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  • UP Pension: बुजुर्गों के खाते में नहीं आई पेंशन तो तुरंत करें ये 4 काम, ऐसे मिलेगा पैसा

    UP Pension: बुजुर्गों के खाते में नहीं आई पेंशन तो तुरंत करें ये 4 काम, ऐसे मिलेगा पैसा

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश के लाखों बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। योगी सरकार ने बुजुर्गों की पेंशन का नियम बदलते हुए नई किस्त व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके तहत अब तीन महीने की कुल 3,000 रुपये की पेंशन राशि एक साथ मिलने के बजाय दो बराबर किस्तों (1500 और 1500) में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।

    सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह से राज्य के कई जिलों में इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों के खातों में पैसे आने शुरू हो गए हैं। सरकार की ओर से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बुजुर्गों के खातों में पेंशन का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है।

    हालांकि, कई बार देखने में आता है कि सरकार की तरफ से पैसा जारी होने के बावजूद बहुत से बुजुर्गों के बैंक खातों में पेंशन की राशि नहीं पहुंच पाती। ऐसे में बुजुर्ग परेशान होकर दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं।

    UP Old Age Pension 2026 | अगर आपके खाते में भी इस बार पेंशन का पैसा नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर कुछ जरूरी काम करा लें, जिससे आपकी रुकी हुई पेंशन तुरंत खाते में आ जाएगी

    आइये सबसे पहले ये समझते हैं कि खाते में पैसा न पहुंचने के क्या कारण हैं-
    खाते में पैसा न आने के मुख्य कारण-
        समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेंशन का पैसा न अटकने का सबसे बड़ा कारण डॉक्यूमेंट्स का अपडेट न होना है। जैसे कि सरकार ने पेंशन में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक बायोमीट्रिक या ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनकी किस्त रोक दी गई है।
        पेंशन का पैसा अब केवल DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मोड से भेजा जाता है। अगर आपका बैंक खाता आपके आधार कार्ड से सीडेड (लिक्ंड) नहीं है, तो पैसा खाते में नहीं आएगा।
        इसके अलावा बैंक खाते में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपिंग एक्टिव न होना भी एक बड़ी वजह है।
        नाम, स्पेलिंग, आईएफएससी कोड या बैंक खाता संख्या में कोई छोटी सी गलती होने पर भी भुगतान अटक जाता है।

    पेंशन न आने पर तुरंत करें ये काम
    1- सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर चेक करें स्टेटस
    सबसे पहले आपको यूपी समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (sspy-up.gov.in) पर जाना होगा। वहां 'वृद्धावस्था पेंशन' वाले सेक्शन में जाकर 'आवेदक लॉगिन' पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर स्टेटस चेक करें। अगर स्टेटस में किसी प्रकार की त्रुटि (Error) दिख रही है, तो उसे तुरंत सही कराएं।

    2. ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करें
    अगर आपका ई-केवाईसी पेंडिंग है, तो इसे बिना देरी किए पूरा करें। इसे आप खुद अपने मोबाइल से पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए कर सकते हैं। यदि आपके पास स्मार्टफोनन नहीं है, तो नजदीकी सीएससी (जन सेवा केंद्र) पर जाकर बायोमीट्रिक (अंगूठे का निशान) देकर ई-केवाईसी को 5 मिनट में पूरा करा सकते हैं।

    3. बैंक शाखा जाकर आधार और NPCI सीडिंग कराएं
    अगर आपका ई-केवाईसी पहले से पूरा है, फिर भी पैसा नहीं आया, तो अपनी बैंक शाखा में जाएं। वहां जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता Aadhaar Seeded और DBT Enabled है या नहीं। बैंक कर्मचारी से बोलकर अपने खाते को NPCI से तुरंत लिंक करवाएं।

    4. जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क करें
    यदि सारे डॉक्यूमेंट्स सही होने के बावजूद खाते में पैसा नहीं आ रहा है, तो अपने जिले के विकास भवन स्थित 'जिला समाज कल्याण अधिकारी' के कार्यालय में जाएं। वहां अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पेंशन रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटोकॉपी के साथ एक आवेदन पत्र जमा करें। अधिकारी आपकी फाइल चेक करके समस्या का तुरंत समाधान कर देंगे।

    बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन सुविधा
    अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई परेशानी आ रही है या आप चलकर दफ्तर नहीं जा सकते, तो उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कॉल कर सकते हैं।

    कॉल पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताकर आप अपनी पेंशन का स्टेटस जान सकते हैं और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

    सरकार का कहना है कि किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन बंद नहीं की जाएगी। जैसे ही आप अपनी ई-केवाईसी और बैंक खाते की गड़बड़ी को सही करवा लेंगे, तो आपकी रुकी हुई पुरानी किस्त और नई किस्त दोनों एक साथ आपके खाते में भेज दी जाएंगी। इसलिए बिना देर किए अपनी बैंक डिटेल्स और केवाईसी तुरंत अपडेट करा लें।

     

  • फाइनल मुकाबले में हिस्सा न होने के बावजूद मोहसिन नकवी बने भारत-पाकिस्तान विवाद का केंद्र

    फाइनल मुकाबले में हिस्सा न होने के बावजूद मोहसिन नकवी बने भारत-पाकिस्तान विवाद का केंद्र

    नई दिल्ली
     महिला एशिया कप का फाइनल भारत ने जीत लिया. श्रीलंका को 72 रनों से हराकर भारतीय टीम चैम्पियन बनी, लेकिन मैच खत्म होते ही कहानी क्रिकेट के मैदान से निकलकर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और राजनीति तक पहुंच गई. वजह थी ट्रॉफी प्रेजेंटेशन और उस मंच पर मौजूद मोहसिन नकवी.

    एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन नकवी ट्रॉफी लेकर प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उनके हाथों से ट्रॉफी लेने के लिए आगे नहीं बढ़ीं. ट्रॉफी भारत ने स्वीकार ही नहीं की. बाद में नकवी ने श्रीलंका को रनर-अप का चेक दिया और वहां से चले गए.
    लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल अब यह नहीं है कि भारत ने ट्रॉफी क्यों नहीं ली.
    बड़ा सवाल यह है कि जब नकवी को पहले से पता था कि भारतीय टीम उनके हाथों से ट्रॉफी नहीं लेगी, तो फिर वह प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे ही क्यों?

    नकवी को पहले ही बता दिया गया था भारत का फैसला
    अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस पूरे मामले पर अहम जानकारी दी है. बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने दिल्ली पहुंचने के बाद बताया कि भारतीय बोर्ड ने आपस में चर्चा करके फैसला किया था कि टीम नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. इस फैसले की जानकारी संबंधित लोगों को पहले ही दे दी गई थी.

    यानी दुबई में जो हुआ, वह अचानक पैदा हुआ विवाद नहीं था. भारत का फैसला पहले से तय था. ACC को इसकी जानकारी थी. नकवी भी इस रुख से अनजान नहीं थे. फिर भी वह प्रेजेंटेशन मंच पर पहुंचे. और वहां वही हुआ जिसकी पहले से जानकारी थी- भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया.
     
    2025 में भी यही कहानी दोहराई गई थी
    इस घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाता है 2025 का एशिया कप. पुरुष टीम के एशिया कप फाइनल के बाद भी भारत ने नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी. यानी नकवी के लिए यह कोई बिल्कुल नया घटनाक्रम नहीं था.

    इस बार तो स्थिति और भी साफ थी. पिछले साल का उदाहरण सामने था और BCCI ने फाइनल से पहले ही अपना स्टैंड ACC को बता दिया था.

    इसके बावजूद नकवी प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे. यहीं से सवाल और बड़ा हो जाता है- क्या यह सिर्फ प्रोटोकॉल था? या नकवी के लिए इस मंच पर मौजूद रहना भी अपने आप में महत्वपूर्ण था?

    इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है. इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि नकवी किसी खास राजनीतिक रणनीति के तहत वहां पहुंचे थे. लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें भारत के रुख की जानकारी थी और इसके बावजूद वह प्रेजेंटेशन में मौजूद रहे.

    नकवी ने कोई विरोध भी नहीं किया
    दुबई में भारत के इनकार के बाद कोई बड़ा टकराव नहीं हुआ. राजीव शुक्ला ने बताया कि नकवी ने इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई. उन्होंने जिसे ट्रॉफी देनी थी, उसे दी और इसके बाद वहां से चले गए. यानी तस्वीर कुछ ऐसी बनी- भारत ने अपना फैसला नहीं बदला और नकवी ने भी मंच पर कोई विरोध नहीं किया.

    न ट्रॉफी भारत ने नकवी के हाथों से ली, न नकवी ने इस पर सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जताई. लेकिन इस शांत घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया- अगर अंत यही होना था, तो फिर नकवी के वहां पहुंचने की जरूरत क्या थी?

    पाकिस्तान फाइनल में था ही नहीं, फिर भी नकवी केंद्र में आ गए. इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है.

    फाइनल भारत और श्रीलंका के बीच था. पाकिस्तान मुकाबले में था ही नहीं. लेकिन मैच खत्म होते-होते पाकिस्तान का सबसे चर्चित क्रिकेट चेहरा पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आ गया. नकवी इस समय सिर्फ ACC के अध्यक्ष नहीं हैं. वह पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान सरकार में गृह मंत्री भी हैं.

    इसलिए भारतीय टीम का उनके हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार सिर्फ क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी सामान्य घटना नहीं रह जाता. भारत-पाकिस्तान के मौजूदा रिश्तों के संदर्भ में इसका राजनीतिक अर्थ भी निकाला जाना स्वाभाविक है.

    यही वजह है कि एक एशिया कप फाइनल की ट्रॉफी प्रेजेंटेशन देखते ही देखते भारत-पाकिस्तान की पुरानी कहानी में बदल गई.

    पाकिस्तान में नकवी की हैसियत भी समझिए
    नकवी पाकिस्तान की सत्ता और क्रिकेट- दोनों जगह प्रभावशाली स्थिति में हैं. उन्हें पाकिस्तान के ताकतवर सत्ता प्रतिष्ठान के करीब माना जाता है. PCB की कमान भी उनके पास है और सरकार में गृह मंत्री का पद भी. लेकिन ताकतवर पद पर होना और हर मोर्चे पर निर्विवाद होना अलग बात है.

    पाकिस्तान क्रिकेट में उनके कार्यकाल के दौरान टीम के प्रदर्शन, चयन, खिलाड़ियों से जुड़े फैसलों और प्रशासनिक बदलावों को लेकर लगातार बहस होती रही है. यानी क्रिकेट के मोर्चे पर नकवी के सामने पहले से कई सवाल हैं.

    ऐसे में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट का कोई भी टकराव उनके लिए सिर्फ खेल की खबर नहीं रहता. वह तुरंत राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी बहस का हिस्सा बन जाता है.

    भारत के लिए विरोध, नकवी के लिए नया नैरेटिव?
    यहीं इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है. भारत की तरफ से संदेश साफ था- नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं करनी… लेकिन किसी भी राजनीतिक विवाद की तरह इस घटना की व्याख्या दोनों तरफ अलग-अलग हो सकती है.

    भारत में तस्वीर को इस रूप में देखा जाएगा कि भारतीय टीम ने अपने स्टैंड पर कायम रहते हुए नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया.

    वहीं पाकिस्तान में इसी घटना को दूसरे नैरेटिव के साथ पेश किए जाने की गुंजाइश है- भारत ने विरोध किया, लेकिन नकवी अपनी जगह मौजूद रहे, उन्होंने अपना काम किया और बिना किसी आपत्ति के वहां से चले गए.

    यानी एक ही तस्वीर के दो राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं. यही वह जगह है जहां यह मामला सिर्फ ट्रॉफी का नहीं रह जाता.

    क्या नकवी को इससे राजनीतिक फायदा मिला?
    यह कहना जल्दबाजी होगी कि नकवी जानबूझकर इसी फायदे के लिए प्रेजेंटेशन में पहुंचे थे. इसका कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि इस घटनाक्रम ने उन्हें फिर भारत-पाकिस्तान टकराव के केंद्र में ला दिया.

    भारत ने जिस फैसले के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया, उसी फैसले ने नकवी को पाकिस्तान में एक ऐसे किरदार के तौर पर पेश किए जाने का मौका भी दिया, जो भारत के सामने खड़ा रहा और विवाद के बावजूद पीछे नहीं हटा.

    यानी भारत का संदेश अपनी जगह था, लेकिन विवाद का राजनीतिक नैरेटिव दूसरी तरफ भी बनाया जा सकता है. और राजनीति में नैरेटिव की कीमत कम नहीं होती.

    सैकिया और नकवी की बातचीत पर भी हुई चर्चा
    फाइनल के दौरान BCCI सचिव देवजीत सैकिया और नकवी की बातचीत की तस्वीरें भी सामने आई थीं. इसके बाद सवाल उठा कि अगर भारत ने नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला किया था, तो फिर BCCI अधिकारी उनसे बातचीत क्यों कर रहे थे?

    राजीव शुक्ला ने इसे सामान्य पेशेवर बातचीत बताया. उनके मुताबिक मैच के दौरान अधिकारी एक-दूसरे से मिलते-जुलते और बातचीत करते हैं. इसलिए सैकिया और नकवी की बातचीत को किसी विशेष संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

    इससे BCCI ने अपनी स्थिति भी साफ कर दी- बातचीत और प्रोटोकॉल अपनी जगह हैं, लेकिन ट्रॉफी स्वीकार करने का फैसला अपनी जगह था.

    असली जीत किसकी हुई?
    मैदान पर इसका जवाब बिल्कुल साफ है.भारत की. भारत ने श्रीलंका को हराया और एशिया कप अपने नाम किया. लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन में भारत ने नकवी से ट्रॉफी नहीं ली. यानी चैम्पियन बनने के बावजूद भारतीय टीम उस ट्रॉफी को मंच से उठाकर ले जाने की औपचारिकता में शामिल नहीं हुई.

    नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए. लेकिन वह इस पूरे विवाद के सबसे बड़े किरदार जरूर बन गए. यही इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है. भारत ट्रॉफी जीतकर चैम्पियन बना. नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए. लेकिन विवाद ने नकवी को फिर भारत-पाकिस्तान टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया.

    और अब जब यह साफ हो चुका है कि भारत का फैसला पहले से तय था और इसकी जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी, तो सवाल और चुभता है. इसका जवाब अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है.

    लेकिन महिला एशिया कप की इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है- भारत ने ट्रॉफी नहीं ली, नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए… मगर दोनों के बीच का विवाद एक बार फिर सुर्खियों की ट्रॉफी जरूर ले गया.

  • गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की होती है कठिन यात्रा

    गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की होती है कठिन यात्रा

     मृत्यु हमारे जीवन का अटल सत्य है. इस पृथ्वी लोक पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को एक न एक दिन इस संसार को छोड़कर जाना पड़ता है. भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि आत्मा एक शरीर को त्यागकर दूसरा शरीर धारण करती है. यानी शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा को अमर माना गया है.

    अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि अगर आत्मा अमर है, तो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका क्या होता है? गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक तक पहुंचने के लिए किस तरह की यात्रा से गुजरना पड़ता है.

    मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है?
    गरुड़ पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने उनसे पूछा कि मृत्यु के बाद जीवात्मा के साथ क्या होता है और वह कितने समय बाद यमलोक पहुंचती है. तब भगवान विष्णु ने उन्हें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में बताया. मान्यता के अनुसार, जब किसी जीव की मृत्यु का समय करीब आता है, तो उसकी आवाज कमजोर होने लगती है. अंतिम समय में उसे कुछ समय के लिए दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है. इस अवस्था में उसे संसार को अलग तरह से देखने का अनुभव होता है और उसकी इंद्रियां धीरे-धीरे शिथिल पड़ने लगती हैं.

    इसके बाद मृत्यु के समय यमराज के दूत वहां आते हैं. मान्यता है कि उन्हें देखकर जीवात्मा भयभीत हो जाती है और शरीर का त्याग कर देती है. शरीर से निकलने के बाद यमदूत जीवात्मा को अपने साथ ले जाते हैं.

    पवित्र आत्मा और पापी आत्मा की यात्रा
    गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, जो जीवात्मा पुण्य कर्म करती है, उसकी यात्रा अलग होती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है. ऐसी आत्मा को यमलोक पहुंचने से पहले कई तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ता है. मान्यता है कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा को वापस उसी घर में लाया जाता है, जहां उसने अपना शरीर छोड़ा था. आत्मा अपने शरीर में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश करती है, लेकिन ऐसा नहीं कर पाती. इसके बाद वह अपने परिवार को अंतिम संस्कार करते हुए देखती है.

    इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांडों और पिंडदान को महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इन कर्मों से मृत व्यक्ति की आत्मा की आगे की यात्रा में सहायता मिलती है.

    मृत्यु के बाद 13 दिनों तक क्यों किए जाते हैं कर्मकांड?
    हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद 13 दिनों तक अलग-अलग कर्मकांड किए जाते हैं. गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों और पिंडदान से मृतक के सूक्ष्म शरीर को आगे की यात्रा के लिए शक्ति मिलती है. इसके बाद आत्मा की यमलोक की यात्रा शुरू होती है. इस यात्रा में उसे कई तरह के मार्गों और कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है.

    वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है
    गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी का भी वर्णन मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह नदी यमलोक की यात्रा में आने वाली सबसे कठिन बाधाओं में से एक है. कहा जाता है कि वैतरणी नदी बेहद भयानक होती है और इसे पार करना आसान नहीं होता. मान्यता है कि जिसने अपने जीवन में गौसेवा या गाय से जुड़े पुण्य कर्म किए होते हैं, उसे इस नदी को पार करने में सहायता मिलती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को इसे पार करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. धार्मिक ग्रंथों में वैतरणी नदी को बेहद भयावह रूप में बताया गया है. मान्यता के अनुसार, इसे पार करने के बाद आत्मा आगे की यात्रा करती हुई यमलोक पहुंचती है.

    यमलोक पहुंचने के बाद क्या होता है?
    गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, यमलोक पहुंचने के बाद जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा देखा जाता है. व्यक्ति ने जीवन में किस तरह के कर्म किए हैं, उसी के आधार पर उसे आगे का फल मिलता है. इसलिए हिंदू धर्म में अच्छे कर्म करने पर जोर दिया गया है. मान्यता है कि मृत्यु के बाद मनुष्य के साथ उसके धन-दौलत, रिश्ते या सांसारिक चीजें नहीं जातीं. उसके कर्म ही उसके साथ जाते हैं.

    इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, हमें हमेशा अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए. गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु से जुड़ी ऐसी कई गूढ़ बातें बताई गई हैं, जो मनुष्य को अपने कर्मों और जीवन के उद्देश्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं.

  • धार में वराह मार्च पर रोक, 1 हजार तक पुलिसकर्मी तैनात; 7 गिरफ्तार, ड्रोन से निगरानी

    धार में वराह मार्च पर रोक, 1 हजार तक पुलिसकर्मी तैनात; 7 गिरफ्तार, ड्रोन से निगरानी

    धार 

    धार शहर में आज 15 सितंबर को प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सनातन प्रहरी समिति ने दोपहर 2 बजे पीजी कॉलेज से विजय कीर्ति मंदिर तक बाइक रैली निकालने का आह्वान किया था। प्रशासन ने रैली निरस्त कर दी है। 

    वराह मार्च को लेकर 7 लोग गिरफ्तार
    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने बताया कि वराह मार्च बाइक रैली का आह्वान किया गया था, जिसे प्रशासन ने निरस्त कर दिया है। पुलिस के अनुसार, कानून व्यवस्था की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    लाट मस्जिद यानी विजय मंदिर आज बंद
    कानून व्यवस्था की दृष्टि से लाट मस्जिद यानी विजय मंदिर को भी मंगलवार को ASI ने बंद रखा है। जिस स्थल तक वराह मार्च ले जाने की घोषणा की गई थी, उसे हिंदू समाज विजय मंदिर और मुस्लिम समाज लाट मस्जिद के नाम से संबोधित करता है।

    मुस्लिम समाज के लोग यहां नमाज अदा करते हैं, जबकि हिंदू समाज की ओर से दशहरा पर्व पर मिलन समारोह आयोजित किया जाता है। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने आज इस संरक्षित स्थल को बंद रखने का निर्णय लिया है।

    CCTV, हाईराइज बिल्डिंग और ड्रोन से निगरानी
    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर के मुताबिक, पूरे शहर में पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। CCTV कैमरों, हाईराइज बिल्डिंग और ड्रोन के माध्यम से शहर की निगरानी की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है।

    प्रशासन ने शहर के बाहर से आने वाले लोगों से भी धार नहीं आने की अपील की है। इससे पहले पुलिस-प्रशासन ने शहर में लगाए गए वराह मार्च से जुड़े पोस्टर और बैनर भी हटवा दिए थे।.

    मुस्लिम समाज की वाहन रैली की अनुमति भी निरस्त
    इसी दिन मुस्लिम समाज की ओर से भी वाहन रैली निकालने को लेकर आवेदन दिया गया था। प्रशासन ने उसकी अनुमति भी निरस्त कर दी है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था को देखते हुए धार शहर में किसी भी प्रकार की रैली या अन्य आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है। शहर में पहले से धारा 163 लागू है।

    भोजशाला के बाद वराह मार्च को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता
    भोजशाला से जुड़े मामलों के बाद अब वराह मार्च को लेकर भी धार में माहौल संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने, संरक्षित इमारत को नुकसान पहुंचाने या किसी भी तरह की अनधिकृत गतिविधि करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस के मुताबिक शहर में स्थिति सामान्य है। दोपहर 2 बजे प्रस्तावित मार्च के समय सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी रहेगी और पुलिस बल लगातार निगरानी बनाए रखेगा।

    विजय मंदिर की तीन लेयर में बैरिकेडिंग
    संरक्षित इमारत विजय मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इमारत की पूरी तरह बैरिकेडिंग की गई है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। सुरक्षा के लिए तीन लेयर में बैरिकेडिंग की गई है।

    पुलिस के एएसआई सहित जवान मौके पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से चेतावनी बैनर भी लगाया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि इमारत को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल 

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब सुनवाई बाद में होगी। हालांकि अभी तारीख तय नहीं है।

    भोपाल के रहवासी इलाकों में 62 हजार 500 प्रतिष्ठान हैं, जिनको लेकर आज फैसला आने की उम्मीद थी। नगर निगम भी अब तक की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी सीलिंग की कार्रवाई को झूठी बताते हुए रिकॉर्ड पेश करेंगे।

    बता दें कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम ने पूरे शहर में ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए थे, जो आवासीय क्षेत्र में चल रहे थे।

    करीब 15 दिन तक नोटिस देने का दौर चला। इस दौरान लिस्टेड 62 हजार 500 में से 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए थे। फिर 3 दिन तक 190 प्रतिष्ठान बंद किए थे।

    विरोध के बाद रुकी कार्रवाई, नया शपथ-पत्र पेश
        हालांकि, शहर में व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई के विरोध में लगातार बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए थे, जिसके निगम ने कार्रवाई को रोक दिया। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पेश करने के लिए जो शपथ-पत्र तैयार किया था, उसमें शहरभर में 7,951 प्रतिष्ठानों को आवासीय क्षेत्रों में कारोबार करते हुए चिह्नित करने और उन्हें नोटिस जारी करने की बात सामने आई थी।

        आंकड़ों के इस अंतर ने कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। सूत्रों के अनुसार, नवदुनिया ने इस विसंगति को सामने लाने के बाद निगम ने अपने रिकार्ड का दोबारा मिलान किया और शपथ-पत्र में कार्रवाई की जानकारी को लेकर बदलाव कर नया शपथ-पत्र न्यायालय के सामने पेश किया है।

    प्रदेश सरकार की समिति पर भी होगी सुनवाई
        बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अरेरा कालोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां में नोटिस देने की कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद एक अगस्त को इन क्षेत्रों में दो प्रतिष्ठानों को सील और 99 के स्वेच्छा बंद करने के पंचनामे बनाए थे। दो अगस्त को प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक समिति गठित कर दी थी, जिसके बाद निगम ने अपनी कार्रवाई रोक दी और बंद किए गए प्रतिष्ठान भी खुल गए।

        सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा बनाई गई इस समिति को प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए समिति गठित करने के मूल दस्तावेज पेश करने को कहा था। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ ही प्रदेश सरकार की इस समिति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    व्यापारी सड़क पर उतरे तो कार्रवाई रोकी
    निगम की सीलिंग और नोटिस देने के विरोध में जब व्यापारी सड़क पर उतरे तो कार्रवाई रोक दी गई थी। पिछले 15 दिन से कार्रवाई नहीं हुई।

    दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदारों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति की है।

    हमने सुप्रीम कोर्ट में अपने दस्तावेज पेश किए हैं। जिसमें बताया गया कि निगम ने झूठी कार्रवाई की। जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया, वे फिर से खुल गए।

    यह है मामला- सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश
    भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

    साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की गई। अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।

    रहवासियों की यह मांग
        रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां गलत है। इन्हें बंद किया जाए।
        कमर्शियल गतिविधि होने से आवासीय क्षेत्र में व्यवधान जैसे- शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग जैसी स्थितियां बन रही हैं।

        असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इस वजह से सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

        स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता हो रही है। बढ़ते ट्रैफिक की वजह से हादसों का खतरा बना रहता है।

  • महाराजा चक्रधर सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा चक्रधर समारोह: राज्यपाल रमेन डेका

    महाराजा चक्रधर सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा चक्रधर समारोह: राज्यपाल रमेन डेका

    महाराजा चक्रधर सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा चक्रधर समारोह: राज्यपाल रमेन डेका

    महाराजा चक्रधर सिंह ने कला को राज-सिंहासन से ऊपर रखा, रायगढ़ घराने को दिलाई विश्व पहचान 

    23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में देश-प्रदेश के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां

    रायपुर, 
     राज्यपाल रमेन डेका ने संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रायगढ़ की धरती पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को महाराजा चक्रधर की तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत भव्य शुभारंभ किया। राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। 14 से 23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में आयोजित समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।

    राज्यपाल ने कलाकारों का किया सम्मान

              शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया। पद्मडॉ. उषा बारले, पद्मअनुज शर्मा सहित अन्य कलाकारों और कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की।

              राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना और उनकी दूरदृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण धरोहर भूमि है और रायगढ़ घराने के कथक ने देश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण दिया और संगीत, नृत्य एवं साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने अपनी साधना से यह सिद्ध किया कि कला किसी एक स्थान या केंद्र की मोहताज नहीं होती। जहां निरंतर साधना होती है, वही स्थान कला का तीर्थ बन जाता है। रायगढ़ की पहचान आज संगीत, घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जुड़ी है।

                राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल एक शासकीय या संस्थागत आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक धड़कन बन चुका है। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलना इस समारोह की विशेषता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव पैदा करते हैं। युवाओं को परंपरा के साथ नवाचार को जोड़ते हुए कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा सहित आदिवासी नृत्य और लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है और चक्रधर समारोह इसी सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी

         राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। रायगढ़ औद्योगिक विकास के साथ-साथ अपनी कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। पिछले वर्ष समारोह ने अपने 40 वर्ष पूरे किए और अब 41वां समारोह नई ऊर्जा और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनते हैं और कला को समाज से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने का माध्यम हैं। आज के डिजिटल युग में भी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। अपनी जड़ों से जुड़ाव पिछड़ापन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और ताकत है। चक्रधर समारोह अतीत को याद करने के साथ-साथ उस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

    महाराजा चक्रधर सिंह की अमूल्य रचनाओं और ग्रंथों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी- राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह

          41वें चक्रधर समारोह के पावन अवसर पर राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आगमन से समारोह की गरिमा और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह की गौरवशाली परंपरा रही है कि इसका शुभारंभ राज्यपाल के करकमलों से होता है। राज्यसभा सांसद सिंह ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था। उन्होंने ऐसे समय भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया, जब हमारी अनेक सांस्कृतिक परंपराएं अपने मूल स्वरूप से दूर होती जा रही थीं। भारतीय संगीत और कला की उस गौरवशाली परंपरा को, जो मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों के साथ जनजीवन से जुड़ी रही है, उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के लिए महाराजा चक्रधर सिंह ने उल्लेखनीय प्रयास किए। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उनकी रचनाएं और उनके द्वारा सृजित ग्रंथ भारतीय संगीत एवं कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं। इन महत्वपूर्ण ग्रंथों का संरक्षण, अध्ययन और व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस महान सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। राज्यसभा सांसद सिंह ने बताया कि उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की महत्वपूर्ण रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में इन अमूल्य ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार भारतीय संस्कृति, कला और गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। महाराजा चक्रधर सिंह ने जिस उद्देश्य के साथ भारतीय कला और संस्कृति की महान परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया, उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    चक्रधर समारोह बढ़ा रहा रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासतः लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया

             लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत और नृत्य के क्षेत्र में जो समृद्ध विरासत रायगढ़ को दी, उसे आगे बढ़ाने में यह समारोह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह को निरंतर नई ऊंचाइयों तक ले जाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

             नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत करते हुए आयोजन की सफलता के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयोजन समिति, मीडिया एवं रायगढ़वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की कला-संस्कृति की विशिष्ट पहचान है और इसे और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।

    संस्कृति समाज की आत्मा और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति-कलेक्टर

            कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने समारोह में उपस्थित राज्यपाल, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और कला प्रेमियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, अधिकारी-कर्मचारियों, तकनीकी टीम, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों और कला प्रेमी नागरिकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। चक्रधर समारोह रायगढ़ की इसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से समारोह कला और संस्कृति के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगा।

                इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, सभापति डिग्री लाल साहू, गुरूपाल भल्ला, श्रीकांत सोमावार, सुभाष पाण्डेय, विकास केडिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, सहायक कलेक्टर गोकुल आर.के, सहित अन्य गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, कला-संस्कृति से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

    गणेश वंदना से हुई 41 वें चक्रधर समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत

    वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने दी मनमोहक प्रस्तुति

              सुर-ताल, छंद और घुंघरुओं की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 की पहली शाम का शुभारंभ रामलीला मैदान में गणेश वंदना के साथ हुआ। वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ने समारोह के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

              गणेश वंदना के बाद कलाकारों ने गायन और वादन की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रस्तुति में श्रीमती प्रियंका साहू ने हारमोनियम पर संगत की। कुमारी सुनीता तिवारी, कुमारी ईश्वरी गुप्ता, कुमारी शुभांगी साहू, चवल कुमार पटेल, वेदप्रकाश आदित्य और बसंत यादव ने गायन की प्रस्तुति दी। वाद्य संगीत में देवलाल देवांगन ने पखावज, शान्तनु पटेल ने तबला, किशोर बारीक ने बाँसुरी तथा कुमारी शगुफ्ता बानो ने वायलिन वादन किया। आनन्ददास महंत ने घुंघरू वादन के माध्यम से प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया।

              कार्यक्रम का निर्देशन श्रीमती प्रियंका साहू ने किया, जबकि सुरेश कुमार चन्देल संयोजक रहे। कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुतियों ने समारोह की पहली शाम को सुर और ताल से यादगार बना दिया। रामलीला मैदान में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

  • यूपी के जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों को मिलेंगे आधुनिक हथियार और पीआरडी जवानों का बढ़ेगा भत्ता

    यूपी के जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों को मिलेंगे आधुनिक हथियार और पीआरडी जवानों का बढ़ेगा भत्ता

    लखनऊ
     यूपी में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर जल्द नई सब-मशीनगन से लैस होंगे। शासन ने माननीयों के सुरक्षाकर्मियों को नए असलहे उपलब्ध कराने के लिए 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गृह विभाग ने इसका आदेश जारी किया है।

    जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों के लिए नाइन एमएम की 800 सब-मशीनगन और 2.56 लाख कारतूस खरीदे जाएंगे। एक सब-मशीनगन की कीमत 60 हजार रुपये होगी। पुलिस मुख्यालय से शासन को भेजी गई एक रिपोर्ट के बाद अयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित हाईकोर्ट, लोकभवन और मेट्रो स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्नाइपरों की तैनाती की जाएगी। शासन ने तीन स्नाइपर राइफल खरीदने की भी वित्तीय स्वीकृति दी है। एक रायफल की कीमत 10.76 लाख रुपये होगी।

    महिला वाहिनियों के लिए पिस्टल और असाल्ट राइफल
    इसके अलावा पीएसी की नवगठित महिला वाहिनियों को स्वचलित असलहे दिए जाएंगे। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत पीएसी की तीन महिला वाहिनियों के लिए 373 पिस्टल और 90 असाल्ट राइफल खरीदी जाएंगी।

    पीआरडी जवानों का बढ़ेगा ड्यूटी भत्ता
    उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इसमें प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता रोजाना 500 से 600 करना शामिल है। इसके अलावा कैशलेस इलाज की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। जिसकी संख्या 27 हजार से अधिक बताई जा रही है।

    चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है सरकार
    योगी सरकार पीआरडी जवानों का चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है। 8 मार्च 2019 को 250 से बढ़ाकर 375 रुपये रोजाना किया गया था। इसके बाद 6 जनवरी 2022 को इसे बढ़ाकर 395 रुपये कर दिया गया। 15 अप्रैल 2025 को इसे 500 रुपये कर दिया गया। अब इसमें 100 रुपये और बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
    इसके अलावा वाहनों की फिटनेस के लिए नई नीति, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और चित्रकूट एक्सप्रेस का संशोधित प्रस्ताव सहित अन्य शामिल है। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर करने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है। अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पालीक्लीनिकों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण सेंट्रल कमांड भारत सरकार को मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव है।

    स्कूल को दिए जाएंगे दो-दो लाख रुपये
    बेसिक शिक्षा विभाग के 14 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए आईसीटी लैब के लिए 300 करोड़ रुपये धनराशि देने संबंधी प्रस्ताव भी है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।

  • शहडोल से BJP सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का तलाक, आपसी सहमति से हुए अलग

    शहडोल से BJP सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का तलाक, आपसी सहमति से हुए अलग

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी से विवाह विच्छेद हो गया। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति से तीन सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की है।

    उनकी शादी 23 नवंबर 2017 को हुई थी। 20 जून 2019 को बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। दोनों पांच मई 2021 से अलग रह रहे थे।

    बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और वैवाहिक खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री की होगी। उन्होंने मरावी से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगा है। बता दें कि कोर्ट ने दोनों को छह महीने का समय दिया था। दोनों ने कोर्ट को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है।

    परिवार की परंपरागत सीट, केंद्रीय मंत्री रहे पिता 38 वर्षीय हिमाद्री सिंह 2019 से लगातार सांसद हैं। उनके पिता दलबीर सिंह परस्ते भी इसी सीट से 1980, 1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए और केंद्रीय मंत्री भी बने। मां राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधानसभा और 2009 में लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं।

    दिलचस्प संयोग यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में राजेश नंदिनी ने भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी को 13 हजार 415 वोटों से हराया था। पिता के निधन के बाद हिमाद्री ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के ज्ञान सिंह से हार गईं।

    23 नवंबर 2017 को हिमाद्री और नरेंद्र का विवाह हुआ। इसके बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 20 मार्च 2019 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।

  • भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मुकाबला आज 15 सितंबर को दिल्ली में खेला जाएगा

    भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मुकाबला आज 15 सितंबर को दिल्ली में खेला जाएगा

    नई दिल्ली
    पहले मैच में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज का आगाज किया। अरुण जेटली स्टेडियम में मेजबान अफगानिस्तान भारतीय टीम को टक्कर भी नहीं दे पाया। यह टी20 सीरीज तीन मैचों की है। दूसरे मैच को अपने नाम करके भारतीय टीम सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेगी। भारत टी20 का विश्व चैंपियन है लेकिन अफगानिस्तान को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मैच कब खेला जाएगा?
    भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मुकाबला 15 सितंबर (मंगलवार) को खेला जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच कहां खेला जाएगा?
    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में ही खेला जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की शुरुआत कितने बजे से होगी?
    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच शाम 7 बजकर 30 बजे शुरू हो जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 का लाइव टेलीकास्ट कहां देखें?
    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगी।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं?
    भारत और अफगानिस्तान दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग देखने के लिए फैंस फैनकोड ऐप पर जा सकते हैं।

    इस प्रकार हैं दोनों टीमों का स्क्वाड
    भारत: संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वैभव सूर्यवंशी, वाशिंगटन सुंदर, यश ठाकुर, रवि बिश्नोई।

    अफगानिस्तान: रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), इब्राहिम जादरान (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, गुलबदीन नैब, दरविश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, मोहम्मद नबी, राशिद खान, नूर अहमद, मुजीब उर रहमान, फजलहक फारूकी, नवीन-उल-हक, नांगेयालिया खरोती, अब्दुल्ला अहमदजई, नूर उल रहमान।

     

  • केतु गोचर से 6 राशियों की चमकेगी किस्मत, 90 दिनों तक धन-करियर में मिलेंगे बड़े लाभ

    केतु गोचर से 6 राशियों की चमकेगी किस्मत, 90 दिनों तक धन-करियर में मिलेंगे बड़े लाभ

     वैदिक ज्योतिष में केतु को एक छाया, रहस्यमयी और शोध-अध्यात्म का कारक ग्रह माना जाता है. यद्यपि केतु को सामान्यतः क्रूर ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन जब यह शुभ स्थिति में गोचर करता है, तो जातक को अचानक धन लाभ, मानसिक स्पष्टता और बड़ी व्यावसायिक सफलता प्रदान करता है. हाल ही में केतु का सिंह राशि में प्रवेश हुआ है, और आने वाले 90 दिनों तक केतु इसी स्थिति में विराजमान रहकर कई राशियों के जीवन में सकारात्मक हलचल मचाने वाले हैं.

    सूर्य के स्वामित्व वाली सिंह राशि में केतु का यह प्रभाव कुछ राशियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा. अचानक रुक-रुक कर बन रहे काम रफ्तार पकड़ेंगे और आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी. आइए जानते हैं कि केतु के इस गोचर से किन 6 राशियों को अगले तीन महीनों तक बंपर लाभ मिलने जा रहा है:

    मेष राशि: अचानक धन लाभ और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि
    मेष राशि के जातकों के लिए केतु का यह गोचर अत्यंत शुभ रहने वाला है. आपके पांचवें भाव से जुड़ा प्रभाव मिलने से शोध, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और शेयर बाजार या लॉटरी जैसे अप्रत्याशित स्रोतों से अचानक धन लाभ के योग बनेंगे.

    मिथुन राशि: पराक्रम में वृद्धि और करियर में बड़ी छलांग
    केतु का यह गोचर आपके तीसरे भाव में होने से आपके साहस और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में आपके विरोधी शांत रहेंगे और आपकी रणनीतियां सटीक बैठेंगी. यदि आप नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या नौकरी बदलना चाहते हैं, तो अगले 90 दिन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर लेकर आ रहे हैं.

    सिंह राशि: व्यक्तित्व में निखार और नेतृत्व क्षमता का विकास
    चूंकि केतु आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में गोचर कर रहे हैं, इसलिए यह समय आपके आत्म-विश्लेषण और अध्यात्म की दिशा में एक नया मोड़ लाएगा. आपकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी. हालांकि आपको सेहत को लेकर थोड़ा सतर्क रहना होगा, लेकिन करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के मामले में आपको जबरदस्त बढ़त मिलेगी.

    तुला राशि: आय के नए स्रोत और इच्छाओं की पूर्ति
    ग्यारहवें (लाभ) भाव में केतु की उपस्थिति को ज्योतिष में बेहद शुभ माना गया है. तुला राशि वालों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा. आपकी जमा पूंजी में वृद्धि होगी और बड़े भाइयों या वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से आपके बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे. इच्छाओं की पूर्ति का यह स्वर्णिम काल साबित होगा.

    धनु राशि: भाग्योदय और आध्यात्मिक यात्राओं का योग
    धनु राशि के नौवें (भाग्य) भाव में केतु का गोचर आपके सोए हुए भाग्य को जगाने का काम करेगा. धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी. लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित होंगी. जो लोग विदेश जाकर पढ़ाई या नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल होंगी.

    कुंभ राशि: व्यापार में विस्तार और पार्टनरशिप से फायदा
    सातवें भाव पर केतु का प्रभाव आपके व्यापारिक रिश्तों में एक नई दिशा देगा. पुराने मतभेद सुलझेंगे और बिजनेस में नए सौदे तय होंगे. जो लोग आयात-निर्यात या विदेशी कंपनियों से जुड़कर काम करते हैं, उन्हें उम्मीद से ज्यादा मुनाफा होगा. जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बिठाकर चलने से पारिवारिक जीवन भी सुखद रहेगा.