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  • राजस्थान में 17 दिन गरजेंगे लड़ाकू विमान, 21 सितंबर से शुरू होगा ‘तरंग शक्ति-2026’ युद्धाभ्यास

    राजस्थान में 17 दिन गरजेंगे लड़ाकू विमान, 21 सितंबर से शुरू होगा ‘तरंग शक्ति-2026’ युद्धाभ्यास

    जोधपुर

    भारत और पाकिस्तान के बीच बनी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सठे राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में भारतीय वायुसेना अपने सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति-2026' की मेजबानी करने जा रही है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित होने वाले इस मेगा एक्सरसाइज को लेकर वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कुल 17 दिनों के लिए एक 'नोटम' (NOTAM – Notice to Airmen) जारी कर दिया है। इसके तहत जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के विशाल हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सीमा पार महज 20 किलोमीटर की दूरी तक भारतीय लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनाई देगी, जिससे पाकिस्तानी सेना और वहां के रणनीतिकारों में जबर्दस्त खलबली मच गई है।

    इस मेगा एयर एक्सरसाइज में दुनिया के 8 शक्तिशाली देश अपने उन्नत एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स के साथ सीधे तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा करीब 30 से अधिक देशों के रक्षा प्रतिनिधि और सैन्य अधिकारी ऑब्जर्वर के तौर पर इस ऐतिहासिक अभ्यास के साक्षी बनेंगे। राजस्थान के 4 प्रमुख सीमावर्ती जिलों के ऊपर 40 हजार फीट तक के आसमान को सैन्य उड़ानों के लिए पूरी तरह रिजर्व किया गया है।

    भारतीय वायुसेना का यह कदम न केवल अपनी सामरिक ताकत और त्वरित कार्रवाई की रणनीति को परखने का जरिया है, बल्कि यह पाकिस्तान को उसकी दहलीज पर भारत की अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी का सीधा संदेश भी है।

    पाकिस्तान सीमा में हलचल, पाक सेना में इमरजेंसी बैठकें!
    भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए नोटम का दायरा इतना व्यापक है कि बीकानेर के नाल एयरबेस के पास इसका एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतने कम फासले पर आधुनिक युद्धक विमानों के अभ्यास की खबर मिलते ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद के सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी थलसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने आपातकालीन बैठकें बुलाकर सीमा पर अपनी चौकसी और रडार सर्विलांस बढ़ा दिया है। भारत के इस युद्धाभ्यास में मित्र देशों के अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी शामिल हो रहे हैं, इसी वजह से पाकिस्तान ने सीमा पार अपनी जासूसी और निगरानी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है।

    40 हजार फीट की ऊंचाई तक सील होगाएयरस्पेस, जानिए नोटम का पूरा शेड्यूल
    'तरंगशक्ति-2026' अभ्यास के दौरान आम नागरिक उड़ानों की सुरक्षा और वायुसेना के लड़ाकू जहाजों के निर्बाध संचालन के लिए एयरस्पेस को 40 हजार फीट की ऊंचाई तक आरक्षित किया गया है। यह नोटम 17 दिनों के दौरान लगातार लागू नहीं रहेगा, बल्कि इसे अलग-अलग चरणों में सुबह 9:00 बजे से लेकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक प्रभावी बनाया गया है।

    पहला चरण: 21 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक

    दूसरा चरण: 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक

    तीसरा चरण: 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक

    अंतिम चरण: 7 अक्टूबर 2026 को

    इन निर्धारित तिथियों पर जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर और जैसलमेर सेक्टर में वायुसेना के विमान अपनी युद्धक क्षमताओं, हवा से हवा में ईंधन भरने, और सटीक बॉम्बिंग का अभ्यास करेंगे।

    जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। यहां दुनिया की 8 प्रमुख वायुसेनाओं के स्क्वाड्रन अपने-अपने लड़ाकू जहाजों के साथ पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस और जगुआर जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान विदेशी फाइटर जेट्स के साथ मिलकर मॉक-ड्रिल और कॉम्बैट ऑपरेशन्स को अंजाम देंगे।

    30 देशों के सैन्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख और रणनीतिक महत्व कितना बढ़ चुका है। इस अभ्यास के जरिए मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा रणनीति और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान को नई मजबूती मिलेगी।

    सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है यह अभ्यास
    राजस्थान से सटी पश्चिमी सीमा हमेशा से ही रक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रही है। पोकरण और थार के रेगिस्तान में वायुसेना का यह बहुराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन भारत की ऑपरेशनल रेडिनेस (युद्धक तैयारी) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'तरंगशक्ति-2026' से भारतीय वायुसेना न केवल अपने नए हथियारों और रणनीति का परीक्षण करेगी, बल्कि सीमा पार से होने वाली किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी और धार देगी। अगले 17 दिनों तक राजस्थान का आसमान वायुसेना के पराक्रम का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • JPSC मेधा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 20 जेल में, 7 आरोपी अब भी फरार

    JPSC मेधा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 20 जेल में, 7 आरोपी अब भी फरार

     रांची
     जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआइडी ने जांच शुरू होने से लेकर अब तक पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते सहित 20 आरोपितों को जेल भेज दिया है।

    सात ऐसे आरोपित भी हैं, जो जांच शुरू होने के बाद से ही फरार चल रहे हैं। अगर समय रहते वे सीआइडी के सामने उपस्थित नहीं हुए तो जांच एजेंसी सीआइडी की विशेष अदालत से उपरोक्त संदिग्धों, आरोपितों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट, कुर्की जब्ती आदि भी करेगी।

    इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनकी तलाश के सीआइडी ने पांच दिनों में कई दिनों तक दबिश दी, लेकिन इनका पता नहीं चल सका। इन आरोपितों पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता, कथित पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी सहित कई गंभीर आरोप हैं।

    ये सभी आरोपित सीआइडी थाना कांड संख्या 16/2026 के संदिग्ध हैं। इनपर पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी, अवैध लेन-देन, सेटिंग कर परीक्षा पास कराने आदि के आरोप हैं।

    गिरफ्तार 20 आरोपितों से पूछताछ व छानबीन में इन आरोपितों के नाम सामने आए हैं। इन आरोपितों में रांची के नामकुम का रहने वाला आदित्य पांडेय, टाटीसिलवे निवासी पवन कुमार सिंह, पलामू के बारालोटा निवासी रविशंकर कुमार, पलामू के ही हमीदगंज निवासी संतोष कुमार सिंह, बोकारो सेक्टर 3 निवासी सानन्द प्रकाश, कोर्रा हजारीबाग का रहने वाला लालू कुमार यादव और बेंगाबाद गिरिडीह का सौरभ कुमार पांडेय शामिल है। जाचं में कई प्रभावशाली लोगों के जुड़े होने के भी संकेत हैं, जिसकी जांच चल रही है।

    जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में पूर्व के केस डायरी पर भी नए सिरे से जांच
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल प्रतियोगिता परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी मामले की जांच कर रही सीआइडी ने पूर्व में जांच के दौरान अक्टूबर 2025 में 12 अहम और तकनीकी बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल करने के सुझाव दिए थे।उपरोक्त केस डायरी पर नए सिरे से भी जांच जारी है।

    पूर्व में जब्त मोबाइल से फोरेंसिक डेटा निकालकर उसकी जांच की जा रही है। इस मामले के अन्य आरोपित विनय शाह और अनीश कुमार के आधार कार्ड के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि उनके नाम पर कोई अन्य नया सिम कार्ड तो जारी नहीं कराया गया था।

    प्राथमिकी व गवाहों के बयानों में यह बात सामने आई थी कि परीक्षा तिथि से 2-3 दिन पूर्व छात्रों को आसनसोल के सिन्धी होटल, नियामतपुर के विवाह भवन सहित मुजफ्फरपुर, रांची, मांडू, दिल्ली और काठमांडू (नेपाल) तक ले जाकर प्रश्न व उत्तर रटवाया गया था। सीआइडी इन सभी ठिकानों का भौतिक सत्यापन भी कर रही है।

  • बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1 SP समेत 37 पुलिस अफसरों का तबादला

    बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1 SP समेत 37 पुलिस अफसरों का तबादला

    पटना
    बिहार सरकार ने रविवार को एक एसपी, आठ एएसपी और 28 डीएसपी समेत बिहार पुलिस सेवा के 37 पदाधिकारियों का तबादला किया है। इस तबादले में मुंगेर, किशनगंज, सारण, लखीसराय में नये साइबर डीएसपी, सीवान, रोहतास और अरवल में नये ट्रैफिक डीएसपी और जमालपुर और समस्तीपुर में नये रेल डीएसपी की तैनाती की गयी है। गृह विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, आरा सदर के एसडीपीओ वन राजकुमार साह को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में एसपी की जिम्मेदारी दी गयी है। मधेपुरा सदर के एसडीपीओ प्रवेंद्र कुमार भारती को ईओयू में एएसपी बनाया गया है। दाऊदनगर के एसडीपीओ अशोक कुमार दास को निगरानी जबकि सीवान सदर के एसडीपीओ वन अजय कुमार सिंह और सीवान के एएसपी संजय कुमार झा को विशेष शाखा में एएसपी की जिम्मेदारी मिली है। समस्तीपुर सदर के एसडीपीओ वन संजय कुमार पांडेय बी-सैप वन पटना, त्रिवेणीगंज के एसडीपीओ विभाष कुमार बी-सैप सात कटिहार में एएसपी बनाया गया है।

    फुलवारीशरीफ के दीपक कुमार को सारण और बेतिया सदर के एसडीपीओ रजनीश कांत प्रियदर्शी को लखीसराय के साइबर क्राइम डीएसपी की जिम्मेदारी मिली है। पटना के मो आदिल बेलाल को समस्तीपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है। अजय चौधरी को सीवान का डीएसपी मुख्यालय, सुनील पांडेय को विशेष सुरक्षा दल बिहार का डीएसपी, संजय कुमार जायसवाल को एसटीएफ का डीएसपी, आलोक कुमार सिंह वन को रोहतास, विपिन नारायण शर्मा को पटना, सुरेंद्र कुमार को सीवान का डीएसपी (रक्षित) एवं मिथिलेश कुमार सिंह को केंद्रीय वस्त्र एवं आयुद्ध भंडार के डीएसपी की जिम्मेदारी मिली है।

    दो आईएएस और आठ बिप्रसे अधिकारियों का तबादला
    सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों का तबादला किया है। साथ ही, बिहार प्रशासनिक सेवा के आठ पदाधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई। राजस्व पर्षद के सचिव कुमार मंगलम को ग्रामीण कार्य में अपर सचिव बनाया गया है। मधेपुरा के उप विकास आयुक्त अनिल बसाक को पथ निर्माण में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है। भविष्य निधि निदेशालय के सहायक निदेशक गौतम कुमार को समस्तीपुर का नगर आयुक्त बनाया है। भागलपुर के अपर समाहर्ता दिनेश राम को योजना पर्षद में संयुक्त सचिव, तिरहुत प्रमंडल क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के संयुक्त आयुक्त सह सचिव अरुण कुमार को मधेपुरा का उप विकास आयुक्त बनाया गया है।

    कहलगांव के डीसीएलआर सरफराज नवाज को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन में ओएसडी, लखीसराय के वरीय उप समाहर्ता शशि कुमार को भविष्य निधि में सहायक निदेशक, कटिहार वरीय उप समाहर्ता शशि भूषण शशि को बांका का भूमि सुधार उप समाहर्ता, नरकटियागंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता चंद्रशेखर कुमारन को पर्यावरण, वन में ओएसडी तथा वैशाली की वरीय उप समाहर्ता तनुजा श्री को सीवान का डीएसओ बनाया गया है।

  • बिहार में बाढ़ का कहर, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; CWC की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    बिहार में बाढ़ का कहर, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; CWC की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    पटना

     बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचा है. राज्य के 12 जिलों के 22 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित है. राजधानी पटना, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार सहित कई जिलों में गांव के गांव पानी में घिरा है. पटना में रविवार को गंगा नदी का जलस्तर बाढ़ के उच्चतम स्तर को पार कर गया, जिसके बाद अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया है. गंगा के अलावा कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती भी उफान पर है. जिससे प्रभावित इलाकों में बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है. राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों में 22.42 लाख आबादी इस समय पानी के जद में है। 

    हाथीदह में लगातार खतरे के निशान के ऊपर गंगा
    इधर सेंट्रल वॉटर कमीशन ने बिहार के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों पर अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है. CWC नेटवर्क के 3 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशनों – पटना जिले के गांधीघाट, हाथीदह और पंडारक – पर गंगा नदी में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर है. हाथीदह में गंगा खतरे के निशान 41.76 मीटर से लगातार ऊपर बह रही है। 

    हाथीदह में आज सुबह गंगा का जलस्तर 43.52 मीटर दर्ज की गई

    CWC ने 8 अगस्त तक के लिए जारी की चेतावनी

    CWC का कहना है कि चूंकि बिहार में गंगा की मुख्य धारा को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की नदियों के साथ-साथ बिहार के भीतर अपनी उत्तरी सहायक नदियों से भी काफी पानी मिलता है, इसलिए 8 अगस्त तक बिहार के बक्सर, सारण, वैशाली, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर जिलों में नदी के जलस्तर में स्थिरता या बढ़ोतरी के साथ सामान्य से अधिक या गंभीर बाढ़ की स्थिति बने रहने की संभावना है। 
     
    गांधी घाट पर गंगा के जलस्तर ने तोड़ा 6 साल पुराना रिकॉर्ड
    इधर पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड 50.57 मीटर पर पहुंच गया है, जिसने 2016 का 50.52 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पटना सिटी के कई मोहल्लों में पानी घुस गया है. पुनपुन के इलाकों में भी कई गांव बाढ़ की चपेट आ गए हैं. हथिदह में गंगा 2021 के रिकॉर्ड स्तर पर रात 11 बजे पहुंच गई। तब गंगा 43.52 मीटर पर पहुंची थी। 

    छपरा में माही नदी का तटबंध टूटने से कई गांव जलमग्न
    छपरा के दरियापुर में माही नदी का तटबंध 20 फीट टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए. भागलपुर के अकबरनगर में रिंग बांध ओवरफ्लो होने से सुल्तानगंज की 9 पंचायतों के 4 हजार घर डूब गए. मध्य पूर्व रेलवे ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि पटना-गया खंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाली पुल संख्या 21 पर जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाने के कारण कुछ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया गया है या फिर उनका मार्ग बदला गया है। 

    अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए अभी अलग-अलग जिलों में कुल 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है और प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और आवाजाही में मदद के लिए 1,429 नावों की सेवा ली जा रही है। 

    SDRF की 47 और NDRF की 10 टीम तैनात
    अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 10 टीम तैनात की गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर ‘बाढ़ के उच्चतम स्तर' (एचएफएल) से ऊपर चला गया है। 

    किस जिले में कौन सी नदी उफान पर
    अधिकारियों ने बताया कि राज्य में गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में, गंगा नदी बक्सर, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, घाघरा नदी दरौली में और बागमती नदी बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। 

    हाथीदह स्टेशन तक पहुंच सकता है पानी
    अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर उच्च बाढ़ स्तर से ऊपर चला गया है, जिससे अगले एक से तीन दिनों में राज्य की राजधानी में हाथीदह और अन्य स्टेशनों पर असर पड़ने की आशंका है. उन्होंने बताया कि कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में लगभग 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 

    विभाग की नई एडवाइजरी में क्या कहा गया?
    जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से जारी नई एडवाइजरी के मुताबिक, हाथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले एचएफएल को पार कर सकता है. इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. परामर्श में कहा गया, ‘‘अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और जरूरत के हिसाब से सावधानी बरतते हुए जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों पर नियमित नजर रखें। 

