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  • आरडीएसएस अंतर्गत मालवा निमाड़ का 87वां ग्रिड बुरहानपुर शहर में ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    आरडीएसएस अंतर्गत मालवा निमाड़ का 87वां ग्रिड बुरहानपुर शहर में ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल 

    शासन की महत्वपूर्ण रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्य़ूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) में मालवा निमाड़ निमाड़ में नए 33/11 केवी ग्रिड श्रृंखलाबद्ध रूप से बनाए जा रहे हैं। आरडीएसएस अंतर्गत मालवा निमाड़ का 87वां सब स्टेशन बुरहानपुर शहर के मंडी क्षेत्र में ऊर्जीकृत किया गया। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इस नये ग्रिड से बुरहानपुर मध्य शहर के हजारों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी।

    मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक  अनूप कुमार सिंह ने बताया कि निमाड़ का 26वां और पश्चिम क्षेत्र कंपनी का यह 87वां ग्रिड बुरहानपुर के मध्य शहरी क्षेत्र में 2.18 करोड़ रूपए से निर्मित हुआ है। इसकी क्षमता 5 एमवीए है। इससे मध्य शहरी क्षेत्र को ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी। निमाड़ में सबसे ज्यादा ग्रिड बुरहानपुर, खंडवा में 8, 8, खरगोन में 6, बड़वानी में 4 तैयार किए गए हैं। वहीं इंदौर शहर व ग्रामीण वृत्त में कुल 13, उज्जैन जिले में 12 ग्रिड तैयार किए गए हैं। शेष ग्रिड अन्य जिलों में तैयार किए गए हैं। कंपनी क्षेत्र में अब तक आरडीएसएस के 87 ग्रिड ऊर्जीकृत होकर विद्युत प्रदाय कर रहे हैं। आरडीएसएस के इन ऊर्जीकृत ग्रिडों से पश्चिम मप्र की वितरण क्षमता में 435 एमवीए की और वृद्धि हो चुकी है। कंपनी क्षेत्र में कुछ जिलों में ग्रिडों के कार्य अभी भी प्रगतिरत हैं।

     

  • 1.10 लाख करोड़ का बजट, महिला-बच्चों के पोषण पर बड़ा फोकस — कैबिनेट के अहम फैसले

    1.10 लाख करोड़ का बजट, महिला-बच्चों के पोषण पर बड़ा फोकस — कैबिनेट के अहम फैसले

    देहरादून 

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश सरकार के बजट का आकार 1.10 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार वार्षिक बजट में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है। कैबिनेट में चर्चा के बाद बजट के आकार में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की मंजूरी दी गई। इसके अलावा गर्भवती, धात्री महिलाओं व आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के बच्चों की सेहत में सुधार के लिए पोषाहार में नई सामग्री शामिल करने का निर्णय लिया गया। 

    सचिवालय में बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 28 प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। प्रदेश में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने और बागवानों को उन्नत प्रजाति के पौध देने के लिए सेब नर्सरी विकास योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना में 10 एकड़ तक नर्सरी लगाने पर 50 प्रतिशत और 10 एकड़ से ऊपर पर 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा शहद उत्पादन के लिए मौन पालन नीति को मंजूरी दी गई। इस नीति के किसानों को मौनपालन बॉक्स पर 80 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।

    हल्द्वानी में स्थापित होगी जीएसटी अपीलीय अधिकरण की राज्य पीठ

    जीएसटी में टैक्स वादों का शीघ्र निपटारा करने के लिए देहरादून में जीएसटी अपीलीय अधिकरण संचालित है। इसी तर्ज पर हल्द्वानी में एक अतिरिक्त राज्य पीठ स्थापित होगी। इसके अलावा कैबिनेट ने प्रदेश में दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम के लंबित अपराधों के शीघ्र निपटारे और सुनवाई के लिए देहरादून जिले के विकासनगर, ऊधमसिंहनगर के काशीपुर और नैनीताल जिला मुख्यालय में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना व पद सृजित करने की मंजूरी दी है।

    शहरों को मिलेगा भरपूर पानी

    राज्य में नवीन पेयजल योजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन, निर्माण, संचालन, रखरखाव, अनुश्रवण तथा पूर्व निर्मित योजनाओं की संचालन दक्षता में वृद्धि के लिए वाह्य सहायतित परियोजना के तहत विश्व बैंक की सहायता से 1600 करोड़ की लागत से 10 शहरों में भरपूर पानी मिलेगा। इस योजना राज्य सरकार का अंशदान 320 करोड़ रहेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

