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  • राजस्थान में ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट आज सरकार को सौंपेगा राजनीतिक आयोग

    राजस्थान में ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट आज सरकार को सौंपेगा राजनीतिक आयोग

    जयपुर
     ओबीसी (राजनीतिक) आयोग पंचायत-निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर अपनी रिपोर्ट आज राजस्थान सरकार को सौंपेगा। आयोग की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बुधवार का समय मांगा गया है। ओबीसी (राजनीतिक) आयोग ने 10 जुलाई से प्रदेश में राजधारा सर्वे मोबाइल एप के जरिए ओबीसी परिवारों से जानकारी ली। सत्रह दिन चले सर्वे के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में ओबीसी आबादी करीब 3.63 करोड़ है।

    इस जानकारी के आधार पर आयोग ने पंचायतों व निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। अब इसकी छपाई का कार्य चल रहा है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह सर्वे किया, जिसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने मोबाइल एप तैयार किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय होगा। आयोग का गत वर्ष 9 मई को सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी की अध्यक्षता में हुआ था। मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपाल कृष्ण व पवन मंडाविया को सदस्य बनाया गया था।

    अब निकाली जाएगी लॉटरी
    उधर, पंचायत-निकाय चुनाव के लिए पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी है। दोनों विभागों के दिशानिर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। लॉटरी निकालने के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। लॉटरी के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, व महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण किया जाएगा।

    राजस्थान में सितंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज करते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी जिला कलक्टरों को वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अधिकृत कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य की 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। अधिसूचना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अग्रिम वर्ग की महिलाओं तथा महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से कराने का अधिकार भी संबंधित जिला कलक्टरों को दिया गया है।

    15 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच चुनाव
    लॉटरी के आधार पर वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायती राज विभाग व स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने की सिफारिश भेजी जाएगी। इसके आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार 15 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा।

  • सतलुज पुल पर भारी वाहनों की एंट्री बंद, 10 दिन में मरम्मत की मांग तेज

    सतलुज पुल पर भारी वाहनों की एंट्री बंद, 10 दिन में मरम्मत की मांग तेज

    माछीवाड़ा साहिब/चंडीगढ़.

    मालवा और दोआबा को जोड़ने वाले सतलुज दरिया पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब धंस गई है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने इस पुल पर बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। इसके बाद लोगों में पुल की जल्द मरम्मत करवाने की मांग तेज हो गई है और प्रशासन के खिलाफ रोष भी बढ़ता जा रहा है।

    भारतीय किसान यूनियनों, ट्रक ऑपरेटरों, खन्ना-नवांशहर मार्ग पर स्थित ढाबा संचालकों और दुकानदारों की एक बैठक हुई, जिसमें प्रशासन से पुल की तुरंत मरम्मत करवाने की मांग की गई। साथ ही सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि इस दौरान कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के प्रधान दिलबाग सिंह ने बताया कि सतलुज नदी पर बना यह पुल वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और पिछले करीब 20 वर्षों में इसकी स्लैब कम से कम 7 बार धंस चुकी है, जिसकी पहले कई बार मरम्मत भी की गई। उन्होंने कहा कि इस बार पुल की स्लैब धंसे हुए करीब डेढ़ साल से अधिक (लगभग पौने दो साल) हो चुके हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी मरम्मत करने की बजाय केवल बड़े गार्डर लगाकर कारों की आवाजाही चालू रखी है, जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारी गार्डर लगाए जाने से सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जिनकी जमीन नदी के दोनों ओर है। उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, कृषि उपकरण और गन्ने से भरे वाहन पुल से नहीं गुजर पा रहे, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है।

    हजारों वाहन लंबा रास्ता तय करने को मजबूर 
    वहीं ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि उनके हजारों वाहन अब रोपड़ और लुधियाना होते हुए लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हैं, जिससे रोजाना लाखों रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हो रहा है और उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर खन्ना-नवांशहर मार्ग के दुकानदारों और ढाबा संचालकों ने कहा कि पुल बंद होने के बाद इस सड़क पर यातायात काफी कम हो गया है, जिससे उनके कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है। उन्होंने सरकार से जल्द पुल की मरम्मत कर लोगों को राहत देने की मांग की। पुल के दोनों ओर खड़े यात्रियों ने भी प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बसें पुल पार नहीं कर पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और तेज धूप में पैदल पुल पार करना पड़ रहा है और भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में फैसला लिया गया कि नवांशहर के डिप्टी कमिश्नर से मिलकर पुल की तत्काल मरम्मत की मांग की जाएगी। यदि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो किसान यूनियनें, ट्रक ऑपरेटर, दुकानदार और स्थानीय लोग मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

    50 फीट लंबी धंसी स्लैब की मरम्मत का इंतजार, पौने दो साल बीते
    सतलुज नदी पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब की अब तक 6 से 7 बार मरम्मत की जा चुकी है। पहले प्रशासन कुछ महीनों के भीतर इसकी मरम्मत करवा देता था, लेकिन इस बार केवल करीब 50 फीट लंबी स्लैब का हिस्सा धंसा हुआ है, जिसकी मरम्मत के लिए भी लगभग पौने दो साल बीत चुके हैं। शुरुआत में प्रशासन ने धंसे हिस्से के आसपास बैरिकेड लगाकर बाकी पुल से यातायात जारी रखा था, लेकिन अब बड़े वाहनों को रोकने के लिए स्थायी गार्डर लगा दिए गए हैं। इसके बाद लोगों की परेशानियां और प्रशासन के प्रति नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।

    ट्रक ऑपरेटरों ने यहां तक कहा कि यदि लोक निर्माण विभाग के पास फंड की कमी है तो वे पुल से गुजरने के लिए टोल या टैक्स देने को भी तैयार हैं, लेकिन पुल की जल्द मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि प्रत्येक ट्रक पर रोजाना 3,000 से 3,500 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिससे हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए सरकार को लोगों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द पुल की मरम्मत करवानी चाहिए।

  • पटियाला में 3.5 घंटे में 143 MM मूसलाधार बारिश, शहर हुआ जलमग्न

    पटियाला में 3.5 घंटे में 143 MM मूसलाधार बारिश, शहर हुआ जलमग्न

    पटियाला.

    मंगलवार तड़के हुई मूसलधार वर्षा ने पटियाला की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। रात करीब दो बजे शुरू हुई वर्षा सुबह साढ़े पांच बजे तक लगातार जारी रही। महज साढ़े तीन घंटे में 143 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो इस मानसून सीजन की सबसे अधिक वर्षा है। तेज वर्षा के चलते कई इलाके जलमग्न हो गए और सुबह होते ही लोगों को जलभराव के बीच आवागमन करना पड़ा।

    किताबां वाला बाजार, बहेड़ा रोड, माल रोड, ओल्ड बिशन नगर, लहल कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में सड़कों ने तालाब का रूप ले लिया। कई स्थानों पर घरों और दुकानों के बाहर पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कार्यालयों, स्कूलों और बाजारों की ओर जाने वाले लोगों को भी जलभराव के कारण लंबा इंतजार और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मात्र साढ़े तीन घंटे में 143 एमएम वर्षा दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि पूरे जुलाई महीने में केवल 60 से 70 एमएम वर्षा हुई थी, जबकि अगस्त के चौथे दिन ही एक दिन में लगभग दोगुनी वर्षा दर्ज हो गई। इससे मानसून की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    लगातार हुई वर्षा से तापमान में गिरावट आने के कारण लोगों को उमस और गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन जलभराव ने राहत पर भारी पड़ते हुए शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जल निकासी धीमी होने से घंटों तक पानी जमा रहा। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी मानसून के सक्रिय बने रहने की संभावना जताई है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें अब नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हैं कि जलभराव की समस्या से राहत के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • पंजाब विधानसभा में एथेनॉल और E-20 पेट्रोल पर गरमाई बहस, वित्त मंत्री चीमा ने रखा अहम प्रस्ताव

    पंजाब विधानसभा में एथेनॉल और E-20 पेट्रोल पर गरमाई बहस, वित्त मंत्री चीमा ने रखा अहम प्रस्ताव

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन एथेनॉल और ई-20 पेट्रोल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ई-20 पेट्रोल संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए इसकी खूबियां गिनाईं और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

    इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि एथेनॉल बनाने वाले भी सदन में बैठे हैं। इस पर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, "मैं कर्मयोगी हूं, लुटेरा नहीं।" बहस के दौरान कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह ने कहा कि ई-20 पेट्रोल से देश के 30 करोड़ वाहन प्रभावित होंगे, जिनमें 22 करोड़ दोपहिया और आठ करोड़ कारें शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे दो साजिशें हैं और केंद्र सरकार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर 20 बिलियन डॉलर का एथेनॉल बाहर से मंगाने जा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटों का नाम लेते हुए तीन कंपनियों का भी जिक्र किया और कहा कि जिस इलाके में ऐसी फैक्ट्री लगती है, वहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

    मंत्री के बयान पर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने एतराज जताया। इस पर तरुणप्रीत सिंह ने कहा, "राणा जी, आपको इतनी दर्द क्यों हो रही है? पेट्रोल पंपों पर प्योर पेट्रोल मिलना चाहिए कि नहीं?" राणा गुरजीत सिंह ने जवाब में कहा कि स्पीकर बताएं कि पंजाब में पिछले तीन वर्षों में कितना धान बोया गया और एथेनॉल उद्योग ने कितना उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता न की जाए कि उन्हें घाटा होगा। उन्होंने कहा, "मैं कर्मयोगी हूं, लुटेरा नहीं।" उन्होंने कहा कि एथेनॉल ट्रायल 2001 से चल रहा है और अगर इसे बंद करना है तो सुबह ही बंद कर दें। उन्होंने यह भी कहा कि पहले वह धागा बनाते थे, फिर चीनी उद्योग में आए और अब एथेनॉल बना रहे हैं। भविष्य में भी दूसरे उद्योग लगाएंगे। उनके अनुसार एथेनॉल की वजह से मक्की 24 रुपये प्रति किलो बिक रही है। बहस में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि एथेनॉल से दवाइयां भी बनती हैं, इसलिए इसे बंद करने का कोई कारण नहीं है। कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि पहले एक सदस्य उनके पास था, अब उनकी संख्या बढ़ गई और कांग्रेस की घट गई।

    वहीं कांग्रेस विधायक अवतार सिंह जूनियर ने कहा कि प्रस्ताव अच्छा है, लेकिन इसे रखने का समय उचित नहीं था। उन्होंने पूछा कि पंजाब में अब तक कितनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां आई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पेट्रोल पर वैट कम किया, जबकि पंजाब सरकार ने दो बार वैट बढ़ाया। यदि केंद्र पंजाब के हित में नहीं है तो राज्य सरकार को भी पेट्रोल के दाम कम करने चाहिए।वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जिन वाहनों को ई-20 पेट्रोल के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है, उनका पूरा अध्ययन कराया जाए। ऐसे वाहन मालिकों को एथेनॉल रहित पेट्रोल चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे वाहनों की कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाए।

    वित्त मंत्री ने कहा कि यदि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से किसी वाहन में खराबी आती है तो उसके लिए मुआवजे का भी प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पारित प्रस्ताव की प्रति केंद्र सरकार को भेजी जाएगी, ताकि इस मुद्दे पर आवश्यक निर्णय लिया जा सके। इस दौरान कांग्रेस विधायक जूनियर हेनरी ने कहा कि यह गंभीर विषय है और इस पर विस्तार से विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस मामले पर व्यापक चर्चा की मांग रखी। जवाब में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सभी सदस्यों को इस विषय की पूरी जानकारी है और उन्होंने अपने-अपने विचार सदन के समक्ष रखे हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान एथेनॉल और किसानों के हितों का भी उल्लेख किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि एथेनॉल के निर्माता भी सदन की कार्यवाही के दौरान उपस्थित हैं।

    सदन में विभिन्न विभागों और संस्थाओं की वार्षिक रिपोर्ट एवं लेखे भी पटल पर रखे जाएंगे। इनमें पंजाब स्टेट कंटेनर एंड वेयरहाउसिंग कारपोरेशन की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट, डी-सिल्टिंग से संबंधित खरीद प्रक्रिया में दी गई छूट का विवरण, पंजाब स्टेट बस स्टैंड मैनेजमेंट कंपनी की वर्ष 2015-16 और 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट तथा पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के वर्ष 2021-22 और 2022-23 के वार्षिक लेखे शामिल हैं। विधायी कार्य के तहत सरकार पंजाब कामन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में विचारार्थ प्रस्तुत करेगी। इसके साथ ही सरकार इसी दिन इस विधेयक को पारित कराने का प्रस्ताव भी रखेगी। इस प्रकार विधानसभा के दूसरे दिन की कार्यवाही में स्थानीय समस्याओं पर सरकार से जवाब, विभागीय रिपोर्टों को सदन के पटल पर रखना और महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पर चर्चा प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

    गौरतलब है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन में विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा था। प्रश्नकाल के दौरान सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में खाली पड़े शिक्षकों के पदों का मामला जोरदार ढंग से उठा। इसके अलावा विपक्ष ने हालिया पेपर लीक प्रकरण को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए सदन में हंगामा किया और मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस तथा स्वास्थ्य मंत्री डा बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष के विरोध के चलते पहले दिन सदन का माहौल काफी गर्म रहा। ऐसे में दूसरे दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच जनहित के मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं।

  • अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी का राजस्थान दौरा, 6 से 10 अगस्त तक होगा फील्ड सर्वे

    अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी का राजस्थान दौरा, 6 से 10 अगस्त तक होगा फील्ड सर्वे

    जयपुर 

    अरावली पर्वतमाला की परिभाषा, पर्यावरणीय अखंडता और संरक्षण से जुड़े मुद्दों के अध्ययन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) 6 से 10 अगस्त तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अरावली क्षेत्र का दौरा करेगी। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समिति फील्ड विजिट के दौरान पर्यावरण, भू-वैज्ञानिक संरचना, जल संसाधनों, जैव विविधता, खनन गतिविधियों, भूमि उपयोग और स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े पहलुओं का जमीनी आकलन करेगी।

    समिति विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। इस संबंध में आईसीएफआरई ने राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर वरिष्ठ नोडल अधिकारी नियुक्त करने और दौरे के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। पत्र में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई 2026 को समिति का गठन किया था। राज्य सरकार को 27 जून को भी नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं होने पर दोबारा पत्र लिखा गया है।

    राजस्थान में पर्यावरण और खनन गतिविधियों का होगा अध्ययन
    समिति अरावली क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिति, भू-वैज्ञानिक संरचना, जल संसाधनों, जैव विविधता, खनन गतिविधियों, भूमि उपयोग में बदलाव और स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का प्रत्यक्ष अध्ययन करेगी। इसका उद्देश्य संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सुप्रीम कोर्ट को वैज्ञानिक आधार पर सुझाव देना है।

    हर दिन हितधारकों से करेगी संवाद
    फील्ड विजिट के बाद प्रतिदिन संबंधित क्षेत्र में बहु-हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की जाएगी। इनमें पर्यावरणविद, संरक्षण विशेषज्ञ, स्वयंसेवी संस्थाएं, खनन पट्टाधारक, परियोजना संचालक, किसान, स्थानीय ग्रामीण, खदान श्रमिक, शोध संस्थानों के विशेषज्ञ और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त कर उन्हें रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

    ऐसा रहेगा कमेटी का दौरा कार्यक्रम
    हाई पावर कमेटी 6 अगस्त को दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद क्षेत्र का दौरा करेगी। 7 अगस्त को समिति फरीदाबाद से कोटपूतली, नीमकाथाना, खंडेला होते हुए सरिस्का पहुंचेगी। 8 अगस्त को सरिस्का, जयपुर और अजमेर का भ्रमण करेगी। 9 अगस्त को अजमेर, ब्यावर, राजसमंद और उदयपुर का दौरा प्रस्तावित है। अंतिम दिन 10 अगस्त को समिति उदयपुर, पिंडवाड़ा और माउंट आबू क्षेत्र का निरीक्षण करेगी।

    सुबह फील्ड विजिट, शाम को जनसुनवाई
    समिति प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक फील्ड विजिट करेगी। इसके बाद शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक संबंधित क्षेत्र में आमजन, पर्यावरण विशेषज्ञों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां सुनेगी।

  • पानीपत डेवलपमेंट प्लान-2041 को CM सैनी की मंजूरी, अवैध निर्माण पर AI-ड्रोन रखेंगे नजर

    पानीपत डेवलपमेंट प्लान-2041 को CM सैनी की मंजूरी, अवैध निर्माण पर AI-ड्रोन रखेंगे नजर

    पानीपत.

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) की बैठक में पानीपत-2041 प्रारूप विकास योजना (ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान-2041) पर विचार-विमर्श किया।
    बैठक में शहर के भविष्य के विकास, जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, सड़क नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों, हरित पट्टियों और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास योजनाएं केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहें, आने वाले दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। यह जानकारी उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2041 को ध्यान में रखकर तैयार की यह योजना पानीपत को आधुनिक, सुव्यवस्थित और संतुलित शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी। योजना में भविष्य की संभावित जनसंख्या का आकलन करते हुए आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक तथा सार्वजनिक उपयोग की भूमि का वैज्ञानिक ढंग से नियोजन किया है।

    सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति और ठोस कचरा प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
    उपायुक्त ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों की व्यवहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जहां जरूरत महसूस हुई, वहां सड़क मार्गों का पुनर्संरेखण (री-अलाइनमेंट) किया गया है। बाहरी परिधि मार्ग (आउटर पेरिफेरी रोड) को भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया गया है। नगर निगम की आवश्यकताओं को देखते हुए सेक्टर-53 में जलापूर्ति के लिए बूस्टिंग स्टेशन तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सालिड वेस्ट मैनेजमेंट) स्थल को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र, बेहतर यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

    अवैध निर्माण, खनन और प्रदूषण पर नजर रखने के लिए तैयार हो रहा डाटाबेस
    हरियाणा सरकार ने सुशासन को तकनीक से जोड़ते हुए ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित निगरानी प्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने ‘दृश्या’ (ड्रोन इमेजिंग एंड इन्फार्मेशन सर्विसेज आफ हरियाणा) की बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। एआइ आधारित चेंज डिटेक्शन एप्लीकेशन से अवैध निर्माण और अतिक्रमण की स्वतः पहचान की जा सकेगी। फरीदाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल मानचित्रण किया जा चुका है। इससे राज्य का बड़ा भू-स्थानिक डाटाबेस तैयार हो रहा है, जो शहरी नियोजन और निगरानी में उपयोगी होगा। इन तकनीकी पहलों से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, बेहतर शहरी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

  • कॉमनवेल्थ खेलों के रजत पदक विजेता लवप्रीत सिंह का अमृतसर में ग्रैंड वेलकम

    कॉमनवेल्थ खेलों के रजत पदक विजेता लवप्रीत सिंह का अमृतसर में ग्रैंड वेलकम

    अमृतसर.

    राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में रजत पदक डालने वाले अमृतसर के होनहार वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह मंगलवार को गुरु नगरी पहुंचे। श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर परिवार के सदस्यों, समर्थकों और खेल प्रेमियों ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    अपने लाल की उपलब्धि पर परिजनों के साथ-साथ खेल प्रेमियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने एक बार फिर देश और पंजाब का मान बढ़ाया है। इससे पहले वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता था, जबकि इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक से वह महज एक किलोग्राम के अंतर से चूक गए। फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने उनसे एक किलोग्राम अधिक वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया।

    स्वागत के दौरान लवप्रीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतकर देश का तिरंगा सबसे ऊंचा लहराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में भी भारत के लिए पदक जीतना उनका सबसे बड़ा सपना है और इसके लिए अधिक मेहनत करेंगे। युवाओं से अपील करते हुए लवप्रीत सिंह ने कहा कि नशे से दूर रहकर खेलों को अपनाएं। खेल न केवल बेहतर भविष्य बनाते हैं, बल्कि परिवार, प्रदेश और देश का नाम भी रोशन करने का अवसर देते हैं।

  • JPSC परीक्षा विवाद पर CM सोरेन का बड़ा बयान, बोले- ‘बच्चों को न्याय मिलेगा’

    JPSC परीक्षा विवाद पर CM सोरेन का बड़ा बयान, बोले- ‘बच्चों को न्याय मिलेगा’

    रांची 

    झारखंड में 14वीं JPSC पीटी परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है. रांची में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं से पूरी तरह अवगत है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि छात्रों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी कहा है कि सरकार की आंखें भी हैं, कान भी हैं और संवेदनशीलता भी है. हम कितनी गंभीरता के साथ इस चीज को देख रहे हैं, यह मैं सीना चीरकर तो नहीं दिखा सकता और हम जिस चीज के पीछे पड़ते हैं, उसको ठीक करके ही दम लेने का हम लोगों का उद्देश्य रहा है. जिस तरह से जांच दल दिन-रात एक करके लगी हुई है, उनके जवाब का हमें इतंजार है… बहुत जल्द छात्रों के बीच में और राज्य के लोगों को इस विषय पर हम अवगत कराएंगे। 

    10वें दिन भी जारी रहा छात्रों का प्रदर्शन
    JPSC पीटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार 10वें दिन भी जारी रहा. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब आंदोलनकारी छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। 

    विपक्ष लगातार उठा रहा है सवाल
    इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी लगातार सरकार पर हमलावर हैं. उन्होंने दावा किया है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और इससे लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है। 

    मरांडी ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों और बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहां उन्हें संभावित सवाल याद कराए गए. उनका दावा है कि याद कराए गए कई सवाल परीक्षा में पूछे गए. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

  • आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 20 दिन की पैरोल मंजूर

    आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 20 दिन की पैरोल मंजूर

    जोधपुर

    सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14 (ए) का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान के अलावा गुजरात में भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर की अदालत उसे दोषी ठहरा चुकी है।

    नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम उर्फ आशुमल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद 87 वर्षीय आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर कर दी है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस की ओर से जताई गई इस आशंका को खारिज कर दिया कि पैरोल पर रिहा होने के बाद वह फरार हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस आधार पेश नहीं किया गया।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर किसी कैदी को पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आसाराम पैरोल का दुरुपयोग करेगा या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

    राज्य सरकार ने पैरोल का किया था विरोध
    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जोधपुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आसाराम का 20 दिन की पैरोल का आवेदन पहले ही खारिज कर दिया गया था। सरकार का कहना था कि पुलिस ने पैरोल मिलने की स्थिति में उसके फरार होने की आशंका जताई थी।

    सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14 (ए) का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान के अलावा गुजरात में भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर की अदालत उसे दोषी ठहरा चुकी है। ऐसे में पैरोल देने से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

    मेडिकल आधार और सुरक्षा का भी दिया गया तर्क
    राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि आसाराम का इलाज चल रहा है और मेडिकल अधिकारी ने उसे पैरोल के लिए पूरी तरह फिट होने का प्रमाण-पत्र नहीं दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका व्यक्त की गई। सरकार का कहना था कि पैरोल के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।

    हालांकि अदालत ने इन सभी तर्कों का परीक्षण करने के बाद कहा कि केवल संभावनाओं के आधार पर पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

    कोर्ट ने 13 साल के रिकॉर्ड को माना अहम
    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम करीब 13 साल, 1 महीने और 24 दिन से जेल में बंद है। इस दौरान उसे पहले भी अंतरिम जमानत मिल चुकी है, लेकिन उसके द्वारा जमानत या राहत का दुरुपयोग करने का कोई मामला सामने नहीं आया। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिससे यह साबित हो कि उसने किसी गवाह, पीड़ित पक्ष या समाज के लिए खतरा उत्पन्न किया हो।

    इसी आधार पर खंडपीठ ने पुलिस की ओर से जताई गई फरार होने की आशंका को निराधार माना और कहा कि पैरोल से इनकार करने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद नहीं हैं।

    इन शर्तों पर मिली 20 दिन की पैरोल
    राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो सक्षम जमानतदारों की शर्त पर मंजूर की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान में सुनाई गई सजा के संबंध में राजस्थान के पैरोल नियम लागू होंगे, जबकि गुजरात सहित अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की कार्रवाई वहां के कानून के अनुसार चलती रहेगी।

    मई में बरकरार रखी थी उम्रकैद की सजा
    गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद अब पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीमित अवधि के लिए राहत प्रदान की है।

    हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 87 वर्षीय आसाराम 20 दिन के लिए जोधपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ सकेगा। हालांकि पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद उसे निर्धारित समय पर वापस जेल में आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पैरोल का लाभ केवल निर्धारित शर्तों और नियमों के तहत ही मिलेगा।

  • पानीपत में मानसून की पहली झमाझम बारिश, गर्मी और उमस से मिली बड़ी राहत

    पानीपत में मानसून की पहली झमाझम बारिश, गर्मी और उमस से मिली बड़ी राहत

    पानीपत.

    सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई झमाझम वर्षा ने शहरवासियों को भीषण गर्मी और उमस से राहत पहुंचाई। लगभग ढाई घंटे तक शहर में तेज बारिश का दौर जारी रहा, जिसके बाद भी बूंदाबांदी का सिलसिला काफी देर तक बना रहा।

    हालांकि, इस मानसून सीजन की इस ठीकठाक वर्षा ने जहां मौसम को खुशनुमा बना दिया, वहीं नगर निगम के जल निकासी के दावों की पोल भी खोल कर रख दी।वर्षा के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। सनौली रोड, उझा रोड, जीटी रोड, इंडो फार्म सहित कई एरिया में जलजमाव से लोगों को काफी परेशानी हुई। पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण मुख्य सड़कों पर तालाब जैसा नजारा देखने को मिला। स्थिति यह हो गई कि वाहन चालकों को पानी के बीच से ही वाहन गुजारने पड़े, जिससे कई दोपहिया वाहन रास्ते में ही बंद हो गए।

    स्कूली बच्चों और राहगीरों को हुई परेशानी
    इस तेज वर्षा से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वाले राहगीरों को उठानी पड़ी। छुट्टी के समय बच्चों को भारी जलभराव के बीच से ही अपने घरों की ओर लौटना पड़ा। पैदल चलने वाले लोगों को भी जलभराव के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई जगहों पर राहगीर गंदे पानी में फिसलकर गिरते हुए भी नजर आए।

    मानसून की मेहरबानी, लेकिन व्यवस्थाओं पर सवाल
    इस मानसूनी सीजन में अब तक की यह सबसे अच्छी वर्षा मानी जा रही है, जिससे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान आई है। तापमान में गिरावट दर्ज होने से मौसम सुहाना हो गया है। हालांकि, जलभराव की पुरानी समस्याओं ने फिर प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।