    इसमें कहा गया, ‘‘अभियंताओं से बाढ़ से निपटने से संबंधित संसाधन और मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है. प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के पास न जाएं और सतर्क रहें.'' स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे नावों के संचालन पर नजर रखें, क्षमता से अधिक लोगों को नावों पर सवार नहीं होने दें और लोगों को हालात के बारे में जानकारी देते रहें। 

    अगले दो दिन कई जिलों में बारिश के भी आसार
    स्थानीय मौसम विज्ञान कार्यालय के अधिकारी ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है. इस बीच, विपक्ष ने बिहार में आई बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है। 

    राजद नेता तेजस्वी बोले- यह राष्ट्रीय आपदा, केंद्र करे मदद
    बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार का 76 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों के 20 लाख लोग इसकी चपेट में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर की गई पोस्ट में कहा, “बीस लाख से अधिक लोग इस आपदा में फंसे हुए हैं, पशुपालकों के मवेशी पानी में डूबकर बह गए हैं. सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है. हजारों करोड़ के जान-माल की क्षति हुई है। 

  • राजस्थान हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने ली शपथ

    राजस्थान हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने ली शपथ

    जयपुर
    राजस्थान उच्च न्यायालय को नया प्रशासनिक और न्यायिक प्रमुख मिल गया है। जयपुर स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उन्हें अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई। समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी नियुक्ति का आधिकारिक वारंट पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के कई सदस्य, राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान व पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी और नए चीफ जस्टिस के परिजन विशेष रूप से मौजूद रहे।

    शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद नए मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद वे बिना किसी देरी के जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ जस्टिस विनीत माथुर भी मौजूद रहे। राजस्थान में न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाने और लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिहाज से उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है।

    1. राजस्थान के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभाला पदभार
    जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राज्य के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कमान संभाली है। इस पद पर आसीन होते ही वे राजस्थान की पूरी अधीनस्थ अदालतों और हाईकोर्ट के प्रशासनिक प्रमुख बन गए हैं।

    2. छत्तीसगढ़ से जन्म और न्यायिक करियर का गहरा नाता
    जस्टिस संजय के. अग्रवाल का जन्म 15 जुलाई 1965 को हुआ था। राजस्थान हाईकोर्ट की जिम्मेदारी मिलने से ठीक पहले तक वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

    3. 1989 में वकालत से शुरू हुआ न्यायिक सफर
    उन्होंने साल 1989 में बिलासपुर में एक वकील के रूप में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। लगभग दो दशकों तक वकालत में अपनी कानूनी समझ का लोहा मनवाने के बाद उन्होंने न्यायपालिका के उच्च पदों की ओर कदम बढ़ाया।

    4. मार्च 2016 में बने थे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्थायी जज
    वे सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडिशनल जज (अतिरिक्त न्यायाधीश) नियुक्त किए गए थे। अदालत में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और निष्पक्ष कार्यशैली को देखते हुए मार्च 2016 में उन्हें स्थायी जज बना दिया गया था।

    5. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विशेष सिफारिश पर हुई नियुक्ति
    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की आधिकारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी।

    6. विवादों के बीच एक निष्पक्ष चेहरे के तौर पर हुई एंट्री
    राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले 11 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक फैसलों और केस लिस्टिंग को लेकर वकीलों के बीच कुछ असंतोष देखा जा रहा था। ऐसे माहौल में न्यायपालिका की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ से जस्टिस अग्रवाल को इस शीर्ष पद पर तैनात किया गया है।

    7. 'सड़क मार्ग' से सफर तय करने वाली सादगी
    मुख्य न्यायाधीश के रूप में चयन के बाद उनकी सादगी भी चर्चा का विषय बनी रही। वे 6 सितंबर 2026 को बिलासपुर से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से बिना किसी विशेष तामझाम के साधारण तरीके से कार द्वारा सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचे, जहां हाईकोर्ट गेस्ट हाउस में उनका स्वागत किया गया था।

