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  • कोल इंडिया का कोयले से आगे बढ़ने का प्लान, ओडिशा में लौह अयस्क ब्लॉक हासिल

    कोल इंडिया का कोयले से आगे बढ़ने का प्लान, ओडिशा में लौह अयस्क ब्लॉक हासिल

     धनबाद
    देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड अब अपने कारोबार का दायरा कोयले से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

    कंपनी ने ओडिशा के क्योंझर जिले में स्थित गदाधरपुर लौह अयस्क ब्लॉक के लिए पसंदीदा बोलीदाता का दर्जा हासिल किया है। इसे कंपनी की खनन कारोबार में विविधता लाने की रणनीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    लौह अयस्क में पहली बड़ी पहल
    कोल इंडिया लंबे समय से कोयला उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब कंपनी लौह अयस्क जैसे दूसरे प्रमुख खनिज के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
    गदाधरपुर ब्लॉक के लिए पसंदीदा बोलीदाता चुने जाने से कंपनी को ओडिशा के लौह अयस्क क्षेत्र में प्रवेश का अवसर मिला है। इससे कोल इंडिया के खनिज संसाधनों का आधार बढ़ने की उम्मीद है।

    खनन के अनुभव का मिलेगा लाभ
    कोल इंडिया के पास बड़े स्तर पर खनन परियोजनाएं संचालित करने का लंबा अनुभव है। कंपनी की विभिन्न सहायक कंपनियां देश के अलग-अलग हिस्सों में खुली और भूमिगत खदानों का संचालन कर रही हैं। खनन, परिवहन, उत्पादन और परियोजना प्रबंधन के क्षेत्र में हासिल अनुभव का लाभ कंपनी को लौह अयस्क परियोजना में भी मिल सकता है।

    गदाधरपुर ब्लॉक के विकास से कंपनी को नए खनिज कारोबार की जानकारी और अनुभव हासिल करने का अवसर भी मिलेगा। भविष्य में इसी अनुभव के आधार पर अन्य खनिज क्षेत्रों में विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।

    ओडिशा में मजबूत होगी मौजूदगी
    ओडिशा देश के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक राज्यों में शामिल है। क्योंझर जिला भी खनिज संपदा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे क्षेत्र में कोल इंडिया की मौजूदगी बढ़ना कंपनी की खनिज क्षेत्र में विस्तार की रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

    गदाधरपुर ब्लॉक के माध्यम से कंपनी को लौह अयस्क कारोबार की पूरी श्रृंखला को समझने और उसमें अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिल सकता है।

    कोयले पर निर्भरता घटाने की दिशा
    कोल इंडिया का मुख्य कारोबार फिलहाल कोयला ही है और आने वाले वर्षों में भी देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयला महत्वपूर्ण बना रहेगा। इसके बावजूद कंपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने कारोबार में विविधता लाने पर जोर दे रही है।

    लौह अयस्क में प्रवेश इसी सोच का हिस्सा है। नए खनिज क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने से कंपनी के पास भविष्य में आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का अवसर होगा। इससे बदलते ऊर्जा और औद्योगिक परिदृश्य में कंपनी को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

    अभी कई प्रक्रियाएं बाकी
    हालांकि, गदाधरपुर ब्लॉक के लिए पसंदीदा बोलीदाता चुना जाना अंतिम रूप से खनन पट्टा मिलने के बराबर नहीं है। इसके बाद नियमानुसार कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। संबंधित मंजूरियों और औपचारिकताओं के बाद ही खनन परियोजना के विकास और उत्पादन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

    कोल इंडिया के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी अपने पारंपरिक कोयला कारोबार के साथ अब दूसरे प्रमुख खनिजों में भी संभावनाएं तलाश रही है। गदाधरपुर के बाद आने वाले समय में खनिज क्षेत्र में कंपनी की गतिविधियों का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

  • Punjab में मानसून पड़ा सुस्त, अगले 5 दिन भारी बारिश नहीं; उमस बढ़ाएगी परेशानी

    Punjab में मानसून पड़ा सुस्त, अगले 5 दिन भारी बारिश नहीं; उमस बढ़ाएगी परेशानी

    अमृतसर.

    पंजाब में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के चंडीगढ़ केंद्र की ओर से जारी ताजा कृषि-मौसम बुलेटिन के अनुसार अगले पांच दिनों तक राज्य में किसी भी प्रकार का मौसम अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    इस दौरान अधिकांश जिलों में केवल हल्की या छिटपुट बारिश की संभावना है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में बारिश नहीं होगी, वहां लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 8 अगस्त को अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, मोगा, फिरोजपुर, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, बरनाला, संगरूर, पटियाला और फतेहगढ़ साहिब सहित कई जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। वहीं गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, बठिंडा, मानसा और मोहाली जैसे जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा होने का अनुमान है। किसी भी जिले के लिए भारी बारिश या चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    पूरा सप्ताह सामान्य से कम बारिश
    विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक राज्य में केवल छिटपुट स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। व्यापक या तेज वर्षा के आसार फिलहाल नहीं हैं। इसी कारण 11 अगस्त के लिए किसी प्रकार का यलो, ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    मौसम को देखकर उर्वरकों के प्रयोग की सलाह
    कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि अगले चार से पांच दिनों तक फसलों में सिंचाई फिलहाल टालें और खेतों से अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी की उचित व्यवस्था रखें। मौसम साफ होने पर ही उर्वरकों और फसल सुरक्षा रसायनों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। धान, गन्ना और कपास की फसलों की नियमित निगरानी करने तथा कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को भी कहा गया है।

    मौसम विभाग का मानना है कि फिलहाल मानसून कमजोर रहने से राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में जहां बारिश नहीं होगी, वहां दिन के समय उमस बढ़ सकती है और लोगों को गर्मी का अधिक एहसास हो सकता है। फिलहाल मौसम में किसी बड़े बदलाव के संकेत भी नहीं हैं।

  • JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की सरकार से वार्ता, 10 अगस्त तक मांगें नहीं मानीं तो घेराव

    JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की सरकार से वार्ता, 10 अगस्त तक मांगें नहीं मानीं तो घेराव

    रांची
     झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं से जुड़ी मांगों और अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर 'JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच' का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज (8 अगस्त 2026) सरकार के प्रतिनिधिमंडल से दूसरी बार मुलाकात कर रहा है।

    यह महत्वपूर्ण वार्ता मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित की गई है। शुक्रवार शाम को भी सरकार और छात्रों को बीच पहले दौर की वार्ता हुई थी।

    छात्र न्याय मंच की ओर से सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए 8 प्रतिनिधियों को नामित किया गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:
        चंदन कुमार
        रामा अवतार महतो
        दिनबंधु मंडल
        बिमल कुमार
        पूजा कुमारी
        प्रेम कुमार
        रवि शंकर
        अमित कुमार शर्मा

    उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता में अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा होगी और भर्ती परीक्षाओं में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए कोई ठोस हल निकल सकेगा।

    रांची में स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जहां छात्रों का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार के अधिकारियों से मिलकर छात्रों की मांगों पर चर्चा करेगा।

    14वें दिन क्या-क्या हुआ?
    छात्र आंदोलन के 14वें दिन यानी 8 अगस्त को छात्रों की सरकार से पहले दौर की बातचीत रांची के मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में हुई। इस वार्ता में दोनों पक्षों ने कई बिंदुओं पर सकारात्मक बातचीत होने की बात कही है। हालांकि, छात्रों ने कहा कि यह पहले चरण की वार्ता थी।  

    इस वार्ता में सरकार की ओर से मंत्री संजय प्रसाद यादव, दीपिका सिंह पांडेय, चमरा लिंडा, सुद्धिव कुमार और स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल रहे।

    छात्रों ने कहा कि सरकार के अंतिम निर्णय तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने सरकार को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर 10 अगस्त तक सरकार उनकी मांगें नहीं पूरी करती है तो सभी छात्र विधानसभा का घेराव करेंगे।

    AISA का विधानसभा मार्च
    लेफ्ट छात्र संगठन AISA ने विधानसभा का घेराव का एलान किया था। इसके तहत तमाम छात्रों ने विधानसभा की तरफ मार्च किया। इस दौरान हंगामा तब हो गया, जब एक छात्र ने आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी। नेहा ने आरोप लगाया कि आरोपी छात्र आरएसएस से जुड़ा है और ये हमला बीजेपी के इशारे पर किया गया है।

    जुनैद की बेज बिरयानी शुरू
    दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद (जुनैद मलिक) शुक्रवार को रांची पहुंचे।

    उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनका हौसला बढ़ाया।

    नेताओं ने किया अनशन का एलान
     छात्रों की आंदोलन पर सियासत भी गर्म रही। जयराम महतो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि छात्र आंदोलन एवं भूख हड़ताल के समर्थन में वह 9 अगस्त को सुबह छह बजे से पुराना विधानसभा परिसर में एक दिवसीय निर्जला अनशन पर बैठेंगे।

    इसी तरह गोड्डा से सांसद कहा है कि यदि 13 अगस्त तक यानी संसद सत्र समाप्त होने तक, इस मामले में कोई फैसला नहीं होता है तो वह पार्टी से अनुमति लेकर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में शामिल होंगे और अनशन पर बैठेंगे।

  • 25 साल बाद भी नहीं मिली पारिवारिक पेंशन, HC ने हरियाणा सरकार को 3 महीने में फैसला लेने का दिया आदेश

    25 साल बाद भी नहीं मिली पारिवारिक पेंशन, HC ने हरियाणा सरकार को 3 महीने में फैसला लेने का दिया आदेश

    चंडीगढ़.

    पति की करीब 25 वर्ष की सेवा के बावजूद पारिवारिक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को याचिकाकर्ता के मांग पत्र पर तीन माह के भीतर कानून के अनुसार फैसला लेने का निर्देश दिया है।

    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ता के 25 मई 2026 के मांग पत्र पर सभी तथ्यों और हाई कोर्ट की पूर्ववर्ती डिवीजन बेंच के फैसले को ध्यान में रखते हुए कारण युक्त एवं स्पष्ट आदेश पारित करे। यदि याचिकाकर्ता राहत की हकदार पाई जाती हैं तो संबंधित लाभ तत्काल प्रदान किए जाएं।

    सेवानिवृत्ति लाभों के लिए योग्य सेवा माना जाए: अदालत
    जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह आदेश जींद निवासी बिमला की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया। याचिका में मांग की गई थी कि उनके दिवंगत पति परमजीत की 18 जुलाई 1994 से पांच दिसंबर 2019 तक की पूरी सेवा को पारिवारिक पेंशन और अन्य पेंशन संबंधी व सेवानिवृत्ति लाभों के लिए योग्य सेवा माना जाए। साथ ही याचिकाकर्ता के मामले को पुरानी पेंशन योजना के तहत मानते हुए पारिवारिक पेंशन, उसके बकाया, महंगाई राहत और सामान्य भविष्य निधि का भुगतान 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि परमजीत को 18 जुलाई 1994 को जिला जींद के राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय, खरैंती में अंशकालिक सफाई कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया था। बाद में 23 अगस्त 2012 के आदेश के माध्यम से उन्हें सफाई कर्मचारी-सह-चौकीदार के पद पर नियमित किया गया। सेवा के दौरान पांच दिसंबर 2019 को उनकी मृत्यु हो गई।

    2020 में अनुकंपा के आधार पर मिली नियुक्ति
    पति की मृत्यु के बाद सरकार ने उनके बेटे को जून 2020 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भी प्रदान की। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब सरकार ने उनके पति की सेवा के दौरान मृत्यु को स्वीकार करते हुए बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दी, तो इसके बावजूद उनके पक्ष में पारिवारिक पेंशन स्वीकृत नहीं की गई। इस संबंध में उन्होंने 25 मई 2026 को न्यायिक मांग नोटिस भी भेजा, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 26 जुलाई 2024 के जय भगवान मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया। दलील दी गई कि मौजूदा मामले का विवाद उक्त फैसले से पूरी तरह कवर होता है और पेंशन संबंधी पात्रता तय करते समय दिवंगत कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन माह के भीतर मांग नोटिस पर कारण युक्त और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए। निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को तत्काल दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता मांगी गई राहत की हकदार पाई जाती हैं तो सक्षम प्राधिकारी उन्हें वह लाभ तत्काल प्रदान करे।

  • Punjab हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पूछा- ‘घर से ऊंची सड़क बनाना कौन सी इंजीनियरिंग पॉलिसी है?’

    Punjab हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पूछा- ‘घर से ऊंची सड़क बनाना कौन सी इंजीनियरिंग पॉलिसी है?’

    चंडीगढ़.

    फगवाड़ा के विभिन्न इलाकों में सड़कों की बार-बार री-कार्पेटिंग किए जाने के कारण सड़क का स्तर लगातार ऊंचा होने और इसके चलते मकानों व दुकानों के सड़क से नीचे चले जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव तथा नगर निगम फगवाड़ा के आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

    कार्यवाहक चीफ जस्टिस और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने यह आदेश फगवाड़ा के सेवानिवृत्त सेक्शन इंजीनियर रजनीश सहगल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने और न्यू मॉडल टाउन, फगवाड़ा के अन्य नागरिकों ने नगर निगम से स्वीकृत नक्शों के अनुसार अपने मकान बनाए थे। लेकिन वर्षों के दौरान क्षेत्र की सड़कों की बार-बार री-कार्पेटिंग और पुनर्निर्माण किया गया।

    बिना स्क्रैचिंग के नई सड़कें बनीं
    यह कार्य पुरानी सड़क की परत को हटाए (स्क्रैचिंग किए) बिना ही नई परत बिछाकर किया गया, जिससे सड़क का स्तर लगातार बढ़ता गया और अब कई मकानों का प्लिंथ लेवल सड़क से नीचे चला गया है। याचिका में कहा गया कि बारिश होने पर सीवरेज का पानी सीधे घरों में घुस जाता है। कई निवासियों को सड़क तक पहुंचने के लिए अपने घरों के बाहर रैंप बनाने पड़े हैं। सड़क का स्तर लगातार बढ़ने से मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और उनमें रहना तक मुश्किल हो गया है।

    पटना के मामले का हुआ जिक्र
    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एचसी अरोड़ा और अधिवक्ता सुनैना ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि इसी प्रकार के मामले में जुलाई 2026 में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया, जिसमें यह सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया कि सड़क निर्माण या री-कार्पेटिंग के दौरान सड़क की ऊंचाई स्वीकृत स्तर से अधिक न बढ़े। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2010 में भी पटना हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जहां सड़क का स्तर पहले ही मकानों और दुकानों के प्लिंथ लेवल से ऊपर पहुंच चुका था।

    हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के समक्ष ऐसे मकानों और दुकानों के फोटोग्राफ भी पेश किए, जिनके अनुसार सड़क का स्तर बढ़ने से उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और नगर निगम फगवाड़ा के आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

  • नांगल चौधरी के 39 गांवों का पेयजल संकट होगा दूर, 352 करोड़ से बनेंगे तीन जलाशय

    नांगल चौधरी के 39 गांवों का पेयजल संकट होगा दूर, 352 करोड़ से बनेंगे तीन जलाशय

     नारनौल
    जिले के टेल पर स्थित नांगल चौधरी एरिया में पेयजल संकट से निपटने की कवायद तेज हो गई है। इस क्षेत्र के तीन गांवों में जलाशय बनाकर अति जल-अभावग्रस्त 39 गांवों के हजारों उपभोक्ताओं की पेयजल आवश्यकता पूरी की जाएगी।

    इसके साथ ही नांगल चौधरी कस्बे की पेयजल सप्लाई भी लहरौदा की बजाए सीधे इन तीन गांवों के जलाशय से जोड़ दी जाएगी। इससे नांगल चौधरी में भी एक नया जलाशय बनाकर उसको भी बड़ा फायदा होगा। यह कार्य तीन फेज में होगा । जनस्वास्थ्य विभाग ने पहले पैकेज के तहत करीब 72 करोड़ रुपये के टेंडर छोड़ दिए गए हैं । पैकेज दो और तीन के टेंडर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव मुसनौता, सिराेही बिहाली और आसरावास में 352 करोड़ रुपये खर्च कर बड़े जलाशय बनाए जाएंगे। इन जलाशयों से आस-पास के जल अभावग्रस्त 39 गांवों की पेयजल सप्लाई सुचारू की जाएगी। विभाग ने यह परियोजना 365 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

    जल्द निरीक्षण करेंगे मुख्य अभियंता
    प्रदेश सरकार इस परियोजना को गंभीरता के साथ ले रही है। इसके तहत जल्द ही जनस्वास्थ्य विभाग के चीफ इंजीनियर नांगल चौधरी एरिया का दौरा कर परियोजना को धरातल पर उतारने को लेकर स्थानीय अधिकारियों के साथ मंथन करेंगे। उनका शुक्रवार को आना प्रस्तावित था, लेकिन पलवल में जाने का कार्यक्रम बनने की वजह से वह नहीं आ पाए। जल्द ही नांगल चौधरी आने का कार्यक्रम बनने जा रहा है।

    इस परियोजना के तहत हमने प्रथम पैकेज का टेंडर छोड़ दिया है। दूसरे और तीसरे पैकेज के टेंडर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही नांगल चौधरी में भी एक नया जलाशय बनाने की योजना है।

    इस जलाशय को नारनौल के पास स्थित लहरौदा जलघर की बजाए नांगल चौधरी के पास बन रहे नए जलघरों से जोड़ा जाएगा। मुसनौता, सिराही बहाली और आसरावास में बनने वाले जलघरों में पानी ट्रीटमेंट की व्यवस्था रहेगी। ये जलाशय नांगल चौधरी के पास होने की वजह से कस्बे में नहरी पानी की सप्लाई आसानी से हो सकेगी।

        -एसपी जोशी, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ विभाग

     

  • राजस्थान निकाय चुनाव में महिला आरक्षण का नया गणित, खर्च सीमा भी तय

    राजस्थान निकाय चुनाव में महिला आरक्षण का नया गणित, खर्च सीमा भी तय

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार के चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं का आरक्षण प्रतिशत और प्रत्याशियों द्वारा किया जाने वाला चुनाव खर्च रहेगा। शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का गणित अलग-अलग तय किया गया है। स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में लॉटरी प्रक्रिया की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    राजस्थान में इस बार भी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों में महिला आरक्षण का अनुपात अलग-अलग रहने वाला है।

    पंचायती राज चुनाव: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

    शहरी निकाय चुनाव: स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आयोजित निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा।

    वर्गवार आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणियों में महिलाओं को आरक्षण इसी 33% और 50% के तय अनुपात के आधार पर ही आवंटित किया जाएगा।

    स्वायत्त शासन विभाग ने 33 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से तथा पंचायती राज विभाग ने 50 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से लॉटरी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    क्यों नहीं लागू हो पाया 50% आरक्षण?
    उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में पंचायत और शहरी निकाय दोनों स्तरों पर महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का निर्णय लिया था। हालांकि, शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण का मामला कानूनी अड़चनों के कारण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत से हरी झंडी न मिलने के कारण निकायों में महिला आरक्षण 33 फीसदी पर ही रुका हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 243 डी (Article 243D) में संशोधन के बाद ही शहरी निकायों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है।

    वर्तमान में बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में शहरी निकायों में 50% महिला आरक्षण लागू है।

    पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा बढ़ी
    राज्य निर्वाचन आयोग ने विभिन्न निकायों के लिए प्रत्याशी खर्च सीमा का नया ढांचा तय कर दिया है।

    नगर निगम पार्षद: प्रत्याशी चुनाव प्रचार पर अधिकतम ₹3.50 लाख (3.5 लाख) तक खर्च कर सकेंगे।

    नगर परिषद पार्षद: चुनाव खर्च की सीमा ₹50 हजार बढ़ाकर अब ₹2.50 लाख (2.5 लाख) कर दी गई है।

    नगर पालिका पार्षद: पार्षद प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा ₹1.50 लाख (1.5 लाख) रखी गई है।

    कड़े नियम: लाउडस्पीकर बैन, गाड़ियों के लिए स्पेशल परमिशन

    निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।

    चुनावी खर्च का ब्योरा: चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सभी प्रत्याशियों को 15 दिन के भीतर अपने पूरे चुनावी खर्च का विस्तृत हिसाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

    मतदान के दिन वाहनों का उपयोग: यदि मतदान के दिन कोई प्रत्याशी वाहन/गाड़ी का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे इसके लिए निर्वाचन अधिकारी से अलग से लिखित अनुमति लेनी होगी।

    लाउडस्पीकर पर पूर्ण प्रतिबंध: चुनावी कार्यालयों पर लाउडस्पीकर लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    आयोग ने जारी किया ₹29.64 करोड़ का बजट
    चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और चुनावी कर्मचारियों के टीए-डीए (TA-DA) व अन्य व्यवस्थाओं के लिए आयोग ने भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।

    10 नगर निगमों के लिए: निर्वाचन अधिकारियों को कुल ₹10.31 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

    नगर पालिकाओं व नगर परिषदों के लिए: ₹19.33 करोड़ का बजट जारी किया गया है।

    कुल चुनावी आवंटन: राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल मिलाकर ₹29.64 करोड़ की राशि फील्ड अधिकारियों को जारी कर दी है।

  • हरियाणा के 39 गांवों का खत्म होगा जल संकट, 352 करोड़ से बनेंगे 3 बड़े जलाशय

    हरियाणा के 39 गांवों का खत्म होगा जल संकट, 352 करोड़ से बनेंगे 3 बड़े जलाशय

    नारनौल.

    जिले के टेल पर स्थित नांगल चौधरी एरिया में पेयजल संकट से निपटने की कवायद तेज हो गई है। इस क्षेत्र के तीन गांवों में जलाशय बनाकर अति जल-अभावग्रस्त 39 गांवों के हजारों उपभोक्ताओं की पेयजल आवश्यकता पूरी की जाएगी।

    इसके साथ ही नांगल चौधरी कस्बे की पेयजल सप्लाई भी लहरौदा की बजाए सीधे इन तीन गांवों के जलाशय से जोड़ दी जाएगी। इससे नांगल चौधरी में भी एक नया जलाशय बनाकर उसको भी बड़ा फायदा होगा। यह कार्य तीन फेज में होगा । जनस्वास्थ्य विभाग ने पहले पैकेज के तहत करीब 72 करोड़ रुपये के टेंडर छोड़ दिए गए हैं । पैकेज दो और तीन के टेंडर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव मुसनौता, सिराेही बिहाली और आसरावास में 352 करोड़ रुपये खर्च कर बड़े जलाशय बनाए जाएंगे। इन जलाशयों से आस-पास के जल अभावग्रस्त 39 गांवों की पेयजल सप्लाई सुचारू की जाएगी। विभाग ने यह परियोजना 365 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

    जल्द निरीक्षण करेंगे मुख्य अभियंता
    प्रदेश सरकार इस परियोजना को गंभीरता के साथ ले रही है। इसके तहत जल्द ही जनस्वास्थ्य विभाग के चीफ इंजीनियर नांगल चौधरी एरिया का दौरा कर परियोजना को धरातल पर उतारने को लेकर स्थानीय अधिकारियों के साथ मंथन करेंगे। उनका शुक्रवार को आना प्रस्तावित था, लेकिन पलवल में जाने का कार्यक्रम बनने की वजह से वह नहीं आ पाए। जल्द ही नांगल चौधरी आने का कार्यक्रम बनने जा रहा है। इस परियोजना के तहत हमने प्रथम पैकेज का टेंडर छोड़ दिया है। दूसरे और तीसरे पैकेज के टेंडर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही नांगल चौधरी में भी एक नया जलाशय बनाने की योजना है।

    नहरी पानी की सप्लाई आसानी से हो सकेगी –
    इस जलाशय को नारनौल के पास स्थित लहरौदा जलघर की बजाए नांगल चौधरी के पास बन रहे नए जलघरों से जोड़ा जाएगा। मुसनौता, सिराही बहाली और आसरावास में बनने वाले जलघरों में पानी ट्रीटमेंट की व्यवस्था रहेगी। ये जलाशय नांगल चौधरी के पास होने की वजह से कस्बे में नहरी पानी की सप्लाई आसानी से हो सकेगी।
    – एसपी जोशी, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ विभाग

  • रायपुर स्टेशन पर RPF का बड़ा एक्शन, नो पार्किंग और अवैध वेंडरों पर कार्रवाई; 3800 लोग पकड़े गए

    रायपुर स्टेशन पर RPF का बड़ा एक्शन, नो पार्किंग और अवैध वेंडरों पर कार्रवाई; 3800 लोग पकड़े गए

    रायपुर.

    रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम यातायात और परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रेलवे प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके तहत रायपुर और भाटापारा रेलवे स्टेशनों पर बड़े पैमाने पर विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने की कार्रवाई की गई।

    नो पार्किंग और अवैध वेंडरों पर कार्रवाई
    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान वर्ष 2025-26 में रेलवे अधिनियम की धारा 159 के अंतर्गत नो पार्किंग एरिया में वाहन खड़े करने वाले 2,025 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं धारा 144 के तहत स्टेशन और ट्रेनों में बिना अनुमति सामान बेचने वाले 1,780 अवैध वेंडरों पर भी कार्रवाई की गई।

    3800 पर कार्रवाई, वसूला 20 लाख से ज्यादा जुर्माना
    दोनों अभियानों में कुल 3,805 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 20 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। अभियान का उद्देश्य स्टेशन परिसर को अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और यातायात अव्यवस्था से मुक्त रखना है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

    लगातार कार्रवाई जारी रहेगी
    रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्टेशन परिसर में नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने, अवैध रूप से फेरी लगाने या बिना अनुमति व्यापार करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे रेलवे के नियमों का पालन करें और स्टेशन परिसर में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत आरपीएफ या रेलवे प्रशासन को दें। इससे स्टेशन पर व्यवस्था बनाए रखने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    भाटापारा स्टेशन पर किलाबंदी कर टिकट जांच
    वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक डॉ सुस्कर विपुल विलासराव के निर्देश पर भाटापारा रेलवे स्टेशन पर किलाबंदी टिकट जांच की। इस दौरान सभी प्लेटफार्म, 14 ट्रेनों में किलाबंदी टिकट चेकिंग अभियान में कुल 287 मामलों को दर्ज कर 2,45,835 रुपए जुर्माना वसूला गया। बिना टिकट यात्रा करने वाले 191 यात्री पकड़े गए। वहीं अनियमित टिकट लेकर यात्रा करने वाले 72 यात्रियों को पकड़ा, अधिक लगेज लेकर यात्रा करने के 22, गंदगी, धूम्रपान के 1-1 मामलों में कार्रवाई की गई।

  • गया-रोहतास में खनन की तैयारी तेज, 14 खनिज ब्लॉकों की होगी नीलामी

    गया-रोहतास में खनन की तैयारी तेज, 14 खनिज ब्लॉकों की होगी नीलामी

    पटना
     बिहार में वृहद खनिज के चिह्नित 14 खनिज ब्लॉकों में से गया और रोहतास में खनन की तैयारी तेज हो गई है। गया में लौह अयस्क के रूप में मैग्नेटाइट और रेयर मेटल के भंडार का पता चला है। सर्वे के आधार पर गया के खिजरसराय प्रखंड में सपनेरी और शेरघाटी के पास बांके बाजार प्रखंड अंतर्गत लुटुआ ग्राम पंचायत में ब्लॉक चिह्नित किए गये हैं। रोहतास जिले के रोहतास और नौहट्टा प्रखंड के नवाडीह, शाहपुर, अकबरपुर और टीपा में ग्लूकोनाइट के ब्लॉक चिह्नित हुए हैं।

    खान एवं भूतत्व विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार के स्तर पर इन वृहद ब्लॉकों की नीलामी होगी। इसके लिए केंद्र सरकार के खान एवं भूतत्व मंत्रालय की एक टीम 17 अगस्त को पटना आयेगी। विभाग ने बताया कि रोड शो का उद्देश्य संभावित निवेशकों को जानकारियां देना, औद्योगिक संभावनाओं को उजागर करना और नयी नीति व नियमों के बारे में सूचित करना है। रोड शो में ब्लॉकों की नीलामी की समय-सारणी, बोली प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुमति, सामाजिक प्रभावों के आकलन और स्थानीय लोगों के लिये सृजित होने वाले रोजगार पर प्रकाश डाला जाएगा। खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गया और रोहतास में किए गए सर्वे में मैग्नेटाइट, वैनेडियम और ग्लूकोनाइट के भी महत्वपूर्ण भंडार मिले हैं।

    5000 करोड़ का राजस्व मिलने की उम्मीद
    खान एवं भूतत्व विभाग के मुताबिक जीएसआई की रिपोर्ट पर भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा बिहार में वृहद खनिज के 14 ब्लॉक नीलामी को लेकर उपलब्ध कराए गये हैं। इनमें से रोहतास के दो और गया के एक ब्लॉक की नीलामी केंद्र, जबकि रोहतास के एक ब्लॉक की नीलामी राज्य सरकार ने कराई है। शेष 10 ब्लॉकों के नीलामी की प्रक्रिया चल रही है।

    नीलामी पूरी होने पर राज्य सरकार को 5000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

    ग्लूकोनाइट पोटेशियम
    रोहतास में मिला ग्लूकोनाइट पोटेशियम (पोटाश) का बड़ा स्रोत है। इसका उपयोग खेती में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और व्यावसायिक उर्वरक पाउडर बनाने में कच्चे माल के रूप में होगा।

    वैनेडियम: वैनेडियम का लगभग 85 से 90 हिस्सा मिश्र धातु के रूप में उपयोग होता है। इसका उपयोग पुलों, गगनचुंबी इमारतों, सुरंगों और साइकिल फ्रेम आदि में होने वाले मजबूत स्टील सरियों को बनाने में होता है।
    मैग्नेटाइट

    मैग्नेटाइट में धातु (लोहे) का अंश लगभग 60 से 72 फीसदी तक पाया जाता है। इसका सबसे बड़ा उपयोग स्टील और आयरन बनाने के लिए लौह-अयस्क के रूप में होता है।

    क्या कहते हैं अधिकारी?
    गया और रोहतास में खनन के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर नीलामी प्रक्रिया की जा रही है। इसको लेकर केंद्रीय टीम 17 अगस्त को पटना पहुंचेगी। इस मौके पर रोड शो भी होगा। -अवनीश कुमार सिंह, सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग।