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  • सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर हरियाणा विधानसभा में हंगामा, बागी कांग्रेस विधायक ने की कार्रवाई की मांग

    सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर हरियाणा विधानसभा में हंगामा, बागी कांग्रेस विधायक ने की कार्रवाई की मांग

    चंडीगढ़.

    1984 के सिख दंगों के दोषी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को रोल मॉडल कहने का मुद्दा विधानसभा में खूब गरमाया। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सज्जन कुमार को रोल मॉडल कहा था, जबकि दीपेंद्र हुड्डा इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं।

    कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा द्वारा दीपेंद्र हुड्डा के विरुद्ध कांग्रेस हाईकमान को पत्र लिखने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ गया, जिसकी गूंज बृहस्पतिवार को विधानसभा में भी सुनाई दी। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध मतदान करने वाले रतिया के विधायक सरदार जरनैल सिंह ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया। कांग्रेस के हंगामे के बीच जरनैल सिंह हाथ में एक पर्चा लेकर अपनी सीट पर खड़े हो गए, जिस पर लिखा था कि 1984 के सिख दंगों के दोषी को रोल मॉडल बताने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उनका इशारा सीधे तौर पर सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ था। जरनैल सिंह ने कहा कि सिखों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को माफी मांगनी चाहिए।

    सदन में जरनैल सिंह कानूनी रूप से कांग्रेस के ही विधायक हैं। उन्हें सदन में पर्चा लहराता देख बरौदा के कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल अपनी सीट से खड़े हुए और जरनैल सिंह के हाथों से उन्होंने पर्चा छीन लिया। इस बात पर भाजपा विधायकों ने हंगामा कर दिया। हंगामे के बीच जरनैल सिंह भाजपा विधायकों की तरफ चले गए, जिस पर कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और विकास सहारण मोबाइल से उनका वीडियो बनाने लगे। विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने आफताब और विकास को चेतावनी देते हुए कहा कि वे सदन के भीतर वीडियो नहीं बना सकते। इस दौरान दोनों तरफ से नारेबाजी तेज हो गई।

    हरियाणा के सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने विवाद को हवा देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक ने एक दलित विधायक जरनैल सिंह को बोलने नहीं दिया और उनके हाथ से पर्चा छीनकर अपमान किया है। बाद में मीडिया से बात करते हुए जरनैल सिंह ने भी इंदुराज नरवाल की इस कार्यवाही पर नाराजगी जाहिर की। विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 55 साल तक देश की जनता ने अन्याय सहा है। ये लोग झूठ फैलाने का काम करते हैं। इनके कार्यकाल में टायर गले में डालकर जलाया जाता था।

    भय के चलते लोगों को कटवाने पड़े थे केश
    मुख्यमंत्री ने सिखों के दुख में शामिल होते हुए कहा कि अपने केश से प्रेम करने वाले लोगों को भय के चलते केश कटवाने पड़े थे। 1984 का दौर रोंगटे खड़े करता है। कांग्रेस के लोग उन लोगों को अपना रोल मॉडल बताते हैं। आज तक इन लोगों ने माफी नहीं मांगी है। जख्म पर नमक-मिर्च लगाने का काम कांग्रेस कर रही है। जरनैल सिंह के सिख दंगों वाला पोस्टर दिखाने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि वे ऐसा पोस्टर हाउस में नहीं दिखा सकते, यह नियम है। हमें नियम का पता है, जरनैल सिंह को नहीं पता है। हुड्डा ने कहा कि स्पीकर को न्यूट्रल होना चाहिए, लेकिन वे सरकार को बचा रहे हैं।

  • हरियाणा में धान पंजीकरण के आंकड़ों पर सवाल, 4.73 लाख एकड़ रकबा घटा तो 3.97 लाख किसान बढ़े

    हरियाणा में धान पंजीकरण के आंकड़ों पर सवाल, 4.73 लाख एकड़ रकबा घटा तो 3.97 लाख किसान बढ़े