    8. प्रशासनिक सुधारों और कोर्ट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव
    जस्टिस अग्रवाल को न केवल जटिल मुकदमों की सुनवाई करने, बल्कि अदालती इंफ्रास्ट्रक्चर, जजों की कार्यप्रणाली और केस रोस्टर मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक मामलों को कुशलता से संभालने का व्यापक अनुभव प्राप्त है।

    9. त्वरित और तार्किक फैसलों के लिए जाने जाते हैं नए सीजे
    छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल को बड़े कानूनी मामलों में त्वरित, तार्किक और निष्पक्ष फैसले सुनाने के लिए जाना जाता था। वे अदालती कार्यवाहियों के दौरान अधिवक्ताओं की दलीलों को बेहद धैर्यपूर्वक सुनने के लिए भी लोकप्रिय हैं।

    10. लगभग 11 महीने का रहेगा राजस्थान में कार्यकाल
    15 जुलाई 1965 को जन्मे जस्टिस अग्रवाल 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर जून 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें करीब 10 से 11 महीने का समय मिलेगा, जिसमें वे राज्य में पेंडिंग मामलों के निपटारे पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • पटना में ऑनलाइन लूडो के विवाद में चली गोली, नाबालिग दोस्त ने किशोर को पेट में मारी गोली

    पटना में ऑनलाइन लूडो के विवाद में चली गोली, नाबालिग दोस्त ने किशोर को पेट में मारी गोली

    दानापुर
    पटना के दानापुर में ऑनलाइन लूडो खेलने के दौरान दोस्त के साथ हुए विवाद में उसे गोली मार दी गई। घटना शनिवार देर रात दानापुर थाना क्षेत्र के मैनपुरा की है। किशोर को पेट में गोली लगी है। गोली मारने का आरोप नाबालिग दोस्त पर है। मैनपुरा निवासी विजय राय के पुत्र दुर्गेश कुमार व उसका दोस्त ऑनलाइन लूडो खेल रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि किशोर ने दुर्गेश को गोली मार दी, जो उसके पेट में लगी। घटना के बाद से किशोर फरार है। उधर, गोली की आवाज सुनकर लोग दौड़े और पुलिस को सूचना दी। परिजन दुर्गेश को लेकर पीएमसीएच पहुंचे, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। थानाध्यक्ष प्रने बताया कि दोनों दोस्त नाबालिग बताए जा रहे हैं।

    शिवहर: घर में घुसकर मां-बेटी को मारी गोली,गंभीर
    शिवहर जिले के श्यामपुर भटहां थाना क्षेत्र के लालगढ़ जोगिया गांव में शनिवार की आधी रात घर में घुसकर अपराधियों ने सो रही मां-बेटी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना में मां को तीन और बेटी को दो गोलियां लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच ले जाया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि प्रथमदृष्टया घटना के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रिंस कुमार का घायल किशोरी के साथ प्रेम प्रसंग था। वह किशोरी पर घर से भागने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस ने दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए दोनों को एसकेएमसीएच रेफर किया गया।

    बाढ़: विवाद में मां के सामने मासूम बेटे को लोहे के हुक से मार डाला
    पटना से सटे बाढ़ में आपसी विवाद में मां के सामने उसके तीन वर्षीय मासूम बेटे चिंटू कुमार की लोहे के हुक से मारकर हत्या कर दी गई। घटना भदौर थाना क्षेत्र के लालपुरा गांव में रविवार की है। हत्या का आरोप पड़ोसी श्याम सुंदर है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ भेज दिया। वहीं मासूम की हत्या में आरोपित श्याम सुंदर को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। चिंटू कुमार के मामा शिवजी कुमार ने पुलिस को बताया कि घर से बाहर जाने के लिए उसकी मां जूता पहना रही थी।

