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  • पटना में अवैध पार्किंग पर अब तकनीक की नजर, तुरंत मिलेगा कंट्रोल रूम को अलर्ट

    पटना में अवैध पार्किंग पर अब तकनीक की नजर, तुरंत मिलेगा कंट्रोल रूम को अलर्ट

    पटना
    अवैध पार्किंग की वजह से राजधानी में लगने वाले ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण को ले अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस तकनीक के मूल में यह है कि वाहन अगर सड़क पर वैसी जगह लगी दिखी, जहां पार्किंग निषिद्ध है, तो तुरंत एक स्वचालित अलर्ट संबंधित इलाके के नियंत्रण कक्ष को चला जाएगा। उक्त इलाके में ट्रैफिक नियंत्रण को तैनात पुलिसकर्मी को तुरंत नियंत्रण कक्ष संपर्क कर इस बारे में जवाब तलब करेगा।

    पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी
    पटना में पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी रही है। सिटी सर्विस की बसों के लिए मोटी राशि खर्च दो बार आधुनिक बस स्टॉपेज का निर्माण कराया गया, लेकिन इन स्टॉपेज पर बसें कभी नहीं रूकी। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बसें जहां पैसेंजर दिखा वहां रुक जाती हैं। ट्रैफिक के दबाव से उनका कोई मतलब नहीं।

    ऑटो व ई रिक्शा चालकों ने अपनी इच्छा से बना लिए हैं स्टॉपेज
    पथ निर्माण विभाग ने जब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ राजधानी के जाम को नियंत्रित किए जाने की योजना पर काम आरंभ किया तो यह बात सामने आयी कि ऑटो व ई रिक्शा चालकों की वजह से समस्या अधिक है। इन लोगों ने अपनी इच्छा से शहर के कई जगहों पर स्टॉपेज बना लिया है।

    उन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस और यहां तक कि अधिकारियों तक की तैनाती पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़ी समस्या को नियंत्रित करने की योजना पर काम होना है।

    यहां तक कि यह भी देखा जाना है कि जिस ट्रैफिक जवान की तैनाती संबंधित इलाके में है वह अपने जगह पर मौजूद है कि नहीं। इसे देखने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है।

    हर इलाके की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक
    हर इलाके में ट्रैफिक जाम की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक की व्यवस्था की जा रही है। संबंधित इलाके में ट्रैफिक जाम को नियंत्रित किए जाने काे ले पहले ही मैजिस्ट्रेट व डीएसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती है। ट्रैकिंग की रिपोर्ट तुरंत उन्हें दी जाएगी। उन्होंने सूचना पर क्या किया इस पर भी तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।

     

  • बिहार में खनिज खोज को मिलेगी रफ्तार, GSI की मदद से नए क्षेत्रों में होगा वैज्ञानिक अन्वेषण

    बिहार में खनिज खोज को मिलेगी रफ्तार, GSI की मदद से नए क्षेत्रों में होगा वैज्ञानिक अन्वेषण

     पटना
     बिहार में खनिज संसाधनों की खोज और उनके व्यवस्थित दोहन की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग ने पहल तेज कर दी है।

    केंद्र सरकार के सहयोग से खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर खनिज अन्वेषण और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है।

    इसके जरिए राज्य में मौजूद खनिज संसाधनों की संभावनाओं को चिह्नित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

    विशेष बैठक का एजेंडा तैयार
    सरकार ने खनिज खोज को गति देने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के पदाधिकारियों के साथ विशेष बैठक का मसौदा तैयार किया है।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों की संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने और नए क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जीआइएस अधिकारियों से बैठक की तिथि जल्द घोषित होगी।

    प्रस्तावित बैठक में खनिजों की उपलब्धता, गुणवत्ता और भंडार की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। उद्देश्य ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां अभी तक खनिज संसाधनों का पर्याप्त अन्वेषण नहीं हो सका है।

    अन्वेषण के बाद उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खनिज ब्लाकों को विकसित करने और नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना है।
    बड़े खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी पर जोर

