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  • ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां, 3 हजार से ज्यादा उत्पादों को मिलेगा बाजार

    ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां, 3 हजार से ज्यादा उत्पादों को मिलेगा बाजार

    अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां

    अब गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे तीन हजार से अधिक उत्पाद

    ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के जरिए मंगा सकेंगे स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद

    योगी सरकार में दीदियों को अब मिलेगी ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत

    543 प्रेरणा सरस स्टोर और स्थानीय उत्पादों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार

    लखनऊ
     प्रदेश की महिलाएं अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। वहीं 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत देने का रास्ता खुला है।

    अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे। जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर जहां स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बिक्री मंच दे रहे हैं, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी पहुंच गांव और जिले से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।

    छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा : अरुण कुमार

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंच उनकी उद्यमिता की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। योगी सरकार ने इस कड़ी को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया है। इससे समूहों को केवल उत्पाद तैयार करने के बजाय बाजार की मांग समझकर अपने छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है।

    स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा

    डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। खासकर किसी जिले या क्षेत्र विशेष की पहचान वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में यह व्यवस्था मददगार होगी।

    बाजार से जुड़ाव से बनेगी ब्रांड वैल्यू

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बनाने का अवसर भी है। प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपने उत्पादों की मांग समझने और उसी के अनुरूप उत्पादन व विपणन की दिशा तय करने का अवसर देता है। इससे समूहों की गतिविधियां केवल आजीविका तक सीमित न रहकर छोटे उद्यमों का रूप ले सकती हैं।

    लोकल हुनर की ग्लोबल उड़ान

    3,000 से अधिक उत्पादों के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन विपणन ग्रामीण महिला उद्यमिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करते हैं। गांव में तैयार उत्पाद अब गांव में ही बिकने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्टोर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की ग्रामीण ‘दीदियों’ के स्थानीय हुनर को बाजार, पहचान और ब्रांड वैल्यू देने के साथ उन्हें लोकल से ग्लोबल कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाने का नया रास्ता तैयार कर रही है।

  • मध्यांचल विद्युत निगम की समीक्षा में खुलासा, 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने एक बार भी नहीं भरा बिजली बिल

    मध्यांचल विद्युत निगम की समीक्षा में खुलासा, 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने एक बार भी नहीं भरा बिजली बिल

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिजली बिलों के बकाएदार हैं। मध्यांचल विद्युत निगम के अंतर्गत आने वाले जिलों में तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम की सितम्बर 2026 में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि करीब 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है। इन बकायेदारों में छह माह से लेकर 10 साल तक पुराने उपभोक्ता शामिल हैं, जिन पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी-भरकम बकाया है। अब इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी।

    विभाग की नौ सितम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकीपुरम 661, गोमतीनगर 145, अमौसी 8342, लखनऊ सेंट्रल जोन 40, सीतापुर जोन 3,35,962, रायबरेली जोन 1,12,073, अयोध्या जोन 3,66,298, देवीपाटन जोन 3,78,204, बरेली-एक जोन 1,14,749 और बरेली-दो जोन 2,48,726 है। यानि 15,65,200 बकायेदार है। विभाग द्वारा कई बकायेदारों को कुर्की के नोटिस जारी किये जा चुके हैं, फिर भी न तो उनसे वसूली हो सकी है और न ही उनके बिजली कनेक्शन काटे गए हैं।

    विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण निगम को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एमडी ने सभी संबंधित एक्सईएन और एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर वसूली की जाए। यदि बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके कनेक्शन काटने के साथ-साथ कुर्की की विधिक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।

    बिजली संकट को लेकर उपभोक्ता परिषद आक्रोशित
    वहीं, कोयले की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पहले से तैयारियों में बरती गई लापरवाही बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर साल सितंबर में बारिश और जलभराव जैसी स्थिति होती है। हालांकि, दिक्कत इस बार केवल इसलिए हुई क्योंकि पावर कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियां पूरी नहीं रखी थीं।

    उन्होंने कहा कि यूपी में 2000 से 3000 मेगावॉट बिजली की कमी पहले ही बनी हुई थी, लेकिन सोमवार को यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक लंबे समय के लिए बंद हुईं और मशीनों की वजह से यह कमी 5340 मेगावॉट हो गई है। ओबरा-सी की यूनिट-1 व यूनिट-2, मेजा यूनिट-1 और हरदुआगंज की यूनिट-9 से उत्पादन नहीं हो रहा है।

