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  • राजस्थान में फिर शुरू होंगे शहरी-ग्रामीण सेवा शिविर, 31 अगस्त तक मिलेगा लाभ

    राजस्थान में फिर शुरू होंगे शहरी-ग्रामीण सेवा शिविर, 31 अगस्त तक मिलेगा लाभ

    जयपुर
    राजस्थान सरकार ने राज्य की जनता को बड़ी राहत देते हुए 21 जुलाई से 'शहरी और ग्रामीण सेवा शिविर' फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित 'राज उन्नति' की उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।

    नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग (UDH-LSG) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। आदेशों के अनुसार, राज्यभर में 31 अगस्त 2026 तक फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों की सबसे खास बात यह होगी कि पूर्व में दी गई सभी प्रकार की छूट और राहतें इस अवधि के दौरान भी यथावत लागू रहेंगी।

    क्या है अभियान का मुख्य उद्देश्य
    आमजन के सभी लंबित और नए मामलों का समयबद्ध निपटारा करना और 31 अगस्त 2026 तक सभी प्राप्त प्रकरणों को पूरी तरह से निस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने सभी स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे एक व्यवस्थित योजना तैयार कर इस अभियान को निर्धारित समय में पूरा करें। इस पहल से पट्टे, राजस्व संबंधी कार्य और अन्य जन-सुविधाओं से जुड़े मामलों में आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

    सीएम भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा
    आज मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित RAJ-UNNATI की बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर में संचालित विकास परियोजनाओं एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही राजस्थान संपर्क एवं मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त परिवेदनाओं के विभिन्न परिवादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का संवेदनशीलता, जवाबदेही और समयबद्धता के साथ समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में संचालित सेवा शिविरों की अवधि 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक नागरिक सरल, सुगम और समयबद्ध तरीके से अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकें।

    सभी विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, अनावश्यक विलंब या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक परियोजना निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरी हो तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के प्रत्येक पात्र नागरिक तक पहुंचे, यही हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और सुशासन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है।

    राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ और ‘शहरी सेवा शिविर’ (12 जून से 15 जुलाई 2026) का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों को उनके घर-द्वार पर ही प्रशासनिक सेवाएं और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करना था। इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय स्तर पर शिविर आयोजित कर जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया।

    हाल ही में आयोजित शिविर में क्या हुआ
    राजस्व, स्वायत्त शासन, आवास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जल संसाधन, विद्युत सहित लगभग 21 से 22 प्रमुख विभाग शामिल रहे। 'एक ही छत के नीचे' विभिन्न विभागों से जुड़े कार्यों का निपटारा और लंबित शिकायतों को हल किया गया।

    शिविरों में हुए ये कार्य
    शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लंबित मकानों एवं कृषि भूमि के पट्टे (भूमि स्वामित्व दस्तावेज) जारी किए गए। भूमि, मकान और आवंटन पत्रों में नाम हस्तांतरण, नामांतरण और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने का काम मौके पर ही हुआ। पेंशन योजनाओं (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग) के नए आवेदन स्वीकार किए गए और पात्र लाभार्थियों के सत्यापन कार्य पूरे किए गए। जाति, मूल निवास, आय और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज तुरंत बनाकर दिए गए। नल कनेक्शन, बिजली बिल दुरुस्ती, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज व सड़कों की मरम्मत से जुड़ी जनसमस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निस्तारण किया गया।

    इन शिविरों ने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की प्रक्रिया को समाप्त कर आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्ग को त्वरित राहत पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान सरकार द्वारा आम जनता की प्रशासनिक समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाने के लिए आयोजित 'प्रशासन गांवों के संग' और 'प्रशासन शहरों के संग' जैसे सेवा शिविर हाल ही में संपन्न हुए हैं।

    ये कार्य भी शिविर में किए गए
    शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पट्टे वाले मकानों और भूखंडों का नियमन कर लाखों परिवारों को स्वामित्व पट्टे जारी किए गए। कृषि भूमि का नामांतरण, सीमांकन, खातेदारी अधिकार देना और आपसी सहमति से भूमि के बंटवारे के मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग) की तुरंत स्वीकृति, खाद्य सुरक्षा योजना में पात्र परिवारों के नाम जोड़ना, और जॉब कार्ड बनाए गए।

    साथ ही जाति, मूल निवास, आय, और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बिना किसी कागजी जटिलता के तुरंत जारी किए गए। पानी-बिजली के त्रुटिपूर्ण बिलों में सुधार, नए कनेक्शन की मंजूरी, तथा खराब हैंडपंपों की मरम्मत और नालियों की सफाई जैसे कार्य तुरंत किए गए। नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाकर दवाइयां दी गईं और पात्र लोगों के आयुष्मान/हेल्थ कार्ड बनाए गए।

  • खगड़िया-सहरसा सफर होगा आसान, SH-95 पर मृत कोसी पुल शुरू

    खगड़िया-सहरसा सफर होगा आसान, SH-95 पर मृत कोसी पुल शुरू

     खगड़िया
     661 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन और फरकिया की लाइफलाइन माने जाने वाले एसएच-95 (SH-95) के अंतर्गत मृत कोसी नदी पर पुल बनकर तैयार हो गया है। इससे इस पथ पर यात्रा करने वाले लोगों का सफर आसान हो गया है।

    मालूम हो कि एसएच-95 (खगड़िया के मानसी से सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर तक) का बड़ा हिस्सा बनकर तैयार है, जिससे होकर वर्तमान में आवागमन हो रहा है। विभाग के अनुसार, दिसंबर 2026 तक यह सड़क पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी।

    एसएच-95 निर्माण परियोजना से जुड़े प्रोजेक्ट इंजीनियर सौरव राज ने बताया कि मृत कोसी नदी पर बने पुल से होकर चौपहिया वाहनों का परिचालन शुरू हो गया है।

    उन्होंने बताया कि बरसात के समय मृत कोसी नदी के बगल में बनी डायवर्सन सड़क पर जलजमाव हो जाता था, जिससे वाहनों के आवागमन में परेशानी होती थी। यह समस्या अब दूर हो गई है।

    खगड़िया को सहरसा से जोड़ने वाली एसएच-95 परियोजना में कुल चार पुलों का निर्माण होना है, जिनमें मृत कोसी नदी पर नवनिर्मित पुल भी शामिल है।

    प्रोजेक्ट से जुड़े प्लानिंग इंजीनियर गौतम गंभीर ने बताया कि कात्यायनी नदी पर निर्माणाधीन पुल का कार्य भी अंतिम चरण में है। आगामी 15 अगस्त तक इस पुल से होकर भी चौपहिया वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि बागमती नदी पर निर्माणाधीन पुल से होकर वाहनों का परिचालन सितंबर माह में शुरू करने की योजना है।
    दशकों बाद मां कात्यायनी स्थान के निकट स्थित रिटायर्ड रेलवे पुल

    संख्या-50 से मिलेगी मुक्ति
    खगड़िया से सड़क मार्ग से होकर मां कात्यायनी स्थान (19 किलोमीटर) जाने के लिए, रिटायर्ड रेलवे लाइन पर बने दो पुलों—पुल संख्या-50 एवं पुल संख्या-51 (दोनों परित्यक्त पुल)—को पार करना पड़ता है।

    मालूम हो कि खगड़िया से सहरसा के बीच बड़ी लाइन (ब्रॉड गेज) के निर्माण से पहले, इन पुलों से होकर ट्रेनों का परिचालन होता था।

    खगड़िया से सहरसा के बीच ब्रॉड गेज बनने के दौरान, छोटी लाइन (मीटर गेज) के लिए बने इन पुलों के समानांतर नए पुलों का निर्माण कराया गया, जिनसे होकर अब ट्रेनों का परिचालन होता है। जबकि, परित्यक्त (रिटायर्ड) पुलों से होकर सड़क मार्ग के यात्री यात्रा करते हैं।

    मीटर गेज पर बने ये पुराने पुल रेलवे के लिए अनुपयोगी हो गए थे। मां कात्यायनी स्थान जाने वाले श्रद्धालुओं अथवा उस मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों ने 2005 के बाद से इस मीटर गेज के अनुपयोगी पुल को सड़क मार्ग के रूप में उपयोग में लाना शुरू कर दिया था।

