Category: उत्तर प्रदेश

  • WPL 2027 Retention: RCB-दिल्ली ने बड़े खिलाड़ियों को किया रिलीज, जानें किसे मिली जगह

    WPL 2027 Retention: RCB-दिल्ली ने बड़े खिलाड़ियों को किया रिलीज, जानें किसे मिली जगह

    नई दिल्ली
    महिला प्रीमियर लीग 2027 के पांचों फ्रेंचाइजी ने रिटेंशन लिस्ट जारी कर दी है। आरसीबी और दिल्ली कैपिटल्स ने अपने बड़े खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। रिलीज किए गए और रिटेन किए गए खिलाड़ियों की पूरी सूची देखिए।
    WPL 2027 के लिए सभी टीमों द्वारा रिलीज किए गए प्लेयर्स की सूची

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू: WPL 2027: गत चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लिन्से स्मिथ, ग्रेस हैरिस, दयालन हेमलता और गौतमी नाइक को रिलीज कर दिया है।

    ग्रेस हैरिस आरसीबी की बड़ी प्लेयर थीं।
    दिल्ली कैपिटल्स: WPL 2027: दिल्ली कैपिटल्स ने एलाना किंग, एडला सृजना, लिजेल ली, प्रगति सिंह, स्नेहा राणा, तानिया भाटिया को महिला प्रीमियर लीग 2027 के लिए अपनी टीम से रिलीज कर दिया है।

    लिजेल ली और स्नेहा राणा दिल्ली कैपिटल्स की बड़ी प्लेयर थीं।
    मुंबई इंडियंस: WPL 2027: दो बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने जी कमलिनी, मिल्ली इलिंगवर्थ, क्रांति रेड्डी, पूनम खेमनार, सैका इशाक और त्रिवेणी वशिष्ठ को रिलीज कर दिया है।

    गुजरात जायंट्स: WPL 2027: गुजरात जायंट्स ने डैनी व्याट-हॉज, आयुषी सोनी, तितास साधु और शिवानी सिंह को रिलीज कर दिया है।
    यूपी वारियर्स: WPL 2027: यूपी वॉरियर्स ने आशा शोभना, श्वेता सहरावत, किरण नवगिरे, डिएंड्रा डॉटिन, एमी जोन्स और क्लोट्रायोन को टीम से बाहर कर दिया है।

    WPL 2027 के लिए सभी टीमों द्वारा रिटेन किए गए प्लेयर्स की सूची
    दल्ली कैपिटल्स रिटेंशन लिस्ट: एनाबेल सदरलैंड, चिनेल हेनरी, दीया यादव, जेमिमा रोड्रिग्स, लौरा वोल्वार्ड्ट, लकी हैमिल्टन, ममता मदिवाला, मरिज़ाने काप, मिन्नू मनी, एन श्री चरणी, नंदनी शर्मा, निकी प्रसाद, शेफाली वर्मा।

    गुजरात जायंट्स द्वारा रिटेन किए गए प्लेयर: अनुष्का शर्मा, एश्ले गार्डनर, बेथ मूनी, भारती फुलमाली, जॉर्जिया वेयरहैम, हैप्पी कुमारी, जिंतीमनी कलिता, कनिका अहूजा, काश्वी गौतम, किम गार्थ, राजेश्वरी गायकवाड़, रेणुका सिंह, सोफी डिवाइन, तनुजा कंवर,
    यास्तिका भाटिया

    मुंबई इंडियंस द्वारा रिटेन किए गए खिलाड़ी: अमनजोत कौर, अमेलिया केर, हरमनप्रीत कौर, हेली मैथ्यूज, नेट साइवर-ब्रंट, निकोला केरी, राहिला फिरदौस, सजीवन सजना, संस्कृति गुप्ता, शबनिम इस्माइल, वैष्णवी शर्मा

    आरसीबी द्वारा रिटेन किए गए खिलाड़ी: स्मृति मंधाना, ऋचा घोष, श्रेयंका पाटिल, पूजा वस्त्रकार, अरुंधति रेड्डी, राधा यादव, नादिन डी क्लर्क, जॉर्जिया वॉल, सायली सतघारे, प्रेमा रावत, प्रत्युषा कुमार, लॉरेन बेल

