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  • Punjab BJP में मचा सियासी घमासान, कांग्रेस के बाद अब इस्तीफों की लगी झड़ी

    Punjab BJP में मचा सियासी घमासान, कांग्रेस के बाद अब इस्तीफों की लगी झड़ी

    चंडीगढ़.

    पंजाब में आगमी विधानसभा चुनावों के जरिए अकेले अपने दम पर सत्ता हासिल करने के सपने देख रही भाजपा के लिए चुनौतियां बढ़ने लगी हैं। हाल ही में पंजाब भाजपा की नई टीम की घोषणा के बाद कई जिलों से ठीक वैसे ही विरोध व नाराजगी की आवाजें उठने लगी हैं।

    सब को चकित करने वाले फैसले में भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा पंजाब की कमान सिख चेहरे केवल सिंह ढिल्लों को सौंपी गई थी। हालांकि तब भी दबी जुबान में कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं द्वारा विरोध दर्ज कराया गया था, लेकिन अब जिला स्तर पर बनी नई टीम को लेकर विरोध मुखर हो गया है और इस्तीफों का दौर भी चल पड़ा है। ध्यान रहे कि पंजाब में कांग्रेस द्वारा भी पिछले माह जारी की गई नई टीम की सूची के बाद विवाद बढ़ा हुआ है और अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा। जिला स्तर पर हो रही बैठकों में कांग्रेस नेतृत्व को विरोध झेलने पड़ रहा है। संभावना जताई जा रही है कि भाजपा की नई टीम का विरोध भी ऐसा ही कुछ रास्ता अख्तयार करने की तरफ बढ़ रहा है। खास बात यह भी है कि ऐसी ही संभावनाओं का अंदाजा लगाते हुए भाजपा हाईकमान द्वारा केवल सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में बनने वाली नई टीम के गठन में हरियाणा के पार्टी प्रभारी सतीश पूनिया को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पूनिया को पार्टी द्वारा कहा गया था कि वे पंजाब के पूर्व प्रधानों और वरिष्ठ नेताओं से मिलकर नई टीम की रूपरेखा तैयार करें। लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूनिया की मेहनत भी काम नहीं कर पाई है और वह कार्यकर्ताओं की भावना को समझने में विफल रहे।

    ध्यान रहे कि नई टीम की घोषणा के बाद भाजपा के जिला संगरूर-1 के प्रधान मतिंदर सिंह ने अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिनकी जगह सरजीवन जिंदल को जिला प्रधान बनाया गया। उनका कहना था कि महज 14 दिन में पार्टी ने उनकी कार्यक्षमता में क्या कमी पाई, जो उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद पूर्व मंत्री और तीन बार होशियारपुर से विधायक रहे तीक्ष्ण सूद और लुधियाना से भाजपा किसान सेल के राष्ट्रीय स्तर के नेता सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल ने भी बगावत का झंडा उठाया। सूद ने प्रेस कान्फ्रेंस करके और गरेवाल ने इस्तीफा भेजते हुए स्पष्ट किया कि यदि पुराने कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान बहाल नहीं, तो वे पार्टी कार्य से दूर रहेंगे।

    पटियाला, होशियारपुर देहाती, होशियारपुर शहरी, फरीदकोट और रोपड़ से भी इसी तरह की नाराजगी की रिपोर्टें आई हैं। सोशल मीडिया पर भी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व, विशेषकर संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलू के प्रति असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कई पूर्व प्रदेश प्रधान भले ही खुलकर नहीं बोल रहे, लेकिन संगठन मंत्री की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। लुधियाना में होने वाली नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों और जिला प्रधानों की बैठक में यह असंतोष और बढ़कर सामने आने की संभावना बनी हुई है। पार्टी नेताओं में चर्चा है कि 8 की मीटिंग के बाद पार्टी की दिशा में काफी बदलाव आ सकते हैं, जिसमें पुराने कार्यकर्ताओं द्वारा दूरी बनाया जाना भी शामिल है। नेताओं द्वारा कहा जा रहा है कि नई टीम में वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया है और पुराने व तजुर्बेकार कार्यकर्ताओं को बाहर कर दिया गया है।

  • चंडीगढ़-मोहाली में बारिश से मौसम सुहाना, तापमान 2.2°C गिरा; अगले 4 दिन हल्की बारिश के आसार

    चंडीगढ़-मोहाली में बारिश से मौसम सुहाना, तापमान 2.2°C गिरा; अगले 4 दिन हल्की बारिश के आसार

    अमृतसर
     पंजाब में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। शुक्रवार को पूरे प्रदेश में कोई मौसम अलर्ट नहीं है। हिमाचल से सटे जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि अधिकांश इलाकों में मौसम सामान्य रहेगा। अगले चार दिनों तक भी व्यापक बारिश के संकेत नहीं हैं और केवल कुछ जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में किसी बड़े बारिश तंत्र के सक्रिय होने के संकेत नहीं हैं। हालांकि बीते दिनों हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। तापमान सामान्य से कम रह रहा है, जिससे लोगों को उमस से राहत है।

    होशियारपुर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज
    भारत मौसम विज्ञान केंद्र (आईएमडी) के अनुसार गुरुवार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक सबसे ज्यादा 18 मिमी बारिश होशियारपुर में दर्ज की गई। इसके अलावा लुधियाना (11.5 मिमी), फतेहगढ़ साहिब (11 मिमी), चंडीगढ़ (10.7 मिमी), लुधियाना शहर (5.4 मिमी), भाखड़ा डैम क्षेत्र (5 मिमी), आनंदपुर साहिब (0.5 मिमी) और पटियाला (0.4 मिमी) में भी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    वहीं अमृतसर, गुरदासपुर, कपूरथला, फिरोजपुर, फाजिल्का, संगरूर और तरनतारन समेत कई जिलों में इस दौरान बारिश दर्ज नहीं हुई।

    हिमाचल से सटे जिलों में बने बारिश के आसार
    7 अगस्त (शुक्रवार): पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, बरनाला, मानसा, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का और फिरोजपुर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है।

    8 अगस्त (शनिवार): पूरे पंजाब में केवल छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश के आसार हैं। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, बरनाला, मानसा, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन और अमृतसर सहित लगभग सभी जिलों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा हो सकती है।

    9 अगस्त (रविवार): मौसम लगभग इसी तरह बना रहेगा। गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर में अपेक्षाकृत अधिक स्थानों पर बारिश की संभावना है, जबकि बाकी अधिकांश जिलों में केवल छिटपुट बारिश हो सकती है।

    10 अगस्त (सोमवार): पश्चिमी पंजाब के जिलों फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा और तरनतारन में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, संगरूर, बरनाला और मानसा में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    अगले 7 दिन मौसम बदलता रहेगा
    मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल के मुताबिक मानसून ट्रफ इस समय फिरोजपुर से होकर गुजर रही है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर-पश्चिम भारत पर सक्रिय है। इन दोनों सिस्टम के असर से अगले 7 दिनों तक पंजाब में मौसम बदला रहेगा।

    कई जगह हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी और उमस से राहत मिल सकती है।

    डैम अभी तक खतरे के निशान से
    बारिश के कारण भाखड़ा और पोंग डैम में पानी की आवक बढ़ी हुई है, लेकिन दोनों डैम अभी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। भाखड़ा डैम का जलस्तर 1607.95 फीट है, जबकि खतरे का निशान 1680 फीट है। पोंग डैम का जलस्तर 1344.4 फीट है और खतरे का निशान 1400 फीट है।

    भाखड़ा में 41,392 क्यूसेक पानी आ रहा है और 22,693 क्यूसेक छोड़ा जा रहा है। पोंग में 34,538 क्यूसेक पानी की आवक है, जबकि 13,450 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

    बिजली की डिमांड 13,080 मेगावाट तक पहुंची
    बारिश होने की वजह से राज्य में बिजली की मांग कमी आई। गुरुवार को बिजली की डिमांड 13,080 मेगावाट तक पहुंच गई है। इस दौरान राज्य ने 5,002 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया, जबकि जरूरत पूरी करने के लिए 8,119 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड से ली जा रही है। ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.98 हर्ट्ज दर्ज की गई, जिससे फिलहाल बिजली आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

    सामान्य से कम तापमान दर्ज
    वीरवार को प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। सबसे अधिक तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस श्री आनंदपुर साहिब में रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा फाजिल्का में 35.7 डिग्री, फिरोजपुर में 34.5 डिग्री, बठिंडा में 34.4 डिग्री, पठानकोट में 33.6 डिग्री, अमृतसर में 33.2 डिग्री, कपूरथला में 32.7 डिग्री दर्ज किया गया।

    गुरदासपुर में 32.2 डिग्री, जालंधर में 32.0 डिग्री, चंडीगढ़ में 31.4 डिग्री, बरनाला क्षेत्र में 31.5 डिग्री, लुधियाना में 30.6 डिग्री, पटियाला में 30.1 डिग्री, होशियारपुर में 28.8 डिग्री तथा फतेहगढ़ साहिब में 28.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

    कुछ जिलों तक सीमित हुई बारिश
    बारिश की बात करें तो वीरवार को सबसे अधिक 18.0 मिलीमीटर वर्षा होशियारपुर में रिकॉर्ड की गई। इसके बाद लुधियाना में 11.5 मिलीमीटर, फतेहगढ़ साहिब में 11.0 मिलीमीटर, चंडीगढ़ में 10.7 मिलीमीटर, लुधियाना शहर में 5.4 मिलीमीटर, भाखड़ा क्षेत्र में 5.0 मिलीमीटर, पटियाला में 0.4 मिलीमीटर और श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

    गुरदासपुर में 0.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि अमृतसर, जालंधर, कपूरथला, पठानकोट, तरनतारन, मोगा, बठिंडा, फिरोजपुर और कई अन्य जिलों में बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम सामान्य बना रहेगा और फिलहाल किसी भी तरह का मौसम अलर्ट लागू नहीं है।

  • दिल्ली रिज संरक्षण हेतु चार वर्षीय मेगा योजना, एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे

    दिल्ली रिज संरक्षण हेतु चार वर्षीय मेगा योजना, एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की पहली उच्चस्तरीय बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें चार साल की मेगा योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत एक करोड़ से अधिक पौधे व झाड़ियां लगाए जाएंगे। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन करते हुए एक स्टैंडिंग कमिटी (स्थायी समिति) का गठन किया गया। इसकी अध्यक्षता सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (सीईसी) के प्रतिनिधि (चंद्र प्रकाश गोयल) करेंगे। यह समिति रिज क्षेत्र में किसी भी गैर-वानिकी परियोजना और विकास कार्य की कड़ी समीक्षा करेगी।

    कब्चे से मुक्त कराई जमीन पर तुरंत पौधरोपण होगा
    साउथ रिज समेत पूरे रिज इलाके से अवैध कब्जे और अतिक्रमण तुरंत हटाए जाएंगे। इसके लिए डीडीए वाइस चेयरमैन की अध्यक्षता वाली एसटीएफ और जिला मैजिस्ट्रेटों (डीएम) की टास्क फोर्स के साथ मिलकर समयबद्ध अभियान चलाया जाएगा। कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर तुरंत पौधरोपण किया जाएगा ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके

    हरियाली के मास्टर प्लान पर रणनीति होगी तैयार
    2021 में रिज फंड से 223 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और बैंक ऑफ बड़ौदा के फर्जी खाते में ट्रांसफर का मामला भी चर्चा में रहा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बैंक से 152.75 करोड़ रुपये हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने का रास्ता साफ हुआ है। कोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल केवल रिज के संरक्षण, अपग्रडेशन और हरियाली के मास्टर प्लान पर करने की रणनीति तैयार की जा रही है।

    100+ पेड़ कटे तो मौके का निरीक्षण करेगी कमिटी
    एक हेक्टेयर से बड़े प्रोजेक्ट पर भी SCDRMB के सभी सदस्य करेंगे साइट विजिट, 46 प्रस्तावों की होगी जांच रिज और मॉर्फोलॉजिकल रिज को बचाने व अधिक हरा भरा बनाने के लिए अब सौ से अधिक पेड़ काटने और एक हेक्टेयर से बड़े प्रोजेक्ट के लिए अब स्टैंडिंग कमिटी ऑफ दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (SCDRMB) के सभी सदस्य खुद साइट का निरीक्षण करेंगे। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद गठित SCDRMB की पहली उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (CEC) के ऑफिस में अध्यक्ष चंद्र प्रकाश गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सबसे अहम फैसला ये लिया गया कि रिज क्षेत्र में अगर किसी भी प्रोजेक्ट के तहत 100 से ज्यादा पेड़ काटने की जरूरत होगी तो स्टैंडिंग कमिटी के सभी सदस्य खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे।

  • अपर बाजार की 180 दुकानें गलत कब्जे में, नगर निगम जांच में बड़ा खुलासा

    अपर बाजार की 180 दुकानें गलत कब्जे में, नगर निगम जांच में बड़ा खुलासा

    रांची
     राजधानी के सबसे बड़े और पुराने व्यावसायिक केंद्र अपर बाजार के पुनर्विकास की कवायद के बीच रांची नगर निगम की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। निगम की 4.39 एकड़ भूमि पर संचालित 608 दुकानों के सर्वे और अभिलेखों की जांच में करीब 180 दुकानों का संचालन मूल आवंटियों के बजाय अन्य लोगों या उनके रिश्तेदारों द्वारा किए जाने का मामला सामने आया है।

    वहीं 30 दुकानों के अवैध हस्तांतरण का भी पता चला है। इसके अलावा कई दुकानों में बिना अनुमति स्थायी और बहुमंजिला निर्माण तथा वर्षों से किराया बकाया रहने जैसी अनियमितताएं भी चिन्हित की गई हैं।

    व्यवसायियों और नगर निगम अधिकारियों की बैठक
    गुरुवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में झारखंड चैंबर ऑफ कामर्स, ट्रेड यूनियन, अपर बाजार के व्यवसायियों और नगर निगम अधिकारियों की बैठक हुई।

    बैठक में अपर बाजार के सुनियोजित पुनर्विकास, व्यापारिक सुविधाओं और भविष्य की विकास योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। नगर निगम ने व्यवसायियों से सात दिनों के भीतर समाधान आधारित सुझाव देने को कहा है।

    608 दुकानों का विस्तृत सर्वे
    नगर आयुक्त ने बताया कि निगम ने अपर बाजार स्थित अपनी 4.39 एकड़ भूमि पर संचालित 608 दुकानों का विस्तृत सर्वे और अभिलेखों का परीक्षण कराया है। इसका उद्देश्य वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकालते हुए क्षेत्र को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

    बैठक के दौरान चेंबर आफ कामर्स और व्यवसायियों ने पार्किंग, यातायात, अग्निशमन व्यवस्था, जर्जर भवनों, स्वामित्व विवाद और व्यापारिक जरूरतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि पुनर्विकास की अंतिम योजना सभी हितधारकों के सुझाव, विधिक प्रावधानों और जनहित को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी।

    व्यवसायियों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी
    उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में सामने आए तथ्यों को साझा करने का उद्देश्य किसी को भयभीत करना नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति से सभी पक्षों को अवगत कराना है। नियमों का पालन करने वाले व्यवसायियों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी, जबकि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ी अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    बैठक में चेंबर और ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों ने नगर निगम की संवाद आधारित पहल का स्वागत करते हुए पुनर्विकास में सकारात्मक सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों से व्यापक चर्चा के बाद व्यवहारिक और समाधान आधारित सुझाव तय समय के भीतर निगम को उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, झारखंड चेंबर आफ कामर्स, ट्रेड यूनियन तथा अपर बाजार के बड़ी संख्या में व्यवसायी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

    बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
    झारखंड चैंबर आफ कामर्स, ट्रेड यूनियन और व्यवसायी प्रतिनिधि सात दिनों के भीतर पुनर्विकास पर विस्तृत एवं समाधान आधारित सुझाव नगर निगम को देंगे।

    31 मार्च 2026 तक के बकाया किराये की वसूली के लिए बिहारी धर्मशाला में विशेष शिविर लगाया जाएगा।

    सुझावों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अपर बाजार के पुनर्विकास की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    बैठक में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स, ट्रेड यूनियन तथा अपर बाजार के बड़ी संख्या में व्यवसायी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • हरियाणा राइस मिलर्स को मुख्यमंत्री की बड़ी राहत, बोनस और समाधान का भरोसा

    हरियाणा राइस मिलर्स को मुख्यमंत्री की बड़ी राहत, बोनस और समाधान का भरोसा

    चंडीगढ़
     हरियाणा में धान की रिकॉर्ड पैदावार के बीच चावल की खरीद, भंडारण और बोनस भुगतान जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हरियाणा के राइस मिलर्स को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ी राहत दी है।

    मुख्यमंत्री ने 30 जून 2025 तक निर्धारित अवधि में चावल की डिलीवरी करने वाले राइस मिलर्स को बोनस देने की घोषणा करते हुए उनकी अन्य सभी लंबित समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने का भरोसा दिलाया है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अतिरिक्त चावल की खरीद के मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत कर समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाएगा।

    भुगतान संबंधी मुद्दों पर विस्तार से हुई चर्चा
    चंडीगढ़ के हरियाणा निवास में आयोजित राइस मिलर्स एसोसिएशन के साथ बैठक में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की डिलीवरी, भंडारण क्षमता और बोनस भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे गणेशन सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक में राइस मिलर्स ने बताया कि केंद्र सरकार ने फिलहाल अतिरिक्त चावल की डिलीवरी लेने से इन्का्र कर दिया है, जबकि इस वर्ष हरियाणा में धान का उत्पादन अनुमान से अधिक हुआ है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से केंद्र स्तर पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा के लिए इस वर्ष 55 लाख मीट्रिक टन चावल खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अधिक उत्पादन के कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है और इस मुद्दे पर आजकल में किसी भी समय बैठक भी होगी।

    भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर
    बैठक में राइस मिलर्स ने चावल भंडारण के लिए गोदामों की कमी का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े वेयरहाउस और आधुनिक साइलो स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है, जिससे गोदामों की कमी का स्थायी समाधान होगा।

    मुख्यमंत्री ने राइस मिलर्स से समय पर मिल्ड राइस की डिलीवरी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। बैठक के अंत में राइस मिलर्स एसोसिएशन ने बोनस की घोषणा और समस्याओं के समाधान के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। बैठक में खाद्य आपूर्ति विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह, कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक, हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक डा. शालीन और हैफेड के प्रबंध निदेशक अनीश यादव भी मौजूद रहे।

  • JBT घोटाले में अजय चौटाला दोषी करार, सजा के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का करेंगे रुख

    JBT घोटाले में अजय चौटाला दोषी करार, सजा के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का करेंगे रुख

    चंडीगढ़.

    जननायक जनता पार्टी (जजपा) के प्रमुख एवं पूर्व सांसद डॉ. अजय सिंह चौटाला ने जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले को लेकर एक बार फिर अपनी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज करने के संकेत दिए हैं।

    चंडीगढ़ में छात्र संगठन इनसो के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उन्हें केवल ''भाई साहब'' शब्द की पहचान के आधार पर साजिश के आरोप (धारा 120-बी) में दोषी ठहराया गया, जबकि भर्ती प्रक्रिया में उनकी कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं थी। हाई कोर्ट द्वारा संबंधित जेबीटी भर्तियों को वैध ठहराए जाने के बाद चौटाला ने अब अपनी सजा को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।

    हरियाणा सरकार के किसी पद पर नहीं था: अजय चौटाला
    अजय चौटाला ने कहा कि वह न तो हरियाणा सरकार में किसी पद पर थे और न ही जिला या ब्लॉक स्तर की उन समितियों के सदस्य थे, जिनके माध्यम से तत्कालीन चौटाला सरकार में 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती हुई थी। उनके अनुसार, भर्ती सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी थी तथा उनका उससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। बता दें कि इनेलो की राजनीति में भाई साहब शब्दों का इस्तेमाल उस समय अजय सिंह चौटाला और मौजूदा इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला के लिए होता था। अभी भी इन दोनों दलों में अजय सिंह और अभय सिंह को भाई साहब कहकर संबोधित किया जाता है। दोनों भाइयों में इस समय जबरदस्त राजनीतिक मुटाव हैं।

    आइएएस अधिकारी ने कही थी ये बात
    उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन आइएएस अधिकारी रजनी शेखर सिब्बल ने पहले केवल इतना कहा था कि एक बैठक में ''भाई साहब'' नाम से संबोधित व्यक्ति मौजूद था, लेकिन करीब 10 वर्ष बाद उसी अधिकारी ने यह पहचान अजय चौटाला के रूप में बताई। चौटाला का कहना है कि इसी बदले हुए बयान के आधार पर उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। उन्होंने कहा कि अब जबकि हाई कोर्ट ने जेबीटी भर्ती प्रक्रिया को सही माना है, ऐसे में उस पूरे मामले की कानूनी पृष्ठभूमि पर नए सिरे से सवाल खड़े हुए हैं। चौटाला ने कहा कि उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी इसी मामले में 10 वर्ष की सजा काट चुके हैं और अब इस दुनिया में नहीं हैं। स्वयं उन्होंने भी 10 वर्ष का कठोर कारावास भुगता है।

    बयान केवल व्यक्तिगत सफाई नहीं
    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो अजय चौटाला का यह बयान केवल व्यक्तिगत सफाई नहीं, बल्कि जेबीटी प्रकरण की पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने और उसे नए सिरे से राजनीतिक विमर्श का विषय बनाने की रणनीति माना जा रहा है। हाई कोर्ट के हालिया फैसले को आधार बनाकर जजपा इस मुद्दे को अपने पक्ष में जनमत तैयार करने और यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि यदि भर्ती प्रक्रिया वैध थी तो साजिश के आरोपों की भी दोबारा न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा इसी रणनीति का अगला कदम मानी जा रही है।

  • Punjab में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, अगले 4 दिन सिर्फ चुनिंदा जिलों में हल्की बारिश के आसार

    Punjab में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, अगले 4 दिन सिर्फ चुनिंदा जिलों में हल्की बारिश के आसार

    अमृतसर.

    पंजाब में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। शुक्रवार को पूरे प्रदेश में कोई मौसम अलर्ट नहीं है। हिमाचल से सटे जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि अधिकांश इलाकों में मौसम सामान्य रहेगा। अगले चार दिनों तक भी व्यापक बारिश के संकेत नहीं हैं और केवल कुछ जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में किसी बड़े बारिश तंत्र के सक्रिय होने के संकेत नहीं हैं। हालांकि बीते दिनों हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। तापमान सामान्य से कम रह रहा है, जिससे लोगों को उमस से राहत है।

    हिमाचल से सटे जिलों में बने बारिश के आसार
    7 अगस्त (शुक्रवार): पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, बरनाला, मानसा, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का और फिरोजपुर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है।
    8 अगस्त (शनिवार): पूरे पंजाब में केवल छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश के आसार हैं। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, बरनाला, मानसा, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन और अमृतसर सहित लगभग सभी जिलों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा हो सकती है।
    9 अगस्त (रविवार): मौसम लगभग इसी तरह बना रहेगा। गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर में अपेक्षाकृत अधिक स्थानों पर बारिश की संभावना है, जबकि बाकी अधिकांश जिलों में केवल छिटपुट बारिश हो सकती है।
    10 अगस्त (सोमवार): पश्चिमी पंजाब के जिलों फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा और तरनतारन में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, संगरूर, बरनाला और मानसा में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सामान्य से कम तापमान दर्ज
    वीरवार को प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। सबसे अधिक तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस श्री आनंदपुर साहिब में रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा फाजिल्का में 35.7 डिग्री, फिरोजपुर में 34.5 डिग्री, बठिंडा में 34.4 डिग्री, पठानकोट में 33.6 डिग्री, अमृतसर में 33.2 डिग्री, कपूरथला में 32.7 डिग्री दर्ज किया गया। गुरदासपुर में 32.2 डिग्री, जालंधर में 32.0 डिग्री, चंडीगढ़ में 31.4 डिग्री, बरनाला क्षेत्र में 31.5 डिग्री, लुधियाना में 30.6 डिग्री, पटियाला में 30.1 डिग्री, होशियारपुर में 28.8 डिग्री तथा फतेहगढ़ साहिब में 28.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

    कुछ जिलों तक सीमित हुई बारिश
    बारिश की बात करें तो वीरवार को सबसे अधिक 18.0 मिलीमीटर वर्षा होशियारपुर में रिकॉर्ड की गई। इसके बाद लुधियाना में 11.5 मिलीमीटर, फतेहगढ़ साहिब में 11.0 मिलीमीटर, चंडीगढ़ में 10.7 मिलीमीटर, लुधियाना शहर में 5.4 मिलीमीटर, भाखड़ा क्षेत्र में 5.0 मिलीमीटर, पटियाला में 0.4 मिलीमीटर और श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। गुरदासपुर में 0.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि अमृतसर, जालंधर, कपूरथला, पठानकोट, तरनतारन, मोगा, बठिंडा, फिरोजपुर और कई अन्य जिलों में बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम सामान्य बना रहेगा और फिलहाल किसी भी तरह का मौसम अलर्ट लागू नहीं है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बड़े आतंकी साजिश का खुलासा, पाकिस्तान से हो रहा था ऑपरेशन; पेट्रोल बम हमले की थी तैयारी

    जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बड़े आतंकी साजिश का खुलासा, पाकिस्तान से हो रहा था ऑपरेशन; पेट्रोल बम हमले की थी तैयारी

    नई दिल्ली
     जंतर-मंतर पर 26 जुलाई की सुबह का मंजर आम दिनों से अलग था. पिछली रात प्रदर्शन खत्म हो चुका था, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती जारी थी. इसी बीच पंजाब पुलिस की जांच में एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. अमृतसर से पकड़े गए कथित पाकिस्तान ISI आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आरोपियों से पूछताछ में जंतर-मंतर और दिल्ली का कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम तैयार कर पुलिस, सेना और अन्य वर्दीधारी सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने का टास्क दिया गया था. हालांकि इस पूरे दावे की दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अलग से जांच कर रही है। 

    पूछताछ में आरोपी वंश कुमार ने कथित तौर पर दिल्ली ऑपरेशन की पूरी कहानी बताई है. उसके मुताबिक 25 जुलाई को देव सिंह उर्फ करण ने विशाल उर्फ गंगू को दिल्ली जाने का निर्देश दिया था. यात्रा के लिए एक दुकानदार के जरिए 2,000 रुपए की व्यवस्था की गई. इसके बाद 25 जुलाई की शाम करीब 7 बजे अमृतसर रेलवे स्टेशन पर वंश कुमार, विशाल उर्फ गंगू, रोहित, देव सिंह उर्फ करण और सुखदीप सिंह कथित तौर पर एकत्र हुए. करीब 7:30 बजे सभी ट्रेन से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए. जांच एजेंसियां अब इस दावे को CCTV और दूसरे तकनीकी सबूतों से मिलाने में जुटी हैं। 

    नई दिल्ली स्टेशन से सीधे जंतर-मंतर पहुंचने का दावा
    आरोपी के बयान के मुताबिक 26 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे पूरा समूह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा. वहां से वे सीधे जंतर-मंतर गए. पूछताछ में दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक अज्ञात व्यक्ति उनसे मिला था. आरोपियों के मुताबिक इस व्यक्ति को पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर ने वहां भेजा था. इसी शख्स ने ग्रुप को आठ कांच की बोतलें दीं. आरोपियों का दावा है कि उन्हें इन बोतलों के जरिए पेट्रोल बम तैयार करने और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों, सेना के जवानों तथा दूसरे वर्दीधारी सरकारी अधिकारियों पर हमला करने का निर्देश दिया गया था। 

    आठ बोतलें, पेट्रोल बम और फिर ऑपरेशन रोकने का दावा
    पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद आरोपियों ने कुछ देर आपस में विचार-विमर्श किया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर हमला करने से इनकार कर दिया. आरोपियों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने अपने पाकिस्तानी हैंडलर को फोन करके कहा कि वे पेट्रोल बम बनाने का सामान एक बेंच के नीचे छोड़ रहे हैं और अब इस साजिश का हिस्सा नहीं बनेंगे. इसके बाद सभी आरोपी उसी दिन ट्रेन से अमृतसर लौट गए. पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि जंतर-मंतर से वास्तव में कोई फोन कॉल पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर को किया गया था या नहीं। 

    जंतर-मंतर से पाकिस्तान फोन का दावा, जांच में जुटी स्पेशल सेल
    इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच तेज कर दी है. स्पेशल सेल की एक टीम फिलहाल अमृतसर में मौजूद बताई जा रही है और पंजाब पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों से जुड़ी जानकारी खंगाल रही है. जांच का एक बड़ा हिस्सा CCTV फुटेज पर टिका है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लेकर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों के सैकड़ों कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है. मकसद यह पता लगाना है कि आरोपियों का दिल्ली पहुंचना, जंतर-मंतर जाना और वहां किसी संदिग्ध व्यक्ति से मुलाकात का दावा फुटेज से मेल खाता है या नहीं। 

    यूपी के संदिग्ध संपर्क से लेकर लोकल नेटवर्क तक जांच
    जांच एजेंसियों के सामने सिर्फ जंतर-मंतर पहुंचने की पुष्टि करना ही चुनौती नहीं है. अब उस कथित उत्तर प्रदेश के व्यक्ति की पहचान भी अहम हो गई है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आने की बात कही जा रही है. स्पेशल सेल यह पता लगाने में जुटी है कि वह व्यक्ति कौन था, क्या उसका आरोपियों से पहले से संपर्क था और क्या दिल्ली में कोई स्थानीय नेटवर्क मौजूद था. इसके अलावा मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, लोकेशन, CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी एवं फोरेंसिक साक्ष्यों को भी जोड़ा जा रहा है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की वास्तविक प्रकृति क्या है। 

    पुरानी गिरफ्तारी से खुला था जंतर-मंतर कनेक्शन
    यह पूरा मामला पंजाब पुलिस की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने का दावा किया गया था. अमृतसर पुलिस के मुताबिक दो अलग-अलग गिरोहों से जुड़े कुल नौ लोगों को पकड़ा गया था, जिनमें चार नाबालिग भी बताए गए. पुलिस ने आरोपियों के पास से बोतल बम, पिस्तौल, कारतूस और अन्य संदिग्ध सामान बरामद होने का दावा किया था. इसी जांच के दौरान एक गिरोह से जुड़े आरोपियों के जंतर-मंतर पहुंचने की बात सामने आई थी. अब पूछताछ में सामने आई कथित टाइमलाइन इस कनेक्शन को और विस्तार दे रही है। 

    सबसे बड़ा सवाल: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म था, फिर निशाना कौन?
    इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल 26 जुलाई की सुबह को लेकर है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन 25 जुलाई की रात तक खत्म हो चुका था. इसके बावजूद अगले दिन एहतियात के तौर पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान वहां ड्यूटी पर मौजूद थे. ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि अगर आरोपियों को वास्तव में जंतर-मंतर पर हमला करने का निर्देश दिया गया था, तो निशाने पर सिर्फ पुलिस और अर्धसैनिक बल क्यों थे. क्या यह टास्क किसी खास सुरक्षा व्यवस्था को देखकर दिया गया था या इसके पीछे कोई और मकसद था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 

  • ‘कैप्टन मेरे फेवरेट BJP लीडर हैं’, राहुल गांधी के बयान से पंजाब की सियासत गरमाई; अमरिंदर की वापसी की अटकलें तेज

    ‘कैप्टन मेरे फेवरेट BJP लीडर हैं’, राहुल गांधी के बयान से पंजाब की सियासत गरमाई; अमरिंदर की वापसी की अटकलें तेज

    चंडीगढ़
     पंजाब की राजनीति में एक बार फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस बार चर्चा की वजह कोई चुनावी रैली या राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक छोटा-सा जवाब बना है। एक इंटरव्यू के दौरान जब राहुल गांधी से पूछा गया कि भाजपा में उनका पसंदीदा नेता कौन है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

    इसके पीछे छिपे कई राजनीतिक संदेश 
    राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के बारे में कहा कि वह उनके पसंदीदा नेताओं में से एक हैं, एक बेहतरीन सैन्य इतिहासकार (मिलिट्री हिस्टोरियन) हैं और उनके साथ काम करने का अनुभव भी अच्छा रहा है। भले ही यह एक छोटा-सा जवाब था, लेकिन पंजाब की राजनीति में इसे एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान महज औपचारिक टिप्पणी नहीं था। इसके पीछे कई राजनीतिक संदेश छिपे हो सकते हैं। खासकर ऐसे समय में, जब पंजाब कांग्रेस अंदरूनी खींचतान का सामना कर रही है और दूसरी ओर कैप्टन अमरिंदर सिंह भी भाजपा में अपने भविष्य को लेकर चर्चाओं में बने हुए हैं।

    राहुल गांधी के साथ आज भी कैप्टन के अच्छे संबंध 
    कैप्टन अमरिंदर सिंह कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि उनके राहुल गांधी और गांधी परिवार के साथ व्यक्तिगत संबंध आज भी कायम हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि राहुल गांधी उन्हें जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और दोनों के बीच संपर्क बना रहता है। इसके अलावा कैप्टन यह भी कहते रहे हैं कि कांग्रेस का राजनीतिक कल्चर उन्हें ज्यादा सहज लगता था और वह उस माहौल में अधिक आरामदायक महसूस करते थे। इसी पृष्ठभूमि में जब राहुल गांधी ने भाजपा के अपने पसंदीदा नेता के रूप में कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया, तो इसे केवल व्यक्तिगत प्रशंसा तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या राहुल गांधी ने एक साथ तीन अलग-अलग संदेश देने की कोशिश की है।

    आज भी कैप्टन के योगदान का सम्मान करता है कांग्रेस नेतृत्व 
    पहला संदेश कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए माना जा रहा है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने यह संकेत देने की कोशिश की कि राजनीतिक रास्ते भले ही अलग हो गए हों, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में कोई कड़वाहट नहीं है। साथ ही यह भी संदेश दिया गया कि कांग्रेस नेतृत्व आज भी कैप्टन के योगदान का सम्मान करता है। दूसरा संदेश भाजपा के लिए माना जा रहा है। राहुल गांधी ने किसी ऐसे भाजपा नेता का नाम नहीं लिया, जिसकी पूरी राजनीतिक पहचान भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी रही हो। इसके बजाय उन्होंने उस नेता का नाम लिया, जिसकी राजनीतिक शुरुआत और लंबा सफर कांग्रेस के साथ रहा। इसलिए कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश भी मान रहे हैं।

    राहुल गांधी के इस वीडियो के क्या मायने, जानिए…

        गांधी परिवार से कैप्टन की नजदीकियां: कैप्टन अमरिंदर सिंह की राहुल गांधी के पिता व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से बेहद नजदीकियां थीं। दोनों विदेश में भी एक साथ रहे हैं। राजीव गांधी से नजदीकियां होने की वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह सोनिया गांधी से भी काफी करीबी रहे हैं। गांधी परिवार अब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह को पूरा सम्मान देता है।

        कैप्टन कई बार कर चुके कांग्रेस की तारीफ: कैप्टन अमरिंदर सिंह को कांग्रेस पार्टी ने 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाया। उस समय भी वो सोनिया गांधी से इसी बात से नाराज हुए थे कि अच्छे संबंध होने के बावजूद उन्हें विश्वास में लिए बगैर सीएम पद से हटाने का फैसला लिया गया। कैप्टन ने 2022 में भाजपा जॉइन की। इसके बावजूद वो बार-बार कांग्रेस की तारीफ करते रहे।

        राहुल गांधी सुख-दुख में करते हैं संपर्क: कैप्टन अमरिंदर सिंह का जन्मदिन बीता तो राहुल गांधी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। उसके बाद कैप्टन के चचेरे भाई की मौत हुई तो राहुल गांधी ने फिर फोन करके उनके साथ संवेदना व्यक्त की। उस समय कैप्टन ने फिर से कहा कि अपनी पार्टी के लोगों ने संवेदना व्यक्त नहीं की और राहुल गांधी ने उन्हें भाई की मौत पर संवेदना प्रकट की।

        पंजाब कांग्रेस में फूट: पंजाब कांग्रेस में इस समय कोई ऐसा बड़ा नेता नहीं है, जिसके नाम पर सभी नेता एकजुट हो सकें। कैप्टन अमरिंदर सिंह जब प्रधान और मुख्यमंत्री रहे तो किसी भी नेता ने गुटबाजी के बावजूद खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि आखिरी दौर में नवजोत सिंह सिद्धू ने खुलकर उनकी खिलाफत की। वर्तमान में कांग्रेस में फूट चल रही है और कोई भी धड़ा एक दूसरे के साथ चलने को तैयार नहीं है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी कैप्टन को लाकर दोनों गुटों को शांत कर सकते हैं।

    कैप्टन खुद भी कह चुके, कांग्रेस को मिस करता हूं कैप्टन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि आज भी उनके कांग्रेस हाईकमान से अच्छे रिश्ते हैं। कांग्रेस एक फैमिली की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, वह मिल लेते थे। मगर, भाजपा में ये सिस्टम नहीं है। दोनों में कई अंतर हैं। कैप्टन ने आगे कहा था- जब से मैं BJP में आया हूं, मुझे नहीं लगता एक-दो बार से ज्यादा बार हाईकमान से मिल पाया हूं।

    BJP में नियम बहुत हैं। वो कुछ नहीं बताते। किसी से कुछ नहीं पूछते। अभी 2027 में पंजाब का इलेक्शन होना है। मगर मुझसे एक बार भी नहीं पूछा गया कि कैप्टन साहब किस को कहां से चुनाव लड़वाया जा सकता। मैं BJP में हूं लेकिन कांग्रेस को मिस करता हूं।

    पंजाब की सियासत में कैप्टन की भूमिका कितनी अहम…

        2002 में कैप्टन ने दिलाई सत्ता: पंजाब में 2002 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में लड़ा और 117 विधानसभा सीटों में से 62 पर जीत दर्ज की। उस समय कैप्टन की लोकप्रियता चरम पर थी और बतौर CM उनके 2002 से 2007 के कार्यकाल को लोग आज भी याद करते हैं। हालांकि सरकार के आखिरी साल में पंजाब में सिटी सेंटर घोटाला उजागर हुआ और कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी।

        मोदी लहर में अरूण जेटली को हराया: 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार थी। अकाली दल के आग्रह पर भाजपा ने अमृतसर से अपने मौजूदा सांसद नवजोत सिद्धू का टिकट काटकर अरुण जेटली को मैदान में उतारा। उस समय कांग्रेस के पास जेटली के सामने कोई दमदार चेहरा नहीं था, इसलिए सोनिया गांधी ने अंतिम समय में कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनाव लड़ने को कहा। कैप्टन ने सोनिया गांधी के आदेश पर न सिर्फ चुनाव लड़ा बल्कि अरुण जेटली को एक लाख से अधिक वोटों से शिकस्त भी दी।

        10 साल बाद कैप्टन ने दिलाई कांग्रेस को सत्ता- पंजाब में 2007 से 2017 तक अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने 10 साल सरकार चलाई। कांग्रेस पंजाब में सरकार बनाने का पूरा जोर लगा रही थी। तब 2017 के विधानसभा चुनाव से साल भर पहले कैप्टन ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग की। बदले में सरकार बनाने का भरोसा दिया। कांग्रेस हाईकमान ने प्रताप बाजवा को हटाकर कैप्टन को प्रधान बनाया। जिसके बाद कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें जीती थीं।

  • राजस्थान में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य नियुक्ति नियम बदले, उम्र सीमा समाप्त हुई

    राजस्थान में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य नियुक्ति नियम बदले, उम्र सीमा समाप्त हुई

    उदयपुर
    राजस्थान सरकार ने राजकीय एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में प्राचार्य एवं नियंत्रक के चयन और नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 11 नवंबर 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में बदलाव कर नया परिपत्र जारी किया है। संशोधित नियमों के तहत अब नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया गया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

    संशोधित नियमों के अनुसार, राज्य के सरकारी एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप पात्र वरिष्ठ आचार्य-प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि राज्य में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं तो केंद्र अथवा अन्य राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को भी आवेदन का अवसर मिलेगा। इससे योग्य अभ्यर्थियों का दायरा पहले की तुलना में बढ़ जाएगा।

    उच्चस्तरीय समिति करेगी चयन
    नई चयन प्रक्रिया में प्राचार्य एवं नियंत्रक का चयन साक्षात्कार के जरिए होगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चयन समिति गठित होगी। समिति में कार्मिक विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति सदस्य होंगे। समिति अभ्यर्थियों की प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन कर चयन करेगी।

    समिति प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार करेगी। अनुमोदन मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थी को संबंधित मेडिकल कॉलेज में नियुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का स्थानांतरण किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी कर सकेगी।

    उम्र की बाध्यता खत्म
    संशोधित नियमों में बड़ा बदलाव अधिकतम आयु सीमा को लेकर किया गया है। वर्ष 2025 के आदेश में प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए केवल 57 वर्ष तक के चिकित्सा शिक्षक ही आवेदन के पात्र थे। नए संशोधित नियमों में यह शर्त हटा दी गई है। इससे अब सेवा में कार्यरत वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों के लिए भी प्राचार्य बनने का अवसर खुल गया है।

    3 वर्ष का कार्यकाल
    चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। इसके बाद एक बार में एक वर्ष तथा अधिकतम तीन वर्ष तक पुनर्नियुक्ति अथवा सेवा विस्तार दिया जा सकेगा। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत मिलती है तो राज्य सरकार जांच भी करा सकेगी।

    अनुभव की शर्त तय
    आवेदक के लिए अधीक्षक अथवा अतिरिक्त प्राचार्य पद पर तीन वर्ष और विभागाध्यक्ष के रूप में दो वर्ष का अनुभव अनिवार्य रखा गया है। चयनित अधिकारी को कार्यभार संभालने से पहले एक माह तक वर्तमान प्राचार्य के अधीन पीएमसी डेजिग्नेट के रूप में कार्य करना होगा। इस दौरान कॉलेज के प्रशासनिक कार्य, बैठकों और फाइलों की जानकारी दी जाएगी।