Category: उत्तर प्रदेश

  • सीएम योगी के निर्देश पर आपदा पीड़ितों को तत्काल मिल रही राहत, 24 घंटे में चार-चार लाख की आर्थिक सहायता

    सीएम योगी के निर्देश पर आपदा पीड़ितों को तत्काल मिल रही राहत, 24 घंटे में चार-चार लाख की आर्थिक सहायता

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने की संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई है। अयोध्या और बस्ती में तेज आंधी-पानी से प्रभावित परिवारों के बीच जनपद के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही पहुंचे और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने सीएम योगी के निर्देश पर प्रभावित परिवारों को दैवीय आपदा राहत कोष से घटना के 24 घंटे के अंदर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे।

    अयोध्या में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण चार लोगों की असामयिक मृत्यु हुई। इनमें सोहावल तहसील के शिवदासपुर, शुक्ला का पुरवा निवासी 18 वर्षीय आकाश वर्मा, मिल्कीपुर तहसील निवासी 12 वर्षीय आर्यन, रुदौली तहसील निवासी 76 वर्षीय रामस्वरूप और 40 वर्षीय धर्मराज शामिल हैं। इन सभी की मृत्यु पेड़ गिरने के कारण हुई। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अयोध्या सर्किट हाउस में आकाश वर्मा, रामस्वरूप और धर्मराज के परिजनों को चार-चार लाख रुपये के चेक सौंपे। वहीं बस्ती में भी आपदा प्रभावित दो परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई।

    बस्ती में भी पीड़ित परिवारों को मिली राहत

    बस्ती सदर तहसील के चौबाह गांव निवासी मोतीराम की आंधी में छप्पर गिरने से मृत्यु हुई थी, उनकी पत्नी कैलाशा देवी को चार लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं महुली पश्चिम के ग्राम बलुआ निवासी प्रशांत की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उनकी माता मीरा देवी को भी चार लाख रुपये का चेक सौंपा गया।

    हर नागरिक के सुख-दुःख में अभिभावक की तरह खड़ी है सरकार

    कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सेवा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री योगी के स्पष्ट निर्देश हैं कि दैवीय या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को अविलंब राहत, चिकित्सीय सुविधा और आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को सभी प्रभावितों को हरसंभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

  • अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश

    अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश

    लखनऊ

    प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से प्रभावित विद्युत आपूर्ति को जल्द सामान्य करने के लिए योगी सरकार ने निगरानी और राहत कार्य तेज कर दिए हैं। 
    प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का फीडरवार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और 1912 पर आने वाली प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लिया जाए।

    प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाए कि उनकी विद्युत आपूर्ति कब तक बहाल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल, पेयजल सहित आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। बारिश और पेड़ों के गिरने से 33 और 11 केवी फीडरों में बड़े पैमाने पर ब्रेकडाउन हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी टूटे हैं। इन्हें बदलने के साथ ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का काम दिन-रात जारी है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीमें लगातार कार्य कर रही हैं।

    शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति लगभग सामान्य

    डिस्कॉम अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति लगभग सामान्य कर दी गई है। मध्यांचल में बरेली मंडल को छोड़कर शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है। 33 केवी के छह सबस्टेशन बंद हैं, जिन्हें शाम तक चालू करने का लक्ष्य है। पूर्वांचल में बस्ती और संतकबीरनगर को छोड़कर अधिकांश शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है।

    पश्चिमांचल में अमरोहा, बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर आपूर्ति सामान्य है। दक्षिणांचल में इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य शहरों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। केस्को क्षेत्र में 33 केवी का कोई ब्रेकडाउन नहीं है। सब जगह आपूर्ति नॉर्मल कर दी गई है। 

    24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, मैनपावर की कमी ना हो

    अधिक प्रभावित जिलों में अंबेडकरनगर, भदोही, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बस्ती, बरेली, गोंडा, देवरिया, लखीमपुर, मऊ, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, गोरखपुर और वाराणसी ग्रामीण शामिल हैं। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यालयों से अधिकारियों को जिलों में भेजा गया है। आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के कार्यों में लगी कार्यदायी संस्थाओं को भी अनुरक्षण कार्य में लगाया गया है। 

    शक्तिभवन और डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय

    यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत आपूर्ति बहाली के कार्य में मैनपावर की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। जिला और फीडरवार लगातार मॉनिटरिंग करते हुए कार्य कराया जाए और एक भी फीडर छूटने न पाए। अस्पताल, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सेवाओं की विद्युत आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता है। शक्ति भवन और सभी डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हैं। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में आई समस्याओं और चल रहे अनुरक्षण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितेश कुमार ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

