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  • बिहार में पंचायत परिसीमन की तैयारी तेज, 2011 के आधार पर मोबाइल ऐप से तय होंगी सीमाएं

    बिहार में पंचायत परिसीमन की तैयारी तेज, 2011 के आधार पर मोबाइल ऐप से तय होंगी सीमाएं

    छपरा.

    बिहार में त्रिस्तरीय पंचायतों के पुनर्गठन और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार के निर्णय के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी है।

    परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए प्रगणक ब्लॉक की सीमाओं और संबंधित आंकड़ों को मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज किया जाएगा।

    2011 की जनगणना के आधार पर तय होंगी सीमाएं
    आयोग के निर्देश के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार प्रगणक ब्लॉकवार जनसंख्या, नक्शे और सीमाओं का मिलान करते हुए उनकी सीमा संबंधी जानकारी विशेष मोबाइल ऐप पर दर्ज की जाएगी। इससे पंचायतों के परिसीमन में आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। परिसीमन से जुड़ी ऑनलाइन प्रविष्टियों के दौरान कई जिलों में ऐसे बेचिरागी राजस्व ग्राम भी सामने आए हैं, जो गैर-आबाद होने के बावजूद राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं और भौतिक रूप से मौजूद हैं। पूर्व के पोर्टल पर इनके लिए अलग विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण इनका विवरण दर्ज नहीं हो सका था। अब ऐसे सभी गांवों की जानकारी भी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी।

    आयोग ने जारी किए दिशानिर्देश
    आयोग ने इस संबंध में जिला निर्वाचन पदाधिकारियों-सह-जिला पदाधिकारियों, जिला पंचायत राज पदाधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। तकनीकी तैयारियां पूरी होने के बाद परिसीमन की जमीनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिला पंचायती राज पदाधिकारी शशि कुमार ने बताया कि तकनीकी तैयारियां पूरी हो गई हैं। जल्दी ही परिसीमन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

  • राजस्थान थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती-2025 पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक नियुक्तियां रोकीं

    राजस्थान थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती-2025 पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक नियुक्तियां रोकीं

    जयपुर
    राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2025 के लेवल-1 पदों की नियुक्ति पर लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है। न्यायाधीश समीर जैन की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।

    परिणाम में बदलाव करना मुश्किल
    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कहा कि इस चरण में नियुक्तियां देने से तीसरे पक्ष के अधिकार बन जाएंगे और बाद में भर्ती प्रक्रिया या परिणाम में बदलाव करना मुश्किल होगा। अदालत ने याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए चयन बोर्ड को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए नियुक्तियों पर रोक अगली सुनवाई तक जारी रखी।

    याचिका में कहा गया कि परीक्षा में 17 प्रश्नों के उत्तरों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। विशेषज्ञों की राय के बाद बोर्ड ने इनमें से 11 प्रश्न डिलीट कर दिए, लेकिन शेष विवादित प्रश्नों के उत्तरों को सही माना। इससे कई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। चयन बोर्ड ने 6 नवंबर 2025 को लेवल-1 के करीब 5,000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। लिखित परीक्षा 17 जनवरी 2026 को हुई थी।

    करीब 5 हजार पदों पर निकली थी भर्ती
    कर्मचारी चयन बोर्ड ने पिछले साल 6 नवंबर 2025 को ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती लेवल-1 के करीब 5 हजार पदों पर भर्ती निकाली थी। इसकी लिखित परीक्षा 17 जनवरी को आयोजित हुई थी। इसकी फाइनल आंसर-की 15 जून को जारी हुई थी। इसी के आधार पर बोर्ड ने 11 जून 2026 को भर्ती का परिणाम घोषित किया था। अब सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है।

  • मोहाली आवासीय परियोजना मामले में ED दफ्तर पहुंचीं IAS कंवलप्रीत बराड़

    मोहाली आवासीय परियोजना मामले में ED दफ्तर पहुंचीं IAS कंवलप्रीत बराड़

    जालंधर.

    मोहाली की एक बड़ी आवासीय परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में आइएएस अधिकारी कंवलप्रीत कौर बराड़ वीरवार को दस दिन में दूसरी बार जालंधर स्थित प्रवर्तन निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचीं।

    वह सुबह करीब 10 बजे कार्यालय पहुंचीं और बिना किसी से बातचीत किए सीधे अंदर चली गईं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में मोहाली की उक्त परियोजना में भूमि उपयोग परिवर्तन यानी सीएलयू की मंजूरी से संबंधित अनियमितताओं की बात सामने आई थी। जिन मंजूरियों को लेकर जांच चल रही है, उस समय कंवलप्रीत कौर बराड़ संबंधित पद पर तैनात थीं। इसी कारण उनसे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।

    18 अगस्त को भी हुई थी पेश
    इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने कंवलप्रीत कौर बराड़ को 18 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। उस दिन उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ हुई थी। इसके बाद अब दस दिन के भीतर दूसरी बार उन्हें जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। अधिकारी के दूसरी बार प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय पहुंचने से मामले की जांच को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वीरवार को उनसे किन बिंदुओं पर पूछताछ की जानी है और पूछताछ कितनी देर चलेगी।

    कई और अधिकारी भी जांच के दायरे में
    इस मामले में उस समय तैनात रहे कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से परियोजना से जुड़ी मंजूरियों और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कंवलप्रीत कौर बराड़ के कार्यालय पहुंचने के दौरान उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

  • रिम्स समेत झारखंड के 6 मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की होगी सख्त निगरानी, फेस बायोमेट्रिक से लगेगी हाजिरी

    रिम्स समेत झारखंड के 6 मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की होगी सख्त निगरानी, फेस बायोमेट्रिक से लगेगी हाजिरी

    रांची
     राज्य के रिम्स सहित सभी छह मेडिकल कालेजों में डाक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के इलाज की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सख्ती करने की तैयारी में है। खासकर सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के ड्यूटी आवर में अनुपस्थित रहने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

    इसके तहत एसआर की फेस बायोमेट्रिक उपस्थिति दिन में दो बार दर्ज कराने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उनकी साप्ताहिक उपस्थिति की समीक्षा विभाग स्तर पर होगी और उसी के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया को जोड़ा जाएगा।

    स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध निदेशक डा. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि मेडिकल कालेजों में इस समय सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर आने और ड्यूटी अवधि पूरी होने से पहले चले जाने की शिकायत है।

    इनमें एसआर को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। विभाग का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सक अपने निर्धारित समय में अस्पताल में मौजूद रहें और मरीजों को समय पर उपचार मिले।

    छह मेडिकल कालेजों में लागू होगी व्यवस्था
    नई व्यवस्था राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में लागू की जाएगी। इनमें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रांची, शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल धनबाद, फूलो झानो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल दुमका, शेख भिखारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल हजारीबाग, एमजीएम जमशेदपुर और मेदिनीराय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल पलामू शामिल हैं।

    विभाग के अनुसार, एसआर सहित चिकित्सकों की उपस्थिति का डिजिटल रिकार्ड तैयार होने से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन चिकित्सक कितने समय अस्पताल में रहा और किसने ड्यूटी पूरी की।

    ड्रेस कोड की भी होगी सख्ती
    डाॅ. भट्टाचार्य ने बताया कि चिकित्सकों के लिए ड्रेस कोड पहले से निर्धारित है, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन नहीं हो रहा है। अब इसे कड़ाई से लागू कराया जाएगा। चिकित्सकों को एप्रन और पहचान पत्र के साथ ड्यूटी पर रहना अनिवार्य होगा।

    सीनियर और जूनियर चिकित्सकों को अस्पताल परिसर में अनुशासन का पालन करना होगा। इसके साथ ही मरीजों और उनके स्वजनों के साथ चिकित्सकों के व्यवहार को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। चिकित्सकों को मरीजों एवं उनके स्वजनों से शालीन और संवेदनशील व्यवहार करने का निर्देश दिया जाएगा।

    उपस्थिति से जुड़ेगा वेतन
    नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एसआर की साप्ताहिक उपस्थिति का परीक्षण है। फेस बायोमेट्रिक से दर्ज उपस्थिति का विभाग स्तर पर प्रत्येक सप्ताह अवलोकन किया जाएगा। उपस्थिति और ड्यूटी से संबंधित रिकार्ड के आधार पर ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    इससे अस्पताल में केवल कागज पर उपस्थिति दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मालूम हो कि रिम्स में भी सीनियर रेजिडेंटों की नियुक्ति के लिए लगातार प्रक्रिया चल रही है और विभिन्न विभागों में एसआर की नियुक्तियां की जा रही हैं। जिससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में एसआर ही मेडिकल कालेजों का बैकबाेन है।

    मरीजों को क्या मिलेगा लाभ
    – चिकित्सकों की ड्यूटी के दौरान उपलब्धता सुनिश्चित होगी
    – ओपीडी और वार्ड में मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श मिलने की संभावना बढ़ेगी
    – गंभीर मरीजों की निगरानी में सुधार होगा।
    – एसआर के ड्यूटी से समय से पहले चले जाने की शिकायतों पर नियंत्रण होगा
    – डिजिटल उपस्थिति से जवाबदेही तय करना आसान होगा
    – ड्रेस कोड और पहचान पत्र से मरीजों को चिकित्सक की पहचान करने में सुविधा होगी
    – मरीजों और स्वजनों के साथ व्यवहार में सुधार लाने पर जोर होगा

    विभाग की असली चुनौती इलाज की उपलब्धता
    स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का सीधा संबंध केवल उपस्थिति से नहीं, बल्कि अस्पताल में डाक्टरों की उपलब्धता और मरीज के इलाज से है। मेडिकल कालेज अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में यदि डाक्टर निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं तो इसका सीधा असर ओपीडी, वार्ड, आपातकालीन सेवा और गंभीर मरीजों की निगरानी पर पड़ता है।

    नई व्यवस्था में फेस बायोमेट्रिक और साप्ताहिक समीक्षा से उपस्थिति का डिजिटल प्रमाण उपलब्ध रहेगा। इससे विभाग के पास कार्रवाई या सुधार के लिए ठोस आंकड़े भी होंगे। डा. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, प्रस्तावित गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी।

    इसके बाद मेडिकल कालेजों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ड्रेस कोड, अनुशासन और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर व्यवस्था को और कड़ाई से लागू किया जाएगा।

     

  • SIR 2026: नोटिस मिले मतदाता समय पर जमा करें दस्तावेज, 29-30 अगस्त को बूथों पर विशेष अभियान

    SIR 2026: नोटिस मिले मतदाता समय पर जमा करें दस्तावेज, 29-30 अगस्त को बूथों पर विशेष अभियान

    हांसी
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (एसआइआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के लिए अब समय पर दस्तावेज जमा करवाना जरूरी है। निर्धारित अवधि में मांगे गए दस्तावेज नहीं देने पर उनके मामलों का निपटारा प्रभावित हो सकता है।

    ऐसे मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने बीएलओ से संपर्क कर दस्तावेज जमा करवाने और दावे-आपत्तियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने को कहा है। वहीं 29 और 30 अगस्त को सभी मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।

    दोनों दिन बूथ लेवल अधिकारी अपने मतदान केंद्रों पर मौजूद रहेंगे और मतदाता सूची से संबंधित दावे-आपत्तियां प्राप्त करने के साथ नए वोट बनाने और मतदाता विवरण में संशोधन के आवेदन भी लेंगे।

    एसडीएम राजेश खोथ ने बताया कि एसआइआर का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। इसलिए जिन मतदाताओं को नोटिस मिले हैं, वे इसे नजरअंदाज न करें और निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाएं। वहीं 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके ऐसे युवा, जिनका अभी मतदाता सूची में नाम नहीं है, वे भी विशेष अभियान के दौरान आवेदन कर सकते हैं।

    घर बैठे भी आवेदन, मतदान केंद्र जाना जरूरी नहीं
    मतदाता सूची से जुड़े कार्यों के लिए नागरिकों को केवल मतदान केंद्र पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। वोटर हेल्पलाइन एप और निर्वाचन आयोग के पोर्टल के माध्यम से भी घर बैठे आवेदन किया जा सकता है।

    एसडीएम ने बताया कि आनलाइन माध्यम से नए मतदाता बनने, नाम हटाने और मतदाता विवरण में संशोधन से संबंधित आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। इससे विशेषकर उन लोगों को सुविधा मिलेगी, जो किसी कारण से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते।

    तीन फार्म, तीन अलग-अलग काम
    मतदाता सूची से संबंधित अलग-अलग कार्यों के लिए निर्धारित फार्म का प्रयोग किया जाएगा। फार्म-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए है। फार्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन किया जा सकता है, जबकि फार्म-8 मतदाता के विवरण में आवश्यक संशोधन के लिए है। बीएलओ भी नागरिकों को सही फार्म और जरूरी प्रक्रिया की जानकारी देंगे।

    29-30 अगस्त को जांच लें अपना नाम और विवरण
        विशेष अभियान को केवल नए वोट बनवाने तक सीमित न समझें। जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में है, वे भी अपने नाम, पते और अन्य विवरण की जांच कर लें। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसी समय सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी है, इसलिए प्रत्येक पात्र नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। – एसडीएम राजेश खोथ

     

  • SIR 2026: नोटिस मिले मतदाता समय पर जमा करें दस्तावेज, 29-30 अगस्त को बूथों पर विशेष अभियान

    SIR 2026: नोटिस मिले मतदाता समय पर जमा करें दस्तावेज, 29-30 अगस्त को बूथों पर विशेष अभियान

    हांसी
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (एसआइआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के लिए अब समय पर दस्तावेज जमा करवाना जरूरी है। निर्धारित अवधि में मांगे गए दस्तावेज नहीं देने पर उनके मामलों का निपटारा प्रभावित हो सकता है।

    ऐसे मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने बीएलओ से संपर्क कर दस्तावेज जमा करवाने और दावे-आपत्तियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने को कहा है। वहीं 29 और 30 अगस्त को सभी मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।

    दोनों दिन बूथ लेवल अधिकारी अपने मतदान केंद्रों पर मौजूद रहेंगे और मतदाता सूची से संबंधित दावे-आपत्तियां प्राप्त करने के साथ नए वोट बनाने और मतदाता विवरण में संशोधन के आवेदन भी लेंगे।

    एसडीएम राजेश खोथ ने बताया कि एसआइआर का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। इसलिए जिन मतदाताओं को नोटिस मिले हैं, वे इसे नजरअंदाज न करें और निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाएं। वहीं 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके ऐसे युवा, जिनका अभी मतदाता सूची में नाम नहीं है, वे भी विशेष अभियान के दौरान आवेदन कर सकते हैं।

    घर बैठे भी आवेदन, मतदान केंद्र जाना जरूरी नहीं
    मतदाता सूची से जुड़े कार्यों के लिए नागरिकों को केवल मतदान केंद्र पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। वोटर हेल्पलाइन एप और निर्वाचन आयोग के पोर्टल के माध्यम से भी घर बैठे आवेदन किया जा सकता है।

    एसडीएम ने बताया कि आनलाइन माध्यम से नए मतदाता बनने, नाम हटाने और मतदाता विवरण में संशोधन से संबंधित आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। इससे विशेषकर उन लोगों को सुविधा मिलेगी, जो किसी कारण से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते।

    तीन फार्म, तीन अलग-अलग काम
    मतदाता सूची से संबंधित अलग-अलग कार्यों के लिए निर्धारित फार्म का प्रयोग किया जाएगा। फार्म-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए है। फार्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन किया जा सकता है, जबकि फार्म-8 मतदाता के विवरण में आवश्यक संशोधन के लिए है। बीएलओ भी नागरिकों को सही फार्म और जरूरी प्रक्रिया की जानकारी देंगे।

    29-30 अगस्त को जांच लें अपना नाम और विवरण
        विशेष अभियान को केवल नए वोट बनवाने तक सीमित न समझें। जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में है, वे भी अपने नाम, पते और अन्य विवरण की जांच कर लें। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसी समय सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी है, इसलिए प्रत्येक पात्र नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। – एसडीएम राजेश खोथ

     

  • समस्तीपुर के किसानों को चना और मटर के बीज पर मिलेगा 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक अनुदान

    समस्तीपुर के किसानों को चना और मटर के बीज पर मिलेगा 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक अनुदान

    समस्तीपुर.

    जिले में हरा चना, मटर एवं हरा मटर के उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि बाजार की मांग के अनुसार उपलब्ध हो सके। इससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होने के साथ ही आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    रबी मौसम में हरा चना, हरा मटर और साधारण मटर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 2026-27 के तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ बाजार में हरी दलहनी फसलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। 

    बीज का वितरण 15 नवंबर तक
    योजना के तहत अनुदानित बीज का वितरण 15 नवंबर तक ही किया जाएगा। जिले में 150 एकड़ में हरा चना का प्रत्यक्षण कराया जाएगा। इसके लिए प्रति एकड़ चार हजार रुपये की दर से छह लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, 895 क्विंटल चना बीज वितरण का लक्ष्य है। इससे करीब 2,797 एकड़ में बुआई हो सकेगी। बीज वितरण के लिए 35.80 लाख रुपये का अनुदान निर्धारित किया गया है। हरा मटर के 164 क्विंटल बीज के लिए 9.84 लाख रुपये और साधारण मटर के 149 क्विंटल बीज के लिए 8.94 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी डा. सुमित सौरभ ने बताया कि योजना के तहत रबी में हरा चना, मटर एवं हरा मटर प्रोत्साहन कार्यक्रम को स्वीकृति मिली है।

    लागत का 50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
    चना बीज पर चार हजार रुपये प्रति क्विंटल अथवा लागत का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, सहायता दी जाएगी। एक एकड़ में 32 किलोग्राम चना बीज की अनुशंसित मात्रा है। मटर और हरा मटर बीज के लिए छह हजार रुपये प्रति क्विंटल अथवा लागत का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, सहायता निर्धारित है। मटर की बीज मात्रा 40 किलोग्राम और हरा मटर की 32 किलोग्राम प्रति एकड़ रहेगी।

    पंजीकृत दुकानों से होगा बीज वितरण
    बीज व अन्य उपादानों का वितरण बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से पंजीकृत विक्रेताओं द्वारा किया जाएगा। विक्रेताओं को दुकानों पर बीज के प्रभेद, वास्तविक मूल्य और अनुदानित दर की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि किसानों को कीमत और अनुदान की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

    कृषि मैपर एप से होगी निगरानी
    योजना के तहत प्रत्यक्षण वाले भूखंडों की जियो-टैग्ड तस्वीरें कृषि मैपर एप पर अपलोड की जाएंगी। इससे प्रत्यक्षण कार्य की निगरानी और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि हरा चना, मटर और हरा मटर का उत्पादन बढ़ने से बाजार की मांग पूरी होगी और किसानों को बेहतर आमदनी का अवसर मिलेगा।

  • नेपाल में बाढ़ के बाद चंडीगढ़ प्रशासन अलर्ट, कंट्रोल रूम बनाकर लापता लोगों की मांगी जानकारी

    नेपाल में बाढ़ के बाद चंडीगढ़ प्रशासन अलर्ट, कंट्रोल रूम बनाकर लापता लोगों की मांगी जानकारी

    चंडीगढ़.

    नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ के मद्देनजर चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के उन लोगों के संबंध में जानकारी मांगी है, जो नेपाल में इस घटना के बाद से लापता हैं या जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। कंट्रोल रूम भी बनाया है।

    प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास ऐसे किसी चंडीगढ़ निवासी के बारे में जानकारी है तो उपायुक्त कार्यालय के साथ साझा करें। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि लापता व्यक्तियों से संबंधित जानकारी मिलने के बाद उसे संकलित कर संबंधित अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य लापता लोगों का पता लगाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना है। नागरिक लापता व्यक्ति से संबंधित जानकारी कंट्रोल रूम के नंबर 112 या 0172-2700025 पर दे सकते हैं। इसके अलावा adc-chd@nic.in ई-मेल पर भी सूचना भेजी जा सकती है।

    इस संबंध में उपायुक्त कार्यालय के कार्यालय अधीक्षक मोहन सिंह से भी संपर्क किया जा सकता है। चंडीगढ़ प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस सूचना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि नेपाल में फंसे अथवा लापता चंडीगढ़ निवासियों के संबंध में समय रहते जानकारी जुटाई जा सके और उनके परिवारों को आवश्यक मदद मिल सके।

  • बिहार के मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों में बदलेगा खनन कार्यालय का ठिकाना

    बिहार के मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों में बदलेगा खनन कार्यालय का ठिकाना

    मुजफ्फरपुर.

    राज्य के सभी जिलों में खनन कार्यालय भवन का नवनिर्माण किया जाएगा। खान एवं भूतत्व विभाग के द्वारा निर्माण कार्य कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विभाग ने नक्शा तैयार कर सभी समाहर्ताओं को उपलब करा दिया है।

    नवनिर्माण को लेकर 115 फीट लंबी और 110 फीट चौड़ी भूमि की आवश्यकता होगी। बताया गया कि कुछ जिलों में खनन कार्यालय का संचालन दूसरे भवनों से किया जा रहा है। जबकि जहां सरकारी भवन से संचालन हो रहा है, उस भवन की स्थिति बहुत जर्जर हो चुकी है। इसे देखते हुए विभाग ने नवनिर्माण कराने का निर्णय लिया है। इसे लेकर सभी समाहर्ताओं से समाहरणालय के आसपास या पांच से सात किलोमीटर की दूरी के बीच जमीन चिह्नित कर उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि खनन कार्यालयों का सुचारू रूप से संचालन करना संभव हो सके।

    खान एवं भूतत्व विभाग के अपर सचिव ने इसके आलोक में पत्र जारी किया है। मुजफ्फरपुर में भी जिस भवन से खनन कार्यालय का संचालन हो रहा है, वह छह दशक से अधिक पुराना है और पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसका भी नवनिर्माण किया जाएगा। जिस भवन से इसका संचालन हो रहा है वह जिला प्रशासन का है। इसमें एक ओर डीआरडीए भवन का संचालन होता है। जबकि डीटीओ जाने वाले रास्ते में खनन कार्यालय का भवन है। इसमें पहले लोक शिकायत निवारण केंद्र चलता था। बाद में इसे खनन विभाग को दिया गया।

    कार्यालय में काम करने और न रखरखाव की व्यवस्था
    खनन विभाग के पदाधिकारी ने बताया कि भवन इतना पुराना हो चुका है कि बरसात में छत से पानी टपकता है। बैठने तक की जगह नहीं है। अंदर से पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। इस कारण खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षण अब संयुक्त भवन में बैठकर कामकाज का संचालन करते हैं। जबकि कार्यालय से संबंधित काम अभी उसी जर्जर भवन से हो रहा है। रखरखाव की भी व्यवस्था ठीक नहीं है। कागजात के नष्ट होने की संभावना रहती है। कर्मियों को सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं।

    • राज्य के सभी जिलों में खनन कार्यालय भवन का होगा निर्माण
    • वर्तमान में जर्जर हालत में है भवन, छत से टपकता पानी और गिरता है प्लास्टर
    • खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षक अब संयुक्त भवन में बैठकर करते काम
  • दिल्ली में बदलेगा नाप-तौल जांच का सिस्टम, निजी लैब भी कर सकेंगी उपकरणों का सत्यापन

    दिल्ली में बदलेगा नाप-तौल जांच का सिस्टम, निजी लैब भी कर सकेंगी उपकरणों का सत्यापन

    नई दिल्ली
     पानी के मीटर, थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर (बीपी) मापने वाली मशीन और पेट्रोल-डीजल पंपों के नोजल की सटीकता जांचने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली सरकार के बाट एवं माप विभाग (लीगल मेट्रोलॉजी) ने पारदर्शिता बढ़ाने और लोगों को सही नाप-तौल सुनिश्चित करने के लिए 'दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी (गवर्नमेंट अप्रूव्ड टेस्ट सेंटर) नियम, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है।

    ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने के बाद सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ गवर्नमेंट अप्रूव्ड टेस्ट सेंटर (जीटीसी) के तौर पर मंजूरी पाने वाली कॉरपोरेट कंपनियां, स्वतंत्र फर्म और NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं भी नाप-तौल से जुड़े उपकरणों का वेरिफिकेशन और स्टैम्पिंग कर सकेंगी।

    10 दिनों मे दे सकते हैं ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां
    ड्राफ्ट नियमों पर 10 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इन्हें डाक या ईमेल के जरिए भेजा जा सकता है। सुझावों पर विचार के बाद नियमों को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जाएगा। सुझाव और आपत्तियां नियंत्रक, कानूनी मापविज्ञान विभाग, प्लॉट नंबर-17, इंस्टीट्यूशनल एरिया, विश्वास नगर, दिल्ली-110032 के पते पर भेजी जा सकती हैं। इन्हें controllerwmd@gmail.com या acwmhq@gmail.com पर ईमेल भी किया जा सकता है।

    नाप-तौल उपकरणों की तीन रिस्क कैटेगरी, हाई रिस्क की जांच जरूरी
    ड्राफ्ट के मुताबिक, नाप-तौल के उपकरणों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। हाई रिस्क श्रेणी में बीपी मशीन, वॉटर मीटर, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी नोजल, बिजली मीटर, वेइंग ब्रिज और टैंक ट्रक आदि शामिल हैं। इनकी जांच जीटीसी या विभागीय लैब से कराना अनिवार्य होगा। मीडियम रिस्क श्रेणी में दुकानों और सब्जी विक्रेताओं के तराजू, काउंटर मशीन और थर्मामीटर आदि शामिल हैं। वहीं, लो रिस्क श्रेणी में घरों में इस्तेमाल होने वाले किचन स्केल और बाथरूम स्केल जैसे उपकरण रखे गए हैं। इनके लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन का प्रावधान किया गया है।

    बीमा और जुर्माने का भी प्रावधान

    • टेस्ट सेंटर की मंजूरी के लिए प्रति उपकरण 2.5 लाख रुपये सालाना फीस प्रस्तावित है। लापरवाही या गलत जांच से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए अप्रूव्ड सेंटरों के लिए थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस अनिवार्य किया जा सकता है।
    • नियमों के उल्लंघन या गलत वेरिफिकेशन की स्थिति में एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस निलंबित या रद्द करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।