    कुरुक्षेत्र
    प्रदेश में धान के मंडी में पहुंचने से पहले ही मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (एमएफएमबी) पोर्टल पर बड़े धान घोटाले की नींव पड़ने लगी है। एमएफएमबी पोर्टल पर अभी तक ही गैर बासमती धान के पंजीकरण में गत वर्ष के मुकाबले धान का रकबा 4.73 लाख एकड़ घटने और 3.97 लाख किसानों की संख्या बढ़ने से इस पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने इसे बहुत बड़ा गड़बड़झाला बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पोर्टल पर दर्ज पंजीकरण में इस बात पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं, जिन जिलों में गत वर्ष नाम मात्र का गैर बासमती धान पंजीकृत था। महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और हिसार जैसे जिलों में एकाएक पंजीकृत किसानों की संख्या कई हजारों में बढ़ गई है।

    एमएफएमबी के आंकड़ों में वर्ष 2025 में जहां पोर्टल पर 4,83,897 किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान का पंजीकरण कराया था। इस तीन अगस्त तक ही 8,81,128 किसानों ने 24,07,104 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत कर दिया है। आंकड़ों के इस खेल में साफ है कि रकबा करीब 4.73 लाख एकड़ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर किसानों की संख्या करीब 3.97 लाख बढ़ गई है।

    पंजीकरण के इस पूरे खेल में अधिकारियों की ओर से किए गए सत्यापन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गत वर्ष किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत किया था और कृषि विभाग द्वारा 30,16,285 एकड़ भूमि सत्यापित की है। पंजीकृत रकबे से करीब 1,36,093 एकड़ अधिक भूमि का सत्यापन भी अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है।

    इन जिलों के आंकड़ों पर बड़ा सवाल
    भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नूंह और चरखी दादरी जिलों के आंकड़ों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। गत वर्ष इन छह जिलों में करीब 64,726 एकड़ धान का रकबा दर्ज था, इन जिलों में धान की सरकारी खरीद नहीं है। इस वर्ष इन जिलों में भी कुल रकबा घटा है और किसानों की संख्या बढ़ी है।

    भाकियू ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
    भाकियू चढ़ूनी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश बैंस ने आरोप लगाए कि गत वर्ष धान खरीद में करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इस वर्ष भी यही स्थिति पैदा होगी। उन्होंने आंकड़ों का जिला, तहसील, गांव और खसरा नंबरवार सत्यापन कराए जाने की मांग की है।

     

  • हड़ताल खत्म करने की शर्त पर अड़ी पंजाब सरकार, CM ने मिनिस्टीरियल यूनियन से बैठक की रद्द

    हड़ताल खत्म करने की शर्त पर अड़ी पंजाब सरकार, CM ने मिनिस्टीरियल यूनियन से बैठक की रद्द

    जालंधर.

    पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के बीच गतिरोध बढ़ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हड़ताल खत्म होने के बाद ही कर्मचारियों के साथ बातचीत होगी।

    मुख्यमंत्री की ओर से बैठक रद्द किए जाने के बावजूद यूनियन के प्रतिनिधि पीएपी परिसर में पहुंचे और काफी देर तक बैठक होने की उम्मीद में वहीं बैठे रहे। यूनियन प्रतिनिधि दोपहर 12 बजे बैठक के लिए परिसर में पहुंच गए थे। हालांकि, इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने अपने इंटरनेट माध्यम पर पोस्ट कर साफ कर दिया था कि हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले हड़ताल खत्म होनी चाहिए, इसके बाद ही कर्मचारियों की मांगों को लेकर बैठक की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद यूनियन प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत की संभावना फिलहाल टल गई।

    नियुक्ति पत्र देने के बाद निकले मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इससे पहले पीएपी परिसर में नए भर्ती किए गए पुलिस कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कार्यक्रम के बाद वह करीब सवा एक बजे वहां से निकल गए। इसके बाद वह अपने ओल्ड बारादरी स्थित आवास पहुंचे। दूसरी ओर, यूनियन प्रतिनिधि पीएपी परिसर में ही बैठक की उम्मीद में बैठे रहे। कर्मचारियों की ओर से महंगाई भत्ते और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है। यूनियन का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। मुख्यमंत्री के रुख से अब सरकार और हड़ताली कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं। यूनियन की ओर से आगे क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजर है।

  • बिहार में बनेगा सिर्फ महिलाओं का विश्वविद्यालय, छात्राओं से लेकर कुलपति तक होंगी महिलाएं

    बिहार में बनेगा सिर्फ महिलाओं का विश्वविद्यालय, छात्राओं से लेकर कुलपति तक होंगी महिलाएं

    पटना 
    बिहार में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस खास यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स से लेकर कुलपति तक सभी महिलाएं ही होंगी। महिला यूनिवर्सिटी में सिर्फ छात्राओं को एडमिशन मिलेगा। साथ ही सभी टीचर और अन्य स्टाफ में भी महिलाओं की ही नियुक्ति की जाएगी। रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा की। उन्होंने महिला रोजगार योजना के तहत 5 लाख महिलाओं के खाते में लगभग 600 करोड़ रुपये भी डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किए।

    सीएम सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना स्थित बापू सभागार में 'समृद्ध महिला समृद्ध बिहार अभियान' का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने यह भी ऐलान किया कि साल 2030 तक जीविका दीदियों के विकास पर सरकार लगभग 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला रोजगार योजना की पहली और दूसरी किस्त 5 लाख लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर भी की।

    एक दिन पहले महिलाओं के लिए 3 योजनाएं शुरू हुईं
    इससे पहले, बुधवार को सम्राट सरकार ने महिलाओं और बच्चियों पर केंद्रित तीन बड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया था। सीएम सम्राट चौधरी ने स्टार्टअप चैलेंज, बालिका पीएचडी फेलोशिप और स्कूल-कॉलेज के पास पुलिस दीदी की तैनाती का आगाज किया। सीएम ने पुलिस दीदी 4700 दोपहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाई।

    वहीं, बेटी स्टार्टअप चैलेंज के तहत महिला उद्यमियों को अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। लगभग 2100 महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। नवाचार करने वालीं बेटियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    सीएम सम्राट चौधरी ने एक दिन पहले ही बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना की भी शुरुआत की। इसके तहत बच्चियों को उच्च शिक्षा के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। पीएचडी करने वालीं छात्राओं को सरकार 4 साल तक हर महीने 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी। इस योजना का लाभ 1000 छात्राओं को मिलेगा।

     

  • बिहार में बदलेंगी नगर निकायों की सीमाएं, विलय-सीमा विस्तार और नए निकायों के प्रस्ताव मांगे

    बिहार में बदलेंगी नगर निकायों की सीमाएं, विलय-सीमा विस्तार और नए निकायों के प्रस्ताव मांगे

     पटना
    बिहार में नगर निकायों की सीमा और स्वरूप बदलने की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। सरकार ने जिलों से नगर निकायों के विलय, सीमा विस्तार, दर्जा बढ़ाने और नए नगर निकाय बनाने के प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रस्तावों पर पहले जिला स्तर पर समीक्षा होगी।

    प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होगी प्रस्तावों की समीक्षा
    नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है। डीएम अपने जिले के प्रभारी मंत्री से जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक बुलाने का अनुरोध करेंगे। बैठक में नगर निकायों से जुड़े सभी प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी।

    चार तरह से बदल सकता है नगर निकायों का स्वरूप
    सरकार के स्तर पर चार प्रमुख बदलावों पर विचार किया जा रहा है। दो या अधिक नगर निकायों का विलय कर एक नया निकाय बनाया जा सकता है। नगर निकाय से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को भी उसकी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार होगा।

    पुराने निकायों का बढ़ेगा दर्जा, नए भी बनेंगे
    जरूरत के अनुसार छोटे नगर निकायों को बड़े निकाय में मिलाने या उनका दर्जा बढ़ाने पर भी विचार होगा। तेजी से शहरीकरण वाले ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकाय का दर्जा देने की संभावना है। इससे नए नगर निकायों के गठन का रास्ता भी खुल सकता है।

    शहरीकरण वाले इलाकों पर रहेगा खास फोकस
    विभाग ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को चिह्नित करेगा जहां आबादी और शहरी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन क्षेत्रों को नजदीकी नगर निकाय में शामिल करने या नया निकाय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। इससे शहरों की सीमा का विस्तार होगा।

    15 सितंबर तक विभाग को भेजने होंगे प्रस्ताव
    जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की अनुशंसा के बाद जिलाधिकारी प्रस्ताव निर्धारित प्रपत्र में विभाग को भेजेंगे। इसके लिए सरकार ने 15 सितंबर 2026 की समय-सीमा तय की है। प्रस्तावों के आधार पर बिहार में नगर निकायों के पुनर्गठन की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

     

  • बाड़मेर में जैविक खेती का कमाल, पूर्व सरपंच कमा रहे सालाना 20-25 लाख रुपये

    बाड़मेर में जैविक खेती का कमाल, पूर्व सरपंच कमा रहे सालाना 20-25 लाख रुपये

     समदड़ी (बाड़मेर)
     खेती को सिर्फ एक पारंपरिक जीवनयापन का जरिया मानने के बजाय यदि आधुनिक सोच, सही तकनीक और पूरी तरह जैविक पद्धतियों के साथ अपनाया जाए, तो यह बंजर जमीन पर भी बंपर आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के समदड़ी क्षेत्र स्थित भूरानी गांव के निवासी एवं पूर्व सरपंच बाबूलाल माली इसका एक प्रत्यक्ष और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं।

    जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के बाद, अब उनका पूरा ध्यान पूरी तरह से वैज्ञानिक जैविक खेती पर केंद्रित है। वे अपने निजी फार्म हाउस पर आधुनिक और प्राकृतिक तरीकों से एकीकृत खेती कर न केवल कृषि क्षेत्र में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि बाड़मेर और आसपास के जिलों के अन्य किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शक और रोल मॉडल बने हुए हैं।

    खजूर, गोंदा और करौंदे के साथ सब्जियों का शानदार कॉम्बिनेशन
    बाबूलाल माली ने अपने फार्म हाउस में फसलों और फलों का एक बहुत ही सटीक कॉम्बिनेशन तैयार किया है। उनके खेत में वर्तमान में करीब 80 खजूर, 65 गोंदा और 10 करौंदे के उन्नत पेड़ लगे हुए हैं। इन पेड़ों के बीच उपलब्ध खाली जगह का बुद्धिमत्ता से उपयोग करते हुए वे विभिन्न मौसमी सब्जियों की भरपूर पैदावार लेते हैं।

    बाबूलाल माली बताते हैं कि इस एकीकृत जैविक मॉडल की बदौलत वे हर साल 20 से 25 लाख रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से पूरी दूरी बनाकर केवल प्राकृतिक खादों का उपयोग करना ही उनकी इस निरंतर सफलता का मुख्य आधार है।

    फॉर्म हाउस पर ही खुद तैयार कर रहे हैं प्राकृतिक जैविक खाद
    बाबूलाल माली के अनुसार, वे बाजार की महंगी खाद पर निर्भर रहने के बजाय अपने फार्म हाउस पर ही देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक घटकों को मिलाकर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करते हैं। उनका अनुभव बताता है कि जैविक खाद के निरंतर प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और जल-धारण क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही, इससे पैदा होने वाले फलों और सब्जियों का स्वाद, आकार और गुणवत्ता रासायनिक फसलों की तुलना में काफी बेहतर होती है।

    क्षेत्रीय किसानों को दे रहे हैं लाभदायक खेती का संदेश
    पूर्व सरपंच बाबूलाल माली केवल खुद की प्रगति तक सीमित नहीं हैं, वे आसपास के क्षेत्र के अन्य किसानों को भी रसायन-मुक्त और टिकाऊ जैविक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि किसान सही तकनीक, लगन और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करें, तो खेती को बेहद टिकाऊ और अत्यधिक लाभप्रद बनाया जा सकता है। वर्तमान में पूर्व सरपंच के इस सफल जैविक मॉडल को देखने, समझने और खेती की नई-नई तकनीकों की जानकारी लेने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से किसान रोजाना उनके खेत पर पहुंच रहे हैं।

  • ‘गेस्ट’ का दाग हटाने 12 हजार टीचर तैयार, चार हजार करोड़ रुपये छोड़ने का फैसला

    ‘गेस्ट’ का दाग हटाने 12 हजार टीचर तैयार, चार हजार करोड़ रुपये छोड़ने का फैसला

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब 20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे 12 हजार गेस्ट टीचर्स आज भी अपने ही भविष्य की कक्षा के बाहर खड़े हैं। दो दशक की सेवा और हजारों बच्चों का भविष्य संवारने के बाद भी उनकी पहचान के आगे ‘गेस्ट’ शब्द लगा है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इसी प्रदेश में समान परिस्थितियों में काम करने वाले करीब पांच हजार गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो सकते हैं, तो स्कूलों के गेस्ट टीचर्स के लिए ऐसा भेदभाव किसलिए हो रहा है। वर्ष 2014 में नियमितीकरण की मांग को लेकर इन शिक्षकों ने दिल्ली में आंदोलन किया था। उसी समय भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सत्ता में आने पर पहली कलम से गेस्ट टीचर्स को पक्का करने का वादा किया था। भाजपा की सरकार बनी, साल गुजरते गए, लेकिन वादा अधूरा रहा। 2019 में भाजपा सरकार ने गेस्ट टीचर्स को 58 वर्ष तक सेवा का लाभ और नियमितीकरण की इच्छा जताई, मगर कोर्ट केस को अड़चन बताया गया। अब वही अड़चन काफी हद तक दूर हो चुकी है।

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट गेस्ट टीचर्स के पक्ष में आदेश दे चुका है और उसके विरुद्ध अपील भी खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद करीब 12 हजार शिक्षक नियमितीकरण के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा में हैं। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्कूल और कॉलेजों में अस्थायी आधार पर काम करने वाले शिक्षकों की व्यवस्था में कई समानताएं होने के बावजूद दोनों के साथ अलग व्यवहार हुआ। कॉलेजों में कार्यरत करीब पांच हजार गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो गए, लेकिन स्कूलों के 12 हजार गेस्ट टीचर्स को आज भी स्थायी दर्जा नहीं मिला। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता कर समस्या के स्थाई समाधान के संकेत जरूर दिए हैं, मगर अभी कोई समाधान नहीं निकला है।

    इस तरह समझिये गेस्ट टीचर्स का दर्द

    • करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स
    • करीब 20 साल की सेवा
    • 2014 में नियमितीकरण का चुनावी वादा
    • 2019 में 58 वर्ष तक सेवा का लाभ
    • 2026 में हाई कोर्ट से राहत
    • करीब 5 हजार अगले तीन साल में रिटायर
    • बाकी बचे करीब 7 हजार अगले आठ से नौ साल में रिटायर

    संघर्ष का मार्मिक पहलू
    भावनात्मक गेस्ट टीचर्स के इस संघर्ष का सबसे मार्मिक पहलू आर्थिक नहीं, भावनात्मक है। हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक गेस्ट टीचर्स का पिछला करीब चार हजार करोड़ रुपये का एरियर बनने का दावा है। लेकिन गेस्ट टीचर संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी डा. अजय लोहान का कहना है कि शिक्षक यह पूरा आर्थिक लाभ छोड़ने तक को तैयार हैं। उन्हें 2014 से मिलने वाले लाभ की जगह 2019 से लाभ मिल जाए, तब भी वे तैयार हैं। यहां तक कि ज्वाइनिंग डेट से वरिष्ठता और 2014 में नियमित कर्मचारियों के बराबर नया वेतनमान मिलने पर भी वे संतुष्ट हैं।

    हाई कोर्ट के फैसले से हुई सरकार की राह
    आसान अपने नियमितीकरण की लड़ाई लड़ रहे गेस्ट टीचर्स के सभी संगठन एकजुट हो चुके हैं। गेस्ट टीचर्स संगठनों के प्रधान मैना यादव, कुलदीप झरोली, कृष्ण धारसूल, राजेंद्र शास्त्री, पारस शर्मा और नरेंद्र संधू का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार के लिए फैसला लेना आसान हो गया है। 2019 में 58 वर्ष तक सेवा का लाभ देने के बाद सरकार ने खुद उनकी सेवाओं को स्वीकार किया था। अब गेस्ट टीचर्स को नियमित करने में कोई बाधा नहीं है। चार हजार करोड़ के सामने 32 करोड़ मामूली खर्च हरियाणा सरकार द्वारा कराए गए एक आंतरिक आकलन के अनुसार नियमितीकरण से सरकार पर करीब 32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा। यानी अतिथि शिक्षक हजारों करोड़ का कथित पिछला लाभ छोड़ने को तैयार हैं और सरकार के सामने अतिरिक्त खर्च का आंकड़ा अपेक्षाकृत बहुत छोटा है।