    बिहार में वृहद खनिजों के खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी को और पारदर्शी बनाने के लिए यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल के इस्तेमाल पर भी विस्तार से विचार किया जा रहा है।

    पोर्टल के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास है। इससे नीलामी में अधिक प्रतिस्पर्धा आने के साथ प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बेहतर होने की उम्मीद है।

    खान एवं भू-तत्वि विभाग के मंत्री डाॅ. प्रमोद कुमार के अनुसार वैज्ञानिक अन्वेषण, तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शी ई-नीलामी को साथ लेकर चलने से खनन क्षेत्र में निवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

  • पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के घर पर अंधाधुंध फायरिंग, गैंगस्टर डोली बल्ल ने ली जिम्मेदारी

    पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के घर पर अंधाधुंध फायरिंग, गैंगस्टर डोली बल्ल ने ली जिम्मेदारी

    बरनाला.

    प्रसिद्ध पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के गांव फरवाही स्थित घर पर शनिवार देर रात मोटरसाइकिल सवार नकाबपोशों द्वारा फायरिंग किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। घटना के समय सिंगर का पूरा परिवार घर के अंदर ही मौजूद था, जबकि गुलाब सिंद्धू काम के सिलसिले में बाहर थे।

    पुलिस घटनाक्रम की जांच में जुट गई हैं, साथ ही ये खबर भी है कि गैंगस्टर डोली बल्ल ने फायरिंग की जिम्मेवारी ली है। अच्छी बात ये रही ही हमले में किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने करीब 10 से 12 राउंड गोलियां चलाईं। इस हमले में किसी को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंची है। पुलिस घटनाक्रम की जांच में जुट गई हैं। गांव के सरपंच जगसीर सिंह ने बताया कि रात करीब 12 बजे मोटरसाइकिल पर सवार कुछ व्यक्ति, जिन्होंने अपने चेहरे ढके हुए थे, गुलाब सिद्धू के घर के बाहर पहुंचे और गोलियां चलाकर फरार हो गए। फायरिंग की आवाज से आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई।

    उन्होंने बताया कि गुलाब सिद्धू इन दिनों टूर कार्यक्रमों में व्यस्त हैं और घटना के समय घर पर नहीं थे। हालांकि उनका परिवार घर में मौजूद था। घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। सरपंच ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि फायरिंग करने वाले आरोपितों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए। बता दें कि गुलाब सिद्धू के पास दो सुरक्षा कर्मी भी हैं। वहीं गायक के घर पर जिन हमलावरों ने फायरिंग की उनमें से 2 ने करीब 6 ने गोलियां चलाई थी व तीसरे ने वीडियो बनाई थी। इस फायरिंग की जिम्मेदारी गैंगस्टर डोली बल्ल ने ली है। एसपी डी संजीव कुमार गोयल के अनुसार गुलाब सिद्धू के घर पर हुई फायरिंग की सीसीटीवी फुटेज चेक की जा रही है। फुटेज के आधार पर पुलिस हमलावरों की पहचान करने में जुट गई हैं।

  • बिहार में एक साथ शुरू हुए 211 डिग्री कॉलेज, 2,451 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति; 100 शिक्षक जाएंगे ऑक्सफोर्ड

    बिहार में एक साथ शुरू हुए 211 डिग्री कॉलेज, 2,451 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति; 100 शिक्षक जाएंगे ऑक्सफोर्ड

     पटना
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बापू सभागार में नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों के 2,451 नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    एक दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला पहला राज्य
    उन्होंने सहायक प्राध्यापकों से पूरी प्रतिबद्धता और मनोयोग के साथ काम करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान की भूमि रहा है।

    नालंदा और विक्रमशिला जैसी शिक्षण परंपराओं ने पूरी दुनिया को ज्ञान का मार्ग दिखाया। अब जरूरत है कि इस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ाया जाए।