    इसके अलावा रोजा यूनिट-2, अनपरा यूनिट-7, घाटमपुर यूनिट-1, हरदुआगंज एक्सटेंशन-2 की यूनिट-1 और जवाहरपुर यूनिट-2 भी बंद है। यह कोयले की उपलब्धता में कमी के बजाय प्रबंधन में की गई चूक का नतीजा है। सितंबर 2025 में प्रदेश ने 30,255 मेगावॉट अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस साल सितंबर में आपूर्ति करीब 25,000-26,000 मेगावॉट के आसपास बनी है, जबकि जरूरत 27,000-29,000 मेगावॉट है।

  • सहजन की फली वाली दाल बनाने के लिए प्याज, टमाटर और मसालों के साथ लगाएं तड़का

    सहजन की फली वाली दाल बनाने के लिए प्याज, टमाटर और मसालों के साथ लगाएं तड़का

    दाल भारतीय खाने का अहम हिस्सा है. आमतौर पर लोग अरहर, मूंग, मसूर या चना दाल को अलग-अलग तरीकों से बनाकर खाते हैं. लेकिन आप रोज की एक जैसी दाल से बोर हो गए हैं और कुछ अलग व टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं तो सहजन की फली वाली दाल बना सकते हैं. सहजन की फली वाली दाल स्वाद में काफी अलग और टेस्टी लगती है. इसे बनाने के लिए प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और कुछ मसालों का इस्तेमाल किया जाता है जो दाल का स्वाद और भी बढ़ा देते हैं.

    वहीं, ऊपर से लगाया गया लहसुन, जीरा और सूखी लाल मिर्च का तड़का इसे एक अलग फ्लेवर देता है. खास बात यह है कि इसे आप घर में मौजूद  चीजों से आसानी से तैयार कर सकते हैं. इसे गरमागरम चावल, रोटी या पराठे के साथ सर्व किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं सहजन की फली वाली दाल बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी और इसे घर पर बनाने का आसान तरीका क्या है.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    2 बड़े चम्मच तेल
    1 छोटी चम्मच जीरा
    1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ लहसुन
    आधा बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ अदरक
    2 प्याज, बारीक कटे हुए
    1 छोटी चम्मच बारीक कटी हुई हरी मिर्च
    2 टमाटर, बारीक कटे हुए
    1 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    आधा छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
    1 छोटी चम्मच धनिया पाउडर
    आधा छोटी चम्मच जीरा पाउडर
    आधा कप मूंग दाल, भिगोई हुई
    आधा कप मसूर दाल, भिगोई हुई
    2 से 3 सहजन की फलियां
    आधा बड़ा चम्मच नमक
    पानी, जरूरत के अनुसार

    तड़के के लिए
    थोड़ा तेल या घी
    1 छोटी चम्मच जीरा
    1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ लहसुन
    2 सूखी लाल मिर्च
    आधी छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर

    सहजन की फली वाली दाल बनाएं कैसे?

    • सबसे पहले मूंग और मसूर दाल को पानी में कुछ देर के लिए भिगो दें. लहसुन, अदरक, प्याज, हरी मिर्च और टमाटर को बारीक काट लें. सहजन की फलियों को अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें.
    • अब एक कड़ाही या पैन में तेल गर्म करें और उसमें जीरा डालें. जीरा चटकने लगे तो कटा हुआ लहसुन और अदरक डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. इसके बाद प्याज डालें और नरम होने तक पकाएं. हरी मिर्च और कटे हुए टमाटर डालकर तब तक पकाएं, जब तक टमाटर अच्छी तरह गल न जाएं.
    • अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और जीरा पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद भीगी हुई मूंग और मसूर दाल डालें और मसालों के साथ अच्छी तरह मिला लें.
    • अब दाल को ढकने जितना पानी और नमक डालें. तेज आंच पर एक उबाल आने दें. इसके बाद आंच धीमी कर दें और दाल को तब तक पकाएं, जब तक वह नरम होकर अच्छी तरह पक न जाए.
    • जब दाल लगभग पक जाए, तब इसमें कटी हुई सहजन की फलियां डालें. इन्हें ज्यादा न पकाएं, ताकि फलियां अपना आकार बनाए रखें और पूरी तरह गलकर दाल में न मिल जाएं. जरूरत लगे तो थोड़ा पानी डालकर कुछ देर और पकाएं.
    • दाल को एक खास स्वाद देने के लिए आखिर में तड़का लगाएं. इसके लिए एक छोटे पैन में थोड़ा तेल या घी गर्म करें. इसमें जीरा डालें. जीरा चटकने लगे तो कटा हुआ लहसुन और सूखी लाल मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें. आखिर में लाल मिर्च पाउडर डालकर तुरंत गैस बंद कर दें.
    • अब इस तड़के को तैयार दाल के ऊपर डालें और अच्छी तरह मिला दें. गरमागरम सहजन की फली वाली दाल को चावल या रोटी के साथ सर्व करें.

    इन बातों का रखें ध्यान
    सहजन की फलियों को दाल में डालने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है. साथ ही, इन्हें इतना ही पकाएं कि वे नरम हो जाएं लेकिन पूरी तरह गलें नहीं. इससे दाल का स्वाद और टेक्सचर बेहतर रहेगा.

  • जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

    जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए योगी सरकार ने नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी और संवेदनशील इलाकों में पहले से आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि वाराणसी सहित प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर वहां नालों, सीवर लाइनों और पम्पिंग स्टेशनों की स्थिति की पहले से समीक्षा की जाए। जहां कहीं भी जल निकासी की व्यवस्था में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। अधिकारी संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी रखें।

    नगर विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की ओर से अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन और दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर, सुगम और सुरक्षित नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    एके शर्मा ने कहा कि वाराणसी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में जल निकासी, सीवर और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। जलभराव के तत्काल समाधान के साथ इसके स्थायी निराकरण के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता आमजन को राहत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। वाराणसी में हुई कार्रवाई इसी जवाबदेही का संदेश है कि जनहित के कार्यों में जिम्मेदारी से समझौता करने वालों के खिलाफ शासन सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

  • योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया।

    नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया।

    जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार
    नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।

    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन
    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा।

    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग
    यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है।

    सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है।

    बॉक्स
    नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी
    यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • बिना सहमति कर्मचारी को जगदलपुर से बिलासपुर भेजा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रतिनियुक्ति आदेश पर लगाई रोक

    बिना सहमति कर्मचारी को जगदलपुर से बिलासपुर भेजा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रतिनियुक्ति आदेश पर लगाई रोक

    बिलासपुर
     जगदलपुर नगर निगम के एक कर्मचारी को उसकी सहमति लिए बिना बिलासपुर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जिसके तहत कर्मचारी को नगर निगम जगदलपुर से नगर निगम बिलासपुर भेजा गया था।

    यह मामला गोविंदनारायण सिंह विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य का है। सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चौहान, शासन की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा तथा प्रतिवादी क्रमांक दो और तीन की ओर से अधिवक्ता ए.एस. कछवाहा उपस्थित हुए।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58(5) और 58(6) में एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में सुरक्षा प्रावधान हैं। सामान्यतः प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित कर्मचारी की सहमति आवश्यक होती है।

    अंतरिम व्यवस्था के तहत रोक
    शासन ने इसका विरोध करते हुए धारा 58(5) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करने से पहले कर्मचारी की सहमति लेना अनिवार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।

    हालांकि, कोर्ट ने धारा 58(5) और 58(6) की व्याख्या पर कोई अंतिम राय नहीं दी। अंतरिम व्यवस्था के तहत, कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के प्रतिनियुक्ति आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। 

  • MP कैबिनेट में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर विरोध, CS बोले- एक महीने में कराएं; CM ने दिए पटवारियों को समझाने के निर्देश

    MP कैबिनेट में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर विरोध, CS बोले- एक महीने में कराएं; CM ने दिए पटवारियों को समझाने के निर्देश

    भोपाल

     मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल समूह की अहम बैठक मंगलवार को दोपहर में मंत्रालय में हुई, जिसमें कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इसमें सबसे अहम सरकारी बसों को पुनः चालू करने के फैसले पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कई अहम प्रस्तावों पास किए गए।

    मोहन कैबिनेट की अहम बैठक की जानकारी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मीडिया को दी। पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में 25 सितंबर 2026 से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा के बारे में अहम चर्चा हुई। इसी दिन इस सेवा का शुभारंभ होगा। सुगम परिवहन बस सेवा अंतर्गत लगभग 150 सिटी रूट तय किए गए हैं, 450 इंटरसिटी रूट और 436 अंतर्राज्यीय रूटों पर यह बस सेवा शुरू होगी।

    पटेल ने आगे बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रारंभ की गई स्वामित्व योजना को मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नई गति दी जा रही है। पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर 17 सितंबर को इंदौर से ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना’ का शुभारंभ किया जाएगा। पटेल ने बताया कि डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा के दौरान लगभग 53 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।