    प्रदेश सरकार के सामने ये उठ रहे सवाल –

    • जब कॉलेजों के गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो सकते हैं, तो स्कूलों के गेस्ट टीचर्स क्यों नहीं?
    • जब हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है, तो फैसला कब?
    • शिक्षक 4 हजार करोड़ के लाभ छोड़ने को तैयार हैं, तो समाधान में अड़चन क्या है?
    • जिस शिक्षक ने पूरी जिंदगी बच्चों का भविष्य पक्का किया, तो उनके भविष्य को पक्का करने का फैसला क्यों नहीं?
  • दिल्ली में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन, 24 घंटे काम करेगा नया D4C सेंटर

    दिल्ली में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन, 24 घंटे काम करेगा नया D4C सेंटर

    नई दिल्ली
     साइबर क्राइम और ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस में नई व्यवस्था की नींव रख दी गई है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसे दिल्ली पुलिस की साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों की नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। इसका मकसद साइबर अपराध की रोकथाम, शिकायत पर तुरंत ऐक्शन, जांच, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा को एक साथ जोड़ना है। इसका मेन कमांड सेंटर जय सिंह रोड स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के टावर-2 के फर्स्ट फ्लोर पर बन रहा है, जहां रोज 24 घंटे काम होगा।

        D4C सीधे दिल्ली पुलिस कमिश्नर के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा।

    • जॉइंट सीपी रोज का ऑपरेशन देखेंगे, जो चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (CEO) होंगे और स्पेशल सीपी (स्पेशल सेल) की निगरानी में काम करेंगे।
    • एडमिनिस्ट्रेटिव, साइबर इन्वेस्टिगेशन, ऑपरेशनल और ऑनलाइन क्राइम्स अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रन इसके चार अंग होंगे।
    • मौजूदा इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को D4C में समाहित किया जाएगा।
    • अब IFSO की जांच शाखा, डिजिटल इन्वेस्टिगेशन लैब, ट्रेनिंग और अवेयरनेस सेंटर, हैदरपुर स्थित 1930 साइबर हेल्पलाइन कंट्रोल रूम और फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (FMC) भी D4C के अधीन होंगे।

    D4C के निर्देशों पर काम करेंगे सभी 15 साइबर थाने
    इस नए सिस्टम से अब साइबर ठगी की शिकायत से लेकर संदिग्ध रकम को फ्रीज करने, डिजिटल सबूत जुटाने और आरोपियों तक पहुंचने की प्रक्रिया में अलग-अलग यूनिट्स के बीच बेहतर तालमेल हो सकेगा। सभी 15 जिलों के साइबर पुलिस स्टेशन भी D4C के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल, स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) और दूसरी संबंधित यूनिट्स के साथ भी बेहतर तालमेल किया जाएगा।
    दिल्ली पुलिस कमिश्नर के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा D4C

    कंप्लेंट मिलते ही ऐक्शन
    साइबर ठगी में सबसे अहम समय शुरुआती कुछ घंटे होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 1930 हेल्पलाइन और फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर को D4C के ऑपरेशनल विंग में प्रमुख भूमिका दी गई है। 1930 पर कंप्लेंट मिलने के बाद वित्तीय लेन-देन को रोकने और नुकसान कम करने के लिए बैंकों के अलावा अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ तत्काल तालमेल किया जाएगा। FMC में बैंक प्रतिनिधियों के लिए अलग वर्क स्टेशन और सुरक्षित संचार व्यवस्था का प्रस्ताव है।

    चलेगा संगठित अभियान
    D4C बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क के खिलाफ संगठित अभियान भी चलाएगा। म्यूल बैंक अकाउंट धारक, सिम और POS एजेंट, हवाला ऑपरेटर, बिचौलिए, मिलीभगत वाले बैंक कर्मचारी, संदिग्ध ऐप डेवलपर और फर्जी कॉल सेंटर निशाने पर रहेंगे। डेटा एनालिटिक्स के जरिए साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट, अपराधी नेटवर्क, मनी ट्रेल की पहचान की जाएगी। स्टेट डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर (S-DISC) भी बनेगा।

     

  • चंडीगढ़ में गर्ल्स कॉलेज के बाहर ‘गेड़ी’ मारने वालों की खैर नहीं, मानवाधिकार आयोग ने SSP से मांगी रिपोर्ट

    चंडीगढ़ में गर्ल्स कॉलेज के बाहर ‘गेड़ी’ मारने वालों की खैर नहीं, मानवाधिकार आयोग ने SSP से मांगी रिपोर्ट

    चंडीगढ़.

