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  • Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा व्रत, जानें पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

    Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा व्रत, जानें पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

     हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से पूरे दिन व्रत रखती हैं. करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ पूरा होता है.

    साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. कई जगह इसे करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.

    2026 में कब है करवा चौथ?
    इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की रात करीब 1:06 बजे शुरू होकर रात 10:09 बजे तक रहेगी.

    करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती है. इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं. शाम को करवा चौथ की पूजा और कथा होती है. रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है.

    करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
    दिल्ली के अनुसार 2026 में करवा चौथ की पूजा के लिए शुभ समय:
    पूजा मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक
    व्रत अवधि: सूर्योदय से चंद्रोदय तक
    चंद्रोदय: रात करीब 8:17 बजे

    ध्यान रखें कि चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग हो सकता है. इसलिए व्रत खोलने के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय समय को देखना बेहतर रहेगा.

    अलग-अलग शहरों में कब निकलेगा चांद?
    करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का समय शहर के अनुसार बदलता है. 29 अक्टूबर 2026 के लिए प्रमुख शहरों में चंद्रोदय लगभग इस समय बताया गया है:

    दिल्ली: रात 8:17 बजे
    चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
    लखनऊ: रात 8:06 बजे
    जयपुर: रात 8:28 बजे
    मुंबई: रात 9:00 बजे
    पुणे: रात 8:58 बजे
    अहमदाबाद: रात 8:52 बजे
    हैदराबाद: रात 8:41 बजे
    बेंगलुरु: रात 8:55 बजे
    चेन्नई: रात 8:44 बजे
    कोलकाता: रात 7:47 बजे

    ये समय स्थानीय शहर के अनुसार हैं, अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

    करवा चौथ पर क्यों रखा जाता है व्रत?
    करवा चौथ को पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ा पर्व माना जाता है. परंपरा के अनुसार महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं.

    इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में है. शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं.

    करवा चौथ की पूजा में किन चीजों की जरूरत होती है?
    पूजा की तैयारी पहले से कर लेना अच्छा माना जाता है. करवा चौथ की पूजा की थाली में आमतौर पर ये चीजें रखी जाती हैं:

    मिट्टी का करवा
    पानी
    दीपक और रूई की बत्ती
    रोली और अक्षत
    सिंदूर
    फूल
    मिठाई
    फल
    धूप और अगरबत्ती
    छलनी
    पूजा की थाली
    चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल

    करवा यानी मिट्टी के पात्र का इस व्रत में विशेष महत्व माना जाता है. इसी वजह से इस दिन को करक चतुर्थी भी कहा जाता है.

    सरगी क्या होती है और इसे कब खाया जाता है?
    करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाए जाने वाले भोजन को सरगी कहा जाता है. परंपरागत रूप से सास अपनी बहू को सरगी देती हैं. इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, सेवईं और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं.

    सरगी का उद्देश्य सूर्योदय से पहले शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और तरल पदार्थ उपलब्ध कराना होता है, क्योंकि इसके बाद पूरे दिन व्रत रखा जाता है.

    करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
    शाम को स्नान करके साफ कपड़े पहनें, पूजा स्थल तैयार करें. वहां करवा चौथ की पूजा सामग्री रखें. भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करें. इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें.

    कथा के बाद करवा और पूजा की अन्य सामग्री का विधि-विधान से पूजन किया जाता है. रात में चंद्रमा निकलने का इंतजार किया जाता है.

    चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखती हैं. इसके बाद चंद्रमा को जल अर्पित यानी अर्घ्य दिया जाता है. पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं. इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं.

    करवा चौथ की कथा में वीरावती का प्रसंग
    करवा चौथ से जुड़ी प्रमुख कथाओं में वीरावती की कथा भी सुनाई जाती है. मान्यता के अनुसार वीरावती अपने भाइयों की लाड़ली बहन थीं. विवाह के बाद उन्होंने करवा चौथ का कठिन व्रत रखा, लेकिन भूख-प्यास से उनकी हालत खराब होने लगी. भाइयों ने उन्हें व्रत खुलवाने के लिए चंद्रमा निकलने का भ्रम पैदा किया.

    वीरावती ने उसे चंद्रमा समझकर व्रत खोल दिया. इसके बाद उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. अंत में उन्होंने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ व्रत पूरा किया, उनके पति के जीवन से जुड़ा संकट दूर हुआ. इस कथा के जरिए व्रत में नियम और श्रद्धा के महत्व को बताया जाता है.

    करवा चौथ पर इन बातों का रखें ध्यान
    करवा चौथ का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं, यानी सूर्योदय से चंद्रोदय तक भोजन और पानी ग्रहण नहीं करतीं. हालांकि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है. यदि किसी को बीमारी, कमजोरी, गर्भावस्था या डॉक्टर द्वारा बताई गई कोई विशेष स्वास्थ्य स्थिति है, तो कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है.

    चंद्रोदय का समय भी हर शहर में अलग होता है. इसलिए इंटरनेट पर किसी दूसरे शहर का समय देखकर व्रत खोलने के बजाय अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखना चाहिए.

    करवा चौथ का महत्व केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है. यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, साथ और एक-दूसरे की लंबी एवं सुखी जिंदगी की कामना का पर्व भी माना जाता है.

  • SIRB-2 के खाते से 22.46 लाख की अवैध निकासी, आरोपी सिपाही पर 90 दिन में चार्जशीट की तैयारी

    SIRB-2 के खाते से 22.46 लाख की अवैध निकासी, आरोपी सिपाही पर 90 दिन में चार्जशीट की तैयारी

    रांची
    खूंटी के स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 (एसआईआरबी-2) के खाते से 22.46 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले में सीआइडी अपनी पहली चार्जशीट करने की तैयारी में है। इस मामले में एक लेखापाल सह सिपाही शुभम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी।

    आने वाले 14 सितंबर को शुभम कुमार की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में सीआईडी दो दिनों के भीतर चार्जशीट कर देगी। सीआइडी ने अब तक की जांच में पाया है कि सिपाही शुभम कुमार ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच करीब 28 बार में कुल 22.46 लाख रुपये स्थानांतरित की थी। खूंटी पुलिस ने ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था

    उसका दूसरा सहयोगी सिपाही अजित कुमार अब भी फरार है। आरोपित शुभम कुमार ने अस्थाई आइडी बनाकर अवैध वेतन की राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित की है। अवैध निकासी के मामले में सबसे पहले खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कांड संख्या 72/26 में खूंटी के कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

    तब वहां के अनुसंधान पदाधिकारी खूंटी के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने ही मुख्य आरोपित सह लेखापाल सिपाही शुभम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सीआइडी ने इस केस को 13 जुलाई को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 15/2026 में केस री-रजिस्टर्ड की थी।

    इसके बाद से ही आरोपित शुभम कुमार के विरुद्ध सीआईडी ने साक्ष्य संकलित किया, ताकि उसके विरुद्ध निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सके।

    सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है CID
    सीआईडी झारखंड के सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहला मामला बोकारो में आया था। इसके बाद एक-एक कर छह और जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया।

    इन जिलों में हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, देवघर व खूंटी में मामला सामने आया है। बोकारो में जिला कोषागार से 11 करोड़, हजारीबाग में 31 करोड़, पश्चिमी सिंहभूम में 27 लाख की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है।

    वहीं, रांची में 2.94 करोड़, रामगढ़ में 35 लाख व देवघर में 99.06 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इन जिलों से गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सीआईडी इन सभी जिलों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।

  • जयपुर नगर निगम चुनाव: हॉट सीटों पर टिकी नजरें, जीतने वाले को मिल सकता है मेयर का ताज

    जयपुर नगर निगम चुनाव: हॉट सीटों पर टिकी नजरें, जीतने वाले को मिल सकता है मेयर का ताज

    जयपुर
    मतदान पूरा होने के साथ ही अब शहर की निगाहें उन 'हॉट सीटों' के नतीजों पर टिक गई है, जहां से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बड़े चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इन हॉट सीटों पर जीत दर्ज करने वालों में से किसी एक के सिर जयपुर के नए महापौर का ताज सज सकता है।

    वार्ड 76
    भाजपा के पुनीत कर्णावट और कांग्रेस के प्रदीप जैन के बीच टक्कर है। हालांकि, यहां महज 54.85% मतदान दर्ज हुआ है। इस कम मतदान प्रतिशत ने प्रत्याशियों के गणित को उलझा दिया है।

    वार्ड 43
    सांगानेर क्षेत्र के वार्ड 43 में भाजपा के शैलेन्द्र भार्गव और कांग्रेस के आशीष शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। यहां मतदाताओं का रुझान सुस्त रहा और कुल 53.65% ही वोटिंग हो सकी।

    वार्ड 112 : सबसे हॉट मुकाबला
    सबसे चर्चित वार्ड 112 में मतदाताओं ने खुलकर मतदान किया है। यहां 67.82% मतदान हुआ है। भाजपा से सुनील कोठारी और कांग्रेस से आशीष शर्मा आमने-सामने हैं।

    वार्ड 110
    पूर्व महापौर और भाजपा की ज्योति खंडेलवाल वार्ड 110 से मैदान में हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस की सुनीता मेठी से है। इस वार्ड में 64.49% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

    वार्ड 135
    वार्ड 135 शहर की चर्चित सीटों में से एक है। यहां भाजपा के विमल कुमार अग्रवाल का मुकाबला कांग्रेस के रवि कुमार शर्मा से है। इस सीट पर 71.13% मतदान हुआ है।

    इन वार्डों में 74 प्रतिशत से अधिक मतदान
    वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत
    वार्ड 150    आमेर    8,799    7,365    83.70%
    वार्ड 148    आमेर    19,234    15,762    81.95%
    वार्ड 149    आमेर    19,858    15,881    79.97%
    वार्ड 126    आदर्श नगर    14,572    11,599    79.60%
    वार्ड 117    आदर्श नगर    19,801    15,743    79.51%
    वार्ड 1    विद्याधर नगर    13,776    10,811    79.48%
    वार्ड 146    हवामहल    14,809    11,598    78.32%
    वार्ड 61    बगरू    13,686    10,617    77.58%
    वार्ड 51    सांगानेर    17,181    12,891    75.03%
    वार्ड 128    आदर्श नगर    15,977    11,688    73.16%

    इन वार्डों में 50 फीसदी भी नहीं पड़े वोट
    वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत
    वार्ड 100    सिविल लाइंस    16,607    6,714    40.43%
    वार्ड 66    बगरू    19,163    9,060    47.28%
    वार्ड 42    सांगानेर    13,325    6,369    47.80%
    वार्ड 90    सिविल लाइंस    23,789    11,511    48.40%
    वार्ड 41    सांगानेर    17,639    8,632    48.94%
    वार्ड 75    मालवीय नगर    11,821    6,006    50.81%
    वार्ड 123    आदर्श नगर    11,501    5,921    51.49%

  • निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन, मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन BOCW शुरू

    निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन, मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन BOCW शुरू

    निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन, मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन BOCW शुरू

    मुंबई में राष्ट्रीय BOCW सम्मेलन का आगाज, निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर होगी चर्चा

    निर्माण श्रमिकों के कल्याण पर केंद्रित राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, मुंबई में दो दिन होगा मंथन

    रायपुर, 
     भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ('National Conference on BOCW') का शुभारंभ हुआ। 11 और 12 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के निर्माण श्रमिकों के सुरक्षित, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।

           इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे, मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और छत्तीसगढ़ के श्रम सचिव हिम शिखर गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

          सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह तथा मंडल सचिव गिरीश रामटेके ने किया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों ने श्रमिक हित में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया। साथ ही निर्माण श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भविष्य की रणनीतियों पर रणनीति तैयार की जा रही है। यह आयोजन देश के निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित; 11 लोगों पर गिरी गाज

    पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित; 11 लोगों पर गिरी गाज

    पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित

    बिना काम कराए राशि आहरण से लेकर मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक मिलीं अनियमितताएं, 11 लोगों पर कार्रवाई

    मुरैना
     जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर हुई जांच के बाद पांच पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। वहीं सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

    जिला पंचायत के सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के अनुसार इमलिया, शहदपुर, अगरोता, रंछोरपुरा, भदावली, बर्रेण्ड, ऐसाह और टिकटोली दूमदार सहित अन्य पंचायतों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की है।

    – मृतक के जॉब कार्ड पर भुगतान, सरपंच पर धारा 40 की कार्रवाई
    ग्राम पंचायत इमलिया में मृतक के जॉब कार्ड और परिवार के सदस्यों की पुष्टि किए बिना राशि का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। इस पर तत्कालीन रोजगार सहायक मधु रामपुरे और रोजगार सहायक व प्रभारी पंचायत सचिव आदिराम मावई को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं अनियमित भुगतान और अपूर्ण निर्माण कार्यों के मामले में सरपंच गुड्डी पत्नी राकेश बघेल के खिलाफ मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की गई है।

    – बिना निर्माण राशि निकालने पर सचिव निलंबित
    ग्राम पंचायत शहदपुर में मृत व्यक्ति के जॉब कार्ड पर डिमांड डालने और निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित करने के आरोप में रोजगार सहायक विनोद कुमार को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं बर्रेण्ड और वर्तमान में हुसेनपुर पंचायत में बिना निर्माण कार्य कराए राशि निकालने के मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव महेश चन्द्र जाटव को निलंबित किया गया है।

    – मृत व्यक्ति को पेंशन का लाभ दिलाने का मामला
    ग्राम पंचायत अगरोता में एक मृत व्यक्ति के संबंध में दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने और उनके आधार पर नियम विरुद्ध शासकीय पेंशन का लाभ दिलाने के आरोप में पंचायत सचिव रामाधार सिंह जाटव को निलंबित किया गया है।

    – निर्माण कार्यों में लापरवाही पर भी गिरी गाज
    रंछोरपुरा पंचायत में तालाब और पत्थर नाली का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराने पर तत्कालीन पंचायत सचिव नीरज कर्ण को निलंबित किया गया। रोजगार सहायक गजेन्द्र सिंह धाकड़ को भी शासकीय कार्य से विरत किया गया है। भदावली में जनसुनवाई नहीं करने, मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने और हितग्राहीमूलक योजनाओं में लापरवाही के आरोप में पंचायत सचिव विनोद कुमार तोमर को निलंबित किया गया।

    – सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें नहीं सुलझाईं, सचिव निलंबित
    अम्बाह की ग्राम पंचायत ऐसाह में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निराकरण नहीं कराने, मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहने, जनप्रतिनिधियों से अनुचित भाषा का प्रयोग करने और नोटिस का जवाब नहीं देने के आरोप में पंचायत सचिव दिनेश शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं टिकटोली दूमदार में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी के मामले में क्षेत्रीय उपयंत्री मातादीन शाक्य को शासकीय कार्य से विरत किया गया है।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    – इमलिया पंचायत की जांच पर उठे सवाल, पहले क्लीनचिट फिर कार्रवाई

    जांच करते अधिकारी 

    इमलिया पंचायत में अनियमितताओं को लेकर अब पूर्व की जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत मुरैना की ओर से पूर्व में कराई गई जांच में पंचायत को क्लीनचिट दे दी गई थी। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर टीम गठित कर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच की भूमिका में अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
    अब सवाल यह है कि एक ही मामले की दो जांचों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? क्या जनपद पंचायत की पहली जांच में गंभीर तथ्यों की अनदेखी हुई थी या फिर जिला पंचायत की जांच के निष्कर्षों पर सवाल खड़े होते हैं? यदि पहली जांच में पंचायत को क्लीनचिट दी गई थी तो उस जांच में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा क्यों न हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए पहली जांच को प्रभावित किया गया हो? हालांकि इस संबंध में किसी मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, मेष समेत इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

    मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, मेष समेत इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

     ग्रहों की चाल का ज्योतिष में विशेष महत्व माना जाता है. जब कोई ग्रह राशि के साथ-साथ नक्षत्र परिवर्तन करता है, तो उसके प्रभाव में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में मंगल नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार 24 सितंबर 2026 को मंगल पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति माने जाते हैं. मंगल का इस नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से शुभ साबित हो सकता है.

    मंगल 24 सितंबर को सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. 17 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इस दौरान मंगल कर्क राशि में स्थित होंगे. कर्क राशि मंगल की नीच राशि मानी जाती है, लेकिन इसी राशि में गुरु की मौजूदगी होने के कारण मंगल के नकारात्मक प्रभाव में कमी और शुभ प्रभाव में वृद्धि की संभावना ज्योतिष में बताई गई है.

    मेष राशि
    मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए राहत और प्रगति लेकर आ सकता है. लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है. संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है. व्यापार करने वालों के लिए समय अनुकूल रह सकता ह. मुनाफे में बढ़ोतरी के संकेत हैं. परिवार के लोगों का सहयोग मिलेगा. इस दौरान कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है. जीवनसाथी के साथ संबंध बेहतर होंगे.  मानसिक तनाव से राहत मिलने की संभावना है.

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन नए अवसरों के दरवाजे खोल सकता है. नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को कोई अच्छा मौका मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. आपकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है. विद्यार्थियों के लिए भी समय अच्छा रहने के संकेत हैं. परिवार में आपसी तालमेल बेहतर होगा. किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है.

    कन्या राशि
    कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश मान-सम्मान और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है. नौकरी या व्यापार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. अटके हुए कामों को गति मिल सकती है. रोजी-रोजगार के क्षेत्र में तरक्की के अवसर बनेंगे. नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को बेहतर विकल्प मिल सकता है. परिवार में खुशी का माहौल रहेगा. जीवनसाथी के साथ भी अच्छा समय बीतेगा.

    धनु राशि
    धनु राशि के लोगों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक रूप से लाभकारी रह सकता है. आमदनी में सुधार और व्यापार में मुनाफे के योग बन सकते हैं. लंबे समय से रुके किसी काम में तेजी आ सकती है. नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम होने की संभावना है. परिवार के सदस्यों और माता-पिता का सहयोग मिलेगा. कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं.
     

  • Punjab Police में बड़ा फेरबदल, 70 इंस्पेक्टर बने DSP; एक साल के लिए मिली पदोन्नति

    Punjab Police में बड़ा फेरबदल, 70 इंस्पेक्टर बने DSP; एक साल के लिए मिली पदोन्नति

    चंडीगढ़
     पंजाब पुलिस में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे इंस्पेक्टर को सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह मामलों एवं न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जिला कैडर और आर्म्ड कैडर के कुल 70 इंस्पेक्टर को पदोन्नत कर डीएसपी बनाया गया है।

    इन अधिकारियों को पंजाब पुलिस सेवा के वेतन स्तर-18 में पदोन्नति दी गई है, जिसमें 56,100 से 1,77,500 रुपये का वेतनमान है।

    सरकार की ओर से यह पदोन्नति विभागीय तरक्की कमेटी की 23 मई 2025 को हुई सिफारिशों के आधार पर की गई है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नत अधिकारियों को वरिष्ठता सूची में उनकी स्थिति और निर्धारित नियमों के तहत डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है।

    जिला कैडर में 50 और आर्म्ड कैडर में 20 अधिकारी
    पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में जिला कैडर के 50 इंस्पेक्टर शामिल हैं, जबकि आम्र्ड कैडर के 20 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाया गया है। सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जो लंबे समय से इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे रहे थे। सरकार के इस फैसले से इन अधिकारियों को न केवल उच्च पद मिला है, बल्कि वेतनमान में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

    एक साल की रहेगी पदोन्नति की अवधि
    अधिसूचना में पदोन्नति को लेकर एक अहम शर्त भी रखी गई है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति का प्रभाव तत्काल लागू होगा, लेकिन उनकी पदोन्नति एक साल की अवधि के लिए रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार उनके प्रदर्शन तथा सेवा संबंधी मामलों को देखा जाएगा।

    इसके अलावा यदि किसी अधिकारी की वरिष्ठता सूची में कोई बदलाव होता है अथवा किसी स्तर पर कोई आपत्ति या न्यायिक मामला सामने आता है, तो उसके अनुसार पदोन्नति पर दोबारा विचार किया जा सकेगा।

    डीएसपी के खाली पदों को भरने में मिलेगी मदद
    पंजाब पुलिस में डीएसपी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां कानून-व्यवस्था, अपराध की जांच और पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण होती हैं।

    ऐसे में 70 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाए जाने से विभाग को फील्ड स्तर पर भी अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासकर जिला पुलिस और आर्म्ड पुलिस में अधिकारियों की कमी को दूर करने में यह पदोन्नति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सरकार ने यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया है। पदोन्नत अधिकारियों को अब डीएसपी स्तर की जिम्मेदारियां संभालनी होंगी और विभाग की ओर से उनके नए पदों पर तैनाती के आदेश अलग से जारी किए जा सकते हैं।

  • यूरोप से भारत लाया गया गैंगस्टर अमृत दलम, जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा; हत्या समेत कई मामलों में वांटेड

    यूरोप से भारत लाया गया गैंगस्टर अमृत दलम, जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा; हत्या समेत कई मामलों में वांटेड

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    पठानकोट

    पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर और पंजाब में मोस्ट वॉन्टेड अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी उसे प्रत्यर्पण करके यूरोपीय देश मोल्दोवा से भारत वापस लाए हैं. यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी किसी आरोपी को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पित कराकर वापस पंजाब लाया गया है. अमृत दलम पर 21 मामले दर्ज थे, जिसमें अमृतसर में कई व्यापारियों को धमकाने के मामले भी दर्ज थे. उसे वापस भारत लाना बड़ी सफलता माना जा रहा है। 

    भारत से 2024 में हुआ था फरार
    अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था, उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. इस पासपोर्ट में उसकी पहचान गुरपाल सिंह के नाम से बताई गई थी. भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। 

    यूक्रेन भागने वाला था अमृत दलम 
    बताया जा रहा है कि अमृत दलम यूक्रेन भागने की फिराक में था. इसी चक्कर में वह मोल्दोवा में पकड़ा गया. अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया. पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की. इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    21 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड
    दबोचा गया गैंगस्टर, जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। पंजाब पुलिस ने विदेश भागे आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से भारत वापस ला दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है। 

    फर्जी पहचान से भारत से फरार हुआ था
    पुलिस के मुताबिक अमृतपाल सिंह करीब अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी। 

    भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया।

    यूक्रेन भागने की कोशिश के दौरान मोल्दोवा में पकड़ा गया
    अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।  

    इसके बाद अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे।

    फर्जी पासपोर्ट और लोकेशन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस
    पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन
    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Eastern Reach’ रखा गया था। इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया। 

    मोल्दोवा की अदालत से मिली भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी
    अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया। 

    चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम मोल्दोवा पहुंची
    प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया और उसे पंजाब वापस लाया। 

    पंजाब में 21 केस, कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले
    पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में UAPA/Explosives, हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े 5, Arms Act के 9, NDPS का 1 और UAPA/Explosives का 1 मामला दर्ज बताया गया है। 

    किन जिलों में दर्ज हैं मामले?
    जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा 7 FIR बटाला, 4 गुरदासपुर, 2 अमृतसर कमिश्नरेट, 2 होशियारपुर, 1 लुधियाना कमिश्नरेट और 1 FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है। वहीं ट्रायल में चल रहे 4 मामले बटाला में दर्ज हैं। 

    यानी करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए देश से फरार हुआ अमृतपाल सिंह मोल्दोवा में पकड़ा गया। छह महीने चले अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन, कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण के बाद अब पंजाब पुलिस उसे भारत वापस ले आई है।

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन

    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया. इस ऑपरेशन का नाम Operation Eastern Reach रखा गया था. इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया. अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी. इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया। 

  • Punjab Power Crisis: बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, कई यूनिटें ठप; कोयले का संकट गहराया

    Punjab Power Crisis: बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, कई यूनिटें ठप; कोयले का संकट गहराया

    जालंधर

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी।

    बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी।

    शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है। 

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है।

    तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा
    थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही। 

    थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी।

    इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की।

    प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।

    राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी
    जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है।

    इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है।

    इन प्लांटों की यूनिटें बंद
    पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं।

    शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई
    जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

    सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है।

    मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

    5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी
    बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

    देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं।

    बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं।

  • रामनंदी होटल्स पर ED का बड़ा एक्शन, बिहार-दिल्ली-गुरुग्राम के 17 ठिकानों पर छापेमारी

    रामनंदी होटल्स पर ED का बड़ा एक्शन, बिहार-दिल्ली-गुरुग्राम के 17 ठिकानों पर छापेमारी

    पटना
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग ) मामले में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी बिहार के गया जी और बोधगया के साथ ही नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित कंपनी के विभिन्न ठिकानों पर की गयी।

    कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत और नितेश पर कथित धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। कंपनी से जुड़े 85 करोड़ के बैंक ऋण में कथित हेराफेरी मामले की सीबीआई पूर्व से ही जांच कर रही है। इसमें इस अपराध से हुई कथित कमाई 131.79 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में धन शोधन की आशंका को देखते हुए अब ईडी की एंट्री हुई है

    58 करोड़ रुपये की हेराफेरी
    ईडी सूत्रों के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड मूलत: बिहार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के निदेशक गया जी के चांदचौरा निवासी अखौरी गोपाल का पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल नाम से कारोबार रहा है। उनकी कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में लगभग 58 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और डायवर्जन का आरोप है।

    फर्जी और जाली दस्तावेज मिल
    ईडी को जांच में कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से परियोजना पूरी होने की दी गयी गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले बैंक से लोन की रकम हासिल की गई। फिर लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गयीं। इनमें पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स के पक्ष में मॉर्गेज बताई गई हैं। बाद में इन संपत्तियों को बेच दिया गया। जांच एजेंसी को बिक्री में भी गड़बड़ी का संदेह है।

    प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका
    आरोप है कि संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई। रकम का एक हिस्सा नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को संदेह है कि करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले कुछ लोगों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं थी। ऐसे में उनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका है।

    लोन की व्यक्तिगत गारंटी दी थी
    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्रों निशांत एवं नितेश के पास होने की बात सामने आई है। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह ही गया जी के चांदचौरा में अखौरी गोपाल और उनके नजदीकी रहे बोधगया के अमर बिगहा गांव में मिथिलेश राय के आवास पर छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी के अधिकारी बिहार समेत देशभर में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन करेगी।

    गया में 15 घंटे तक चली तलाशी
    ईडी की टीम ने गया जी और बोधगया में तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी करीब 15 घंटे तक चली। इस दौरान गया जी शहर की कालीबाड़ी स्थित न्यू कॉलोनी में अरविंद कुमार के घर में रह रहे किरायेदार, बाला जी नगर और बोधगया के अमर बिगहा में मिथिलेश राय के घर की जांच की गयी। जांच टीम ने दस्तावेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। तलाशी पूरी होने के बाद टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य कागजात अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने छापेमारी व बरामदगी से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया।