Category: उत्तर प्रदेश

  • UP में लगातार बारिश से बिजली संकट, 716 फीडर और 173 सब स्टेशन ठप; 15 लाख उपभोक्ता प्रभावित

    UP में लगातार बारिश से बिजली संकट, 716 फीडर और 173 सब स्टेशन ठप; 15 लाख उपभोक्ता प्रभावित

    लखनऊ
     अप्रत्याशित तौर लगातार वर्षा से राज्य में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। पेड़ व टहनियों के गिरने से बड़ी संख्या में खंभे व तार टूटे हैं। ट्रांसफार्मर जले हैं जिससे लाखों उपभोक्ताओं को घंटों बिना बिजली के रहना पड़ रहा है।

    हालांकि, प्रमुख सचिव ऊर्जा व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने बिजली आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए युद्ध स्तर पर मरम्मत के कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मरम्मत कार्य पर रात-दिन नजर रखने के लिए कॉरपोरेशन के मुख्यालय शक्तिभवन में कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां निदेशक वितरण जीडी द्विवेदी की देखरेख में छह अधीक्षण अभियंताओं को तैनात किया गया है।

    प्रदेश के लगभग पौने चार करोड़ उपभोक्ताओं को तकरीबन 25 हजार फीडर और 4650 सब स्टेशन के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। लगातार वर्षा से शनिवार देर रात तक प्रदेशभर के 11 केवी के 716 फीडर और 33 केवी के 173 सब स्टेशन से ही बिजली आपूर्ति ठप हो गई।

    इन सब स्टेशन से ही 15 लाख उपभोक्ताओं के प्रभावित होने का अनुमान है। बिजली आपूर्ति ठप होने की लगातार शिकायतें टोल फ्री नम्बर 1912 पर भी आ रही हैं। ऐसे में अध्यक्ष ने रणवीर प्रसाद ने लेसा समेत सभी विद्युत वितरण निगमों के अधिकारियों को बिजली व्यवस्था की लगातार निगरानी और स्थानीय फाल्ट को न्यूनतम समय में ठीक करने के निर्देश दिए हैं।

    कहा गया है कि वर्षा के कारण कहीं भी बिजली आपूर्ति ठप होने पर सक्रिय गैंग तत्काल मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य करें। स्थानीय फाल्ट की जानकारी संचार माध्यमों के जरिए उपभोक्ताओं को दी जाए। लगातार वर्षा से बिजली दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने तथा मरम्मत कार्य सुरक्षा उपकरणों के साथ ही कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं से किसी भी घटना या ब्रेकडाउन की सूचना तत्काल 1912 पर देने की अपील भी की है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने भी प्रसाद से मुलाकात की।

    गौर करने की बात यह है कि वर्षा से बिजली की मांग भी 28 हजार मेगावाट से घटकर 13 हजार मेगावाट से भी नीचे तक पहुंच गई। मांग घटने से प्रदेश को कटौती मुक्त कर महानगरों से गांवों तक 24 घंटे बिजली दी जा रही है। कई तापीय यूनिटों को कम क्षमता पर चलाने के साथ ही अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंज में बेची जा रही है।

    कंट्रोल रूम के नंबर
        शक्ति भवन – 0522-2288737, 2288738
        टोल फ्री – 1912
        मध्यांचल – 0522-4950397
        केस्को – 8189045757
        पूर्वांचल – 0542-2300137
        दक्षिणांचल – 9412719627
        पश्चिमांचल – 9412749313

     

  • एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में नई छलांग लगा रहा उत्तर प्रदेश: सुनील कुमार शर्मा

    एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में नई छलांग लगा रहा उत्तर प्रदेश: सुनील कुमार शर्मा

    ग्रेटर नोएडा

    ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। आने वाले समय में एआई और आईटी का कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ाव प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा।

    मंत्री ने बताया कि हाल में 52 स्टार्टअप के साथ हुई बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में स्टार्टअप फूड सप्लाई से जुड़े हैं, जबकि कृषि क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने वाले स्टार्टअप की संख्या अभी कम है। उन्होंने इसे एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि एआई और आईटी को कृषि आधारित उद्योगों से जोड़कर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। प्रदेश में मक्का की खेती को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ने के बाद किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। भविष्य में इसी तरह तकनीक आधारित समाधान कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निवेशकों को अनुकूल वातावरण देने के लिए लगातार नीतियों में आवश्यक बदलाव कर रही है। उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मुख्यमंत्री के स्तर से नीतिगत सुधार किए जाते हैं। निवेशकों को प्रोत्साहन राशि देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष जोर है और विभाग में निवेश प्रोत्साहन से संबंधित कोई फाइल लंबित न रखने की व्यवस्था की गई है। पिछले एक वर्ष में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए गए हैं।

    सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखा है। एक्सप्रेसवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तथा एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने रक्षा उत्पादन में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी अवैध हथियार निर्माण की चर्चा होती थी, वहीं आज प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइल और एके-203 जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण की दिशा में काम हो रहा है।

    उन्होंने प्रदेश के बढ़ते बजट को भी आर्थिक विस्तार से जोड़ते हुए कहा कि 2017 में राज्य का बजट करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 9.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बदलाव बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, निवेश और राजस्व क्षमता का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तकनीक और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को हर जिले तक पहुंचाना है। वर्ष 2026-27 के लिए तकनीक और औद्योगिक विकास को प्रदेश के सभी जिलों तक विस्तार देने के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है। उन्होंने निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

  • “सपा राज में पूरे प्रदेश की तिजोरी लूटकर सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे”: ओम प्रकाश राजभर

    “सपा राज में पूरे प्रदेश की तिजोरी लूटकर सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे”: ओम प्रकाश राजभर

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'सैफई मॉडल' के विकास के उदाहरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश की सरकार थी तब 24 घंटे बिजली केवल सैफई में मिलती थी। सैफई महोत्सव होता था और सैफई महोत्सव में मुंबई से हीरो-हीरोइन आकर डांस करते थे। आसपास के गांवों में दुष्टता का आतंक हो जाता था और लोग भय ग्रस्त होकर घरों में कैद रहते थे।

    अखिलेश राज में सिर्फ सैफई का हुआ विकास

    राजभर ने कहा कि अखिलेश ने केवल सैफई का ही विकास किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसे ले जा कर वहां लगा दिया। सैफई में मेडिकल कॉलेज बनवाने से लेकर वहां की सड़कें तक चौड़ी करवा दी। दूसरी जगहों की उपेक्षा हुई। 

    SIR पर अखिलेश के आरोप गलत

    राजभर ने कहा कि अखिलेश SIR पर जो आरोप लगा रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। मैं जिस विधान सभा से विधायक हूं वहां 16 हजार वोटर मृतक थे, उनको निकाला गया। इसके अलावा 23 हजार स्थानांतरित मतदाता थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने एक जगह करने के लिए स्वीकृत किया। SIR कोई नया नहीं है. यह 1952 से लेकर 2003 के बीच में कई बार हुआ है। 

    अखिलेश की सरकार में गुंडागर्दी चरम पर थी 

    राजभर ने कहा कि अखिलेश के राज में गुंडागर्दी, लूट, हत्या, बलात्कार और छिनैती चरम पर थे।  मुजफ्फरनगर जब दंगों में जल रहा था तो यह मुख्यमंत्री होते हुए डांस देख रहे थे। सरकारी नौकरियां पैसे पर देते थे। राजभर ने कहा अखिलेश को कोई वोट नहीं देगा। अखिलेश वोट पाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। उन्हें तो अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

  • यूपीआईटीएस में दिखा परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पर जोर, 28 से 30 सितंबर तक चलेगा ऑपरेशन कवच

    यूपीआईटीएस में दिखा परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पर जोर, 28 से 30 सितंबर तक चलेगा ऑपरेशन कवच

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा

    योगी सरकार के कार्यकाल में परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में भी देखने को मिल रही है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में परिवहन विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से विभागीय सेवाओं, सड़क सुरक्षा और वाहन संबंधी नई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। यहीं पर परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि सड़क सुरक्षा के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेश में अनधिकृत बसों के विरूद्ध ऑपरेशन कवच अभियान चलाया जाएगा।

    28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच

    परिवहन विभाग की तकनीकी कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ ऑपरेशन कवच के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य परिवहन नियमों के अनुपालन को प्रभावी बनाना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

    एनसीआर के प्रदूषण पर ईओएल वाहनों पर फोकस

    उन्होंने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्र पर स्क्रैप कराने की अपील की। एनसीआर के वाहन स्वामियों से पुराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप जीवन पूरा कर चुके वाहनों को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके।

    परिवर्तन पोर्टल से पुराने वाहनों को बदलने का लाभ

    उन्होंने परिवहन विभाग की परिवर्तन योजना की जानकारी देते हुए यूरो मानक बीएस 1,2,3 व 4 वाले वाहनों के स्वामियों से परिवर्तन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की अपील की। वहीं कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। लोगों से नियंत्रित गति से वाहन चलाने, दोपहिया पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने, शराब पीकर वाहन न चलाने व ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई।

