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  • पंजाब में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 22 हजार लीटर नकली देसी घी बरामद; ग्रेटर नोएडा से आई थी सप्लाई

    पंजाब में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 22 हजार लीटर नकली देसी घी बरामद; ग्रेटर नोएडा से आई थी सप्लाई

    फरीदकोट
    फरीदकोट स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटकपूरा में सूचना के आधार पर पकड़े गए 22 हजार लीटर संदिग्ध देसी घी से भरे टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही विभाग की ओर से पुलिस को शिकायत देकर आपराधिक मामला दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    इस मामले में फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग की ओर से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।जानकारी के मुताबिक, जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस विंग को सूचना मिली थी कि ग्रेटर नोएडा से देसी घी से भरा टैंकर कोटकपूरा आ रहा है। इस संबंध में जीएसटी विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया। 

    इसके बाद गुरुवार रात फूड कमिश्नर अमित जोशी के नेतृत्व में चंडीगढ़ से टीम कोटकपूरा पहुंची। टीम ने फरीदकोट के फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल के नेतृत्व वाली टीम के साथ मिलकर फरीदकोट रोड स्थित फैक्ट्री में पहुंचे टैंकर को कब्जे में लिया। टैंकर से घी के सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए भेजे गए। 

    .फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • ग्वालियर के तिघरा डैम के 3 गेट खोले गए, सांक नदी में छोड़ा गया 1040 क्यूसेक पानी

    ग्वालियर के तिघरा डैम के 3 गेट खोले गए, सांक नदी में छोड़ा गया 1040 क्यूसेक पानी

    ग्वालियर
    तिघरा डैम का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे इसके तीन गेट खोल दिए गए। तीनों गेट नौ-नौ इंच खोले गए और इनके जरिए 1040 क्यूसिक पानी सांक नदी में छोड़ा गया। खास बात यह है कि इस सीजन में मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार तिघरा डैम के गेट खोले गए हैं।

    गेट खोले जाने के दौरान निगम महापौर शोभा सिकरवार, एमआइसी सदस्य, जल संसाधन विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

    सुबह 739.40 फीट था जलस्तर, दिनभर बढ़ता रहा
    शुक्रवार सुबह आठ बजे तिघरा बांध का जलस्तर 739.40 फीट दर्ज किया गया था। दिन में तिघरा के कैचमेंट क्षेत्र में हुई वर्षा के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी और आगे संभावित वर्षा को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने दोपहर करीब 1:30 बजे गेट खोले जाने की सूचना जारी की।

    शाम पांच बजे तक बांध का जलस्तर 739.50 फीट से अधिक पहुंच गया। इसके बाद भी जलस्तर बढ़ता रहा। भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने आखिरकार तीन गेट खोलने का निर्णय लिया। शाम साढ़े छह बजे गेट नौ-नौ इंच खोलकर सांक नदी में 1040 क्यूसिक पानी छोड़ा गया।

    इस सीजन में पहली बार खुले डैम के गेट
    इस बार मानसून के दौरान तिघरा डैम के गेट लंबे समय तक बंद रहे। पिछले वर्षों में जुलाई से अक्टूबर के बीच तिघरा डैम के गेट 17 बार खोले गए थे। इस बार मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार गेट खोलने की स्थिति बनी है।

    अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई बारिश से डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके बाद रात में और शुक्रवार दिन में हुई बारिश ने जलस्तर को और ऊपर पहुंचा दिया। इसी के चलते डैम से पानी छोड़ना पड़ा।

    गेट खुलने की खबर से शहरवासियों में खुशी
    ग्वालियर शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से तिघरा डैम पर निर्भर है। इस मानसून के आधे सीजन तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण तिघरा डैम आधा भी नहीं भर पाया था। इसका असर शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ा और लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा था।

    डैम के पर्याप्त नहीं भरने से आगे जलसंकट की चिंता भी बढ़ गई थी। हालांकि अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से तस्वीर बदल गई। तिघरा डैम के फुल होने के बाद अब गेट खोले जाने से शहरवासियों में खुशी है। लोगों को उम्मीद है कि अब ग्वालियर में रोजाना पानी की सप्लाई हो सकेगी।

    एम. विश्वेश्वरैया की देखरेख में मजबूत हुई इंजीनियरिंग
    तिघरा डैम का निर्माण सांक नदी पर वर्ष 1916 में कराया गया था। महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने बांध की योजना और उसकी तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को आमंत्रित किया था।

    1917 में बांध के शुरुआती क्षतिग्रस्त होने के बाद इसके पुनर्निर्माण और आटोमैटिक फ्लड गेट्स की तकनीक को मजबूत बनाने में उनके सुझावों और इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

    निर्माण के ठीक एक साल बाद 19 अगस्त 1917 को भारी बारिश और नींव में बलुआ पत्थर के रिसाव के कारण बांध का एक हिस्सा टूट गया था। इसके बाद इसे अधिक मजबूत संरचना के साथ दोबारा तैयार किया गया।

    1927 में जीर्णोद्धार, 1970 में फिर आईं दरारें
    वर्ष 1927 के आसपास तिघरा डैम का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। इसके बाद 1970 में अत्यधिक जलभराव और तकनीकी वजहों से इसके कुछ हिस्सों में फिर दरारें आईं। इसके बाद सरकार ने आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसे मजबूत कंक्रीट और चुनाई संरचना में बदला।

    तिघरा डैम से ग्वालियर शहर को जलापूर्ति की शुरुआत वर्ष 1916 से ही हुई थी। 1916 से अब तक यह शहर की लगभग 14 लाख आबादी के लिए पेयजल का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है। मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में तिघरा का पानी साफ करने के बाद शहर की विभिन्न टंकियों तक पहुंचाया जाता है।

    24 मीटर ऊंचा और 1,341 मीटर लंबा है डैम
    तिघरा डैम की ऊंचाई लगभग 24 मीटर और लंबाई 1,341 मीटर है। इसका निर्माण ग्वालियर शहर की जलापूर्ति के साथ आसपास के 11 गांवों की सिंचाई के उद्देश्य से कराया गया था।

  • बार एसोसिएशन चुनाव में गुजराल की बड़ी जीत, 661 वोट लेकर बने अध्यक्ष

    बार एसोसिएशन चुनाव में गुजराल की बड़ी जीत, 661 वोट लेकर बने अध्यक्ष

    चंडीगढ़.

    करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को शुक्रवार को नया प्रधान मिल गया। जिला अदालत परिसर में हुए चुनाव के परिणाम देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर एएस गुजराल ने 661 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।

    उन्होंने गगन अग्रवाल (450), रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जौली (464) और सुनील नारंग (327) को पीछे छोड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर अभय जोशी ने बाजी मारी। जोशी को 1071 वोट पड़े जबकि उनके मुकाबले धर्मिंदर सिंह को 801 वोट मिले। जोशी 270 वोट से विजयी रहे। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली थी। सचिव पद पर तेजविंदर सिंह गिल 1147 वोट हासिल कर विजयी रहे, जबकि नरेश कुमार को 733 वोट मिले। ज्वाॅइंट सेक्रेटरी पद पर पुष्पिंदर सिंह ने बाजी मारी। उन्हें 836 वोट मिले। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर प्रतीक गर्ग ने 1043 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी पुनीत छाबड़ा को 867 वोट मिले।

  • मिशन-2027 पर मंथन: बीएल संतोष ने यूपी भाजपा की कोर कमेटी बैठक में लिया सियासी फीडबैक

    मिशन-2027 पर मंथन: बीएल संतोष ने यूपी भाजपा की कोर कमेटी बैठक में लिया सियासी फीडबैक

    लखनऊ
    भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष शुक्रवार की शाम दो दिनी यूपी दौरे पर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर हुई कोर कमेटी की बैठक में सरकार और संगठन से यूपी का सियासी फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सेवा संकल्प अभियान, विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव की तैयारी, राज्यसभा चुनाव पार्टी संगठन के गठन का काम जल्द करने के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले इस बड़े अभियान के जरिए हर वर्ग तक पहुंचने की रणनीति पर मंथन हुआ।

    राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने सरकार और संगठन के बेहतर समन्वय से सेवा संकल्प अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा किएक महीने चलने वाले इस अभियान के जरिए युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और हर लाभार्थी तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। 17 सितंबर को हर बूथ पर प्रत्येक लाभार्थी परिवार आर्शीवाद का दीया जलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करेगा। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं तक पहुंचना है।

    सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर प्रभावी ढंग से प्रचार पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अभियान को लेकर सरकार के स्तर पर की गई तैयारियों पर चर्चा की। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने सांगठनिक स्तर पर की तैयारी को साझा किया। उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा कि यूपी में तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने को लेकर विस्तार से मंथन हुआ है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी जगदीश भाई पटेल,प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौजूद रहे।

    चुनाव की तैयारियों पर हुई बात: पंकज
    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया कि बैठक में मिशन-2027 को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराए जाने को लेकर भी कोर कमेटी में चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो पार्टी के मोर्चा-प्रकोष्ठों के जल्द गठन और संगठन की योजनानुसार प्रवास शुरू करने को कहा गया है। वहीं नवंबर में प्रस्तावित 11 विधान परिषद सीटों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित के आगामी दिनों में होने वाले दौरों-कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई।

    महामंत्रियों संग बैठक,कानपुर जाएंगे
    बीएल संतोष शनिवार को सुबह प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पार्टी के प्रदेश महामंत्रियों संग बैठक करेंगे। इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे। उसके बाद कानपुर जाएंगे। वहां कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। फिर रविवार को दिल्ली रवाना होंगे। इससे पूर्व शनिवार शाम यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने पर प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजबहादुर, महामंत्री संजय राय, रामप्रताप चौहान, गोविंद नारायण शुक्ला सहित अन्य ने स्वागत किया।

  • Golden Temple में प्रकाश पर्व की धूम, हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    Golden Temple में प्रकाश पर्व की धूम, हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    अमृतसर 
    पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंचे रहे हैं।

    गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है।अमृतसर, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन हुआ शुरू।

    गोल्डन टेंपल को सुंदर फूलों से सजाया गया है, जो विदेश से लाए गए हैं। ये फूल थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से इंपोर्ट किए गए हैं। 100 कारीगर दिन-रात सजावट के काम में जुटे हैं। गोल्डन टेंपल को सजाने के लिए 60 टन से अधिक फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें 10 ट्रकों में लादकर अमृतसर लाया गया।

    सिखों के 5वें गुरु अर्जन देव जी ने सन् 1604 में दरबार साहिब में पहली बार 
    श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व के अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।  गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन कुछ समय बाद आरंभ होगा। 

    गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य, जानिए…

        बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की।

        बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।"

        गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर इन्हें पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।”

        समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं।

    गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित
    गुरुवार को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब आरंभ किए गए, जिनके भोग 12 सितंबर को डाले जाएंगे। बता दें, आज (11 सितंबर) गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित किया जाएगा। इसमें सिंह साहिबान और पंथ प्रसिद्ध रागी जत्थे संगत को गुरबाणी और गुर-इतिहास से जोड़ेंगे।

    श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा
    वहीं, 12 सितंबर को पुरातन परंपरा के अनुसार गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा। नगर कीर्तन सुबह 7 बजे रामसर साहिब से निकलेगा और स्वर्ण मंदिर पहुंचेगा। इस दौरान शिरोमणि कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी समेत सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें हाजिरी भरेंगी।

     

  • मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये रहस्य

    मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये रहस्य

    मृत्यु जीवन का ऐसा सच है, जिससे कोई भी इंसान बच नहीं सकता. लेकिन मृत्यु के बाद क्या होता है? क्या शरीर छोड़ने के बाद आत्मा तुरंत किसी दूसरे लोक में चली जाती है या कुछ समय तक अपने घर और अपनों के बीच ही रहती है?

    गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की यात्रा को लेकर कई तरह के वर्णन मिलते हैं. इनमें आत्मा की मृत्यु के बाद की स्थिति, उसके कर्मों का लेखा-जोखा, पिंडदान और यमलोक की यात्रा जैसी बातें विस्तार से बताई गई हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा की एक लंबी यात्रा शुरू होती है. इस दौरान उसे अपने कर्मों के अनुसार अलग-अलग अनुभवों से गुजरना पड़ता है. आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा को लेकर क्या बताया गया है.

    गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद क्या बताया गया है?
    गरुड़ पुराण वैष्णव परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है. इसमें भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के संवाद के माध्यम से जीवन, मृत्यु, कर्म, पाप-पुण्य और मृत्यु के बाद की गति से जुड़े विषयों का वर्णन मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद उसकी गति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का वर्णन काफी विस्तार से किया गया है. हालांकि, इन वर्णनों को धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के रूप में समझना चाहिए.

    मृत्यु के समय आत्मा के साथ क्या होता है?
    गरुड़ पुराण के वर्णन के अनुसार, मृत्यु के समय जीवात्मा अपने भौतिक शरीर को छोड़ देती है. इस दौरान यमदूतों के आने और जीवात्मा को अपने साथ ले जाने का भी उल्लेख मिलता है. ग्रंथ में यमदूतों का वर्णन भयावह रूप में किया गया है. उनके हाथों में दंड और पाश होने की बात कही गई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पाप कर्म करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के समय इन यमदूतों को देखकर भय का अनुभव होता है. इसके बाद जीवात्मा को उसके कर्मों के अनुसार आगे की यात्रा पर ले जाया जाता है.

    गरुड़ पुराण में आत्मा के सूक्ष्म शरीर का वर्णन भी मिलता है. इसे भौतिक शरीर से अलग माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरीर समाप्त हो जाता है, लेकिन जीवात्मा अपने कर्मों के प्रभाव के साथ आगे बढ़ती है.

    क्या मृत्यु के बाद आत्मा घर में रहती है?
    गरुड़ पुराण से जुड़ी लोकप्रिय व्याख्याओं में कहा जाता है कि मृत्यु के बाद जीवात्मा कुछ समय तक अपने घर और परिवार के आसपास रहती है. उसे अपने प्रियजनों से अलग होने का एहसास होता है और वह उन्हें देखती है, लेकिन उनसे पहले की तरह संवाद नहीं कर पाती है.

    कुछ धार्मिक व्याख्याओं में मृत्यु के बाद शुरुआती दिनों को विशेष महत्व दिया गया है. इसी कारण हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद कई दिनों तक पिंडदान, तर्पण और अन्य संस्कार किए जाते हैं. हालांकि आत्मा के ठीक कितने समय तक घर में रहने की बात कही गई है, इसे लेकर अलग-अलग परंपराओं और व्याख्याओं में अंतर मिलता है. इसलिए इसे एक निश्चित वैज्ञानिक तथ्य की तरह नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यता के रूप में देखना चाहिए.

    पिंडदान को क्यों माना गया है जरूरी?
    हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है. गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीवात्मा की यात्रा के दौरान पिंडदान से मिलने वाले लाभों का वर्णन किया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन संस्कारों के माध्यम से मृतक के लिए अन्न और जल का प्रतीकात्मक अर्पण किया जाता है. कहा जाता है कि मृत्यु के बाद शुरुआती दिनों में किए जाने वाले पिंडदान से जीवात्मा को आगे की यात्रा के लिए सूक्ष्म शरीर प्राप्त करने में सहायता मिलती है. इसी वजह से हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद अलग-अलग दिनों पर पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा बनी हुई है.

    10वें, 11वें और 12वें दिन का क्या महत्व है?
    गरुड़ पुराण की विभिन्न व्याख्याओं में मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों और पिंडदान का अलग-अलग दिनों से संबंध बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों किए गए पिंडदान के माध्यम से मृतक की सूक्ष्म देह के निर्माण और उसकी आगे की यात्रा से जुड़ी प्रक्रियाओं का वर्णन मिलता है.

    11वें और 12वें दिन किए जाने वाले कर्मकांड भी इसी क्रम का हिस्सा माने जाते हैं. इसके बाद आत्मा की यात्रा आगे बढ़ती है और उसे अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करने के लिए यमलोक की ओर ले जाया जाता है.

    यमलोक की यात्रा कैसी बताई गई है?
    गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा को आसान नहीं बताया गया है. विशेष रूप से पाप कर्म करने वाले व्यक्ति के लिए यह यात्रा कठिन और कष्टदायक बताई गई है. रास्ते में कई तरह की परेशानियों और यातनाओं का वर्णन मिलता है. इसी क्रम में वैतरणी नदी का भी उल्लेख आता है. धार्मिक ग्रंथों में इसे एक कठिन और भयावह पड़ाव के रूप में बताया गया है. मान्यता के अनुसार, जीवात्मा अपने कर्मों के अनुसार इन परिस्थितियों का सामना करती हुई धर्मराज के लोक तक पहुंचती है. यह पूरा वर्णन मूल रूप से मनुष्य को उसके कर्मों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से भी देखा जाता है.

    क्या आत्मा अपने परिवार को देख सकती है?
    गरुड़ पुराण की धार्मिक व्याख्याओं के अनुसार, मृत्यु के बाद जीवात्मा को अपने पुराने शरीर, घर और परिवार से मोह बना रह सकता है. वह अपने प्रियजनों को छोड़ना नहीं चाहती, लेकिन अब वह भौतिक शरीर में नहीं होती. इसलिए वह पहले की तरह उनसे बात या संपर्क नहीं कर पाती है. यही स्थिति उसके लिए दुख और बेचैनी का कारण बताई गई है.

    इसीलिए हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों को महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि इन संस्कारों से मृतक की आत्मा को आगे की यात्रा के लिए शांति और गति प्राप्त होती है.

    कर्म ही तय करते हैं आत्मा की आगे की गति
    गरुड़ पुराण की पूरी शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कर्म से जुड़ा है. मनुष्य जीवन में जो कर्म करता है, उसका फल उसे किसी न किसी रूप में प्राप्त होता है, ऐसी धार्मिक मान्यता है. पुण्य कर्मों का परिणाम शुभ और पाप कर्मों का परिणाम कष्टदायक बताया गया है. इसलिए, गरुड़ पुराण सिर्फ मृत्यु के बाद की कहानी नहीं बताता, बल्कि जीवित व्यक्ति को भी अपने कर्मों के प्रति जागरूक करता है. धन, पद और संपत्ति मनुष्य के साथ नहीं जाते. उसके कर्म ही उसके साथ जाते हैं.

    क्या मृत्यु के बाद आत्मा को भूख-प्यास लगती है?
    गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीवात्मा की भूख और प्यास का भी वर्णन मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरीर छूट जाने के बाद भी जीवात्मा को अपने पुराने शरीर और भौतिक जरूरतों का अनुभव हो सकता है. इसी कारण पिंडदान और तर्पण के जरिए मृतक के लिए अन्न और जल अर्पित करने की परंपरा है.

    यहां भी यह समझना जरूरी है कि यह धार्मिक विश्वास का हिस्सा है. आधुनिक विज्ञान के स्तर पर आत्मा, यमलोक या पिंड के सूक्ष्म शरीर बनने जैसी अवधारणाओं का स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

  • बिलासपुर जिला सहकारी बैंक को 381.45 करोड़ का बजट, खातों में 47 करोड़ से ज्यादा राशि

    बिलासपुर जिला सहकारी बैंक को 381.45 करोड़ का बजट, खातों में 47 करोड़ से ज्यादा राशि

    बिलासपुर.

    किसानों की जरूरतों से जुड़े जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने वित्तीय मजबूती के साथ अपनी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। बैंक की 112वीं वार्षिक आमसभा में वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए 381.45 करोड़ के बजट को अनुमोदन मिला। वहीं बैंक के 47.26 करोड़ के लाभ के उपयोग का खाका भी सदस्यों के सामने रखा गया।

    जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर में शुक्रवार को आमसभा आयोजित की गई, इसके में बैंक से संबंधित सभी विषयों पर समीक्षा और जानकारी ली गई। इस दौरान पता चला कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2 लाख 53 हजार 101 किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 860.74 करोड़ का अल्पकालीन फसल ऋण दिया गया। बैंक ने खाताधारकों के लिए डिजिटल सुविधा बढ़ाते हुए 24 एटीएम शुरू किए हैं। समितियों में माइक्रो एटीएम की सुविधा भी दी गई है।

    सहकारी बैंक के अध्यक्ष रजनीश सिंह ने कहा कि वर्तमान में बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, गौरेला- पेंड्रा मरवाही और सक्ती क्षेत्र में बैंक की सेवाएं पहुंच रही हैं। स्थापना के बाद से बैंक का मुख्य उद्देश्य किसानों को सहकारी व्यवस्था के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना रहा है। उपाध्यक्ष रजनी साहू ने सदस्यों का आभार जताया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। नोडल अधिकारी आशीष दुबे ने वार्षिक आमसभा का संचालन किया।

    रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ
    आमसभा में बैंक के स्टाफिंग पैटर्न और रिक्त पदों पर नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव की भी पुष्टि की गई। जानकारी के अनुसार बैंक में 400 से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। 31 मार्च 2026 की स्थिति में रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। 47.26 करोड़ के लाभ में से रिजर्व फंड, कृषि सहस्तरीकरण, भवन निधि, कंप्यूटराइजेशन, जिला सहकारी संघ, समितियों के लाभांश और कैडर फंड सहित विभिन्न मदों में राशि निर्धारित की गई है। बैंक की अंश पूंजी भी बढ़कर 129.27 करोड़ हो गई है।

  • शहडोल में सजेगा बास्केटबॉल का महाकुंभ, 10 टीमों के बीच महामुकाबला; 240 खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम

    शहडोल में सजेगा बास्केटबॉल का महाकुंभ, 10 टीमों के बीच महामुकाबला; 240 खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम

    शहडोल
     शहडोल जिले में एक बार फिर से बास्केटबॉल का महाकुंभ लगने वाला है. जिसमें प्रदेश भर की 10 टीम में शामिल होंगी. वहीं, कई बड़े मुकाबले खेले जाएंगे. राज्य स्तरीय इस आयोजन की तैयारी के लिए आज शहडोल जिला मुख्यालय में बैठक का आयोजन किया गया. जिसमें कई आला अधिकारी शामिल हुए और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई. क्योंकि इसमें प्रदेश के अलग-अलग संभाग की कई टीमें शामिल होंगी। 

    बास्केटबॉल के महाकुंभ की तैयारी
    संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''70वीं शालेय राज्य स्तरीय बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया जाना है. जिसके तैयारी के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक ली गई है. बैठक में उन्होंने बताया कि विराट नगरी शहडोल में 70वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा बास्केटबाल प्रतियोगिता 16 से 19 सितम्बर 2026 तक आयोजित होगी. प्रतियोगिता में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले 17 साल के बालक एवं बालिकाएं अपना जौहर दिखाएंगी. बास्केटबॉल टूर्नामेंट में 120 बालक एवं 120 बालिका खिलाड़ी शामिल होंगे। 

    कहां-कहां खेले जाएंगे मुकाबले
    संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''शहडोल के कान्वेंट स्कूल का खेल मैदान, महात्मा गांधी स्टेडियम एवं बीटीआई कॉलेज के खेल मैदान में सभी मुकाबले खेले जाएंगे. इस दौरान टोटल 48 मैच आयोजित किए जाएंगे. प्रतियोगिता में शहडोल, जबलपुर, सागर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, नर्मदापुरम, रीवा, भोपाल एवं जनजातीय कार्य विभाग सहित 10 टीमों के खिलाड़ी शामिल होंगे। 

    तैयारी बैठक में सौंपी गई जिम्मेदारी
    अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश तो दिए ही गए. साथ ही बास्केटबॉल टूर्नामेंट की तैयारी को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी भी सौंपी गई. उमेश कुमार धुर्वे ने कहा कि, ''प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों एवं कोचों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। 

  • CIMS में 19 PG कोर्स का नवीनीकरण, MD-MS की 91 सीटों पर प्रवेश का रास्ता साफ

    CIMS में 19 PG कोर्स का नवीनीकरण, MD-MS की 91 सीटों पर प्रवेश का रास्ता साफ

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सिम्स के 19 स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण को अस्थायी स्वीकृति प्रदान कर एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों की कुल 91 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है।

    एनएमसी की स्वीकृति के अनुसार, एमडी के 14 पाठ्यक्रमों में 69 सीटें तथा एमएस के 5 पाठ्यक्रमों में 22 सीटें शामिल हैं। यह स्वीकृति सिम्स में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति मिलना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिम्स परिवार, विशेषकर पीजी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी लोगों के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति मिलना संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशिक्षण व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक एवं चिकित्सकीय प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और प्रदेश को भविष्य में अधिक संख्या में दक्ष एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति सिम्स के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक उपलब्धि है।

    इन विभागों में मिली सीटों की स्वीकृति
    एमडी पाठ्यक्रमों में सामुदायिक चिकित्सा में 5, फॉरेंसिक मेडिसिन में 2, एनाटॉमी में 3, बायोकेमिस्ट्री में फार्माकोलॉजी में 5 माइक्रोबायोलॉजी में 5 पीडियाट्रिक्स में 6, एनेस्थीसियोलॉजी में 8 त्वचा रोग में 3, जनरल मेडिसिन में 8, मनोचिकित्सा में 3, पैथोलॉजी में 9, रेडियो डायग्नोसिस में तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन में 2 सीटों को स्वीकृति मिली है वहीं एमएस पाठ्यक्रमों में ईएनटी की 4. नेत्र रोग की 3, प्रसूति एवं स्त्री रोग की 6, ऑर्थोपेडिक्स की 6 तथा जनरल सर्जरी की 6 सीटें शामिल हैं।

    चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार
    एनएमसी की यह स्वीकृति सिम्स की शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति देने वाली मानी जा रही है। विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में पीजी सीटों की उपलब्धता से न केवल चिकित्सकीय शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को विभिन्न विशेषज्ञताओं के प्रशिक्षित चिकित्सक भी मिलेंगे। एनएमसी ने अपने स्वीकृति पत्र में स्पष्ट किया है. कि, वास्तविक सीटों की संख्या मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड द्वारा स्वीकृत संख्या के अनुसार ही मान्य होगी सिम्स प्रशासन ने इस उपलब्धि संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, पीजी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया है।

  • छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, विकास को गति देने सरकार की नई पहल

    छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, विकास को गति देने सरकार की नई पहल

    रायपुर : विकास को गति देने छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव

    डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ की नई पहल

    Negative List आधारित व्यवस्था से भूमि उपयोग होगा अधिक लचीला और व्यावहारिक, निवेश एवं विकास गतिविधियों को मिलेगी सहजता

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।

    मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।

    उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

    प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर

    प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।

    प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।

    आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता

    आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन

    वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।

    वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

    कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था

    कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।

    इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।

    नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन

    तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

    प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।

    नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव

    प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।