    ये महत्वपूर्ण फैसले

    • – उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) के ढांचे में 14 नए पद सृजित करने को मंजूरी।
    • – राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में संचालित मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को शामिल करने का निर्णय।
    • – उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना संचालित होगी। योजना में बीए, बीएससी, बीकॉम के लिए 100 रुपये, बीएड व लॉ के लिए 250, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रीकल्चर छात्रों के लिए 500 रुपये शुल्क देय होगा।
    • – उत्तराखंड वन विभाग सर्वेक्षक सेवा नियमावली को मंजूरी।
    • – शहरी विकास विभाग के तहत 11 नगर निगमों में पर्यावरण अभियंताओं को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा।
    • – विद्यालयी शिक्षा विभाग में तदर्थ, अनुबंध,संविदा, आउटसोर्स के आधार पर कार्यरत चार विशेष शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा के पदों के सापेक्ष नियमित नियुक्ति देने का निर्णय।
    • – उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का चौबीसवां वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा सदन के पटल पर रखने की मंजूरी।
    • – उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक विधानसभा सदन में रखने की मंजूरी।
    • – सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को औद्योगिक विकास से स्थानांरित कर वित्त विभाग के तहत गठित किया जाएगा।
    • – उत्तराखंड राज्य में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति को मंजूरी।
    • – उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह क व ख कार्मिकों की सेवा विनियमावली को मंजूरी।
    • – उत्तराखंड चकबंदी अधिष्ठान में बंदोबस्त अधिकारी के निःसंवर्गीय पद के सृजित करने का निर्णय।
    • – उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक, 2026 को पटल पर रखने की मंजूरी।
    • – समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा सत्र में पटल रखा जाएगा।
    • – उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट, पल्वराइजर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, रेडिमिक्स प्लांट अनुज्ञा (तृतीय संशोधन) नीति 2024 में हॉट मिक्स प्लांट लगाने के लिए दूरी के मानकों में संशोधन को मंजूरी।
    • – उत्तराखंड राज्य की वित्तीय स्थिति के दृष्टिगत किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत राज्य स्तरीय चयन समिति के अध्यक्ष को पांच हजार रुपये प्रति बैठक एवं गैर सरकारी संगठनों से नामित दो सदस्यों को तीन हजार रुपये प्रति बैठक मानदेय दिया जाएगा।
    • – कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग में लिपिक व मिनिस्ट्रीयल संवर्ग ढांचे के पुर्नगठन को मंजूरी।
    • – उच्च न्यायालय उत्तराखंड में एक व जिला न्यायालयों के लिए 13 न्यायालय प्रबंधकों के नए पद सृजित किए जाएंगे।
    • – विश्व बैंक के सहयोग से सेवा वितरण में सुधार के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिए स्टीयरिंग कमेटी व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन व पदों के सृजन को मंजूरी।
    • – उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक- 2026 विधानसभा सदन में पटल रखने को मंजूरी। 
  • अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम को बढ़ावा देने 5 शासकीय, 3 निजी विश्वविद्यालयों एवं 85 महाविद्यालयों ने बोट के साथ किया एमओयू

    अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम को बढ़ावा देने 5 शासकीय, 3 निजी विश्वविद्यालयों एवं 85 महाविद्यालयों ने बोट के साथ किया एमओयू

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग आधारित व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त हो और रोजगारपरक कौशल में वृद्धि हो, इस उद्देश्य से बुधवार को अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) को बढ़ावा देने के लिए अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा की उपस्थिति में 85 महाविद्यालयों, 5 शासकीय एवं 3 निजी विश्वविद्यालयों ने क्रिस्प, नई दिल्ली (CRISP) के सहयोग से बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT-पश्चिमी क्षेत्र, मुम्‍बई) के साथ एमओयू किया।

    महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT- पश्चिमी क्षेत्र) के पदाधिकारियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। राज्य स्तरीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का आयोजन सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में भोपाल में हुआ।

    कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। विभाग का प्रयास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, शिक्षा को रोजगारमूलक बनाया जाए तथा विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ, उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

     राजन ने कहा कि वर्तमान में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से AI, FinTech with AI एवं एईडीपी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आज की आवश्यकता के अनुरूप विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग, स्वयं पोर्टल सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए निरंतर आगे बढ़ रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।  राजन ने कहा कि एईडीपी पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप की सुविधा मिलेगी। साथ ही अप्रेंटिसशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एईडीपी कोर्स के क्रियान्वयन में निजी शैक्षणिक संस्थान भी आगे आ रहे हैं।

    विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में विभाग लगातार कर रहा प्रयास

    आयुक्त,उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में रोजगार निमित्त कौशल बढ़ेगा और उन्हें करियर के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

    सेवानिवृत्त आईएएस एवं संस्थापक सदस्य, सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (Centre for Research in Schemes and Policies)  राधेश्याम जुलानिया ने क्रिस्प (CRISP) द्वारा किए जा रहे कार्यों के संबंध में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को विस्तार से जानकारी दी।

    एमओयू का उद्देश्य

    एमओयू कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप से जोड़ना है। इसके अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में AEDP लागू करने वाले संस्थानों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को उद्योग आधारित व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनका रोजगार निमित्त कौशल निखरेगा। साथ ही अकादमिक शिक्षा को कौशल एवं उद्योग आवश्यकताओं से जोड़कर युवाओं को भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए सक्षम और तैयार किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को BOAT के अधिकारियों द्वारा नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया।

    समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम में डॉ. पी.एन. जुमले (निदेशक-प्रशिक्षण, Board of Apprenticeship Training (BOAT) – Western Region) सहित विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव तथा महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

    उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में 6 सेक्टर स्किल काउंसिल से जुड़े 7 पाठ्यक्रमों का संचालन प्रदेश के 36 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में किया गया। शैक्षणिक वर्ष 2025–26 में कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 7 सेक्टर स्किल काउंसिल से संबद्ध 10 पाठ्यक्रमों का प्रदेश के 85 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में संचालन किया जा रहा है। आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026–27 में इसका और अधिक विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।

     

  • रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 2 रस्मों से करेंगे शादी, दिखेगी सांस्कृतिक विविधता की झलक

    रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 2 रस्मों से करेंगे शादी, दिखेगी सांस्कृतिक विविधता की झलक

    मुंबई,

    अभिनेत्री रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की शादी का जश्न शुरू हो चुका है, जिसकी झलकियां सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रही हैं। इस खास मौके को कपल ने बेहद निजी रखा है, जिसमें केवल चुनिंदा मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया है। दोनों की शादी दो अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगी, जिससे उनकी सांस्कृतिक विविधता भी झलकेगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक 26 फरवरी की सुबह रश्मिका और विजय तेलुगु हिंदू परंपरा के अनुसार विवाह बंधन में बंधेंगे। इसके बाद शाम को कोडवा समुदाय की परंपराओं के अनुसार एक और समारोह आयोजित किया जाएगा, जो रश्मिका की जड़ों को समर्पित होगा। शादी से पहले एक खास रस्म में विजय की मां माधवी देवरकोंडा ने अपनी होने वाली बहू को परिवार की परंपरा के तहत खानदानी चूड़ियां भेंट कीं। गौरतलब है कि कपल ने 22 फरवरी को सोशल मीडिया के जरिए अपने रिश्ते को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किया था।

    शादी समारोह में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कुछ करीबी चेहरे शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्देशक थारुन भास्कर, अभिनेत्री ईशा रेब्बा और स्टाइलिस्ट श्राव्या वर्मा समारोह का हिस्सा बन चुके हैं। इसके अलावा, फिल्म 'द गर्लफ्रेंड' से जुड़े राहुल रविंद्रन और आशिका रंगनाथ भी 'विरोश' की इस खास शादी में शामिल हुए हैं।

     

  • Piyush Goyal का हमला: परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा दे रहे Rahul Gandhi

    Piyush Goyal का हमला: परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा दे रहे Rahul Gandhi

    नई दिल्ली
    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस की 'कॉम्प्रोमाइज' राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "राहुल गांधी दुनियाभर में भारत को नीचा दिखाने के लिए एआई समिट में बिना शर्ट के लोगों को भेजते हैं, तो यह भारत की छवि और हितों से 'कॉम्प्रोमाइज' करने की उनकी पारिवारिक विरासत को ही आगे बढ़ाता है।"

