Author: Admin

  • फर्जी पासपोर्ट कांड में MP STF का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों में दबिश; ग्वालियर-भोपाल से जुड़े तार

    फर्जी पासपोर्ट कांड में MP STF का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों में दबिश; ग्वालियर-भोपाल से जुड़े तार

    ग्वालियर
    जाली दस्तावेजों के सहारे भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मददगारों के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने सात राज्यों में डेरा डाल दिया है।

    इस फर्जीवाड़े का केंद्र बने ग्वालियर और भोपाल के कई संदिग्धों को चिह्नित कर लिया गया है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। यह जाली दस्तावेज बनाने वाले चेहरे हैं, जिनके जरिये बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने।

    एसटीएफ ने भेजी टीमें
    एसटीएफ अधिकारियों ने महाराष्ट्र, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल में अपनी टीमें भेजी हैं। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्ट का इस्तेमाल कर बांग्लादेशी नागरिक इन राज्यों के विभिन्न शहरों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, जाली आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और अन्य स्थानीय प्रमाण पत्र तैयार करने वाले गिरोह में भोपाल के कुछ शातिर जालसाज शामिल हैं। एसटीएफ ने भोपाल के इस नेटवर्क के कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली है।

    गिरोह के सदस्य मोटी रकम लेकर अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार करवाते थे, जिसके आधार पर पासपोर्ट जारी हो जाते थे।

    जल्द होगा बड़ा राजफाश
    एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों में भेजी गई टीमों से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। संदिग्धों की धरपकड़ के साथ ही पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल बिचौलियों को बेनकाब किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस पूरे मामले का एक बड़ा खुलासा किया जाएगा।

     

  • भोपाल के बड़ा तालाब-कलियासोत किनारे कब्जों पर NGT में आज सुनवाई, सर्वे रिपोर्ट होगी पेश

    भोपाल के बड़ा तालाब-कलियासोत किनारे कब्जों पर NGT में आज सुनवाई, सर्वे रिपोर्ट होगी पेश

    भोपाल 

    भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब और कलियासोत डैम की 'हद' की रिपोर्ट मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) में पेश की जाएगी। एनजीटी के आदेश पर विशेष टीम ने 5 दिन तक सर्वे किया था।इस दौरान ड्रोन भी उड़ाया। सर्वे में बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस समेत कई रेस्टोरेंट और कब्जे तालाब-डैम की सीमा में मिले। सुनवाई में एनजीटी कार्रवाई के संबंध में आदेश जारी कर सकता है।

    बता दें कि 4 सितंबर को भोपाल के भदभदा डैम के गेट खोलने पर सवाल उठे थे। बड़ा तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) पर अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए एनजीटी ने पानी 1666.80 फीट पर बनाए रखने और गेट नहीं खोलने को कहा था, लेकिन तालाब में जब 0.10 फीट पानी कम था, तब ही डैम का गेट खोल दिया गया था।

    अगले दिन से ही सर्वे शुरू किया अगले दिन 5 सितंबर से ही एनजीटी की टीम ने सर्वे शुरू किया था। पहले दिन भदभदा डैम, सैर सपाटा समेत कई जगहों पर टीमें पहुंची। 9 सितंबर तक सर्वे कार्य जारी रहा।

    सर्वे में क्या-क्या मिला था?
        बैरसिया विधायक खत्री के फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए तालाब के वेटलैंड क्षेत्र के अंदर सड़क का निर्माण देखने को मिला। यह सड़क तालाब के एफटीएल क्षेत्र में स्थित दो मुनारों के बीच से होकर फार्म हाउस तक जाती हुई पाई गई।

        राकेश शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा तालाब क्षेत्र के अंदर मकान बनाए जाने की भी जानकारी सर्वे टीम को मिली।

        सीआई ऑटोमोबाइल का यार्ड भी एफटीएल क्षेत्र से लगा हुआ पाया गया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा तालाब के नजदीक कब्जा कर रेस्टोरेंट निर्माण किए जाने की भी जानकारी सर्वे के दौरान सामने आई।

        कई स्थानों पर मुनार से पानी की सीमा लगभग 5 से 10 फीट आगे तक पहुंची हुई पाई गई।

        कई जगह रिटेनिंग वॉल के ऊपर से पानी बहता हुआ पाया गया। करबला पंप हाउस के सामने, श्रीन नदी के आसपास और अन्य स्थानों पर तालाब में जलकुंभी एवं् पानी में उगने वाली घास का फैलाव भी दिखाई दिया।

        खानूगांव क्षेत्र में कई स्थानों पर FTL एवं ग्रीन बेल्ट के मुनारे मौके पर दिखाई नहीं दिए।

        हलालपुरा के फिजा फार्म क्षेत्र में पक्का पुल बना हुआ पाया गया और उसके आगे तक पानी फैला हुआ था। वहीं, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे सड़क के आसपास लगभग 6 फीट तक का भराव दिखाई दिया।

        वार्ड क्रमांक 26, ग्राम खुदागंज के कई स्थानों पर जलस्तर FTL सीमा से काफी आगे तक पहुंचा हुआ दिखाई दिया। सर्वे के दौरान दर्जनों रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण पानी की सीमा से बिल्कुल सटे हुए पाए गए।

        कलियासोत तालाब के जलभराव क्षेत्र के अंदर से ही सड़क का निर्माण मिला।

        प्रभावशाली लोगों से जुड़े बड़े रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण तालाब की सीमा के भीतर या बेहद करीब पाए गए। कई स्थानों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें गाड़कर पानी के प्राकृतिक बहाव और जलभराव के रास्ते को बाधित करने की बात भी सामने आई है।

    सुनवाई में केरवा डैम को लेकर फैसले की संभावना
    टीम को केरवा डैम के आसपास भी सर्वे करना था, लेकिन डैम के FTL पर वर्तमान में पानी उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण इस क्षेत्र में ग्राउंड ट्रुथिंग और सर्वे की प्रक्रिया नहीं हुई।

    टीम सदस्यों के बीच चर्चा और विचार-विमर्श के बाद सभी पक्षों में यह सहमति बनी कि केरवा की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई में कोई जल्दबाजी न की जाए। मंगलवार को होने वाली सुनवाई के बाद केरवा क्षेत्र में आगे की ग्राउंड ट्रुथिंग और जांच की प्रक्रिया तय की जाएगी।

    टीम ने यहां किया सर्वे
    खानूगांन के अंडर कंस्ट्रक्शन क्रूज साइट, आर्मी स्पोर्ट्स एरिया, कोहेफिजा, हलालपुरा के फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे, चिरायु अस्पताल क्षेत्र, भौंरी, कोलूखेड़ी, खजूरी सड़क, बैरागढ़ सहित कई क्षेत्रों में मौके पर पहुंचकर ग्राउंड ट्रुथिंग की गई।

    टीम में ये रहे शामिल
    ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान सीपीसीबी, एमपीपीसीबी के अधिकारी, पटवारी और याचिकाकर्ता राशिद नूर खान के साथ एनजीटी द्वारा नियुक्त विशेष सदस्य डॉ. सुभाष सी. पांडेय भी मौजूद रहे।

  • MP के 37 जिलों में बारिश कम, भोपाल-ग्वालियर समेत 18 जिलों में कोटा पूरा; आज से कमजोर होगा मानसून

    MP के 37 जिलों में बारिश कम, भोपाल-ग्वालियर समेत 18 जिलों में कोटा पूरा; आज से कमजोर होगा मानसून

    भोपाल
    प्रदेश में वेदर सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ मानसूनी वर्षा का दौर धीमा पड़ गया है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम साफ रहा। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक श्योपुर में 21 और शिवपुरी में 18 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं नर्मदापुरम में 13.1, खरगोन में 10.8, इंदौर में 7.2 और राजगढ़ में 7 मिमी पानी गिरा। राजधानी भोपाल सहित बाकी जिलों में हल्की बूंदाबांदी के बाद धूप खिल गई।

    यहां पड़ सकती हैं बौछारें
    मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को दमोह, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, पन्ना, कटनी सागर, नर्मदापुरम व जबलपुर जैसे जिलों में मामूली बारिश हो सकती है।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं, लेकिन विदाई से पहले प्रदेश में वर्षा का एक और दौर देखने को मिलेगा।

    ये वेदर सिस्टम सक्रिय
    वर्तमान में राजस्थान-गुजरात सीमा पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मुख्य मानसून ट्रफ राजगढ़ व दमोह से और अरब सागर से झारखंड तक फैली दूसरी ट्रफ लाइन भी प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है। इन सक्रिय वेदर सिस्टम के चलते अगले 48 से 72 घंटों के दौरान भोपाल, सीहोर, राजगढ़, उज्जैन और चंबल-ग्वालियर संभाग सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक की स्थिति बनी रहने का अनुमान है।

    मानसूनी सीजन को अब 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में 88% बारिश ही हुई है। इंदौर, उज्जैन-जबलपुर समेत 37 जिलों में कोटा फुल नहीं हुआ है।भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया। आलीराजपुर में तो कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश में बारिश का सिस्टम आज से और कमजोर हो गया है।

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक अगले 4 दिन तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है।

    बता दें कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से यानी- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में पिछले चार दिन से भारी बारिश का दौर चल रहा था।

    सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर हो जाएगा। इस वजह से 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।

    पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड बारिश, लेकिन पश्चिम पिछड़ा
    मौसम विभाग के अनुसार, इस बार प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में रिकॉर्ड बारिश हुई। सागर के निवाड़ी में कोटे से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34%, मैहर में 29% पानी ज्यादा गिर गया।

    यदि इंच के हिसाब से बात करें तो मऊगंज में सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सतना में 50 इंच से ज्यादा पानी गिरा। दूसरी ओर, इंदौर संभाग के आलीराजपुर में सिर्फ 16 इंच पानी ही गिरा है।

    आज से और कमजोर होगा सिस्टम
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होने की संभावना है।

    अब तक 32.8 इंच बारिश, 23 जिलों में ज्यादा
    IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 834.4 मिमी यानी, 32.8 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 34.9 इंच (886.6 मिमी) की तुलना में 2.1 इंच कम है।

    वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है।

     

     

  • अमेरिका से लौटने के बाद गोविंदा ने बच्चों के साथ मिलकर घर पर बप्पा के किए दर्शन

    अमेरिका से लौटने के बाद गोविंदा ने बच्चों के साथ मिलकर घर पर बप्पा के किए दर्शन

    बॉलीवुड एक्टर गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहुजा के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से खबरें सुर्खियों में हैं. ऐसे में इस साल गणेश चतुर्थी पर दोनों एक साथ नजर नहीं आए, जिसने चर्चाओं को और बढ़ा दिया.

    सोमवार 14 सितंबर को सुनीता आहुजा ने अपने बच्चों टीना अहूजा और यशवर्धन अहूजा के साथ घर पर गणपति बप्पा का स्वागत किया. इस दौरान गोविंदा अमेरिका में थे, इसलिए वो पूजा में शामिल नहीं हो सके. सुनीता ने पैपराजी से बातचीत में कहा था, 'गोविंदा जी अमेरिका में हैं, रात को वापस आएंगे. अगर थके हुए, तो आज दर्शन के लिए नहीं आएंगे, कल आएंगे. ये उनका घर है, तो उन्हें आना ही है.'

    देर रात अमेरिका से वापस लौटने के बाद गोविंदा सीधे परिवार के पास गए और गणपति के दर्शन किए. उन्होंने बच्चों टीना और यशवर्धन के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और बप्पा से आशीर्वाद लिया. लेकिन इस बार सुनीता आहूजा इन तस्वीरों और वीडियो में नजर नहीं आईं.

    गोविंदा-सुनीता में दूरियां
    एक एजेंसी से बातचीत में गोविंदा ने बताया कि उनके परिवार में गणपति मनाने की परंपरा सालों पुरानी है, जो उनकी मां से चली आ रही है. उन्होंने कहा, 'अब मेरा बेटा यशवर्धन इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है.' गोविंदा ने बेटे के उज्ज्वल भविष्य और बेटी टीना के लिए भी प्रार्थना की. गोविंदा ने कहा कि गणपति बाप्पा से प्रार्थना है कि हमें रिद्धि-सिद्धि प्रदान करें. हमारी जिंदगी में किसी तरह का कलेश, कष्ट और बाधा ना आए. हालांकि, इस दौरान उन्होंने पत्नी सुनीता का जिक्र नहीं किया.  

    गोविंदा और सुनीता आहूजा के शादीशुदा रिश्ते को लेकर पिछले कुछ महीनों से तरह-तरह की खबरें आ रही हैं. सुनीता ने दिसंबर 2024 में बांद्रा फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की थी, लेकिन 19 अगस्त 2026 को उन्होंने इसे वापस ले लिया. इसके अलावा सुनीता ने गोविंदा और एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के कथित रिश्ते को लेकर भी सवाल उठाए थे. इस पर गोविंदा की तरफ से कानूनी नोटिस जारी किया गया है. उनके टीम ने साफ किया है कि गोविंदा अपने निजी जीवन को लेकर फैलाई जा रही झूठी खबरों और AI से बनाए गए कंटेंट के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का दावा ठोक सकते हैं.

  • बिग बॉस 20 में बयान को लेकर मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम की टीम ने मांगी माफी

    बिग बॉस 20 में बयान को लेकर मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम की टीम ने मांगी माफी

    नई दिल्‍ली
    महान मुक्‍केबाज एमसी मैरीकॉम के एक बयान ने हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद उनकी टीम को सोशल मीडिया के जरिये माफी मांगनी पड़ी। छह बार की वर्ल्‍ड चैंपियन मुक्‍केबाज एमसी मैरीकॉम इस समय रिएलिटी शो बिग बॉस 20 में हिस्‍सा ले रही हैं।

    ओलिंपिक मेडलिस्‍ट मैरीकॉम का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बिग बॉस 20 में मैरीकॉम के सहभागी काजी तौकीर ने उन भारतीय महिलाओं की तारीफ की, जिन्‍होंने देश का नाम रोशन किया। काजी ने कहा, 'हमारे यहां स्‍पोर्ट्स में कौन-कौन लड़की ने कमाल किया है। सानिया मिर्जा ने अच्‍छा किया। साइना नेहवाल ने बढ़‍िया काम किया।

    मैरीकॉम की हुई आलोचना
    इस पर मैरीकॉम ने जवाब दिया, 'लेकिन मेरे जैसा कोई हासिल नहीं कर पाया।' मैरीकॉम के इस बयान की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद मुक्‍केबाज की टीम ने माफीनामा पेश किया।

    मैरीकॉम की टीम ने पोस्‍ट किया, 'अगर मैरी के शब्‍दों को अन्‍यथा लिया गया, तो हम उसके लिए माफी मांगते हैं। उनका इरादा दूसरे एथलीट की यात्रा से तुलना या उसे हानी पहुंचाने का नहीं था। मैरी उन प्रत्‍येक एथलीट्स की इज्‍जत करती हैं, जिन्‍होंने भारत का प्रतिनिधित्‍व किया और खेल को अपना दिल व आत्‍मा दी। प्रत्‍येक यात्रा अनोखी है। प्रत्‍येक उपलब्धि मायने रखती है और प्रत्‍येक मेडल भारत को गौरव दिलाता है।'

    मैरीकॉम को इस बात का मलाल
    बहरहाल, अपनी उपलब्धियों और आकांक्षओं के बीच मैरी ने मणिपुर के हालातों के बारे में बात की और कहा कि उन्‍हें इस बात का मलाल है कि वो राज्‍य के लिए कुछ कर नहीं पाईं। उन्‍होंने कहा, 'मणिपुर की सुरक्षा के लिए मैं कुछ नहीं कर पाईं। मणिपुर में कई प्रजातियां हैं, सभी में एकता होनी चाहिए। हर किसी को शांति और अमन से जीना चाहिए।'

    भारतीय मुक्‍केबाज ने आगे कहा, 'मैं क्‍या कर सकती हूं? मैं बेबस हूं। मैं शक्तिशाली व्‍यक्ति नहीं। मैंने देश के लिए बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन राज्‍य के लिए कुछ नहीं कर सकी। मुझे बहुत शर्म आती है।'

  • भोपाल मेट्रो में फेरों की कटौती, 15 सितंबर से 62 की जगह 41 फेरे; यात्रियों की कम संख्या बनी वजह

    भोपाल मेट्रो में फेरों की कटौती, 15 सितंबर से 62 की जगह 41 फेरे; यात्रियों की कम संख्या बनी वजह

    भोपाल 
    राजधानी भोपाल में मेट्रो के संचालन पर हो रहे भारी खर्च और सीमित आय के दबाव के बीच मेट्रो प्रबंधन ने एक नया दांव चला है। यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए 15 मिनट की फ्रीक्वेंसी पर दिनभर 62 से 70 फेरे चलाने वाले प्रबंधन ने अब घाटा बढ़ता देख चुपचाप फेरों की संख्या में बड़ी कटौती कर दी है।

    13 सितंबर को जारी संशोधित समय-सारणी के मुताबिक 15 सितंबर से नान-पीक आवर्स में मेट्रो के फेरे कम कर दिए गए हैं, जिसे प्रबंधन ने आंशिक संशोधन बताकर पेश किया है। जानकारी के अनुसार सामान्य दिन सोमवार से शनिवार 21 फेरे कम किए हैं। वहीं रविवार व अवकाश के दिन 6 फेरे कम किए हैं।

    खाली कोचों को दौड़ाना प्रबंधन की जेब पर पड़ रहा भारी

        जबकि वर्तमान में रोजाना 500 से 700 यात्री मेट्रो में सफर कर रहे हैं, रविवार और अवकाश के दिनों में यह आंकड़ा 1000 से 1200 तक पहुंच रहा है। हालांकि, वर्तमान खर्च और आय का स्पष्ट ब्योरा देने से प्रबंधन अब भी बच रहा है।

        सूत्रों की मानें तो मामूली इजाफे के बावजूद खाली कोचों को दौड़ाना प्रबंधन की जेब पर भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि 17 अगस्त को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट की सेवा का दावा करने वाले प्रबंधन ने अब सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक फ्रीक्वेंसी को 30 मिनट कर दिया है। इससे सामान्य दिनों में दिनभर के फेरे 62 से घटकर सीधे 41 रह गए हैं।

    ऐप भी नहीं हो रहा अपडेट
        एक तरफ मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रबंधन के अफसरों की लापरवाही देखिए कि एमपी मेट्रो का ऐप पर समय सारणी को अपडेट नहीं किया जा रहा है। लाखों रुपये खर्च करके एमपी मेट्रो का ऐप अप्रैल 2026 में लॉन्च हुआ था, लेकिन उसके बाद से लेकर अब तक ऐप को अपडेट नहीं किया गया है। ऐप पर आज भी वहीं पुराना टाइम टेबल दर्शाया जा रहा है।

        इसके चलते मेट्रो में यात्रा करने वाले यात्रियों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐप में एम्स से मेट्रो के चलने का समय 9.30 बजे दर्शया जा रहा है। जबकि एम्स से मेट्रो सुबह 11 बजे रवाना होती है। सुभाष नगर से पहली मेट्रो वर्तमान में 11.30 बजे रवाना होती है, लेकिन ऐप में समय सुबह 8.50 दर्शाया जा रहा है।

    ऐसे घटाए गए फेरे
        17 अगस्त की व्यवस्था: सुबह 11:30 से रात 7:30 बजे तक हर 15 मिनट में ट्रेनें चलीं। दिनभर में कुल 62 फेरे तय थे।

        15 सितंबर की नई व्यवस्था: सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक फ्रीक्वेंसी 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट कर दी गई। इससे इस अवधि में सिर्फ 22 फेरे रह गए। शाम 5 से 7:30 बजे तक (15 मिनट के अंतराल पर) 19 फेरे चलेंगे। यानी कुल 41 फेरे ही होंगे।

        कटौती का गणित: सामान्य दिनों में सीधे 21 फेरे कम किए गए, जबकि रविवार को 70 की जगह 64 फेरे यानी 6 फेरे कम चलेंगे।

    दावों के बीच फेरों का गणित
        वर्तमान राइडरशिप: रोजाना 500 से 700 यात्री, रविवार-अवकाश में 1000 से 1200 तक।
        शुरुआती ट्रेंड: पहले हफ्ते हजारों में भीड़, एक महीने बाद 150 से 300 पर सिमटी।
        सोमवार से शनिवार कटौती: 17 अगस्त को तय 62 फेरे से घटाकर अब 41 फेरे किए सीधे 21 फेरे कम।
        रविवार के फेरे: 70 फेरे से घटाकर 64 फेरे किए 6 फेरे कम।
        नया टाइम टेबल: सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक हर 30 मिनट में, शाम 5:00 से 7:30 बजे तक हर 15 मिनट में संचालन।

    इनका कहना है
    पहले 15 मिनट में मेट्रो एक फेरा लग रहा थी, अब 30 मिनट में मेट्रो एक फेरा लगा रही है। नया टाइम टेबल लोगों की डिमांड को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे फेरों की संख्या कम हुई है। एस कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो

     

  • अभिनेता रोहित रॉय के टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ बताने वाले बयान पर छिड़ी बहस

    अभिनेता रोहित रॉय के टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ बताने वाले बयान पर छिड़ी बहस

    टीवी को लेकर एक्टर रोहित रॉय का ‘डस्टबिन मीडियम’ वाला बयान इन दिनों खूब चर्चा में है. रोहित ने कहा कि टीवी पर बनाया गया कंटेंट अक्सर ऐसा होता है जिसे आज देखा और कल भुला दिया जाता है. उनके मुताबिक टीवी में अब पहले जैसी क्रिएटिविटी नहीं बची है और फिल्म कलाकारों की तुलना में टीवी कलाकारों में भी वह ‘ग्रेस’ और ‘क्लास’ नजर नहीं आती.

    बयान पर विवाद होना लाजमी है, लेकिन क्या रोहित की पूरी बात को खारिज कर देना चाहिए? शायद नहीं. क्योंकि उनके बयान में एक चुभता हुआ सवाल जरूर छिपा है- क्या आज का टीवी अपने शानदार इतिहास से दूर चला गया है?

    टीवी की शुरुआत ही ‘मसाले’ से नहीं, मकसद से हुई थी
    भारतीय टेलीविजन के इतिहास को देखें तो शुरुआत बेहद मजबूत थी. 7 जुलाई 1984 को दूरदर्शन पर ‘हम लोग’ आया, जिसे भारत का पहला लंबा चलने वाला हिंदी सोप ओपेरा माना जाता है. इसकी कहानी किसी महल या करोड़पति परिवार की नहीं, बल्कि एक आम मिडिल क्लास परिवार के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की थी.

    ‘हम लोग’ सिर्फ मनोरंजन नहीं था. इसमें परिवार, शराब की लत, महिलाओं की स्थिति, रोजगार और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दे कहानी के साथ बुने गए थे. हर एपिसोड के बाद अशोक कुमार दर्शकों से सीधे संवाद करते थे. टीवी उस दौर में कहानी भी सुनाता था और समाज से बात भी करता था.

    इसके बाद आया ‘बुनियाद’. 1986 में रमेश सिप्पी के निर्देशन में शुरू हुए इस शो ने विभाजन की त्रासदी और उसके बाद की पीढ़ियों की कहानी को परिवार के जरिए दिखाया. इसकी भाषा जमीन से जुड़ी थी और किरदार सिर्फ अच्छे-बुरे के खांचे में नहीं बंटे थे. यही वजह थी कि ‘बुनियाद’ को आज भी भारतीय टीवी के सुनहरे दौर की मिसाल माना जाता है.

    बुनियाद शो की एक तस्वीर
    फिर ‘शांति’, ‘हसरतें’ और ‘सांस’ जैसे शो आए, जिन्होंने टीवी की दुनिया को और विस्तार दिया.‘शांति’ में एक महिला पत्रकार की कहानी थी, जबकि ‘हसरतें’ ने विवाह और एक्स्ट्रा-मैरिटल रिश्तों जैसे संवेदनशील विषय को बेबाकी से छुआ. ‘सांस’, जिसे नीना गुप्ता ने लिखा और निर्देशित किया, रिश्तों में दरार और एक्स्ट्रा मैरिटल संबंधों की कहानी थी. उस समय टीवी पर रिश्ते सिर्फ सास-बहू की लड़ाई तक सीमित नहीं थे.

    फिर सास-बहू ने बदला खेल
    2000 के आसपास ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘कहानी घर घर की’ जैसे शोज ने टीवी की तस्वीर बदल दी. इसमें कोई शक नहीं कि इन सीरियल्स ने टीवी को जबरदस्त पॉपुलैरिटी दी. ‘कहानी घर घर की’ अपने दौर में लगातार टॉप रेटेड शोज में रही और कई मौकों पर 10 से ज्यादा TVR तक पहुंची.

    समस्या सास-बहू ड्रामा के होने में नहीं थी. समस्या तब शुरू हुई जब एक सफल फॉर्मूला ही पूरी इंडस्ट्री का फॉर्मूला बन गया.

    एक ही घर, दर्जनों रिश्ते, पीढ़ियों की छलांग, बदले की आग, पुनर्जन्म, प्लास्टिक सर्जरी, मरकर वापस लौटना और हर कुछ मिनट में नया ट्विस्ट- कहानी आगे बढ़ने के बजाय कई बार सिर्फ एपिसोड खींचने लगी.

    वायरल होने की होड़ ने भी बिगाड़ी साख
    आज स्थिति और दिलचस्प है. टीवी के पास पहले से कहीं ज्यादा प्लेटफॉर्म, तकनीक और टैलेंट है. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में कई बार कहानी से ज्यादा ‘वायरल सीन’ महत्वपूर्ण हो जाता है.

    ऐसे सीन जो सिर्फ इसलिए बनाए जाते हैं कि उनका छोटा वीडियो सोशल मीडिया पर घूमे, अगले दिन मीम बने या लोग कहें- ‘ये क्या देख लिया!’ समस्या यहीं है. जब कंटेंट का लक्ष्य कहानी सुनाने के बजाय सिर्फ ट्रेंड करना हो जाए तो माध्यम की साख कमजोर होती है.

    अनुपमा शो का एक सीन
    लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि टीवी ‘डस्टबिन’ है.

    टीवी को याद करने की नहीं, अपनी जड़ें पहचानने की जरूरत है
    रोहित रॉय खुद उस दौर से आए हैं जब ‘स्वाभिमान’ जैसे शो टीवी पर पहचान बनाते थे. आज भी टीवी से निकले कई कलाकार फिल्मों और ओटीटी में अपनी जगह बना चुके हैं. टीवी ने कलाकारों को घर-घर पहचान दी है और करोड़ों दर्शकों को रोज मनोरंजन दिया है. इसलिए असली सवाल यह नहीं कि टीवी डस्टबिन है या नहीं. सवाल यह है कि क्या टीवी अपने पुराने लेखकों, मजबूत किरदारों और जमीन से जुड़ी कहानियों वाली परंपरा को फिर से पकड़ सकता है?

    ‘हम लोग’ ने समाज की बात की थी. ‘बुनियाद’ ने इतिहास को परिवार के जरिए समझाया. ‘हसरतें’ ने रिश्तों के ग्रे शेड्स दिखाए और ‘सांस’ ने विवाह की जटिलताओं को पर्दे पर उतारा. हमारा मतलब सीधा है कि- टीवी की बुनियाद कमजोर नहीं थी. शायद जरूरत सिर्फ इतनी है कि आज के मेकर्स कचरे में से वायरल सीन चुनने के बजाय उस बुनियाद की तरफ दोबारा लौटें. क्योंकि अच्छा टीवी कभी डस्टबिन नहीं था और अच्छा टीवी आज भी डस्टबिन बनने से बच सकता है.

     

  • नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री ने नुआखाई पर्व की दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई फसल के स्वागत और प्रकृति के अनुपम उपहार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पावन पर्व नुआखाई के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अन्नदाता किसानों की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सभी परिवारों की खुशहाली की मंगलकामना की है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई समृद्ध कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अन्न के सम्मान और किसान के अथक परिश्रम के प्रति आदर का भाव प्रकट करता है। खेतों में उपजी नई फसल केवल किसान की मेहनत का प्रतिफल नहीं, बल्कि प्रकृति की कृपा और हमारी कृषि प्रधान संस्कृति की समृद्धि का भी प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हमारे अनेक पर्व और परंपराएं कृषि चक्र, प्रकृति और लोकजीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह पर्व सामाजिक आत्मीयता, पारिवारिक एकजुटता और आपसी सद्भाव को भी मजबूत करता है। नई फसल की खुशियां जब परिवार और समाज मिलकर साझा करते हैं, तब लोकसंस्कृति और अधिक जीवंत तथा समृद्ध होती है।

    मुख्यमंत्री साय ने नुआखाई के पावन अवसर पर कामना करते हुए कहा कि प्रकृति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे। हमारे किसान साथियों के खेत हरे-भरे और फसलों से लहलहाते रहें, अन्न के भंडार भरें तथा अन्नदाताओं के घर-आंगन में समृद्धि आए। प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव निरंतर मजबूत होता रहे।

  • टेक कंपनियों में छंटनी का दौर जारी, ओरकल और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों ने निकाले कर्मचारी

    टेक कंपनियों में छंटनी का दौर जारी, ओरकल और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों ने निकाले कर्मचारी

    Oracle कंपनी में एक बार फिर से छंटनी का दौर शुरू हो चुका है, जिसकी वजह से बहुत से लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है. लेकिन यह कोई इकलौती कंपनी नहीं है, जहां पर छंटनी हो रही है. दुनिया भर में कई कंपनियां छंटनी कर रही हैं, जिसके पीछे की एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) भी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 1.28 लाख टेक कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया है.

    लेऑफ ट्रैकर पोर्टल layoffs.fyi ने बताया है कि इस साल दुनियाभर में 303 टेक कंपनियों के अंदर छंटनी हुई है, जिसमें 128,873 टेक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है. इसमें Oracle, Amazon, Uber, PayPal जैसे कई नाम शामिल हैं.

    Oracle की छंटनी की चर्चा इसलिए सबसे ज्यादा है क्योंकि इस कंपनी ने सबसे बडे़ स्तर छंटनी की है. इस साल कंपनी पहले ही 21,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है और अब एक बार फिर से कंपनी ने लोगों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है. हालांकि कंपनी ने अभी तक संख्या का ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है.

    Amazon भी कर चुकी है छंटनी
    Amazon एक इंटरनेशनल कंपनी है और यह इस साल की शुरुआत में बड़ी छंटनी कर चुकी है. कंपनी ने जनवरी में 16 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया था.  Amazon AI को लेकर भी काम कर रही है.

    Dell भी कर चुका है छंटनी
    Dell कंपनी की तरफ से इस साल मार्च में बड़ी छंटनी की जा चुकी है, जिसमें 11 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है. इसमें भी AI का बड़ा रोल रहा है.

    Meta भी कर चुका है छंटनी
    Meta कंपनी की तरफ से भी इस साल छंटनी की जा चुकी है, जिसमें अब तक कई राउंड्स की छंटनी हो चुकी है.

    दुनियाभर में बहुत सी कंपनियां हैं, जो बड़े स्तर पर टेक्नोलॉजी में इनवेस्ट कर रही हैं और अपने कई काम को ऑटोमैटिक करने के इरादे से AI का भी इस्तेमाल कर रहे हैं या करने का प्लान बना रहे हैं. काम ऑटोमैटिक होने के बाद कम कर्मचारियों की जरूरत होगी, जिसकी वजह से अधिकतर कंपनियों में वर्कफोर्स को करने की दिशा में काम किया जा रहा है. 

  • सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD सख्त, 40 इमारतों पर चला बुलडोजर, 8 प्रॉपर्टी सील

    सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD सख्त, 40 इमारतों पर चला बुलडोजर, 8 प्रॉपर्टी सील

    नई दिल्ली
     सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने खतरनाक और अवैध रूप से बनी इमारतों के खिलाफ सोमवार को भी कार्रवाई जारी रखी। 40 इमारतों में तोड़फोड़ की गई, जबकि 8 प्रॉपर्टी सील की गईं। इसके अलावा बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने के आरोप में 14 इमारतों को गिराने के ऑर्डर पास किए गए।

    अधिकारियों ने बताया कि सत्य निकेतन में खतरनाक बिल्डिंग को तोड़ने का काम लगातार चल रहा है। 5वीं और चौथी मंजिल पूरी तरह तोड़ी जा चुकी है, जबकि तीसरी मंजिल को तोड़ने का काम चल रहा है। अधिकारी के अनुसार, मंगलवार को तीसरी मंजिल टूटने के बाद बिल्डिंग पर JCB से कार्रवाई शुरू की जाएगी। बिल्डिंग को पूरी तरह जमीन से मिलाने के बाद दूसरी खतरनाक इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू होगी।

    अब तक सर्वे में करीब 2,453 इमारतों की पहचान हुई
    MCD ने सोमवार को तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान करोल बाग जोन के टीसी कैंप, ब्लॉक-टी, पांडव नगर, ईस्ट पटेल नगर, रेगरपुरा, करोल बाग, माता रामेश्वरी, नेहरू नगर और नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-I में भी कार्रवाई की। ईस्ट जोन में ईस्ट विनोद नगर, मयूर बिहार फेज-दो, रघुबरपुरा और गांधी नगर के धर्मपुरा समेत विभिन्न इलाकों में कार्रवाई की गई।

    2,453 इमारतों का सर्वे
    MCD के सर्वे में अब तक करीब 2,453 इमारतों की पहचान की गई है, जिनमें नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। इन इमारतों में आगे भी जांच और कार्रवाई का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    कई इलाकों में जारी रहेगी कार्रवाई
    अधिकारियों के अनुसार, सर्वे के दौरान खतरनाक और अवैध निर्माण वाली इमारतों को चिन्हित किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रॉपर्टी के खिलाफ तोड़फोड़, सीलिंग या अन्य जरूरी कार्रवाई की जाएगी।