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  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • मधुपुर को मिलेगा नया रेलवे स्टेशन, 2027 तक पूरा होगा बाईपास प्रोजेक्ट; यात्रियों का बचेगा समय

    मधुपुर को मिलेगा नया रेलवे स्टेशन, 2027 तक पूरा होगा बाईपास प्रोजेक्ट; यात्रियों का बचेगा समय

    मधुपुर (देवघर)
     मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर नवाब मोड के पास बन रहा नया रेलवे स्टेशन (नया मधुपुर स्टेशन) और बाईपास रेल परियोजना का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होने की संभावना है।

    इस पूरे लिंकिंग और बाईपास प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 140 करोड़ से 281 करोड़ के बीच आंकी गई है। इस नई रेल परियोजना में वर्तमान परिस्थिति में काम जोर शोर से चल रहा है।

    अनुमान है कि इस साल के अंत में या फिर नए साल में इलाके के लोगो एक नया स्टेशन मिलेगा। इस स्टेशन का नाम क्या होगा तय नहीं है।

    क्योंकि अभी नामकरण नहीं किया गया है। लेकिन इलाके में चर्चा है नई मधुपुर स्टेशन के नाम से यह जाना जाएगा। फिर कोई महापुरुष के नाम से यह स्टेशन का नाम हो सकता है

    रेलवे ने भी नहीं फिलहाल इस पर कोई अधिसूचना जारी नहीं किया है। बताया जाता है कि मधुपुर गिरिडीह नेशनल हाईवे-114 के किनारे नवाबमोड़ गांव के निकट इस आदर्श स्टेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और रेल पटरियां बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।

    रेलवे के अनुसार इसे 2027 के मध्य तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि मधुपुर बाईपास रेल लाइन खंड की लागत 140.01 करोड़ है, जबकि पूरे लिंकिंग प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 281 करोड़ है।

    नई रेल परियोजना के बन से होने वाले होगा काफी लाभ
    इस नए रेल परियोजना के बन जाने इलाके के लिए को काफी लाभ होगा। यहां के पटवाबाद, नवाब मोड़ के पास नया स्टेशन और बाईपास लाइन बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

    बताया जाता है कि इससे लोको रिवर्सल (इंजन बदलने) के झंझट से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में ट्रेनों के इंजन का रिवर्सल मधुपुर स्टेशन पर हो रहा है। जिसके कारण 20 मिनट ट्रेनों का ठहराव मधुपुर में हो हो जाता है ।

    इससे निजात मिलेगा क्योंकि गिरिडीह-कोडरमा जाने के लिए मधुपुर में इंजन बदलना (लोको रिवर्सल) पड़ता है। इस बाईपास लाइन और नए स्टेशन के चालू होने से ट्रेनें सीधे निकल जाएंगी, जिससे यात्रियों का करीब 30 मिनट से अधिक का समय बचेगा।

    सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी इस रूट के पूरी तरह चालू होने से मधुपुर, न्यू गिरिडीह और कोडरमा के बीच सीधी और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बेहद आसान हो जाएगा।

    आधुनिक यात्री सुविधाएं (एक आदर्श स्टेशन) नवाब मोड़ स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ आधुनिक प्लेटफार्म, यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज, हाई-टेक टिकट काउंटर भवन, यात्री शेड और पेयजल आपूर्ति के लिए नए वाटर कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है।

    आर्थिक और व्यापारिक विकास
    नया स्टेशन बनने से नवाब मोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे।

    लोगों को छोटा मोटा रोजगार मिल जाएगा। स्टेशन के आसपास लोग छोटा-मोटा दुकान लगाकर कमाई कर सकेंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का आर्थिक विकास तेजी से होगा।

    ये काम हो चुका है पूरा
    यहां पर अप व डाउन प्लेटफार्म बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। दो प्लेटफार्म पर यात्री शेड अप व डाउन पर यात्री शेड पूरा हो चुका है। पैदल उपरी पुल बन चुका है। प्लेटफार्म पर लाइट की व्यवस्था के पोल लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका हे।

    प्लेटफार्म पर अप व डाउन लाइन पर लाइट बिछाने का काम चल रहा है। स्टेशन परिसर पर प्रशासनिक भवन बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

    बुकिंग काउंटर बनकर तैयार हो चुका है। शौचालय का भवन बन चुका है। स्टेशन में टाइल्स मार्बल लगाने का काम पूरा हो चुका है। नए स्टेशन का लगभग 75 प्रतिशत काम हाे चुका है।

    ये काम है बाकी
    स्टेशन पर कंबाइंड भवन बनकर तैयार है । एक ही भवन के अंदर बुकिंग काउंटर, केबिन,यात्री प्रतीक्षालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय आदि संचालित किया जाएगा।

    इसी भवन में पैनल, रिले सिस्टम सिग्नल आदि इलेक्ट्रिक विछाने का काम चल रहा है। ओवरहेड बिजली का हाई टेंशन तार लगाने का काम चल रहा है।

    पोल गाड़ने का काम चल रहा है। इसके बाद तार लगाने का काम किया जाएगा। शौचालय में पानी की व्यवस्था के लिए जलमीनार बनाया जा रहा है।

    वहीं, शौचालय के अंदर की व्यवस्था अभी किया जाना है। स्टेशन से पहले ग्रामीणों की आवाजाही के अंडरपास रास्ते का काम चल रहा है। इस लाइन पर पुल पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है।

    काम में अड़चन
    नए स्टेशन के पूरा होने में कुछ अड़चन भी है। अप प्लेटफार्म के सिग्नल स्टाटर के पास पूर्वी छोर पर करीब एक दर्जन घरों का अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाया है।

    इस कारण इस परियोजना में विलंब हो रहा है। अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद ही यहां पटरी बिछाने का काम किया जाएगा। इस कारण से वर्तमान में काम डिले हो रहा है।

  • जेएनयू के प्रोफेसर पर दस से अधिक छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है

    जेएनयू के प्रोफेसर पर दस से अधिक छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है

    नई दिल्ली
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक प्रोफेसर पर 10 से अधिक छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) इन शिकायतों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, ये शिकायतें करीब एक महीने पहले दर्ज कराई गई थीं।

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही रहने वाले प्रोफेसर पर आरोप है कि उसने कुछ छात्रों को अपने घर पर ही आयोजित बैठकों में बुलाया और वहां कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया या प्रस्ताव किए। कुछ शिकायतों में क्लास के दौरान भी आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

    सीनियर छात्राओं ने भी लगाए आरोप
    अधिकारियों के अनुसार, प्रोफेसर के खिलाफ हाल में एक शिकायत सामने आने के बाद कुछ सीनियर छात्राएं भी सामने आईं और उन्होंने भी इस तरह के आरोप लगाए हैं।

    जानकारी के मुताबिक, ICC फिलहाल इन शिकायतों की जांच कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी जैसे-जैसे अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगी अभी और शिकायतें सामने आ सकती हैं।

    ICC ने टिप्पणी से किया इनकार
    इस मामले की जांच कर रही JNU की आंतरिक शिकायत समिति ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। समिति का कहना है कि यह आंतरिक मामला है और फिलहाल इसकी जांच चल रही है। JNU की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर ICC कार्रवाई करती है और कुलपति इस समिति की सदस्य नहीं होती हैं।

    प्रोफेसर ने आरोपों को बताया झूठा
    वहीं, आरोपों से घिरे प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया। यह भी पूछे जाने पर कि क्या वह ICC के सामने पेश हुए हैं या उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया है, प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।

  • हरियाणा के सहकारी बैंकों में 4,566 पद खाली, 886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

    हरियाणा के सहकारी बैंकों में 4,566 पद खाली, 886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी सामने आई है। विधानसभा में मुलाना की कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने 23 अगस्त 2026 की स्थिति के आधार पर बैंकों में स्वीकृत पदों, कार्यरत नियमित कर्मचारियों और रिक्त पदों का ब्योरा दिया है।

    आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के सहकारी बैंकों में कुल 5,148 स्वीकृत पदों में से 582 पर ही नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 4,566 पद खाली हैं।

    सरकार के जवाब के अनुसार हरको बैंक में 591 स्वीकृत पद हैं। इनमें 207 कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं, जबकि 108 पद रिक्त हैं।

    वहीं हरियाणा राज्य के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। यहां 4,557 स्वीकृत पदों में सिर्फ 375 कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं और 4,182 पद खाली हैं।

    हरको बैंक में श्रेणी-ए के 45 स्वीकृत पदों में 33 कर्मचारी कार्यरत और 12 पद रिक्त हैं। श्रेणी-बी के 139 पदों में 80 कर्मचारी कार्यरत और 59 पद रिक्त हैं। श्रेणी-सी में 287 पदों में 69 कर्मचारी कार्यरत और 218 पद रिक्त हैं। श्रेणी-डी के 120 पदों में 25 कर्मचारी कार्यरत और 95 पद रिक्त हैं।

    जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में श्रेणी-सी के 3,087 स्वीकृत पदों में 333 कर्मचारी कार्यरत और 2,754 पद रिक्त हैं। इसी तरह श्रेणी-डी के 1,470 पदों में केवल 42 कर्मचारी कार्यरत हैं और 1,428 पद खाली हैं।

    886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू
    बैंकों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल 886 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। मंत्री के जवाब के अनुसार यह भर्ती आइबीपीएस (इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन) के माध्यम से की जा रही है।

    इसमें हरको बैंक तथा प्रदेश के 17 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के 33 सीनियर अकाउंटेंट, 116 जूनियर अकाउंटेंट तथा 737 क्लर्क के पद शामिल हैं। इन पदों को शीघ्र भरने की बात सरकार ने कही है। आइबीपीएस बैंकिंग क्षेत्र में भर्ती और चयन प्रक्रिया संचालित करने वाली संस्था है।

    इस भर्ती से तत्काल स्तर पर बैंकों में मानव संसाधन की कमी को कुछ हद तक दूर करने की उम्मीद है। हालांकि आंकड़ों से स्पष्ट है कि 4,566 रिक्त पदों के मुकाबले फिलहाल 886 पद ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं। यानी बड़ी संख्या में पदों पर अभी भी नियुक्ति की जरूरत बनी हुई है।

    आंकड़ों की नजर में सहकारी बैंकों की स्थिति
        कुल स्वीकृत पद: 5,148
        नियमित कार्यरत कर्मचारी: 582
        कुल रिक्त पद: 4,566
        हरको बैंक में स्वीकृत पद: 591
        हरको बैंक में कार्यरत: 207
        हरको बैंक में रिक्त: 108
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में स्वीकृत पद: 4,557
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में कार्यरत: 375
        जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में रिक्त पद: 4,182
        तत्काल भर्ती प्रक्रिया: 886 पद
        इनमें सीनियर अकाउंटेंट: 33
        जूनियर अकाउंटेंट: 116
        क्लर्क: 737

     

  • बिहार में बाढ़ से 19.57 लाख लोग प्रभावित, 110 सामुदायिक रसोई और 1,345 नावें तैनात

    बिहार में बाढ़ से 19.57 लाख लोग प्रभावित, 110 सामुदायिक रसोई और 1,345 नावें तैनात

    पटना
     बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

    विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 1.98 लाख लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन कराया जा चुका है।

    इसके साथ ही, विस्थापित लोगों के लिए 01 राहत शिविर भी शुरू किया गया है, जहां 326 बाढ़ शरणार्थियों के रहने, भोजन और चिकित्सा देखभाल की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण तीव्र गति से किया जा रहा है।

    ऐसे परिवारों को तात्कालिक आश्रय और खान-पान की सुविधा देने के लिए अब तक लगभग 55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं।

    जलभराव वाले इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य भर में कुल 1,345 नावों को परिचालित किया गया है।

    मौजूदा समय में राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों की लगभग 19.57 लाख आबादी जलभराव से प्रभावित है, जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

    NDRF और SDRF की टीम तैयार
    साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने और त्वरित राहत-बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की 10 टीमें और एसडीआरएफ (एसडीआरएफ) की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं।

    नदियों के जलस्तर पर भी लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। 6 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराझ पर गंडक नदी का जलस्राव 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है।

    वहीं, वीरपुर बराझ पर कोसी नदी का जलस्राव 1,73,255 क्यूसेक है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराझ पर जलस्राव 2,27,717 क्यूसेक दर्ज हुआ है, जिसमें घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

    गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है।

    वर्षापात के आंकड़ों के अनुसार, 01 जून से 06 सितंबर के दौरान राज्य में औसतन 590.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

    इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए हैं और हर प्रभावित नागरिक तक त्वरित राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

  • मंदिर में प्रसादी करना पड़ा भारी! उदयपुर में परिवार का सामाजिक बहिष्कार, 1.51 लाख जुर्माने का आरोप

    मंदिर में प्रसादी करना पड़ा भारी! उदयपुर में परिवार का सामाजिक बहिष्कार, 1.51 लाख जुर्माने का आरोप

    उदयपुर
    उदयपुर के गोगुंदा क्षेत्र के भुताला गांव में मंदिर में प्रसादी करने पर एक परिवार का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 5 पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि समाज के लोगों ने परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और राशि नहीं देने पर परिवार को समाज से अलग कर दिया।