    वर्ष 2023 में एसएच-95 का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद, निर्माण सामग्री (मेटेरियल) को कार्यस्थल तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2024 में उक्त मीटर गेज के रिटायर्ड पुलों की मरम्मत कर उन्हें वाहनों के परिचालन के लायक बनाया गया।

    आगामी 15 अगस्त तक कात्यायनी नदी पर नवनिर्मित पुल से होकर वाहनों का परिचालन शुरू होने के बाद, लोगों को कात्यायनी नदी के निकट बने रिटायर्ड पुल संख्या-50 से होकर आवागमन करने से मुक्ति मिल जाएगी।

    परियोजना से जुड़े एडमिन मैनेजर संजय राय ने बताया कि सितंबर माह तक बागमती नदी पर निर्माणाधीन पुल से भी वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद मां कात्यायनी स्थान जाने वालों को बदलाघाट एवं कात्यायनी मंदिर के बीच स्थित रिटायर्ड पुल संख्या-50 व 51 से होकर आवागमन करने की मजबूरी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

     

  • तंबाकू मुक्त हरियाणा की ओर बड़ा कदम, 12,865 स्कूल और 1,128 गांव घोषित

    तंबाकू मुक्त हरियाणा की ओर बड़ा कदम, 12,865 स्कूल और 1,128 गांव घोषित

     चंडीगढ़
     हरियाणा (Tobacco Free Haryana) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली दो तिमाहियों में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के तहत उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज करते हुए तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    प्रभावी कानून प्रवर्तन, व्यापक जनजागरूकता, नशा मुक्ति सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी के दम पर राज्य तंबाकू-मुक्त समाज के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में अब तक 12,865 शैक्षणिक संस्थानों और 1,128 गांवों को तंबाकू-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जबकि तंबाकू नियंत्रण प्रतिज्ञाओं (शपथ) के मामले में हरियाणा ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि तंबाकू-मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआइ) दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। सरकार तंबाकू-मुक्त गांव अभियान को भी तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।

    उन्होंने बताया कि कानून के सख्त पालन के तहत रिपोर्टिंग अवधि में कोटपा 2003 की धारा-4 के अंतर्गत 3,848 उल्लंघनकर्ताओं के चालान किए गए, जिनसे 1.82 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं, इलेक्ट्रानिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत छह मामले दर्ज किए गए और 33 इलेक्ट्रानिक सिगरेट जब्त की गईं। राज्य के सभी जिला अस्पतालों तथा 17 मेडिकल एवं डेंटल कालेजों में संचालित तंबाकू नशा मुक्ति केंद्रों ने 20,414 तंबाकू उपयोगकर्ताओं को परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया।

    राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डा. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि जागरूकता अभियान भी समानांतर रूप से व्यापक स्तर पर चलाए गए। पहली छमाही में 13,524 शैक्षणिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया, 10,500 से अधिक तंबाकू-मुक्त प्रतिज्ञा सत्र आयोजित हुए, जबकि 4,255 स्कूल रैलियां और 4,633 जागरूकता प्रतियोगिताएं आयोजित कर विद्यार्थियों और समाज को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।

    तंबाकू-मुक्त गांव अभियान के तहत 1,444 ग्राम सभा बैठकों, 2,247 जागरूकता गतिविधियों और 1,002 ग्राम स्तरीय समन्वय समितियों के गठन से ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत किया गया।

  • झारखंड में वोटर लिस्ट SIR तेज, 97.77% मतदाताओं तक पहुंचा गणना प्रपत्र

    झारखंड में वोटर लिस्ट SIR तेज, 97.77% मतदाताओं तक पहुंचा गणना प्रपत्र

    रांची
     राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अबतक 97.77 प्रतिशत मतदाताओं को बीएलओ द्वारा गणना प्रपत्र उपलब्ध करा दिए गए हैं। वहीं, 66 प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटलाइज्ड कर दिए गए हैं।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने उन सभी मतदाताओं से शीघ्र गणना प्रपत्र बीएलओ को सौंपने की अपील की है, जिन्होंने अभी तक गणना प्रपत्र भरकर तथा हस्ताक्षर कर नहीं सौंपा है। गणना प्रपत्र नहीं भरनेवाले अधिसंख्य मतदाता शहरी क्षेत्रों के हैं, जहां के मतदान केंद्रों पर इसके लिए शिविर आयोजित की जा रही है।