  • ट्रेड शो में बागपत के घेवर का स्वाद चख बोले लोग, सावन के बाद भी खूब भा रहा*

    ट्रेड शो में बागपत के घेवर का स्वाद चख बोले लोग, सावन के बाद भी खूब भा रहा*

    ग्रेटर नोएडा

    इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत का घेवर लोगों को रुकने और स्वाद चखने के लिए मजबूर कर रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के पवेलियन में बागपत के स्टाल पर पहुंच रहे लोग पहले घेवर को बनते देख रहे हैं और फिर उसका स्वाद ले रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आए लोगों ने घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को पसंद किया। कई लोगों के लिए यह भी आकर्षण का विषय रहा कि आमतौर पर सावन की मिठाई माने जाने वाला घेवर यहां सितंबर में भी ताजा तैयार होकर बिक रहा है।

    बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टाल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले कई लोग घेवर देखकर सवाल करते हैं कि यह तो सावन में मिलने वाली मिठाई है, फिर इस समय कैसे तैयार हो रही है। उन्हें बताया जाता है कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को अलग-अलग मौसम में बागपत के घेवर की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है।

    सामने बन रहा ताजा घेवर

    ट्रेड शो में बागपत से पांच कारीगर आए हैं। ये कारीगर स्टाल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। इससे भी लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है। दीपक गोयल के अनुसार रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और यहां घेवर 600 रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है।
    घेवर की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल स्वाद को अलग पहचान देता है। नीचे का कुरकुरा हिस्सा और ऊपर जमी खोये की परत इसकी विशेषता है। बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसकी मांग रहती है।

    दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत ट्रेड शो में पहुंचे लोगों ने घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टाल पर रुककर घेवर बनाने की प्रक्रिया भी देखी। लोग विशेष तरीके से घेवर बनता देख उत्साहित दिखाई दिए। पहली बार एक जिला एक व्यंजन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में जगह दी गई है। बागपत से घेवर को इसमें शामिल किया गया है। इससे जिले की पारंपरिक मिठाई को दूसरे जिलों से आए लोगों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन कौशल विकास मिशन के पवेलियन में हुनर, रचनात्मकता और सीखने का उत्साह

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन कौशल विकास मिशन के पवेलियन में हुनर, रचनात्मकता और सीखने का उत्साह

    ग्रेटर नोएडा

    उत्तर प्रदेश की कला, कौशल और कारीगरी को वैश्विक मंच देने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) का पवेलियन हुनर, रचनात्मकता और सीखने के उत्साह से गुलजार रहा। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार, युवा, बच्चे और बुजुर्ग पवेलियन पहुंचे और यहां न सिर्फ प्रदेश की पारंपरिक कला और उत्पादों को करीब से देखा, बल्कि कई कौशलों को खुद करके सीखने का अनुभव भी लिया।

    यूपीएसडीएम के ‘स्किल मंच’ पर रविवार को नन्हे-मुन्नों की प्रतिभा ने खास आकर्षण पैदा किया। बच्चों ने मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। युवाओं ने भी गायकी और फाइन आर्ट्स के जरिए अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। ‘हुनर’ थीम पर रंगों के जरिए युवाओं ने अपनी कल्पनाओं को मंच पर आकार दिया।

    खास बात यह रही कि मंच पर सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन किया। पहली बार शुरू किए गए ‘स्किल मंच’ का उद्देश्य युवाओं और आम लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ कौशल, करियर और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

    पवेलियन में विभिन्न कौशलों के लाइव डेमो दर्शकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने। पारंपरिक कारीगरी से लेकर आधुनिक कौशल तक, हर स्टॉल पर लोगों को कुछ नया देखने और सीखने को मिला। पॉटरी और टेराकोटा स्टॉल पर विजिटर्स ने मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर सुंदर कलाकृतियां बनाने की कोशिश की। वहीं, लखनऊ की चिकनकारी के स्टॉल पर लोगों ने सुई-धागे से होने वाली बारीक कारीगरी को करीब से समझा और खुद भी इसे आजमाया। यहां कौशल केवल प्रदर्शित नहीं किया गया, बल्कि लोगों को ‘देखिए, समझिए और खुद करके सीखिए’ के अंदाज में इससे जोड़ा गया। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक ने अलग-अलग स्टॉल पर पहुंचकर कला और कौशल का अभ्यास किया। 

    यूपीएसडीएम पवेलियन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कला और उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और मथुरा के डेकोरेटिव आइटम्स को देखने और उनके बारे में जानने के लिए विजिटर्स की विशेष रुचि दिखाई दी। प्रतापगढ़ के स्टॉल पर लोगों ने आंवला से बने विभिन्न उत्पादों की जानकारी लेने के साथ उनका स्वाद भी चखा। वहीं, लखनऊ की चिकनकारी ने अपनी बारीक कारीगरी से लोगों का ध्यान खींचा। विजिटर्स उत्पादों को देखने के साथ उनके निर्माण, परंपरा और उनसे जुड़े कौशल की जानकारी भी लेते नजर आए। पवेलियन में इस तरह कला, कौशल, सीखने और अनुभव का संगम देखने को मिल रहा है। पवेलियन की गतिविधियां यह संदेश दे रही हैं कि हुनर सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि उसे सीखा, समझा और अपने हाथों से आजमाया भी जा सकता है।

  • जीतने पर आयोग की पीठ थपथपाते हैं, हारने पर लगाते हैं आरोप’, संजय निषाद का अखिलेश पर हमला

    जीतने पर आयोग की पीठ थपथपाते हैं, हारने पर लगाते हैं आरोप’, संजय निषाद का अखिलेश पर हमला

    लखनऊ

    SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर सपा, कांग्रेस, राजद समेत विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर निषाद पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भारत देश की संवैधानिक संस्था है और बिना किसी साक्ष्य के उसके खिलाफ आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर यही लोग आयोग की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन जनता जब इन्हें नकार देती है और हार का ठीकरा उसी संवैधानिक संस्था पर फोड़ देते हैं।

    अखिलेश यादव के 2022 के चुनाव परिणाम और चुनाव प्रक्रिया पर उनके सवालों से जुड़े प्रश्न पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी यदि कोई संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो उसे अपने आरोपों के प्रमाण देने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन उसे साबित करना भी जरूरी होता है। उनके मुताबिक बिना प्रमाण के संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने और भ्रम फैलाने के लिए संबंधित लोगों को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

    संजय निषाद ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में यह दर्जनों बार हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पहले चुनाव आयोग की नियुक्ति और चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाएं रही हैं, जबकि वर्तमान व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप चल रही है। 

    मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था में विपक्ष के नेता की भी भूमिका है। ऐसे में यदि विपक्ष के नेता चुनाव आयोग की नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं तो अब उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर विपक्षी दलों को जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय प्रक्रिया के संवैधानिक पक्ष को समझना चाहिए। संजय निषाद के मुताबिक न्यायालय संबंधित प्रक्रिया का परीक्षण कर चुका है और हाईकोर्ट ने भी इसे संवैधानिक प्रक्रिया माना है। ऐसे में न्यायिक परीक्षण के बाद भी बिना ठोस साक्ष्य आरोप लगाना उचित नहीं है।

    संजय निषाद ने कहा कि जीत और हार के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अलग-अलग रवैया नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक करने और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने बिना साक्ष्य आरोप लगाने वालों से देश की जनता से माफी मांगने की बात कही।

  • अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: खेल मंत्री गिरीश यादव

    अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: खेल मंत्री गिरीश यादव

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में खेल बेहतर व्यवस्था में थे और मौजूदा सरकार में खेल पिछड़ गए हैं और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। इस पर गिरीश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव का आरोप बिल्कुल निराधार है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए कि पिछली सरकार में ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए जो पुरस्कार राशि दी जाती थी, मौजूदा सरकार ने उसे दो गुना से ढाई गुना बढ़ा दिया। सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया जाता है और उन्हें भी पुरस्कार राशि दी जाती है।

    पदक पर सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार

    मंत्री ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गारंटी दी है कि एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप जैसे चार वर्ष के अंतराल वाले आयोजनों के साथ ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब तक लगभग 16-17 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है और 5-6 और लोगों को नौकरी दी जा रही है।

    उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनके शासन में पदक जीतकर आए खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई हो तो उसकी सूची जारी करें। खेल कोटे के तहत उनकी पांच वर्ष की सरकार में कितनी नौकरियां दी गईं, यह भी बताएं।

    खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां, सात को सीधे डीएसपी

    गिरीश यादव ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने खेल कोटे के अंतर्गत एक हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। खेल कोटे से सात खिलाड़ियों को लोक सेवा आयोग की परीक्षा से बाहर निकालकर सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी बनाया गया। इनमें ललित उपाध्याय, अर्जुन देशवाल, अखिल श्योराण, दीप्ति शर्मा और पारुल चौधरी शामिल हैं। इन्हें पदक जीतकर आने के कारण सीधा डीएसपी बनाया गया।

    इसी क्रम में जिला युवा कल्याण अधिकारी, माल कर अधिकारी, यात्रीकर अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्री ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनकी पांच वर्ष की सरकार में किसी ऐसे खिलाड़ी को डीएसपी बनाया गया या नहीं।

    इकाना पीपीपी पर, हम कई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहे हैं
    इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव इकाना स्टेडियम की बात करते हैं, जो पीपीपी मॉडल पर बना। मौजूदा सरकार ने वाराणसी के सिगरा में अत्याधुनिक स्टेडियम बनाकर समर्पित कर दिया है। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। गोरखपुर स्टेडियम का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर दिया है, लागत 400 करोड़ रुपये है। कानपुर स्टेडियम को सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर मिनी स्टेडियम

    हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 18 कमिश्नरियों में से आगरा, बरेली, झांसी और अयोध्या में जमीन मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में चार कमिश्नरी स्तर के स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की योजना लाई गई है। मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह सोचें कि उन्होंने कितने बनाए, उन्होंने क्या किया।

    विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल मिनी स्टेडियम के प्रस्ताव आ रहे हैं और सरकार वहां पैसा दे रही है। जिला स्तर की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। जहां एस्ट्रोटर्फ चाहिए वहां एस्ट्रोटर्फ, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक चाहिए तो ट्रैक, तरणताल चाहिए तो तरणताल और बास्केटबॉल कोर्ट चाहिए तो कोर्ट दिए जा रहे हैं। तहसील स्तर पर भी काम शुरू किया गया है।

    संभल में पहली बार जिला स्टेडियम, हापुड़-शामली-चंदौली में भी निर्माण

    मंत्री ने कहा कि चार ऐसे स्थान अखिलेश यादव के घर के पास हैं। संभल में जिला स्तर का स्टेडियम नहीं था। सरकार 18 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वहां स्टेडियम बना रही है। हापुड़, शामली और चंदौली में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।

    खेल नीति-2023 और एकलव्य क्रीड़ा कोष

    गिरीश यादव ने बताया कि पहली बार नई खेल नीति-2023 बनाई गई। एकलव्य क्रीड़ा कोष के माध्यम से कमजोर और असहाय खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग तथा पौष्टिक आहार के लिए धन दिया जा रहा है। 400 से अधिक खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से कोचिंग और पौष्टिक आहार के लिए सरकार ने धन उपलब्ध कराया है।

    पंचायत से संसद तक प्रतिभा तलाश

    प्रतिभा खोज के लिए संसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता के साथ जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजन कर खिलाड़ियों को तलाशा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जब खिलाड़ियों की बात करते हैं तो खिलाड़ियों का चेहरा खिल उठता है। खिलाड़ी खुद कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, खेलने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, इसलिए खेल की दिशा में लोग आगे बढ़ रहे हैं।

    चार बार सत्ता में रही पार्टी लेखा-जोखा पेश करे

    मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी चार बार सत्ता में रही। वे लेखा-जोखा प्रस्तुत करें कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया। केवल एक इकाना स्टेडियम बना, वह भी पीपीपी मॉडल पर। मौजूदा सरकार ग्रामीण स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और तहसील तक स्टेडियम बना रही है और सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

    उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तथ्यहीन और निरर्थक बातें करते हैं तथा युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास ठोस सबूत नहीं होते। युवा और खिलाड़ी उनके बहकावे में नहीं आने वाले। साढ़े नौ वर्षों में खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। इसकी किसी भी प्रकार से तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश का युवा, खिलाड़ी और खेल जगत से जुड़े लोग जानते हैं कि सरकार कैसे काम कर रही है।

  • ट्रेड शो में तस्वीरों-वीडियो से सामने आ रहीं बदलाव की सफल कहानियां

    ट्रेड शो में तस्वीरों-वीडियो से सामने आ रहीं बदलाव की सफल कहानियां

    ग्रेटर नोएडा

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ग्राम्य विकास विभाग का स्टॉल योगी सरकार की ग्रामीण योजनाओं के साथ उनके लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को भी लोगों के सामने ला रहा है। यहां लाभार्थियों की कहानियां प्रदर्शित की गई हैं, वहीं वीडियो के जरिए आगंतुकों को विभाग की योजनाओं और कार्यों के बारे में बताया जा रहा है। ट्रेड शो में प्रदेश के सभी जिलों से आए समूहों की महिलाओं को वैश्विक पहचान मिल रही है।

    ट्रेड शो के तीसरे दिन प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू ने स्टॉल पहुंचकर लाभार्थियों की प्रदर्शित सफलता की कहानियों और चलाए जा रहे वीडियो को देखा। उन्होंने अधिकारियों को आगंतुकों तक वीबी-जी राम जी, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण तथा उनकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए।

    सौरभ बाबू स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों पर भी पहुंचे और महिलाओं के काम की सराहना की। इस दौरान उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

  • राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं गए कांग्रेसी और सपाई, भय था कि कहीं जालीदार टोपी न छिटक जाएः मुख्यमंत्री

    राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं गए कांग्रेसी और सपाई, भय था कि कहीं जालीदार टोपी न छिटक जाएः मुख्यमंत्री

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रण के बावजूद कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोटबैंक दिखाई देता था। इन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए। सीएम ने चेताया कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष (1926-2026) के उद्घाटन अवसर पर जन समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सीएमएस स्कूल, गोमतीनगर विस्तार में आयोजित समारोह में अशोक सिंहल के जीवन पर डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। सीएम ने कहा कि सिंहल जी ने श्रीराम जन्मभूमि के ‘प्राण’ के रूप में अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने जो ज्वाला प्रज्ज्वलित की थी, वह रामजन्मभूमि मात्र के लिए नहीं है, बल्कि हर मानबिंदु की प्राण प्रतिष्ठा के लिए है। गुलामी के हर चिह्नों को समाप्त करने के लिए हमें एकजुट होकर कार्य करना है।

    बाबर के भक्तों की साजिशों को नाकाम करेंगे बजरंग बली के भक्त

    सीएम ने आरोप लगाया कि रामद्रोही अयोध्या को बदनाम करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। राममंदिर का विरोध और रामभक्तों पर गोलियां चलाने वाले गाहे-बगाहे अपने को राम भक्त ठहराने का प्रयास कर रहे हैं, यह विश्व हिंदू परिषद की वैचारिक विजय है। उन्होंने बजरंगियों को चेताया कि रामकाज में कालेनमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहना। बाबर के भक्त आपको अपमानित करने का प्रयास करेंगे, लेकिन बजरंग बली के भक्तों को इनकी साजिश को सफल नहीं होने देना है। 

    अयोध्या को अपमानित करने वाले हमसे पूछ रहे प्रश्न

    सीएम ने कहा कि रामजन्मभूमि का मामला जब न्यायालय में पहुंचा तो अशोक जी की टीम में तथ्यों व प्रमाण के साथ अधिवक्ता, पुरातत्वविद, विषय विशेषज्ञ होते थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस, सपाइयों व वामपंथियों के अनर्गल प्रलाप व झूठे तथ्य होते थे। वे साजिश करते थे कि राममंदिर के पक्ष में फैसला न आए। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दिया था कि राम-कृष्ण का कोई वजूद नहीं है। जिन्होंने हिंदु समाज को अपमानित किया, वे लोग हमसे अयोध्या के बारे में प्रश्न पूछ रहे हैं।

    देश, सनातन और हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए अशोक जी का सर्वस्व समर्पित था

    सीएम योगी ने कहा कि अशोक जी ने जिस ज्योति को 1980 के दशक में प्रज्ज्वलित किया था, वह ज्वाला बनकर सकल हिंदू समाज के संरक्षण व संवर्धन के लिए अहर्निश लगी हुई है। अशोक जी से कोई जीवन का उद्देश्य पूछता था तो वह कहते थे कि तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूं देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूं। यह भाव अपने लिए नहीं बल्कि देश, सनातन, एकता-अखंडता और सकल हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए था। 

    सनातन की सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे
    मुख्यमंत्री ने अशोक सिंहल के जीवन को याद करते हुए कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के दौरान वह आरएसएस के संपर्क में आए। उन्होंने देश व सनातन धर्म के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने आरएसएस के प्रचारक-कार्यकर्ता के रूप में काम किया। उस समय कोई मानने को तैयार नहीं था कि भारतीय जनसंघ आएगा और केंद्र-राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। उनका एक ही ध्येय था कि सनातन धर्म पर आंच नहीं आने देंगे और इसकी सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे। 

    500 वर्ष तक चुप नहीं बैठा समाज 

    सीएम योगी ने कहा कि 1528 में प्रभु श्रीराम के मंदिर को तोड़कर विदेशी आक्रांता ने गुलामी का ढांचा बना दिया। इस 500 वर्ष में हिंदू समाज, धर्माचार्य, संत, नागा, सिखवीर, युवा, नारी, राजा कोई चुप नहीं बैठा। हर व्यक्ति निरंतर सिर पर कफन बांधकर रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए टूट पड़ता था। वे रामजन्मभूमि के लिए बलिदान देते रहे। 

    हिंदू समाज को एक मंच पर लाया सिंहल जी ने 

    सीएम ने कहा कि अवध क्षेत्र के दर्जनों गांव ऐसे थे, जिन्होंने 500 वर्ष तक चप्पल व साफा नहीं पहना। उस समय ताकत विभाजित थी, हम एकजुट होकर लड़ नहीं पा रहे थे। एक पक्ष मजबूत होता था तो दूसरा कमजोर। तब भी तोड़ने वाले विरोधियों व साजिशकर्ताओं की कमी नहीं थी। हिंदू समाज के पास उस समय भी शक्ति व सामर्थ्य था, सभी लोग लड़कर उसे वापस ले सकते थे, लेकिन उन्हें एक मंच पर लाने का अभाव था। अशोक सिंहल ने इस नेतृत्व की कमी को पूरा किया। 

    जब तक राम का काम नहीं, तब तक विश्राम नहीं 

    सीएम ने कहा कि 1982 में अशोक जी को जब विहिप का दायित्व मिला। 1983 में राम जन्मभूमि मुक्त यज्ञ समिति का गठन हुआ, तब उनके जीवन का एक ही संकल्प था कि जब तक राम का काम नहीं होगा, तब तक विश्राम नहीं लूंगा। उन्होंने बिना रुके, झुके, डिगे चरैवेति-चरैवेति को जीवन का मंत्र बनाया और संतों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बिखरे हुए समाज को एकजुट किया और वनवासी क्षेत्रों व मलिन बस्तियों में एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी की। गोरखनाथ मंदिर में ही विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय के एक कमरे में उन्होंने पूर्वोत्तर के बच्चों को लाकर पढ़ाने की व्यवस्था प्रारंभ की। 

    रामद्रोही सरकार ने जब गोली चलाई, तब अशोक जी की सिंह-गर्जना सुनाई दी
    सीएम ने कहा कि 2 नवंबर 1990 को रामधुन गाते भक्तों पर तत्कालीन रामद्रोही सरकार ने लाठीचार्ज व गोलियां चलवाईं, तब अशोक सिंहल जी सीना तानकर खड़े हो गए। केसरिया गमछे व युवाओं की हुंकार से उनका मन प्रफुल्लित होता था। संतुष्टि है कि अशोक जी के सान्निध्य में हमने राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। उनका सपना अब भव्य राम मंदिर के रूप में दिख रहा है। 

    जो कहा, करके दिखाया
    सीएम ने कहा कि मेरे गुरुदेव अवेद्यनाथ जी महाराज श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। अशोक सिंहल जी के साथ गोरखपुर व कारसेवकपुरम में राम मंदिर आंदोलन, निर्माण आदि को लेकर लगातार बैठकें होती थीं। सौभाग्य है कि अशोक जी के सपने को आज त्रेतायुगीन अयोध्या के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर हमें प्राप्त हुआ। कोई भी वाणी मंत्र तब बनती है, जब उसके वाचन व आचरण करने वाले में अंतर नहीं होता। अशोक जी ने जो कहा, वह करके दिखाया। 

    अब 5 लाख से अधिक लोग एक साथ कर सकते राम की पैड़ी में स्नान

    सीएम ने कहा कि पहले अयोध्या में परिक्रमा करने पर रोक लगती थी, आज वहां भव्य दीपोत्सव होता है। अयोध्या ने पांच सौ वर्ष तक अपमान व उपेक्षा झेली है। वहां सड़क, बिजली, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। राम जी की पैड़ी में जल सड़ता था। 2017 में सरकार बनी तो तत्कालीन जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने राम की पैड़ी को ऐसा बना दिया, जैसे हरिद्वार में हर की पैड़ी। अब 5 लाख से अधिक श्रद्धालु एक साथ राम की पैड़ी में स्नान कर सकते हैं।  

    अयोध्या सोलर सिटी बन गई

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस अयोध्या में संकरी व टूटी गलियां थी, वहां अब रामपथ, धर्मपथ, भक्ति पथ व जन्मभूमि पथ फोरलेन से जुड़े हैं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, मां शबरी के नाम पर भोजनालय, निषादराज के नाम पर यात्री विश्रामालय हैं। संतों के नाम पर मंदिर-मूर्तियां भी हैं। कभी अंधेरे में रहने वाली अयोध्या अब सोलर सिटी बन गई है। 

    7700 से अधिक गोशाला में 16 लाख गायों का संरक्षण कर रही सरकार 
    सीएम ने कहा कि अशोक जी श्वेत वस्त्र में जितने प्रखर सनातनी थे, अंतःकरण से उतने कोमल हृदय के थे। गोरक्षा पर चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि पहले यूपी में अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थी। 2017 में ये बूचड़खाने बंद हो गए। उप्र में सर्वाधिक सख्त कानून बनाया गया और 7700 से अधिक गोशाला का निर्माण कराया गया। हम यहां 16 लाख गायों का संरक्षण कर रहे हैं। हर गाय के संरक्षण के लिए हर महीने 1500 रुपये देते हैं। जो लोग अवैध बूचड़खाने संचालित कर रहे थे, गोमाता की तस्करी करा रहे थे। उनसे प्रश्न पूछिए। हमने अशोक जी से जो सीखा, उसे धरातल पर उतारा है। 

    गो हमारी माता, पशु कहने वालों की बुद्धि पशुवत

    सीएम ने कहा कि नकलची गाय को पशु घोषित करने का ज्ञापन देते हैं। जो गो को पशु कह रहे हैं, उनकी बुद्धि पशुवत है। इस मुद्दे पर किसी को प्रश्न नहीं खड़ा करने देना चाहिए। सीएम ने अपील की कि भारतीय नस्ल की गोसेवा करें, पुण्य अर्जित करें और अशोक जी के संकल्पों के साथ जुड़कर संतों के सान्निध्य में राष्ट्र रूपी यज्ञ को मजबूती प्रदान करें। 

    इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल, संत श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी, रविंद्र कीर्ति स्वामी जी, भंते शीलरत्न जी, सरदार निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्य गिरि, विहिप के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, सीएमएस की संस्थापक भारती गांधी आदि की मौजूदगी रही।

  • डिजिटल मार्केट, मजबूत सप्लाई चेन और सुशासन से यूपी के हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान: भूपेंद्र चौधरी

    डिजिटल मार्केट, मजबूत सप्लाई चेन और सुशासन से यूपी के हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान: भूपेंद्र चौधरी

    ग्रेटर नोएडा

    एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के विशेष सत्र में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि ग्रेटर नोएडा का इंडिया एक्सपो सेंटर बदलते भारत और बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश को देश के मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करने का काम हुआ है। सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ गांव, कारीगर, महिला उद्यमी और छोटे कारोबारियों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उद्योग और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है। डिजिटल मार्केट और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ एक्सपोर्ट हब विकसित किए जा रहे हैं। वाराणसी जैसे प्रमुख केंद्रों पर लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग और कस्टम्स से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर है।

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले के कॉमन फैसिलिटी सेंटर को हाईटेक स्टूडियो के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ब्रांडिंग, प्रमोशन, 3डी और हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी तथा पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे स्थानीय उत्पादों को डिजिटल बाजार में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप प्रस्तुत किया जा सकेगा। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को ई-कॉमर्स से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, भदोही के कालीन और मुरादाबाद के हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्रमाणन, ऑनलाइन परमिट और ट्रेसबिलिटी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने वैश्विक खरीदारों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के एक्सपोर्ट इकोसिस्टम से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश की डिजिटल और औद्योगिक विकास यात्रा अभी रुकने वाली नहीं है।

    डिजिटल मार्केटिंग और ग्लोबल बाजार से जुड़कर बढ़ाएं हैंडीक्राफ्ट्स का कारोबार: के विजयेंद्र पांडियन

    आयुक्त (उद्योग) के विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि भविष्य में कारोबार तेजी से डिजिटल होने वाला है, इसलिए हस्तशिल्प उद्यमियों को इंस्टाग्राम, फेसबुक सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर जोर देना होगा। उत्तर प्रदेश एमएसएमई और हस्तशिल्प का बड़ा केंद्र है, ऐसे में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। कारोबारियों को केवल ट्रेडिंग तक सीमित न रहकर उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बेहतर मार्जिन पर काम करना चाहिए। उन्होंने जनपदों के विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें मॉडल के रूप में विकसित करने, होम डेकोर सहित अन्य उत्पादों के लिए डिजिटल और फिजिकल शोरूम तैयार करने तथा एक्सपोर्ट चैन के जरिए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से विशेषज्ञों के सत्रों को ध्यान से सुनने, सफल मॉडलों का अध्ययन करने और अपने सवालों के जवाब लेकर उन्हें अपने कारोबार में लागू करने का आह्वान किया।

  • योगी सरकार की स्मार्ट पुलिसिंग का दबदबा देखने उमड़ रहे देश और विदेश के विजिटर्स

    योगी सरकार की स्मार्ट पुलिसिंग का दबदबा देखने उमड़ रहे देश और विदेश के विजिटर्स

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा

    उत्तर प्रदेश जो वर्ष 2017 से पहले पूरी दुनिया में बदहाल कानून व्यवस्था के लिए कुख्यात था, वही उत्तर प्रदेश पिछले साढ़े नौ वर्षों से योगी सरकार के नेतृत्व में स्मार्ट पुलिसिंग और सुदृढ़ कानून व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में सुर्खियों में बना हुआ है। इसका ताजा उदाहरण यहां यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में लगे यूपी पुलिस के स्टॉल पर देश के विभिन्न प्रदेशों के साथ विदेशी मेहमान का जमावड़े को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है। ट्रेड शो के हाल नंबर चार में उत्तर प्रदेश पुलिस के हाईटेक स्टॉल का पिछले तीन दिनों में 15 हजार से अधिक लोगों ने विजिट किया। वहीं लोगों में यूपी में स्थापित कानून के राज को जानने और समझने की जिज्ञासा साफ देखी जा रही है। यहां उमड़ी भीड़ यह साबित कर रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते साढ़े नौ वर्षों में हुए पुलिस सुधारों और स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में उठाए गए कदमों ने युवाओं और आम नागरिकों में गहरी जिज्ञासा पैदा की है।

    यू फीड मशीन से ठगों तक पहुंचना हुआ आसान

    2017 से पहले बदहाल कानून-व्यवस्था के लिए कुख्यात प्रदेश आज सुरक्षा और सुशासन का पर्याय बन गया है। अपराध नियंत्रण से लेकर साइबर सुरक्षा और सड़क सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में पुलिस ने तकनीक को अपनाया गया है। यही कारण है कि पुलिस का स्टॉल लोगों के लिए ज्ञानवर्धन और प्रेरणा का केंद्र बन गया है। स्टॉल में सबसे अधिक भीड़ साइबर हेल्प डेस्क पर देखने को मिल रही है। यहां उपनिरीक्षक (एसआई) ने छात्रों और युवाओं को विस्तार से समझाया कि डिजिटल अरेस्ट क्या होता है, ऑनलाइन ठगी किस तरह की जाती है और उससे बचने के उपाय क्या हैं। युवाओं की जिज्ञासा खासकर टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर हो रही ठगी को लेकर रही। कई लोगों ने पूछा कि अगर किसी ग्रुप में ऐड होकर ठगी होती है तो कैसे बचें?” इस पर पुलिस ने बताया कि यू-फीड मशीन अपराधियों के मोबाइल से तुरंत डाटा निकाल सकती है, जिससे ठगों तक पहुंचना आसान हो जाता है।

    स्पीड राडार गन ने युवाओं को ध्यान अपनी ओर किया आकर्षित

    स्टॉल पर ब्रीद एनालाइजर और स्पीड राडार गन ने युवाओं का ध्यान खूब खींचा। डीजी डायल 112 विनोद कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 से ब्रीद एनालाइजर मशीन में कैमरे भी लगा दिए गए हैं, ताकि वाहन चालक कोई बहाना न बना सके। युवाओं ने इसे लाइव देखकर जाना कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में तकनीक कितनी उपयोगी साबित हो रही है। पुलिस की सतर्कता और अपराधियों पर निगरानी के लिए बॉडी वार्म कैमरा और मोबाइल डेटा टर्मिनल को भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। बच्चों और आगंतुकों ने इन्हें हाथ में लेकर समझा कि किस तरह पुलिस वास्तविक समय में अपराधियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर सकती है।

    यूपी पुलिस के रॉकेट लॉन्चर को देख लोग रह गये अचंभित
    स्टॉल में एटीएस और एसटीएफ के अत्याधुनिक हथियार लोगों में काफी रोमांच पैदा कर रहे। डीजी डायल 112 ने बताया कि यूपी पुलिस के पास अत्याधुनिक स्नाइपर राइफल्स, क्लोज क्वार्टर बैटल उपकरण, सामरिक संचार प्रणाली और बम निरोधक उपकरण भी हैं। इसके साथ यूपी पुलिस के पास डीआरडीओ निर्मित रॉकेट लाॅन्चर भी है, जिसकी मारक क्षमता दो किलोमीटर तक है। युवाओं ने इसे देखकर गहरी रुचि दिखाई और हथियारों की तकनीकी खूबियों के बारे में सवाल किए। वहीं फायर फाइटिंग रोबोट रेस्क्यू रोबोट, जिसे आग लगने की स्थिति में उन जगहों पर उपयोग किया जाता है, जहां इंसान का पहुंचना कठिन होता है। इसे देखकर लोग बोले, यह देखकर भरोसा होता है कि योगी राज में पुलिस अत्याधुनिक तकनीक से लैस हो चुकी है। वहीं स्टॉल पर आए छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार पुलिस की तकनीक और उपकरण इतने नज़दीक से देखे। एक छात्र अमित ने कहा कि यह देखकर खुशी होती है  हमारी यूपी पुलिस अब केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के हर पहलू में आगे है।

    पिछले साढ़ नौ वर्षों में योगी सरकार के प्रयासों से यूपी पुलिस बनीं स्मार्ट पुलिसिंग

    – थानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया।
    – साइबर अपराध रोकने के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाए गए।
    – महिला सुरक्षा के लिए 1090 विमेन पावर लाइन, पिंक बूथ, और मिशन शक्ति जैसी योजनाएं लागू की गईं।
    – अपराधियों की त्वरित पहचान और गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी नेटवर्क, आईटीएस प्रणाली और फोरेंसिक तकनीक का विस्तार किया गया।
    – संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए गैंगस्टर एक्ट और एनकाउंटर पॉलिसी को सख्ती से लागू किया गया।

    यूपी पुलिस के स्टॉल बयां कर रहे प्रदेश में सुदृढ़ कानून व्यवस्था की गाथा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद से पुलिसिंग को पूरी तरह से बदलने पर फोकस किया। इन सुधारों के चलते प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अपराध दर में गिरावट, महिलाओं और व्यवसायियों में बढ़ा हुआ विश्वास तथा निवेश के लिए सुरक्षित माहौल, यह सब योगी सरकार की स्मार्ट पुलिसिंग का परिणाम है। यूपी पुलिस का यह स्टॉल केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक है जिसने प्रदेश को बीमारू कानून-व्यवस्था की छवि से निकालकर मॉडल स्टेट की ओर अग्रसर किया है। आज हाईटेक उपकरण, आधुनिक हथियार और प्रशिक्षित पुलिसकर्मी इस बात का प्रमाण हैं कि योगी राज में जनता सुरक्षित है और कानून का राज स्थापित हो चुका है।