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  • गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अभियंताओं की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार से बन रहा है विकसित मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अभियंता दिवस पर उत्कृष्ट अभियंताओं, अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों का हुआ सम्मान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर अर्पित की पुष्पांजलि
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस समारोह को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की गौरवशाली प्राचीन स्थापत्य विरासत आज भी तकनीक के साथ नये प्रयोग की प्रेरणा देती है। अभियंता अपनी प्रतिभा, तकनीकी ज्ञान और नवाचार से विकास की संभावनाओं को धरातल पर साकार करते हैं। किसी नए मार्ग का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं देता, बल्कि वह उस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का नया द्वार खोलता है। अभियंताओं द्वारा तैयार की जाने वाली प्रत्येक परियोजना और डिजाइन में प्रदेश के भविष्य की आर्थिक संरचना की परिकल्पना निहित होती है। सर विश्वेश्वरैया ने अपनी दूरदृष्टि, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र सेवा के भाव से जल प्रबंधन, सिंचाई, औद्योगिक विकास तथा संस्थागत निर्माण के क्षेत्र में ऐसे कार्य किए, जिनका लाभ देश को आज भी मिल रहा है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का विजन और संकल्प पूरे देश के विकास को नई दिशा दे सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महान सिविल इंजीनियर भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर प्रदेश के सभी अभियंताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अभियंता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर राज्य स्तरीय समारोह का शुभारंभ किया। समारोह वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग सर्कुलर्स के संकलन का किया विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल के बीच टिकाऊ अधोसंरचना निर्माण के लिए एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के गत 10 वर्ष के सर्कुलर्स के संकलन के कम्पेडियम का विमोचन भी किया।

    भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही रही है समृद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियंता उपलब्ध संसाधनों, ज्ञान और अपनी योग्यता का समन्वय कर उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। प्रकृति के पंचतत्वों और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग से वे समाज के लिए ऐसी स्थायी संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जो पीढ़ियों तक उपयोगी रहती हैं। भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही समृद्ध रही है। एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर मंदिर, प्राचीन जल संरचनाएं तथा जीवंत प्रतीत होने वाली शिल्पकृतियां तत्कालीन अभियंताओं और शिल्पकारों की असाधारण तकनीकी दक्षता का परिचय देती हैं। मध्यप्रदेश की प्राचीन स्थापत्य विरासत ने देश के लोकतांत्रिक भवनों की वास्तुकला को भी प्रेरणा दी है। यह गौरवशाली विरासत आज के अभियंताओं को आधुनिक तकनीक के साथ नए प्रयोग करने की प्रेरणा देती है।

    महापुरुषों के नाम पर पुरस्कार विभाग की अभिनव पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंताओं को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान करने की अभिनव पहल के लिए लोक निर्माण विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार, विश्वकर्मा पुरस्कार, विक्रमादित्य पुरस्कार, रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार और राजा भोज पुरस्कार के माध्यम से विभाग ने भारत की ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान को आधुनिक निर्माण व्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी नवाचार, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के प्रति अभियंताओं की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे। वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अभियंताओं का सम्मान विभाग की गौरवशाली परंपरा और उनके दीर्घकालीन योगदान के प्रति आदर का प्रतीक है।

    नवाचार करने वाले अभियंताओं के साथ है सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंटरहित कंक्रीट सहित पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीकों पर किए जा रहे प्रयोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग नई तकनीक, अनुसंधान और नवाचारों को अपनाकर देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। विभाग की उपलब्धियां पूरी टीम की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री ने अभियंताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे निर्भय होकर जनहित में नवाचार करें, राज्य सरकार हर सकारात्मक पहल में उनके साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में अभियंताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    अनुसंधान अनुशासन और परफेक्शन’ बने लोक निर्माण की कार्य-संस्कृति – मंत्री सिंह

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के विकास को नई गति, दिशा और पहचान प्रदान की है। अभियंता केवल शासकीय कर्मचारी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा के निर्माता हैं। लोक निर्माण विभाग के प्रत्येक कार्य का अंतिम उद्देश्य ‘लोक निर्माण से लोक कल्याण’ होना चाहिए। “निर्माण हमारी जिम्मेदारी है, लोक कल्याण हमारा लक्ष्य है, गुणवत्ता हमारी पहचान है, नवाचार हमारी शक्ति है, तकनीक हमारा भविष्य है और विकसित मध्यप्रदेश हमारा संकल्प है।” उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग में वार्षिक पुरस्कारों की शुरुआत सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। भास्कराचार्य संस्थान सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से विभाग ने अनेक डिजिटल समाधान विकसित किए हैं।

    विभाग के नवाचारों को अन्य राज्यों ने भी अपनाया

    मध्यप्रदेश में प्रारंभ किए गए कई नवाचारों को अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। केवल नौ माह में विभाग के 85 प्रतिशत से अधिक अभियंताओं को देश के चार प्रमुख इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यह संस्थान मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग रिसर्च, नवाचार और प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएसआईआर, एम्प्री के साथ लोक निर्माण विभाग के एमओयू से हमें सीमेंट के बिना कांक्रीट की सड़क बनाने की तकनीक मिलेगी। मध्यप्रदेश में बनने वाले सरकारी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पर बनेंगे। लोक निर्माण विभाग ने अपने कामकाज के तरीके से अपनी छवि बदली है और एमपीआरडीसी अगले एक साल में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए लागत के कार्य करेगा।

    ब्लैक स्पॉट से होने वाली दुर्घटनाओं में आई कमी

    प्रमुख सचिव लोक निर्माण, सुखवीर सिंह ने कहा कि हमारी सड़कें किसानों को बाजार, युवाओं को स्कूल और नारी को रोजगार तक ले जाने में अहम भूमिका निभाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार अधोसंरचनात्मक विकास पर विशेष जोर दे रही है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विजन के अनुरूप अधोसंरचनात्कम विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। सड़क निर्माण में रोड सेफ्टी सहित आधुनिक निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के सुझाव लिए जा रहे हैं। पिछले 9 महीने में तुलनात्मक रूप से ब्लैक स्पॉट के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आई है। लोक निर्माण विभाग (भोपाल परिक्षेत्र) के प्रमुख अभियंता आरएल वर्मा ने सर मोक्षगुंडम विश्वेसरैया का जीवन परिचय दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उन्होंने लोक निर्माण विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आभार व्यक्त किया।

    अभियंता दिवस पर उत्कृष्ट अभियंताओं एवं निर्माण एजेंसियों का हुआ सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस पर अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में गुणवत्ता, समयबद्धता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, अभियंताओं, संयुक्त दलों एवं निर्माण एजेंसियों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, भोपाल के संभागीय प्रबंधक ईश्वर सिंह चंदेली, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम, जबलपुर के उप महाप्रबंधक मानवेंद्र सिंह सेंगर, लोक निर्माण विभाग, जबलपुर के कार्यपालन यंत्री (भवन) मनीष कुमार शर्मा तथा पीडब्ल्यूडी संधारण संभाग क्रमांक-2, भोपाल के प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एच.एन. त्रिपाठी को सम्मानित किया गया।

    विश्वकर्मा पुरस्कार मेसर्स वी.वी.सी.एम.के.एस. प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अग्रवाल कंस्ट्रक्शन वर्क्स, मेसर्स एपेक्स स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा मेसर्स गौर रोड टारकोट प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर को प्रदान किया गया। विक्रमादित्य पुरस्कार मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, ग्वालियर के संयुक्त दल को प्रदान किया गया। इस दल में संभागीय प्रबंधक राजेश दायमा, संभागीय प्रबंधक श्रीमती हर्षिता वार्ष्णेय, उप महाप्रबंधक शशांक शर्मा और प्रबंधक दीपक नामदेव शामिल रहे। इसी श्रेणी में लोक निर्माण विभाग, संभाग सागर के संयुक्त दल को भी सम्मानित किया गया, जिसमें कार्यपालन यंत्री साहित्य तिवारी और उपयंत्री अनिल श्रीवास्तव शामिल रहे।

    रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार लोक निर्माण विभाग, श्योपुर के कार्यपालन यंत्री पुष्कल प्रताप को प्रदान किया गया। राजा भोज पुरस्कार से मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के संयुक्त दल को सम्मानित किया गया। इस दल में तत्कालीन उप महाप्रबंधक मोहन किशोर परमार और प्रबंधक महेंद्र डोलिया शामिल रहे। इसी पुरस्कार से लोक निर्माण विभाग के संयुक्त दल को भी सम्मानित किया गया, जिसमें कार्यपालन यंत्री शिवेंद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री हृदेश आर्य और उपयंत्री रामसिंह रघुवंशी शामिल रहे।

    कार्यक्रम में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम भरत यादव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश भवन विकास निगम सिबि चक्रवर्ती एम., निदेशक सीएसआईआर-एम्प्री डॉ. थल्लाडा भास्कर सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, सेवानिवृत्त अभियंता, निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

     

  • बिल गेट्स ने दी चेतावनी, कहा- दुनिया की कोई भी सरकार AI के बड़े बदलावों के लिए तैयार नहीं

    बिल गेट्स ने दी चेतावनी, कहा- दुनिया की कोई भी सरकार AI के बड़े बदलावों के लिए तैयार नहीं

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर इस वक्त दुनिया भर में एक तरह का बवाल मचा हुआ है. हर दिन AI को लेकर ऐसे दावे हो रहे हैं जिससे आम इंसान डरा हुआ है. एक तरफ जहां OpenAI और Anthropic के हेड कह रहे हैं कि AI पर लगाम लगाना होगा, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप कह रहे हैं कि हम एआई को रोक नहीं सकते वर्ना चीन आगे निकल जाएगा. इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने भी कुछ कहा है. आइए जानते हैं.

    बिल गेट्स ने एक नई बातचीत में चेतावनी दी है कि दुनिया की कोई भी सरकार अभी उन बड़े बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, जो AI समाज में ला सकता है. उनका कहना है कि AI से नौकरियों पर असर पड़ सकता है, साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है और लोगों में एआई से बातचीत की लत भी लग सकती है. यानी ये लोगों को एडिक्ट बना सकता है.

    गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब AI को लेकर दुनिया में बहस तेज हो गई है. एक तरफ कंपनियां ज्यादा ताकतवर एआई बनाने की होड़ में लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ साइंटिस्ट्स और टेक इंडस्ट्री के बड़े नाम इसके खतरों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. इसी बीच गेट्स ने कहा है कि सरकारों को अब सिर्फ एआई का फायदा देखने के बजाय इसके असर से निपटने की तैयारी भी करनी होगी. हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि भले ही AI कंपनियों के सीईओ स्लोडाउन की बता कर रहे हैं, लेकिन कोई वाकई इसे स्लोडाउन करना चाह नहीं रहा है.

    बिल गेट्स ने क्यों कहा- सरकारें बहुत पीछे हैं?
    रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में बिल गेट्स ने कहा कि कोई भी सरकार एआई से आने वाले बदलावों के लिए उतनी तैयारी नहीं कर रही है, जितनी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारों की तैयारी इस मामले में काफी पीछे है.

    गेट्स पहले एआई को लेकर काफी उम्मीद जताते रहे हैं. उनका मानना रहा है कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरे जरूरी क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है. लेकिन अब उनका कहना है कि इसकी रफ्तार के साथ कुछ ऐसे खतरे भी सामने आ रहे हैं, जिनके लिए दुनिया अभी तैयार नहीं है.

    इनमें सबसे बड़ी चिंता नौकरियों को लेकर है. एआई पहले ही ऐसे कई काम करने लगा है, जो कुछ साल पहले तक सिर्फ इंसानों के भरोसे थे. आने वाले समय में एआई ज्यादा काम करने लगेगा तो कई नौकरियों का तरीका बदल सकता है और कुछ नौकरियों की जरूरत भी कम हो सकती है.

    गेट्स ने साइबर अटैक्स और एआई आधारित खतरों को लेकर भी चिंता जताई है. इसके अलावा उन्होंने एआई से बातचीत करने वाले डिजिटल साथियों की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर भी सावधान किया है. उनका डर है कि लोग इनसे जरूरत से ज्यादा जुड़ सकते हैं.

    एआई की सबसे बड़ी लड़ाई अमेरिका और चीन के बीच
    गेट्स ने एआई की होड़ में चीन की तेजी की भी तारीफ की है. उनका कहना है कि अमेरिका और चीन दोनों के पास कई ऐसे संस्थान हैं, जो दुनिया के सबसे बेहतर एआई मॉडल बनाने की क्षमता रखते हैं. बता दें कि कल यानी 14 सितंबर को ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा था कि AI स्लोडाउन नहीं हो सकता, क्योंकि चीन यही चाहता है.

    चीनी और अमेरिकी AI मॉडल्स में ज्यादा फर्क नही – गेट्स
    गेट्स के मुताबिक दोनों देशों के सबसे अच्छे एआई मॉडल के बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. उन्होंने इसे अमेरिका और चीन के बीच एक तरह की बड़ी एआई प्रतियोगिता बताया है. अमेरिकी प्रेसिडेंट और वहां की AI कंपनियों को भी इस बात का ही डर है कि अमेरिका के मुकाबले चीन का AI कहीं आगे न निकल जाए. इसलिए ही ट्रंप ने पोस्ट में कहा है कि जो जीतेगा वही जीतेगा और चीन से AI में अमेरिका काफी आगे है.

    यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका लगातार एआई में अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और चीन तेजी से अपनी एआई तकनीक विकसित कर रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच एआई की होड़ सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गई है. इसका असर कारोबार, सुरक्षा, नौकरियों और दुनिया की राजनीति पर भी पड़ सकता है.

    गेट्स का मानना है कि इस होड़ का फायदा सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनका कहना है कि एआई का इस्तेमाल गरीब देशों और उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जिनके पास आज अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं नहीं हैं.

    गेट्स फाउंडेशन एआई पर खर्च करेगा 1 अरब डॉलर
    बिल गेट्स की चेतावनी के साथ ही गेट्स फाउंडेशन ने एआई को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है. फाउंडेशन अगले दो साल में कम से कम 1 अरब डॉलर, यानी करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रहा है.

    इस पैसे का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती जैसे क्षेत्रों में एआई की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा. फाउंडेशन का मकसद यह है कि एआई का फायदा सिर्फ अमीर देशों और बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे.

    फाउंडेशन खास तौर पर उन भाषाओं और इलाकों पर भी ध्यान देना चाहता है, जिन्हें मौजूदा एआई मॉडल उतनी अच्छी तरह नहीं समझते. इसका मतलब है कि स्थानीय भाषाओं के लिए बेहतर एआई मॉडल और डेटा तैयार करने पर भी पैसा लगाया जाएगा.

    गेट्स ने एआई को एलियन से क्यों जोड़ा?
    बिल गेट्स ने एआई के भविष्य को समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि फिल्मों में अक्सर ऐसा दिखाया जाता है कि एलियन धरती पर हमला करने आता है और उसके बाद अमेरिका, चीन और बाकी देश आपसी मतभेद भूलकर एक साथ आ जाते हैं.

    गेट्स के मुताबिक एआई कुछ हद तक ऐसा ही मौका है. उनका कहना है कि एआई हमारे सामने आ चुका है और दुनिया को इसके साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.

    इसका सीधा मतलब है कि एआई को लेकर अमेरिका, चीन और दूसरे देशों के बीच सिर्फ प्रतियोगिता नहीं होनी चाहिए. कुछ मामलों में उन्हें साथ मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जिनसे एआई का गलत इस्तेमाल रोका जा सके.

    सरकारों के पास कितना समय है?
    यही इस पूरी बहस का सबसे अहम सवाल है. एआई का विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि सरकारों के लिए नए नियम बनाने की रफ्तार और एआई के विकास की रफ्तार में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.

    दुनिया में अभी एआई के लिए नियम बनाने की कोशिश चल रही है, लेकिन इस बात पर देशों के बीच सहमति नहीं है कि कितने सख्त नियम होने चाहिए. अमेरिका और चीन के बीच एआई की प्रतियोगिता इस मामले को और मुश्किल बनाती है, क्योंकि कोई भी देश ऐसी पाबंदियां नहीं चाहता जिससे वह दूसरे देश से पीछे रह जाए.

  • योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा में 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा में 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित ई-बसों में अब तक 7.18 लाख से अधिक लोगों ने की यात्रा

    तीनों प्राधिकरणों में 2.24 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, लगातार सेवाओं का हो रहा विस्तार

    जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से ग्रीन मोबिलिटी तक, योगी सरकार के विजन को मिली जमीनी स्तर पर सफलता

    24 घंटे लाइव निगरानी की तैयारी, नोएडा में बनेगा तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों के लिए कमांड सेंटर

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया।

    नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया।

    जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार
    नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।

    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन
    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा।

    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग
    यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है।

    सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है।

    बॉक्स
    नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी

    यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है।

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी।

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है।

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

  • सड़क किनारे पसरे पर अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मीरा के पसरे से खरीदा ‘आशीर्वाद का दीया’

    सड़क किनारे पसरे पर अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मीरा के पसरे से खरीदा ‘आशीर्वाद का दीया’

    सड़क किनारे पसरे पर अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मीरा के पसरे से खरीदा ‘आशीर्वाद का दीया’

    तेलीबांधा मरीन ड्राइव में मिट्टी के दीये बेच रही मीरा  से मुख्यमंत्री ने की आत्मीय बातचीत, एक हजार रुपए देकर किया उसके श्रम और स्वावलंबन का सम्मान

    मुख्यमंत्री ने पूछा – सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है? मीरा ने बताया – जनधन खाता खुला है, महतारी वंदन योजना की राशि भी मिल रही

    ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं खरीदा मिट्टी का दीया, सेवा और जनभागीदारी के संकल्प से जुड़ने का किया आह्वान

    स्थानीय श्रम और स्वावलंबन के सम्मान का संदेश दे गया मुख्यमंत्री का सहज अंदाज

    रायपुर 
    राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में सड़क किनारे पसरा लगाकर मिट्टी के दीये बेच रही मीरा के लिए आज का दिन अचानक बेहद खास बन गया। रोज की तरह वह अपने छोटे से पसरे पर दीये सजाकर ग्राहकों की प्रतीक्षा कर रही थी। इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला अचानक उसके पसरे के पास जाकर रुक गया। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीरा के पसरे पर रखे मिट्टी के दीयों को देखा और ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए वहीं से एक दीया खरीदा। मुख्यमंत्री ने महिला को एक हजार रुपए प्रदान किए। मुख्यमंत्री का यह सहज भाव स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय के माध्यम से आजीविका अर्जित करने वाली मीरा के श्रम, स्वाभिमान और स्वावलंबन के सम्मान का सुंदर संदेश भी दे गया।

    मुख्यमंत्री का सड़क किनारे लगे छोटे से पसरे पर अचानक पहुंचना आसपास मौजूद लोगों के लिए भी सुखद आश्चर्य का अवसर बन गया। बिना किसी औपचारिकता के मुख्यमंत्री ने मीरा से उसके कामकाज और परिवार का हालचाल पूछा। 

    बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री साय ने मीरा से पूछा कि उसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री के सवाल पर मीरा ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत उसका बैंक खाता खुल चुका है। उसने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत उसे हर महीने एक हजार रुपए की राशि प्राप्त हो रही है।

    महिला के मुंह से योजनाओं का लाभ मिलने की बात सुनकर मुख्यमंत्री साय ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक सीधे पहुंचे, उसे संबल दे और उसके जीवन को बेहतर बनाने में सहायक बने। शासन की प्राथमिकता यही है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पूरी सहजता और पारदर्शिता के साथ पहुंचे।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनधन योजना ने गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आर्थिक समावेशन का मजबूत आधार तैयार किया है। बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के कारण आज विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों तक पहुंच रही है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि उनके छोटे-बड़े दैनिक खर्चों में सहयोग देने के साथ उनमें आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ा रही है। 

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क किनारे पसरा लगाने वाले छोटे विक्रेता हों, कुम्हार हों, शिल्पकार हों अथवा स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली हमारी माताएं और बहनें – इन सभी के परिश्रम में आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की शक्ति निहित है। अपने हुनर और मेहनत से आजीविका अर्जित करने वाले ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना केवल किसी वस्तु की खरीद नहीं है। उसके पीछे किसी परिवार का श्रम, किसी कारीगर का हुनर और किसी छोटे व्यवसायी के आत्मसम्मान से जुड़ी आजीविका होती है। जब हम स्थानीय विक्रेताओं और कारीगरों से सामान खरीदते हैं तो हमारे इस छोटे से प्रयास से उनके परिवार और उनकी आजीविका को संबल मिलता है।

    सेवा और जनभागीदारी का प्रतीक बनेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

    मुख्यमंत्री साय द्वारा मीरा से खरीदा गया मिट्टी का यह दीया ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, जनकल्याण और विकास के प्रति सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में दीया केवल प्रकाश का माध्यम नहीं, बल्कि आशा और सकारात्मक संकल्प का प्रतीक है। मिट्टी का एक छोटा-सा दीया जब जलता है तो अपने आसपास के अंधकार को दूर करता है। इसी तरह समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब सेवा का एक छोटा-सा संकल्प लेकर आगे बढ़ता है तो सामूहिक प्रयास से बड़े और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।

    उन्होंने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी भावना को अभिव्यक्त करता है। यह सेवा और विकास के प्रति हमारे संकल्प तथा जनभागीदारी के सामर्थ्य का प्रतीक है। प्रदेश के नागरिक जब इस भावना से जुड़ेंगे तो सेवा का यह संकल्प घर-घर और जन-जन तक पहुंचेगा।

    सेवा को जन-जन का संकल्प बनाने का अभियान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं। प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को जनभागीदारी के माध्यम से और मजबूत करने का अवसर है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सेवा संकल्प अभियान से पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ जुड़ें। अपने गांव, शहर और आसपास स्वच्छता के कार्यों में सहभागी बनें, पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आएं, जरूरतमंदों की सहायता करें और अपनी क्षमता के अनुरूप जनसेवा का कोई न कोई संकल्प अवश्य लें।

    उन्होंने कहा कि सेवा का कोई कार्य छोटा नहीं होता। किसी जरूरतमंद की सहायता, अपने आसपास स्वच्छता, एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना, स्थानीय कारीगर से कोई वस्तु खरीदना अथवा समाज के हित में किया गया छोटा-सा प्रयास भी जनसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

    एक छोटे से दीये में समाया बड़ा संदेश

    तेलीबांधा मरीन ड्राइव के सड़क किनारे लगे एक छोटे से पसरे से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा खरीदा गया मिट्टी का यह दीया कई मायनों में खास बन गया। इसमें एक ओर मेहनत से आजीविका अर्जित कर रही महिला के श्रम और स्वावलंबन का सम्मान जुड़ा, तो दूसरी ओर सहज बातचीत में जनधन और महतारी वंदन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच भी सामने आई। इसके साथ ही यही दीया अब ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी और विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगा।

    इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा उपस्थित थे।

  • सेवा संकल्प अभियान- प्रदेशभर में होंगे जनसेवा के कार्यक्रम

    सेवा संकल्प अभियान- प्रदेशभर में होंगे जनसेवा के कार्यक्रम

    विशेष लेख 
    सेवा संकल्प अभियान

    प्रदेशभर में होंगे जनसेवा के कार्यक्रम

    रायपुर                       

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक महीने का देशव्यापी अभियान है। इसका मकसद मोदी के सेवा और विकास से जुड़े कामों को लोगों तक पहुंचाने के साथ जनसेवा के कार्यक्रमों को बढ़ाना है। इन कार्यक्रमों में रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, स्कूलों में प्रतियोगिताएं आदि शामिल हैं।

                 इस अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति आभार व्यक्त करना, विकसित भारत 2047 का सामूहिक संकल्प लेना, केन्द्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाना तथा प्रत्येक परिवार की सहभागिता के साथ व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

               ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में) निरंतर जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यकाल के सम्मान में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।  सेवा गतिविधियां में नागरिकों को रक्तदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य परीक्षण, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसी 25 सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। श्रमदान के रूप में नागरिकों से कम से कम 25 मिनट श्रमदान करने की अपील की गई है, जिसकी फोटो या वीडियो माई भारत पोर्टल पर अपलोड करने पर डिजिटल प्रमाण-पत्र मिलेगा। 

                    विशेष कार्यक्रम के रूप में 17 सितम्बर 2026 को आशीर्वाद का दीया, नमो सेवा गाथा के तहत  संभागीय मुख्यालय रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर (सरगुजा), और जगदलपुर (बस्तर), के आडिटोरियम में संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन से समन्वय कर प्रस्तावित तिथि अनुसार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। नमो सेवा गाथा अंतर्गत नुक्कड नाटक, नृत्य नाटिका जिले केस्थानीय कलाकार के माध्यम से सांस्कृतिक आयोजन किया जाएगा। सेवा सेतु अभियान (विकासखंडों में बहुउद्देशीय शिविर) और सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज जैसी अभिनव गतिविधियां आयोजित होंगी।

              इन गतिविधियों का संचालन शासकीय विभागों के साथ-साथ नागरिकों तथा सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से भी किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में सभी आयु वर्ग की महिलायें, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, स्वैच्छिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाएँ, स्वयं-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं एवं आम नागरिकों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।

    कब से कब तक चलेगा अभियान

          यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जबकि 7 अक्टूबर को उनके सार्वजनिक पद पर 25 साल पूरे होंगे। 17 अक्टूबर 2026 को अभियान का समापन बड़े कार्यक्रम के साथ किया जाएगा। 

    प्रदेशभर में होंगे सेवा कार्यक्रम

         अभियान के तहत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच स्कूल और कॉलेजों में ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में आयोजित  किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किये गए सेवा कार्यो और विकसित भारत की संकल्पना पर जानकारी दी जाएगी और ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जागरूकता गतिविधियां होंगी। ब्लॉक स्तर पर ‘सेवा सेतु’ शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद दी जाएगी।

    आंगन का उत्सव’ में पोषण और महिला-बाल कल्याण पर जोर

                 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों को दी जाएगी। कार्यक्रमों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनका सम्मान भी किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    कहानी बदलाव की’में सामने आएंगी सफलता की वास्तविक कहानियां

               अभियान के दौरान ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियों का संकलन किया जाएगा। इन कहानियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव किस तरह आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। हितग्राहियों की सफलता की कहानियां अन्य पात्र नागरिकों को भी योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।

    ‘विकसित भारत’ पर रहेगा जोर

            स्कूलों में विकसित भारत 2047 विषय पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। ‘नमो सेवा’ के तहत नुक्कड़ नाटक और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन मिलन सेवा’ जैसे कार्यक्रम भी रखे गए हैं। पिछले 25 वर्षों के सेवा कार्यो में, प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं और देश में आए बदलावों की कहानी को एक सरल, भावनात्मक और संगीतपूर्ण नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से गाँव – गाँव तक पहुंचाया जाएगा। यह कार्य प्रदेशभर के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत, सामुदायिक केंद्र एवं अन्य सार्वजानिक स्थलों पर आयोजित किया जाएगा ।

    50 बदलाव वाले स्थानों का दौरा

           ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के तहत करीब 50 ऐसे स्थान चुने जाएंगे, जिन्हें बीजेपी मोदी सरकार के दौर में हुए बदलाव का उदाहरण मानती है। इनमें गुजरात की GIFT City और बस्तर जैसे स्थान शामिल हैं। सोशल मीडिया क्रिएटर्स को भी इन जगहों पर ले जाने की योजना है।

    17 अक्टूबर को बड़ा समापन

         अभियान के अंतिम दिन ‘जनसेवक महाकुंभ’ में पंचायत से संसद तक के करीब 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना है। इस दौरान सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ की सभी छह कड़ियां गाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

    धनंजय राठौर
    संयुक्त संचालक, (जनसंपर्क) रायपुर

                               

  • डी जे के शोर और अव्यवस्था से मुक्त हों त्यौहार. डॉ दिनेश मिश्र

    डी जे के शोर और अव्यवस्था से मुक्त हों त्यौहार. डॉ दिनेश मिश्र

    डी जे के शोर और अव्यवस्था से मुक्त हों त्यौहार. डॉ दिनेश मिश्र
     
    उत्सव का महत्व डी जे से नहीं सामाजिक उपयोगिता से तय हो

    बिलासपुर/रायपुर
    पिछले वर्ष  महाराष्ट्र के सोलापुर और इस वर्ष पूना में आम नागरिकों के गणेशोत्सव में डी जे, कोलाहल, से मुक्त करने के लिए पहल की , जिसमें से सोलापुर तो पिछले वर्ष से ही डीजे मुक्त हो चुका है और इस वर्ष पूना में यह आवाज उठी  है. जबकि गणेशोत्सव की परंपरा करीब  125 वर्ष पहले लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में महाराष्ट्र से ही आरंभ हुई थी ताकि लोगों में एकता बने, एक दूसरे के साथ मिलकर दुख सुख बाँटे.  अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्रा ने उक्त अपील जारी करते हुए कहा कि 
    सांस्कृतिक कार्यक्रम,  साहित्यिक प्रतियोगिताएं, कवि सम्मेलन, जैसे कार्यक्रम के बदले  अब उत्सव का स्वरूप प्रति वर्ष बदलता हुआ नजर आ रहा है , जिसमें आस्था के नाम परशोरशराबे, फिल्मी गानों, मनमानी पूर्ण रोकटोक, हावी होने लगी है. क्या रायपुर बल्कि कहा जाए पूरे देश के नागरिकों को अपने इन उत्सवों की गरिमा, महत्व के सम्बन्ध में सोचने की आवश्यकता है. प्रशासन, नगरनिगम, पुलिस व्यवस्था बनाने  का प्रयास करते है ,पर जनसमर्थन के बिना वे भी सफल नहीं हो पाते.
    हमारे त्योहार , की पहचान ,शोर, शराबे और दिखावे से नहीं,  आस्था व संस्कारों से है. गणेशोत्सव हमारी धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण पर्व है। गणेश जी बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभारंभ के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए गणेशोत्सव केवल पूजा और मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी होना चाहिए।

    लेकिन आज सार्वजनिक उत्सवों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। भक्ति और सामाजिक सहभागिता के स्थान पर कई बार तेज आवाज में डीजे, अत्यधिक शोर, चकाचौंध, दिखावा और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा उत्सव का प्रमुख हिस्सा बन जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि जिस त्योहार से आनंद और शांति मिलनी चाहिए, वही आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।

    गणेशोत्सव का अर्थ तेज आवाज में डीजे बजाना नहीं है।हमें यह विचार करना होगा कि क्या हमारी आस्था इतनी कमजोर है कि उसे व्यक्त करने के लिए अत्यधिक शोर आवश्यक हो? क्या भक्ति की गहराई डीजे की आवाज से निर्धारित होगी?निश्चित रूप से नहीं।

    डीजे का बढ़ता शोर और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है .आज सार्वजनिक आयोजनों में देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाना आम होता जा रहा है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, विद्यार्थियों, बीमार व्यक्तियों और उन लोगों पर पड़ता है जिन्हें सुबह जल्दी अपने काम पर जाना होता है।

    अत्यधिक ध्वनि वातावरण में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद में बाधा और एकाग्रता में कमी जैसी परेशानियां बढ़ा सकती है। लंबे समय तक अत्यधिक शोर स्वास्थ्य के लिए भी उचित नहीं माना जाता।
    एक चिकित्सक के रूप में मेरा मानना है कि सार्वजनिक उत्सवों में स्वास्थ्य और नागरिक सुविधा का ध्यान रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।जिस उत्सव के  कोलाहल से किसी बीमार व्यक्ति की परेशानी बढ़े, किसी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित हो या किसी बुजुर्ग की नींद खराब हो, उसके स्वरूप पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    न्यायालय के निर्देशों का सम्मान जरूरी

    ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर ध्वनि की सीमा, समय और नागरिकों के अधिकारों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

    त्योहार मनाने की स्वतंत्रता सभी को है, लेकिन किसी की स्वतंत्रता दूसरे व्यक्ति के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकती।

    इसलिए धार्मिक आयोजनों में भी निर्धारित नियमों का पालन होना चाहिए।कानून का पालन करना आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक होने का प्रमाण है।

    सड़कें जाम नहीं, व्यवस्था चाहिए .सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान एक और गंभीर समस्या सड़कों पर पंडाल और अन्य व्यवस्थाओं के कारण होने वाला अतिक्रमण तथा यातायात अव्यवस्था है।

    कई स्थानों पर सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाने से यातायात बाधित होता है और जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी परेशानी हो सकती है।

    उत्सव सार्वजनिक स्थान पर हो तो सार्वजनिक जिम्मेदारी भी साथ होनी चाहिए।पंडाल लगाने से पहले यातायात, पैदल यात्रियों और आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    लेजर की तेज रोशनी भी परेशानी का कारण है.आज सजावट के नाम पर अत्यधिक तेज और चमकदार लाइटों का उपयोग बढ़ गया है। आकर्षक सजावट अच्छी बात है, लेकिन वह सुरक्षित और मर्यादित भी होनी चाहिए।अत्यधिक चमकदार रोशनी से आसपास के लोगों को असुविधा हो सकती है और वाहन चालकों का ध्यान भी प्रभावित हो सकता है। 
    पिछले ही वर्ष मेरे पास एक मरीज आया था जिसकी आँखों में लेसर लाइट के प्रभाव से रक्तस्राव हो गया था, इसके पहले भी अलग अलग स्थानों से हार्ट फेल होने , साँस रुकने के अनेक मामले आए हैं .उत्सव की सुंदरता ऐसी हो जो आंखों को सुख दे, परेशानी नहीं।

    हमारी पुरानी परंपराओं में सामाजिकता थीछत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सामूहिकता और आपसी संवाद का विशेष महत्व रहा है। पहले सार्वजनिक अवसरों पर लोग एक-दूसरे के घर और कार्यक्रमों में बैठते थे, बातचीत करते थे और सामाजिक संबंध मजबूत करते थे।

    रायपुर के अनेक गणेशोत्सव के पंडालों में पान-सुपारी खिलाने का कार्यकम की परंपरा केवल खान-पान से जुड़ी नहीं थी, बल्कि उसमें अपनापन और संवाद का भाव भी था। लोग बैठते थे, बातचीत करते थे और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते थे।

    आज जब समाज में संवाद का समय कम होता जा रहा है, तब सार्वजनिक उत्सवों को लोगों को जोड़ने का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

    साहित्य और संस्कृति को मिले मंच.गणेशोत्सव में साहित्यिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं।

    निबंध लेखन, भाषण, कविता पाठ, वाद-विवाद, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी और सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जा सकता है।

    गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक हैं। इसलिए गणेशोत्सव में ज्ञान आधारित कार्यक्रमों को विशेष स्थान मिलना चाहिए।

    खेलकूद से स्वस्थ समाजगणेशोत्सव के दौरान कबड्डी, खो-खो, दौड़, शतरंज, कैरम, बैडमिंटन तथा अन्य खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकती हैं।.इससे बच्चों और युवाओं को मोबाइल और स्क्रीन से कुछ समय दूर रहकर मैदान से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

    डीजे कुछ घंटों का मनोरंजन देता है, लेकिन खेल जीवनभर के लिए अनुशासन, स्वास्थ्य और टीम भावना सिखा सकता है।

    फिल्मी फूहड़ता नहीं, संस्कृति की प्रस्तुति होधार्मिक उत्सवों में मनोरंजन का स्थान अवश्य है, लेकिन उसकी अपनी मर्यादा होनी चाहिए।
    फिल्मी गानों पर आधारित फूहड़ या अशोभनीय प्रस्तुतियों के बजाय भजन, लोकगीत, लोकनृत्य, नाटक, देशभक्ति कार्यक्रम और सामाजिक संदेश देने वाली प्रस्तुतियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और लोकसंस्कृति नाचा , पंडवानी को मंच मिलना चाहिए।हमारे त्योहार हमारी संस्कृति को मजबूत करने का अवसर हैं—उन्हें केवल मनोरंजन का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।

    गणेशोत्सव सामाजिक जागरूकता का अभियान बनेगणेशोत्सव के मंच से भी समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश भी दिए जा सकते हैं 

    – नशामुक्ति,सड़क सुरक्षा,स्वच्छतापर्यावरण संरक्षण,वृक्षारोपण,जल संरक्षण,रक्तदा- नेत्रदान,शिक्षा,बालिका शिक्ष,स्वास्थ्य जागरूकता,अंधविश्वास के विरुद्ध वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    यदि प्रत्येक गणेश पंडाल प्रतिदिन समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश दे, तो हजारों लोगों तक जागरूकता पहुंच सकती है।

    आस्था रहे, लेकिन दूसरों की शांति भी रहे यह उत्सव की गरिमा और धार्मिक भावना को बनाए रखने का प्रयास बनाया जाए.

     धार्मिक उत्सव में पूजा  अर्चना करें, आरती करें, भजन गाएं, प्रसाद बांटें, सांस्कृतिक कार्यक्रम करें और लोगों को जोड़ें—लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखें कि हमारे उत्सव से किसी अन्य व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी न हो।
     सोचने की बात यह है कि मेरी आस्था मेरे लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन दूसरे व्यक्ति की शांति और स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस और अफ्रीका की किलिमंजारो को फतह करने वाली पर्वतारोही डॉ. आशा की सफलता

    यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस और अफ्रीका की किलिमंजारो को फतह करने वाली पर्वतारोही डॉ. आशा की सफलता

     रेवाड़ी
     भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है।

    उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया।

    दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है।

    माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह
    21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।

    वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए।

    उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना।

    माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह
    माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया।

    29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।

    इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।

    माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक
    डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं।

    एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है।

    27 वर्षों की सरकारी सेवा
    डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया।

    उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है।

    सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर
    माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है।

    एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
    पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।

    वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है।

    शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश
    डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है।

    भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।

  • Stock Market Crash: 3 बड़े कारणों से शेयर बाजार में भूचाल, 1400 अंक टूटा सेंसेक्स

    Stock Market Crash: 3 बड़े कारणों से शेयर बाजार में भूचाल, 1400 अंक टूटा सेंसेक्स

    मुंबई 
    मंगलवार का दिन शेयर बाजार में पैसे लगाने वालों के लिए अमंगलकारी साबित हो रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि सेंसेक्स-निफ्टी ने तूफानी शुरुआत की थी, लेकिन देखते ही देखते बाजार में ऐसा भूचाल आया कि दोनों इंडेक्स क्रैश हो गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन के हाई लेवल से एक झटके में 1400 अंक से ज्यादा टूटकर बंद हुआ. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी डे-हाई से 474 अंकों का गोता लगा गया. शेयर मार्केट में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं।   

    तूफानी तेजी, फिर तगड़ी गिरावट
    शेयर मार्केट में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत धुआंधार तेजी के साथ हुई और निवेशकों को लगा कि बीते सप्ताह की गिरावट पर ब्रेक लग गया, लेकिन उनकी खुशी महज घंटेभर बाद ही टेंशन में तब्दील हो गई. सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ वो कारोबार आगे बढ़ने के साथ तेज होता चला गया. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर BSE Sensex 777 अंक की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट है। 

    सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं, बल्कि NSE Nifty ने भी निवेशकों को बुरी तरह चौंकाया है. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,398 की तुलना में तेज रफ्तार के साथ 23,576 पर कारोबार की शुरुआत की थी और 23,592 तक उछला था, लेकिन फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये भी टूटता चला गया और खबर लिखे जाने तक अपने दिन के हाई लेवल से 474 अंक फिसलकर 23,118 पर आकर बंद हुआ। 

    शेयर मार्केट क्रैश के कारण
    Share Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई हैं. इनमें कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से लेकर US बॉन्ड यील्ड तक का रोल है। 

    पहला कारण: वेस्ट एशिया में अमेरिका-ईरान टेंशन और मध्य पूर्व में फैलते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है. इसके असर तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत तेज उछाल के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रही है. इसने महंगाई के जोखिम को बढ़ाते हुए शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है। 

    दूसरा कारण: शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट के पीछे दूसरा कारण अमेरिका से जुड़ा हुआ है. दरअसल, सोमवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी पर जा पहुंची, जो अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार है. गौरतलब है कि 10 साल की बॉन्ड यील्ड को ग्लोबल बेंचमार्क माना जाता है और ये सीधे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है. वहीं बीते कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसका असर मंगलवार को भारतीय बाजार पर भी नजर आया है। 

    तीसरा कारण: शेयर बाजार में मंगलवार को IT इंडेक्स के अलावा ज्यादातर कैटेगरी में तेज गिरावट दर्ज की गई. मार्केट टूटने का तीसरा बड़ा कारण तमाम ग्लोबल टेंशन और तेल की कीमतों में इजाफे के बीच शेयर बाजार के लिए डर का पैमाना माने जाने वाले India VIX में अचानक उछाल भी है. ये 6 फीसदी के आसपास बढ़कर 13 के पार निकल गया, जो आने वाले दिनों में शेयर मार्केट में बिकवाली का इंडिकेशन देता है। 

    ये शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे
    Stock Market Crash के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की लिस्ट देखें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल BEL Share (5%), IndiGo Share (3.56%), Bajaj Finserv Share (2.96%), Adani Ports Share (2.50%), SBI Share (2.42%), Titan Share (2.35%), Bajaj Finance Share (2.34%), Asian Paints Share (2.31%), M&M Share (2.19%), Trent Share (2%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. 

  • लखनऊ से कानपुर का बस सफर हुआ महंगा, जाजमऊ पुल मरम्मत के कारण बदला रूट

    लखनऊ से कानपुर का बस सफर हुआ महंगा, जाजमऊ पुल मरम्मत के कारण बदला रूट

    लखनऊ
    राजधानी से कानपुर का बस से सफर महंगा हो सकता है। वजह जाजमऊ पुल की मरम्मत के चलते तीन माह तक परिवहन निगम की बसों का रूट बदला रहेगा नए रूट के मुताबिक आलमबाग से रवाना होने वाली रोडवेज बसें उन्नाव के आगे गदन खेड़ा, उन्नाव शहर से लालगंज, फतेहपुर होकर कानपुर पहुंचेंगी।

    नए रूट से बसों की दूरी 50 किलोमीटर बढ़ने की संभावना है। रोडवेज प्रशासन बदले रूट का सर्वे कराएगा। इसमें जितने किलोमीटर ज्यादा बस संचालन होगा, उसी आधार पर बस का किराया बढ़ेगा। 50 किलोमीटर की दूरी अधिक होती है तो 60 रुपये किराया ज्यादा पड़ सकता है। फिलहाल अभी किराया ज्यों का त्यों है।

    कानपुर के जाजमऊ गंगा पुल की मरम्मत कार्य 13 सितंबर से 13 दिसंबर तक भारी वाहनों के साथ रोडवेज बसों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। रोडवेज बसें बदले रूट से आवागमन करेंगी, इससे बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।

    बदले रूट से दूरी करीब 140 किमी होगी
    लखनऊ से कानपुर जाने वाली बसें गदन खेड़ा चौराहा से रायबरेली रोड से बक्सर पुल के रास्ते फतेहपुर होकर कानपुर की ओर जा सकेंगी। क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया, आलमबाग से कानपुर जाने वाली बसों के रूट तीन माह तक बदले रहेंगे।

    इस दौरान बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। डायवर्जन रूट पर जल्द सर्वे कराकर बसों के किराये पर असर पड़ेगा।
    लखनऊ और कानपुर बस डिपो की 80 से ज्यादा साधारण और ई बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों से रोजाना 15 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं।

    गंगा पुल की मरम्मत का कार्य तीन माह तक चलेगा। इस दौरान यात्रियों को लंबी दूरी तय करके जेब हल्की करनी पड़ेगी। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर की दूरी 90 किलोमीटर है। बदले रूट पर दूरी करीब 140 किमी. होगी।