    पीड़ित गणेश सिंह ने बताया कि 24 मई 2026 को गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद आरोपी किशोर सिंह, तेज सिंह, नवल सिंह, मोहन सिंह, भैरू सिंह, चंदन सिंह, राम सिंह, काल सिंह, लहर सिंह, कान सिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य लोगों ने आपत्ति जताई। पीड़ित के अनुसार, अगले दिन पंचायत बुलाकर 1 लाख 51 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया। राशि देने में असमर्थता जताने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

    विरोध करने पर मारपीट का आरोप
    पीड़ित ने आरोप लगाया कि परिवार को समाज के अन्य लोगों से मेल-जोल और संपर्क नहीं रखने की हिदायत दी गई। मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने से भी रोका गया। रिश्तेदार की मौत होने पर श्मशान में भी जाने नहीं दिया गया। आदेश का विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में एएसआइ विनेश कुमार ने बताया कि शनिवार को पंचायत के पांच प्रमुख पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    वाकली पुलिया से नदी में गिरी श्रद्धालुओं की जीप
    एक अन्य खबर के अनुसार धरियावद-उदयपुर-बांसी मार्ग पर वाकली पुलिया के समीप शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। श्री सांवलिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप शनिवार तड़के अनियंत्रित होकर पुलिया से सीधे नीचे सुखली नदी में जा गिरी। गनीमत रही कि हादसे में सभी 10 यात्री समय रहते वाहन से बाहर निकल गए।

    पुलिस के अनुसार मूंगाणा के समीप कुंडी गांव निवासी श्रद्धालु श्री सांवलिया जी के दर्शन कर जीप से अपने गांव लौट रहे थे। इस दौरान शनिवार तड़के करीब 4 बजे वाकली पुलिया के पास घुमावदार मोड़ पर चालक नियंत्रण खो बैठा और जीप नदी में जा गिरी। हादसा होते ही जीप में सवार यात्रियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत एक दूसरे का हाथ पकड़कर तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। जिस जगह ये हादसा हुआ वो जंगल का क्षेत्र होने एवं मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण हादसे की सूचना काफी देर से पुलिस को मिली।

  • CISF में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1995 बैच के 6 IPS अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

    CISF में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1995 बैच के 6 IPS अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

     रांची
     केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय और कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 1995 बैच के छह भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को स्पेशल महानिदेशक और संबंधित पदों पर नियुक्त किया है।

    सीआईएसएफ मुख्यालय ने सेक्टर स्तर पर भी नए अधिकारी तैनात किए हैं। झारखंड कैडर से भी एक अधिकारी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। ओडिशा कैडर के 1995 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी पदमाकर एस. रानीप्से (पूर्व में सीआईएसएफ के अपर महानिदेशक) को सीआईएसएफ के स्पेशल महानिदेशक के पद पर इन-सिटू आधार पर नियुक्त किया गया है।

    उनका कार्यकाल 31 मई 2028 (सेवानिवृत्ति की तिथि) या अगले आदेश तक रहेगा। इस नियुक्ति के लिए उनके पद को अस्थायी रूप से अपग्रेड किया गया है।

    अन्य पांच अधिकारियों की नियुक्तियां-

    • संदीप खिरवार (हरियाणा कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (31 मई 2033 तक)
    • पुनीत रस्तोगी (त्रिपुरा कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2030 तक)
    • सतीश श्रीरामाजी खंडारे (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2031 तक)
    • राजेश कुमार (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (दो वर्ष के लिए इन-सिटू)
    • जग मोहन (बिहार कैडर, 1995) को खुफिया ब्यूरो में स्पेशल निदेशक (30 जून 2031 तक)

    ये अधिकारी अपने वर्तमान पदों से मुक्त होकर केंद्रीय सुरक्षा संगठनों में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस कदम का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाना है।

    इससे पहले 1 सितंबर 2026 से सीआईएसएफ में सेक्टर स्तर पर भी बदलाव हुए। हिमांशु पाण्डेय ने सेंट्रल सेक्टर भिलाई के महानिरीक्षक का कार्यभार संभाला। पूर्व महानिरीक्षक निलिमा रानी सिंह 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गईं।

    दिल्ली मुख्यालय में एयरपोर्ट सेक्टर की अपर महानिदेशक विनिता ठाकुर (राजस्थान कैडर, 1996 बैच) को अगले आदेश तक अपर महानिदेशक नॉर्थ सेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पूर्व अपर महानिदेशक सुधीर कुमार भी 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए थे।

    सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने सेवानिवृत्त अधिकारियों सुधीर कुमार और निलिमा रानी के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किए और उनके कार्य की सराहना की।

    झारखंड कैडर से भी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति हुई है। जून 2026 में झारखंड कैडर के 2011 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी चंदन कुमार झा को सीआईएसएफ में उप महानिरीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई थी। वे पहले झारखंड पुलिस में अपराध अनुसंधान विभाग के उप महानिरीक्षक थे।

    झारखंड पुलिस की सिविल लिस्ट में भी उनका वर्तमान पद उप महानिरीक्षक, सीआईएसएफ दर्शाया गया है। ये बदलाव सीआईएसएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नेतृत्व को मजबूत करने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • पटना में बनेगा नया रामलीला मैदान, सीएम सम्राट चौधरी ने किया बड़ा ऐलान

    पटना में बनेगा नया रामलीला मैदान, सीएम सम्राट चौधरी ने किया बड़ा ऐलान

    पटना
    सीएम सम्राट चौधरी ने कल शनिवार (5, सितंबर) को पटना के गांधी मैदान में आयोजित श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026 ‘कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार एवं सात्विका ग्रुप के सौजन्य से दशहरा कमिटी ट्रस्ट, पटना द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए अपने संबोधन में कहा कि, अगले वर्ष मार्च तक मरीन ड्राइव के समीप तीन बड़े मैदान तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक मैदान का नाम रामलीला मैदान रखा जाएगा।

    सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि रामलीला एवं रावण वध के कार्यक्रम को गांधी मैदान से वहां स्थानांतरित कर पूरी व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव एवं रावण वध का आयोजन कर रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से रामलीला और रावण वध के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया जा रहा था। इसको लेकर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। मार्च के बाद जैसे ही नए मैदान का हैंडओवर होगा, समिति को वह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा।

    इस मौके पर श्रीकृष्ण महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की विजय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया और कौरवों से केवल पांच गांव देने की बात कही, लेकिन अन्याय के कारण युद्ध टल नहीं सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का स्पष्ट संदेश था कि जो अन्याय करेगा, उसका विनाश निश्चित है। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समाज को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    इस दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इस समय गंगा में पानी का स्तर काफी अधिक है। गंगा बेसिन वाले जिलों में अधिकारियों और मंत्रियों को लगाया गया है तथा सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि सोन और गंडक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। नेपाल की तराई से आने वाले पानी के कारण बिहार के लोगों को हर वर्ष परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारे सड़क निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा, ताकि बरसात के दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बिहार को भी समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना के अनुरूप बिहार को समृद्ध बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही है।

    सीएम सम्राट ने श्रीकृष्ण महोत्सव और दही हांडी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दशहरा कमेटी ट्रस्ट को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बिहार की सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलती है। वहीं, दशहरा कमिटी ट्रस्ट के सदस्यों ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। इस मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जहां मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान सीएम के अलावा , स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार समेत कई मंत्री और विधायक समेत अधिकारी मौजूद रहे।

  • पंजाब में 1 दिसंबर से जातिगत जनगणना, 16 नवंबर से होगी स्व-गणना; पूछे जाएंगे 40 सवाल

    पंजाब में 1 दिसंबर से जातिगत जनगणना, 16 नवंबर से होगी स्व-गणना; पूछे जाएंगे 40 सवाल

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम

    पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी।

    2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी

    2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी।

    पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल
    जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।

    शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

    बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा
    जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी।

    जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

    पंजाब सरकार से होगा तालमेल
    पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा।

    यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना

    लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है।
    16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना

    भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।'
    लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना

    इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी।
    मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल

    जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा।

    एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संचालित करना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को आरजीआई द्वारा जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना 2027 के लिए मकान-सूचीकरण का कार्य भी स्थगित कर दिया है। स्वतंत्रता के बाद होने वाली आठवीं जनगणना दो चरणों में कराई जा रही है-पहले चरण को मकान-सूचीकरण और आवास जनगणना कहा जाता है, जबकि दूसरे चरण को जनसंख्या की गणना कहा जाता है।

    2011 में साक्षरता 75.84% थी
    पंजाब में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उस समय राज्य की आबादी करीब 2.77 करोड़ थी। इसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89 प्रतिशत रही थी। जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था।

    वर्ष 2011 में पंजाब की साक्षरता दर 75.84 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 80.44 प्रतिशत और महिला साक्षरता 70.73 प्रतिशत रही। राज्य की 62.52 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 37.48 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। नई जनगणना से पंजाब की वर्तमान आबादी, सामाजिक संरचना, जातिगत स्थिति, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों की नई तस्वीर सामने आएगी। 

  • गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेड रॉट से निपटेंगी 6 नई उन्नत किस्में; 14% तक चीनी रिकवरी

    गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेड रॉट से निपटेंगी 6 नई उन्नत किस्में; 14% तक चीनी रिकवरी

    करनाल
    देश में चीनी उद्योग और गन्ना किसान इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। वर्षों तक उत्तर भारत के खेतों में राज करने वाली गन्ने की वंडर किस्म सीओ-0238 में रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी के तेजी से फैलने से पैदावार और चीनी उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।

    दूसरी ओर, गन्ने का रकबा घटने से चीनी मिलों के पेराई सत्र प्रभावित हो रहे हैं। इस बढ़ते संकट के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल, लखनऊ संस्थान और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऐसी 6 उन्नत प्रजातियां तैयार की हैं, जो देश के चीनी उद्योग को नई संजीवनी देने जा रही हैं।

    शोध और विकास के किस मुहाने पर खड़ी हैं नई प्रजातियां?
    1.गन्ना प्रजनन अनुसंधान संस्थान करनाल l सीओ-16030: यह किस्म अंतिम रिलीज प्रक्रिया में है। चीनी मिलों में इसके शुद्ध बीज बढ़ाने का काम चल रहा है ताकि किसानों को जल्द व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके। l

    सीओ-17018: यह अगेती किस्म वर्तमान में अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (एआइसीआरपी) के तहत एडवांस्ड वैराइटल ट्रायल के चरण में है। विज्ञानी इसके शर्करा प्रतिशत और रोग प्रतिरोधकता की गहन निगरानी कर रहे हैं।

    2. भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आइआइएसआर) लखनऊ
    सीओ-एलके14201: यह किस्म शोध का चरण सफलतापूर्वक पार कर भारत सरकार की केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति (सीवीआरसी) द्वारा नोटिफाइड हो चुकी है। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश व मध्य भारत में किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है।

    सीओ-एलके 15201 : इस अगेती किस्म ने राष्ट्रीय परीक्षण पूरे कर लिए हैं। आइआइएसआर लखनऊ के फार्मों पर इसके शुद्ध बीजों का संवर्धन कर इसे राज्य स्तरीय मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है।

    3. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआइ), पुणे महाराष्ट्र
    वीएसआइ 434: महाराष्ट्र और प्रायद्वीपीय भारत के लिए यह उच्च-शर्करा किस्म आधिकारिक रूप से रिलीज हो चुकी है और चीनी मिलों के कमान क्षेत्रों में व्यापक रूप से बुआई शुरू कर दी गई है।

    सीओ-एम12085: वीएसआइ के प्रयास से विकसित यह किस्म नोटिफाइड होकर महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। यह विशेषकर पेड़ी फसल और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी।

    देश में गिरते चीनी उत्पादन में संकटमोचन बनेंगी गन्ने की छह नई प्रजातियां
    एसबीआइ करनाल से डॉ. रविंद्र ने बताया कि छह नई किस्मों को 14 प्रतिशत या इससे भी ऊपर रिकवरी रेट के साथ धरातल पर उतारने का प्रयास विज्ञानियों द्वारा किया जा रहा है। सीओ-16030, सीओएलके 14201 और वीएसआइ 434 जैसी अगेती किस्में 9 से 10 महीने में पककर तैयार हो जाती हैं। इनसे पेराई सत्र की शुरुआत में ही 14 प्रतिशत तक चीनी रिकवरी मिलेगी, कई क्षेत्रों में आंकड़ा इससे भी पार जा सकता है। खास बात ये भी है कि यह रेड राट से पूर्ण सुरक्षित है।

    l आइसीएआर के एसबीआइ क्षेत्रीय केंद्र करनाल, आइआइएसआर लखनऊ और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में तैयार की जा रही हैं यह अत्याधुनिक किस्में l सर्वाधिक 13 से 14 प्रतिशत रिकवरी देने वाली किस्म सीओ-15023 एकल किस्म पर निर्भरता जोखिम भरी, इसलिए छह नई प्रजातियां इस संकट का करेंगी स्थायी समाधान