    शहरी क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर सोमवार को भी शिविर लगाई जाएगी, जिसमें मतदाता बीएलओ को गणना प्रपत्र भरकर सौंप सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक सहभागी प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक स्टेकहोल्डर के सहयोग की अपेक्षा है।

    उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में एएसडीडीएफ (अब्सेंट, स्थानांतरित, डेथ, डुप्लीकेट, फारेनर्स) सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 22 जुलाई को बीएलओ एवं बीएलए–2 की बैठक एवं चुनाव पाठशाला का आयोजन किया जाएगा।

    वैसे मतदाता जो अपना फार्म भरकर एवं हस्ताक्षर कर अपने बीएलओ को जमा करेंगें, केवल उनका ही नाम पांच अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारुप मतदाता सूची में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि अभी भी शहरी मतदाताओं के द्वारा गणना प्रपत्र भरकर जमा करने की गति धीमी है।

    इसे गति देने एवं अधिक से अधिक बचे हुए मतदाताओं को सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की सुविधा और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सोमवार को राज्य के सभी शहरी मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप का आयोजन किया जा रहा है।

    विवरण द्वारा नाम खोजने की प्रक्रिया

    • वेबसाइट खोलें: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर ceo.jharkhand.gov.in लिंक पर जाएं।
    • लिंक का चयन करें: होमपेज पर "Search Your Name in Last SIR" (पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में नाम खोजें) वाले विकल्प पर क्लिक करें।
    • क्षेत्र चुनें: अपने जिला (District) और विधानसभा क्षेत्र (Assembly Constituency) का चयन करें।
    • जानकारी भरें: बॉक्स में अपना नाम और अपने किसी रिश्तेदार (जैसे पिता या पति) का नाम दर्ज करें।
    • कैप्चा कोड डालें: स्क्रीन पर दिख रहा सुरक्षा कोड (Captcha) दर्ज करें।
    • खोजें: "Show" या "Search" बटन पर क्लिक करते ही आपकी पुरानी चुनावी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।
    • बूथ या क्रमांक संख्या से खोजने की प्रक्रिया: आप वेबसाइट पर जाकर अपने बूथ नंबर (Booth Number) और क्रमांक संख्या (Serial Number) का उपयोग करके भी नाम ढूंढ सकते हैं। परिणाम सूची में आपके मकान नंबर (House Number) पर क्लिक करने से उस घर में पंजीकृत सभी सदस्यों के नाम दिखाई दे जाएंगे।
    • पूरे बूथ की वोटर लिस्ट PDF डाउनलोड करना: CEO Jharkhand Portal पर जाएं। "Electoral Roll" लिंक पर क्लिक करें। अपने जिले, विधानसभा क्षेत्र और संबंधित बूथ (Part Number) का चयन करें। कैप्चा कोड भरकर "OK" पर क्लिक करें, जिससे उस बूथ की पूरी मतदाता सूची PDF फॉर्मेट डाउनलोड हो जाएगी।
  • बिहार की जीविका दीदियों को मिलेगा खास प्रशिक्षण, उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

    बिहार की जीविका दीदियों को मिलेगा खास प्रशिक्षण, उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

    पटना
     प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है। इसमें सबसे अहम भूमिका निभाने वाली जीविका दीदियों को उनके कार्य कौशल में अधिक दक्ष बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण का प्रबंध किया गया है।

    इससे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग उत्पाद तैयार करने वाली दीदियों के हुनर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।

    राज्य में सक्रिय करीब 13 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1 करोड़ 81 लाख से भी अधिक दीदियां जुड़ी हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से कुटीर उद्योग, सिलाई-कढ़ाई, रसोई, लाइब्रेरी, नर्सरी, मछली पालन, बकरी पालन, पशुपालन आदि का पूरा कार्यभार इन दीदियों ने संभाल रखा है।

    डेयरी संचालन की भी मिलेगी जिम्मेदारी
    ग्रामीण विकास के साथ दूसरे विभागों के आपसी सहयोग से आने वाले दिनों में राज्य के प्रत्येक ग्राम पंचायत में इन दीदियों को डेयरी संचालन की भी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है।

    जीविका दीदियों के द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद और बाजार तक उसकी पहुंच सुनिश्चित कराने की मंशा से ग्रामीण विकास विभाग लगातार कई योजनाओं पर काम कर रहा है।

    ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    विभिन्न उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री करने वाली कंपनियों के विशेषज्ञ जीविका दीदियों को अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल मार्केटप्लेस और ई-कामर्स के माध्यम से व्यवसाय का विस्तार करने के संबंध में प्रशिक्षण दे रहे हैं।

  • रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए नया SOP, वेबसाइट पर मिलेगी पूरी जानकारी

    रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए नया SOP, वेबसाइट पर मिलेगी पूरी जानकारी

     रांची
    रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी करने वालों को अब पूरी सुविधा मिलने वाली है। किस विषय में कौन शोध कर रहा है और किस विषय में कितनी सीटें खाली है उसकी पूरी जानकारी अब वेबसाइट पर विद्यार्थियों को प्राप्त होंगी।

    इसके अलावा प्रत्येक गाइड को कम से कम दो अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी को प्राथमिकता देनी होगी। ये सारी बातें रांची विवि में तैयार की जा रही पीएचडी रेगुलेशन 2022 के नए एसओपी में इन बातों को शामिल किया गया है। इसके अलावा एनइपी 2020 के तहत जो विद्यार्थी चार वर्ष की पढ़ाई पूरी करेंगे उनको भी पीएचडी करने का अवसर प्राप्त हो जाएगा।

    जल्द ही इस एसओपी को लागू किया जाएगा। इस संबंध में शनिवार को विवि के डीन और अन्य पदाधिकारियों के साथ दिल्ली के शिक्षकों के साथ आनलाइन बैठक भी हुई थी। जिसमें इस एसओपी की सराहना की गयी थी और इसे अन्य विवि को भी लाभ मिलने की बात कही गयी थी।

    विद्यार्थियों को वेबसाइट से मिल जाएगी विषय की जानकारी
    रांची विश्वविद्यालय में पहले पीएचडी करने की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी होती थी कि हम कौन से विषय पर शोध करें। विषय के टकराने की गुंजाइश सबसे अधिक रहती थी। नए रेगुलेशन और विवि प्रशासन की तैयारी के बाद अब ऐसा नहीं होगा।

    किस विषय पर कौन शोध कर रहा है इसकी जानकारी शोधार्थी को रांची विवि के वेबसाइट पर मिल जाएगा। जिसके बाद वो अपने अनुसार अपना शोध का विषय तय कर लेगा। इससे विद्यार्थियों को शोध समय से पूरा करने में सहायता मिलेगी।

    विभागाध्यक्ष अब बताएंगे विद्यार्थियों को गाइड
    शोध करने वाले विद्यार्थियों को पहले गाइड की जानकारी के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे। इसके बाद भी गाइड की जानकारी नहीं मिल पाती थी। लेकिन अब रांची विश्वविद्यालय में ऐसा नहीं होगा।

    अब भविष्य में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष ही शोध करने वाले विद्यार्थियों को गाइड की जानकारी प्रदान करेंगे। इसको भी लागू करने की तैयारी चल रही है। अब विद्यार्थियों को गाइड की समस्या नहीं होगी।

    स्नातक करने वाले भी कर सकेंगे पीएचडी
    अब स्नातक करने वाले विद्यार्थी भी पीएचडी कर सकेंगे। लेकिन ये केवल चार वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों पर ही लागू होगी। वहीं चार वर्ष का कोर्स पूरा करने और कम से कम 75 प्रतिशत अंकों के साथ उन्हें पास होना जरूरी है। वहीं एसटी, एससी और ओबीसी विद्यार्थियों को पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी।

    गाइड की योग्यता भी हो गयी है तय
    इसके अलावा पीएचडी करवाने वाले गाइड की योग्यता भी इसमें तय की गयी है। इसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर का पीएचडी होना आवश्यक है और कम से कम उनके नाम से पांच रिसर्च पब्लिकेशन होना आवश्यक है।

    इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर का भी पीएचडी होना और कम से कम तीन रिसर्च पब्लिकेशन होना आवश्यक है। इसके अलावा प्रोफेसर 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 विद्यार्थियों को ही पीएचडी करवा सकेंगे।

  • बिहार विधानमंडल में 21 साल में पहली बार नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, सम्राट सरकार के बीच निशांत की नसीहत

    बिहार विधानमंडल में 21 साल में पहली बार नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, सम्राट सरकार के बीच निशांत की नसीहत

    पटना.

    बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र इस बार सिर्फ विधायी कामकाज के लिए ही नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य के कारण भी खास माना जा रहा है। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता और विधानसभा की राजनीति के केंद्र में रहे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बार सदन में नजर नहीं आए।

    सम्राट चौधरी सीएम की कुर्सी पर आसीन हुए तो स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पहली बार मंत्री के रूप में सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेकर राजनीतिक रूप से एक नई शुरुआत की। इतना ही नहीं, विपक्ष की ओर से भी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने सियासी हलकों में चर्चा छेड़ दी। ऐसे में पहली बार ऐसा माहौल बना है, जब सत्ता और विपक्ष, दोनों के प्रमुख चेहरे विधानसभा के पहले दिन मौजूद नहीं रहे।

    बजट सत्र तक क‍िया सरकार का नेतृत्‍व 
    पिछले बजट सत्र तक मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा की कार्यवाही का नेतृत्व करने वाले नीतीश कुमार इस बार सदन से बाहर रहे। करीब 21 वर्षों में यह पहला अवसर है, जब बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन में उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी नहीं रही। इस बीच सोमवार शाम दिल्ली रवाना होंगे, जहां पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेंगे। यह मानसून सत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला सत्र भी है। सदन में केवल सीएम का चेहरा बदला है। नीतीश कुमार के साथ बैठने वाले दोनों मंत्री ड‍िप्‍टी सीएम के रूप में मौजूद रहे। 

    पहली बार सदन में दिखे निशांत कुमार
    इस सत्र की एक और खास बात यह रही कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पहली बार मंत्री के रूप में विधानसभा पहुंचे। जन्मदिन के दिन ही उन्होंने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। सदन में अपने संबोधन में उन्‍होंने कहा कि सभी को एक टीम की तरह काम करना चाहिए ताक‍ि लोकतांत्र‍िक परंपराएं और मजबूत हों। पहली बार निर्वाचित होकर आए विधायकों से उन्‍होंने कहा कि सदन में प्रवेश से पहले इसकी समृद्ध विरासत, गौरव और गरिमा को याद रखें। उन्‍होंने कहा कि न्‍याय के साथ विकास के जिस संकल्‍प के साथ उनके पिताजी नीतीश कुमार की सरकार ने 20 वर्षों तक काम किया, उसे सम्राट चौधरी निष्‍ठा और मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। 

    विपक्ष भी दिखा अधूरा
    सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी पहले दिन पूरी ताकत के साथ नजर नहीं आया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश दौरे पर होने के कारण सत्र में शामिल नहीं हुए। बताया जाता है कि विपक्ष की रणनीत‍ि फिलहाल मुख्‍य सचेतक कुमार सर्वजीत तय करेंगे। यह स्‍पष्‍ट नहीं हुआ है कि तेजस्‍वी सत्र में शा‍मिल होंगे या नहीं।

  • पंजाब कांग्रेस में मतभेदों के बीच बघेल की चुनावी बैठक, चन्नी गुट की भूमिका पर नजर

    पंजाब कांग्रेस में मतभेदों के बीच बघेल की चुनावी बैठक, चन्नी गुट की भूमिका पर नजर

    चंडीगढ़.

    पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई है।

    जानकारी अनुसार बैठक में चुनाव समिति के सभी सदस्यों के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। कांग्रेस हाईकमान ने एक जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब प्रदेश चुनाव समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि चन्नी ने शुरुआत में यह जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    वड़िंग के पद से नाराज चन्नी
    चन्नी समर्थक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने के फैसले से नाराज थे और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे। बाद में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के स्तर पर हुई बैठकों के बाद हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बाद चन्नी गुट बैकफुट पर आ गया और सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले को स्वीकार किया।

    चन्नी गुट की उपस्थिति पर नजर
    ऐसे में मंगलवार को होने वाली चुनाव समिति की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि चन्नी और उनके समर्थक बैठक में शामिल होकर चुनावी तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं या नहीं। जानकारी अनुसार चुनाव समिति के सभी सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है। कुछ नेता इस समय दिल्ली में ही संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हैं । पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि आंतरिक मतभेदों को पीछे छोड़कर विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह एकजुट किया जाए।

  • बिहार में बारिश का दौर जारी, 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

    बिहार में बारिश का दौर जारी, 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

     पटना
    बिहार के कई जिलों में बारिश हो रही है। बारिश की वजह से जहां एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत मिली है तो वहीं किसान भी आसमान से हो रही बारिश से बेहद खुश हैं। मौसम विभाग ने आज 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना से सटे भोजपुर जिले के कई हिस्सों में सोमवार की सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश हो रही है। हालांकि, दिन चढ़ने के कुछ ही देर बाद पटना में भी बारिश हुई। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि आज पटना में आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश होगी।

    पटनावासियों के लिए अच्छी बात यह है कि जिले में 21 जुलाई, 22 जुलाई, 23 जुलाई और 24 जुलाई को भी अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान है। आज पटना में झमाझम बारिश हुई है। तेज बरिश में 50 मीटर तक दृश्यता घट गई थी। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले दो-तीन घंटे में भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, कटिहार, पूर्णिया, और रोहतास जिलों के कुछ भागों में मध्यम दर्जे की मेघ गर्जन, वज्रपात तथा बारिश के सााथ तेज-हवा चलेगी। इस दौरान हवा की गति 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है।

    भारी बारिश से किऊल–भागलपुर रेलखंड ठप
    इधर लगातार हो रही भारी बारिश के कारण किऊल–भागलपुर रेलखंड पर सोमवार को रेल परिचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया। कजरा रेलवे स्टेशन के समीप रेलवे ट्रैक पर करीब दो फीट पानी जमा हो जाने से सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे प्रशासन ने इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। इससे कई महत्वपूर्ण ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर घंटों तक खड़ी रहीं और हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, 22948 भागलपुर–सूरत सुपरफास्ट एक्सप्रेस सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे से अभयपुर रेलवे स्टेशन पर रुकी रही। वहीं जमालपुर–किऊल डीएमयू को धरहरा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया, जबकि गया–जमालपुर पैसेंजर दशरथपुर स्टेशन पर घंटों तक खड़ी रही। अचानक ट्रेनों के रुक जाने से यात्रियों में बेचैनी बढ़ गई। कई यात्रियों की आगे की यात्रा प्रभावित हुई, जबकि जरूरी कार्यों से जा रहे लोगों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्टेशन परिसर में यात्री ट्रेन परिचालन सामान्य होने का इंतजार करते रहे। रेलवे प्रशासन ट्रैक पर जलस्तर कम होने और सुरक्षा जांच के बाद 10:14 मे ट्रेनों का परिचालन शुरू किया।स्टेशन प्रबंधक ललित कुमार ने यात्रियों से रेलवे की ओर से धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक सूचना के अनुसार यात्रा करने की अपील की गई है।

    बांका जिले में सुबह से हो रही बारिश
    सोमवार की सुबह से बांका जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। पिछले कई दिनों से पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण धान की रोपनी प्रभावित हो रही थी, जिससे किसान चिंतित थे। सोमवार की बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने लगा है, जिससे रोपनी कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। किसानों ने बताया कि यदि अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर इसी तरह बारिश होती रही तो धान की खेती को काफी लाभ मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर हुई वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित होगी। बारिश शुरू होते ही कई गांवों में किसान परिवार खेतों की ओर निकल पड़े और रोपनी की तैयारी में जुट गए। इससे कृषि कार्यों में तेजी आने के साथ अच्छी पैदावार की उम्मीद भी बढ़ गई है

  • पंजाब कांग्रेस में मतभेदों के बीच चुनावी बैठक, बघेल ने बुलाई समिति की अहम बैठक, चन्नी गुट पर नजर

    पंजाब कांग्रेस में मतभेदों के बीच चुनावी बैठक, बघेल ने बुलाई समिति की अहम बैठक, चन्नी गुट पर नजर

     चंडीगढ़
    पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई है। जानकारी अनुसार बैठक में चुनाव समिति के सभी सदस्यों के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।

    माना जा रहा है कि बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। कांग्रेस हाईकमान ने एक जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब प्रदेश चुनाव समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि चन्नी ने शुरुआत में यह जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    बैठक में प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग के अलावा कैंपेनिंग कमेटी के चेयरमैन व पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा, मेनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन डॉ अमर सिंह, इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन विजय इंद्र सिंगला समेत कार्यकारी प्रधानों व को चेयरमैनों को भी दिल्ली बुलाया गया है।

    हालांकि, इस मीटिंग में चरणजीत सिंह चन्नी व सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल होंगे या नहीं, यह तय नहीं है। दरअसल, चन्नी व रंधावा कह चुके हैं कि राजा वड़िंग के साथ वह मंच शेयर नहीं करेंगे और वह राजा वड़िंग को अपना प्रधान नहीं मानते।

    हालांकि, उसके बाद चन्नी गुट की हाईकमान के साथ बैठक हुई थी और उसके बाद चन्नी ने ऑल इज वेल कहा था। वहीं, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा अब भी राजा वड़िंग की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    वड़िंग के पद से नाराज चन्नी
    चन्नी समर्थक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने के फैसले से नाराज थे और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे। बाद में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के स्तर पर हुई बैठकों के बाद हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बाद चन्नी गुट बैकफुट पर आ गया और सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले को स्वीकार किया।

    चन्नी गुट की उपस्थिति पर नजर
    ऐसे में मंगलवार को होने वाली चुनाव समिति की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि चन्नी और उनके समर्थक बैठक में शामिल होकर चुनावी तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं या नहीं। जानकारी अनुसार चुनाव समिति के सभी सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है।

    कुछ नेता इस समय दिल्ली में ही संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हैं । पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि आंतरिक मतभेदों को पीछे छोड़कर विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह एकजुट किया जाए।

    मीटिंग में केसी वेणुगोपाल भी होंगे शामिल
    भूपेश बघेल ने पंजाब चुनाव की तैयारियों के लिए जो बैठक दिल्ली में बुलाई है, उसमें संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल होंगे, ताकि कोई नेता अगर बगावती सुर अपनाए तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा सके। पंजाब में खुलकर आमने-सामने आने के बाद पंजाब के नेताओं की यह पहली बैठक है।

    गुटबाजी खत्म करने पर रहेगा फोकस
    पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए भूपेश बघेल ने 6 दिन पंजाब में डेरा जमाए रखा, लेकिन वह गुटबाजी को खत्म नहीं कर पाए। चन्नी खेमे ने भूपेश बघेल पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। चन्नी खेमे की पार्टी हाईकमान से बैठक हुई। उसके बाद चन्नी व राणा गुरजीत ने पार्टी में ऑल इज वेल कहा। साथ ही कहा कि वह राहुल गांधी के सच्चे सिपाही हैं।

    उस मीटिंग के बाद चन्नी गुट भी खामोश हो गया, लेकिन सुखजिंदर सिंह रंधावा अब भी राजा वड़िंग की प्रधानगी पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में इस बैठक में जब दोनों गुट आमने-सामने होंगे तो केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल उनके गिले-शिकवे दूर करेंगे।

    मीटिंग में सौंपी जाएंगी जिम्मेदारियां
    पार्टी हाईकमान ने जैसे ही चुनाव के लिए 4 अलग-अलग कमेटियों का गठन किया, वैसे ही पंजाब में चन्नी गुट ने राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इन कमेटियों में जिन नेताओं के नाम शामिल किए गए थे, उनमें से ज्यादातर चन्नी गुट में शामिल थे और उन्होंने पंजाब में भूपेश बघेल के साथ मीटिंग नहीं की। बघेल ने अब चारों कमेटियों के चेयरमैन, को-चेयरमैन व कार्यकारी प्रधानों को मीटिंग में बुलाया है, ताकि सभी को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी जा सके।