    उन्होंने कहा कि बिहार एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक आधारभूत संरचना का और विस्तार किया जाएगा।

    100 प्राध्यापकों को ऑक्सफोर्ड समेत प्रतिष्ठित संस्थानों में भेजने की तैयारी
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 100 प्राध्यापकों को चिन्हित कर ऑक्सफोर्ड सहित दुनिया के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की पहल की जाएगी।

    इसके अलावा विश्व के बेहतर शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ बिहार के शिक्षकों को संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

    शिक्षा बजट का 21 प्रतिशत खर्च कर रही सरकार
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। राज्य के कुल बजट का 21 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है।

    सरकार का लक्ष्य केवल शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उपयोगी हो।

    700 मॉडल स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
    मुख्यमंत्री ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल विकसित किए जा रहे हैं।इन स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ विद्यार्थियों को NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग, लाइव क्लास और 24 घंटे ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    उन्होंने नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थी नियमित रूप से कॉलेज आएं और कक्षाओं में सक्रिय रूप से भाग लें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों के साथ संवाद और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग ही उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के उद्देश्य को पूरा करेगा।

    प्रतिभा की कमी नहीं, बेहतर मार्गदर्शन की जरूरत
    सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
    खबरें और भी

    उन्होंने विश्वास जताया कि नए सहायक प्राध्यापकों के योगदान से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और राज्य के युवाओं के भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    कार्यक्रम को उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर तथा राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।

    इस अवसर पर भारत सरकार में अपर सचिव राहुल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. वाजपेयी, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रास बिहारी सिंह समेत अन्य प्राध्यापक और वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता वरिंदर सिंह बाजवा का निधन, सुखबीर बादल बोले- ‘पार्टी ने खोया सच्चा नेता’

    शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता वरिंदर सिंह बाजवा का निधन, सुखबीर बादल बोले- ‘पार्टी ने खोया सच्चा नेता’

    होशियारपुर.

    शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य वरिंदर सिंह बाजवा का शनिवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही अकाली दल के खेमे में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाजवा के निधन को अकाली दल के लिए बड़ी क्षति बताया।

    वरिंदर सिंह बाजवा लंबे समय से अकाली राजनीति से जुड़े रहे और पार्टी में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। वरिष्ठ नेता के तौर पर पार्टी के संगठनात्मक मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उन्होंने पंजाब और पार्टी से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन के भीतर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें अकाली दल के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता था। बाजवा के निधन की सूचना मिलने के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल शनिवार को मॉडल टाउन स्थित उनके आवास पर पहुंचे। सुखबीर बादल ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उनके साथ दुख साझा करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पार्टी ने अनुभवी स और समर्पित नेता खो दिया है।

    कार्यकर्ताओं में भी शोक
    बाजवा के निधन की खबर फैलते ही अकाली दल के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर दुख जताया। नेताओं ने कहा कि बाजवा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पार्टी को मजबूती देने के लिए लगातार काम किया। उनका सहज व्यवहार और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा। राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजवा का निधन ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब की राजनीति में अकाली दल एक बार फिर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पार्टी के अनुभवी नेता का निधन संगठन के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी क्षति है। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी बाद में साझा की जाएगी। बाजवा के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।

  • झारखंड शिक्षक भर्ती गड़बड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, JSSC से मांगी संशोधित राज्य मेधा सूची

    झारखंड शिक्षक भर्ती गड़बड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, JSSC से मांगी संशोधित राज्य मेधा सूची

    रांची
    झारखंड हाई कोर्ट द्वारा गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर शनिवार को सुनवाई की।

    सुनवाई के दौरान कमेटी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाई गई विषयवार, कोटिवार संशोधित राज्य मेधा सूची प्रस्तुत करे। राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जेएसएससी द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई गई अनुशंसा के आधार पर की गई नियुक्तियों के संदर्भ में शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

    मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, तान्या सिंह, राजेश कुमार एवं अन्य ने पक्ष रखा। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की ओर से शिक्षक नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है।

    वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें नियुक्ति जिलावार मेधा सूची और राज्यस्तरीय मेधा सूची के आधार पर की गई है। एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेधा सूची होने से योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो गए हैं। इसकी जांच के लिए हाई कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।

    सामुदायिक स्वास्थ्य कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को राहत
    हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स उत्तीर्ण अभ्यर्थियों सुनील कुमार एवं अन्य को राहत मिली है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे।

    अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के वर्ष 2019 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर इन्हें 4200 का ग्रेड पे उसी तिथि से दें, जिस तिथि से उन्होंने इस परीक्षा को पास किया है। प्रार्थियों की ओर अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने संकल्प जारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य में स्नातक विज्ञान डिग्री लेने के बाद अभ्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सहायक पद पर नियुक्त कर उन्हें 4200 का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया है।

    इनकी नियुक्ति के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य सहायक नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2025 गठित की है, लेकिन उक्त डिग्री लेने के बाद भी इन्हें 4200 का ग्रेड पे नहीं दिया गया और इनकी नियुक्ति न कर उन्हें संविदा पर रखा गया है। सरकार के वर्ष 2019 संकल्प के तहत इनकी नियुक्ति नहीं की गई।

  • जयपुर में मां और तीन बेटियों की हत्या से मातम, नानी बोलीं- राहुल ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया

    जयपुर में मां और तीन बेटियों की हत्या से मातम, नानी बोलीं- राहुल ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया

     जयपुर
    कालवाड़ रोड स्थित गोविंद वाटिका में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है। एक साथ बेटी गीता और तीन नातिनों नंदिनी, राधिका व गिरिशा उर्फ गोरी की अर्थियां उठती देख गुजरात से जयपुर पहुंची गीता की मां केतकी बेन का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी और तीन नातिनों के शव देखकर उनकी चीख निकल पड़ी। वह बार-बार यही कहती रहीं कि राहुल ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया। केतकी बेन ने बताया कि वह घर पर टीवी देख रही थीं। इसी दौरान खबर के जरिए उन्हें बेटी गीता और तीन नातिनों की हत्या की जानकारी मिली। घटना की सूचना मिलते ही वह जयपुर पहुंचीं। पीहर पक्ष लगातार राहुल के भाई और अन्य परिजनों से आरोपी को पुलिस के सामने पेश करवाने की मांग करता रहा।

    सिर में गंभीर चोट से हुई चारों की मौत
    पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गीता और उसकी तीन बेटियों की मौत का कारण सिर में गंभीर चोट लगना सामने आया है। चारों के सिर पर सीमेंट की ईंट से वार किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब हत्या के पीछे की वजह और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

    23 साल पहले हुई थी गीता की शादी
    परिजन गीता के ससुराल में प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी लगा रहे हैं। करीब 23 साल पहले शादी के बंधन में बंधी गीता की इस तरह हत्या से पीहर पक्ष सदमे में है। परिवार की चार जिंदगियां एक ही झटके में खत्म होने से हर आंख नम है। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर हत्या की असली वजह सामने लाने की मांग की है।

    वहीं पड़ोसियों का कहना है कि परिवार यहां करीब सात साल से रह रहा था। इस दौरान कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि घर में मारपीट या किसी तरह का बड़ा गृहक्लेश चल रहा हो। ऐसे में चार हत्याओं की घटना ने आसपास रहने वाले लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है।

    10 सितंबर को हुई थी मां से आखिरी बातचीत
    गीता के भाई सतीश ने बताया कि 10 सितंबर को नंदिनी ने वीडियो कॉल किया था। हालांकि उस समय ज्यादा बातचीत नहीं हो सकी। नंदिनी ने कुछ देर बाद बात करने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके बाद गीता ने भी अपनी मां केतकी बेन को वीडियो कॉल किया था। गीता ने मां से कहा था कि वह खाना खाने के बाद दोबारा फोन करेगी। लेकिन इसके बाद न तो गीता का फोन आया और न ही नंदिनी का। परिजनों के मुताबिक ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। गीता जब भी खाली होती थी, अपनी मां से जरूर बात करती थी। मां को क्या पता था कि बेटी का यह वादा उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगा।

    चार हत्याओं के पीछे आखिर क्या थी वजह?
    गीता और उसकी तीन बेटियों की हत्या के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राहुल ने ऐसा कदम क्यों उठाया? परिजन इस बात को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं कि चार लोगों की हत्या के बाद घर में मौजूद उसके पिता को क्यों छोड़ दिया गया।

    मां केतकी बेन बेटी और तीन नातिनों को खोने के बाद बार-बार फफक पड़ती हैं। भाइयों और अन्य परिजनों की मांग है कि पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच करे और यह सामने लाए कि आखिर इस खौफनाक वारदात के पीछे क्या वजह थी।

  • बिहार की ‘जीविका दीदियों’ ने बदली गांवों की तस्वीर, 118 लाइब्रेरी से 1 लाख युवाओं को मिल रही नई राह

    बिहार की ‘जीविका दीदियों’ ने बदली गांवों की तस्वीर, 118 लाइब्रेरी से 1 लाख युवाओं को मिल रही नई राह

    पटना
    कल तक जो महिलाएं घर की चारदीवारी, चूल्हे-चौके और सामाजिक बंदिशों में कैद थीं, जिन्हें आर्थिक तंगी और रूढ़िवादी सोच के कारण कभी पढ़ाई का अवसर नहीं मिला।

    आज वही महिलाएं ग्रामीण बिहार में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की जीविका योजना के तहत संचालित जीविका-दीदी की लाइब्रेरी सशक्त माध्यम बन चुकी है।

    राज्य में संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) के माध्यम से 118 जीविका-दीदी की लाइब्रेरी(सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र) का सफल संचालन हो रहा है।

    1 लाख से अधिक युवा एवं क‍िशोर जुड़े
    इनसे अब तक 1 लाख से अधिक किशोर एवं युवा जुड़ चुके हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, ये लाइब्रेरी सप्ताह के सातों दिन सुबह 9.30 से शाम 5.00 बजे तक खुलते हैं।

    प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 50 से 70 शिक्षार्थी पहुंचते हैं। इन शिक्षार्थियों में 61 फीसदी लड़कियां हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यभर में रोजाना करीब 5,000 से 7,000 बच्चे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते हैं।

    इसमें एक बड़ी संख्या दीदियों की बच्चों की भी है जो आज इस सुविधा के बदौलत खुद का भविष्य संवार रहे हैं।
    पुस्तकालयों में शांत वातावरण के साथ कंप्यूटर, टैबलेट, हाई-स्पीड इंटरनेट, किताबें, समाचार पत्र और आनलाइन पठन-पाठन की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाइब्रेरी में बढ़ने के लिए आने वाले बच्चों में कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी।

    आज उन्हें एनआईओएस, बीबीओएसइ और इग्नू जैसे संस्थानों में नामांकन कराकर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, ऑनलाइन आवेदन में सहायता और विशेषज्ञों द्वारा करियर काउंसिलिंग व मेंटरिंग दी जा रही है।

    दहलीज लांघकर विद्या-दीदी बनीं डिजिटल एडुप्रेन्योर
    ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं और संसाधनों के अभाव में जो महिलाएं कभी घर से निकलने में भी झिझकती थीं, आज वे इन सेंटरों का पूर्ण स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन खुद संभाल रही हैं।

    प्रत्येक केंद्र पर एक प्रशिक्षित सामुदायिक पेशेवर विद्या-दीदी (डिजिटल एडुप्रेन्योर) के रूप में तैनात हैं। वे दैनिक संचालन से लेकर बच्चों को डिजिटल सेवाएं देने तक की कमान संभाल रही हैं।

    आर्थिक तंगी से मुक्ति और बढ़ता सामाजिक मान-सम्मान
    विद्या-दीदी और लाइब्रेरी मैनेजर के रूप में काम करके हजारों महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
    इससे न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि घर और समाज के फैसलों में भी उनकी बात को सम्मान मिल रहा है।

    पढ़ाई और डिजिटल हुनर से जुड़कर दीदियों ने साबित किया है कि दिया है कि अगर सही अवसर मिले तो ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।

        जीविका-दीदी की लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी उन बहनों के आत्मसम्मान और सफलता की कहानी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को हराकर नया इतिहास रचा है। राज्य में संचालित 118 पुस्तकालयों के माध्यम से आज 1 लाख से अधिक युवाओं और 61 फीसदी बेटियों को अपने ही गांव में डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारी विद्या-दीदियां आज गांव-गांव में ज्ञान का दीप जलाकर ग्रामीण बिहार को आत्मनिर्भर बना रही हैं।
        श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग।

     

  • कार को पीछे से टक्कर मारना हमेशा गलती नहीं, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की

    कार को पीछे से टक्कर मारना हमेशा गलती नहीं, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की

    चंडीगढ़.

    सड़क हादसे में आगे चल रहे वाहन से पीछे से टक्कर होने मात्र के आधार पर पीछे चल रहे वाहन के चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट करते हुए बीमा कंपनी की तीनों अपीलें खारिज कर दी हैं।

    अदालत ने कहा कि सह-दोषिता यानी कार चालक की भी लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष की है, जो इसका आरोप लगा रहा है। केवल पीछे से टक्कर को आधार बनाकर यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। मामला 29 मार्च 2009 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में सुखविंदर सिंह और प्रेमचंद की मृत्यु हो गई थी, जबकि सुब्बा सिंह घायल हुए थे। तीनों एक मारुति कार से गांव थेह बुटाना से लुधियाना जा रहे थे। समराला चौक के पास आगे चल रहे ट्रक के चालक बलजिंदर सिंह ने कथित तौर पर बिना संकेत दिए बीच सड़क अचानक ब्रेक लगा दिए, जिसके कारण कार ट्रक से जा टकराई।

    सह-दोषिता का दावा हाई कोर्ट में खारिज
    बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि कार ट्रक से पीछे से टकराई थी, इसलिए कार चालक सुखविंदर सिंह की भी सह-दोषिता थी। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने न तो अधिकरण के समक्ष सुखविंदर सिंह की सह-दोषिता की कोई विशिष्ट दलील रखी और न ही इस संबंध में कोई मुद्दा तय कराने का प्रयास किया। वहीं ट्रक चालक खुद गवाही देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ और यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसने अचानक ब्रेक क्यों लगाए थे या पीछे आ रहे यातायात को कोई संकेत दिया था या नहीं।

    हाई कोर्ट से पीड़ित परिवारों को राहत
    अदालत ने सुखविंदर सिंह की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 9.96 लाख रुपये निर्धारित किया। पहले अधिकरण ने 5.81 लाख रुपये दिए थे। इस तरह स्वजन को अतिरिक्त 4.16 लाख रुपये मिलेंगे। 24 वर्षीय सुखविंदर के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत वृद्धि और 18 का गुणक लागू किया गया। वहीं 27 वर्षीय प्रेमचंद की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 11.97 लाख रुपये तय किया गया। पहले मिले 6.09 लाख रुपये के अतिरिक्त अब 5.89 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पत्नी, तीन नाबालिग बच्चों और माता-पिता को वैधानिक अधिकारों के अनुसार मुआवजा दिया गया है।

    पीड़ित को मिलेगा 15 हजार अतिरिक्त
    सुब्बा सिंह के मामले में स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं होने के कारण भविष्य की आय में नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि चोटों की गंभीरता को देखते हुए कुल मुआवजा 60 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया। उन्हें 15 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। तीनों मामलों में बढ़ा हुआ मुआवजा बीमा कंपनी और वाहन चालक-सह-मालिक संयुक्त रूप से देंगे। इस राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

  • PM मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर पर BJP का बड़ा अभियान, राजस्थान में 17 सितंबर से चलेगा ‘सेवा संकल्प’

    PM मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर पर BJP का बड़ा अभियान, राजस्थान में 17 सितंबर से चलेगा ‘सेवा संकल्प’

    जयपुर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राजनीति में 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में एक बड़ा और व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। 17 सितंबर से शुरू होकर पूरे 1 महीने तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम को 'सेवा संकल्प अभियान-जन सेवा ही प्रभु सेवा' नाम दिया गया है। इस अभियान के जरिए बीजेपी कार्यकर्ता केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और पीएम मोदी के 25 वर्षों के समर्पित राजनीतिक सफर को प्रदेश के हर पोलिंग बूथ और आम जनता के घरों तक पहुंचाएंगे। इस राज्य स्तरीय अभियान की रूपरेखा और रणनीतिक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को एक उच्चस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

    इस 2 घंटे तक चली मैराथन कार्यशाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और अभियान की क्षेत्रीय प्रभारी व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2.5 दशकों की राजनीतिक यात्रा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण भाव को जन-जन तक ले जाना हर बीजेपी कार्यकर्ता का दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि देश में बीते वर्षों में आए बुनियादी बदलावों और कल्याणकारी योजनाओं की सही जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचना बेहद जरूरी है। अभियान के तहत पूरे राजस्थान में 13 अलग-अलग प्रकल्पों के माध्यम से सांस्कृतिक, सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने कार्यशाला के दौरान 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित होने वाले 13 विशेष प्रकल्पों की विस्तृत जानकारी साझा की।

    1. आशीर्वाद का दीया: 17 सितंबर 2026 की शाम ठीक 7 बजे प्रदेशभर में कार्यकर्ता और आम नागरिक अपने-अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलन करेंगे।

    2. सपनों का भारत-सेवा चित्र: स्कूली बच्चों और युवाओं के बीच देश के विकास और भावी भारत से जुड़े रचनात्मक चित्रकला और निबंध कार्यक्रम आयोजित होंगे।

    3. नमो सेवा गाथा-सेवा स्मरण: राजस्थान के प्रमुख चौराहों और कस्बों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए पीएम मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा और सेवा कार्यों को दर्शाया जाएगा।

    4. आंगन का उत्सव: राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर कार्यकर्ताओं और पोषण सखियों के साथ विशेष संवाद व सम्मान कार्यक्रम आयोजित होंगे।

    5. कहानी बदलाव की: देश और राजस्थान में हुए ढांचागत व सामाजिक बदलावों को ऑडियो-वीडियो और प्रस्तुतियों के जरिए जनता के सामने रखा जाएगा।

    6. सेवा ज्योति यात्रा: प्रदेश के विभिन्न जिलों और ग्रामीण आंचलों में जन जागरूकता और सेवा संदेश के साथ यात्राएं निकाली जाएंगी।

    7. वडनगर से वाराणसी सेवा यात्रा: पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर और संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जुड़ाव को दर्शाते हुए पवित्र नदियों के जल से हाटकेश्वर महादेव और काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।

    8. सेवा मेरा योगदान: आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधे सामाजिक और स्वच्छता अभियानों से जोड़ने के लिए यह सहभागिता कार्यक्रम चलेगा।

    9. सेवा सेतु अभियान: समाज के वंचित वर्गों और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने का काम किया जाएगा।

    10. सेवा के रंग-राष्ट्र के संग: युवाओं और स्थानीय कलाकारों के साथ राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत सांस्कृतिक व कलात्मक प्रस्तुतियां होंगी।

    11. जन सेवा महाकुंभ: जिला और मंडल स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर और जन कल्याणकारी मेलों का आयोजन किया जाएगा।

    12. रक्तदान महादान: प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    13. विकसित भारत संकल्प यात्रा: विकसित भारत 2047 के संकल्प और केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का घर-घर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।