    यूपी वारियर्स द्वारा रिटेन किए गए खिलाड़ी: दीप्ति शर्मा, हरलीन देओल, क्रान्ति गौड़, मेग लैनिंग, फीबी लिचफील्ड, प्रतिका रावल, शिखा पांडे, शिप्रा गिरी, सिमरन शेख, सोफी एक्लेस्टोन, तारा नॉरिस।

    28 अक्टूबर को होगा ऑक्शन
    बता दें कि कोई भी फ्रेंचाइजी अधिकतम 18 खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल कर सकती है। इनमें से अधिकतम 6 विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं। महिला प्रीमियर लीग का ऑक्शन अगले महीने यानी अक्टूबर में 28 तारीख को कोच्चि में आयोजित किया जाएगा। टाटा महिला प्रीमियर लीग का 2027 संस्करण 14 जनवरी से 7 फरवरी तक खेला जाएगा।

  • मेहनत को मिला सम्मान, ग्राम पंचायत अधिकारी पद के चयनित अभ्यर्थी बोले- चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष

    मेहनत को मिला सम्मान, ग्राम पंचायत अधिकारी पद के चयनित अभ्यर्थी बोले- चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष

    मेहनत को मिला सम्मान, ग्राम पंचायत अधिकारी पद के चयनित अभ्यर्थी बोले- चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चयनित अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

    अभ्यर्थियों ने कहा- बिना सोर्स-सिफारिश और हेरफेर के योग्यता व मेहनत के आधार पर मिली सरकारी नौकरी

    आशुतोष त्रिपाठी बोले- निष्पक्षता और पारदर्शिता सिर्फ जुमला नहीं, भर्ती प्रक्रिया में दिखी इसकी बानगी

    ओम बघेल बोले- चार साल की मेहनत रंग लाई, मुख्यमंत्री योगी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना जीवन का यादगार पल

    रूपाली, नेहा और मिथिलेश ने जताई खुशी, कहा- पारदर्शी प्रक्रिया से युवाओं का मेहनत पर भरोसा हुआ मजबूत

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। अभ्यर्थियों ने कहा कि बिना किसी सिफारिश और हेरफेर के, सिर्फ मेहनत के आधार पर उन्हें सरकारी सेवा में नियुक्ति का अवसर मिला है। एक भी चयन पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है।

    योगी जी की ईमानदारी पर सवाल उठाना सूरज को दीया दिखाने जैसा

    प्रयागराज निवासी आशुतोष त्रिपाठी का चयन ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर हुआ है। उन्होंने बताया कि भर्ती परीक्षा 2025 में हुई थी और साल के भीतर परिणाम आ गया है। प्रदेश में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है और मुख्यमंत्री योगी के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। आशुतोष ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता केवल जुमला नहीं है। बिना किसी हेरफेर के नियुक्ति मिली है। योगी जी की ईमानदारी पर सवाल उठाना सूरज को दीया दिखाने जैसा है। हमारा नेतृत्व ईमानदार है और इसकी बानगी भर्ती प्रक्रिया में भी देखने को मिली है। 

    नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित प्रतापगढ़ निवासी अमित कुमार सिंह को बरेली में तैनाती मिली है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही है। कहीं भी सोर्स या सिफारिश नहीं चली है। जिसने मेहनत की, उसका चयन हुआ। अमित सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में बिहार में सरकारी नौकरी के साथ ही परीक्षा की भी तैयारी कर रहे थे। अब अपने ही प्रदेश में नौकरी मिलने से खुशी है।

    मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाना गर्व का विषय

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित रूपाली गुप्ता को फतेहपुर में तैनाती मिली है। उन्होंने कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया बेहद निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलेगा, ऐसा कभी नहीं सोचा था। यह उनके और उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है। इसी पद पर चयनित नेहा देवी ने कहा कि इस नियुक्ति के लिए उन्हें केवल फॉर्म भरने का खर्च आया और योग्यता व मेहनत के आधार पर नौकरी मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी का क्षण है। 

    मेहनत करने वाले युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं 

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित ओम बघेल ने प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल की है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी ने उनसे एक रुपया भी नहीं मांगा और नियुक्ति पूरी तरह निष्पक्ष रही। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके जीवन का यादगार पल है। ओम ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से तैयारी कर रहे थे और अब उनकी मेहनत रंग लाई है। योगी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है और मेहनत करने वाले युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। आजमगढ़ निवासी मिथिलेश पाल ने भी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और योगी सरकार को दिया। उन्होंने बताया कि चार वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और पारदर्शी नीति के कारण आखिरकार मेहनत रंग लाई।

  • नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: सीएम योगी

    नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: सीएम योगी

    नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: सीएम योगी

    मिशन रोजगार: 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को मिली नियुक्ति, 11 नवचयनितों को मुख्यमंत्री ने मंच पर दिया नियुक्ति पत्र 

    छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरी का लक्ष्य, सपा-कांग्रेस के नेता गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र बांटते रहेंगे, अक्टूबर से फिर होगा नियुक्ति पत्र वितरण

    ग्राम पंचायत जितनी बढ़ाएगी अपनी आय, सरकार उतनी ही देगी अतिरिक्त धनराशि, आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर

    कोई टोटी चोरी कर लेगा तो पानी बहता रहेगा, जिससे गांव की ही क्षति होगी: मुख्यमंत्री

    उप्र में अब नागरिक सीना तानकर और माफिया सिर झुकाकर चलता हैः सीएम योगी

    28 सितंबर है भगत सिंह की जयंती, इसी दिन 57,600 से अधिक गांवों ने ओडीएफ प्लस का लक्ष्य प्राप्त किया थाः मुख्यमंत्री

    बच्चे इंसेफेलाइटिस से मरते थे, लेकिन सपा के स्वास्थ्य मंत्री ने भी हॉस्पिटल का दौरा नहीं कियाः सीएम

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सरकारी नौकरियों और गांवों के विकास को लेकर समाजवादी पार्टी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने नौजवानों के हक पर डकैती डाली, पिछड़ों-दलितों को योजनाओं से वंचित किया, नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, जिनके लिए विकास का मतलब सिर्फ सैफई था, वही आज नए स्वरूप में नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदलते दिख रहे हैं। इनसे सावधान रहना है। यह भ्रम पैदा कर राज्य को अराजकता की तरफ धकेलने की साजिश करेंगे। सीएम ने सपा-कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने का हमारा लक्ष्य है। वे गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र वितरित करते रहेंगे।
     
    मुख्यमंत्री योगी मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। 11 नवचयनितों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में नियुक्ति पत्र सौंपा। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि मैंने 15 सितंबर के आसपास कहा था कि हर सप्ताह नियुक्ति पत्र वितरण करेंगे और छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देंगे। 20 सितंबर से यह चौथी नियुक्ति पत्र प्रक्रिया संपन्न हुई। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से फिर नियुक्ति पत्र वितरण होगा।

    यूपी में अब सिर झुकाकर चलता है माफिया
    सीएम ने कहा कि सपा शासनकाल में संवेदनहीनता की चरमता थी। बेईमानी से जकड़े वे लोग माफिया के सामने झुकते थे, परंतु अब ऐसा नहीं है। अब कोई माफिया असलहों के साथ गाड़ियों का काफिला लेकर नहीं चल सकता। आज यूपी में नागरिक सीना तानकर और माफिया सिर झुकाकर चलता है। उसे पता है कि गरीब की झोपड़ी पर कब्जा और व्यापारी से फिरौती मांगने जाएंगे तो काम तमाम हो जाएगा। अब माफिया और उनके आका भयभीत हैं। भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण देना सरकार की प्राथमिकता है। 

    युवाओं के लिए यही होली-दीवाली
    मुख्यमंत्री ने समयसीमा के अंदर निष्पक्ष व शुचितापूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र एक नौजवान प्राप्त कर रहा है, लेकिन खुशी पूरे परिवार व रिश्तेदारों में है। उनके लिए यही होली-दीवाली है। जो राज्य 10 साल पहले बीमारू था,  उसे निष्पक्षता व ईमानदारी के साथ हमने सबसे समृद्ध राज्य के रूप में खड़ा किया है। युवाओं के सपनों को उड़ान और मंजिल प्राप्त करने के लिए प्लेटफॉर्म चाहिए। आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि आपको यह वातावरण मिल रहा है।

    योग्यता पर भी नहीं मिलती थी 2017 के पहले नौकरी 
    सीएम योगी ने कहा कि हम युवा बल को प्लेटफॉर्म देकर उस
    की ऊर्जा-प्रतिभा का उपयोग उप्र की समृद्धि में करने में सफल होते हैं। 2017 के पहले युवाओं में सिर्फ आशंका, हताशा-निराशा थी। योग्यता के बावजूद सिर्फ पहुंच न होने की वजह से गरीब बच्चों से नौकरी कोसों दूर रहती थी। 2017 में हमने इस जकड़न, बेईमानी व माफियाराज से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया था। अब सरकारी नियुक्ति पाने वाले साढ़े 9 लाख युवाओं की प्रतिभा से यूपी विकास की नई कहानी लिख रहा है।

    शहीद भगत सिंह की जयंती पर नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री ने साढ़े 9 वर्ष में हुए परिवर्तन को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले यूपी सबसे पिछड़े 5 राज्य में था, अब टॉप-3 में हैं। यूपी ने अपनी अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय व बजट को तीन गुना करने में सफलता हासिल की है। यह बदलाव पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में हर योजना को ईमानदारी से लागू करने का परिणाम है। आज सरदार भगत सिंह की जयंती है। जब उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया, तब उनकी आयु मात्र 23 वर्ष थी। आज नियुक्ति पत्र पाने वाले अनेक जवानों की आयु भी 20-27 वर्ष के बीच में है। सरदार भगत सिंह ने देश के लिए इसलिए बलिदान दिया था कि आने वाले समय में नौजवानों का जीवन उज्ज्वल हो। 28 सितंबर 2023 को यूपी के 57,600 से अधिक गांवों ने ओडीएफ प्लस का लक्ष्य प्राप्त किया था। 2017 के बाद 3.32 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया।

    बच्चे इंसेफेलाइटिस से मरते थे, मंत्री अस्पताल नहीं जाते थे
    सीएम योगी ने कहा कि लगभग 30 जनपदों में गंदगी के कारण मस्तिष्क ज्वर से दलित, पिछड़े व गरीब वर्ग के सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कड़क धूप में एक बेड पर चार-चार बच्चे भर्ती होते थे। सपा ने चार बार शासन किया, लेकिन तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल तक का दौरा नहीं किया। सपा के लिए विकास का मायने केवल सैफई था, बाकी गांवों, जनपदों से इन्हें कोई मतलब नहीं था। भारत सरकार 2017 के पहले भी पैसा देती थी, लेकिन लाभ सिर्फ सपा के लोगों को मिलता था। हम चुनाव जरूर पार्टी पर लड़ते हैं, लेकिन सत्ता में आते हैं तो बिना भेदभाव सबको योजनाओं का लाभ देते हैं। 

    हर ग्राम पंचायत कर रही रोजगार का सृजन 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 1996 में त्रिस्तरीय पंचायत की व्यवस्था लागू हुई। तब से ग्राम प्रधानों के पास कार्यालय नहीं था। उनके घऱ से व्यवस्था संचालित होती थी। विरोधी दल का व्यक्ति कैसे उनके घर जाता। लेकिन, जो काम इतने वर्षों में नहीं हुआ, वह अब हो गया है। अब ग्राम पंचायत का कार्यालय (ग्राम सचिवालय) भी है। चार से लेकर छह कमरे हैं। इसमें ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, बीसी सखी आदि बैठते हैं। वहां डिजिटल लाइब्रेरी व कॉन्फ्रेंस रूम भी है। एनडीए सरकार ने गांधी जी के सपनों को साकार किया है। गांव की बेटी बीसी सखी व रोजगार सेवक लोगों को जन्म, निवास, आय प्रमाण पत्र आदि सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। गांव में ही सारी सुविधाएं मिल रही हैं। अन्नपूर्णा भवन, फेयर प्राइस शॉप के साथ वेयरहाउस से भी गांवों में रोजगार सृजन हुए हैं। सामुदायिक शौचालय की देखरेख महिला स्वयंसेवी समूह से जुड़ी महिलाएं करती हैं, जिन्हें पैसा भी मिलता है। उत्सव भवन कुछ गांवों में बन चुके हैं, कुछ में बन रहे हैं। यहां भी लोगों को रोजगार मिल सकता है। हर गांव 5-7 रोजगार का सृजन कर रहा है।

    ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त धनराशि
    सीएम ने पिछले 4 दिन मूसलाधार बारिश का जिक्र करते हुए कहा कि यदि 65 लाख गरीबों को पीएम/सीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला होता तो ये सभी बेघर हो गए होते। सभी एहतियात करने के बावजूद कुछ निर्दोषों की जान चली गई। उन्होंने सपा मुखिया पर तंज कसते हुए कहा कि जो कुछ कर नहीं पाए, वह आक्षेप लगाते हैं। जिनमें सामर्थ्य नहीं था, वह टिप्पणी करते हैं। सीएम ने ग्राम पंचायत अधिकारियों को नींव का पत्थर बताते हुए कहा कि आपकी स्थिति मजबूत होगी तो ग्राम पंचायतों की भूमिका प्रभावी होगी। ग्राम पंचायत भी आय अर्जित कर सकती है। जो ग्राम पंचायत जितनी आय करेगी, सरकार उसे उतनी ही अतिरिक्त धनराशि देगी।

    कोई टोटी चोरी कर लेगा तो पानी बहता रहेगा
    सीएम ने कहा कि गंदगी व शुद्ध पेयजल का अभाव गांव में बीमारी का कारण है। सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान से गंदगी को समाप्त किया। हर घर नल योजना गांव तक पहुंचेगी। उन्होंने तंज कसा कि गांवों में युवाओं को प्लंबर की ट्रेनिंग दें, जिससे कोई टोटी चोरी कर ले गया तो वे उसकी मरम्मत कर सके। टोटी चोरी होने से पानी बहता रहेगा, जिससे क्षति गांव की होगी। युवाओं के पास आइडिया, इनोवेशन व गांव को अच्छा बनाने का जज्बा होना चाहिए। विकसित भारत का सपना तब साकार होगा, जब यूपी विकसित होगा। यूपी तब विकसित होगा, जब ग्राम पंचायत की इकाई विकसित व आत्मनिर्भर होगी। आप इस परिकल्पना को साकार करने के सारथी बनने जा रहे हैं।

    नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट: राजभर
    इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में नौकरी का विज्ञापन निकलते ही गुर्गे सक्रिय हो जाते थे और पद के हिसाब से रकम तय होती थी। आज बिना भेदभाव, बिना लेनदेन सरकारी नौकरी मिल रही है।
     
    अब बिना घूसखोरी मिल रही नौकरी: शाही
    नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों से साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना घूसखोरी और भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरी मिली है। यह बड़ी उपलब्धि है।

    इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, विधायक डॉ. नीरज बोरा, जय देवी, अमरेश कुमार, उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत आदि मौजूद रहे।

  • 308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक चंदौली में फंसा, दलदल ने रोकी 200 टन के बॉयलर की राह

    308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक चंदौली में फंसा, दलदल ने रोकी 200 टन के बॉयलर की राह

    लखनऊ
    308 पहियों वाला ट्रक बेल्जियम से ओडिशा और वहां से झारखंड, बिहार होते हुए यूपी तो पहुंच गया लेकिन कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। यूपी के ही लखीपुरखीर की बलरामपुर चीनी मिल तक इसे जाना है। चीनी मिल के लिए बॉयलर लेकर जा रहे इस ट्रक के लिए अलग रास्ते भी बनाए जा रहे हैं। इसके बाद भी दिक्कतें कम नहीं हो रही है। शुक्रवार को बिहार से चंदौली के रास्ते यूपी में आया यह ट्रक तीन दिनों बाद भी चंदौली में ही फंसा है। अब उसका रास्ता दलदल ने रोक दिया है।

    चंदौली में रेवसा के पास रिंग रोड पर पुल के कारण इसे पूर्वी सर्विस लेन से निकालने की कोशिश हुई लेकिन दलदल के कारण आगे नहीं जा सका। इसके बाद इसे पश्चिमी लेन पर लाया गया है। अगर किलोमीटर में बात करें तो 48 घंटे में 48 किलोमीटर भी ट्रक नहीं बढ़ सका है। चंदौली से इसे वाराणसी आना है। यहां भी इसे गुजारने के लिए तमामा तैयारियां की गई हैं। तीन फुट ओवरब्रिज को तोड़ा भी जाना है। चंदौली में रिंग रोड के पश्चिमी लेन पर आगे की राह आसान रही तो सोमवार की दोपहर तक इसके आगे रवाना होने की संभावना है।