    उन्होंने जवाहर लाल नेहरू पर आरोप लगाए कि उनके कार्यकाल में 1950 के दशक में भारत ने चीन को नाराज न करने के लिए स्थायी सीट ठुकराई। 1954 में भारत ने औपचारिक रूप से तिब्बत को चीन का हिस्सा स्वीकार किया। इसके अलावा, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान खुफिया चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, जिससे हार हुई। इस बारे में रिपोर्ट अभी भी गोपनीय है।

    पीयूष गोयल ने राजीव गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, बोफोर्स डील के समय रक्षा अनुबंध में कथित रूप से कमीशनखोरी और दस्तावेजित लीपापोती शामिल थी। यूनियन कार्बाइड (1984) के दौरान आरोपी वॉरेन एंडरसन को भारत छोड़ने की अनुमति दी गई। वहीं, विदेशी बिचौलिए का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि रक्षा निर्णयों पर करीबी व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से प्रभाव डाला गया।

    उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान विदेशी फंडिंग, कच्चातीवू और सिक्योरिटी के फैसले में 'कॉम्प्रोमाइज' के आरोप लगाए। सोनिया गांधी को लेकर उन्होंने दावा किया कि शैडो पावर यानी यूपीए के दौरान असली अथॉरिटी प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर काम करती थी। नेशनल हेराल्ड के मामले में पार्टी फंड का इस्तेमाल परिवार के कंट्रोल वाली एंटिटी को एसेट्स ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। इसके अलावा, चीन और सोरोस नेटवर्क सहित विदेशी डोनर्स से जुड़े फाउंडेशन ने गंभीर चिंताएं पैदा कीं।

    एक अन्य पोस्ट में पीयूष गोयल ने लिखा, "राहुल गांधी के भ्रामक बयानों पर भारी कांग्रेस का इतिहास। वो जितना भूलने की कोशिश करें, लेकिन भारत की जनता पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी की ओर से राष्ट्रहित के साथ बार-बार किए गए समझौते को भूल नहीं सकती।"

  • NCERT की किताब में ‘40% नेता अपराधी’ दावा, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अध्याय पर वकीलों का विरोध

    NCERT की किताब में ‘40% नेता अपराधी’ दावा, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अध्याय पर वकीलों का विरोध

    नई दिल्ली
    एनसीईआरटी की आठवीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर विवाद छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में काफी नाराजगी दिखाई, जिसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा है कि यह किताब से यह पोर्शन हटा दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी काफी नाराज हैं। सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने नेताओं पर हमला बोल दिया है। उन्होंने दावा किया कि 40 फीसदी नेता क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं, तो ऐसे में इस बारे में सिखाना चाहिए।

    न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा, "ठीक है, जहां तक आर्टिकल की बात है, मुझे लगता है कि यह चौंकाने वाला है कि एनसीईआरटी ने टेक्स्टबुक में ऐसा कुछ शामिल किया है। टेक्स्टबुक बच्चों को हमारे समाज के बारे में सिखाने के लिए होती हैं। अगर वे सच में सिखाना चाहते हैं, तो उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि लगभग 40 फीसदी नेताओं का क्रिमिनल बैकग्राउंड है। यह कुछ ऐसा है जिसकी हमने आजादी मिलने पर बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी, कि जो लोग इस देश पर राज करेंगे, वे कानून तोड़ने वाले हो सकते हैं, जो आखिर में कानून बनाने वाले बनेंगे। लेकिन ज्यूडिशियरी में करप्शन के बारे में बात करना, मुझे लगता है, सच में इंस्टीट्यूशन को कमजोर करता है।''

    'जिम्मेदार पर कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए'
    उन्होंने आगे कहा कि करप्शन हर जगह है, लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि ज्यूडिशियरी में करप्शन एग्जीक्यूटिव या पॉलिटिक्स से कहीं, कहीं कम है। इसलिए मुझे यह बिल्कुल साफ नहीं है कि इस चैप्टर को शामिल करने का मकसद क्या था। लेकिन मुझे यकीन है कि जस्टिस सूर्यकांत को एनसीईआरटी के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने इसे शामिल करने का फैसला किया, और उन्हें कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए, जिसमें पूछा जाए कि उन्हें क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए जिम्मेदार क्यों न ठहराया जाए।"

    'बच्चों को ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा'
    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

    'संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा'
    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' उन्होंने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है… यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।'' न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा, ''कृपया कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें। अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं। सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश परेशान हैं। मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा। मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

     

  • जय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर ने पेश की तकनीकी दक्षता की ऐतिहासिक मिसाल

    जय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर ने पेश की तकनीकी दक्षता की ऐतिहासिक मिसाल

    भोपाल 

    विशेषज्ञ एजेंसि‍यों की सलाह अनुसार मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की जिस यूनिट को वार्ष‍िक रखरखाव के दौरान रोटर में क्रेक टरबाइन के लो-प्रेशर रोटर ग्रूव्स में गंभीर दरार होने और नए रोटर लगाने के लिए लगभग 48 माह लगते, उसी यूनिट को पावर जनरेटिंग कंपनी के इंजीनियरों ने इन-हाउस मरम्मत करके 100 दिन तक लगातार संचालित कर दिया। यहां जिस यूनिट का जिक्र किया जा रहा है वह संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता यूनिट नंबर 5 है। इस यूनिट ने गत दिवस लगातार 100 दिन संचालित होने का रिकार्ड बनाया। यदि यह यूनिट विशेषज्ञ एजेंसियों की सलाह के आधार नए रोटर लगने तक लगभग चार वर्ष के लिए बंद रहती तो विद्युत उत्पादन का नुकसान होता। इसके अतिरिक्त नए रोटर की खरीद पर अतिरिक्त व्यय भी कंपनी को वहन करना पड़ता।

    विशेषज्ञ एजेंसि‍यों ने कहा रोटर को बदलना ही एकमात्र विकल्प

    संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 को गत वर्ष 10 जुलाई को केपिटल ओवरहालिंग के लिए बंद किया गया था। रखरखाव के दौरान जानकारी मिली कि टरबाइन के लो-प्रेशर (LP) रोटर ग्रूव्स में गंभीर दरारें हैं। विस्तृत तकनीकी परीक्षण एवं मूल्यांकन के उपरांत एजेंसियों के विशेषज्ञों ने रोटर को भविष्य की सेवा के लिए अनुपयुक्त बताते हुए नया रोटर लगाने की अनुशंसा की। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने खराब एलपी रोटर को इन-हाउस मरम्मत करने का साहसिक निर्णय लिया रोटर की मरम्मत करके यूनिट को पुन: विद्युत उत्पादन करने के लिए सक्षम बना दिया।

    देश में पहली बार यथा स्थान पर सुधारा गया रोटर

    देश में पहली बार किसी LP टरबाइन रोटर की यथा स्थान पर इस तरह की मरम्मत की गई। इस जटिल व मुश्क‍िल मरम्मत का सफल होना और उसके बाद 100 दिनों से यूनिट का एक सा संचालन इस कामयाबी को खास और शानदार बनाता है। उल्लेखनीय है कि यूनिट ने इसके बाद लगभग 1592 मिलियन यूनिट (MU) विद्युत उत्पादन करते हुए लगभग 97.97% प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ), 98% प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) और 5.48% ऑक्जलरी खपत का मापदंड अर्जित किया।

    राष्ट्रीय पटल पर कंपनी मनवा रही अपना लोहा

    मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक  मनजीत सिंह ने कहा कंपनी के अभियंता न सिर्फ विद्युत गृहों के सुचारु संचालन से राष्ट्रीय पटल पर कंपनी का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि अपने तकनीकी कौशल और काबिलि‍यत से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, जोखिम प्रबंधन और संसाधन अनुकूलन का टीम ने उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं व कार्मिकों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीम भावना का प्रमाण है। 

  • मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल: पर्यटन स्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर तीन दिवसीय कार्यशाला

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल: पर्यटन स्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर तीन दिवसीय कार्यशाला

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में “महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना” के अंतर्गत पर्यटन स्थलों पर महिला सुरक्षा: पुलिस की भूमिका एवं रणनीति विषय पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन 26 से 28 फरवरी तक होटल पलाश रेसिडेंसी, भोपाल में किया जा रहा है।

    कार्यशाला का उद्देश्य पर्यटन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पर्यटन स्थलों पर महिला पर्यटकों की सुरक्षा, सहजता और विश्वास को मजबूत करना है। कार्यक्रम में गृह, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, पर्यटन बोर्ड, पर्यटन निगम और विभिन्न विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. ने बताया कि प्रदेश में पर्यटन स्थलों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए पर्यटन बोर्ड द्वारा लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं। इसी क्रम में महिला पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पर्यटन स्थलों पर अधोसंरचना, पुलिस समन्वय, सामुदायिक सहभागिता और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए इस तरह की कार्यशालाएं भविष्य में भी की जाएंगी। उन्होंने कहा इससे मध्यप्रदेश को सुरक्षित पर्यटन गंतव्य के रूप में पहचान को और मजबूती मिलेगी।

    कार्यशाला में 26 फरवरी को पर्यटन विभाग द्वारा समुदाय आधारित पर्यटन और महिला सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति दी जाएगी, वहीं पुलिस विभाग महिला सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और रणनीतियों पर चर्चा करेगा। समूह कार्यों के माध्यम से धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, पुरातात्विक स्थलों, वन क्षेत्रों, विशेष आयोजनों, साहसिक पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और साइबर धोखाधड़ी जैसे विषयों पर मंथन होगा।

    कार्यशाला में 27 फरवरी को समूह कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर एक्शन प्लान और पॉलिसी एडवोकेसी पर चर्चा की जाएगी। साथ ही खारी, भोजपुर, भीमबेठिका, वन विहार और भोपाल के आसपास के पर्यटन स्थलों का क्षेत्र भ्रमण कर जमीनी स्तर पर सुरक्षा और सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। कार्यशाला में 28 फरवरी को कई राज्यों और देशों के केस स्टडी, विशेषज्ञ व्याख्यान, यूएन-विमेन की प्रस्तुति, जेंडर संवेदनशीलता, सामुदायिक पुलिसिंग और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत संवाद होगा। कार्यशाला का समापन स्मृति चिह्न वितरण के साथ किया जाएगा।

     

  • बीहर रिवर फ्रंट शेष कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

    बीहर रिवर फ्रंट शेष कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में पुनर्घनत्वीकरण योजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा सौंदर्यीकरण कार्यों पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विशेष रूप से बीहर नदी के रिवर फ्रंट विकास कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि नदी के पूर्वी तट का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि पश्चिमी तट का कार्य शेष है। उन्होंने पश्चिमी तट पर शेष रिवर फ्रंट कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बीहर नदी के दोनों तटों का समग्र विकास होने से रीवा शहर को विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही पुनर्घनत्वीकरण योजना अंतर्गत अन्य प्रस्तावित कार्यों को भी समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने, आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों को शीघ्र पूर्ण करने तथा समन्वय के साथ कार्य करने पर बल दिया गया। उन्होंने केंद्रीय जेल रीवा में पुनर्घनत्वीकरण योजना के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के आयुक्त  गौतम सिंह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य बजट में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए कैशलैस चिकित्सा सुविधा शामिल किए जाने पर अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री  साय से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक  कमल वर्मा ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारी वर्ग एवं उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलना एक ऐतिहासिक एवं कर्मचारी हितैषी कदम है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन सरकार के इस संवेदनशील निर्णय का स्वागत करता है तथा आशा करता है कि भविष्य में भी कर्मचारी हितों को इसी प्रकार प्राथमिकता दी जाती रहेगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। कैशलैस चिकित्सा सुविधा का लाभ शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। मेडिकल लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के सरलीकरण से कर्मचारीगण अपने और अपने परिवार की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निश्चिंत रहेंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी कार्य गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। 

    प्रतिनिधिमंडल में  कमल वर्मा (प्रांतीय संयोजक),  सुनील उपाध्याय,  जय कुमार साहू,  राजेश सिंघी,  संतोष कुमार वर्मा,  संजीत शर्मा,  देवाशीष दास,  लोकेश वर्मा,  अमित शर्मा, मती सोनाली तिडके,  आकाश त्रिपाठी,  जगेश्वर भट्ट,  दीपक सोनकर,  प्रवीण सिंह एवं मती निशा यादव उपस्थित रहे।