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  • दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में पायलट पर हमला, इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में पायलट पर हमला, इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

     तेल अवीव
     दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी सह-पायलट द्वारा कैप्टन मच्छर पर जानलेवा हमले की जांच के दौरान इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में आने वाले विदेशी विमानों के पायलटों की बैकग्राउंड चेक करना उसका काम नहीं है, ऐसी उड़ानें कभी भी 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं हो सकतीं

    इजरायली ब्राडकास्टर कान के अनुसार, परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने कहा कि चालक दल के सदस्यों की पहचान और उनकी जांच करने का काम सुरक्षा अधिकारियों का है, न कि परिवहन मंत्रालय का। मंत्रालय के सुरक्षा विभाग ने मीडिया को बताया कि विदेशों में उनके अपने कर्मचारी तैनात नहीं होते जो हर व्यक्ति की जांच कर सकें।

    विभाग के एक प्रतिनिधि के अनुसार, सुरक्षा के मामले में कुछ भी 100 प्रतिशत तय नहीं होता और मंत्रालय यह गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी या विदेशी एयरलाइनों की उड़ानें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।

    इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के आरोप
    इजरायली मीडिया आउटलेट चैनल 12 के अनुसार, इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट पर उन देशों के पायलटों के प्रवेश पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।

    अब्राहम समझौते के तहत ऐसे देशों के पायलटों के इजरायल में उड़ान भरने पर प्रतिबंध है जिन्होंने यहूदियों के देश को औपचारिक मान्यता नहीं दी है।

    ओमान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी जांच में यह खुलासा हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलट फ्लाईदुबई की उड़ानों से तेल अवीव आ चुके थे, क्योंकि इजरायल ने इसकी निगरानी का जिम्मा खुद संभालने के बजाय एयरलाइनों के भरोसे छोड़ दिया था।

    फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हवा में क्या हुआ था?
    दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने भारतीय मूल के मुख्य कैप्टन स्मित मछार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। विमान पर कब्जा करने की कोशिश के दौरान बोइंग 737 विमान 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया था।

    आवाज सुनकर यात्रियों और केबिन क्रू ने कॉकपिट में घुसकर आरोपी सह-पायलट पर काबू पाया। इसके बाद उसी विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दूसरे पायलटों ने 170 से अधिक यात्रियों और चालक दल से भरे विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस मामले की आतंकी हमले के रूप में जांच कर रहा है।

  • UP में EV चार्जिंग की टेंशन खत्म! 238 जगहों पर बनेंगे नए चार्जिंग स्टेशन, नोएडा-लखनऊ समेत कई शहर शामिल

    UP में EV चार्जिंग की टेंशन खत्म! 238 जगहों पर बनेंगे नए चार्जिंग स्टेशन, नोएडा-लखनऊ समेत कई शहर शामिल

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग की टेंशन खत्म होने वाली है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश में 238 स्थानों पर नए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत यूपी रिन्यूएबल एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी (यूपीआरईवी) चार्जिंग स्टेशन विकसित कर रहा है। योजना के मौजूदा चरण में 238 स्थान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 139 स्थानों पर समझौता ज्ञापन लंबित है।

    एनसीआर में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में 39, गाजियाबाद में 6 और मेरठ में 35 स्थान चार्जिंग स्टेशन होंगे। गैर-एनसीआर क्षेत्र में आगरा 21, प्रयागराज 13, गोरखपुर 32, कानपुर 12, कानपुर देहात 2, लखनऊ 36, मथुरा 14 और वाराणसी 28 स्थान प्रस्तावित हैं। कुल 238 स्वीकृत स्थानों में 99 पर समझौता ज्ञापन हो चुके हैं।

    दूसरे चरण में 1500 स्थानों का रखा गया लक्ष्य
    चार्जिंग स्टेशन लगाने के दूसरे चरण में एनसीआर के आठ जिलों और माल परिवहन गलियारे को ध्यान में रखते हुए कुल 1,500 स्थानों का लक्ष्य रखा गया है। इनमें नगर निगमों, यूपी रोडवेज, परिवहन विभाग, विद्युत वितरण कंपनियों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों समेत विभिन्न विभागों के स्थान शामिल हैं। इसके तहत अब तक 240 स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 1,260 स्थानों की पहचान की जानी है। दूसरे चरण के तहत नगर निगम क्षेत्रों के लिए कुल 129 स्थान चिह्नित हैं। अलीगढ़ 22, अयोध्या 13, बरेली 16, फिरोजाबाद 15, झांसी 16, मुरादाबाद 7, सहारनपुर 5, शाहजहांपुर 10, आगरा 8, कानपुर नगर 11, मेरठ 5 तथा कानपुर देहात का एक स्थान शामिल है। इसके अलावा रोडवेज के लिए 74, गीडा के लिए 10 और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 26 स्थानों की पहचान की गई है।

    मुख्य सचिव ने सभी डीएम को दिए आदेश
    चार्जिंग स्टेशन लगाने की इस योजना में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक पार्कों, विश्वविद्यालयों, गन्ना संस्थान केंद्रों, मंडी समितियों तथा जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन और तहसील कार्यालयों जैसे स्थानों को भी शामिल किया गया है। प्रस्तावित सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में 60 किलोवाट क्षमता के दो डीसी चार्जर और 12 किलोवाट क्षमता के एक एसी/डीसी चार्जर की व्यवस्था होगी। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थलों, बड़े कार्यालयों, बस स्टेशनों, इंडस्ट्रियल पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मॉल, ढाबों, पार्किंग स्थलों पर स्थान चिह्नित कर जल्द से जल्द सूचना भेजें।

  • चुनाव आयोग विवाद पर शिवराज का कांग्रेस पर हमला, बोले- हारने पर ECI को बदनाम करना पुरानी आदत

    चुनाव आयोग विवाद पर शिवराज का कांग्रेस पर हमला, बोले- हारने पर ECI को बदनाम करना पुरानी आदत

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ विवाद थमने का नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मामले में अपनी सफाई देने में लगे हैं। इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है।

    जनादेश का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत
    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हारने पर जनादेश का अपमान करना, यह कांग्रेस की पुरानी आदत है, कांग्रेस के डीएनए में है। भारत दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र है और दुनिया उदाहरण देती है भारत के लोकतंत्र की। लेकिन लोकतंत्र का अपमान करना, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना, चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना, जनता के जनादेश का अपमान करना, यह कांग्रेस के डीएनए में है।

    कांग्रेस चुनाव जीत जाए तो ECI ठीक नहीं तो…
    उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी जी के इशारे पर मल्लिकार्जुन खरगे जी ने प्रधानमंत्री जी को, गृह मंत्री जी को अवैध कहा। यह लोकतंत्र का अपमान है, यह जनादेश का अपमान है, यह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना है, यह लोकतंत्र के प्रति अनास्था पैदा करना है, यह देश में अराजकता फैलाने का प्रयास है। यह कैसी बात करती है कांग्रेस? कांग्रेस चुनाव जीत जाए तो चुनाव आयोग ठीक, और हार जाए तो चुनाव आयोग खराब।

    1980-1990 में हुए चुनावों का किया जिक्र
    केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस कहती है कि मतपत्रों (बैलेट पेपर) के आधार पर चुनाव हो। याद कीजिए 80 और 90 का वह दशक जब बूथ लूट लिए जाते थे, एक व्यक्ति ठप्पा लगा देता था मतपत्रों पर। क्या कांग्रेस उसी दौर में देश को ले जाना चाहती है? टेक्नोलॉजी, जिसके कारण पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनाव होते हैं। आखिर उसका विरोध कांग्रेस क्यों करना चाहती है? लोकतंत्र को कमजोर करने का पाप नहीं कर रही, पहले भी कर चुकी है आपातकाल लगाकर।

  • भिलाई नगर निगम की अनूठी पहल: जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए तैयार होगी एकीकृत योजना

    भिलाई नगर निगम की अनूठी पहल: जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए तैयार होगी एकीकृत योजना

    भिलाई
     जलभराव, जल निकासी और भूजल संरक्षण की समस्याओं से निपटने के लिए भिलाई नगर निगम एकीकृत शहरी जल प्रबंधन योजना तैयार कर रहा है। इसमें ड्रेनेज, वर्षाजल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, पेयजल, सीवरेज और जल गुणवत्ता को एक साथ शामिल किया जाएगा। जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे और फील्ड डेटा के आधार पर शहर की जल संरचनाओं और निकासी व्यवस्था का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। इससे जलभराव वाले क्षेत्रों और उनके कारणों की पहचान कर सुधार कार्यों की प्राथमिकता तय की जा सकेगी।

    80 वर्ग किमी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे
    योजना के तहत 75 से 80 वर्ग किमी क्षेत्र और करीब 350 किमी सड़क व ड्रेनेज कॉरिडोर का ड्रोन सर्वे प्रस्तावित है। सर्वे के आंकड़ों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर शहर के जल प्रबंधन की एकीकृत तस्वीर तैयार की जाएगी।

    पेयजल-सीवरेज की भी होगी निगरानी
    जीआईएस मैपिंग से पेयजल लाइनों और सीवरेज के संभावित क्रॉस-कनेक्शन, लीकेज और संदूषण वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। 24 चिह्नित बोरवेल सहित चयनित स्थानों से पानी के नमूनों की जांच भी कराई जाएगी।

    जलभराव वाले स्थानों की होगी जियो-टैगिंग
    जलभराव वाले क्षेत्रों की जियो-टैगिंग कर ड्रेनेज क्षमता, रुकावट, अतिक्रमण और निकासी में आने वाली बाधाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके आधार पर सुधार कार्यों की योजना तैयार की जाएगी।

    बारिश का पानी जमीन में उतारने पर जोर
    नगर निगम बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज वेल और रिचार्ज पिट विकसित करने की संभावनाएं तलाशेगा। उपयुक्त स्थानों पर ऐसी संरचनाएं बनाकर बारिश के पानी को सीधे नालियों में बहने से रोका जाएगा। इससे वर्षाजल का उपयोग भूजल रिचार्ज में होगा और भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

    नगर निगम आयुक्त सुरुचि सिंह के मुताबिक, जलापूर्ति, ड्रेनेज, वर्षाजल, भूजल, सीवरेज और जल गुणवत्ता को एकीकृत रूप से देखने की जरूरत है। जीआईएस, ड्रोन सर्वे और फील्ड डेटा से तैयार डिजिटल डेटाबेस के आधार पर समस्याओं की पहचान कर प्राथमिकता के साथ समाधान की योजना बनाई जा सकेगी।

  • भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर कांग्रेस का आंदोलन का ऐलान, जांच रिपोर्ट को बताया ‘लीपापोती’

    भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर कांग्रेस का आंदोलन का ऐलान, जांच रिपोर्ट को बताया ‘लीपापोती’

    इंदौर.

    इंदौर के भागीरथपुरा में हुए दूषित पानी कांड को लेकर सियासत और संवेदनाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासन की बहुचर्चित जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रविवार को कांग्रेस पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आई।

    सुबह 10 बजे से ही शहर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने उनके बीच पहुंच गए। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह प्रभावितों की राय और उनके दर्द के आधार पर ही सरकार के खिलाफ एक बड़े और चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।

    मृतक जीवनलाल के परिवार से मिले कांग्रेसी
    शुक्रवार रात को शहर कांग्रेस की अहम बैठक में यह तय हुआ था कि पार्टी का हर नेता सीधे पीड़ितों से जाकर मिलेगा। इसी कड़ी में रविवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में टीम ने घर-घर जाकर दस्तक दी। जनसंपर्क की शुरुआत सबसे पहले इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले जीवनलाल के घर से की गई। इसके बाद नेताओं ने भागीरथपुरा के अन्य प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात कर उनकी वर्तमान स्थिति, शिकायतें और प्रशासन की जांच रिपोर्ट को लेकर उनके मन की बात जानी।

    30 साल की लापरवाही की जांच रिपोर्ट में खुली परतें
    भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से बीमारी और मौतों के मामले में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने व्यवस्था की लंबी चूक को उजागर किया है। बुधवार को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुई रिपोर्ट के मुताबिक, यह संकट किसी एक अधिकारी की गलती से पैदा नहीं हुआ, बल्कि करीब तीन दशक में सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी कई खामियां, निगरानी की कमी, शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई न होना और पाइपलाइन बदलने में हुई लंबी देरी धीरे-धीरे जमा होती गईं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सीवर और पेयजल लाइनों की तकनीकी स्थिति से लेकर नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया तक कई स्तरों पर कमियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा में दूषित पानी का खतरा दिसंबर 2025 में अचानक पैदा नहीं हुआ था, बल्कि पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था में मौजूद तकनीकी जोखिम लंबे समय से बने हुए थे।

    कई जगह सीवर लाइन पानी की पाइपलाइन के ऊपर
    जांच में सामने आया कि भागीरथपुरा में सीवर नेटवर्क 1990 से 1995 के बीच और जलापूर्ति पाइपलाइन 1999 से 2004 के बीच बिछाई गई थी। कई स्थानों पर दोनों नेटवर्क समानांतर, जबकि कुछ जगह एक-दूसरे को क्रॉस कर रहे थे। आयोग ने पाया कि दोनों लाइनों के बीच निर्धारित दूरी भी कई स्थानों पर नहीं थी। कुछ जगह सीवर लाइन पेयजल पाइपलाइन के ऊपर तक थी। आयोग ने इस स्थिति को दूषित पानी के पेयजल नेटवर्क में प्रवेश के लिए गंभीर तकनीकी जोखिम माना है। यानी जिस नेटवर्क से लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा था, उसमें संक्रमण का खतरा पाइपलाइन बिछाए जाने के समय से ही मौजूद था।

    शिकायतें आती रहीं, व्यवस्था कमजोर रही
    आयोग के समक्ष अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बयानों में पाइपलाइन लीकेज, खराबी और पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतों का उल्लेख हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जलापूर्ति नेटवर्क की पर्याप्त मैपिंग, संवेदनशील स्थानों की पहचान, लीकेज की निगरानी और समय पर मरम्मत की व्यवस्था प्रभावी नहीं थी। आयोग ने इसे महज तकनीकी समस्या न मानते हुए संस्थागत स्तर की विफलता भी माना है।

    चार साल में पूरा हुआ पाइप बदलने का काम 
    पुरानी पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई, लेकिन टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगातार देरी होती रही। आयोग ने अलग-अलग चरणों में हुई देरी का ब्योरा भी रिपोर्ट में दर्ज किया है।

    पहले टेंडर में—
    टेंडर जारी करने में – 39 दिन की देरी
    एमआइसी स्तर पर निर्णय में – 63 दिन
    अनुबंध प्रक्रिया में करीब – 94 दिन
    काम पूरा करने की निर्धारित समयसीमा – मई 2024
    वास्तविक पूर्णता – जनवरी 2026

    आयोग के आकलन के मुताबिक, विभिन्न चरणों की देरी को मिलाकर असामान्य विलंब 859 दिन से अधिक रहा। रिपोर्ट में टेंडर शाखा, इंजीनियरिंग अधिकारियों, प्रशासनिक स्तर, पर्यवेक्षण व्यवस्था और ठेकेदार की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा की गई है।

    126 दिन बाद तय हुआ कि टेंडर फिर से होगा
    दूसरे टेंडर की वित्तीय बोली 22 अगस्त 2024 को खोली गई थी। इसके बाद दोबारा टेंडर कराने की सिफारिश 26 दिसंबर 2024 को की गई। यानी इस निर्णय तक पहुंचने में करीब 126 दिन लग गए। इसके बाद तीसरे टेंडर में भी प्रक्रिया तेज नहीं हुई। तकनीकी और वित्तीय बोली की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला टेंडर समिति के समक्ष रखने में करीब 94 दिन लगे। इस तरह तीन टेंडर और सैकड़ों दिनों की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद पाइपलाइन जनवरी 2026 में बदली जा सकी, जबकि मूल रूप से काम मई 2024 तक पूरा होना था।

    पुराने रिकॉर्ड नहीं मिले, जांच में आई मुश्किल
    जांच आयोग को पुराने सीवर और जलापूर्ति नेटवर्क से संबंधित मूल नक्शे, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका, निरीक्षण रिकॉर्ड और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए जा सके। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण यह तय करना मुश्किल रहा कि मूल निर्माण के दौरान किस स्तर पर और किस प्रकार की चूक हुई थी।

    कई अधिकारियों और महापौर परिषद को क्लीनचीट
    रिपोर्ट में तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा, तत्कालीन निगमायुक्त एवं वर्तमान पर्यटन विभाग के एमडी दिलीप यादव तथा तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल को क्लीनचीट दी गई है। इसके अलावा तत्कालीन अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा, अपर आयुक्त सिद्धार्थ जैन और अभिषेक गेहलोत को भी जांच में क्लीनचीट मिली है। आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों के कार्यकाल में पानी की पाइपलाइन बिछाने के काम में कोई देरी सामने नहीं आई। महापौर और महापौर परिषद को भी आयोग ने क्लीनचीट दी है।

    दो अपर आयुक्त और इंजीनियर पर लापरवाही की टिप्पणी
    आयोग ने तत्कालीन अपर आयुक्त भव्या मित्तल और रोहित सिसोनिया को लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना है। वहीं, तत्कालीन नर्मदा प्रोजेक्ट प्रभारी कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर 2025 को रोहित सिसोनिया ने भागीरथपुरा के टेंडर के संबंध में संजीव श्रीवास्तव को चर्चा करने के लिए लिखा था, लेकिन इस पर 26 दिसंबर को चर्चा हुई। आयोग ने इसे करीब 72 दिन की देरी माना। रिपोर्ट में कहा गया है कि संजीव श्रीवास्तव की ओर से अनावश्यक देरी हुई, जबकि रोहित सिसोनिया ने मामले की पर्याप्त निगरानी नहीं की। भव्या मित्तल के कार्यकाल में भी टेंडर फाइल में देरी का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

    मृतकों के स्वजन को 10 लाख रुपये मुआवजे की अनुशंसा
    न्यायिक जांच आयोग ने दूषित पानी के कारण जान गंवाने वाले लोगों के स्वजन को 10-10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने की अनुशंसा की है। फिलहाल मृतकों के स्वजन को रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से दो-दो लाख रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है।

  • पाकिस्तान क्रिकेट टीम का चीफ सेलेक्टर बनने की खबरों पर शोएब अख्तर का बड़ा बयान

    पाकिस्तान क्रिकेट टीम का चीफ सेलेक्टर बनने की खबरों पर शोएब अख्तर का बड़ा बयान

    नई दिल्ली
     पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इंग्लैंड के हाथों टेस्ट सीरीज में 0-3 से करारी शिकस्त झेलने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के कोचिंग और सेलेक्शन सेट-अप में बड़े बदलावों की चर्चाएं तेज थीं। मीडिया में यह दावों के साथ कहा जा रहा था कि रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को पाकिस्तान का नया चीफ सेलेक्टर बनाया जा सकता है। हालांकि, अब खुद शोएब अख्तर ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पीसीबी में किसी भी पद पर शामिल होने की कोई दिलचस्पी नहीं है।

    अम्मी ने कहा- बोर्ड और राजनीति से रहूंगा दूर
    एक टीवी चैनल पर सीधे पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अख्तर ने अपनी पुरानी बात को याद किया। जब एंकर ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने कभी कहा था कि उनकी मां ने उन्हें पीसीबी और पाकिस्तानी राजनीति से दूर रहने की हिदायत दी थी तो अख्तर ने रुख साफ करते हुए कहा, 'इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है यह सब सिर्फ अटकलें हैं। मैं अपनी बात पर कायम हूं और अपनी अम्मी की दी हुई उसी सलाह का पालन करूंगा।'

    चीफ सेलेक्टर बनने की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं
    शोएब अख्तर ने पीसीबी का मुख्य चयनकर्ता बनने के दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, 'मेरी पीसीबी में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने को लेकर जो खबरें सुनने को मिल रही हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं। इन दावों में दूर-दूर तक कोई सच्चाई नहीं है। मैं बस इतना चाहता हूं कि पाकिस्तान क्रिकेट का भला हो।' उन्होंने यह भी साफ किया कि वह फिलहाल एक निजी दौरे पर ह्यूस्टन में हैं और उनकी बोर्ड चेयरमैन मोहसिन नकवी से इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है।

    देश के लिए योगदान देने के कई और रास्ते
    पाकिस्तान के लिए 46 टेस्ट, 163 वनडे और 15 टी20 मैच खेलने वाले इस दिग्गज तेज गेंदबाज का मानना है कि देश के क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए किसी आधिकारिक पद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने देश के क्रिकेट की सेवा करना पसंद करूंगा लेकिन मुझे लगता है कि मैं इसे बिना बोर्ड में शामिल हुए अन्य कई तरीकों से भी कर सकता हूं।'

     

  • रायपुर में AGRATHON 4.0 का जोश, देशभर से पहुंचे धावकों ने लगाई दौड़

    रायपुर में AGRATHON 4.0 का जोश, देशभर से पहुंचे धावकों ने लगाई दौड़

    रायपुर.

    राजधानी रायपुर में रविवार को सर्वसमाज के लिए AGRATHON 4.0 – “Vande Mataram – Run For Nation” का आयोजन किया गया. अग्रवाल सभा रायपुर एवं अग्रवाल युवा मंडल रायपुर की ओर से आयोजित इस मैराथन में करीब 3500 से 4000 लोगों ने हिस्सा लिया.

    राष्ट्रप्रेम, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता के संदेश के साथ आयोजित इस दौड़ में युवाओं के साथ महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया. AGRATHON में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, नोएडा सहित देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी पहुंचे. सुबह से ही मरीन ड्राइव पर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे और पूरा परिसर उत्साह से सराबोर नजर आया. दौड़ की शुरुआत तेलीबांधा तालाब परिसर स्थित मरीन ड्राइव से सुबह करीब 6 बजे हुई. प्रतिभागी खालसा स्कूल से होते हुए केनाल रोड पहुंचे और निर्धारित मार्ग से वापस तेलीबांधा तालाब स्थित मरीन ड्राइव पहुंचे. आयोजन में विजेताओं के लिए विभिन्न पुरस्कार भी रखे गए.
    कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. वहीं रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, बेमेतरा SP-IPS त्रिलोकी बंसल सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सहयोगी संस्थानों और स्वयंसेवकों का भी विशेष योगदान रहा.

    इस अवसर पर अग्रवाल सभा रायपुर के अध्यक्ष विजय अग्रवाल ने कहा कि इस बार सर्वसमाज के लिए AGRATHON – “Vande Mataram – Run For Nation” थीम पर आयोजन किया गया है. इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे. अग्रवाल युवा मंडल के अध्यक्ष CA सौरभ अग्रवाल ने कहा कि कई वर्षों से AGRATHON दौड़ का आयोजन किया जा रहा है. इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इसमें शामिल होने पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार की दौड़ बेहद खास और ऐतिहासिक होने वाली है. इस अवसर पर My Bharat की ओर से अग्रवाल युवा मंडल का सम्मान भी किया गया. आयोजन में समाज एवं युवा मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई.

    मीडिया प्रभारी उदित अग्रवाल ने कहा कि AGRATHON 4.0 को मिली प्रतिक्रिया से यह साबित हुआ है कि स्वास्थ्य, राष्ट्रप्रेम और समाजहित जैसे उद्देश्यों के लिए पूरा समाज एकजुट होकर आगे आ सकता है. देश के विभिन्न राज्यों से लोगों का रायपुर पहुंचकर आयोजन में शामिल होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि AGRATHON अब केवल रायपुर तक सीमित आयोजन नहीं रहा, बल्कि देशभर के लोगों को जोड़ने वाला मंच बन रहा है. कार्यक्रम में मनमोहन अग्रवाल, रेमचंद अग्रवाल, किसन अग्रवाल, जे.पी. अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, संजय चौधरी, संजय अग्रवाल, राजेश हैलीवाल, शैलेश अग्रवाल, राम अग्रवाल, दीपक गुप्ता सहित अग्रवाल समाज एवं युवा मंडल के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

  • यूक्रेन ने की भारत के युद्धविराम प्रस्ताव की पुष्टि, विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने की तारीफ

    यूक्रेन ने की भारत के युद्धविराम प्रस्ताव की पुष्टि, विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने की तारीफ

    कीव
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में भारत ने यु्द्धविराम का प्रस्ताव दिया है। पिछले लगभग साढ़े चार साल से रूस के साथ उलझे यूक्रेन ने भी इस प्रस्ताव के मिलने की पुष्टि की है। जेलेंस्की के खास और यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत द्वारा दिए गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को सबसे सही और व्यापक करार दिया है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस बात का जिक्र किया था कि पीएम मोदी लगातार युद्ध को खत्म करने की बात करते हैं।

    यूरोपियन प्रावदा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युद्धविराम के लिए उन्हें चार देशों से प्रस्ताव मिले हैं। इसमें भारत, तुर्किए, मिस्त्र और अमेरिका से युद्धविराम प्रस्ताव मिले हैं। इसमें से भारत का प्रस्ताव 'सबसे व्यापक' है। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि वह इन सभी प्रस्तावों पर अलग-अलग तरीकों से विचार करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, प्रमुख रूप से युद्धविराम तभी हो पाएगा, जब इसमें एनर्जी सेंटरों और पोर्ट्स पर हमलों को बंद करना और काला सागर की स्थिति को भी शामिल किया जाएगा।

    यूक्रेनी विदेश मंत्री ने भारत के प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक
    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस पूरे मामले में भारत के प्रस्ताव को सबसे व्यापक करार दिया। उन्होंने कहा, "हमें जो चार प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। हम एनर्जी सेक्टर और ब्लैक सी (काला सागर) से जुड़े युद्धविराम के लिए तैयार हैं। लेकिन इसी संयोजन में। यह पूरी तरह से ऊर्जा से जुड़ा युद्धविराम होना चाहिए, इसमें बंदरगाह के इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित सभी एनर्जी सेंटरों पर हमलों को रोका जाए।

    उन्होंने तुर्किए और मिस्त्र द्वारा आए प्रस्ताव पर भी बात की। सिबिहा ने कहा कि तुर्की और मिस्र ने भी ऐसे ही प्रस्ताव दिए हैं, जिनमें यूक्रेन से अनाज का एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने के लिए ब्लैक सी में युद्धविराम का सुझाव दिया गया था। इसके अलावा अमेरिका का प्रस्ताव इस बात पर जोर देता है कि यूक्रेन और रूस एनर्जी से जुड़े युद्धविराम पर सहमत हों।

    जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के लिए तैयार यूक्रेन- सिबिहा
    यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली बैठक का नतीजा युद्धविराम भी हो सकता है। यूक्रेन इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के नतीजों में से युद्धविराम एक हो सकता है। हम युद्धविराम के अलग-अलग तरीकों के लिए तैयार हैं, जिसमें कॉन्टैक्ट लाइन पर बिना किसी शर्त वाला युद्धविराम भी शामिल है।"

    रूस और यूक्रेन युद्ध खत्म कराने पर जोर देता रहा है भारत
    भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि रूस और यूक्रेन का युद्ध जल्द से जल्द बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाए। इसके अलावा भारत शुरुआत से ही दोनों पक्षों से भी इस बात को कहता हुआ आया है कि वह युद्ध खत्म करने में मदद करने को तैयार है। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि इस युद्ध का असर खाने-पीने की चीजों, ईंधन और फर्टिलाइजर की सुरक्षा पर पड़ा है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों पर।

    आंद्री सिबिहा की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन ने भी शांति को लेकर पीएम मोदी के विचारों की तारीफ की थी। एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी हर मुलाकात के दौरान युक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने कहा, "वह इस मामले में गहरी दिलचस्पी लेते हैं और उनके पास आपसी सहमति वाले समाधान खोजने के लिए बेहतरीन विचार हैं। इस लिहाज से, निश्चित रूप से निष्पक्ष रुख अपनाते हैं और साथ ही संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

  • पायलट स्मित मछार की बहादुरी पर कांग्रेस की चुप्पी, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने उठाए सवाल

    पायलट स्मित मछार की बहादुरी पर कांग्रेस की चुप्पी, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली
    दुबई से इजरायल जा रहे विमान में को-पायलट के हमले के दौरान यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मछार की बहादुरी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है. राजनेता से लेकर फिल्म स्टार तक, हर कोई उनकी सराहना कर रहा है. लेकिन अब इस मामले ने सियासी मोड़ ले लिया है. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले में कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाया है.

    बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को इस बहादुरी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और यूपी कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव पर भी निशाना साधा.

    बीजेपी सासंद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी पर अपना रुख साफ करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मछार ने अद्भुत वीरता दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली.

    शीर्ष नेतृत्व चुप क्यों?
    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सीधे सवाल किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक कैप्टन स्मित मछार के बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं कहा. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने अतीत में जाकिर नाइक, अफजल गुरु, बुरहान वानी और याकूब मेमम को लेकर अलग-अलग टिप्पणियां की थी और बाटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे. उन्होंने सवाल किया कि वे अब कैप्टन स्मित मछार की वीरता पर चुप क्यों हैं.

    बीजेपी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में जवाब मांगा है. इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव पर भी निशाना साधा है.

    उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कि उत्तर प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी.

  • न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं तीन खिलाड़ी, टीम इंडिया में होगी सीनियर्स की वापसी

    न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं तीन खिलाड़ी, टीम इंडिया में होगी सीनियर्स की वापसी

    नई दिल्ली
    वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की वनडे सीरीज खेलने की तैयारी में जुट गई है। हालांकि, न्यूजीलैंड दौरे से पहले भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज भी खेलनी है। सीनियर खिलाड़ियों की वापसी और स्क्वाड के समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में शामिल रहे कम से कम 3 खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इनमें से ज्यादातर खिलाड़ी बैकअप के रूप में टीम में शामिल किए गए थे।

    अंशुल कंबोज
    उभरते हुए तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को प्रसिद्ध कृष्णा के चोटिल होने के बाद टीम में जगह मिली थी। तीसरे वनडे में कंबोज को डेब्यू का मौका तो मिला, लेकिन वे गेंद से कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। न्यूजीलैंड सीरीज तक प्रसिद्ध कृष्णा के फिट होकर लौटने की उम्मीद है, जिसके बाद कंबोज को बाहर बैठना पड़ सकता है।

    नमन धीर
    स्पिन ऑलराउंडर नमन धीर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मिला-जुला और औसत प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान वॉशिंगटन सुंदर की वनडे टीम में वापसी तय मानी जा रही है। सुंदर के आते ही नमन धीर को ऑलराउंडर स्लॉट से बाहर होना पड़ेगा।