    मोहन यादव कैबिनेट की बैठक में स्वामित्व योजना के हितग्राहियों की मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर पटवारियों के विरोध का मुद्दा उठा। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने रजिस्ट्री की समय-सीमा चार-पांच महीने के बजाय एक महीने में पूरी कराने की बात कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर सहमति जताई। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि कलेक्टर पटवारियों को समझाएं कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। शासन स्तर से यह काम कराया जा रहा है, इसलिए पटवारी इसमें नहीं उलझेंगे। उन्होंने रजिस्ट्री का काम प्राथमिकता से कराने के निर्देश देने को कहा।

    प्रदेश में 17 सितंबर से स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री शुरू होनी है। पटवारी रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में अपना नाम दर्ज किए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ड्रोन सर्वे या आबादी रिकॉर्ड में गलती होने पर रजिस्ट्री की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। पटवारियों ने डीड ऑफ कन्वेयंस की भूमिका दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है। इसे लेकर जिलों में विरोध शुरू हो गया है।

    पहले पटवारियों और रजिस्ट्री की पावर रखने वाले अफसरों को एक दिन में 40 रजिस्ट्री करने का टारगेट दिया गया था। अब इसे बढ़ाया जाएगा। इसी बीच कैबिनेट बैठक में मुख्य सचिव ने रजिस्ट्री की समय-सीमा पांच महीने से घटाकर एक महीने करने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति दी।

    रेल परियोजना के लिए जताई खुशी
    पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के अंतर्गत जोबट-टांडा रोड रेलखंड के लोकार्पण से धार का गुजरात से सीधा रेल संपर्क स्थापित होने पर पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही क्रिकेट, हॉकी सहित विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय टीमों और उनमें शामिल मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों को मंत्रीपरिषद ने हार्दिक बधाई दी है।

    7500 से अधिक छात्रों को मिलेगी स्कूटी
    मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री ई-स्कूटी योजना पकी भी जानकारी दी। पटेल के मुताबिक 19 सितंबर को सीएम मोहन यादव मुख्यमंत्री ई-स्कूटी योजना के अंतर्गत कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रं को ई-स्कूटी प्रदान करेंगे। इस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 7500 से अधिक छात्रों को लाभ मिलने वाला है। पटेल ने बताया कि इसके अलावा मंत्रिमंडल समूह ने मध्य प्रदेश के विकास, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण एवं जनकल्याण के लिए लगभग ₹42,490 करोड़ की स्वीकृति दी गई।

    50 लाख रिकॉर्ड की होगी मुफ्त रजिस्ट्री मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन योजना के तहत 17 सितंबर से काम शुरू होगा। इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इसकी शुरुआत करेंगे। योजना पर सरकार करीब 4 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

    उन्होंने बताया कि स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क से ग्रामीणों को छूट दी गई है। योजना के तहत 68 लाख रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 50 लाख रिकॉर्ड की मुफ्त रजिस्ट्री कराकर दी जाएगी। इसके बाद ग्रामीण आबादी को भूमि और भवन के अधिकार मिलेंगे। इससे बैंकों से लोन लेने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और संपत्ति का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में आसानी होगी।

    25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा

    कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा की जानकारी दी। मंत्री पटेल ने बताया कि इसका शुभारंभ 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर होगा। इसके तहत करीब 150 सिटी रूट, 450 इंटरसिटी और 436 अंतर्राज्यीय रूट विकसित किए जाएंगे।

    यह बस सेवा 21 साल से ठप थी, जिसे फिर शुरू करने का फैसला सरकार ने लिया है। वर्ष 2030 तक 75 प्रतिशत विकासखंडों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    ₹42,490 करोड़ के काम 2031 तक जारी रहेंगे

    मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने ₹42,490 करोड़ के कार्यों को वर्ष 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया है।

    इसमें ₹13,000 करोड़ से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। बैठक में स्कूलों के उन्नयन के साथ उनके लिए पद स्वीकृत करने सहित अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

    आदिवासी शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान जनजातीय कार्य विभाग के प्रस्ताव पर वर्ष 1973-74 से 1997-98 तक नियुक्त उप शिक्षक, उपशाला शिक्षक, प्रशिक्षण शिक्षक, कनिष्ठ बोर्ड से चयनित शिक्षक, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना के तहत नियुक्त शिक्षक और सहायक शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान देने को मंजूरी दी गई। इसके साथ एरियर राशि के भुगतान को भी स्वीकृति दी गई।

    चार हाई स्कूलों के पद स्वीकृत जनजातीय कार्य विभाग के प्रस्ताव पर वर्ष 2016-17 में माध्यमिक शालाओं के उन्नयन के तहत चार हाई स्कूलों के पदों की स्थिति तय करने को मंजूरी दी गई।

    दो सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने की मंजूरी जल संसाधन विभाग के प्रस्ताव पर चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना को लगातार जारी रखने और गोंड वृहद सिंचाई परियोजना को वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई। ये परियोजनाएं ₹13,000 करोड़ से अधिक की सिंचाई परियोजनाओं में शामिल हैं।

    न्यायिक अधिकारियों के उपकरणों की नीति में संशोधन न्यायिक सेवा के अधिकारियों को लैपटॉप, कंप्यूटर और प्रिंटर उपलब्ध कराने से संबंधित नीति में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

    लाड़ली बहनों को ₹250 अतिरिक्त देने का अनुमोदन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं को दी गई ₹250 की अतिरिक्त सहायता से संबंधित कार्रवाई का अनुमोदन किया गया।

    एमएसपी उपार्जन के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत खाद्यान्न उपार्जन के लिए निर्धारित ऋण सीमा के पुनर्भुगतान के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

    अशासकीय विधि महाविद्यालयों के स्टाफ को UGC का सातवां वेतनमान राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त अशासकीय विधि महाविद्यालयों में कार्यरत प्राचार्य, प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी और ग्रंथपाल को UGC का सातवां वेतनमान देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

  • खेती में नवाचार की नई कहानी लिख रहे हैं दमोह जिले के किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    खेती में नवाचार की नई कहानी लिख रहे हैं दमोह जिले के किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    खेती में नवाचार की नई कहानी लिख रहे हैं दमोह जिले के किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना ही सरकार का लक्ष्य
    न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान एवं ज्वार-बाजरा के उपार्जन के लिए पंजीयन शुरू
    10 अक्टूबर तक होगा किसान पंजीयन
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से वीसी से किया आत्मीय संवाद

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दमोह जिले ने बीते कुछ वर्षों में खेती-किसानी में एक अलग ही पहचान बना ली है। बुंदेलखंड की वीरभूमि, धर्म, संस्कृति और आस्था की धरती को नमन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां से मोह न छूटे, वो अपना दमोह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। खेत से लेकर बाज़ार तक और खाद से लेकर किसानों के खातों तक हम पक्की और स्थायी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने परिश्रम से उत्पादित अनाज का एक-एक दाना हमारे लिए भगवान के प्रसाद समान है। हमारे लिए अन्न का दाना-दाना अनमोल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान और ज्वार-बाजरा के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन मंगलवार, 15 सितम्बर से प्रारंभ हो गया है। यह काम 10 अक्टूबर तक चलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार तथा अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई ने मंत्रालय में हुई वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले के किसानों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि हमारी सरकार अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। हर सुख-दुख में हम सब हमेशा किसानों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण, नई तकनीक, नवाचार, उद्यानिकी, प्राकृतिक-जैविक खेती तथा गौपालन सहित अन्य दुधारू पशुओं का पालन एवं मछली पालन व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में लगभग 6 लाख 72 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में खेती हो रही है। इसमें से 86 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित है। दमोह का चना देशभर में प्रसिद्ध है। खाद्य प्रसंस्करण तथा एग्रो प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी इस जिले में नई-नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। किसान गेहूं, चना और धान के साथ ही हाई-वैल्यू क्रॉप की ओर भी बढ़ रहे हैं। दमोह जिले में अश्वगंधा की खेती के प्रोत्साहन के लिए 100 से अधिक किसानों को निःशुल्क बीज एवं कृषि प्रशिक्षण दिया गया है। दमोह जिले में अगले खरीफ सीजन में मखाने का उत्पादन भी नवाचार के रूप में शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में पशुपालन को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है‌यहां बीते एक साल में 9 नई दुग्ध सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में जिले के 65 गांवों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना में जिले में 14 स्वच्छ फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना दमोह जिले के लिए वरदान बनने जा रही है। उन्होंने बताया कि तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपए से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना से दमोह जिले के 17 से अधिक गांवों की करीब 3 हजार 600 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। सतधरु मध्यम सिंचाई परियोजना, पारना जलाशय निर्माण और दादपुर स्टाप डेम का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हमारी सरकार ने दमोह जिले की सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाकर अब 1.35 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य लिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी 7 विकासखंडों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती हाट बाजार शुरू किए गए हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने प्रदेश के किसानों की सुविधा के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के ऑनलाईन पोर्टल शुरू किया है। किसान भाई अब एक क्लिक में अपना क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले के प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे प्रगतिशील किसान खम्मन सिंह लोधी, समीर कुमार अहिरवाल, राम कुरेरिया एवं अन्य किसानों से भी आत्मीय संवाद कर उनकी खेती-किसानी की जानकारी ली।

    दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को स्थानीय लोकसभा सांसद राहुल सिंह लोधी, वरिष्ठ विधायक जयंत मलैया एवं विधायक श्रीमती उमादेवी खटीक ने भी संबोधित किया। इस अवसर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटेल, कपिल यार्दे, गोपाल पटेल, कप्तान सिंह यादव, श्याम शिवहरे, अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

     

  • देश-दुनिया के गोल्फ मानचित्र पर नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    देश-दुनिया के गोल्फ मानचित्र पर नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    देश-दुनिया के गोल्फ मानचित्र पर नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री ने किया ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ की ट्रॉफी का अनावरण, गोल्फ में हाथ आजमाकर बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह

    देश-विदेश के 132 प्रोफेशनल गोल्फर ले रहे हिस्सा, 18 विदेशी खिलाड़ी भी दिखाएंगे अपना कौशल

    मुख्यमंत्री ने कहा – नवा रायपुर ओपन बनेगा छत्तीसगढ़ की नई पहचान, गोल्फ को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार देगी हरसंभव सहयोग

    1983 विश्वकप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एवं पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ आयोजन

    दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता की तरह भविष्य में प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन बनेगा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए खिलाड़ियों का किया आत्मीय स्वागत, बस्तर और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता देखने का दिया न्योता

    रायपुर 
     छत्तीसगढ़ तेजी से देश के उभरते स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं के विस्तार, प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित खेल आयोजनों की मेजबानी से छत्तीसगढ़ की खेल संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है। अब प्रोफेशनल गोल्फ के बड़े टूर्नामेंट का नवा रायपुर में आयोजन इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब रिजॉर्ट में प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनेगा और नवा रायपुर को देश-दुनिया के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रतियोगिता की आकर्षक ट्रॉफी का अनावरण किया तथा देश-विदेश से आए प्रोफेशनल गोल्फ खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर 1983 क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम के कप्तान एवं प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कपिल देव की विशेष उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

    मुख्यमंत्री ने गोल्फ कोर्स पर स्वयं गोल्फ में हाथ आजमाया और शानदार शॉट लगाकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री को गोल्फ खेलते देखकर उपस्थित खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और अतिथियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    132 प्रोफेशनल खिलाड़ियों की भागीदारी छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह प्रदेश के लिए प्रसन्नता और गौरव का विषय है कि नवा रायपुर में देश के प्रोफेशनल गोल्फ का इतना प्रतिष्ठित आयोजन हो रहा है। प्रतियोगिता में देश-विदेश के 132 प्रोफेशनल खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर देश और दुनिया के श्रेष्ठ गोल्फ खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ आना प्रदेश में खेलों के लिए विकसित हो रहे अनुकूल वातावरण का परिचायक है।

    उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का प्रभाव केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं रहता। इससे प्रदेश की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होती है, खेल पर्यटन को प्रोत्साहन मिलता है और स्थानीय युवाओं को विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को करीब से देखने एवं उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ में विभिन्न खेलों के बड़े आयोजन लगातार हों और प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो।

    पहले फिल्मों में देखते थे गोल्फ, आज छत्तीसगढ़ कर रहा बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी

    मुख्यमंत्री साय ने गोल्फ से जुड़ी अपनी स्मृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय था, जब हम गोल्फ के बारे में केवल सुना करते थे या फिल्मों में लोगों को गोल्फ खेलते देखते थे। आज बदलते छत्तीसगढ़ में हम स्वयं प्रोफेशनल गोल्फ के इतने बड़े आयोजन की मेजबानी कर रहे हैं। यह प्रदेश के विकास के साथ यहां तेजी से विस्तार ले रही खेल संस्कृति का सुखद संकेत है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गोल्फ को सामान्यतः उद्योगपतियों और संपन्न वर्ग से जुड़ा खेल माना जाता था, लेकिन समय के साथ इस खेल का दायरा बढ़ा है और बड़ी संख्या में नए खिलाड़ी इससे जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी गोल्फ की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। राज्य सरकार गोल्फ को प्रोत्साहित करने, इसके लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार और प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं के आयोजन में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

    खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभाओं को मिल रहे नए अवसर

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को युवाओं के व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रदेश की पहचान से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों में शामिल भव्य क्रिकेट स्टेडियम मौजूद है और विभिन्न खेल विधाओं के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन लगातार हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन को बजट में शामिल किया है। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के आगे बढ़ने में संसाधनों और अवसरों की कमी बाधा नहीं बनेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खेलों के प्रति व्यापक वातावरण तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में नेशनल ट्राइबल गेम्स का सफल आयोजन हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 2500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसी प्रकार बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसे अभिनव आयोजनों ने दूरस्थ अंचलों के हजारों बच्चों और युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का बड़ा मंच प्रदान किया है।

    बस्तर में शांति और विकास के साथ युवाओं के सपनों को मिल रही नई उड़ान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। आज बस्तर शांति, विश्वास, विकास और नई संभावनाओं की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक में युवाओं की व्यापक भागीदारी इस सकारात्मक बदलाव की सशक्त अभिव्यक्ति है। जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा और नक्सलवाद के कारण जाना जाता था, वहां आज खेल के मैदानों में युवा अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह बदलते बस्तर और बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में क्रिकेट, हॉकी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स सहित अनेक खेल विधाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब प्रोफेशनल गोल्फ के बड़े आयोजनों का सिलसिला प्रदेश की खेल यात्रा को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

    गोल्फ के साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को भी जानें – मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री साय ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे देश-विदेश के खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों को देखने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जब यहां से लौटें तो अपने साथ केवल टूर्नामेंट की यादें ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोगों के आत्मीय आतिथ्य और यहां की खूबसूरत स्मृतियां भी लेकर जाएं।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को अनुपम सौंदर्य से समृद्ध किया है। बस्तर का प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, जिसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है, सहित अनेक जलप्रपात, वन क्षेत्र और प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसी तरह सरगुजा भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों, वनों और विशिष्ट संस्कृति के लिए जाना जाता है। उन्होंने खिलाड़ियों से प्रतियोगिता के साथ समय निकालकर छत्तीसगढ़ को करीब से जानने और यहां के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ के आयोजन से जुड़े सभी प्रायोजकों, प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया की टीम तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों को धन्यवाद देते हुए प्रतियोगिता की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    हर वर्ष छत्तीसगढ़ में हो गोल्फ का बड़ा टूर्नामेंट : कपिल देव

    प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं 1983 विश्वकप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान कपिल देव ने ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ के आयोजन में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े प्रोफेशनल आयोजन किसी भी प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने और नई प्रतिभाओं को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कपिल देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में गोल्फ के साथ-साथ अन्य खेलों के विकास की भी व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि इस प्रतिष्ठित गोल्फ प्रतियोगिता का आयोजन छत्तीसगढ़ में प्रत्येक वर्ष हो और आने वाले वर्षों की तारीखें पहले से निर्धारित की जाएं। इससे देश-विदेश के प्रोफेशनल खिलाड़ी अपने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कैलेंडर के अनुरूप छत्तीसगढ़ आने की योजना बना सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का वातावरण गोल्फ के लिए बेहद अनुकूल है और यहां खिलाड़ियों को मिल रहा आत्मीय आतिथ्य इसकी एक विशेष पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार आज दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता गोल्फ के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में जाने जाते हैं, उसी तरह आने वाले समय में छत्तीसगढ़ भी देश के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।

    कपिल देव ने खेलों के प्रति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सकारात्मक सोच की सराहना करते हुए गोल्फ जैसे खेल को प्रोत्साहित करने और बड़े प्रोफेशनल टूर्नामेंट के आयोजन को सहयोग देने के लिए उनका विशेष रूप से धन्यवाद दिया।

    पीजीटीआई के सीईओ अमनदीप चहल ने कहा कि प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया की टीम जब भी छत्तीसगढ़ आती है, यहां उसका आत्मीय और भव्य स्वागत होता है। छत्तीसगढ़ में खेलने वाले खिलाड़ी यहां के वातावरण, गोल्फ कोर्स और व्यवस्थाओं से प्रभावित होकर दोबारा यहां आकर खेलने की इच्छा व्यक्त करते हैं।छत्तीसगढ़ को अब पर्यटन और अन्य खेलों के साथ-साथ एक उभरते हुए गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में भी पहचाना जाने लगा है।

    उल्लेखनीय है कि ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन 2026’ का आयोजन न केवल देश-विदेश के शीर्ष खिलाड़ियों को एक प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धात्मक मंच उपलब्ध करा रहा है, बल्कि नवा रायपुर और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय गोल्फ मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। राज्य में लगातार हो रहे बड़े खेल आयोजन, विकसित होती खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के लिए तैयार हो रहे नए अवसर छत्तीसगढ़ को आने वाले समय में देश के प्रमुख स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।

  • योगी सरकार की नीतियों से जेम पर बढ़ी यूपी के कारोबारियों की धमक, एक साल में 1 लाख से अधिक नए विक्रेता जुड़े

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    उद्यमिता, एमएसएमई विकास और कारोबारी सुगमता पर जोर के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भूमिका हो रही और अधिक मजबूत

    लखनऊ
     योगी सरकार की कारोबारी सुगमता, एमएसएमई प्रोत्साहन और स्थानीय उद्यमियों को सरकारी खरीद से जोड़ने की नीतियों का असर अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कारोबारियों की सरकारी खरीद व्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में जेम पर पंजीकृत कुल फर्मों की संख्या बढ़कर 7,86,687 पहुंच गई। यह 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,85,488 फर्मों के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। यानी एक साल में 1,01,199 नई फर्में जेम से जुड़ीं। सरकारी खरीद के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबारियों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश में छोटे उद्यमों, महिला उद्यमियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के कारोबार को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। आंकड़े बताते हैं कि कुल पंजीकरण के साथ-साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की भागीदारी में भी तेजी आई है।

    एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी बढ़ा

    जेम पर उत्तर प्रदेश की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) फर्मों का पंजीकरण 31 मार्च 2025 के 1,06,855 से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 1,23,075 हो गया। इस श्रेणी में 16,220 फर्मों की वृद्धि दर्ज की गई, जो 16 फीसदी है। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश के छोटे उद्यम सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध डिजिटल बाजार का अधिक लाभ उठा रहे हैं। योगी सरकार की एमएसएमई केंद्रित नीतियों के तहत छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने, कारोबार के अवसर बढ़ाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जेम पर पंजीकरण में यह बढ़ोतरी इसी दिशा में आगे बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

    महिला उद्यमियों की भागीदारी में 21 फीसदी उछाल

    सरकारी खरीद व्यवस्था में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को GeM पर कुल 19,418 महिला फर्म पंजीकृत थीं, जिनकी संख्या 31 मार्च 2026 को बढ़कर 23,407 हो गई। एक वर्ष में 3,989 महिला फर्मों का इजाफा हुआ। इस तरह महिला फर्म पंजीकरण में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर देती है।

    एससी-एसटी फर्मों का पंजीकरण 18 फीसदी बढ़ा

    जेम पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की फर्मों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2025 को 4,890 एससी/एसटी फर्म पंजीकृत थीं। 31 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,783 हो गई। इस श्रेणी में 893 फर्मों की बढ़ोतरी हुई, जो 18 फीसदी है। सरकारी खरीद के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन वर्गों की बढ़ती भागीदारी समावेशी कारोबारी अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे छोटे उद्यमों को सरकारी संस्थानों के लिए उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।

    स्टार्टअप फर्मों की संख्या 21 फीसदी बढ़ी

    प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बढ़ती सक्रियता भी GeM के आंकड़ों में दिखाई दे रही है। 31 मार्च 2025 को कुल 4,404 स्टार्टअप फर्में पंजीकृत थीं, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 5,350 हो गईं। एक वर्ष में 946 स्टार्टअप फर्मों का इजाफा हुआ। इस श्रेणी में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। स्टार्टअप फर्मों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि नए उद्यम सरकारी संस्थानों के लिए अपने नवाचार, तकनीकी समाधान और सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में निवेश, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के बीच यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है।

    सरकारी खरीद में स्थानीय कारोबारियों के लिए बढ़ते अवसर

    उत्तर प्रदेश में जेम के स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की क्रय नीति छोटे और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उत्तर प्रदेश जेम क्रय नीति-2024 छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हुई है। इस नीति के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ छोटे उद्यमियों को भी सरकारी खरीद में भागीदारी का बेहतर अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था की उपयोगिता अब व्यापक स्तर पर दिखाई दे रही है और देश के अन्य हिस्सों में भी इसे अपनाया जा रहा है। यह नीति स्पष्ट रूप से योगी सरकार की उस मंशा को दर्शाती है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ छोटे और स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर समान रूप से जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में कुल फर्मों के साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में विविध कारोबारी समूहों की भागीदारी बढ़ रही है। 

    एक नजर में जेम पर यूपी की बढ़ती भागीदारी

    श्रेणी| कुल विक्रेता-31 मार्च 2025| कुल विक्रेता-31 मार्च 2026| वृद्धि

    कुल पंजीकृत फर्म| 6,85,488| 7,86,687| 15%
    कुल एमएसई फर्म| 1,06,855| 1,23,075| 16%
    कुल महिला फर्म| 19,418| 23,407| 21%
    कुल एससी/एसटी फर्म| 4,890| 5,783| 18%
    कुल स्टार्टअप फर्म| 4,404| 5,350| 21%