    परिवहन विभाग ने बताया कि जनसुविधा के लिए उसकी 52 सेवाओं को फेसलेस किया गया है, जबकि 40 सेवाएं ऑटो अप्रूवल मोड में संचालित की जा रही हैं। ट्रेड शो में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी आधुनिक तकनीक और सिमुलेटर के जरिए युवाओं को जानकारी भी दी जा रही है।

  • योगी सरकार की तत्परता से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव तेज, जिलों में फील्ड पर उतरा प्रशासन

    योगी सरकार की तत्परता से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव तेज, जिलों में फील्ड पर उतरा प्रशासन

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।

    सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश

    राहत आयुक्त के अनुसार 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

    क्षतिग्रस्त मकानों की सूचना पर मदद में जुटा प्रशासन

    अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से प्रदेश में 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस संबंध में प्रशासन मदद उपलब्ध कराने में जुट गया है।

    फसल क्षति का तत्काल आकलन

    अधिकारियों को फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण और आकलन कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था व पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने को भी कहा गया है।

    फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी

    राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री और अनुमन्य सहायता राशि का वितरण प्राथमिकता के आधार पर करने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने को कहा गया है।

    रेस्क्यू अभियान लगातार जारी

    जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों को आवश्यक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने आमजन से जलभराव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा नदियों-नालों के तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। आपातकालीन सहायता के लिए राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की भी अपील की गई है।

  • बहराइच की डिजिटल लाइब्रेरी में QR कोड से लगेगी हाजिरी, शासन स्तर से होगी ऑनलाइन निगरानी

    बहराइच की डिजिटल लाइब्रेरी में QR कोड से लगेगी हाजिरी, शासन स्तर से होगी ऑनलाइन निगरानी

    बहराइच
     जिले के 14 विकास खंडों के 198 ग्राम पंचायतों में तैयार की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की हाजिरी अब क्यूआर कोड से लगेगी। विद्यार्थी के क्यूआर कोड स्कैन करते ही उसकी उपस्थिति दर्ज हो जाएगी और इसकी जानकारी सीधे शासन स्तर तक पहुंचेगी। इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।

    जिले में डिजिटल लाइब्रेरियों को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। अंदर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के साथ साज-सज्जा कराई गई है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगी। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित किताबें भी रखी गई हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी में कम से कम 25 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है।

    बड़ी लाइब्रेरियों में एक साथ करीब 50 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए क्यूआर कोड लगाया गया है। विद्यार्थी के स्कैन करते ही उसकी हाजिरी दर्ज हो जाएगी।

    इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और इसकी निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। व्यवस्था की देखरेख जिला पंचायत राज अधिकारी के मार्गदर्शन में की जा रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 7.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

    डिजिटल लाइब्रेरियों की स्थापना का काम चल रहा है। यहां पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों की हाजिरी भी लगेगी। इसके लिए क्यूआर कोड लगाया जाएगा। लाइब्रेरी स्थापित होने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से लाइव प्रसारण के माध्यम से इन सभी का उद्घाटन भी किया जा सकता है। -चंद्रभान सिंह, डीपीआरओ।

     

  • निर्यात में यूपी का नया रिकॉर्ड, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ी रफ्तार

    निर्यात में यूपी का नया रिकॉर्ड, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ी रफ्तार

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) के सकारात्मक परिणाम प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में तेजी से दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा का निर्यात 55.2 लाख अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जुलाई के 29.1 लाख डॉलर की तुलना में 89.7 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि इसी अवधि में देश का समग्र निर्यात 25.7 प्रतिशत बढ़ा। यानी उत्तर प्रदेश की निर्यात वृद्धि राष्ट्रीय वृद्धि की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना रही।

    जुलाई में राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की मासिक हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया। 

    व्हिस्की-वोदका के निर्यात ने पकड़ी तेज रफ्तार

    प्रदेश के निर्यात प्रदर्शन में व्हिस्की और वोदका की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जुलाई में व्हिस्की के निर्यात में 78.8 प्रतिशत, जबकि वोदका के निर्यात में 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। मात्रा के लिहाज से प्रदेश का निर्यात 230 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 90 प्रतिशत रही। इससे प्रदेश की निर्यात क्षमता और बाजार विस्तार की बढ़ती गति का संकेत मिलता है।

    4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा

    अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई।

    नई इकाइयों से निवेश और किसानों को भी लाभ

    नीति के सकारात्मक प्रभाव से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद संयंत्रों के पुनर्जीवन का सिलसिला भी तेज हुआ है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है, जबकि एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है।

    आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक भी पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। नीति में यह भी प्राविधान है कि जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी।

    कांच, पैकेजिंग से परिवहन तक बढ़े अवसर

    आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि देशभर में बोतलबंद मदिरा के निर्यात में जुलाई में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने इसी अवधि में 55.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। बोतलबंद निर्यात में प्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी भी 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई। निर्यात में वृद्धि का असर केवल आसवनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गन्ना, शीरा और अनाज से जुड़ी पश्च संबद्धता के साथ कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात भी पूरा हुआ, जिससे पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। यह राशि अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण उपरोक्त आंकड़ों के अतिरिक्त है।

    यूपी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

    उत्तर प्रदेश की निर्यात नीति का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स विभिन्न राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा समेत विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना की गई और इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया। राष्ट्रीय आदर्श नीति में उत्तर प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • शामली ने यूपी ट्रेड शो में किया जनपद के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा

    शामली ने यूपी ट्रेड शो में किया जनपद के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा

    सहारनपुर

    ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी ट्रेड शो में शामली से शामिल 10 वर्षों से भी अधिक समय से निर्यात कर रही करियर व्हीलस प्राइवेट लि. सहित जनपद की 10 कंपनियां भाग ले रही हैं। इन कंपनियों के उत्पादों के प्रति ट्रेड शो में विदेशी व्यापारियों का रुझान बढ़-चढ़ कर हो रहा है। जबकि रिटेल सेल की बात करें तो कैराना के साधु स्वीट्स एवं अग्रवाल स्वीट्स पर रिटेल सेल रिकॉर्ड तोड़ रही है।

    जनपद शामली ने ट्रेड शो के लिए निर्धारित लक्ष्य को किया शत-प्रतिशत पूरा

    यूपी ट्रेड शो में शामली से सम्मिलित होने वाली कंपनियों में करियर व्हीलस प्राइवेट लिमिटेड, अमर स्प्लिंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बेजरिका प्राइवेट लिमिटेड, कैरा डाइम हेल्थ केयर, एलएलपी, आरव एग्रो फूड्स, श्री आयुर्वेदिक संस्थान, अंकित हैंडलूम तथा एक जनपद एक व्यंजन में साधु स्वीट्स अग्रवाल स्वीट्स की स्टाल लगी है। जनपद शामली ने निर्धारित किए गए लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा किया है।

    साधु स्वीट्स का पलंग तोड़ पेड़ा व बर्फी विदेशी महमानों की बन रहे पहली पसंद

    साधु स्वीट्स के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि उनके स्टाल पर ट्रेड शो के पहले दिन से ही ग्राहकों की भारी भीड़ हो रही है। हालांकि उनकी स्टॉल पर सभी प्रकार की मिठाई हैं लेकिन ग्राहकों की पहली पसंद उनकी पलंग तोड़ बर्फी ब पलंग तोड़ पेड़ा बने हुए हैं। राकेश गर्ग कहते हैं कि प्रदेश सरकार के इस अभिनव प्रयास से उनके उत्पादन का स्वाद विदेशी मेहमानों तक भी पहुंच रहा है क्योंकि ट्रेड शो में अकेले हाल नंबर 17 में वियतनाम, रूस, बेलारूस तथा ऑस्ट्रिया के विदेशी व्यापारी ठहरे हैं जो भारत के इन व्यंजनों को काफी पसंद कर रहे हैं।

     

  • कन्नौज के इत्र की खुशबू से महका ट्रेड शो, पांचवीं पीढ़ी ने संभाली विरासत

    कन्नौज के इत्र की खुशबू से महका ट्रेड शो, पांचवीं पीढ़ी ने संभाली विरासत

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि का योगी सरकार में व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। वर्ष 2017 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में इस निधि से कुल 8,397 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 1548 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे से लेकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के कल्याण तक विभिन्न क्षेत्रों में इन परियोजनाओं का सुधारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

    भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के मुताबिक खनन से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत अवैध खनन और परिवहन पर रोक के लिए चेकिंग रोड का निर्माण और समय-समय पर मरम्मत, वृक्षारोपण व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य भी कराए गए हैं।

    शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर

    योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों से अधिक में डीएमएफ निधि से प्रत्येक जनपद में शिक्षा से जुड़ी 3,419 परियोजनाओं के तहत प्राथमिक विद्यालयों का जीर्णोद्धार कराया गया। स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, स्पेस लैब, कंप्यूटर सिस्टम समेत आधुनिक सुविधाएं व तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 323 परियोजनाओं के तहत अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक एवं नवीन उपकरण उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है।

    गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

    ग्रामीण खनन प्रभावित क्षेत्रों में 516 भौतिक अवस्थापना परियोजनाओं के तहत सामुदायिक भवनों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास, स्वच्छता, सौर प्रकाश, पेयजल, कृषि और सिंचाई से जुड़ी परियोजनाएं भी संचालित हैं।

    महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 3,070 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, वजन मापने की मशीन, लंबाई मापने के लिए टेप जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए रात्रि केंद्र, किचन और हैंडपंप जैसी सुविधाओं पर भी काम किया गया। पैदल यात्रा के लिए फुटपाथ निर्माण जैसी योजनाएं भी जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से कई जनपदों में पूरी हो गईं हैं।

    कौशल विकास से रोजगार के अवसर

    प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और अन्य लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण, डेयरी फार्मिंग में रोजगार सृजन, कौशल विकास प्रशिक्षण और सिलाई प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

  • सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से प्रेम मंदिर तक बयां कर रहे यूपी का गौरवशाली वैभव

    सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से प्रेम मंदिर तक बयां कर रहे यूपी का गौरवशाली वैभव

    ग्रेटर नोएडा

    सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से लेकर दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण और 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति… उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में संस्कृति विभाग का आउटलेट प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सामने ला रहा है। इंडिया एक्सपो मार्ट में सजी प्रदर्शनी में प्राचीन मूर्तियों, डिजिटल पांडुलिपियों, चित्रों और ऐतिहासिक स्थलों की प्रतिकृतियों के जरिए उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति के विभिन्न कालखंडों को प्रदर्शित किया गया है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आउटलेट का मुख्य द्वार प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है, जो आगंतुकों के लिए आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है।

    सातवीं से 12वीं सदी तक की मूर्तियां बनीं आकर्षण

    प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त प्राचीन प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है। मिर्जापुर से प्राप्त दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण की मूर्ति, सुल्तानपुर से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा, कानपुर के रानीपुर से प्राप्त दसवीं सदी की महेश्वर की मूर्ति, अल्मोड़ा से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा और गोरखपुर से प्राप्त 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति लोगों का ध्यान खींच रही है। सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण बनी हुई है।

    इन प्रतिमाओं के जरिए अलग-अलग कालखंडों में विकसित भारतीय शिल्पकला, धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक जीवन की झलक दिखाई गई है। विद्यार्थियों और युवाओं में इन प्राचीन धरोहरों को लेकर विशेष जिज्ञासा देखी जा रही है। कई युवा मूर्तियों के इतिहास और उनके निर्माण काल से जुड़ी जानकारी भी ले रहे हैं।

    प्रेम मंदिर की प्रतिकृति पर सेल्फी का क्रेज

    ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। आउटलेट के प्रवेश द्वार को प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के तौर पर तैयार किया गया है। इसकी भव्य संरचना आगंतुकों को आकर्षित कर रही है और यहां लोग तस्वीरें खींचने के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। इस तरह यह द्वार प्रदर्शनी के सांस्कृतिक संदेश के साथ आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।

    नई दिल्ली से प्रदर्शनी देखने पहुंचीं कक्षा 11 की छात्रा आयुषी ने बताया कि उन्होंने अब तक ऐसी प्राचीन मूर्तियां पाठ्यपुस्तकों में चित्रों के रूप में ही देखी थीं। यहां उन्हें इन्हें सामने से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी से विद्यार्थियों को भारतीय और सनातन संस्कृति को करीब से समझने में मदद मिलती है।

    रसखान की समाधि से गोवर्धन तक दिखे सांस्कृतिक स्थल

    राज्य ललित कला अकादमी की ओर से विभिन्न चित्रकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। चित्रों में सांस्कृतिक विरासत के साथ वर्तमान समय की कला को भी स्थान दिया गया है। यहां चित्रकार मौके पर ही आगंतुकों के पोर्ट्रेट तैयार कर रहे हैं। इससे प्रदर्शनी में कला की प्रस्तुति को जीवंत रूप मिल रहा है।

    अलग-अलग कालखंडों की पांडुलिपियों को डिजिटल फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी पुरानी ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक सामग्री को आधुनिक तकनीक के जरिए देख और समझ पा रही है। प्रदर्शनी में मथुरा के महावन स्थित रसखान की समाधि, गोवर्धन के कुसुंबा सरोवर और मिर्जापुर के सारनाथ मंदिर की प्रतिकृतियां भी तैयार की गई हैं।

    संस्कृति विभाग के प्राविधिक सहायक (संस्कृत) हरिश्चंद्र दुबे ने बताया कि प्राचीन संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं को देखकर युवाओं में काफी उत्साह है। मूर्तियों, चित्रों और डिजिटल पांडुलिपियों को देखकर वे उनके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। विभाग की ओर से उन्हें जानकारी दी जा रही है, ताकि नई पीढ़ी प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझ सके।