    सेक्टर-36 स्थित एमसीएम डीएवी काॅलेज के बाहर चर्चित ‘गेड़ी रूट’ को लेकर सामने आई सुरक्षा और अव्यवस्था की शिकायत पर पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    एसएसपी को अगली सुनवाई की तारीख से एक सप्ताह पहले रिपोर्ट आयोग के समक्ष दाखिल करनी होगी। सेक्टर-36ए निवासी कुलबीर सिंह राणा ने आयोग के समक्ष दायर शिकायत में काॅलेज के बाहर, विशेषकर काॅलेज समय समाप्त होने के बाद, यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ अज्ञात वाहन चालक धीमी गति और लापरवाही से वाहन चलाते हैं। इसके अलावा कालेज के बाहर छात्रों के समूहों के जुटने की बात भी कही गई है।

    शिकायत में कालेज आने-जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ लोगों की ओर से छात्राओं से कथित छेड़छाड़, व्यंग्यात्मक और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के साथ उनकी बिना अनुमति रिकॉर्डिंग किए जाने जैसी गतिविधियां होती हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि ऐसी गतिविधियां देर रात तक जारी रहने से आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

    छह अगस्त को दो गुटों में हुआ था झगड़ा
    शिकायतकर्ता ने छह अगस्त को कालेज गेट के बाहर दो गुटों के बीच हुए कथित झगड़े का भी उल्लेख किया है। शिकायत के अनुसार, घटना के बाद करीब दोपहर 2:35 बजे पीसीआर को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया था। इस घटना को भी कालेज के बाहर सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए शिकायत में पुलिस की नियमित मौजूदगी बढ़ाने की मांग की गई है।

    पुलिस बीट कार्यालय और ट्रैफिक जांच की मांग
    शिकायतकर्ता ने क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ वेरका बूथ के पास पुलिस बीट कार्यालय स्थापित करने की मांग की है। इसके अलावा वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए उचित यातायात जांच बिंदु बनाने का सुझाव भी दिया गया है। आयोग ने मामले में एसएसपी को शिकायत भेजकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सार्वजनिक स्थान सुरक्षित और व्यवस्थित रहना चाहिए। छात्रों और महिलाओं को यातायात जाम, उत्पीड़न या किसी गैरकानूनी गतिविधि के कारण भय अथवा असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रभावी निवारक कदम उठाना जरूरी है।

  • रांची में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, रिम्स में 10 बेड का अलग आइसोलेशन इंतजाम

    रांची में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, रिम्स में 10 बेड का अलग आइसोलेशन इंतजाम

    रांची
    राजधानी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने संक्रमित मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव के लिए अलग व्यवस्था की है। स्वाइन फ्लू के मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखने के लिए रिम्स के कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है।

    यहां फिलहाल 10 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में भी स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए बेड रिजर्व रखे गए हैं। रिम्स के अपर अधीक्षक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर संक्रमित मरीजों को निर्धारित स्थान पर भर्ती कर उपचार दिया जाएगा।

    मरीजों की जांच से लेकर दवा और अन्य आवश्यक उपचार की सुविधाएं रिम्स में उपलब्ध हैं। स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए काटेज के केवल ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है। पहले तले को पूर्व की तरह पेइंग वार्ड के रूप में संचालित किया जाएगा। इससे सामान्य मरीजों की सुविधा भी प्रभावित नहीं होगी।

    संक्रमण को फैलने से रोकने पर जोर
    स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों के लिए अलग स्थान निर्धारित करने का मुख्य उद्देश्य उपचार के साथ संक्रमण को अन्य मरीजों, स्वजन और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों तक फैलने की आशंका को कम करना है। मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

    मालूम हो कि राजधानी में पिछले कुछ दिनों में बच्चों में इन्फ्लूएंजा-ए यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े हैं। रिम्स और सदर अस्पताल के शिशु रोग ओपीडी में भी स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले बच्चे पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने पहले से ही उपचार व्यवस्था को तैयार रखने का निर्णय लिया है।