    तीन से चार मंजिला ऊंचाई बन रही बाधा
    बेल्जियम से समुद्र के रास्ते करीब दो सौ टन वजनी बॉयलर ओडिशा लाने के बाद 308 पहियों वाले ट्रक के जरिए सड़क मार्ग से ही लखीमपुरखीरी पहुंचाने की कवायद हो रही है। तीन से चार मंजिला मकान के बराबर वाली ऊंचाई के कारण इसे सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    उमड़ रही भीड़ भी बन रही चनौती
    नौबतपुर चेस्क पोस्ट से यूपी के चंदौली पहुंचा ट्रक रविवार को जिले के ही रेवसा में पूर्वी सर्विस लेन पर खड़ा रहा। रास्ते की मरम्मत के लिए टीम पूरे दिन मशक्कत करती रही। इस दौरान मशीन को देखने के लिए लोगों की लग रही भीड़ को भी नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही है। अलीनगर थाने के अपराध निरीक्षक रमेश कुमार यादव पुलिस टीम के साथ मौजूद रहे।

    नेशनल हाईवे पर दोबारा आज आने की संभावना
    शुक्रवार को नौबतपुर से आगे बढ़ने पर पहले कटसिला के पास हाइवे पर शाम होने की वजह से इसे रोक दिया गया था। शनिवार को पचफेड़वा के पास हाइवे पर रिंग रोड का पुल होने के कारण वैकल्पिक मार्ग के रूप में उसे पहले रिंग रोड पर ले जाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। रविवार को मशीन रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंची। लेकिन आगे जमीन दलदली होने से मशीन को सर्विस लेन पर ही रोक दिया गया। देर शाम इसे रिंग रोड पार करके पश्चिमी लेन पर पहुंचाया गया। इसके बाद फिर एनएच 19 पर लाया जाना है।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में छाया योगी सरकार का यूपी स्टार्टअप मिशन

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में छाया योगी सरकार का यूपी स्टार्टअप मिशन

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में छाया योगी सरकार का यूपी स्टार्टअप मिशन

    – स्टार्टअप मिशन के बैनर तले 60 स्टार्टअप्स ने पेश किए अपने इनोवेशन, तीन दिनों में 2000 से अधिक विजिटर्स ने किया स्टार्टअप पवेलियन का दौरा

    – आईटी-आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने लिया हिस्सा

    – भारत इनोवेट्स के लिए चयनित छह और यूपी स्टार्टअप फंड से वित्त पोषित छह स्टार्टअप्स ने भी प्रदर्शित किए अपने नवाचार

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 (यूपीआईटीएस-26) में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के पवेलियन में प्रदेश के उभरते स्टार्टअप्स के नवाचार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्टार्टअप मिशन के बैनर तले विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 60 स्टार्टअप्स ने अपने उत्पाद, तकनीक और नवाचार प्रदर्शित किए हैं। पिछले तीन दिनों में 5000 से अधिक विजिटर्स स्टार्टअप पवेलियन का दौरा कर चुके हैं। पवेलियन में आईटी-आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स की भागीदारी देखने को मिल रही है।

    अलग-अलग सेक्टर के 60 स्टार्टअप्स की भागीदारी
    यूपी स्टार्टअप मिशन सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि यूपीआईटीएस-26 के पवेलियन में 60 स्टार्टअप्स ने प्रतिभाग किया है। इनमें आईटी और आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र प्रमुख हैं। अलग-अलग सेक्टर से आए स्टार्टअप्स ने अपने उत्पादों और तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया है। वहीं स्टार्टअप पवेलियन को देखने के लिए विजिटर्स की भी अच्छी संख्या पहुंच रही है। पिछले तीन दिनों में 5000 से अधिक लोग पवेलियन का दौरा कर चुके हैं। विजिटर्स ने स्टार्टअप्स के उत्पादों, तकनीकी समाधानों और नवाचारों को देखा तथा उनके बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने बताया कि यूपी स्टार्टअप मिशन के पवेलियन में भारत इनोवेट्स के लिए चयनित छह स्टार्टअप्स ने भी भागीदारी की है। इन स्टार्टअप्स ने ट्रेड शो में अपने नवाचारों को प्रदर्शित किया। इसके अलावा यूपी स्टार्टअप फंड से वित्त पोषित छह स्टार्टअप्स ने भी पवेलियन में अपने उत्पाद और नवाचार पेश किए हैं। स्टार्टअप पवेलियन में एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के सीईओ संदीप कुमार ने भी स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से संवाद किया। उन्होंने स्टार्टअप्स के काम और उनके नवाचारों के बारे में जानकारी ली। संवाद सत्र के दौरान उन्होंने स्टार्टअप फाउंडर्स को प्रोत्साहित किया और उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

    सौर ऊर्जा से उड़ान भर रहा ‘तेजस्वान’
    सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि ट्रेड शो में रक्षा तकनीक और डीपटेक से जुड़े नवाचार भी आकर्षण का केंद्र बने हैं। इनमें आईआईटी कानपुर की डीपटेक स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड का सौर ऊर्जा से संचालित अल्ट्रा लॉन्ग एंड्योरेंस यूएवी ‘तेजस्वान’ खास है। यह फिक्स्ड विंग विमान सौर ऊर्जा और बैटरी के संयोजन से संचालित होता है और लगातार 12 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है। तेजस्वान में जीपीएस स्पूफिंग-रोधी नेविगेशन, मल्टी-बैंड रेडियो आधारित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हार्डनिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसकी रेंज करीब 150 किलोमीटर है, जिसे जरूरत के अनुसार 250 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इसका टेक-ऑफ वजन 60 किलोग्राम से कम है और यह 5 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 25 मीटर प्रति सेकंड बताई गई है और उड़ान भरने के लिए करीब 200 मीटर रनवे की आवश्यकता होती है। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, संचार, लक्ष्य निर्धारण, समुद्री निगरानी और खोज एवं बचाव अभियानों में किया जा सकता है।

    लंबी दूरी तक जाने वाला ‘काल’ ड्रोन बना जिज्ञासा का केंद्र
    रक्षा तकनीक के क्षेत्र में ‘काल’ ड्रोन भी विजिटर्स की जिज्ञासा का केंद्र बना है। यह वन-वे अटैक ड्रोन प्रणाली है, जो करीब 1000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है और 7 से 8 घंटे तक उड़ान में रह सकती है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन 200 किलोग्राम और यह 50 किलोग्राम तक का हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है। इसकी क्रूज गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा है। बेंगलुरु स्थित न्यूमेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने अपने टेथर्ड इलेक्ट्रिक यूएवी ‘निंबसस्कोप’ का प्रदर्शन किया। यह जमीन से जुड़े तार के माध्यम से बिजली प्राप्त करता है, जिससे लगातार आठ घंटे तक हवा में स्थिर रहकर निगरानी कर सकता है। ड्रोन मोड में इसकी अधिकतम ऊंचाई 110 मीटर एजीएल और फील्ड एलीवेशन 5500 मीटर एएमएसएल तक बताई गई है। बिना टेदर के यह 45 मिनट तक 10 किलोमीटर की रेंज में उड़ान भर सकता है। इसमें 256-बिट एईएस एन्क्रिप्शन, हाई-बैंडविड्थ वीडियो डाउनलिंक और सुरक्षित आरएफ लिंक की सुविधा है। इसे सर्विलांस, टोह लेने और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए उपयोगी बताया गया है।

    स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी प्रदर्शित किया गया
    आईडीआर के स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए। इनमें अभ्यास एमके-1 एक लंबी अवधि का माइक्रो एफपीवी ड्रोन है, जिसकी करीब 40 मिनट तक उड़ान क्षमता है और इसे ऑपरेटरों के प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया है। वहीं आईडीआर का टैक्टिकल नैनो ड्रोन सैनिकों से आगे बढ़कर वास्तविक समय की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम बताया गया है।

  • निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी

    निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी

    निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी

    मंत्री गुप्ता- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान

    अब निवेशकों के उद्योग लगने तक होगी हैंडहोल्डिंग- मंत्री नंद गोपाल गुप्ता

    ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रदेश ने निवेशकों के बीच अपना क्रेडिट और भरोसा संवाद, सुविधा और निरंतर सहयोग के माध्यम से बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित न रहकर उद्योग स्थापित होने तक आवश्यक सहयोग और हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है।

    ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में किए गए रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और विश्वास को दर्शाती है।

    मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं तथा करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। 

    उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें निवेशक को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान उपलब्ध कराया जाए।

    ‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’

    नंदी ने कहा कि निवेशक के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे नीति, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और अन्य आवश्यक अनुमतियों के संबंध में भी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशक सुविधा को कार्यालय की कार्यप्रणाली और व्यवहार से जोड़ने पर जोर दिया।

    रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए अवसर

    उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र का मतलब केवल टैंक, मिसाइल या विमान बनाना नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए अवसर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में रक्षा विनिर्माण का इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी उठा सकती हैं।

    कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा निवेश की बुनियाद

    मंत्री ने कहा कि निवेश के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा। बेहतर एक्सप्रेसवे एवं परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी और औद्योगिक आधारभूत ढांचे से प्रदेश में कारोबार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने का है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। नंदी ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ कदम-दर-कदम खड़ी है और उनका निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता के विस्तार से जुड़ सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    बॉक्स 

    रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर: कर्नल संजय सिंह

    यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, स्पेशल केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह अनुमान आधारित नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं पर आधारित है, इसलिए स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।

  • जनता दर्शन में बुजुर्ग की पीड़ा सुन भावुक हुए CM योगी, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

    जनता दर्शन में बुजुर्ग की पीड़ा सुन भावुक हुए CM योगी, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

    लखनऊ
    जनसेवा को सदैव सर्वोपरि रखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पीड़ितों को समाधान का भरोसा दिया।

    रायबरेली से आए एक बुजुर्ग अपनी पीड़ा कहते भावुक हो गए, इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कहा कि शांति, खुशहाली व सुदृढ़ कानून व्यवस्था ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान है, इसमें बाधा डालने वालों को कानूनी ढंग से सबक सिखाएं। कब्जे की शिकायतों पर भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

    हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी। उन्होंने हर पीड़ित को आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध-पारदर्शी निस्तारण कराएं।

    मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग का सुना प्रकरण, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश
    रायबरेली से एक बुजुर्ग भी जनता दर्शन में पहुंचे। शरीर पर लगी चोट मुख्यमंत्री को दिखाते हुए उनका गला रुंध गया। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे पूरे प्रकरण की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन पर अकारण हमला कर दिया है। आरोपियों को लगता है कि वह कहीं बाहर रहते हैं। ऐसे में घात लगाए बदमाशों ने उन्हें पीटा और रुपये छीन लिए। इस पर मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सख्त से सख्त कार्रवाई कर इस प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करें।

    राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर
    कुछ पीड़ितों ने जमीन जबरन कब्जा किए जाने की भी शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।

     

  • योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा

    योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा

    योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा

    -मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़

    -वादी ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का दिया शपथ-पत्र, मौके से भी हटाया 30 साल पुराना कब्जा

    -आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित चार नजूल भूखंड अब सुरक्षित रखने की दिशा में कार्रवाई तेज

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।
     यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की।

    अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक 
    पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई।

    वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया
    प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई।

    1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन
    वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है।

    वर्जन
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
    दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन

  • यूपी में मिठाई खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, 15 अक्टूबर से ‘यूज बाई डेट’ अनिवार्य

    यूपी में मिठाई खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, 15 अक्टूबर से ‘यूज बाई डेट’ अनिवार्य

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नई व्यवस्था लागू किया है।

    अब राज्य में 15 अक्टूबर से विक्रय के लिए प्रदर्शित एवं भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाई डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है, जिनके संबंध में अब तक उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रविधान नहीं था।

    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। विभाग का मानना है कि मिठाई की यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक किया जाना उचित है।

    इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर अवसान तिथि अथवा ‘यूज बाई डेट’ अंकित किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, खुली मिठाइयों के संबंध में इस प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रविधान नहीं था।

    दूध प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक
    उत्तर प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डाई एथिलीन ग्लाइकोल के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। निरीक्षण में पता चला कि कुछ दुग्ध प्रसंस्करण प्रतिष्ठानों में पाश्च्युरीकरण, प्रशीतन आदि प्रक्रियाओं में एथिलीन ग्लाइकोल अथवा डाई एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में किया जा रहा है।

    ये रसायन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। प्रसंस्करण उपकरणों में लीकेज होने पर इनके दूध में मिल जाने की आशंका को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पहले से किया जा रहा है।

  • मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़

    मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।
     यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की।

    अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक
    पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई।

    वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया
    प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई।

    1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन
    वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है।

    वर्जन
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
    दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन