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  • धनबाद में अगस्त का राशन वितरण अटका, डोर स्टेप डिलीवरी पर परिवहन ठेकेदारों ने खड़े किए हाथ

    धनबाद में अगस्त का राशन वितरण अटका, डोर स्टेप डिलीवरी पर परिवहन ठेकेदारों ने खड़े किए हाथ

     धनबाद
    जिले में पीडीएस दुकानों को राशन की डोर स्टेप डिलिवरी नहीं मिलने से अगस्त माह का राशन वितरण शुरू नहीं हो पाया है। यह परेशानी शहरी क्षेत्र में है। इसका कारण सरकार का नया आदेश और पुरानी कार्यप्रणाली को माना जा रहा है।

    नए आदेश में केंद्र सरकार के गोदाम से राशन का उठाव कर सीधे पीडीएस तक पहुंचाना है, जबकि पुरानी व्यवस्था के तहत राशन का परिवहन केंद्र सरकार के गोदाम से राज्य सरकार के गोदाम तक और फिर यहां से पीडीएस दुकान तक होती है। इस व्यवस्था में बदलाव होने पर परिवहन करने वाले ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

    यह है मामला
    28 जुलाई 2026 को खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से डायरेक्ट डोर स्टेप डिलीवरी संबंधी आदेश जारी किया गया था।

    इस आदेश के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केंद्र सरकार के गोदाम से राशन का उठाव कर सीधे पीडीएस दुकानदारों तक पहुंचाना है, लेकिन राशन परिवहन को लेकर अब तक नया टेंडर नहीं हो पाया है।

    पुराने टेंडर और एकरारनामा के अनुसार, केंद्र सरकार के गोदाम से राशन उठाव कर राज्य सरकार के गोदाम में लाया जाता है और फिर यहां से पीडीएस दुकानों तक पहुंचता है।

    इसके लिए विभागीय प्रविधान अनुसार परिवहन करने वाले वाहन को प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर 40 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसी भुगतान राशि को लेकर परिवहन करने वालों और विभाग के बीच जिच बरकरार है।

    डीलरों की शिकायत
    गोधर के पीडीएस डीलर बिनोद कुमार ने मामले को लेकर विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी धनबाद को एक पत्र देकर बताया है कि डोर स्टेप डिलिवरी नहीं होने के कारण वार्ड संख्या छह से लेकर 44 तक यानी कुल 39 वार्डों में अगस्त माह का राशन प्राप्त नहीं हुआ है, जबकि सरकारी आदेशानुसार अगस्त के साथ-साथ सितंबर और अक्टूबर माह का भी राशन पीडीएस को उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि राशन का परिवहन करने वाले यदि आदेश का अनुपालन नहीं करते हैं तो उन पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
    रिंकू जालान को पूरे जिले का राशन परिवहन की जिम्मेवारी

    पूर्व के हुए टेंडर के बाद रिंकू जालान नामक व्यक्ति को पूरे जिले में राशन का परिवहन करने के लिए एकरारनामा किया गया है। फिलहाल रिंकू जालान की ही व्यवस्था के तहत राशन उठाव और परिवहन किया जाता है।

    राज्य सरकार के नए आदेश में यह साफ वर्णित है कि केंद्र सरकार के गोदाम से पीडीएस दुकानों तक राशन उठाव की जिम्मेवारी एकरारनामा के तहत होगी।

    ऐसा नहीं करने पर परिवहन एजेंसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है, लेकिन विभाग के लाख कोशिशों के बावजूद भी राशन उठाव और परिवहन दोनों ठप है।

    तीन अधिकारी तैनात, फिर भी नहीं पहुंचा राशन
    डायरेक्ट डोर स्टेप डिलिवरी सुनिश्चित कराने के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी की ओर से तीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की तैनाती की गई है। इसमें अबिनाश कुमार राय को वार्ड संख्या छह, सात और 16 से 20 तक, टिंकू कुमार दास को वार्ड संख्या आठ से 15 तक और राजदीप उरांव को वार्ड संख्या 21 से 45 तक राशन उठाव के लिए क्षेत्र आवंटित हैं।

    इसके बावजूद भी राशन का न तो उठाव हो रहा है और न ही परिवहन संभव हो पाया है। वहीं, जिला आपूर्ति पदाधिकारी भी केवल समस्या के समाधान का आश्वासन दे रहे हैं।

    परिवहन के लिए टेंडर का भी आदेश
    राज्य कार्यालय की ओर से डायरेक्ट डोर स्टेप डिलिवरी के लिए नया टेंडर करने का भी आदेश है। इसके तहत अब परिवहन करने वालों को 70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से परिवहन के लिए भुगतान किया जाएगा। यह टेंडर जिला स्तर पर किया जाना है।

    टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राशन उठाव और परिवहन के लिए जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। पीडीएस तक राशन पहुंचाने के लिए भी अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। जो भी समस्या है उसका निदान किया जा रहा है। -पंकज कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी धनबाद

     

  • छोटे रेल अपराधों पर अब नहीं होगी जेल, मौके पर जुर्माना भरकर यात्रियों को मिलेगी राहत

    छोटे रेल अपराधों पर अब नहीं होगी जेल, मौके पर जुर्माना भरकर यात्रियों को मिलेगी राहत

    अंबाला.

    रेल यात्रा के दौरान छोटी-सी चूक, अनजाने में हुई लापरवाही या मामूली नियम उल्लंघन पर अब यात्रियों को जेल नहीं जाना पड़ेगा। रेल मंत्रालय ने रेलवे अधिनियम की कई धाराओं में आपराधिक कार्रवाई के स्थान पर आर्थिक जुर्माने का प्रविधान कर दिया है। पहले मामला दर्ज कर आरोपित को अदालत में पेश किया जाता था, लेकिन अब मौके पर जुर्माना वसूल कर रसीद जारी की जाएगी। यानी निर्धारित मामलों में यात्री मौके पर ही जुर्माना भरकर केस निपटा सकेंगे।

    रेलवे ने जारी किए दिशा निर्देश
    इस संबंध में रेल मंत्रालय ने देशभर में नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी मंडलों में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को नई व्यवस्था से अवगत कराया है। बदलाव से अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा। मौके पर जुर्माना वसूल होने से समय बचेगा व अधिकारी गंभीर अपराधों की रोकथाम पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन व रजिस्टर में दर्ज होगा नए प्रविधान के तहत यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उससे मौके पर ही जुर्माना भरने के लिए कहा जाएगा। जुर्माना भरने पर उसकी रसीद दी जाएगी और पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन व रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। यदि कोई जुर्माना देने से इनकार करता है तो उसके विरुद्ध रेलवे अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक कार्रवाई की फोटो और वीडियो रिकार्डिंग, उल्लंघनकर्ता का पूरा विवरण तथा एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार नियम तोड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जब तक संबंधित साफ्टवेयर पूरी तरह अपडेट नहीं हो जाता, तब तक सभी मामलों का रिकॉर्ड मैनुअल रजिस्टर में भी सुरक्षित रखा जाएगा। प्रतिदिन की कार्रवाई की रिपोर्ट मंडल सुरक्षा नियंत्रण कक्ष को भेजने के निर्देश दिए हैं।

    गंभीर अपराध किया तो जाना पड़ेगा जेल
    बार-बार नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल सामान्य और पहली बार होने वाली चूक के लिए है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार रेलवे नियमों का उल्लंघन करता है या गंभीर अपराध करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें कारावास (जेल) का प्रविधान भी लागू रहेगा।

    किस अपराध पर कितना जुर्माना
    आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत प्रवेश पर दो हजार रुपये जुर्माना बिना टिकट या फर्जी टिकट पर यात्रा, अधिकृत दूरी से आगे यात्रा करना तथा ट्रांसफर टिकट पर यात्रा जैसे मामलों में यात्री को किराये के साथ अतिरिक्त शुल्क देना होगा। अधिकांश मामलों में न्यूनतम अतिरिक्त शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया है। इसी तरह भीख मांगना या अनाधिकृत बिक्री करने पर दो हजार रुपये का जुर्माना, रेलवे परिसर में शराब पीने या नशे की हालत में उपद्रव करने पर एक हजार या सामुदायिक सेवा, रेलवे कर्मी के कार्य में बाधा डालने पर 2500 तक का जुर्माना, रेलवे परिसर में अनाधिकृत प्रवेश पर 500 का जुर्माना, आरक्षित डिब्बे में अनाधिकृत प्रवेश पर दो हजार तथा बिना अधिकार सीट या बर्थ घेरने पर एक हजार का जुर्माना, निर्देशों की अवहेलना करने पर 500 का जुर्माना, महिलाओं के आरक्षित डिब्बे या विशेष स्थान में अनधिकृत प्रवेश पर 2500, धूम्रपान करने तथा रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 200 रुपये जुर्माना देना होगा।
    रेल मंत्रालय ने रेलवे अधिनियम की कई धाराओं में आपराधिक कार्रवाई के स्थान पर आर्थिक जुर्माने का किया प्रविधान। पहले मामला दर्ज कर आरोपित को अदालत में पेश किया जाता था, अब मौके पर जुर्माना वसूल कर जारी की जाएगी रसीद से 2500 रुपये तक है। नए प्रविधान में जुर्माना राशि, इनकार करने पर रेलवे अधिनियम के तहत नियमानुसार की जाएगी कार्रवाई।

  • बिहार में गंगा किनारे बनेंगे 16 नए जेटी, नदी बनेगी कारोबार और आवागमन का नया रास्ता

    पटना
     बिहार में अब कारोबार और आवागमन का नया रास्ता नदियों के जरिए तैयार किया जा रहा है। गंगा यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) के किनारे 16 नए सामुदायिक जेटी बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इन जेटी के जरिए यात्रियों के साथ-साथ सामान और स्थानीय उपज की आवाजाही को आसान बनाने की तैयारी है।

    खास बात यह है कि 10 स्टील जेटी का निर्माण भी शुरू हो चुका है। वहीं गंडक नदी के राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो और जेटी प्रस्तावित हैं।

    अगर यह योजना जमीन पर पूरी तरह उतरती है तो बिहार के कई इलाकों की अर्थव्यवस्था को नदी से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

    8 जिलों में बनेंगे नए जेटी, 10 का काम शुरू
    परिवहन विभाग के अनुसार 17 चिन्हित स्थानों में से 16 जगहों के लिए जिलों से IWAI को एनओसी मिल चुकी है। इनमें पटना, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर और आरा समेत कई इलाके शामिल हैं।

    पटना में कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल जैसे स्थानों पर जेटी प्रस्तावित हैं। सारण में हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर तथा समस्तीपुर में पत्थरघाट और धरनीपट्टी पश्चिम को भी योजना में शामिल किया गया है।

    बेगूसराय में सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट पर जेटी निर्माण की योजना है। इनमें से 10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू होना जल परिवहन परियोजना की रफ्तार को दिखाता है।

    गंगा के बाद गंडक पर भी जल परिवहन का विस्तार
    सरकार की नजर सिर्फ गंगा पर नहीं है, बल्कि गंडक नदी को भी जल परिवहन के नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो सामुदायिक जेटी बनाने का प्रस्ताव है।

    हालांकि चिन्हित स्थानों पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इनका एनओसी अभी अटका हुआ है। जमीन की समस्या दूर होने के बाद इन परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

    इससे उत्तर बिहार के नदी किनारे बसे इलाकों को जल परिवहन का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। यानी आने वाले समय में बिहार की नदियां सिर्फ सिंचाई और बाढ़ के लिए नहीं, बल्कि कारोबार के रास्ते के रूप में भी अहम हो सकती हैं।

    11 जिलों में पहले से 21 जेटी, अब नेटवर्क होगा बड़ा
    बिहार में सामुदायिक जेटी का नेटवर्क पहले से मौजूद है और अब इसका विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल राज्य के 11 जिलों में गंगा के किनारे कुल 21 सामुदायिक जेटी मौजूद हैं।

    पटना में दीघा, नकटा दियारा, पानापुर, नासरीगंज और बाढ़ समेत पांच स्थानों पर जेटी हैं। भागलपुर में तिनतंगा, सुल्तानगंज, कहलगांव और बटेश्वरनाथ में भी जेटी उपलब्ध हैं।

    भोजपुर, वैशाली, कटिहार, बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया भी इस नेटवर्क से जुड़े हैं। अब नए जेटी बनने के बाद यह नेटवर्क और विस्तृत होने वाला है।
    किसानों से व्यापारियों तक, नदी बनेगी सस्ता रास्ता

    सामुदायिक जेटी का सबसे बड़ा फायदा नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों को मिलने की उम्मीद है। किसानों की उपज, मछुआरों का सामान और स्थानीय कारोबार से जुड़ा माल कम लागत में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है।

    व्यापारियों के लिए जलमार्ग सड़क परिवहन के मुकाबले एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकता है। यात्रियों के लिए भी नदी के रास्ते आवाजाही को ज्यादा सुविधाजनक बनाने की कोशिश है।

    जल परिवहन बढ़ने से सड़कों पर माल ढुलाई का दबाव भी कम किया जा सकता है। यानी एक जेटी सिर्फ नाव खड़ी करने की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए कनेक्टिविटी का नया केंद्र बन सकती है।

    ‘नदी किनारे’ से ‘नदी के रास्ते’ आगे बढ़ेगा बिहार
    परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार के मुताबिक सामुदायिक जेटी स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

    IWAI जेटी का निर्माण और दो साल तक सफल संचालन करने के बाद इसे इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट, बिहार को हस्तांतरित करता है।

    इस व्यवस्था से जेटी के निर्माण के साथ उसके संचालन की निरंतरता पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य जल परिवहन को केवल यातायात का माध्यम बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का है।

    नए जेटी इसी दिशा में एक अहम कड़ी माने जा रहे हैं।बिहार की नदियों को अगर कारोबार और यातायात के नेटवर्क से प्रभावी ढंग से जोड़ दिया गया, तो आने वाले वर्षों में राज्य जल परिवहन के बड़े हब के रूप में अपनी नई पहचान बना सकता है।

  • झारखंड में छात्रों और सरकार के बीच फिर नहीं बनी सहमति, परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े छात्र

    झारखंड में छात्रों और सरकार के बीच फिर नहीं बनी सहमति, परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े छात्र

    रांची
     प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच शनिवार को दूसरे दौर की वार्ता हुई. बैठक में भी छात्रों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी परीक्षा रद्द करने की उनकी मांग नहीं मानी जाती है, तब तक धरना जारी रहेगा. छात्रों ने 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को भी जारी रखने की घोषणा की है l

    मंत्रियों ने मांगें सुनीं, धरना स्थगित करने की अपील
    सरकार की ओर से वार्ता में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा, संजय प्रसाद यादव और सुदिव्य कुमार शामिल हुए. मंत्रियों ने छात्रों की मांगों और उनके सुझावों को गंभीरता से सुना. सरकार की ओर से छात्रों से धरना स्थगित करने का आग्रह किया गया. साथ ही कहा गया कि छात्रों की ओर से दिये जाने वाले सुझावों पर सरकार विचार करेगी l

    पूरे राज्य के छात्रों से मांगा सुझाव
    मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार केवल आंदोलन कर रहे छात्रों से ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के छात्रों से प्रतियोगी परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी एवं सशक्त बनाने के लिए सुझाव मांग रही है. उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से का छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से संबंधित अपना सुझाव सरकार तक पहुंचा सकता है. इसके लिए मंत्री ने अपना ईमेल आइडी भी जारी किया है l

    छात्रों की समस्याओं पर सुझाव लेकर सरकार करेगी जरूरी कार्रवाई
    सरकार की ओर से कहा गया कि छात्रों की समस्याओं को समझने और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी पक्षों से सुझाव लिये जायेंगे. सरकार इन सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई करेगी l

    मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    वहीं, छात्रों ने कहा कि वे अपनी मुख्य मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं. छात्रों का कहना है कि जब तक पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है, तब तक उनका धरना जारी रहेगा. छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने की भी घोषणा की है l

    खत्म हुई वार्ता, आंदोलन रहेगा जारी
    वार्ता खत्म होने के बाद छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है. वहीं, सरकार अब 4 अन्य दलों से भी बातचीत करेगी l

  • PGI में गर्भवती महिलाओं और नवजातों के 20 लाख रुपये के इंजेक्शन-टीके चोरी

    PGI में गर्भवती महिलाओं और नवजातों के 20 लाख रुपये के इंजेक्शन-टीके चोरी

    चंडीगढ़.

    पीजीआई के गायनी विभाग में एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को लगने वाले इंजेक्शन गायब हो गए, जिनकी कीमत करीब 20 लाख है। चोरी के इस खेल में विभाग के ही कुछ फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और फोर्थ क्लास कर्मचारियों के शामिल होने का शक है।

    इंजेक्शन की तस्करी का भी शक जताया जा रहा है। सूत्रों की माने तो यह कर्मचारी इन इंजेक्शन को विभाग के स्टाक से गायब कर देते हैं और फिर इसे बाजार भाव में बेचते देते हैं। पीजीआई प्रशासन जांच भी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार यह खेल बीते कई माह से चल रहा हैं। चोरी हो रहे इंजेक्शनों का खुलासा तब हुआ जब एक नए कर्मचारी की ड्यूटी वार्ड में लग गई। कर्मचारी ने देखा कि जरूरत से खपत से चार-पांच गुना अधिक इंजेक्शन मंगवाए जा रहे हैं। शक होने पर कर्मचारी ने अस्पताल प्रशासन को मामले की जानकारी दी। पीजीआई प्रशासन ने सीसीटीवी की जांच करवाई तो कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आई है। फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और फोर्थ क्लास कर्मचारी लाखों इंजेक्शन का घपला करने के लिए जानबूझकर एक ही शिफ्ट में अपनी ड्यूटी लगवा रहे थे।

    हर दिन 100 से अधिक इंजेक्शन चोरी
    प्राथमिक जानकारी के अनुसार हर दिन स्टाफ की मिलीभगत से गायनी विभाग से हर दिन 100 से अधिक इंजेक्शन गायब किए जा रहे हैं। जिसमें स्टाफ के अतिरिक्त इसमें सुरक्षाकर्मियों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

    पहले भी ऐसा हुआ था
    अगस्त 2025 में भी गायनी विभाग से हजारों के इंजेक्शन चोर गिरोह का दैनिक जागरण ने खुलासा किया था। महंगे इंजेक्शन चोरी करने वाला गिरोह चादर ओढ़कर वार्ड में पहुंचता था और मौका मिलते ही इंजेक्शन बैग में डालकर फरार हो जाता था। उस दौरान विकास नगर निवासी दीपक की मां नेहरू ब्लाक की चौथी मंजिल स्थित फीमेल वार्ड में भर्ती थीं। डाॅक्टर ने चार इंजेक्शन लगाने की सलाह दी थी, जिसके बाद 92 हजार रुपये के इंजेक्शन खरीदे गए थे। पहला इंजेक्शन मरीज को लगाने के बाद बाकी तीन को वार्ड के रेफ्रिजरेटर में रखा गया था। दोपहर करीब तीन बजे दीपक जब दूसरा इंजेक्शन लेने पहुंचे तो तीनों गायब मिले थे।

    जांच की जा रही है –
    मामले की सूचना सक्षम अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस को भी दे दी गई है। जांच की जा रही है। डीडीआर या एफआईआर दर्ज करने को लेकर पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
    – प्रवक्ता, पीजीआई

  • हिसार के कॉलेज के प्रोफेसरों ने तैयार की आम-जामुन की खास वाइन, मिला पेटेंट

    हिसार के कॉलेज के प्रोफेसरों ने तैयार की आम-जामुन की खास वाइन, मिला पेटेंट

     हिसार
    वाइन का बिक्री देश में तेजी से बढ़ रही है। वाइन बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट में अलग-अलग फ्लेवर में निकाल कर बेच रही है। वाइन की बढ़ती मांग और उसमें मौजूद एल्कोहल को लेकर भी हमेशा चर्चाएं रहती है।

    उस कड़ी में हिसार के राजगढ़ रोड स्थित गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय के बायोटेक्नाेलाजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश आर. जांगड़ा और बाटनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका गुलाटी ने बायोटेक्नोलोजी के विभाग के पूर्व प्रो. डॉ. केएस नेहरा के मार्गदर्शन में वाइन को तैयार किया।

    10 फीसदी एल्कोहल कंटेंट है
    वाइन को तैयार करने के बाद डॉ. मुकेश जांगड़ा और डॉ. दीपिका गुलाटी ने इसका पेटेंट करवा लिया है। शौध में पूर्व प्राचार्य डॉ. विवेक कुमार सैनी ने अहम भूमिका निभाई । इस वाइन में 9 से 10 प्रतिशत तक एल्कोहल कंटेंट है। जामुन और आम से बनाई गई इस वाइन को शोधार्थियों ने जामरस नाम दिया है।

    कमाल की बात है कि यह शुगर फ्री वाइन है। इस वाइन एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर है तथा इसमें टैनिन की मात्रा कम रखी गई है, जिससे इसे पारंपरिक वाइन की तुलना में अधिक संतुलित बनाया जा सका है।

    महाविद्यालय के प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी और पूर्व प्राचार्य डॉ. विवेक कुमार सैनी ने भी शोध कार्य में सहयोग प्रदान किया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका ने बताया कि प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी जब प्रोफेसर पद पर नियुक्त थी तब से वह उन्हें शोध के लिए प्रेरित करती है।

    शोधकर्ताओं ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से वाइन निर्माण से जुड़े प्रयोग कराते रहे हैं। इसी दौरान बाजरा और अदरक जैसी विभिन्न चीजों से भी वाइन तैयार करने के प्रयोग किए गए, लेकिन उनका पेटेंट नहीं कराया गया। इस बार आम और जामुन के विभिन्न अनुपातों के साथ परीक्षण किया गया।

    जिसके बाद उन्होंने प्राकृतिक व स्वास्थ्य अनुकूल कम टैनिन व ज्यादा एंटीआक्सीडेंट से बनाने वाली वाइन के तरीके को पेटेंट करवा लिया । उन्होंने बताया कि वाइन निर्माण की प्रक्रिया जनवरी में शुरू की गई थी और मार्च तक उत्पाद तैयार हो गया। इसके बाद मई में पेटेंट के लिए आवेदन किया गया। करीब एक वर्ष की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस शोध को आधिकारिक रूप से पेटेंट प्राप्त हुआ है।

    केवल तीन प्राकृतिक अवयवों से तैयार की गई वाइन
    बाटनी विभाग की डॉ. दीपिका गुलाटी एवं बायोटेक्नोलाजी विभाग की डॉ. मुकेश जांगड़ा ने बताया कि ‘जामरस’ वाइन केवल आम, जामुन और यीस्ट की सहायता से तैयार की गई है।

    इसमें किसी प्रकार के कृत्रिम रसायन या हानिकारक संरक्षक का उपयोग नहीं किया गया। एंटीआक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाने और टैनिन की मात्रा कम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे ठंडे तापमान या रेफ्रिजरेटर में रखने से लंबे समय तक सुरक्षित किया जा सकता है। हालांकि बाहर रखने से यह खराब हो सकती है

    स्वास्थ्य के लिए भी है फायदेमंद
    फलों से तैयार इस वाइन में एंटीआक्सीडेंट गतिविधि अधिक है, जो शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाने में सहायक हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें जीरो शुगर और कम कैलोरी है, इसलिए इसे फलों से बने एक प्रकार के फर्मेटेड जूस के रूप में भी देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में सेवन रक्त संचार के लिए भी लाभकारी हो सकता है।

    बायोटेक्नोलाजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. केएस नेहरा ने बताया कि यह वाइन फ्रूट को फर्मेटेड करके फिल्टर किया जाता है।जिससें वाइन में फलों से मिलने वाले पोषण मौजूद रहते है।

    जो स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहता है । फिलहाल वाइन में 9 से 10 प्रतिशत एल्कोहल है पर भविष्य में इसे बढ़ा कर 13 प्रतिशत किया जाएगा । ताकि वाइन कमरे के तापमान में भी खराब ना हो ।

    महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजू चौधरी ने इस उपलब्धि पर डॉ. मुकेश आर. जांगड़ा, डॉ. दीपिका गुलाटी तथा उनके मार्गदर्शक पूर्व प्रो. डॉ. केएस नेहरा को हार्दिक बधाई दी।

    उन्होंने कहा कि जब वह इसी महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं, तभी से वे शिक्षकों को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती रही हैं।

    उन्होंने कहा कि यह पेटेंट उसी सतत शोध संस्कृति का परिणाम है, जिसे महाविद्यालय में वर्षों से प्रोत्साहित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय में सदैव कार्य करने वाले एवं नवाचार को अपनाने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाता है।

     

  • 278 मिमी बारिश के बाद भी प्यासा रामगढ़ बांध, अवैध निर्माणों पर अब चलेगा प्रशासन का बुलडोजर

    278 मिमी बारिश के बाद भी प्यासा रामगढ़ बांध, अवैध निर्माणों पर अब चलेगा प्रशासन का बुलडोजर

    जयपुर
    कभी मानसून की पहली फुहार के साथ सैलानियों से गुलजार रहने वाला रामगढ़ बांध इन दिनों एक अजीब विरोधाभास की तस्वीर पेश कर रहा है। एक तरफ अरावली की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर बांध की पाल अब भी पानी का इंतजार कर रही है। इस बीच, प्रशासन ने बांध के कैचमेंट और बहाव क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। रामगढ़ क्षेत्र में इस मानसून में अब तक 278 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। शुक्रवार को 26 मिमी बारिश भी हुई, लेकिन इसके बाद भी बांध प्यासा है।

    इधर, एक्शन की तैयारी
    रामगढ़ बांध के प्यासा रहने का सबसे बड़ा कारण इसके पानी के बहाव क्षेत्र में बने अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अनधिकृत एनिकेट्स हैं, जो बारिश के पानी को बांध तक पहुँचने से रोक रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन ने बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की तैयारी शुरू कर दी है।

    13 अगस्त को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले जिला प्रशासन ने जेडीए और संबंधित उपखंड अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिला कलक्टर के आदेश के बाद जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने भी बैठक कर रणनीति तैयार की है। संयुक्त सर्वेक्षण में बहाव क्षेत्र में कई अवैध निर्माण सामने आए हैं, जिनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

    क्यों खर्च किया जा रहा पैसा?
    करीब ढाई करोड़ रुपए की लागत से बांध की पाल और सड़क की मरम्मत का काम कराया गया है। इसके बावजूद यहां पर्यटन गतिविधियों को अब तक रफ्तार नहीं मिल सकी है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए साल 1982 में आरटीडीसी की ओर से यहां झील टूरिस्ट विलेज शुरू किया गया था। हालांकि, लगातार घाटे में चलने के कारण साल 2016 में इसे बंद कर दिया गया। इसे बंद हुए करीब एक दशक हो चुका है, लेकिन अब तक इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका है। ऐसे में मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यहां पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें धरातल पर ज्यादा असरदार नजर नहीं आ रही हैं।

    पानी नहीं, इसलिए सूनी है पाल
    बांध की पाल और आसपास के इलाके में इस बार मानसून की वह चहल-पहल दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले साल झरनों में करीब तीन महीने तक पानी बहता रहा था। बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने पहुंचते थे और पाल पर मेले जैसा माहौल रहता था। इस बार पहाड़ियों पर हरियाली तो लौटी है, लेकिन पानी नहीं आया।

  • दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन प्रहार, 72 घंटे में 390 चोरी के मोबाइल और 66 वाहन बरामद

    दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन प्रहार, 72 घंटे में 390 चोरी के मोबाइल और 66 वाहन बरामद

    नई दिल्ली
     नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत 72 घंटे में चोरी/झपटमारी के 390 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनकी कीमत करीब 1.5 करोड़ बताई गई है। इसके अलावा टीम ने इसी अभियान के दौरान चोरी के 66 टू वीलर, 19 अवैध हथियार, 21 चाकू और लगभग 62 लाख रुपये कीमत की सोने-चांदी की जूलरी बरामद की है।

    23 आरोपी गिरफ्तार
    इसके साथ ही दिल्ली में दर्ज अनेक आपराधिक मामलों का भी खुलासा किया है। अभियान के दौरान नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने 23 आरोपियों को पकड़ा है, जिनमें 2 नाबालिग भी शामिल हैं।

    मोबाइल रिसीवर नेटवर्क का भंडाफोड़
    डीसीपी नॉर्थ वेस्ट आकांक्षा यादव ने बताया कि एंटी-बर्गलरी सेल ने चोरी व झपटमारी के मोबाइल फोन का कारोबार करने वाले रिसीवर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में लगभग 12 लाख रुपये कीमत की सोने-चांदी की जूलरी, 65,000 नकद, वारदात में इस्तेमाल एक बाइक, 57 हजार के लोन के बदले गोल्ड लोन कंपनी जूलरी और चोरी/झपटमारी के 54 मोबाइल फोन बरामद किए।

    कई थाना क्षोत्रों में कार्रवाई
    इसके अलावा अशोक विहार, आदर्श नगर, मुखर्जी नगर और भारत नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब 1.5 करोड़ कीमत के चोरी व झपटमारी के 390 फोन, 62 लाख कीमत की जूलरी, चोरी की गाड़ियां और हथियार बरामद किए।

     

  • राजस्थान में कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस सख्त, श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन जारी

    राजस्थान में कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस सख्त, श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन जारी

    जयपुर
    सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा और धार्मिक पैदल यात्राओं को सुरक्षित व सुगम बनाने के लिए राजस्थान पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए राजस्थान पुलिस ने कांवड़ियों एवं पैदल यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश और 'सख्त हिदायत' जारी की है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि आस्था और भक्ति के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सके।

    'भक्ति की राह पर, सुरक्षा जरूरी'
    राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए श्रद्धालुओं से अपील करते हुए निम्नलिखित गाइडलाइंस का पालन करने का अनुरोध किया है-

    सही दिशा चुनें : सड़क पर चलते समय हमेशा दाहिनी (Right Side) तरफ ही चलें। इससे सामने से आ रहे वाहनों पर आपकी सीधी नजर रहेगी और आप समय रहते सतर्क होकर किसी भी हादसे से बच सकेंगे।

    सड़क पर न करें विश्राम: कांवड़िए या पैदल यात्री जब भी विश्राम करें, तो सड़क पर या सड़क के बिल्कुल किनारे रुकने के बजाय सड़क से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर ही आराम करें।

    अनावश्यक रास्ता अवरुद्ध न करें: यात्रा के दौरान या विश्राम करते समय मुख्य सड़क पर किसी प्रकार का अवरोध न पैदा करें, ताकि सामान्य यातायात बाधित न हो।

    यातायात नियमों का पालन: यातायात नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें और कांवड़ तथा पैदल यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाएं।

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
    राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हाईवे और प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। हालांकि, यात्रा को दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए यात्रियों का खुद सतर्क रहना और यातायात नियमों को अपनाना सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस ने सभी कांवड़ संघों और आयोजकों से भी इन हिदायतों का कड़ाई से पालन कराने का आग्रह किया है।

  • दानापुर कोर्ट का बड़ा फैसला, पति की हत्या के दोषी पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद

    दानापुर कोर्ट का बड़ा फैसला, पति की हत्या के दोषी पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद

      दानापुर
    बिहार के दानापुर व्यवहार न्यायालय ने चंदन हत्याकांड में आरोपित पत्नी अनिशा कुमारी व उसके प्रेमी पप्पू कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों आरोपितों पर 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एडीजे-1 कुमार गुंजन ने जुर्माने की राशि चंदन के पिता को देने का आदेश दिया है। वहीं साक्ष्य के अभाव में आरोपित बीवी के पिता उमेर यादव और भाई भीम यादव को पहले ही बरी कर दिया गया था। नौबतपुर के रेगनियाबा गांव निवासी चंदन की वर्ष 2014 में हत्या हुई थी।

    मृतक के पिता के बयान पर दर्ज कांड में अदालत का फैसला आया है। बताया जाता है कि चंदन कुमार की शादी वर्ष 2008 में दुल्हिन बाजार के सिंघाड़ कोपा निवासी उमेर यादव की पुत्री अनिशा के साथ हुई थी। शादी के बाद दोनों के बीच कुछ दिनों तक सबकुछ ठीक रहा। लेकिन, कुछ दिनों के बाद ही उनके रिश्ते में खटास आ गई। अनिशा का अवगिला, नौबतपुर निवासी पप्पू कुमार के साथ प्रेम संबंध होने की बात सामने आ गई। अनिशा और पप्पू के बीच पहले से जान पहचान थी। दोनों छिप-छिपकर मिलते थे। शादी के बाद अनिशा बागी हो गई। उसने पप्पू को छोड़ना स्वीकार नहीं किया।

    दोनों को आपत्तिजनक हालत में पति ने देख लिया था
    बताया जाता है कि पति अपनी पत्नी के व्यवहार से काफी दुखी था। आरोप लगाया गया कि चंदन ने अपनी पत्नी को पप्पू कुमार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। उसने इसकी जानकारी अपने पिता सुदर्शन प्रसाद को दी तो परिवार में हड़कंप मच गया। चंदन ने जब इस संबंध का विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। मामले में पंचायत भी हुई थी। दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत करा दिया गया।

    पंचायत के बाद मार दिया
    इस मामले के एपीपी ने बताया कि 13 जुलाई 2014 को मामले को लेकर दोनों के बीच समझौता हुआ था। पप्पू तैयार हो गया था कि वह अनिशा से कोई संबंध नहीं रखेगा। लेकिन, इसके अगले दिन 14 जुलाई 2014 को चंदन की हत्या हो गई। पिता सुदर्शन प्रसाद ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि अनिशा ने अपने प्रेमी पप्पू कुमार समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर चंदन के साथ मारपीट की और उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना को आत्महत्या का रूप देने की भी कोशिश की गयी। कमरे में बाहर से ताला लगा कर दोनों फरार हो गए थे। बेटे की मौत की जानकारी मिलने सुदर्शन प्रसाद ने पूरी बात पुलिस को बताई। नौबतपुर थाने में उन्होंने अपनी बहू अनिशा देवी, पप्पू कुमार, उमेर यादव और भीम यादव के खिलाफ हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस अनुसंधान में दोनों पर लगाए गए आरोप सत्य पाए गए।