है. 

    आरजेडी के एक राज्यसभा का कार्यकाल जुलाई 2028 को खत्म हो रहा है और बाकी दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल अप्रैल 2030 को खत्म होगा. इस तरह से आने वाले चार सालों में आरजेडी के सभी राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा. ऐसे में आरजेडी के सामने सियासी मजबूर है कि बिना ओवैसी के समर्थन लिए वो अगले पांच सालों तक एक भी राज्यसभा अपना नहीं बना पाएगी.  अब देखना है कि AIMIM के साथ किस तरह से सियासी बैलेंस बनाने का दांव चलती है?

  • उज्जैन में शंकराचार्य मठ की 3 मंजिला बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, सिंहस्थ 2028 से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

    उज्जैन में शंकराचार्य मठ की 3 मंजिला बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, सिंहस्थ 2028 से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

    उज्जैन 

    उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत नगर निगम ने बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। निगम अमले ने पुलिस बल के साथ नृसिंह घाट से लालपुल ब्रिज मार्ग तक 2016 के बाद बने पक्के निर्माणों को हटाया। प्रशासन ने बताया कि सिंहस्थ मेले के लिए साधु-संतों के डेरों, टेंट और श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए जगह खाली कराई जा रही है।
    आश्रम और धर्मशाला के निर्माण भी हटाए गए

    कार्रवाई के दौरान नर्मदा घाट क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुण्यानंद गिरी महाराज के आश्रम में भी कार्रवाई की गई। यहां 54 कमरों वाला तीन मंजिला भवन बनाया गया था, जिसमें एसी और नॉन-एसी कमरे थे। इस भवन में अवैध रूप से होटल संचालित किया जा रहा था।

    प्रशासन के अनुसार तीन मंजिला होटल करीब 10 हजार से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाया गया था। नगर निगम की टीम ने इसे ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की।

    इधर, नरसिंह घाट रोड पर करीब 60×80 फीट के माधवानंद आश्रम और लगभग 80×150 फीट क्षेत्र में बनी कलोता समाज की धर्मशाला को हटाया गया। इसके अलावा बागली समाज और अन्य स्थानों पर भी अतिक्रमण हटाया जा रहा है।

    सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं

    नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र में 2016 के बाद बने सभी स्थायी निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इस क्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है और सभी अवैध ढांचे हटाए जाएंगे।

    अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि जिला प्रशासन से मिली सूची में अवैध निर्माणों की जानकारी थी। सिंहस्थ मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन निर्माणों को हटाया जा रहा है। सिंहस्थ क्षेत्र करीब 180 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

  • ब्रेबोर्न स्टेडियम में सजेगा स्क्वैश का महासंग्राम, 18-22 मार्च तक इंडियन ओपन

    ब्रेबोर्न स्टेडियम में सजेगा स्क्वैश का महासंग्राम, 18-22 मार्च तक इंडियन ओपन

    मुंबई
    इंडियन ओपन 18 से 22 मार्च के बीच सीसीआई ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। यह एक पीएसए कॉपर इवेंट है, जिसकी टिकट अब लाइव हैं। प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) से मान्यता प्राप्त, यह टूर्नामेंट अपने 2025 एडिशन की सफलता को आगे बढ़ा रहा है, जिसे साल के टॉप 10 आइकॉनिक पीएसए इवेंट्स में से एक चुना गया था। 2026 एडिशन में डिफेंडिंग महिला चैंपियन अनाहत सिंह इवेंट में नजर आएंगी। लाइनअप में भारत के टॉप खिलाड़ी भी शामिल हैं, जैसे रमित टंडन, अभय सिंह, वीर चोटरानी, ​​वेलावन सेंथिलकुमार और जोशना चिनप्पा। इनके साथ याह्या एलनवासनी, हाना मोआताज और माजेन हेशाम जैसे इंटरनेशनल कंटेंडर भी शामिल हैं।
    इस प्रतियोगिता के साथ वर्ल्ड-क्लास स्क्वैश का एक बहुत प्रतिस्पर्धी हफ्ता शुरू होगा। टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं दोनों के इवेंट्स के लिए 44,500 यूएस डॉलर प्राइज मनी होगी। स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल साइरस पोंचा ने कहा, "इंडियन ओपन तेजी से पीएसए कैलेंडर का एक अहम पड़ाव बन गया है, जिससे भारतीय खिलाड़ियों को वर्ल्ड-क्लास कॉम्पिटिशन का अनुभव मिलता है और साथ ही स्क्वैश की प्रोफाइल देश भर में बढ़ती है। 2026 के लिए, हम टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अहमियत को बढ़ाते रहने और फैंस को हाई-लेवल मैच लाइव देखने के लिए उत्साहित हैं, जिससे भारत में इस खेल के लंबे समय के विकास में मदद मिलेगी।"
    इस प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल ग्लास कोर्ट पर होंगे, जिससे एक एरीना-स्टाइल स्क्वैश वेन्यू बनेगा जो एनर्जेटिक, क्लोज-अप व्यूइंग के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है। एक बड़े स्टेज पर समान प्राइज मनी और टॉप इंडियन और इंटरनेशनल प्लेयर्स के लाइनअप के साथ, 2026 इंडियन ओपन ग्लोबल स्क्वैश में भारत की जगह को मजबूत करेगा।

  • Apple ने बेंगलुरु में किराए पर लिया आलीशान ऑफिस, हर महीने ₹2.84 करोड़ खर्च

    Apple ने बेंगलुरु में किराए पर लिया आलीशान ऑफिस, हर महीने ₹2.84 करोड़ खर्च

    बेंगलुरु 

    Apple बेंगलुरु में 10 साल के लिए ऑफिस स्पेस लीज पर लेकर भारत में अपना विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिग्गज टेक कंपनी ने 'एम्बेसी जेनिथ' (Embassy Zenith) नाम की कमर्शियल ऑफिस टावर में 1.21 लाख वर्ग फुट का वर्कस्पेस हासिल किया है, जिसका मासिक किराया 2.84 करोड़ रुपये है. इस विस्तार के बाद, एप्पल अब इस पूरी इमारत में कुल 3.89 लाख वर्ग फुट क्षेत्र का उपयोग कर रहा है.

    रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म 'प्रॉपस्टैक' (Propstack) द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक, नया लीज समझौता सटीक रूप से 1,21,203 वर्ग फुट के चार्जेबल एरिया के लिए है. एप्पल ने पूरे 10 साल के लिए  ऑफिस लीज पर लिया है. इस जगह का कुल किराया लगभग 1,333 करोड़ रुपये होगा. यह ऑफिस स्पेस इमारत की ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक फैला हुआ है.

    14.24 करोड़ की सिक्योरिटी जमा की

    यह प्रॉपर्टी मैक चार्ल्स (इंडिया) द्वारा लीज पर दी गई है और इस लीज की शुरुआत 25 सितंबर 2025 से हो चुकी है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल पहले ही सिक्योरिटी डिपोजिट के रूप में 14.24 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है. 

    यह भी रिपोर्ट किया गया है कि 3 अप्रैल 2026 से किराए में हर साल 4.5% की वृद्धि होगी. समझौते में यह भी उल्लेख किया गया है कि एप्पल 2 अप्रैल 2030 से पहले इस लीज को समाप्त नहीं कर सकता है. इसके अलावा, एप्पल 123 पार्किंग स्लॉट के लिए अलग से मासिक शुल्क का भुगतान करेगा, जिसकी कीमत 11.07 लाख रुपये तय की गई है.

    हालांकि रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स ने विस्तार के इस विवरण का खुलासा किया है, लेकिन एप्पल ने इस नए जोड़े गए स्पेस के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. फिर भी, कंपनी धीरे-धीरे अपने ऑफिस और रिटेल स्टोर नेटवर्क को बढ़ाकर भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रही है.

  • यूपी से आ रही शराब तस्करी का पर्दाफाश, कैमूर में दो धंधेबाज गिरफ्तार

    यूपी से आ रही शराब तस्करी का पर्दाफाश, कैमूर में दो धंधेबाज गिरफ्तार

    चैनपुर

    थाना क्षेत्र के जगदंहवां डैम वन विभाग चेकपोस्ट के समीप पुलिस ने छापेमारी कर दो तस्करों को देसी और अंग्रेजी शराब के साथ गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो तस्कर मौके पर से भागने में कामयाब हो गए। पुलिस के द्वारा शराब बरामद करते हुए तस्करी में उपयोग की जाने वाली बाइक को भी जब्त कर लिया गया। 

    गिरफ्तार तस्करों में चंद्रशेखर राय पिता फेंकू राय ग्राम भैसहट एवं आकाश राय पिता सम्बल राय ग्राम सलेमपुर शामिल है। जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली की उत्तर प्रदेश से शराब लेकर दो बाइक पर चार लोग करकटगढ़ के रास्ते जा रहे हैं। 

    सूचना के सत्यापन के लिए जगदंहवां डैम वन विभाग चेकपोस्ट के समीप पुलिस के द्वारा घेराबंदी की गई तो दो बाइक पर सवार होकर कुल चार लोग आते हुए दिखे। पुलिस को देखकर चालक बाइक मोड कर भागने का प्रयास करने लगे। जिसे पुलिस बल के सहयोग से घेर लिया गया। फिर भी दोनों बाइक पर सवार पीछे बैठे दोनों लोग मौके पर से पहाड़ी क्षेत्र का लाभ उठाकर भाग निकले। 
    मौके से दो बाइक जब्त

    जांच के क्रम में ब्लू लाइम देसी शराब के टेट्रा पैक प्रत्येक 200 एमएल कुल 270 पीस एवं 8 पीएम अंग्रेजी शराब के टेट्रा पैक प्रत्येक 180 एमएल कुल 192 बोतल बरामद किए गए। मौके पर से दो बाइक भी पुलिस के द्वारा जब्त किया गया। 

    चैनपुर थानाध्यक्ष विजय प्रसाद ने बताया कि दो तस्कर भी गिरफ्तार हुए। जबकि दो लोग भागने में कामयाब हो गए। जिनकी पहचान कर ली गई है। गिरफ्तार दोनों तस्करों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जबकि फरार तस्करों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

     

  • 2006 से 2026 तक: पीएम मोदी की इजरायल यात्रा क्यों रही हर बार ऐतिहासिक

    2006 से 2026 तक: पीएम मोदी की इजरायल यात्रा क्यों रही हर बार ऐतिहासिक

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक होगी। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो इजरायली संसद 'नेसेट' को संबोधित करेंगे। इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 'मोदी आर्काइव' नामक अकाउंट ने उनकी ऐतिहासिक इजरायली यात्राओं और उससे जुड़ी तस्वीरों को शेयर किया है। 'मोदी आर्काइव' के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2006 में पहला इजरायल दौरा किया था। वे इजरायल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी 'एग्रीटेक-2006' में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ गए थे, जिसमें भारत के कृषि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-इजरायल बिजनेस फोरम में 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (एक बूंद अधिक फसल) स्लोगन के साथ गुजरात का एग्रीकल्चरल विजन पेश किया। शायद यह पहली बार था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को कहा, जो आगे चलकर 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' का आधिकारिक आदर्श वाक्य बन गया। गुजरात डेलीगेशन की इंटरनल रिपोर्ट में बताया गया कि उनके प्रेजेंटेशन को 'सबसे ज्यादा तालियां और तारीफ' मिली।
    11 साल बाद 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। मोदी आर्काइव में बताया गया है, "2006 में जो एग्रीकल्चर थीम चली थी, वह इस बार भी जारी रही।"
    इसमें कहा गया है कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने तेल अवीव स्थित डेंजीगर फ्लावर फार्म (पुष्प उद्यान) का दौरा किया। यहां इजरायल की लीडिंग फ्लावर जेनेटिक्स कंपनी ने एक नया सफेद गुलदाउदी बनाया था और उसका नाम 'मोदी' रखा। फूलों की खेती इजरायल के सबसे एडवांस्ड एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट सेक्टर में से एक है। फ्लावर फार्म का दौरा इस बात का संकेत था कि इजरायली एग्रीकल्चरल इनोवेशन कहां तक पहुंच गया है।
    इसमें आगे कहा गया है कि यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र में साइन किया गया 3-साल का वर्क प्रोग्राम उस पहल का औपचारिक संस्थानीकरण था, जिसकी शुरुआत बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से एग्रीटेक-2006 में की थी। 'मोदी आर्काइव' में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जिस रिलेशनशिप पर काम किया था, वह प्रधानमंत्री के तौर पर 'सरकार-से-सरकार' की रूपरेखा बन गई। बाद में तेल अवीव में भारतीय प्रवासियों को अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में इजरायल का सहयोग भारत को दूसरी ग्रीन रेवोल्यूशन में मदद कर सकता है।
    'मोदी आर्काइव' में कहा गया कि 2006 और 2017 की यात्राओं को जोड़ने वाली कड़ी कृषि और जल संसाधन प्रबंधन है। दोनों देश अलग-अलग दृष्टिकोणों से समान समस्याओं पर काम कर रहे थे। भारत के पास व्यापक पैमाना, कृषि भूमि और आवश्यकता थी। वहीं, इजरायल ने सीमाओं को तकनीक में बदलते हुए ड्रिप सिंचाई, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग और डीसैलिनेशन जैसे सिस्टम विकसित किए। मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 2006 में ही पहचान लिया था कि ये वही तकनीकें हैं जिनकी गुजरात और भारत को जरूरत है और वे प्रधानमंत्री के रूप में इसे राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनाने के लिए वापस आए।
    इसमें कहा गया कि जब वे 2017 में पहुंचे तो कृषि सहयोग का एजेंडा राज्य यात्रा की तैयारी कर रहे अधिकारियों की ओर से अचानक तैयार नहीं किया गया था। इसकी रूपरेखा मई 2006 की एक दोपहर से ही बननी शुरू हो गई थी, जब मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 'एग्रीटेक-2006' में एक हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रेजेंटेशन दी थी और इस विश्वास के साथ लौटे थे कि भारत और इजरायल मिलकर क्या बना सकते हैं।
    9 साल के बाद फिर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए हैं। इस बार भी भारत-इजरायल का एजेंडा कृषि, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

  • कबीरधाम की महिलाओं की पहल: हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    कबीरधाम की महिलाओं की पहल: हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    कबीरधाम

    छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम की महिला स्व सहायता समूह महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दीदियों ने रंगोत्सव पर्व होली के लिए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। महिला समूह ने हर्बल गुलाल के व्यवसाय से जुड़कर आजीविका के नए रास्ते खोले हैं। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके आय का अच्छा स्रोत है। लाल, गुलाबी, पीले सहित अन्य रंगों और प्रकृति खुशबू से भरपूर हर्बल गुलाल बाजार में आने के लिए उपलब्ध है।

    इस संबंध में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले की विभिन्न महिला समूह द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट, सभी जनपद पंचायत कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर उनके द्वारा स्टॉल लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री की जाती है। समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों की तुलना में सस्ता होता है।

    उन्होंने बताया कि हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बहुत आकर्षक है और यह उपहार देने के भी बहुत अच्छा है। हर्बल गुलाल अनेक रंगों के साथ अलग-अलग मात्रा में पैकेजिंग सहित उपलब्ध है। गत वर्ष भी हमने देखा है कि समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाब को क्षेत्रवासियों ने बहुत पसंद किया है और इस व्यवसाय से जुड़कर हमारी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है। हर्बल गुलाल निर्माण के संबंध में चर्चा करते हुए सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बहुत से समूह इसका निर्माण करते हैं। प्रत्येक समूह को इस व्यवसाय द्वारा 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है। हर्बल गुलाल की अच्छी गुणवत्ता और आकर्षक पैकिंग सभी को पसंद आती है। योजना से जुड़े मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूह को मौसमी व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण करने प्रोत्साहित किया जाता है। इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता के लिए समूह को सहायता प्रदान की जाती है।

  • आदिवी शेष ने दो अलग-अलग किरदारों को साथ निभाने पर की बात

    आदिवी शेष ने दो अलग-अलग किरदारों को साथ निभाने पर की बात

    मुंबई,

    अभिनेता आदिवी शेष इस समय दो बिल्कुल अलग दुनिया वाली फिल्मों ‘डकैत और जी 2’ में काम कर रहे हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के ज़रिए आदिवी शेष अपने अभिनय की अलग-अलग झलक दिखा रहे हैं।डकैत में वह एक देसी, ग्रामीण और भावनाओं से भरे किरदार में नज़र आएंगे। यह फिल्म कच्ची, धूल-भरी और कठोर दुनिया को दिखाती है, जहां उनका किरदार हालात और जज़्बात के बीच जीने की लड़ाई लड़ता है। यह कहानी भावनाओं और इंसानी संघर्ष पर आधारित है।वहीं जी 2 में उनका अंदाज़ बिल्कुल अलग है। इसमें वह एक स्मार्ट, स्टाइलिश और ग्लोबल इंटेलिजेंस स्पाई के रूप में नज़र आएंगे। यह किरदार दिमाग, रणनीति और बड़े स्तर की कहानी पर आधारित है।

    आदिवी शेष ने इन दोनों अलग किरदारों को एक साथ निभाने पर कहा, “मुझे सबसे ज़्यादा जो चीज़ उत्साहित करती है, वह है इन दोनों दुनियाओं का अलग होना। डकैत में सब कुछ भावनात्मक, सहज और पूरी तरह देसी है।यह जीने की जंग, दर्द और इंसानी फैसलों की कहानी है। वहीं जी2 में तरीका बिल्कुल अलग है। यह ज़्यादा रणनीतिक, नियंत्रित और इंटेलिजेंस पर आधारित है, जो एक स्टाइलिश और ग्लोबल दुनिया में सेट है। इन दोनों मानसिकताओं के बीच बदलाव करना रचनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यही मेरे लिए इस दौर को खास और संतोषजनक बनाता है।”
    एक तरफ मिट्टी और संघर्ष से जुड़ी कहानी, तो दूसरी तरफ इंटेलिजेंस और रणनीति की तेज दुनिया। आदिवी शेष एक बार फिर साबित कर रहे हैं कि वह अपनी पीढ़ी के सबसे बहुमुखी और दमदार कलाकारों में से एक हैं।