    तभी आपस में लड़ते हुए श्याम सुंदर आया और बोरा उठाने वाले लोहे के हुक को बच्चे की गर्दन में भोंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। परिजनों ने पास के एक निजी क्लीनिक में बच्चे को लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर स्थिति होने के कारण उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन शेखपुरा जिले के बरबीघा स्थित एक अस्पताल में ले जा रहे थे, पर रास्ते में ही मासूम ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।

    घर में मचा कोहराम
    मासूम की मौत से घर में कोहराम मच गया। हंसते खेलते चिंटू की मौत ने हर किसी को दुखी कर दिया। चिंटू की मौत से मां लगातार बेहोश हो जा रही थी। होश में आने के बाद वह अपने बेटे का नाम पुकार रही थी। वहीं अन्य लोग उसे ढाढस बंधाने में लगे थे ।

     

  • हरियाणा की जेलों में बंद होंगे अवैध मोबाइल, अंबाला के बाद अन्य जेलों में लागू होगी नई तकनीक

    हरियाणा की जेलों में बंद होंगे अवैध मोबाइल, अंबाला के बाद अन्य जेलों में लागू होगी नई तकनीक

    चंडीगढ़
     हरियाणा की जेलों में अवैध मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तकनीक आधारित नई व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। अंबाला जेल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई टावर हार्मोनिक्स काल ब्लाकिंग प्रणाली के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे प्रदेश की अन्य जेलों में लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    यह जानकारी कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कारागार मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने दी।

    मंत्री ने बताया कि जेलों को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जा रहा है। जेल विभाग की प्राथमिकता केवल जेलों से अवैध मोबाइल फोन बरामद करना ही नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल की संभावना को ही खत्म करना है।

    इसी सोच के तहत अंबाला जेल में टावर आधारित प्रणाली का प्रयोग किया गया, जिसने अवैध मोबाइल के जरिए होने वाली काल और इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने में सफलता हासिल की।

    जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क बाधित
    इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत पारंपरिक मोबाइल जैमर का विकल्प होना है। जेल परिसर में विशेष टावर लगाए जाते हैं, जो वहां मौजूद मोबाइल फोन को लक्षित तरीके से नियंत्रित करते हैं।

    इससे पूरे जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह बाधित किए बिना अवैध फोन की काल और इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह व्यवस्था जेल प्रशासन को अनधिकृत बाहरी संपर्क रोकने में अधिक प्रभावी तरीके से मदद कर सकती है।

    अंबाला जेल को इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। यहां प्रणाली की कार्यप्रणाली, नेटवर्क कवरेज और अवैध मोबाइल के इस्तेमाल को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद अन्य जेलों में भी इसके विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

     

  • बिहार में बाढ़ का कहर, 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; 12 जिलों में राहत अभियान तेज

    बिहार में बाढ़ का कहर, 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; 12 जिलों में राहत अभियान तेज

    पटना
    राज्य में बाढ़ की वजह से 22 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है। इस स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्यों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

    नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि और बाढ़ की चुनौती से निपटने की दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। व्यापक राहत अभियानों के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है।

    इनके माध्यम से अब तक लगभग 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इस आपदा की घड़ी में राज्य का कोई भी प्रभावित नागरिक भूखा न रहे और हर पीड़ित तक त्वरित सहायता पहुंचे।

    12 जिलों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त
    12 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय एवं अरवल के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतों में लगभग 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

    पांच सितंबर को संचालित 80 सामुदायिक रसोइयों की संख्या को बढ़ाकर रविवार को 190 कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त तीन राहत शिविरों का भी संचालन किया जा रहा है। यहां 1631 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं।

    विभाग की ओर से अब तक प्रभावित परिवारों के बीच लगभग 65,700 पालीथीन शीट तथा 12,712 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। इसी तरह ड्राई राशन पैकेट का वितरण भी 11,700 से बढ़कर 12,712 हो गया है।

    1429 नावों का हो रहा परिचालन  
    प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए 1,429 नावों का परिचालन कराया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा शिविरों की संख्या 118 से बढ़ाकर 171 कर दी गई है।

    राहत अभियानों को मजबूती देने के लिए एनडीआरएफ की 10 टीमों और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है।

    नदियों के जलस्तर की बात करें तो केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां विभिन्न स्थलों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

    गंडक (वाल्मीकिनगर) और सोन (इंद्रपुरी) बराजों पर जलस्राव की प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

     

  • हरियाणा के 12 हजार अतिथि अध्यापकों ने अपनाई गांधीगिरी, सोशल मीडिया पर छेड़ा अभियान

    हरियाणा के 12 हजार अतिथि अध्यापकों ने अपनाई गांधीगिरी, सोशल मीडिया पर छेड़ा अभियान

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों ने अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए गांधीगिरी का रास्ता अपनाया है। प्रदेशभर में अतिथि अध्यापकों ने एक साथ इंटरनेट मीडिया पर अभियान चलाकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा की सकारात्मक सोच को लेकर हजारों पोस्ट साझा कीं।

    अभियान का मकसद सरकार का ध्यान अपनी उस मांग की ओर आकर्षित करना है, जिसके तहत अतिथि अध्यापक खुद को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।

    नियमित करने की उठी मांग
    उनका तर्क है कि जब वे लगभग 20 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उन्हें भी हरियाणा के सरकारी कालेजों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों की तर्ज पर नियमित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार करीब चार हजार कालेज लेक्चरर्स को पक्का कर चुकी है। इसी निर्णय को आधार बनाकर स्कूलों के अतिथि अध्यापक भी अपने लिए समान नीति की उम्मीद लगाए हुए हैं।

    अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी अतिथि अध्यापकों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख जाहिर कर चुके हैं।

    पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने बैठक में इस विषय पर अधिकारियों के साथ चर्चा करने का भरोसा दिया था। ऐसे में अतिथि अध्यापकों को उम्मीद है कि सरकार उनकी करीब 20 साल पुरानी सेवा और अनुभव को देखते हुए कोई ठोस रास्ता निकालेगी।

    अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय
    वहीं, विधानसभा में भी विपक्ष की ओर से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का मुद्दा उठाया जा चुका है। इससे यह मामला अब केवल कर्मचारी संगठनों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और लंबे समय से अस्थायी आधार पर काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय बन गया है।

    अतिथि अध्यापकों का ताजा इंटरनेट मीडिया अभियान इसी उम्मीद के साथ चलाया गया है कि सरकार के समक्ष अपनी बात आक्रामक आंदोलन की बजाय सकारात्मक तरीके से रखी जाए। हजारों पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के सकारात्मक रुख को सामने रखते हुए उनसे जल्द निर्णय लेने की अपील की गई है। अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर हैं।

  • रांची में 34 वोटरों के नाम हटाने की साजिश का आरोप, SIR के बीच मचा विवाद

    रांची में 34 वोटरों के नाम हटाने की साजिश का आरोप, SIR के बीच मचा विवाद

    रांची
     विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर रांची में विवाद खड़ा हो गया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश के तहत फार्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया है।

    शिकायत के अनुसार, रांची विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 226 में रहने वाले 34 मतदाताओं को फार्म-7 में अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है, जबकि संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।

    मामले को लेकर मतदाताओं की ओर से रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया है।

    स्थायी पते पर रह रहे, फिर कैसे बताया अनुपस्थित
    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फार्म-7 का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बीएलए-2 मो. यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया।

    फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। मतदाताओं का कहना है कि संबंधित सभी लोग हिंदपीढ़ी में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।

    ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वे उसी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए इस तरह का आवेदन किस आधार पर दिया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

    नियम के तहत कार्रवाई की मांग
    शिकायत में फार्म-7 से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाना गंभीर मामला है। यदि गलत सूचना देकर या किसी साजिश के तहत नाम हटाने का प्रयास किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया…
    शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से लोगों में चिंता है। उनका सवाल है कि जब वे जिंदा हैं और वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं, तो हमें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।

    प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फार्म-7 में दी गई जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई गलती है या जानबूझकर नाम हटाने का प्रयास।